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Manjeet kaur
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Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"छल गई रेत मुझे, निकला ये सहरा देखो आँख में सिमटा हुआ प्यार का दरिया देखो साँझ को जब भी ढका स्याह अंधेरों ने मिल तीरगी में है छिपा रोज़ सवेरा देखो दोस्तो 'उसने' बनाई है बड़ी फुरसत से हो मयस्सर तो कभी घूम के दुनिया देखो काम औरों के न आया…"
3 hours ago
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"बेहतर समर साहब ,आपकी सोहबत में बहुत कुछ सीखने को मिलेगा ,शुक्रिया जी।"
Apr 27
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"भले ही बुझ गई ये शमअ ,जल तो सकती है कि टूटे दिल में नई आस , पल तो सकती है रही उम्मीद तेरे आने की सदा हमको पड़ी जो बरफ की चादर ,पिघल तो सकती है भरे हैं खार ही राहों ,चलो ये माना है जुनूं हो दश्त में राहें , निकल तो सकती हैं नहीं है दोष ये माझी ,है…"
Apr 27
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-94
"अफ़रोज़ साहब, बेहतरीन गज़ल, मुबारकबाद"
Apr 27
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 84 in the group चित्र से काव्य तक
"जनाब तस्दीक़ साहब, चित्र का सजीव चित्रण और कलम में महारत ,मुबारक बाद कबूल कीजिए"
Apr 20
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 84 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय प्रतिभा जी ,हौसला अफज़ाई का शुक्रिया"
Apr 20
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 84 in the group चित्र से काव्य तक
"शक्ति छंद नगर धर्म काशी कथाओं गुनी यही देव भू है कहानी सुनी यही तीर पावन यही सुर नदी यही गंग हरती सभी की बदी सभी हाथ ऊपर उठाए हुए लगे है खुदा को मनाए हुए खुशी फूल बनके महकने लगे सभी चेहरे हैं दमकने लगे हुई भोर देखो नहाने चले किए पाप सारे मिटाने…"
Apr 20
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-93
"मौसम पे रवानी है आई, हर पात ही अब इतराता है उड़ता फिरे मस्ती में भंवरा, कलियों का ये दिल बहलाता है महकींं हैं फिज़ाएं अब सारी, बहकी सी हवा भी चलती है उड़ उड़ के दुपट्टा ये तेरा, फिर ज़ख्म कई दे जाता है नज़रों से मिली हैं नज़रें जो, छाया है नशा हम पे…"
Mar 23
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 83 in the group चित्र से काव्य तक
"जली आग चूल्हे पकी रोटियां बनी हैं नरम और गरम रोटियां नहीं माँ मुझे तू नज़र आ रही लगी भूख जोरों सता है रही मिली है गरीबी यही हाल है न सब्जी न चटनी नहीं दाल है लगे हाथ जब तक न तेरे हरे लगे पेट खाली न मेरा भरे न चकला न बेलन न बर्तन मिले मिली मुफलिसी…"
Mar 16
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91
"जनाब अहमद साहब , सभी शे'अरों का बारीकी से विशलेषण किया साथ में मशविरा भी पेश किया आप की नेक सलाह का शुक्रिया।"
Jan 27
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91
"मुसाफिर साहब, हौसला अफजाई का शुक्रिया"
Jan 27
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91
"धन्यवाद आदरणीय राजेश जी,महका ही लिखना था टाइपिंग मेंं ही रह गया।"
Jan 27
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91
"आदरणीय आरिफ़ जी,ज़र्रा नवाज़ी का शुक्रिया"
Jan 27
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91
"पलकों पे ख़्वाब है इक, अरमान हो न जाए दिलबर तू मेरे दिल का ,महमान हो न जाए यूँ रूठ के चले हो महफिल से दिल की मेरी महक चमन ये दिल का, वीरान हो न जाए पहुँचा बशर है अब तो, तारों के उस जहां में हैरत में है खुदा भी, भगवान हो न जाए दौरे तरक्की आया, कहते…"
Jan 27
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"धन्यवाद आरिफ़ जी, आप सब की सोहबत में बहुत कुछ सीखने को मिलेगा"
Jan 19
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"धन्यवाद सुरेंद्र जी, आप की सोहबत में बेहतर होगा ऐसी कामना करती हूँ।"
Jan 19

Profile Information

Gender
Female
City State
Gurgaon, harayana
Native Place
Punjab
Profession
Housewife
About me
I write hindi poetry and gazal haiku chand geet etc. ,,

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"उम्दा ग़ज़ल के लिये हार्दिक दाद। मक़्ते पर विशेष। वाह वाह"
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Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"मुहतरमा अंजलि साहिबा , अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं |"
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Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"जनाब मुनीश साहिब  , अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं |"
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Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"मुहतरम जनाब समर साहिब आ दाब, ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया | शेर 6…"
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Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"मुहतरमा अंजलि साहिबा, ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |"
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Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"जनाब नीलेश नूर साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |शब्द इरादा…"
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