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jaan' gorakhpuri commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रंग सारे हैं जहाँ हैं तितलियाँ (ग़ज़ल)
"वाह्ह्ह्ह् वाह्ह्ह्ह् वाह्ह्ह्ह् उद्भुत,अतुलनीय,अविस्मरणीय,बहुत बहुत बहुत बधाई।"
Sep 19, 2016
jaan' gorakhpuri and अलका ललित are now friends
Sep 19, 2016
जयनित कुमार मेहता commented on jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल~मुहब्बत की राहों में
"आदरणीय भाई, जान गोरखपुरी जी.. बहुत दिनों बाद आपकी कोई ग़ज़ल पढ़ रहा हूँ। हार्दिक बधाई। आपकी ग़ज़ल पर हुई चर्चा से जो ज्ञानवर्धन हुआ, उसके लिए हार्दिक धन्यवाद आपको।।"
May 19, 2016
jaan' gorakhpuri commented on jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल~मुहब्बत की राहों में
"आ.तस्दीक़ अहमद जी ज़र्रानवाज़ी के लिए शुक्रिया,मेरे ख्याल से हरेक बह्र के अंत में यह छूट मिलती है।"
May 19, 2016
Tasdiq Ahmed Khan commented on jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल~मुहब्बत की राहों में
"जनाब जान गोरखपुरी साहिब ,  अच्छी ग़ज़ल कही है आपने , शेर दर शेर मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं । शेर 3 का उला मिसरा देख लीजिए ,  मालूम का म बढ़  रहा है ----शुक्रिया"
May 18, 2016
jaan' gorakhpuri commented on जयनित कुमार मेहता's blog post कितनी ज़्यादा ख़ुशी पे पाबंदी (ग़ज़ल)
"वो लगाते ज़ुबान पर ताला और फिर ख़ामुशी पे पाबंदी वाह्ह्ह् ,पाबन्दी जैसे रदीफ़ को बहुत खूब निभाया है भाई जयनित जी।मुबारकबाद कबूल करें।"
May 18, 2016
jaan' gorakhpuri commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post आबोहवा (लघुकथा)
"बेहद उम्दा लघुकथा तहे दिल से मुबारक आ."
May 18, 2016
jaan' gorakhpuri commented on Dr T R Sukul's blog post घर
"वह्ह्ह्ह् आ. बेहद उम्दा रचना बहुत बहुत बधाई।"
May 18, 2016
jaan' gorakhpuri commented on Abha saxena's blog post गज़ल - जिन्दगी का सफ़र खूब है
"वाह्हहह।बहुत खूब ग़ज़ल हुयी है,तहेदिल से मुबारकबाद।"
May 18, 2016
jaan' gorakhpuri commented on Sushil Sarna's blog post इंतज़ार ....
"कोई तो नाख़ुदा होगा जो मेरी हयात के सफ़ीने को साहिल तक ले जाएगा बेहद शानदार हार्दिक बधाई सर।"
May 18, 2016
jaan' gorakhpuri commented on jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल~मुहब्बत की राहों में
"आ.सुशील सरजी ग़ज़ल उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार।"
May 18, 2016
jaan' gorakhpuri commented on jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल~मुहब्बत की राहों में
"आ.रामबली गुप्ता जी ग़ज़ल की सराहना उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार।"
May 18, 2016
jaan' gorakhpuri commented on jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल~मुहब्बत की राहों में
"बेहद शुक्रिया सर,यही परिवर्तन मतला में करता हूँ,आ.भाई केवल प्रसाद जी का भी तहेदिल से शुक्रगुजार हूँ जिन्होंबे इस बारीक दोष को बतया।"
May 18, 2016
Samar kabeer commented on jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल~मुहब्बत की राहों में
"जनाब केवल प्रसाद जी ठीक फरमा रहे हैं, मतले के किसी भी एक मिसरे का क़ाफ़िया बदल देने से ये दोष दूर हो सकता है, मिसाल के तौर पर :- ये सोचा है परखा है समझा बहुत है बाक़ी के क़ाफ़िये बदस्तूर रहेंगे और आपका क़ाफ़िया अलिफ़ का हो जाएगा।"
May 18, 2016
jaan' gorakhpuri commented on jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल~मुहब्बत की राहों में
"आ.समर सर एक और शंका समाधान चाहता हु आपसे आ. भाई केवल प्रसाद का कहना है क़ि काफ़िया दोष युक्त है उनका विचार है कि-----ये सोचा है समझा है पर……. / खा बहुत है। मुहब्बत की राहों में धो……./ खा बहुत है काफिय/ रदीफ ये मदमस्त तेरी…"
May 17, 2016
jaan' gorakhpuri commented on jaan' gorakhpuri's blog post ग़ज़ल~मुहब्बत की राहों में
"ह्म्म्म आ.बिलकुल मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूँ की जहां तक हो सके दोष से बचना चाहिए। लयभंग से मेरा तात्पर्य है क़ि 'तू'एकदम से खटकता सा लग रहा है,तुम को तू करने के अलावा कोई चारा दिख भी नही रहा है या तो पूरा मिसरा ही बदलना पड़ेगा। उला में तुम…"
May 17, 2016

Profile Information

Gender
Male
City State
u.p
Native Place
gorakhpur
Profession
teacher

अभिनय भरी इस दुनिया में

पाने के लिए प्रिय वो हृदय

करना पड़ता है अभिनय..

करना ही होगा अभिनय।

दुनियाँ का नियम ये तय

जितना अच्छा जिसका अभिनय

उतना विस्तृत उसका संचय

करना पड़ता है अभिनय..

करना ही होगा अभिनय।

भाव-भंगिमाओं के अपने ताने-बाने

भेद न इनका कोई जाने

हृदय की जाने केवल हृदय

इस दुनियाँ का नियम ये तय

करना पड़ता है अभिनय..

करना ही होगा अभिनय।

जब भी मै अभिनय करने जाऊ

भेद सब खुल ही जाये..

शब्द न मिले,भावहीन खुद को मै पाऊ

अंतर्मन को चुनूँ?

या किरदार नया निभाऊ?

पर तो,इस दुनिया का नियम ये तय

करना पड़ता है अभिनय..

करना ही होगा अभिनय।

रह न जाये उन्माद,दुःख-सुख भय

मै भी तब रहे न मै

होता है जब सत्य का उदय

हे निर्विकार ! हे निर्भय !

हर लो अपने,मेरे सारे अभिनय..!!

हे निर्विकार ! हे निर्भय !

हर लो अपने,मेरे सारे अभिनय..!!

"मौलिक व अप्रकाशित"

-‘कृष्णा मिश्रा’

Jaan' gorakhpuri's Blog

ग़ज़ल~मुहब्बत की राहों में

(122 122 122 122)

ये सोचा है समझा है परखा बहुत है।
मुहब्बत की राहों में धोखा बहुत है

ये मदमस्त तेरी निगाहें कसम से
तिलिस्म इनमें कोई तो रक्खा बहुत है।

जो छिपता है मुझसे उसे क्या है मालूम?
उसे मैंने छिप छिपके देखा बहुत है

न जन्नत की बातें न दैर-ओ-हरम ही
दिवानों को तेरा झरोखा बहुत है।

किसी रोज मिलने कभी तुम भी आओ
तेरे शहर ने मुझको देखा बहुत है।

(मौलिक व् अप्रकाशित)

Posted on May 17, 2016 at 12:42pm — 14 Comments

ग़ज़ल~ तेरे आगे

(1122।1212।1212)



तेरे आगे मेरा जो हाल था सो है।

तेरी चाहत तेरा मलाल था सो है।



तू मेरी ज़िन्दगी बनेगी एक दिन

दिलेफित्ना का ये खयाल था सो है।



तेरी हसरत तेरी दिवानगी जुनून

तू मुझे साहिबे-कमाल था सो है 



यूँ गमों ने की बारिशें बहुत मगर

जो रगों में मेरे उबाल था सो है।



न रही तेरे दिल में पहले सी वफ़ा

न सही, मुझको ये बवाल था सो है



वही क़ातिल वही गवाह और सितम

वही मुंसिफ वही सवाल था सो है।



(मौलिक व्… Continue

Posted on May 15, 2016 at 9:57pm — 8 Comments

ग़ज़ल

१२२  १२२ १२२  १२२

किसी मायने में भी कमतर नही हूँ                         

मगर पूजा जाऊं वो पत्थर नहीं हूँ

 

इसी को तो कहते है किस्मत भी शायद

तेरा हो के तेरा मुकद्दर नहीं हूँ

 

मेरी साइतों में ‘‘ठहरना’’ नही है..

मैं दरिया हूँ प्यासा ; समन्दर नहीं हूँ

 

पलटकर जरा देख इक़ बार फिर से

यही सोच लूँ गुजरा मंजर नहीं हूँ.

 

तेरे कू पे बैठा अगरचे हूँ लेकिन

जो कुछ मांगे मैं वो कलंदर नहीं…

Continue

Posted on December 14, 2015 at 11:04am — 6 Comments

ग़ज़ल.................जान' गोरखपुरी

122 122 122 122



अजब इक तमाशा है ये ज़िन्दगी भी।

बिछड़ना है सबकुछ मगर दिल्लगी भी।।



बहुत बेमुरव्वत है तासीर दिल की।

मिली जितनी उतनी बढ़ी तिश्नगी भी।।



जमीं हो या आँखें...ख़ुशी हो या हो गम।

है अच्छी नही देर तक खुश्कगी* भी।। (सूखापन)



कहानी मुहब्बत की है तो पुरानी।

नयी सी मगर इसमें है ताजगी भी।।



न समझा कोई हुस्नो-इश्को-वफ़ा पर।

हरिक को है पर इनसे बावस्तगी* भी।। (सम्बद्धता)



ये माना कि बरबादियाँ भी बहुत की।…

Continue

Posted on November 19, 2015 at 1:30pm — 6 Comments

Comment Wall (10 comments)

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At 4:53pm on August 2, 2015, maharshi tripathi said…

भाई जी ,कृपया  मुझे अपना मोबाइल num  msg करें|

At 10:33pm on July 4, 2015, shree suneel said…
आदरणीय भाई कृष्ण मिश्रा जी, आप से मित्रता मेरे लिए गौरव की बात है. स्वागत.
At 5:10pm on July 2, 2015, kanta roy said…
स्वागत आपका आदरणीय कृष्णा मिश्रा जान गोरखपूरी जी
At 11:27pm on June 30, 2015, Kewal Prasad said…

भाई जी नमस्कार.      हृदय के स्पंदन की भांति दोस्ती भी बडे सौभाग्य से मिलती है.

                           ..आपका हार्दिक स्वागत है.   सादर

At 10:08pm on May 29, 2015, maharshi tripathi said…

आ. बड़े भाई  जी ,,पिछले माह का सक्रिय सदस्य आपको चुने जाने पर ,,हार्दिक बधाई |

At 1:23am on May 22, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय कृष्ण भाई जी,  आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकमनाएं 

At 7:48pm on April 16, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

प्रिय कृष्णा

आपको मित्र पाकर मेरा गौरव बढा , निस्संदेह .  स्नेह.

At 12:19pm on April 16, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आदरणीय
कृष्णा मिश्रा 'जान' गोरखपुरी जी,
सादर अभिवादन

 माह का सक्रिय सदस्य बनने पर मेरी और से बहुत बहुत  बढ़ायी. सस्नेह .

                                                     गोपाल नारायन श्रीवास्तव  

At 10:30pm on April 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय
कृष्णा मिश्रा 'जान' गोरखपुरी जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 12:51am on March 26, 2015, Dr. Vijai Shanker said…
आपका स्वागत है श्री कृष्ण मिश्रा जी।
 
 
 

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