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Gurpreet Singh
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Gurpreet Singh commented on Gurpreet Singh's blog post इस्लाह की गुज़ारिश के साथ एक ग़ज़ल पेश है (गुरप्रीत सिंह )
"आदरणीय रवि सर जी,,, रचना की सराहना और आपके बहुमूल्य सुझावों के लिए बहुत धन्यवाद.. अब मेरा दिल यहॉं नहीं होता,,,इस मिसरे को दुरुस्त करने की कोशिश कर रहा हूँ लेकिन हो नहीं पा रहा किसी तरह"
yesterday
Gurpreet Singh commented on Samar kabeer's blog post 'महब्बत कर किसी के संग हो जा'
"आदरणीय समर सर जी,,, एक और उम्दा ग़ज़ल के लिए आपको ढेरों ढेर बधाई "
Monday
Gurpreet Singh commented on Sushil Sarna's blog post जाम ... (एक प्रयास)
"वाह वाह आदरणीय सुशील सरना जी। ..ग़ज़ल में भी कमाल क्र दिया है आपने,,बहुत खूबसूरत "
Monday
Gurpreet Singh commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल(सुन तो ले दास्ताने बर्बादी ) -----------------------------------------
"आदरणीय तस्दीक अहमद जी,, बहुत ही उम्दा ग़ज़ल हुई है,,मुबारकबाद पेश है "
Monday
Ravi Shukla commented on Gurpreet Singh's blog post इस्लाह की गुज़ारिश के साथ एक ग़ज़ल पेश है (गुरप्रीत सिंह )
"आदरणीय गुरप्रीत जी  क्‍या कहने बहुत अच्‍छे अशआर खास तौर पर ये दो अश्‍आर हमें बहुत पसंद आए बोलने वाले कब ये समझेंगे चुप है जो बेज़ुबां नहीं होता।   वाह वाह चाहे कितना उठे धुआँ ऊपर वो कभी आसमाँ नहीं होता।  बहुत खूब…"
Monday
vijay nikore commented on Gurpreet Singh's blog post इस्लाह की गुज़ारिश के साथ एक ग़ज़ल पेश है (गुरप्रीत सिंह )
"भाव बहुत ही दिलकश हैं ... रचना अच्छी लगी। बधाई।"
Sunday
बसंत कुमार शर्मा commented on Gurpreet Singh's blog post इस्लाह की गुज़ारिश के साथ एक ग़ज़ल पेश है (गुरप्रीत सिंह )
"बहुत खूब "
Sunday
narendrasinh chauhan commented on Gurpreet Singh's blog post इस्लाह की गुज़ारिश के साथ एक ग़ज़ल पेश है (गुरप्रीत सिंह )
"खूब सुन्दर रचना "
Friday
Samar kabeer commented on Gurpreet Singh's blog post इस्लाह की गुज़ारिश के साथ एक ग़ज़ल पेश है (गुरप्रीत सिंह )
"'ख़्वाहिशो मत टटोलो सीने में' ये ऊला मिसरा तो सही हो गया,इसी तरह सानी मिसरा भी बदलने की कोशिश करें ।"
Friday
Gurpreet Singh commented on Mohammed Arif's blog post ग़ज़ल (बह्र-22/22/22/22)
"अच्छी ग़ज़ल है आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी,, कुछ नए शब्द भी पता चले आप की इस ग़ज़ल के माध्यम से, "
Friday
Gurpreet Singh commented on Gurpreet Singh's blog post इस्लाह की गुज़ारिश के साथ एक ग़ज़ल पेश है (गुरप्रीत सिंह )
"शुक्रिया आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी,,,   जी सहमत हूँ उस्तादों से सीखने की कोशिश है और रहेगी "
Friday
Gurpreet Singh commented on Gurpreet Singh's blog post इस्लाह की गुज़ारिश के साथ एक ग़ज़ल पेश है (गुरप्रीत सिंह )
"शुक्रिया आदरणीय गिरिराज  जी "
Friday
Gurpreet Singh commented on Gurpreet Singh's blog post इस्लाह की गुज़ारिश के साथ एक ग़ज़ल पेश है (गुरप्रीत सिंह )
"शुक्रिया आदरणीय लक्ष्मण धामी जी "
Friday
Gurpreet Singh commented on Gurpreet Singh's blog post इस्लाह की गुज़ारिश के साथ एक ग़ज़ल पेश है (गुरप्रीत सिंह )
"शुक्रगुज़ार हूँ आदरणीय समर कबीर जी,, इस मंच पर अपनी रचना लेकर आने का यही मकसद होता है की अपनी कमियों को जान सकें,, और उन में सुधर की कोशिश करें,,चौथे शेर में रदीफ़ काम करेगा,, इस के बारे में मुझे सन्देह तो था,, लेकिन कन्फर्म नहीं था, अब बात स्पष्ट हो…"
Friday
Mohammed Arif commented on Gurpreet Singh's blog post इस्लाह की गुज़ारिश के साथ एक ग़ज़ल पेश है (गुरप्रीत सिंह )
"आदरणीय गुरप्रीत जी आदाब, बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल का प्रयास है । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब और आदरणीय रवि शुक्ला जी बातों से मैं पूरी तरह से सहमत हूँ ।"
Jul 20

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Gurpreet Singh's blog post इस्लाह की गुज़ारिश के साथ एक ग़ज़ल पेश है (गुरप्रीत सिंह )
"आदरनीय गुर प्रीत भाई , अच्छी गज़ल कही है , बधाइयाँ स्वीकार करें ।"
Jul 20

Profile Information

Gender
Male
City State
Patiala Punjab
Native Place
India
Profession
Govt Employee
About me
I love to write, but dont have an ustaad so dont know the rules. Thats why i am here

Gurpreet Singh's Blog

इस्लाह की गुज़ारिश के साथ एक ग़ज़ल पेश है (गुरप्रीत सिंह )

2122 -1212 -22

मुझ पे तू मेहरबां नहीं होता
मैं तेरा क़द्रदां नहीं होता।

बोलने वाले कब ये समझेंगे
चुप है जो बेज़ुबां नहीं होता।

कोई अरमान हम भी बोते. . .गर
मौसम-ए-दिल ख़िज़ाँ नहीं होता।

ख्वाहिशो सीने पे न दस्तक दो
अब मेरा दिल यहां नहीं होता।

जो बचाए किसी को कातिल से
वो सदा पासबाँ नहीं होता।

चाहे कितना उठे धुआँ ऊपर
वो कभी आसमाँ नहीं होता।
(मौलिक व् अप्रकाशित)

Posted on July 20, 2017 at 1:41pm — 14 Comments

ग़ज़ल इस्लाह के लिए (गुरप्रीत सिंह)

2122 -1212 -22


आस दिल में दबी रही होगी
और फिर ख़्वाब बन गई होगी।

टूट जाए सभी का दिल या रब
दिलजले को बड़ी ख़ुशी होगी।

ज़ह्न हारा हुआ सा बैठा है
दिल से तक़रार हो गई होगी।

जिसकी खातिर लुटा दी जान उसने
चीज़ वो भी तो कीमती होगी।

जब मुड़ा तेरी ओर परवाना
शमअ बेइन्तहा जली होगी।

(मौलिक व् अप्रकाशित)

Posted on July 11, 2017 at 1:26pm — 25 Comments

ग़ज़ल --इस्लाह के लिए (गुरप्रीत सिंह )

(2122-2122-2122-212)

पहले सूरज सा तपें खुद को ज़रा रोशन करें

फिर थमें मत फिर किसी को चाँद सा रोशन करें।

ये नहीं, कोई दिया बस इक दफ़ा रोशन करें

गर करें, बुझने पे उसको बारहा रोशन करें।

मेरी भी वो ही तमन्ना है जो सारे शह्र की

आप मेरे घर में आएं घर मेरा रोशन करें।

सामने है इक चराग़ और आप के हाथों में शमअ

आप किस उलझन में हैं जी?क्या हुआ? रोशन करें!

तीरगी के हैं नुमाइंदे सभी इस शह्र में

कौन है…

Continue

Posted on May 23, 2017 at 10:04am — 22 Comments

ग़ज़ल (22-22-22-22-22-22-22-2)

 

22   22   22   22   22   22   22   2



दिल के तख़्त पे हाए हमने किस ज़ालिम को बिठा लिया 

दिल की बस्ती को ही उजाड़ा उसने ऐसा काम किया।

 

'लुटे हुए अरमानों को वापिस लाऊंगा' बोला था  

लेकिन जो था पास हमारे वो भी हमसे छीन लिया।

 

अब कहता है, इश्क़ में सब आशिक़ ऐसा ही करते हैं 

मैंने भी गर झूठे वादे किए तो कोई पाप किया।

 

कितनी बार रकीबों ने अरमानों के सर काटे हैं 

और वो बस इतना कहते हैं बुरा किया भई बुरा…

Continue

Posted on May 5, 2017 at 11:00am — 17 Comments

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At 4:55pm on August 30, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय गुरप्रीत सिंह जी, आप नई चर्चा आरम्भ कर सकते हैं किन्तु ग़ज़ल के सम्बन्ध में "ग़ज़ल की कक्षा" और "ग़ज़ल की बातें" में पूर्व से ही कई चर्चाएँ चल रही है. जहाँ तक मुझे लगता है उन चर्चाओं में ग़ज़ल के लगभग सभी पहलुओं पर चर्चा हुई है और सतत हो रही है. अतः जिस विषय पर चर्चा पूर्व में ही आरम्भ हो चुकी है उसे आप निरंतर कर सकते है. वहीं अपने प्रश्न भी पूछ सकते हैं. गुनीजन स्वमेव ही उत्तर के साथ वहां उपस्थित हो जायेंगे. सादर 

At 10:42pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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