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Gajendra shrotriya
  • 36, Male
  • Kota , Rajasthan
  • India
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Mahendra Kumar commented on Gajendra shrotriya's blog post मेरी दस्तार ख़ानदानी है- ग़ज़ल
"बढ़िया ग़ज़ल है आदरणीय गजेन्द्र जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. "
yesterday
Ajay Tiwari commented on Gajendra shrotriya's blog post मेरी दस्तार ख़ानदानी है- ग़ज़ल
"आदरणीय गजेन्द्र जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई."
Tuesday
Ravi Shukla commented on Gajendra shrotriya's blog post मेरी दस्तार ख़ानदानी है- ग़ज़ल
"आदरणीय गजेंद्र जी बहुत अच्छी गजल आपने कही छोटी बहर में अच्छे निकाले हैं दिली मुबारकबाद पेश करता हूं"
Monday
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"बहुत अच्छे हाइकु सृजित किए हैं आदरणीय शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी। बधाई स्वीकारें। तीसरे हाइकु में कामाग्निपथ शब्द का प्रयोग समझ नही आया। सादर।"
Saturday
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-99
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी  सादर अभिवादन।बहुत अच्छे अशआर बुने हैं आपने । लगभग सभी शेर काबिले तारीफ है। बहुत बहुत बधाई।"
Saturday
Gajendra shrotriya commented on Gajendra shrotriya's blog post मेरी दस्तार ख़ानदानी है- ग़ज़ल
"सराहना के लिए हार्दिक आभार आ० फूल सिंह जी।"
Saturday
PHOOL SINGH commented on Gajendra shrotriya's blog post मेरी दस्तार ख़ानदानी है- ग़ज़ल
""भाई साहब " बहुत खूब उम्दा रचना बधाई स्वीकारें"
Jan 10
राज़ नवादवी commented on Gajendra shrotriya's blog post मेरी दस्तार ख़ानदानी है- ग़ज़ल
"जी जनाब समर कबीर साहब, ध्यान रखूंगा, हो गई ग़लती के लिए क्षमा करें. सादर. "
Jan 10
Gajendra shrotriya posted a blog post

मेरी दस्तार ख़ानदानी है- ग़ज़ल

2122/1212/22 ------------------------------ हार तूफ़ान से न मानी है कश्ती ने तैरने कि ठानी है मेरी पलकों पे ये जो पानी है ऐ मुहब्बत तेरी निशानी है हमने माना बहुत पुरानी है पर बहुत ख़ूब ये कहानी है दिल पे चस्पां है जो नही मिटतीयूूँ तेरी हर शबीह फानी है राख मैं कर चुका तेरे ख़त को याद लेकिन मुझे ज़बानी है हर किसी दर पे ये नही झुकती मेरी दस्तार ख़ानदानी है पहली बारिश है तिफ़्ल बन जाओ फेंक दो क्यूँ ये छतरी तानी है आब-संदल कभी थे हम दोनों आज इक आग दूजा पानी है जिसका अंजाम जंग तक पहुँचे बात इतनी नहीं बढ़ानी…See More
Jan 9
Gajendra shrotriya commented on Gajendra shrotriya's blog post मेरी दस्तार ख़ानदानी है- ग़ज़ल
"अनुमोदन के लिए आपका आभारी हूँ आदरणीय समर कबीर साहिब।"
Jan 9
Samar kabeer commented on Gajendra shrotriya's blog post मेरी दस्तार ख़ानदानी है- ग़ज़ल
"राज़ साहिब,इस मंच पर उस्ताद शागिर्द की परिपाटी नहीं है,इसलिए मुझे उस्ताद न लिखा करें,हम सब एक परिवार के सदस्य हैं ।"
Jan 8
राज़ नवादवी commented on Gajendra shrotriya's blog post मेरी दस्तार ख़ानदानी है- ग़ज़ल
"आदरणीय  Gajendra shrotriya साहब, सुन्दर ग़ज़ल के प्रयास पे दिली मुबारकबाद. बाक़ी, मंच के उस्ताज़ जनाब समर कबीर साहब ने  जो इस्लाह फरमाई है यक़ीनन बहुत मुफ़ीद है. सादर. "
Jan 8
Samar kabeer commented on Gajendra shrotriya's blog post मेरी दस्तार ख़ानदानी है- ग़ज़ल
"' दिल पे चस्पा है जो सिवा उसकेतेरी हर इक शबीह फानी है' इस शैर को यूँ कर सकते हैं:- 'दिल पे चस्पां है जो नहीं मिटटी यूँ तेरी हर शबीह फ़ानी है' 'दस्तार' और 'संदल' वाला शैर रख सकते हैं ।"
Jan 8
Gajendra shrotriya commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ९०
"वाह! क्या ख़ूब अशआर हुए हैं आदरणीय राज़ नवादवी साहिब, दिली दाद हाज़िर है इस दिलकश कलाम पर। बहुत बधाई आपको।"
Jan 8
Gajendra shrotriya commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post हज़ारों बार क़ुदरत ने इशारा तो किया होगा  ........(११)
"अच्छे अशआर हुए हैं आदरणीय। लगभग सभी शेर पुरअसर और अच्छी कहन में हैं। दिली दाद और बधाई स्वीकार करें।"
Jan 8
Gajendra shrotriya commented on Gajendra shrotriya's blog post मेरी दस्तार ख़ानदानी है- ग़ज़ल
"हार्दिक आभार आदरणीय सुरेन्द्रनाथ जी।"
Jan 8

Profile Information

Gender
Male
City State
kota Rajsthan
Native Place
rajsthan
Profession
Teacher at state govt. Rajasthan

Gajendra shrotriya's Blog

मेरी दस्तार ख़ानदानी है- ग़ज़ल

2122/1212/22

------------------------------

हार तूफ़ान से न मानी है

कश्ती ने तैरने कि ठानी है



मेरी पलकों पे ये जो पानी है

ऐ मुहब्बत तेरी निशानी है



हमने माना बहुत पुरानी है

पर बहुत ख़ूब ये कहानी है



दिल पे चस्पां है जो नही मिटती

यूूँ तेरी हर शबीह फानी है



राख मैं कर चुका तेरे ख़त को

याद लेकिन मुझे ज़बानी है



हर किसी दर पे ये नही झुकती

मेरी दस्तार ख़ानदानी है



पहली बारिश है तिफ़्ल बन…

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Posted on January 9, 2019 at 11:59am — 16 Comments

चेह्रा फ़क़त हसीं न हो दिल भी हसीं रहे - तरही ग़ज़ल

221  2121 1221 212



राह- ए- बदी से हम कभी वाक़िफ़ नहीं रहे 

फिर भी तेरे निशाने पे वाइज़ हमीं रहे     

कर ग़ौर अपने तौर-तरीकों पे एक बार

चहरा फ़क़त हसीं न हो दिल भी हसीं रहे 



दिल के दियार की ज़रा रौनक बहाल हो

गर इस मकाँ में आप सा कोई मकीं रहे

कर इश्क या जगा दे तसव्वुफ़ तेरी रज़ा

ऐ दिल तेरे खिलाफ़ कभी हम नहीं रहे 



अब भी यहीं हैं फूल कली चाँद सब मगर

दिलकश तुम्हारे बाद ये उतने नहीं रहे



दिल के…

Continue

Posted on December 6, 2017 at 8:30pm — 12 Comments

दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है-ग़ज़ल

2122 /2122/ 2122 /212



दिल बड़ा अपना बनाने की ज़रूरत आज है

टूटते रिश्ते बचाने की ज़रुरत आज है



प्यार जितना है जताने की ज़रूरत आज है

अपनापन खुलकर दिखाने की ज़रूरत आज है



हँसते आँगन में पसर जाए न सन्नाटा कहीं

सब गिले शिकवे भुलाने की ज़रूरत आज है



दिल के रिश्तों को ज़ुबाँ से तोड़ना मुमकिन कहाँ

अपनों को अपना बनाने की ज़रूरत आज है



घर बनाना है अगर मज़बूत फिर खुद को हमे

नींव का पत्थर बनाने की ज़रूरत आज है



अपने हक़ की बात करना… Continue

Posted on November 5, 2017 at 7:00pm — 20 Comments

गज़ल- आज ढ़लती धूप सी हैं

2122/2122/2122/212



आज ढ़लती धूप सी हैं दादी नानी फिर कहाँ

तिफ़्ल सुनले चाँद परियों की कहानी फिर कहाँ



घर घरोंदे गुड्डे गुडिया राजा रानी फिर कहाँ

कश्तियाँ कागज की ये बारिश का पानी फिर कहाँ



छोड़ ये टीवी मोबाइल दौड़कर तितली पकड़

बचपना जी भरके जी ऐसी रवानी फिर कहाँ



पेड़ों की शाखें हैं सूनी खेल के मैदान चुप

जूझना हालात से सीखे जवानी फिर कहाँ



माँ के आंचल से पिता के कांधे तक फैली थी जो

बचपने की वो हुकूमत हुक्मरानी फिर… Continue

Posted on September 1, 2017 at 9:11pm — 16 Comments

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At 7:22pm on April 6, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय गजेन्द्र श्रोतिया जी,
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी प्रस्तुति  ग़ज़ल ("ओबीओ लाइव तरही मुशायरा" अंक 45 में प्रस्तुत) को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |


शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी

संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 

ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post जागो उठो हे लाल तुम (मधुमालती छंद)
"आद0 महेंद्र जी सादर अभिवादन। प्रतिक्रिया से नवाजने के लिए आभारी हूँ।"
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Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दिल ने जिसे बना लिया गुलफाम दोस्तो)
"जनाब महेंद्र कुमार साहिब , ग़ज़ल पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया…"
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Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : कैसे बनता है कोई शख़्स तमाशा देखो
"हृदय से आभारी हूँ आदरणीय तेज वीर सिंह जी. बहुत-बहुत शुक्रिया. सादर."
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Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : अशआर मेरे जिनको सुनाने के लिए हैं
"लिखना सार्थक रहा आदरणीय अजय जी. बहुत-बहुत शुक्रिया. हार्दिक आभार. सादर."
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Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : अशआर मेरे जिनको सुनाने के लिए हैं
"बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय तेज वीर सिंह जी. हृदय से आभारी हूँ. सादर."
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