For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

munish tanha
Share on Facebook MySpace

Munish tanha's Friends

  • शिज्जु "शकूर"

munish tanha's Groups

 

munish tanha's Page

Latest Activity

munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-160
"जिसे याद आया वही भेज दे मेरी लाज रख जौहरी भेज दे तुझे सब पता है खबर है तुझे मैं प्यासा फिरूँ माश्की भेज दे अंधेरा दिखे हर जगह क्यूँ मुझे लिफाफे में कुछ रौशनी भेज दे खुदा ने बताया सदा सच बोलो अगर सच खुदा तो खुशी भेज दे मिलेगी सजा भूलने पर…"
Oct 27, 2023
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-159
"चुपके से याद आ कोई सहला गई मुझेमहबूब ये शराब तो बहका गई मुझे वाहेगुरु मुआफ़ करे आपकी खताइक सोच सिर्फ ये मेरी महका गई मुझे लड़ता रहा मैं झूठ से देखो तो उम्र भरफिर झूठ बोल आज वो दहका गई मुझे नदिया में शोर देख लो आई है बाढ़ भीगिरने लगे मकान नजर आ गई…"
Sep 27, 2023
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-158
"हुआ क्या जो मैंने मुलाकात की करो तुम न बारिश सवालात की अरे! कल मिले थे इसी चौंक पर थे बैठे यहीं चाय पी बात की जरा खुल के बोलो बताओ मुझे ये तस्वीर कैसी है हालात की मुझे जम के पीटा नचाया गया कहां रात भूले हवालात की बिना पेड़ शिमला तो शिमला नहीं…"
Aug 27, 2023
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-158
"अभी आप से जो मैंनें बात की खुदा ने सुना और बरसात की तुझे सब बताया तुझे सब पता करो तुम न अब बात हालात की दिया छोड़ उसको ज़माना हुआ नहीं बात भाती खरावात की मुझे जम के पीटा नचाया गया कहां रात भूले हवालात की मिले जो बुरा तो सुधारो उसे न सोचो इसे…"
Aug 25, 2023
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-156
"  प्यार किया जनाब ने और कमाल कर दिया कैद मुआफ़ हो गई साथ बहाल कर दिया ध्यान गुरु की बात पे याद करो सभी सबक संग रही यही नजर यार निढाल कर दिया उम्र गुजर गई समझ धूप अगर निकल गईफिक्र इसी ने शहर में आज बवाल कर दिया साथ जवाब ले के आया मैं तो हर…"
Jun 23, 2023

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" and munish tanha are now friends
Dec 26, 2022
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आदरणीय अमीरुद्दीन साहिब अहंकार की जगह अभिमान एवं खाके जाने की जगह फीके दाने हो गए या फिर जो आपको बेहतर लगे वो बताएं"
Jan 29, 2022
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-139
"आप हम से क्या मिले सपने सुहाने हो गए दर्द आंसू दूर भागे गम फसाने हो गए फिक्र छूटी जब मिला मैं आज अपने आप से सच बताऊं रब को पाया फिर तराने हो गए ऐब दुर्योधन में रावण की तरह अहंकार था दम्भ के प्रतीक दोनो खाके - जाना हो गए खेल कुर्सी का अनोखा क्या…"
Jan 28, 2022
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
" आदरणीय समर कबीर साहिब जी पिछले माह हार्ट अटैक की वजह से ग़ज़ल पर ध्यान नहीं दे पाया आगे से आपकी बातों का ध्यान रखूंगा हौंसला अफ़जाई के लिए शुक्रिया  अब देखिएगा राम हो सीता के तुम राधे के मोहन हो तुम्हीं रूह करती याद तुमको ज्यूँ  दिवानी…"
Dec 29, 2021
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीया दीपांजलि दुबे जी बहुत बहुत शुक्रिया"
Dec 29, 2021
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय शिज्जु शकूर जी बहुत बहुत शुक्रिया"
Dec 29, 2021
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीया अंजुमन मंसूरी आरज़ू जी शुक्रिया"
Dec 29, 2021
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीया ऋचा यादव जी शुक्रिया"
Dec 29, 2021
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय रवि शुक्ला जी शुक्रिया "
Dec 29, 2021
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी बहुत बहुत शुक्रिया "
Dec 29, 2021
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-138
"आदरणीय दंडपाणि नाहक जी बहुत शुक्रिया"
Dec 29, 2021

Profile Information

Gender
Male
City State
nadaun, himachal
Native Place
india
Profession
govt. service
About me
believes in god and writing is my passion
ग़ज़ल
जिन्दगी में न वन्दगी आई
देख सब से बड़ी ये रुसवाई
राम अल्लाह सच गुरु नानक
बात यीशू ने सच की बतलाई
आखरी वक्त काम आएँगे
सीख रिश्तों की थोड़ी तुरपाई
साथ माँ बाप के नहीं रहता
जिन्दगी कैसे मोड पर लाई
भेष में साधू के छुपा रावण
भेद सीता कहाँ समझ पाई
अब भरोसा करें बात किस पर
यार जिगरी हुआ है हरजाई
काश “तन्हा” मिले पता उसका
फिर बजेगी खुशी की शेहनाई

 मौलिक व अप्रकाशित 

Munish tanha's Blog

फिर उठीं है जाग देखों शहर में शैतानियाँ

फिर उठीं है जाग देखों शहर में शैतानियाँ

दर्द आहों में बदलने क्यूँ लगी कुर्वानियाँ

जान लेने को खड़े तैयार सारे आदमी

हर जगह बढ़ने लगी है आज कल विरानियाँ

घूमते थे रात दिन हम आपकी ही चाह में

जब समझ आया खुदा तो हो गईं आसानियाँ

जोड़ तिनके है बनाया आशियाँ तुम सोच लो

आबरू इस में छुपी है मत करो नादानियाँ

गंध आने है लगी क्यूँ फिर यहाँ बारूद की

याद कर तू बस खुदा को छोड़ बेईमानियाँ

आदमी मजबूर देखो हो गया इस दौर में

खून में शामिल…

Continue

Posted on March 10, 2019 at 8:00pm — 3 Comments

इस तरह जिन्दगी तमाम करें

इस तरह जिन्दगी तमाम करें
लोग आ कर हमें सलाम करें
झूठ का अब न एहतराम करें
इस तरह का भी इंतिजाम करें
तू वना खुद को इस तरह शीशा
देख चेहरा सभी सलाम करें
इस तरह वख्श बन्दगी दाता
सुबह से शाम राम-राम करें
आप के हाथ अब नहीं बाजी
आप अब और कोई काम करें
आज तौफिक दे खुदा सबको
देश पर जां लुटा के नाम करें
देख नफरत उदास है “तन्हा”
आस्तां में कहीं कयाम करें
मुनीश “तन्हा”
मौलिक व् अप्रकाशित

Posted on November 29, 2018 at 9:30pm — 2 Comments

ग़ज़ल: जिन्दगी में न वन्दगी आई

जिन्दगी में न वन्दगी आई
देख सब से बड़ी ये रुसवाई
राम अल्लाह सच गुरु नानक
बात यीशू ने सच की बतलाई
आखरी वक्त काम आएँगे
सीख रिश्तों की थोड़ी तुरपाई
साथ माँ बाप…
Continue

Posted on October 16, 2017 at 9:30am — 4 Comments

इस प्यार को सदा ही निभाते रहेंगे हम

२२१ – २१२२ -१२२१ -२१२

इस प्यार को सदा ही निभाते रहेंगे हम

दुश्वार रास्ता हो भले पर चलेंगे हम

सच बोलने के साथ में हिम्मत अगर रही

फिर फूल की तरह ही सदा वस खिलेंगे हम

जब सांस थी तो कर्म न अच्छा कभी किया

इक आग जुर्म की है जिसे अब सहेंगे हम

तरकीब जिन्दगी में अगर काम आ गई

मुंह आईने में देख के परदे सिलेंगे हम

है चैन जिन्दगी में कहाँ ढूँढ़ते फिरें

दिन रात के हिसाब में उलझे मिलेंगे हम

मैली करो न सोच खुदा से जरा डरो

टेढ़ी नजर हुई तो…

Continue

Posted on August 31, 2017 at 3:30pm — 6 Comments

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 7:54pm on April 20, 2016,
प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर
said…

ओबीओ परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है मोहतरम मुनीष तन्हा जी.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Euphonic Amit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167
"ग़ज़ल ~2122 1122 1122 22/112 तोड़ कर दर्द की दीवार वो बाहर निकला  दिल-ए-मुज़्तर से मिरे एक…"
4 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक ..रिश्ते
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहे रचे हैं। हार्दिक बधाई।"
Tuesday
Sushil Sarna posted blog posts
Sunday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-167

परम आत्मीय स्वजन,ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 167 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है ।इस बार का…See More
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-109 (सियासत)
"यूॅं छू ले आसमाॅं (लघुकथा): "तुम हर रोज़ रिश्तेदार और रिश्ते-नातों का रोना रोते हो? कितनी बार…"
Apr 30
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-109 (सियासत)
"स्वागतम"
Apr 29
Vikram Motegi is now a member of Open Books Online
Apr 28
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .पुष्प - अलि

दोहा पंचक. . . . पुष्प -अलिगंध चुराने आ गए, कलियों के चितचोर । कली -कली से प्रेम की, अलिकुल बाँधे…See More
Apr 28
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आदरणीय दयाराम मेठानी जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया।"
Apr 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आ. भाई दयाराम जी, सादर आभार।"
Apr 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आ. भाई संजय जी हार्दिक आभार।"
Apr 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-166
"आ. भाई मिथिलेश जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Apr 27

© 2024   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service