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शिज्जु "शकूर"
  • Male
  • Raipur, C.G.
  • India
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शिज्जु "शकूर"'s Page

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Naveen Mani Tripathi commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post जितना बड़ा जो झूठा है वो, उतना ही अधिक चिल्लाता है - शिज्जु शकूर
"साहब शेर दर शेर उम्दा ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई आपको ।"
Mar 28
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post जितना बड़ा जो झूठा है वो, उतना ही अधिक चिल्लाता है - शिज्जु शकूर
"आद0 शिज्जू शकूर जी सादर अभिवादन। बढिया ग़ज़ल कही आपने।ह्रे शैर कुछ न कुछ अपने अंदर समेटे हुए है। मतला बहुत खूबसूरत। इस लोक का तुझको क्या कोई, है ज्ञान ज़रा बतला बाबा! अनदेखी कहानी गढ़-गढ़कर, परलोक मुझे दिखलाता है वाह क्या कहने। शैर दर शैर मुबारकवाद कुबूल…"
Mar 28
TEJ VEER SINGH commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post जितना बड़ा जो झूठा है वो, उतना ही अधिक चिल्लाता है - शिज्जु शकूर
"हार्दिक बधाई आदरणीय शिज्जू शकूर जी।लाज़वाब गज़ल। है रंग बदलने में माहिर, हर शख़्स सियासत के अंदर कुछ भी कहे वो लेकिन मतलब, कुछ और निकलकर आता है"
Mar 26
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post जितना बड़ा जो झूठा है वो, उतना ही अधिक चिल्लाता है - शिज्जु शकूर
"आ. भाई शिज्जू जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Mar 26
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post जितना बड़ा जो झूठा है वो, उतना ही अधिक चिल्लाता है - शिज्जु शकूर
"क्या कहने आदरणीय शानदार ग़ज़ल पढ़ने को मिली..सादर"
Mar 26
somesh kumar commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post जितना बड़ा जो झूठा है वो, उतना ही अधिक चिल्लाता है - शिज्जु शकूर
"है रंग बदलने में माहिर, हर शख़्स सियासत के अंदर कुछ भी कहे वो लेकिन मतलब, कुछ और निकलकर आता है   सियासत का यह शे र बेहद पसन्द आया |सारी गजल ही व्यंग्य से भरी हुई है |इस रचना पर दिली बधाई |"
Mar 25
Samar kabeer commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post जितना बड़ा जो झूठा है वो, उतना ही अधिक चिल्लाता है - शिज्जु शकूर
"जनाब शिज्जु शकूर साहिब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
Mar 25
Ajay Tiwari commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post जितना बड़ा जो झूठा है वो, उतना ही अधिक चिल्लाता है - शिज्जु शकूर
"आदरणीय शिज्जू जी, आपकी इस ग़ज़ल के बारे में एक दिलचस्प चीज ये है कि इसकी तकती 'हज़ज मुसद्दस अख़रब मक्फूफ़ महज़ूफ़ मुखन्नक मुजाइफ़' (मफ़ऊलु  मफ़ाईलुन  फेलुन मफ़ऊलु  मफ़ाईलुन  फेलुन > 221 1222 22 221 1222 22)…"
Mar 25
Ajay Tiwari commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post जितना बड़ा जो झूठा है वो, उतना ही अधिक चिल्लाता है - शिज्जु शकूर
"आदरणीय शिज्जू जी,  उम्दा ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई.   जितना बड़ा जो झूठा है वो, उतना ही अधिक चिल्लाता है आवाज़ के पीछे चुपके से, रस्ते से यूँ भी भटकाता है  :))))))))) आखिरी शेर भी बहुत अच्छा लगा . सादर "
Mar 25
Nilesh Shevgaonkar commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post जितना बड़ा जो झूठा है वो, उतना ही अधिक चिल्लाता है - शिज्जु शकूर
"आ. शिज्जू भाई,कल आयोजन में आपकी कमी खली...लेकिन   आप है कि दीपावली   खत्म होने के बाद पटाखे चला रहे हैं..बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है .... इंसान फ़कत है इक ज़र्रा, मिट जाएगा खुद इक झटके में आकाश को छूती मीनारें, बेकार ही तू बनवाता है...इस…"
Mar 25

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शिज्जु "शकूर" posted a blog post

जितना बड़ा जो झूठा है वो, उतना ही अधिक चिल्लाता है - शिज्जु शकूर

221 1222 22 221 1222 22जितना बड़ा जो झूठा है वो, उतना ही अधिक चिल्लाता हैआवाज़ के पीछे चुपके से, रस्ते से यूँ भी भटकाता है तुम बाँच रहे हो जो इतना, अज्दाद के किस्से मंचों सेउन किस्सों को सुनने वाला अब, पत्थर पे जबीं टकराता है इंसान फ़कत है इक ज़र्रा, मिट जाएगा खुद इक झटके मेंआकाश को छूती मीनारें, बेकार ही तू बनवाता है है रंग बदलने में माहिर, हर शख़्स सियासत के अंदरकुछ भी कहे वो लेकिन मतलब, कुछ और निकलकर आता है इस लोक का तुझको क्या कोई, है ज्ञान ज़रा बतला बाबा!अनदेखी कहानी गढ़-गढ़कर, परलोक मुझे…See More
Mar 25

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शिज्जु "शकूर" is attending मिथिलेश वामनकर's event
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ओबीओ साहित्योत्सव भोपाल 2018 at महादेवी वर्मा कक्ष, हिंदी भवन

April 15, 2018 from 10:30am to 7pm
आप सादर आमंत्रित हैं.See More
Feb 24

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शिज्जु "शकूर" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"शिरकत करने के लिए बधाई आ. नवीन मणि त्रिपाठी जी। मोहतरम समर कबीर साहिब के इस्लाह से ग़ज़ल में और निखार आ गया है।"
Feb 24

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शिज्जु "शकूर" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"सही पकड़े हैं :-)"
Feb 24

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शिज्जु "शकूर" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"अंग्रेज़ी तो मेरी भी ख़ास अच्छी नहीं है। :-) "
Feb 24

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शिज्जु "शकूर" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-92
"आदरणीय मनन कुमार सिंह सर मुशायरे में शिरकत करने के लिए बधाई"
Feb 24

Profile Information

Gender
Male
City State
Raipur
Native Place
Raipur
Profession
Creative writer in Konsole group
About me
I emotional and introvert person usually like to spend time alone, it is selfish nature because sometimes our beloved one wishing to spend time with us

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शिज्जु "शकूर"'s Blog

जितना बड़ा जो झूठा है वो, उतना ही अधिक चिल्लाता है - शिज्जु शकूर

221 1222 22 221 1222 22

जितना बड़ा जो झूठा है वो, उतना ही अधिक चिल्लाता है

आवाज़ के पीछे चुपके से, रस्ते से यूँ भी भटकाता है

 

तुम बाँच रहे हो जो इतना, अज्दाद के किस्से मंचों से

उन किस्सों को सुनने वाला अब, पत्थर पे जबीं टकराता है

 

इंसान फ़कत है इक ज़र्रा, मिट जाएगा खुद इक झटके में

आकाश को छूती मीनारें, बेकार ही तू बनवाता है

 

है रंग बदलने में माहिर, हर शख़्स सियासत के अंदर

कुछ भी कहे वो लेकिन मतलब, कुछ और…

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Posted on March 25, 2018 at 8:13am — 10 Comments

इसी दुनिया में अपनी मुख़्तसर दुनिया बनाता हूँ

1222 1222 1222 1222

ज़मीन-ओ-आसमाँ के दरमियाँ रस्ता बनाता हूँ

इसी दुनिया में अपनी मुख़्तसर दुनिया बनाता हूँ



चढ़ाकर चाक पर मिट्टी कहा कुम्हार ने मुझसे

जहाँ जैसी ज़रूरत है इसे वैसा बनाता हूँ



बना लेता है अपने आप ही ये मुख़्तलिफ़ शक्लें

मेरा फ़न सिर्फ़ इतना है कि आईना बनाता हूँ



गुज़श्ता ज़िंदगी के तज़्रबों से वाकिए चुनकर

अकेला होता हूँ जब भी, कोई किस्सा…

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Posted on February 22, 2018 at 11:24am — 5 Comments

ख़्वाब तूने कोई बुना होगा

2122 1212 22/112

ख़्वाब तूने कोई बुना होगा

तब तेरा रतजगा हुआ होगा

 

सर यक़ीनन मेरा झुकेगा जनाब

आपसे जब भी सामना होगा

 

मुद्दतों बाद मेरी याद आई

मुश्किलों से कहीं घिरा होगा

 

मुझको मेहनत लगी थी लिखने में

उसको एहसास इसका क्या होगा

 

शहर में होना आरज़ी है मगर

तज़्किरा मेरा बारहा होगा

 

आरज़ी – थोड़े समय के लिए, तज़्किरा – जिक्र

 

-मौलिक व अप्रकाशित

Posted on September 21, 2017 at 11:24am — 6 Comments

सच का चोगा पहना दो - शिज्जु शकूर

सच का चोगा पहना दो
झूठ का परचम लहरा दो

इसमें है साख तुम्हारी
कि सियारों को रँगवा दो

सच न ज़मीं तक आ जाए
सबको बाहम उलझा दो

लिखा हुआ है काग़ज़ पर
सच में भी वो दिखला दो

पहले जैसा था मेरा
घर वैसा अब लौटा दो

सबकुछ अच्छा-अच्छा है
अख़बारों में छपवा दो

ये भी आज चलन में है
सारे अहसान भुला दो

-मौलिक व अप्रकाशित

Posted on May 28, 2017 at 4:46pm — 7 Comments

Comment Wall (30 comments)

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At 10:50pm on April 18, 2016, RATNA PRIYA PANDEY said…
धन्यवाद सर
At 7:06pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 9:27pm on April 19, 2015, Mala Jha said…
सप्रेम धन्यवाद महोदय मुझे OBO जैसे प्रतिष्ठित मंच पर स्थान देने के लिए।बहुत बहुत आभार आपका।
At 9:48am on December 31, 2014, Rahul Dangi said…
आदरणीय शिज्जू "शकूर" जी आपका स्वागत है ! और धन्यवाद भी कि आपने मुझ कम बुद्धि को भी अपनी दोस्ती के काबिल समझा! सादर!
At 9:42pm on June 18, 2014, Sushil Sarna said…

aadrneey Shijju Shakoor saahib aapke margdarshan ka main aabhaaree hoon....koshish kroonga ki bataaee bahar pr aage badh skoon....tahe dil se shukriya

At 7:39pm on June 17, 2014, Sushil Sarna said…

हा हा हा …… बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय शिज्जु शकूर जी आपने हमारी रचना को कविता का दर्जा तो दिया। .... काश हमें भी ग़ज़ल लिखने का अंदाज़ आ जाए ? सर मेरी कोशिश तो ग़ज़ल लिखने की थी मगर बह्र में उलझता चला गया कभी ११२ कभी ११२१ करता फिर जब उलझन से छुटकारा न मिला तो रचना बना कर डाल दिया। आप की ज़र्रा नवाज़ी होगी अगर मेहरबानी करके इसी की नीचे लिखी चंद पंक्तियों की बह्र बना कर मुझ नौसिखिये को ग़ज़ल का हुनर सिखाएंगे। तकलीफ के लिए मुआफ़ी चाहता हूँ। शुक्रिया

अपनी हर सांस में...तुझे करीब पाता हूँ
तुझे हर ख्याल में अपना हबीब पाता हूँ
बिन तेरे ज़िंदगी की हर मसर्रत है झूठी
राहे वफ़ा में तुझे अपना नसीब पाता हूँ

At 3:39pm on June 3, 2014, Sushil Sarna said…

aadrbeey Shajju jee, namaskaar-kya apko aik takleef de sakta hoon ? aapkee kripa hogee yadi mujhe thoda sa trhee gazal kya hotee hai, btaayenge. gazal to samajh rhaa hoon pr trhee gazal smajh naheen aa rhee.aapke amuly smay men se kuch smay maang rhaa hoon, please dont mind. 

sushil sarna

At 10:59am on June 3, 2014, RACHNA JAIN said…

आपकी सभी रचनाएँ बहुत खूब हैं सर .... फिर भी, आपकी सलाह पर अमल करेंगे ... शुक्रिया !!

At 10:25am on June 3, 2014, RACHNA JAIN said…

बहुत खूब लिखा सर आपने... बधाई ...!!

At 5:30pm on December 13, 2013, Dr Dilip Mittal said…

 क्षणिकाये पसंद आने के लिये  धन्यवाद 

 
 
 

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