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  • बृजमोहन स्वामी 'बैरागी'
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Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"आपकी ग़ज़ल पर क्या कहें सर जी... मुशायरा लूट लिया है आपने.. गमो की कोई किल्लत है? नही तो!ये क्या छोटी सहूलत है? नही तो! अगर ऐसा एक भी शेअर अपनी ज़िन्दगी में लिख पाया तो खुद को धन्य समझूंगा.. पूरी की पूरी ग़ज़ल सीधे दिल में उतर रही है जी"
3 hours ago
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ जी..नमस्कार बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है आपने...मतला बहुत अच्छा लगा.. और फ़िर ये शेअर रहें भूखे अगर माँ बाप बोलो सफ़ल कोई इबादत है? नही तो || वाह वाह..बहुत खूब...बधाई हो आपको"
8 hours ago
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"वाह सर जी मुशायरे की पहली ग़ज़ल और पहला ही शेअर लाजवाब , क्या शानदार मतले से शुरुआत हुई है..सभी अशआर ही लाजवाब हुए हैं.. जिसे महसूस कर पाये या समझे बस उतनी ही हक़ीक़त है? नहीं तो! वाह वाह क्या बात है..महशर का अर्थ बताइएगा सर जी"
8 hours ago
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"मिली क्या तुम को राहत है? नहीं तो वही पहली सी हालत है? नहीं तो ॥ सुना जो क्या हकीकत हैै? नहीं तो तो क्यों रुख़ पे नदामत हैै? नहीं तो ॥ सनम ने फेर ली हैं आज नज़रें ये क्या रोज़-ए-क्यामत हैैै? नहीं तो ॥ मेरी बातों से सहमत हो? जी बिल्कुल तो क्या मुझ…"
13 hours ago
Gurpreet Singh and MANINDER SINGH are now friends
yesterday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल (12122-12122-12122-12122)
"आदरणीय गुरप्रीत भाई , कठिन बहर पर बहुत अच्ज्छी गज़ल कही है .. आपने , हार्दिक बधाइयाँ । बाक़ी उचित सलाह  गुणि जन दे ही चुके हैं , खयाल की जियेगा ।"
Sunday
Gurpreet Singh and बृजमोहन स्वामी 'बैरागी' are now friends
Saturday
Gurpreet Singh commented on दिनेश कुमार 'दानिश''s blog post ग़ज़ल -- कभी जीत है कभी हार है ( दिनेश कुमार )
"आदरणीय दिनेश जी बहुत शानदार ग़ज़ल कही है आपने,,,और ये बह्र भी बहुत प्यारी लगी  मेरी धड़कनें भी हैं बह्र मेंमुझे शायरी का ख़ुमार हैवाकई आपकी ग़ज़लें इस बात का सुबूत हैं "बिसात-ए-दह्र" का अर्थ बताइएगा आदरणीय"
Apr 20
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल (12122-12122-12122-12122)
"भाई गुरप्रीत जी अच्छी ग़ज़ल के लिए दाद और मूबरकबाद, और आपकी ग़ज़ल के माध्यम से इतनी उचित चर्चा से मुझ जैसे लोगो को बहुत फायदा हुआ, सभी गुनी जनों का भी हृदय से आभार"
Apr 20
Gurpreet Singh commented on Gurpreet Singh's blog post तरही ग़ज़ल (212-212-212-212)
"जी आदरणीय सौरभ जी..बात अब कुछ कुछ समझ में आई है.. बहुत बहुत शुक्रिया आपका.."
Apr 19
Gurpreet Singh commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल (12122-12122-12122-12122)
"आदरणीया राजेश जी..आपने समय देकर ग़ज़ल पढ़ी और इस पर उत्साहवर्धक टिप्पणी की...आपका बहुत बहुतधन्यवाद....आपका सुझाया मतला भी बहुत अच्छा है.."
Apr 19
Gurpreet Singh commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल (12122-12122-12122-12122)
"धन्यवाद आदरणीय नीलेश जी... मैं जानता हूँ कि आपक कॉमेंट किसी एक मिसरे पर नहीँ था...मैने तो बस बात को अच्छी तरह समझने के लिए उदाहरण के तौर पर मिसरे को लिया था... जी हाँ सर जी...इस गाने कि धुन पर गुनगुनाने से कई जगह अटकाव पैदा हो रहा है...इसे दूर करने…"
Apr 19

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल (12122-12122-12122-12122)
"आद०  गुरप्रीत सिंह जी बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है बहुत बहुत बधाई आपको मिसरे में बहुत ज्यादा मात्रा गिराने से भी कई बार लय बिगड़ जाती है हालांकि आपके मिसरे सभी विधान के अनुसार सही हैं बस थोड़े शब्द इधर उधर करने से लय बेहतर हो जायेगी नीलेश भैया के कहने…"
Apr 19
Nilesh Shevgaonkar commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल (12122-12122-12122-12122)
"नहीं... किसी एक मिसरे पर नहीं था मेरा कमेंट ..... अपनी ग़ज़ल को फिल्म गुलामी के सुनाई देती है जिस की धडकन की धुन पर बिना अटके गुनगुनाइये ..जहाँ अटकाव हो वहाँ तरमीम कीजिये ....अपने आप लय सध जायेगी झील उछल न जाये को उबल न जाये कर…"
Apr 19

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Gurpreet Singh's blog post तरही ग़ज़ल (212-212-212-212)
"आप ओबीओ पर बने रहें आदरणीय गुरप्रीत जी, समयानुसार आप बहुत कुछ सीखते जायेंगे. इस पटल पर ऐसी ही सभी सीखते हैं.  आपकी कोशिश क़ामयाब हुई है. और आपकी लगन का स्वागत है.  और देखिए, आ० नीलेश भाई ने किस मुलामियत से आपके उक्त शेर के सानी मिसरे में…"
Apr 19
Gurpreet Singh commented on Gurpreet Singh's blog post ग़ज़ल (12122-12122-12122-12122)
"आदरणीय समर कबीर जी बहुत बहुत शुक्रिया .... लय अस्ल में होती क्या चीज़ है इस के बारे में कुछ अधिक जानना चाहता हूँ ,,, क्या बह्र ही लय है या मिसरे में अलफ़ाज़ की तरतीब से भी लय प्रभावित होती है। . शुक्रिया "
Apr 19

Profile Information

Gender
Male
City State
Patiala Punjab
Native Place
India
Profession
Govt Employee
About me
I love to write, but dont have an ustaad so dont know the rules. Thats why i am here

Gurpreet Singh's Blog

ग़ज़ल (12122-12122-12122-12122)

न बैठो इतने करीब मेरे कहीं मेरा दिल मचल न जाए

अब इतनी भी दूर तो न जाओ ये जान मेरी निकल न जाए ।।

 

जो बर्फ़ अरमानों पर जमी है तेरी तपिश से पिघल न जाए

पिघल गई गर तो मेरी आँखों की झील भर के उछल न जाए ।।

 

बड़ा ही शातिर ये वक़्त है फिर नई कोई चाल चल न जाए

मिलन से पहले घड़ी विरह की मिलन का लम्हा निगल न जाए ।।

 

तेरी छुअन से हुई वो जुम्बिश की दिल की धड़कन बिखर गई है

 न छूना मुझ को सनम दुबारा ये साँस जब तक सँभल न जाए…

Continue

Posted on April 18, 2017 at 10:50am — 14 Comments

गज़ल इस्लाह के लिए (2122-2122-2122-212)

मेरी आँखों में नज़र ये ढूँढती क्या चीज़ है

कुछ तो बतला दे कि तेरी खो गई क्या चीज़ है ॥



रात दिन सीने की दीवारों पे ये पटके है सर

ऐ खुदा इस बुत में तूने डाल दी क्या चीज़ है ॥



हिज्र में जिस ने सुनी हों ग़ज़लें तन्हा बैठ कर

उससे जाकर पूछिए ये शायरी क्या चीज़ है ॥



तेरे ख्वाबों से उठा तुझ को न पाया सामने

अब समझ में आ रहा है तिश्नगी क्या चीज़ है ॥



यूँ तो जीने का तजुर्बाहै बहुत हम को मगर

अब तलक समझे नहीं हैं ज़िंदगी क्या चीज़ है…

Continue

Posted on April 1, 2017 at 10:00am — 13 Comments

तरही ग़ज़ल (212-212-212-212)

मेरे सुर से तेरा सुर मिलाना हुआ

और जीवन मेरा इक तराना हुआ ॥



मैने देखी है इक चलती फ़िरती ग़ज़ल

है मिजाज इस लिए शायराना हुआ ॥



आइए हमनशी बैठिए पलकों पर

बोलिए ख्वाब में कैसे आना हुआ ॥



थी दवा तो वही काम तब कर गई

जब तेरा अपने हाथों पिलाना हुआ ॥



वो भी लगने लगे अब मुझे अपने से

"जब से गैरों के घर आना जाना हुआ ॥"



...................................

पुछल्ले

...................................



हज़्म कैसे… Continue

Posted on February 17, 2017 at 10:00pm — 17 Comments

गज़ल (12122-12122)

गज़ल (12122-12122)

हमें मुहब्बत जतानी होगी
ये दिल की लब तक तो लानी होगी॥
दीवार चुप की गिरानी होगी
कि बात कुछ तो बनानी होगी॥
जो फेंक डाली है तूने बोतल
तो आँख से अब पिलानी होगी॥
शराब भी तो है इश्क जैसी
चढ़ेगी जितनी पुरानी होगी॥
जो चाहता है धुआँ न उठ्ठे
तो आग ज़्यादा बढ़ानी होगी॥
तू हँस के चाहे निभा ले रो के
तुझे मुहब्बत निभानी होगी॥
जुबान चुप है,है आँख पत्थर
ज़ुरूर दिल में विरानी होगी॥
(मौलिक व अप्रकाशित)

Posted on November 12, 2016 at 7:30pm — 2 Comments

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At 4:55pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी, आप नई चर्चा आरम्भ कर सकते हैं किन्तु ग़ज़ल के सम्बन्ध में "ग़ज़ल की कक्षा" और "ग़ज़ल की बातें" में पूर्व से ही कई चर्चाएँ चल रही है. जहाँ तक मुझे लगता है उन चर्चाओं में ग़ज़ल के लगभग सभी पहलुओं पर चर्चा हुई है और सतत हो रही है. अतः जिस विषय पर चर्चा पूर्व में ही आरम्भ हो चुकी है उसे आप निरंतर कर सकते है. वहीं अपने प्रश्न भी पूछ सकते हैं. गुनीजन स्वमेव ही उत्तर के साथ वहां उपस्थित हो जायेंगे. सादर 

At 10:42pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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