For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

221 2121 1221 212

बे-ख़्वाब आँखों में दबे लम्हात से अलग
गुज़री है ज़िन्दगानी अलामात से अलग

दस्तार रह गई है रवाजों के दरमियाँ
पर इश्क़ खो गया है रिवायात से अलग

जीने की चाह में हुआ बंजारा आदमी
बस घूमता दिखे है मक़ामात से अलग

किस रिश्ते की दुहाई दूँ अहल ए जहाँ को मैं
है क्या यहाँ पे कहिये फ़सादात से अलग

वो वक़्त और ही था कि मौसम बदलते थे
मौसम रहा न अब कोई बरसात से अलग

-मौलिक व अप्रकाशित

Views: 405

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by vijay nikore on November 19, 2018 at 3:30am

इस अच्छी गज़ल के लिए दिल से बधाई, आदरणीय शिज्जू शकूर जी

Comment by राज़ नवादवी on November 18, 2018 at 10:44am

आदरणीय शिज्जू शकूर साहब, सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति पे बधाई स्वीकार करें. सादर. 

Comment by Ajay Tiwari on November 17, 2018 at 4:26pm

आदरणीय शिज्जु जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई.

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 16, 2018 at 7:13pm

आ. भाई शिज्जू जी, सादर अभिवादन । सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।

Comment by क़मर जौनपुरी on November 15, 2018 at 11:01am
जीने की चाह में हुआ बंजारा आदमी
बस घूमता दिखे है मक़ामात से अलग।

उम्दा शेर के साथ अच्छी ग़ज़ल। मुबारकबाद।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on November 13, 2018 at 8:49pm

आ. संतोष खिरवडकर जी आपका हार्दिक आभार


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on November 13, 2018 at 8:48pm

आ. राज नवादवी जी बहुत शुक्रिया


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on November 13, 2018 at 8:47pm

आ. तेजवीर सिंह सर हौसलाअफ़्जाई के लिए आपका हार्दिक आभार


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on November 13, 2018 at 8:46pm

बहुत शुक्रिया मोह्तरम जनाब समर कबीर साहिब

Comment by santosh khirwadkar on November 13, 2018 at 12:54pm

आ. श्री शिज्जु शकूर साहिब नमस्कार , बेहतरीन ग़ज़ल हुई...... बधाई!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय अमीरूद्दीन 'अमीर' साहिबसादर अभिवादनउम्दा तरही ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार…"
2 minutes ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय अमीरूद्दीन अमीर साहब , नज़ाकत भरी ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद .छठे शेर के लिए विशेष रूप से .दूसरे…"
3 minutes ago
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय दंडपाणि नाहक जीसादर अभिवादनउम्दा तरही ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें.…"
5 minutes ago
सालिक गणवीर replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय लक्षण धामी जीसादर अभिवादनउम्दा तरही ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें. सादर."
8 minutes ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"प्रिय सालिक गणवीर जी , बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई .मुबारक़बाद . चौथा शेर बहुत अच्छा लगा ."
16 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आ. भाई सुरेंद्रनाथ जी, सादर अभिवादन । उत्तम गजल हुई है । हार्दिक बधाई स्वीकारें ।"
17 minutes ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"प्रिय बंधु कुशक्षत्रप जी , बहुत सुंदर ग़ज़ल हुई पाँचवाँ शेर बहुत अच्छा लगा . शुभकामनाएँ !"
22 minutes ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"डिंपल शर्मा जी, बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई .चौथा शेर सबसे अच्छा लगा .बधाई "
30 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आ. डिम्पल जी, सादर अभिवादन । बेहतरीन गजल हुई है । हार्दहार्दिक बधाई । कमाल के अंतिम शे'र…"
43 minutes ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"साकी तेरी आँखें भी जाने कैसी मतवाली थींबिना पिये ही मस्त हुये सब जिन पर नज़रें डाली थी मज़दूरी से…"
54 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन । बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई स्वीकारें ।"
54 minutes ago
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-123
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह'कुशक्षत्रप'जी नमस्ते, वाह वाह बहुत ख़ूब,हर शेर कमाल, ख़ूबसूरत…"
2 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service