For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")


सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर"
  • Male
  • Raipur, C.G.
  • India
Share

शिज्जु "शकूर"'s Friends

  • सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
  • Rajkumar Shrestha
  • Anuj
  • Arun Arnaw Khare
  • KALPANA BHATT
  • Arpana Sharma
  • Sheikh Shahzad Usmani
  • Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"
  • jaan' gorakhpuri
  • Rahul Dangi
  • seemahari sharma
  • harivallabh sharma
  • Mukesh Verma "Chiragh"
  • M Vijish kumar
  • atul kushwah
 

शिज्जु "शकूर"'s Page

Latest Activity


सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"निस्बतें इस दौर में यारो कहानी हो गईं और बातें भी उसूलों की पुरानी हो गईं मुफ़लिसी, बदकारियाँ, महँगाई, हिंसा, नफ़रतें ग़ालिबन अब ये बलाएँ आसमानी हो गईं दायरा मेरा बहुत छोटा है ये दुनिया बड़ी मेरी सारी दास्ताँ यूँ लनतरानी हो गईं जब तिरंगे में…"
yesterday

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post पत्ता था, सब्ज़, टूटके खिड़की में आ गया
"ग़ज़ल को समय देने के लिए आप सभी का तहेदिल से शुक्रिया"
Thursday
Ravi Shukla commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post पत्ता था, सब्ज़, टूटके खिड़की में आ गया
"आदरणीय शिज्जु भाई इस उम्दा गजल के लिए दिली मुबारकबाद कुबूल करें  हर शेर कमाल का है"
Tuesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post पत्ता था, सब्ज़, टूटके खिड़की में आ गया
"वाह आदरणीय बेहतरीन गजल बधाई"
Mar 19
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post पत्ता था, सब्ज़, टूटके खिड़की में आ गया
"वाह शिज्जु शकूर साहिब बहुत ही उम्दा ग़ज़ल कही है। शेर दर शेर दाद कुबूल फरमाएं। मतला और मकता के शेरों का तो क्या कहना। बहुत खूब।"
Mar 19
TEJ VEER SINGH commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post पत्ता था, सब्ज़, टूटके खिड़की में आ गया
"हार्दिक बधाई शिज्जु "शकूर" जी ।बेहतरीन गज़ल। ख़्वाबों को ज़िन्दा करके भी क्या होता, दोस्तो! मेरा जो वक्त था वो तो कब का चला गया"
Mar 18

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post पत्ता था, सब्ज़, टूटके खिड़की में आ गया
"आ. सतविंदर जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया"
Mar 18

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post पत्ता था, सब्ज़, टूटके खिड़की में आ गया
"मोहतरम मोहम्मद आरिफ़ साहिब आपका तहेदिल से शुक्रिया"
Mar 18

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"मोहतरम समर कबीर साहिब बेहतरीन रचना हुई है"
Mar 17
सतविन्द्र कुमार commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post पत्ता था, सब्ज़, टूटके खिड़की में आ गया
"आदरणीय शिज्जु शकूर सर,सादर वन्दन!इस उम्दा गजल के लिए दिली मुबारकबाद!"
Mar 17
Mohammed Arif commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post पत्ता था, सब्ज़, टूटके खिड़की में आ गया
"आदरणीय शिज्जू शकूर जी आदाब,बेहतरीन ग़ज़ल । शेर दर शेर दाद के साथ मुबारक़बाद क़ुबूल कीजिए ।"
Mar 17

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" posted a blog post

पत्ता था, सब्ज़, टूटके खिड़की में आ गया

221 2121 1221 212पत्ता था, सब्ज़, टूटके खिड़की में आ गयाहस्ती शजर की बाकी है मुझको बता गया माना हवाएँ तेज़ हैं मेरे खिलाफ़ भीलेकिन जुनून लड़ने का इस दिल पे छा गया खोने को पास कुछ भी नहीं था हयात मेंकिसकी तलाफ़ी हो अभी तक मेरा क्या गया शायद ये दुनिया मेरे लिए थी नहीं कभीफिर शिकवा क्यों करुँ कि खुदा फ़ैज़ उठा गया ख़्वाबों को ज़िन्दा करके भी क्या होता, दोस्तो!मेरा जो वक्त था वो तो कब का चला गया Meaning:तलाफ़ी – क्षतिपूर्ति, फ़ैज़ -  अनुकम्पा -मौलिक व अप्रकाशितSee More
Mar 17

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" commented on जयनित कुमार मेहता's blog post अभी शे'र हमने सुनाया कहाँ है (ग़ज़ल)
"अच्छी ग़ज़ल है आ. जयनित भाई, समर साहब के शब्दों पर गौर कीजिएगा"
Mar 9

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" commented on Mahendra Kumar's blog post एक ख़तरनाक आतंकवादी
"आ. महेंद्र कुमार जी यदि आपकी यह कविता किसी खास घटना के परिप्रेक्ष्य में नहीं है तो बहुत अच्छी कविता है। अभी कुछ महीने पहले मैंने एक खबर पढ़ी थी एक बंदे को पुलिस आतंकवादी कहकर उठा ले गई थी 23 वर्ष जेल में रहने के बाद यह साबित हुआ था कि वो आतंकवादी…"
Mar 9
Mahendra Kumar commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post जो अपने ख्वाब के लिए जाँ से गुज़र गए
"थोड़ा असर था वक्त का थोड़ी मेरी शिकस्त जो ज़ीस्त से जु़ड़े थे वो अहसास मर गए ...वाह! बहुत शानदार ग़ज़ल है आ. शिज्जु "शकूर" सर। शेर दर शेर मुबारक़बाद क़ुबूल कीजिए। सादर।"
Mar 5
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post जो अपने ख्वाब के लिए जाँ से गुज़र गए
"आदरणीय शिज्जू शकूर जी सादर अभिवादन। बेहद उम्दा अशआर के साथ उम्दा गजल। दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।"
Mar 4

Profile Information

Gender
Male
City State
Raipur
Native Place
Raipur
Profession
Creative writer in Konsole group
About me
I emotional and introvert person usually like to spend time alone, it is selfish nature because sometimes our beloved one wishing to spend time with us

शिज्जु "शकूर"'s Photos

Loading…
  • Add Photos
  • View All

शिज्जु "शकूर"'s Blog

पत्ता था, सब्ज़, टूटके खिड़की में आ गया

221 2121 1221 212

पत्ता था, सब्ज़, टूटके खिड़की में आ गया

हस्ती शजर की बाकी है मुझको बता गया

 

माना हवाएँ तेज़ हैं मेरे खिलाफ़ भी

लेकिन जुनून लड़ने का इस दिल पे छा गया

 

खोने को पास कुछ भी नहीं था हयात में

किसकी तलाफ़ी हो अभी तक मेरा क्या गया

 

शायद ये दुनिया मेरे लिए थी नहीं कभी

फिर शिकवा क्यों करुँ कि खुदा फ़ैज़ उठा गया

 

ख़्वाबों को ज़िन्दा करके भी क्या होता, दोस्तो!

मेरा जो वक्त था…

Continue

Posted on March 17, 2017 at 2:30pm — 9 Comments

जो अपने ख्वाब के लिए जाँ से गुज़र गए

221 2121 1221 212

.

जो अपने ख्वाब के लिए जाँ से गुज़र गए

खुद ख़्वाब बनके सबके दिलों में उतर गए

 

थोड़ा असर था वक्त का थोड़ी मेरी शिकस्त

जो ज़ीस्त से जु़ड़े थे वो अहसास मर गए

 

रिश्तों पे चढ़ गया है मुलम्मा फ़रेब का

अब जाने रंग कुदरती सारे किधर गए

 

ये सोच ही रहा था कि मैं क्या नया लिखूँ

फिर से वही चराग़ वरक़ पर उभर गए

 

बिखरे हुए थे दर्द तुम्हारी किताब में

दिल से गुज़र के वो मेरी आँखों…

Continue

Posted on March 1, 2017 at 10:30am — 9 Comments

इस तरह हमने दिन गुज़ारा है- ग़ज़ल

2122 1212 22/112



इस तरह हमने दिन गुज़ारा है

बारहा खुद को ही पुकारा है



संग से क्या डरेगा वो जिसने

कू ए क़ातिल में दिन ग़ुज़ारा है



ज़र्द पत्ता हूँ मैं खिजाँ ने मुझे

पेड़ की शाख से उतारा है



कम है सोचो तो काइनात भी और

जीना हो तो जहान सारा है



जज़्ब कर दर्द मुस्कुराहट में

हमने चेहरा बहुत सँवारा है



हमपे कुछ इख़्तियार तो रखते

जो हमारा है वो तुम्हारा है



बाँट सकते हो तुम भी अपने ग़म

“जो… Continue

Posted on January 31, 2017 at 9:11pm — 12 Comments

वक्त मेरे हाथों से, यूँ फिसल गया चुपचाप

212 1222 212 1222

वक्त मेरे हाथों से, यूँ फिसल गया चुपचाप

मेरी हर तमन्ना को, वो कुचल गया चुपचाप

 

चाक दिल, शिकस्ता पा, बेचराग़ गलियों से

भूल अपने ख्वाबों को, मैं निकल गया चुपचाप

 

एक आइना था…

Continue

Posted on January 19, 2017 at 6:16pm — 7 Comments

Comment Wall (30 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 10:50pm on April 18, 2016, RATNA PRIYA PANDEY said…
धन्यवाद सर
At 7:06pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 9:27pm on April 19, 2015, Mala Jha said…
सप्रेम धन्यवाद महोदय मुझे OBO जैसे प्रतिष्ठित मंच पर स्थान देने के लिए।बहुत बहुत आभार आपका।
At 9:48am on December 31, 2014, Rahul Dangi said…
आदरणीय शिज्जू "शकूर" जी आपका स्वागत है ! और धन्यवाद भी कि आपने मुझ कम बुद्धि को भी अपनी दोस्ती के काबिल समझा! सादर!
At 9:42pm on June 18, 2014, Sushil Sarna said…

aadrneey Shijju Shakoor saahib aapke margdarshan ka main aabhaaree hoon....koshish kroonga ki bataaee bahar pr aage badh skoon....tahe dil se shukriya

At 7:39pm on June 17, 2014, Sushil Sarna said…

हा हा हा …… बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय शिज्जु शकूर जी आपने हमारी रचना को कविता का दर्जा तो दिया। .... काश हमें भी ग़ज़ल लिखने का अंदाज़ आ जाए ? सर मेरी कोशिश तो ग़ज़ल लिखने की थी मगर बह्र में उलझता चला गया कभी ११२ कभी ११२१ करता फिर जब उलझन से छुटकारा न मिला तो रचना बना कर डाल दिया। आप की ज़र्रा नवाज़ी होगी अगर मेहरबानी करके इसी की नीचे लिखी चंद पंक्तियों की बह्र बना कर मुझ नौसिखिये को ग़ज़ल का हुनर सिखाएंगे। तकलीफ के लिए मुआफ़ी चाहता हूँ। शुक्रिया

अपनी हर सांस में...तुझे करीब पाता हूँ
तुझे हर ख्याल में अपना हबीब पाता हूँ
बिन तेरे ज़िंदगी की हर मसर्रत है झूठी
राहे वफ़ा में तुझे अपना नसीब पाता हूँ

At 3:39pm on June 3, 2014, Sushil Sarna said…

aadrbeey Shajju jee, namaskaar-kya apko aik takleef de sakta hoon ? aapkee kripa hogee yadi mujhe thoda sa trhee gazal kya hotee hai, btaayenge. gazal to samajh rhaa hoon pr trhee gazal smajh naheen aa rhee.aapke amuly smay men se kuch smay maang rhaa hoon, please dont mind. 

sushil sarna

At 10:59am on June 3, 2014, RACHNA JAIN said…

आपकी सभी रचनाएँ बहुत खूब हैं सर .... फिर भी, आपकी सलाह पर अमल करेंगे ... शुक्रिया !!

At 10:25am on June 3, 2014, RACHNA JAIN said…

बहुत खूब लिखा सर आपने... बधाई ...!!

At 5:30pm on December 13, 2013, Dr Dilip Mittal said…

 क्षणिकाये पसंद आने के लिये  धन्यवाद 

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Anuraag Vashishth replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 81 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"आदरणीय राणा प्रताप सिंह जी,  'लोकतंत्र की बातें अब किस्सा कहानी हो गईं' की जगह…"
3 hours ago
Anuraag Vashishth replied to Rana Pratap Singh's discussion ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 81 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)
"आदरणीय राणा प्रताप सिंह जी, इस त्वरित प्रस्तुति के लिए बहुत बहुत धन्यवाद.    "
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Rana Pratap Singh posted a discussion

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 81 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)

परम आत्मीय स्वजन 81वें तरही मुशायरे का संकलन हाज़िर कर रहा हूँ| मिसरों को दो रंगों में चिन्हित किया…See More
5 hours ago
भुवन निस्तेज replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय गुमनाम भाई ग़जल बेशक अच्छी हुई है, पर गिरह का शेर भी नदारद है और रदीफ़ की क्रिया भी एक वचन हो…"
5 hours ago
अजीत शर्मा 'आकाश' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आदरणीय भाई.... कृपया मेरी बात को हल्की-फुल्की टिप्पणी के रूप में लीजिए !!!"
5 hours ago
Anuraag Vashishth replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आ. आकाश जी. क्या खूब कहा है ! ज़ालिमों ने बन्द कर दी सारे सूबे में शराब किस क़दर मुश्किल हमें शामें…"
5 hours ago
भुवन निस्तेज replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"सभी अशआर बस मन को भा गए. और बाबा जुकर वाले शेर का तो बस... बधाई हो आदरणीय..."
5 hours ago
भुवन निस्तेज replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"वर्तमान के प्रति आपकी चिन्ता इस ग़ज़ल में बखूबी झलक रही है आ० राजेश दीदी. कृप्या दाद कबूल करें ."
5 hours ago
अजीत शर्मा 'आकाश' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"बहुत आभार नादिर भाई !!!"
5 hours ago
अजीत शर्मा 'आकाश' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"Like.... bhaai !!!  "
5 hours ago
अजीत शर्मा 'आकाश' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"जी, सर.... आप सामने आये, मैं होश में आ गया.... अत्यन्त आभार आपका आदरणीय समर साहब.... बरसी में…"
5 hours ago
Anuraag Vashishth replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-81
"आ. मिथिलेश बहुत अच्छी ग़ज़ल है बधाई हो."
5 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service