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शिज्जु "शकूर"
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शिज्जु "शकूर" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-84
"शुक्रिया जनाब, संकलन के बाद दुरूस्त करवा लूँगा"
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"“अल्फ़ाज़ के ख़ज़ाने लुटाकर चले गए शाइर हयात में कई आकर चले गए   खुद मुफ़लिसी में जिए उम्र भर मगर जर्रों को आफ़ताब बनाकर चले गए”   आए थे दनदनाते हुए रेल की तरह लेकिन हुज़ूर भाव न पाकर चले गए   जब हक़बयानी मेरी न आई पसंद…"
Jun 23
vijay nikore commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post सच का चोगा पहना दो - शिज्जु शकूर
"//ये भी आज चलन में है सारे अहसान भुला दो// अच्छी गज़ल के लिए हार्दिक बधाई।"
Jun 3
KALPANA BHATT commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post सच का चोगा पहना दो - शिज्जु शकूर
"सच का चोगा पहना दोझूठ का परचम लहरा दोइसमें है साख तुम्हारीकि सियारों को रँगवा दो वाह क्या बात कही है आपने आदरणीय सिज्जू भैया | बहुत प्यारी ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई |"
Jun 3
Shyam Narain Verma commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post सच का चोगा पहना दो - शिज्जु शकूर
"वाह ! बहुत खूब | सुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई"
May 30
बसंत कुमार शर्मा commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post सच का चोगा पहना दो - शिज्जु शकूर
"आदरणीय शिज्जु शकूर जी बहुत सुंदर ग़ज़ल हुई है"
May 30
बसंत कुमार शर्मा commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post सच का चोगा पहना दो - शिज्जु शकूर
May 30
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post सच का चोगा पहना दो - शिज्जु शकूर
"वाह आदरणीय बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई..सादर"
May 29
Mohammed Arif commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post सच का चोगा पहना दो - शिज्जु शकूर
"आदरणीय शिज्जू शकूर जी आदाब, छोटी बह्र वाली बेहतरीन ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल करें ।"
May 28

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शिज्जु "शकूर" posted a blog post

सच का चोगा पहना दो - शिज्जु शकूर

सच का चोगा पहना दोझूठ का परचम लहरा दोइसमें है साख तुम्हारीकि सियारों को रँगवा दोसच न ज़मीं तक आ जाएसबको बाहम उलझा दोलिखा हुआ है काग़ज़ परसच में भी वो दिखला दोपहले जैसा था मेराघर वैसा अब लौटा दोसबकुछ अच्छा-अच्छा हैअख़बारों में छपवा दोये भी आज चलन में हैसारे अहसान भुला दो-मौलिक व अप्रकाशितSee More
May 28

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शिज्जु "शकूर" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"मोहतरम नादिर खाँ साहिब बेहतरीन ग़ज़ल हुई है दाद ओ मुबारकबाद कुबूल फरमाएँ"
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शिज्जु "शकूर" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"अच्छी ग़ज़ल हुई है आ. अजय जी बधाई आपको"
May 27

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शिज्जु "शकूर" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-83
"आ. महेंद्र कुमार जी इस ग़ज़ल के लिए बहुत बहुत बधाई आपको"
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Profile Information

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Male
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Raipur
Native Place
Raipur
Profession
Creative writer in Konsole group
About me
I emotional and introvert person usually like to spend time alone, it is selfish nature because sometimes our beloved one wishing to spend time with us

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सच का चोगा पहना दो - शिज्जु शकूर

सच का चोगा पहना दो
झूठ का परचम लहरा दो

इसमें है साख तुम्हारी
कि सियारों को रँगवा दो

सच न ज़मीं तक आ जाए
सबको बाहम उलझा दो

लिखा हुआ है काग़ज़ पर
सच में भी वो दिखला दो

पहले जैसा था मेरा
घर वैसा अब लौटा दो

सबकुछ अच्छा-अच्छा है
अख़बारों में छपवा दो

ये भी आज चलन में है
सारे अहसान भुला दो

-मौलिक व अप्रकाशित

Posted on May 28, 2017 at 4:46pm — 7 Comments

दिल ए नाकाम पर हँसी आई

2122/1122 1212 22/112

दिल ए नाकाम पर हँसी आई

तेरे इलज़ाम पर हँसी आई



जिस मुहब्बत की आरज़ू थी बहुत

उसकेे अंजाम पर हँसी आई



दास्ताँ अपनी लिखने बैठा था

अपने इस काम पर हँसी आई



जिसमें तुमने कभी रखा था मुझे

आज उस दाम पर हँसी आई



मेरे क़ातिल का तज़किरा जो हुआ

तो हर इक नाम पर हँसी आई।



दफ्अतन मेरी जाँ से लिपटे हुए

सभी आलाम पर हँसी आई



सारे असरार जब खुले मुझपर

अपने औहाम पर हँसी… Continue

Posted on April 28, 2017 at 5:26pm — 23 Comments

कितने अच्छे थे मेरा ऐब बताने वाले

2122 1122 1122 22/112

कितने अच्छे थे मेरा ऐब बताने वाले

वो मेरे दोस्त मुझे रस्ता दिखाने वाले



वक्त ने, काश! उन्हें रुकने दिया होता ज़रा

साथ ही छोड़ गए साथ निभाने वाले



मुफ़लिसी मक्र की छाई है सियाही अब भी

पर बताओ हैं कहाँ शम्अ जलाने वाले



अपने क़ातिल से शिकायत नहीं कोई मुझको

कर गए ग़र्क मेरी कश्ती, बचाने वाले



खूब तासीर नज़र आई मुहब्बत की यूँ

रो पड़े जाँ को मेरी फ़ैज़ उठाने वाले



एकता टूटने पाए न कभी, मसनद पर

आके बैठे…

Continue

Posted on April 25, 2017 at 11:30am — 20 Comments

दुआओं की पहुँच तो आसमाँ तक है

1222 1222 1222
दुआओं की पहुँच तो आसमाँ तक है
मगर तू बोल तेरी हद कहाँ तक है

तेरी ख़ामोशी तेरा घर जला देगी
अभी शोला पड़ोसी के मकाँ तक है

ज़माना चाँद को छू आया है लेकिन
तू अब भी जुगनुओं की दास्ताँ तक है

परस्तिश देखिए गौ माँ के भक्तों की
अक़ीदत सिर्फ़ उन सबकी ज़बाँ तक है

वहाँ से देखता हूँ दुनिया को ऐ जाँ
रसाई तेरी नज़रों की जहाँ तक है

Meaning:
परस्तिश - पूजा, अक़ीदत - श्रद्धा
रसाई - पहुँच
-मौलिक व अप्रकाशित

Posted on April 12, 2017 at 7:44pm — 6 Comments

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At 10:50pm on April 18, 2016, RATNA PRIYA PANDEY said…
धन्यवाद सर
At 7:06pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 9:27pm on April 19, 2015, Mala Jha said…
सप्रेम धन्यवाद महोदय मुझे OBO जैसे प्रतिष्ठित मंच पर स्थान देने के लिए।बहुत बहुत आभार आपका।
At 9:48am on December 31, 2014, Rahul Dangi said…
आदरणीय शिज्जू "शकूर" जी आपका स्वागत है ! और धन्यवाद भी कि आपने मुझ कम बुद्धि को भी अपनी दोस्ती के काबिल समझा! सादर!
At 9:42pm on June 18, 2014, Sushil Sarna said…

aadrneey Shijju Shakoor saahib aapke margdarshan ka main aabhaaree hoon....koshish kroonga ki bataaee bahar pr aage badh skoon....tahe dil se shukriya

At 7:39pm on June 17, 2014, Sushil Sarna said…

हा हा हा …… बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय शिज्जु शकूर जी आपने हमारी रचना को कविता का दर्जा तो दिया। .... काश हमें भी ग़ज़ल लिखने का अंदाज़ आ जाए ? सर मेरी कोशिश तो ग़ज़ल लिखने की थी मगर बह्र में उलझता चला गया कभी ११२ कभी ११२१ करता फिर जब उलझन से छुटकारा न मिला तो रचना बना कर डाल दिया। आप की ज़र्रा नवाज़ी होगी अगर मेहरबानी करके इसी की नीचे लिखी चंद पंक्तियों की बह्र बना कर मुझ नौसिखिये को ग़ज़ल का हुनर सिखाएंगे। तकलीफ के लिए मुआफ़ी चाहता हूँ। शुक्रिया

अपनी हर सांस में...तुझे करीब पाता हूँ
तुझे हर ख्याल में अपना हबीब पाता हूँ
बिन तेरे ज़िंदगी की हर मसर्रत है झूठी
राहे वफ़ा में तुझे अपना नसीब पाता हूँ

At 3:39pm on June 3, 2014, Sushil Sarna said…

aadrbeey Shajju jee, namaskaar-kya apko aik takleef de sakta hoon ? aapkee kripa hogee yadi mujhe thoda sa trhee gazal kya hotee hai, btaayenge. gazal to samajh rhaa hoon pr trhee gazal smajh naheen aa rhee.aapke amuly smay men se kuch smay maang rhaa hoon, please dont mind. 

sushil sarna

At 10:59am on June 3, 2014, RACHNA JAIN said…

आपकी सभी रचनाएँ बहुत खूब हैं सर .... फिर भी, आपकी सलाह पर अमल करेंगे ... शुक्रिया !!

At 10:25am on June 3, 2014, RACHNA JAIN said…

बहुत खूब लिखा सर आपने... बधाई ...!!

At 5:30pm on December 13, 2013, Dr Dilip Mittal said…

 क्षणिकाये पसंद आने के लिये  धन्यवाद 

 
 
 

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