For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Manjeet kaur
Share

Manjeet kaur's Groups

 

Manjeet kaur's Page

Latest Activity

Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)
"राज़ ऐसा बता गया है मुझे समझो, जीना सिखा गया है मुझे । अब ये धरती लगे मुझे जन्नत ख़्वाब ऐसा दिखा गया है मुझे । नींद मीठी सी आई है मुझको कोइ लोरी सुना गया है मुझे । राज़ उनका न आएगा लब पर अपनी कसमें दिला गया है मुझे । ना ज़रूरत रही सफ़ीना की चलना…"
Oct 20
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"राज़ ऐसा बता गया है मुझे समझो, जीना सिखा गया है मुझे । अब ये धरती लगे मुझे जन्नत ख़्वाब ऐसा दिखा गया है मुझे । नींद मीठी सी आई है मुझको कोइ लोरी सुना गया है मुझे । राज़ उनका न आएगा लब पर अपनी कसमें दिला गया है मुझे । ना ज़रूरत रही सफ़ीना की चलना…"
Oct 20
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"ढूंढा जहां ये सारा कि सच्चा कहें जिसे हम भीड़ में तलाशते अपना कहें जिसे । ख़्वाहिश में मंज़िलों की हैं भटके इधर उधर कोई मिली न राह कि रस्ता कहें जिसे । जाने क्यूँ रूठ कर मिरा महबूब चल दिया किस बात पे ख़फ़ा है वो , शिकवा कहें जिसे । दुनिया ने किसको…"
Sep 27
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-99
"आदरणीय कबीर साहब, आपकी ग़ज़ल पढ़ना एक खूबसूरत एहसास, बहुत कुछ सीखने को मिलेगा, मुबारकबाद पेश करती हूँ।"
Sep 27
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय ,धन्यवाद, हौसला अफ़ज़ाई का शुक्रिया।"
Sep 22
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"धन्यवाद आदरणीय राजेश कुमारी जी, सुझाव पर यकीनन अमल होगा ।"
Sep 22
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 89 in the group चित्र से काव्य तक
"शक्ति छंद न सोचा जिसे था ,विपत वो पड़ी नदी रूप धरकर भयानक खड़ी न सूझे हमें अब कि जाएं कहाँ नदी बीच डूबा बना आशियाँ । धरा जल मग्न हो गई है सभी नहीं रूप देखा विकट ये कभी बिठा टोकरी बाल बढ़ती चली बना भाग देखो अजब ये छली । इधर है उधर है नहीं छोर है चली…"
Sep 22
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-95
"शेख उस्मानी साहब, हौसला अफ़ज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया"
Sep 15
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-95
"आदरणीय कबीर साहब,शुक्रिया, कमियों को दूर करने की पूरी कोशिश रहेगी धन्यवाद"
Sep 15
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-95
"शुक्रिया ,जनाब आरिफ़ मोहम्मद जी, भूलवश शीर्षक रह गया ,धन्यवाद"
Sep 15
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-95
"आदरणीय बबीता जी ,हौसला अफ़ज़ाई का शुक्रिया ।"
Sep 15
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-95
"गलती सुधार पहली पंक्ति में 'वो भी क्या दिन थे' टाइपिंग में गलत हो गया है क्षमा चाहूंगी ,धन्यवाद"
Sep 15
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-95
"था कायम दिलों में आपस करार, वो भी क्या देश न थे बदला ज़माना हैं बदले विचार, वो भी क्या दिन थे बचपन के दिन थे लगते सुहाने गाते थे मिलकर मीठे तराने उड़ती हो जैसे पंछी की डार, वो भी क्या दिन थे चिट्ठी औ ख़त की बातें पुरानी मोबाइल की दुनिया लगती…"
Sep 15
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-98
"आदरणीय आरिफ साहब, हौसला अफ़ज़ाई का शुक्रिया ।"
Aug 24
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-98
"आदरणीय कबीर साहब, आपकी टिप्पणी हमारे लिए मार्ग दर्शक होती है आपके मशविरा सर आँखों पर ,धन्यवाद"
Aug 24
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-98
"शमअ दिल की जो जली हम ये बुझाते भी नहीं साँझ को अब तो कभी दीप जलाते भी नहीं । ख़्वाब बनकर हैं बसे वो मेरी आँखों में सदा पास आते भी नहीं दूर वो जाते भी नहीं । मुस्कुराहट लिए लब पर यूँ तो मिलते हैं सभी हाथ मिलते हैं मगर दिल वो मिलाते भी नहीं । रात…"
Aug 24

Profile Information

Gender
Female
City State
Gurgaon, harayana
Native Place
Punjab
Profession
Housewife
About me
I write hindi poetry and gazal haiku chand geet etc. ,,

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 8:12am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

surender insan posted a blog post

"किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें"

 1222 1222 1222 सुकूँ वो उम्र भर पाया नहीं करतें। बड़ों की बात जो माना नहीं करतें।।बुजुर्गों की…See More
3 hours ago
Balram Dhakar posted a blog post

ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (चलो धुंआ तो उठा, इस गरीबख़ाने से)

1212,1122,1212,22/112तमाम ख़्वाब जलाने से, दिल जलाने से।चलो धुंआ तो उठा, इस गरीबख़ाने से।हमें अदा न…See More
3 hours ago
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

1212 1122 1212 22 हर एक शख्स को मतलब है बस ख़ज़ाने से । गिला करूँ मैं…See More
3 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a blog post

खामियाजा ( लघु कथा )

‘बाबू जी, ग्यारह महीने हो गए, मगर अब तक मुझे  पेंशन, बीमा, ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण कुछ भी नहीं…See More
3 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

देर तक ....

देर तक ....तुन्द हवाएँ करती रही खिलवाड़ हर पात से हर शाख से देर तकरोती रही बेबस चिड़िया टूटे अण्डों…See More
3 hours ago
Balram Dhakar commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- नेकियाँ तो आपकी सारी भुला दी जाएँगी / दिनेश कुमार
"आदरणीय दिनेश जी, बहुत शानदार ग़ज़ल के लिए दाद के साथ मुबारक़बाद क़ुबूल फ़रमाएं। सादर।"
3 hours ago
Balram Dhakar commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post जलूँ  कैसे  तुम्हारे बिन - लक्ष्मण धामी"मुसाफिर" ( गजल )
"आदरणीय लक्ष्मण जी, सादर अभिवादन। बहुत खूबसूरत ग़ज़ल, बधाई स्वीकार करें। सादर।"
3 hours ago
राज़ नवादवी commented on surender insan's blog post "किसी के साथ भी धोखा नहीं करतें"
"आदरणीय सुरेंद्र इंसान साहब, आदाब। सुंदर ग़ज़ल की प्रस्तुति पे बधाई। सादर।।"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घुटन के इन दयारों में तनिक परिहास बढ़ जाये - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई राज नवादवी जी, गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए आभार ।"
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post रंगहीन ख़ुतूत ...
"आ. भाई सुशील जी, सुंदर कविता हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
5 hours ago
राज़ नवादवी commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घुटन के इन दयारों में तनिक परिहास बढ़ जाये - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आदाब। सुंदर ग़ज़ल की प्रस्तुति पे दाद के साथ मुबारकबाद। सादर। "
5 hours ago
राज़ नवादवी commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ८१
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आदाब। ग़ज़ल में शिरकत और हौलसा अफ़ज़ाई का दिल से शुक्रिया। सादर। "
5 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service