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Gurpreet Singh jammu
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"आ. भाई गुरप्रीत जी, सादर अभिवादन। बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
Thursday
सालिक गणवीर commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"भाई  Gurpreet Singh jammu  जी सादर नमस्कार बहुत उम्दः ग़ज़ल कही है आपने ,शैर दर शैर मुबारक़बाद क़ुबूल करें। कुछ टंकण त्रुटियाँ हैं ,ध्यान दें. यथा हूँ ,आँखों ,पँहुचे। जहाँ तक मैं जानता हूँ ग़ज़ल में कॉमा या प्रश्नवाचक चिन्हों का इस्तेमाल…"
Nov 22
Gurpreet Singh jammu commented on BAIJNATH SHARMA'MINTU''s blog post ग़ज़ल -बेटे से बढ़ के फर्ज निभाती हैं बेटियाँ
"वाह वाह आदरणीय बैजनाथ शर्मा 'मिंटू जी, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने, बहुत बहुत बधाई।"
Nov 20
Gurpreet Singh jammu commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - मेरी ज़ीस्त की कड़ी धूप ने मुझे रख दिया है निचोड़ कर
"मेरे दिल में अक्स उन्हीं का था उन्हें ऐतबार मगर न था कभी देखते रहे तोड़ कर कभी दिल की किरचों को जोड़ कर.    वाह वाह आदरणीय नीलेश सर जी, क्या ही लाजवाब शेर कहा आपने। इस खूबसूरत ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई।"
Nov 20
Gurpreet Singh jammu commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय नीलेश सर, आप जिस तरह हमेशा मेरा हौसला बढ़ाते हैं ये उस का भी नतीजा है की थोड़ा बहुत बेहतर कहने लगा हूं।आपने मतले में के बारे में बहुत शानदार सुझाव दिया है, *लौटाओ* बिलकुल परफेक्ट रहेगा सर जी। आपकी ग़ज़ल के लिए समझ बहुत ही…"
Nov 20
Nilesh Shevgaonkar commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"आ. गुरप्रीत जी आपकी ग़ज़ल का इंतज़ार यूँ ही नहीं रहता मुझे.. आप की ग़ज़ल बात करना जानती है ..यूँ तो हर शेर बेहतरीन हुआ है फिर भी मतले के लिए विशेष दाद लीजिये.. सानी में दे जाओ की जगह लौटाओ पर भी विचार कीजियेगा .हासिल-ए- ग़ज़ल शेर .. जब से…"
Nov 16
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Gurpreet Singh jammu's blog post ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू
"बहुत ही बढ़िया कहा आदरणीय गुरप्रीत जी...व्याकरणीय दृष्टि से तो मैं कुछ कह नहीं पाऊँगा... लेकिन भाव और कुछ अशआर की रवानगी बेहतरीन है।"
Nov 15
Gurpreet Singh jammu posted a blog post

ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू

22-22-22-22-22-2तुम कोई पैग़ाम कभी तो भिजवाओ। वरना मेरे कबूतर वापिस दे जाओ।जिसको तुमने अपने दिल से भुलाया है, क्या ये वाजिब है खुद उसको याद आओ ?मैने कहा जब,तुमने दिल को ज़ख़्म दिया, वो बोले, कितना गहरा है, दिखलाओ।जब से तुम बिछड़े हो, खुद से दूर हूं मैं, प्लीज़ किसी दिन मुझ को मुझ से मिलवाओ।आंखों में हैं ख्वाब भरे, पर नींद उड़ी, गर ये प्यार नहीं तो क्या है, समझाओ।'वो' कब के गुलशन से बाहर जा पहुंचे, ऐ फूलो, कुछ होश करो, मुरझा जाओ।तारों भरे आकाश से भी सुंदर कुछ है, ऐसा करो तुम अपनी चुनरी…See More
Nov 15
Gurpreet Singh jammu replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134
"आदरणीय नादिर खान जी आदाब । अच्छी ग़ज़ल कही आपने। ग़ज़ल की कमियों के बारे में गुणिजन बता चुके हैं। सुने हैं मैंने तेरे हुस्न के बड़े चर्चेसो आ गया हूँ उनका ताब देखने के लिए  इस शे'र में आपके कहने का अंदाज़ और तेवर बहुत अच्छा लगा। और…"
Aug 28
Gurpreet Singh jammu replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134
"वाह आदरणीय अमीरुद्दीन अमीर जी , बहुत अच्छी ग़ज़ल  कही आपने। मकता खास तौर पर पसंद आया"
Aug 28
Gurpreet Singh jammu replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-134
"तुम्हे ही देख के वो मुतमइन हैं बाम पे अबजो लोग आये थे महताब देखने के लिए  वाह वाह आदरणीय दंडपाणि नाहक जी, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल      "
Aug 28
Gurpreet Singh jammu replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"ओह बहुत ही दुखद समाचार । ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें ।"
May 24
Gurpreet Singh jammu commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर ताजातरीन गजल -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"वाह वाह आदरणीय लक्ष्मण धामी जी । मात्र दिवस पर मां को समर्पित बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही आप ने । बहुत ही अच्छे भाव गजल में आपने । गजल वाकई दिल से निकली हुई महसूस हो रही है । बहुत बहुत मुबारकबाद । चौथे शेर में आला और आखिरी शेर में डाला काफियों का…"
May 11
Gurpreet Singh jammu commented on सालिक गणवीर's blog post जग में नाम कमाना है....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय सालिक गणवीर जी नमस्कार । आप बहुत अच्छी ग़ज़ल कहते है । लेकिन माफी चाहता हूं ये ग़ज़ल मुझे उतनी अच्छी नहीं लगी। मतले के सानी में " बाद उसके " कुछ ठीक नहीं लग रहा। फिर इक दिन मर जाना है ।  शायद ऐसा कुछ बेहतर रहेगा…"
May 9
Gurpreet Singh jammu replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"वाह वाह आदरणीय सालिक गणवीर जी बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने । शिकम और असम का अर्थ भी बताने की कृपा करें जी ।"
Mar 26
Gurpreet Singh jammu replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-129
"मुसीबत में तो अश्के़ ग़म रवांं होते ही रहते हैं ।खुशी भी आंख कर देती है नम ऐसा भी होता है।। हक़ीक़त को छुपाने के लिए ''मसऊद'' दुनिया में।कोई खा लेता है झूठी क़सम ऐसा भी होता है।।     वाह वाह बहुत उम्दा । बहुत पसंद आई…"
Mar 26

Profile Information

Gender
Male
City State
Patiala Punjab
Native Place
India
Profession
Govt Employee
About me
I love to write, but dont have an ustaad so dont know the rules. Thats why i am here

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ग़ज़ल - गुरप्रीत सिंह जम्मू

22-22-22-22-22-2

तुम कोई पैग़ाम कभी तो भिजवाओ।

वरना मेरे कबूतर वापिस दे जाओ।

जिसको तुमने अपने दिल से भुलाया है,

क्या ये वाजिब है खुद उसको याद आओ ?

मैने कहा जब,तुमने दिल को ज़ख़्म दिया,

वो बोले, कितना गहरा है, दिखलाओ।

जब से तुम बिछड़े हो, खुद से दूर हूं मैं,

प्लीज़ किसी दिन मुझ को मुझ से मिलवाओ।

आंखों में हैं ख्वाब भरे, पर नींद उड़ी,

गर ये प्यार नहीं तो क्या है, समझाओ।

'वो' कब के…

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Posted on November 15, 2021 at 11:30am — 5 Comments

दो ग़ज़लें (2122-1212-22)

1.

शमअ  देखी न रोशनी देखी । 

मैने ता उम्र तीरगी देखी । 

देखा जो आइना तो आंखों में, 

ख़्वाब की लाश तैरती देखी । 

टूटे दिल का हटाया मलबा तो, 

आरज़ू इक दबी पड़ी देखी । 

एक इक पल डरावना सा लगा, 

इतने पास आ के ज़िन्दगी देखी । 

मैने इंसानियत रह ए हक़ पर, 

दो कदम चल के हांफती देखी 

2.

आप ने क्या कभी परी देखी । 

मैने यारो अभी अभी देखी । 

उसकी आँखों में सुब्ह सी…

Continue

Posted on July 14, 2019 at 12:30pm — 7 Comments

ग़ज़ल

(2122-2122-2122-212)

मुश्किलें कितनी हैं अपने दरमियाँ गिनता रहा ।

बैठ कर मैं राह की दुश्वारियाँ गिनता रहा ।

आँखों में अश्कों का दरिया चढ़ के जब उतरा तो फ़िर,

मैं तो बस ख़्वाबों की डूबी कश्तियाँ गिनता रहा ।

और करता भी तो क्या वो नौजवां बेरोज़गार,

दी हैं कितनी नौकरी कीअरज़ियाँ गिनता रहा ।

राजनेता को न था मतलब किसी इंसान से,

वो तो केवल धोतियाँ और टोपियाँ गिनता रहा ।

वो रहे गिनते मुनाफ़ा कारख़ाने का उधर,…

Continue

Posted on July 8, 2018 at 7:50am — 17 Comments

(ग़ज़ल - इस्लाह के लिए) अक्सर तन्हाई में रोया करता हूँ -(गुरप्रीत सिंह)

22-22-22-22-22-2



अक्सर तन्हाई में रोया करता हूँ।

अपने आँसू ख़ुद ही पोंछा करता हूँ।



देर तलक आईना देखा करता हूँ।

जाने उसमें किसको ढूँढा करता हूँ।



दिल में दर्द उठे तो फ़िर क्या करता हूँ?

बस उसकी तस्वीर से शिक्वा करता हूँ।



क्या वो अब भी याद मुझे करता होगा?

ख़ुद से ऐसी बातें पूछा करता हूँ।



एक न इक दिन पत्थर पिघलेगा पगले!

ये कह के दिल को बहलाया करता हूँ।



शाम ढले वो तोड़ दिया करता हूँ मैं,

सुब्ह जो अक्सर ख़ुद… Continue

Posted on November 4, 2017 at 11:30am — 12 Comments

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At 8:13pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी आदाब , बहुत बहुत शुक्रिया
हौसला अफ़जाई का मेरे ग़ज़ल कहने का प्रयास आपको पसंद आया दिल से शुक्रगुज़ार हूँ!
At 4:55pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी, आप नई चर्चा आरम्भ कर सकते हैं किन्तु ग़ज़ल के सम्बन्ध में "ग़ज़ल की कक्षा" और "ग़ज़ल की बातें" में पूर्व से ही कई चर्चाएँ चल रही है. जहाँ तक मुझे लगता है उन चर्चाओं में ग़ज़ल के लगभग सभी पहलुओं पर चर्चा हुई है और सतत हो रही है. अतः जिस विषय पर चर्चा पूर्व में ही आरम्भ हो चुकी है उसे आप निरंतर कर सकते है. वहीं अपने प्रश्न भी पूछ सकते हैं. गुनीजन स्वमेव ही उत्तर के साथ वहां उपस्थित हो जायेंगे. सादर 

At 10:42pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

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