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Gajendra shrotriya
  • 36, Male
  • Kota , Rajasthan
  • India
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Gajendra shrotriya's Page

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Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)
"आपके लिखे पर कुछ कहने के लायक मैं स्वयं को नही पाता आदरणीय। आपकी उपस्थिति मात्र से ही मन को अतीव प्रसन्नता मिलती है। आपकी स्नेहवृष्टि से मुझ सहित ओबीओ परिवार के सभी सदस्य सिक्त रहें, बस यही कामना है। सादर।"
Oct 21
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)
"आपके लिखे पर कुछ कहने के लायक मैं स्वयं को नही पाता आदरणीय। आपकी उपस्थिति मात्र से ही मन को अतीव प्रसन्नता मिलती है। आपकी स्नेहवृष्टि से मुझ सहित ओबीओ परिवार के सभी सदस्य सिक्त रहें, बस यही कामना है। सादर।"
Oct 21
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"आ० समर कबीर साहब, आपका शुभाशीष पाकर प्रसन्नता हुई। इंगित मिसरे में सुधार हेतु प्रयासरत हूँ। सादर।"
Oct 21
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"सराहना हेतु हार्दिक आभार आ० महेन्द्र कुमार जी ।"
Oct 21
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"Permalink Reply by Gajendra shrotriya 1 hour agoDelete दिल से आभार आदरणीय अजय तिवारी साहब। अपेक्षित सुधार हेतु प्रयासरत हूँ।"
Oct 21
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"आपका आशिष पाकर बहुत प्रफ्फुलित हूँ आदरणीय सर। आपकी अनवरत कृपा का आकांक्षी हूँ। सादर।"
Oct 21
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"हार्दिक आभार आदरणीय निलेश नूर साहब।"
Oct 21
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"सराहना के लिए बहुत आभार आदरणीय शिज्जू शकुर साहब। सही वर्तनी बारीक ही है। मिसरे में अपेक्षित सुधार हेतु प्रयासरत हूँ। सादर।"
Oct 21
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"//लोभ तेरे सुनहरे ख्वाबों कानींद मीठी सुला गया है मुझे // वाह !  बहुत उम्दा कहन ! बहुत ख़ूब ! बहुत बधाईयाँ आदरणीय अजय गुप्ता जी।"
Oct 21
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"बहुत ख़ूबसूरत अशआर हुए हैं आदरणीया अंजलि जी। बहुत बधाईयाँ।"
Oct 21
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"//  कुछ सबक भूलने भी होते हैंये सबक वो सिखा गया है मुझे  // वाह ! बहुत ख़ूब। बहुत अच्छे अशआर  हुए हैं आदरणीय महेन्द्र कुमार जी। बहुत बधाईयाँ।"
Oct 21
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"आदरणीय सर, सादर अभिवादन। आपके लिखे पर कुछ कहने के लायक तो मैं स्वयं को नही पाता, बस ग़ज़ल को कई कई बार पढ़ गया हूँ।  साहित्य सेवा के प्रति आपके समर्पण एवं आपकी सर्जनक्षमता  प्रणम्य है। सादर।"
Oct 21
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)
"आदरणीय राणा प्रताप सिंह साहब, सादर अभिवादन। आपके संचालन में तरही मुशायरे का ये लोकप्रिय इवेंट 100 वें अंक की पूर्णता पा रहा है। इस हेतु असिमित बधाईयाँ भविष्य की शुुुभकामनाओं के साथ प्रेषित है। इस मील के पत्थर की स्थापना में आपका समर्पित  …"
Oct 21
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ साहब, सादर अभिवादन। बहुत खूब अशआर हुए हैं। मेरी ओर से दिली दाद और शुभकामनाएँ स्वीकार करें।"
Oct 21
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)
"आदरणीय समर कबीर साहब, सादर अभिवादन। अपने अशआर में ओबीओ को पिरोना इस मंच के प्रति आपके समर्पण को दर्शा रहा है। ग़ज़ल तो आपकी बहूत ख़ूब होनी ही है। इस मंच सहित हम सभी को यूंही आशीष देते रहें। मेरी दिली दाद और शुभकामनाएँ स्वीकार करें।"
Oct 21
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)
"//तेरी नज़रों से दिल में आना थाये सफ़र ही थका गया है मुझे// वाह ! क्या कहने ! बहुत ख़ूब कहा है।  //लाल फ़ीते से बांध रक्खा हैऔर तरक़्क़ी कहा गया है मुझे//     उम्दा शेेअर... //नोंक लगते ही फ़टना तय समझोबस हवा से भरा गया है मुझे//  …"
Oct 21

Profile Information

Gender
Male
City State
kota Rajsthan
Native Place
rajsthan
Profession
Teacher at state govt. Rajasthan

Gajendra shrotriya's Blog

चेह्रा फ़क़त हसीं न हो दिल भी हसीं रहे - तरही ग़ज़ल

221  2121 1221 212



राह- ए- बदी से हम कभी वाक़िफ़ नहीं रहे 

फिर भी तेरे निशाने पे वाइज़ हमीं रहे     

कर ग़ौर अपने तौर-तरीकों पे एक बार

चहरा फ़क़त हसीं न हो दिल भी हसीं रहे 



दिल के दियार की ज़रा रौनक बहाल हो

गर इस मकाँ में आप सा कोई मकीं रहे

कर इश्क या जगा दे तसव्वुफ़ तेरी रज़ा

ऐ दिल तेरे खिलाफ़ कभी हम नहीं रहे 



अब भी यहीं हैं फूल कली चाँद सब मगर

दिलकश तुम्हारे बाद ये उतने नहीं रहे



दिल के…

Continue

Posted on December 6, 2017 at 8:30pm — 12 Comments

दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है-ग़ज़ल

2122 /2122/ 2122 /212



दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है

टूटते रिश्ते बचाने की ज़रुरत आज है



प्यार जितना है जताने की ज़रूरत आज है

अपनापन खुलकर दिखाने की ज़रूरत आज है



हँसते आँगन में पसर जाए न सन्नाटा कहीं

सब गिले शिकवे भुलाने की ज़रूरत आज है



दिल के रिश्तों को ज़ुबाँ से तोड़ना मुमकिन कहाँ

अपनों को अपना बनाने की ज़रूरत आज है



घर बनाना है अगर मज़बूत फिर खुद को हमे

नींव का पत्थर बनाने की ज़रूरत आज है



अपने हक़ की बात करना… Continue

Posted on November 5, 2017 at 7:00pm — 20 Comments

गज़ल- आज ढ़लती धूप सी हैं

2122/2122/2122/212



आज ढ़लती धूप सी हैं दादी नानी फिर कहाँ

तिफ़्ल सुनले चाँद परियों की कहानी फिर कहाँ



घर घरोंदे गुड्डे गुडिया राजा रानी फिर कहाँ

कश्तियाँ कागज की ये बारिश का पानी फिर कहाँ



छोड़ ये टीवी मोबाइल दौड़कर तितली पकड़

बचपना जी भरके जी ऐसी रवानी फिर कहाँ



पेड़ों की शाखें हैं सूनी खेल के मैदान चुप

जूझना हालात से सीखे जवानी फिर कहाँ



माँ के आंचल से पिता के कांधे तक फैली थी जो

बचपने की वो हुकूमत हुक्मरानी फिर… Continue

Posted on September 1, 2017 at 9:11pm — 16 Comments

ग़ज़ल - इक जलतरंग दिल में बजाकर चले गए

221 / 2121 / 1221 / 212



इक जलतरंग दिल में बजाकर चले गए

वो रंगे इश्क मुझपे चढ़ाकर चले गए



जैसे गुलाब की कली हो जाए संदली

ख़ुशबू फिज़ा में ऐसी मिलाकर चले गए



बादल उड़े फ़लक पे बने नक़्श वो हसीं

उस नाज़नीं की याद दिलाकर चले गए



मुस्कान दे गए मुझे बचपन के यार कुछ

मेरी उदासियों को चुराकर चले गए



जुगनू ही बनके रह गए सूरज कई यहाँ

कोरस में गीत कितने ही गाकर चले गए



क्यूं शम्स के उजाले ये नींदों के फूलों से

ख्वाबों की… Continue

Posted on August 5, 2017 at 9:30pm — 21 Comments

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At 7:22pm on April 6, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय गजेन्द्र श्रोतिया जी,
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी प्रस्तुति  ग़ज़ल ("ओबीओ लाइव तरही मुशायरा" अंक 45 में प्रस्तुत) को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |


शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी

संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 

ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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