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munish tanha
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munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"गीत उसने ग़म के ही हमको गवाए उम्रभर प्यार में जिसको हसीं नग़्मा समझ बैठे थे हम | आदरणीय अरमान जी बहुत बढ़िया बधाई स्वीकार करें"
Feb 22
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"जी, बहुत बहुत शुक्रिया नाहक जी"
Feb 22
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"जी ,शुक्रिया राजेश कुमारी जी"
Feb 22
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"जी ,शुक्रिया शुक्ला जी"
Feb 22
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"जी ,शुक्रिया अरमान जी "
Feb 22
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"जी ,शुक्रिया लक्ष्मण जी"
Feb 22
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"शुक्रिया शहीद जी ,आपको भी शिवरात्रि की बहुत बहुत बधाई"
Feb 22
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"जी शुक्रिया जनाब"
Feb 22
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"बहुत बहुत शुक्रिया जनाब "
Feb 22
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"आस्तीनों में बहुत फुफकारते विषधर यहांगेसुओं से उठ रहा झोंका समझ बैठे थे हम। आदरणीय मनन जी बहुत बढ़िया बधाई स्वीकार करें"
Feb 22
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"धार कर शिव ने स्वयं हर शक्ति पायी फिर भलानार को क्यों मुक्ति पर ताला समझ बैठे थे हम। आदरणीय लक्ष्मण धामी जी बहुत बढ़िया,बधाई स्वीकार करें"
Feb 22
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"इस लिए करते रहे दीदार दिलबर रात भर माह ए - कामिल को तेरा चहरा समझ बैठे थे हम l आदरणीय अहमद खान जी बहुत बढ़िया ,बधाई स्वीकार करें' \"
Feb 22
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"'यह भी इक धोका ही था जो धूप में तुझको सराब ।तिश्नगी के वास्ते दरिया समझ बैठे थे हम।' आदरणीय नवीन जी बहुत बढ़िया ,बधाई स्वीकार करें"
Feb 22
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"'कह दिया सो कह दिया ऐसे नहीं चलता यहाँहर किसी को ख़ुद सा ही सादा समझ बैठे थे हम' आदरणीय   'शाहिद' जी बहुत बढ़िया ,बधाई स्वीकार करें|"
Feb 22
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"आपको नफरत थी हमसे क्या समझ बैठे थे हमनासमझ थे आपको अपना समझ बैठे थे हम        चैन  लूटा  नींद  लूटी और  लूटा   आशियांइक हसीं चेहरे को भी कैसा समझ बैठे थे हम जख्म आहें चाक  सीना ये  उसी…"
Feb 21
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-114
"सामने आंख के जब ऐसा नजारा निकला देख कर होश उड़े दिल भी हमारा निकला बदनसीबी न कहें और कहें क्या इसको घर की जानिब जो चले हम तो शिकारा निकला टूट कर कब के बिखर जाते मगर ए जानम आपका साथ रहा था तो किनारा निकला पुरफिज़ा आस में छोड़ा न अभी है दामन रायगां था…"
Dec 28, 2019

Profile Information

Gender
Male
City State
nadaun, himachal
Native Place
india
Profession
govt. service
About me
believes in god and writing is my passion
ग़ज़ल
जिन्दगी में न वन्दगी आई
देख सब से बड़ी ये रुसवाई
राम अल्लाह सच गुरु नानक
बात यीशू ने सच की बतलाई
आखरी वक्त काम आएँगे
सीख रिश्तों की थोड़ी तुरपाई
साथ माँ बाप के नहीं रहता
जिन्दगी कैसे मोड पर लाई
भेष में साधू के छुपा रावण
भेद सीता कहाँ समझ पाई
अब भरोसा करें बात किस पर
यार जिगरी हुआ है हरजाई
काश “तन्हा” मिले पता उसका
फिर बजेगी खुशी की शेहनाई

 मौलिक व अप्रकाशित 

Munish tanha's Blog

फिर उठीं है जाग देखों शहर में शैतानियाँ

फिर उठीं है जाग देखों शहर में शैतानियाँ

दर्द आहों में बदलने क्यूँ लगी कुर्वानियाँ

जान लेने को खड़े तैयार सारे आदमी

हर जगह बढ़ने लगी है आज कल विरानियाँ

घूमते थे रात दिन हम आपकी ही चाह में

जब समझ आया खुदा तो हो गईं आसानियाँ

जोड़ तिनके है बनाया आशियाँ तुम सोच लो

आबरू इस में छुपी है मत करो नादानियाँ

गंध आने है लगी क्यूँ फिर यहाँ बारूद की

याद कर तू बस खुदा को छोड़ बेईमानियाँ

आदमी मजबूर देखो हो गया इस दौर में

खून में शामिल…

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Posted on March 10, 2019 at 8:00pm — 3 Comments

इस तरह जिन्दगी तमाम करें

इस तरह जिन्दगी तमाम करें
लोग आ कर हमें सलाम करें
झूठ का अब न एहतराम करें
इस तरह का भी इंतिजाम करें
तू वना खुद को इस तरह शीशा
देख चेहरा सभी सलाम करें
इस तरह वख्श बन्दगी दाता
सुबह से शाम राम-राम करें
आप के हाथ अब नहीं बाजी
आप अब और कोई काम करें
आज तौफिक दे खुदा सबको
देश पर जां लुटा के नाम करें
देख नफरत उदास है “तन्हा”
आस्तां में कहीं कयाम करें
मुनीश “तन्हा”
मौलिक व् अप्रकाशित

Posted on November 29, 2018 at 9:30pm — 2 Comments

ग़ज़ल: जिन्दगी में न वन्दगी आई

जिन्दगी में न वन्दगी आई
देख सब से बड़ी ये रुसवाई
राम अल्लाह सच गुरु नानक
बात यीशू ने सच की बतलाई
आखरी वक्त काम आएँगे
सीख रिश्तों की थोड़ी तुरपाई
साथ माँ बाप…
Continue

Posted on October 16, 2017 at 9:30am — 4 Comments

इस प्यार को सदा ही निभाते रहेंगे हम

२२१ – २१२२ -१२२१ -२१२

इस प्यार को सदा ही निभाते रहेंगे हम

दुश्वार रास्ता हो भले पर चलेंगे हम

सच बोलने के साथ में हिम्मत अगर रही

फिर फूल की तरह ही सदा वस खिलेंगे हम

जब सांस थी तो कर्म न अच्छा कभी किया

इक आग जुर्म की है जिसे अब सहेंगे हम

तरकीब जिन्दगी में अगर काम आ गई

मुंह आईने में देख के परदे सिलेंगे हम

है चैन जिन्दगी में कहाँ ढूँढ़ते फिरें

दिन रात के हिसाब में उलझे मिलेंगे हम

मैली करो न सोच खुदा से जरा डरो

टेढ़ी नजर हुई तो…

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Posted on August 31, 2017 at 3:30pm — 6 Comments

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At 10:04pm on July 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मुनीश तन्हा जी आदाब , बहुत शुक्रिया आपका मेरा प्रयास आपको अच्छा लगा ह्रदय से आभार
At 11:07pm on June 27, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मुनीस तन्हा जी आदाब , बहुत शुक्रिया तहे दिल से मेरा हौसला बढ़ाने के लिए
At 9:36pm on March 23, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय मुनीश तन्हा जी आदाब
बहुत बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने का
At 5:29pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय मुनीश तन्हा जी
बहुत बहुत शुक्रिया
At 7:54pm on April 20, 2016,
प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर
said…

ओबीओ परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है मोहतरम मुनीष तन्हा जी.

 
 
 

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