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Gurpreet Singh
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Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"इस खूबसूरत ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद कुबूल करें आदरणीय राम अवध जी ,, वाकई बहुत अर्थपूर्ण ग़ज़ल कही है आपने"
Dec 22, 2017
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"आदरणीय सुरेंद्र नाथ जी आपकी ग़ज़ल बहुत पसंद आई ,, बहुत सादगी भरे शानदार अशआर कहे आपने ,,, बधाई स्वीकार करें जी"
Dec 22, 2017
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"वाह वाह आदरणीय अफ़रोज़ सहर जी ,, बेहद उम्दा ग़ज़ल कही है आपने ,,, पढ़कर मज़ा आ गया"
Dec 22, 2017
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"उस बशर से कैसी उम्मीदे वफ़ा जो वफ़ा के नाम से ही खाम है |यूँ नहीं आता तसव्वुर में कोई लग रहा है होने वाली शाम है |इबतिदाए इश्क़ मत तस्दीक़ कर तू अभी ना वाक़िफ़े अंजाम है | वाह वाह आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी ,, बहुत खूब ग़ज़ल कही आपने"
Dec 22, 2017
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"आदरणीय नादिर खान जी ,, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही आपने बहुत ही सुंदर मतला और मकता कहा ,,, पुछल्लों सहित बाकी अशआर भी बढ़िया रहे ,, मुबारकबाद कुबूल करें जी"
Dec 22, 2017
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"आदरणीय सागर आनंद जी इस छोटी परन्तु असरदार ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई आपको"
Dec 22, 2017
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"बहुत खूब आदरणीय सतविन्दर जी ,, अच्छी ग़ज़ल हुई है"
Dec 22, 2017
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"आदरणीय अमित कुमार जी ,, खूबसूरत अशआर से सजी इस ग़ज़ल के लिए आप को बहुत बहुत बधाई"
Dec 22, 2017
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"आदरणीय बलराम  धाकड़ जी इस  शानदार ग़ज़ल के लिए दिल से  मुबारकबाद  माँग मत, जो मिल गया, उसको बचा,ये सियासत का नया पैग़ाम है। वाह वाह बहुत खूब "
Dec 22, 2017
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"वाह सर जी हर बार की तरह इस बार भी उम्दा ग़ज़ल "
Dec 22, 2017
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"आप मेरी बात से हैरां न होंमुझ पे मेरे क़त्ल का इलज़ाम है वाह वाह बहुत खूबसूरत ग़ज़ल से तरही मुशायरे का आगाज़ किया है आपने आदरणीय महेंद्र कुमार जी ,, बधाई स्वीकार करें"
Dec 22, 2017
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-90
"दोस्त मिल बैठे हैं, मय है, जाम है। क्या कहूँ ! कितनी सुहानी शाम है। सुब्ह होते ही बिखर जाएंगे सब,मेरे ख़्वाबों का यही अंजाम है। आप से जो हो गईं नज़दीकियां,अपना भी अब शह्र में कुछ नाम है। हो रहा है जो ख़ुदा के नाम पर,इसके आगे बस ख़ुदा का नाम है। आप…"
Dec 22, 2017
Gurpreet Singh commented on rajesh kumari's blog post इश्क़ करने की चलो आज सजा हो जाए (ग़ज़ल 'राज')
"आदरणीया राजेश जी नमस्कार ... बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने ... बधाई स्वीकार करेँ "
Dec 12, 2017
Gurpreet Singh commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल- एक नेता हर गली कूचे में है।
"वाह ,, बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है आदरणीय राम अवध जी"
Dec 11, 2017
Gurpreet Singh commented on Gajendra shrotriya's blog post चेह्रा फ़क़त हसीं न हो दिल भी हसीं रहे - तरही ग़ज़ल
"वाह वाह आदरणीय गजेन्द्र जी,,बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने ,,,,"
Dec 8, 2017
Gurpreet Singh commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (किसी खंजर का मत अहसान लीजिए )
"आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी ,,,बहुत खूबसूरत ग़ज़ल ,,मतला विशेष तौर पर पसंद आया ,, मुबारकबाद कुबूल करें जी"
Dec 8, 2017

Profile Information

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Male
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Patiala Punjab
Native Place
India
Profession
Govt Employee
About me
I love to write, but dont have an ustaad so dont know the rules. Thats why i am here

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(ग़ज़ल - इस्लाह के लिए) अक्सर तन्हाई में रोया करता हूँ -(गुरप्रीत सिंह)

22-22-22-22-22-2



अक्सर तन्हाई में रोया करता हूँ।

अपने आँसू ख़ुद ही पोंछा करता हूँ।



देर तलक आईना देखा करता हूँ।

जाने उसमें किसको ढूँढा करता हूँ।



दिल में दर्द उठे तो फ़िर क्या करता हूँ?

बस उसकी तस्वीर से शिक्वा करता हूँ।



क्या वो अब भी याद मुझे करता होगा?

ख़ुद से ऐसी बातें पूछा करता हूँ।



एक न इक दिन पत्थर पिघलेगा पगले!

ये कह के दिल को बहलाया करता हूँ।



शाम ढले वो तोड़ दिया करता हूँ मैं,

सुब्ह जो अक्सर ख़ुद… Continue

Posted on November 4, 2017 at 11:30am — 12 Comments

तरही ग़ज़ल (पहले ये बतला दो उसने छुप कर तीर चलाए तो)- गुरप्रीत सिंह

लाख करे कोशिश सोने की फ़िर भी नींद न आए तो।

एक अधूरा ख़्वाब किसी को सारी रात जगाए तो ।



तुम तो हौले से 'ना' कह के अपने रस्ते चल दोगे,

लेकिन किसी का अम्बर टूटे और धरती फट जाए तो ।



हाँ मैं तेरे ज़ुल्म के बारे में न ज़ुबाँ से बोलूँगा,

पर क्या होगा गर महफ़िल में आँख मेरी भर आए तो ।



फ़िर बतलाना सीने ऊपर वार बचाना है कैसे,

पहले ये बतला दो उसने छुप कर तीर चलाए तो ।



वो गर नज़रों से ही छू ले तो दिल धक धक करने लगे,

जाने क्या हो गर वो सचमुच आकर… Continue

Posted on November 2, 2017 at 1:30pm — 9 Comments

ग़ज़ल --इस्लाह के लिए

      (122-122-122-12)

रहे हम तो नादां ये क्या कर चले

कि दौर ए जफ़ा में वफ़ा कर चले।

वो तूफ़ान के जैसे आ कर चले

मेरा आशियाना फ़ना कर चले।

रक़ीबों की तारीफ़ की इस क़दर

कि चहरा मेरा ज़र्द सा कर चले'

कहीं जाग जाएँ न इस ख़ौफ़ से

हम आँखों में सपने सुला कर चले

ज़मीं हमको बुज़दिल का ताना न दे

तो फिर हम ये नज़रें उठा कर चले।

तड़पते रहे अधजले कुछ हरूफ़

वो जब मेरे खत को जला कर…

Continue

Posted on August 16, 2017 at 4:30pm — 13 Comments

इस्लाह की गुज़ारिश के साथ एक ग़ज़ल पेश है (गुरप्रीत सिंह )

2122 -1212 -22

मुझ पे तू मेहरबां नहीं होता
मैं तेरा क़द्रदां नहीं होता।

बोलने वाले कब ये समझेंगे
चुप है जो बेज़ुबां नहीं होता।

कोई अरमान हम भी बोते. . .गर
मौसम-ए-दिल ख़िज़ाँ नहीं होता।

ख्वाहिशो सीने पे न दस्तक दो
अब मेरा दिल यहां नहीं होता।

जो बचाए किसी को कातिल से
वो सदा पासबाँ नहीं होता।

चाहे कितना उठे धुआँ ऊपर
वो कभी आसमाँ नहीं होता।
(मौलिक व् अप्रकाशित)

Posted on July 20, 2017 at 1:41pm — 14 Comments

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At 4:55pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी, आप नई चर्चा आरम्भ कर सकते हैं किन्तु ग़ज़ल के सम्बन्ध में "ग़ज़ल की कक्षा" और "ग़ज़ल की बातें" में पूर्व से ही कई चर्चाएँ चल रही है. जहाँ तक मुझे लगता है उन चर्चाओं में ग़ज़ल के लगभग सभी पहलुओं पर चर्चा हुई है और सतत हो रही है. अतः जिस विषय पर चर्चा पूर्व में ही आरम्भ हो चुकी है उसे आप निरंतर कर सकते है. वहीं अपने प्रश्न भी पूछ सकते हैं. गुनीजन स्वमेव ही उत्तर के साथ वहां उपस्थित हो जायेंगे. सादर 

At 10:42pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 82 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी।"
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