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Gurpreet Singh
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Ram Ashery commented on Gurpreet Singh's blog post तरही ग़ज़ल (212-212-212-212)
"manneey gupreet ji ati sunder abhivykt kiya apne apko tahedil badhai "
22 hours ago
Gurpreet Singh commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल -तड़प तड़प के क्यूँ वो बाहर निकले हैं - ( गिरिराज )
"औंधे पड़े हुये हैं सागर से दावे कुछ नाले, तो बाक़ी गागर निकले हैं वाह वाह आदरणीय गिरिराज जी,, बहुत शानदार ग़ज़ल "
Tuesday
Gurpreet Singh commented on सतविन्द्र कुमार's blog post आदमी को आदमी ही अब समझ ले आदमी (गजल)/सतविन्द्र कुमार राणा
"वाह वाह आदरणीय सत्वेंद्र जी क्या गज़ल कही है आपने.हरेक शेअर शानदार हुआ है.आपकी अब तक मैने जितनी गजलें पढ़ी हैं उनमें यह गज़ल मुझे सब से ज्यादा पसंद आई.किसी एक शेअर का ज़िक्र करना नहीं चाहूंगा..सभी शेअर लाजवाब हैं..बहुत बहुत बधाई आपको."
Mar 12
Gurpreet Singh commented on आशीष यादव's blog post यह सियासत आप पर हम पर कहर होने को है
"बहुत अच्छी गज़ल आदरणीय आशीश जी..गज़ल के आखरी मिसरे में कुछ मिसिंग लग रहा है.."
Mar 3
Gurpreet Singh commented on rajesh kumari's blog post चुगलियाँ कर बैठी आँखें और हैरानी मेरी (ग़ज़ल 'राज'
"आदरणीय समर कबीर जी..आपको मंच पर वापिस देख कर बहुत खुशी हुई...उम्मीद है आपकी तबीयत अब अच्छी होगी...हम सब यही चाहते हैं कि आप सदैव स्वस्थ रहें और हमारा मार्ग दर्शन करते रहें"
Mar 2
Gurpreet Singh commented on rajesh kumari's blog post चुगलियाँ कर बैठी आँखें और हैरानी मेरी (ग़ज़ल 'राज'
"आदरणीया राजेश कुमारी जी..आपकी गज़ल बहुत पदँद आई...सभी अशआर दमदार हैं.."
Mar 2
Gurpreet Singh commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की : इश्क़ हुआ है क्या?
"बहुत शानदार गज़ल आदरणीय नीलेश जी.. तन्हा शाम बिताते हो तुम, इश्क़ हुआ है क्या? मंज़र में खो जाते हो तुम, इश्क़ हुआ है क्या? . होटों पर मुस्कान बिना कारण आ जाती है, बेकारण झुँझलाते हो तुम, इश्क़ हुआ है क्या? . “नूर” तुम्हे अक्सर ख़ुद ही में…"
Mar 2
Gurpreet Singh commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post जो अपने ख्वाब के लिए जाँ से गुज़र गए
"बहुत बढिआ ग़ज़ल आदरणीय शिज्जू शकूर जी...पहला, दूसरा और आखरी शेअर खास तौर पर पसंद आए....और जिस सरलता से आप ने इस बहर को निभाया है..हर लफ्ज अपनी जगह पर एकदम फिट..सलाम है आपको"
Mar 1
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-23 (विषय: धारा के विपरीत)
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय विनय कुमार जी"
Feb 28
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-23 (विषय: धारा के विपरीत)
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी बहुत बहुत धन्यवाद"
Feb 28
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-23 (विषय: धारा के विपरीत)
"रचना पसंद करने के लिए आपका दिल से शुक्रिया आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी"
Feb 28
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-23 (विषय: धारा के विपरीत)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय महेंद्र कुमार जी"
Feb 28
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-23 (विषय: धारा के विपरीत)
"शुक्रिया आदरणीय तेजवीर सिंह जी"
Feb 28
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-23 (विषय: धारा के विपरीत)
"शुक्रिया आदरणीया राजेश कुमारी जी"
Feb 28
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-23 (विषय: धारा के विपरीत)
"बहुत शुक्रिया आदरणीय शेख शाहजाद उस्मानी जी.."
Feb 28
Gurpreet Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-23 (विषय: धारा के विपरीत)
"बहुत शुक्रिया सीमा जी...यकीनन वह दौर बहुत बुरा रहा होगा..रचना पसंद करने के लिए धन्यवाद..दरअसल मुझे लघु कथाओं में खास दिलचस्पी नही है..मुझे गज़ल कहना ज़्यादा भाता है..इस बार बस यूँ ही कलेन्डेर में लघु कथा का विषय पढ़ा तो अचानक न जाने कैसे ये ख़याल मन…"
Feb 28

Profile Information

Gender
Male
City State
Patiala Punjab
Native Place
India
Profession
Govt Employee
About me
I love to write, but dont have an ustaad so dont know the rules. Thats why i am here

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तरही ग़ज़ल (212-212-212-212)

मेरे सुर से तेरा सुर मिलाना हुआ

और जीवन मेरा इक तराना हुआ ॥



मैने देखी है इक चलती फ़िरती ग़ज़ल

है मिजाज इस लिए शायराना हुआ ॥



आइए हमनशी बैठिए पलकों पर

बोलिए ख्वाब में कैसे आना हुआ ॥



थी दवा तो वही काम तब कर गई

जब तेरा अपने हाथों पिलाना हुआ ॥



वो भी लगने लगे अब मुझे अपने से

"जब से गैरों के घर आना जाना हुआ ॥"



...................................

पुछल्ले

...................................



हज़्म कैसे… Continue

Posted on February 17, 2017 at 10:00pm — 14 Comments

गज़ल (12122-12122)

गज़ल (12122-12122)

हमें मुहब्बत जतानी होगी
ये दिल की लब तक तो लानी होगी॥
दीवार चुप की गिरानी होगी
कि बात कुछ तो बनानी होगी॥
जो फेंक डाली है तूने बोतल
तो आँख से अब पिलानी होगी॥
शराब भी तो है इश्क जैसी
चढ़ेगी जितनी पुरानी होगी॥
जो चाहता है धुआँ न उठ्ठे
तो आग ज़्यादा बढ़ानी होगी॥
तू हँस के चाहे निभा ले रो के
तुझे मुहब्बत निभानी होगी॥
जुबान चुप है,है आँख पत्थर
ज़ुरूर दिल में विरानी होगी॥
(मौलिक व अप्रकाशित)

Posted on November 12, 2016 at 7:30pm — 2 Comments

मुसीबत और हो जाती (मिजाहिया गज़ल)

अगर ना भागता छुट कर मुसीबत और हो जाती

तेरे घरवालों से मेरी मुरम्मत और हो जाती।

.

बुला कर घर में पिटवाना कहीं इतना ज़रूरी था

तू खुद ही डाँट देती तो नसीहत और हो जाती।

.

खुदा का शुक्र है भाई तुझे दो ही दिए उसने

अगर दो और दे देता क़यामत और हो जाती।

.

बड़ी मुश्किल तेरे कुत्ते से हमने कफ़ था छुड़वाया

जो फ़ट पतलून जाती तो फजीहत और हो जाती।

.

कि रस्ते में तो बिल्ली ने इशारा भी किया था पर

अगर कुछ बोल कर कहती सहूलत और हो…

Continue

Posted on October 4, 2016 at 9:30am — 9 Comments

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At 4:55pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी, आप नई चर्चा आरम्भ कर सकते हैं किन्तु ग़ज़ल के सम्बन्ध में "ग़ज़ल की कक्षा" और "ग़ज़ल की बातें" में पूर्व से ही कई चर्चाएँ चल रही है. जहाँ तक मुझे लगता है उन चर्चाओं में ग़ज़ल के लगभग सभी पहलुओं पर चर्चा हुई है और सतत हो रही है. अतः जिस विषय पर चर्चा पूर्व में ही आरम्भ हो चुकी है उसे आप निरंतर कर सकते है. वहीं अपने प्रश्न भी पूछ सकते हैं. गुनीजन स्वमेव ही उत्तर के साथ वहां उपस्थित हो जायेंगे. सादर 

At 10:42pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल -तड़प तड़प के क्यूँ वो बाहर निकले हैं - ( गिरिराज )
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गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल -तड़प तड़प के क्यूँ वो बाहर निकले हैं - ( गिरिराज )
"आदरणीय वासुदेव भाई , हौसला अफज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया ।"
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सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल -तड़प तड़प के क्यूँ वो बाहर निकले हैं - ( गिरिराज )
"आदरणीय वासुदेव भाई , हौसला अफज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया ।"
4 hours ago

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गिरिराज भंडारी commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....अब कहाँ गुम हुये आसरे भीड़ में
"आदरनीय बृजेश भाई , अच्छी गज़ल कही है आपने , हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें । मेरा सोचना है कि .. अगर…"
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गिरिराज भंडारी commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदरनीय नवीन भाई , खूबसूरत गज़ल के लिये बधाइयाँ आपको । आ,रवि भाई की बातों का ख्याल कीजियेगा । -- कुछ…"
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"आदरनीय मोहित भाई , प्रेम भाव से ओत प्रोत कविता के लिये बधाई । शब्दों की वर्तनी का ख्याल कीजिये ...…"
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