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तात के हिस्से में कोना आ गया - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)

२१२२/२१२२/२१२


तात के  हिस्से  में  कोना आ गया
चाँद को भी सुन के रोना आ गया।१।
*
नींद  सुनते  हैं  उसी  की  उड़ गयी
भाग्य में जिसके भी सोना आ गया।२।
*
खेत लेकर इक इमारत कर खड़ी
कह रहा वो  बीज  बोना आ गया।३।
*
डालकर  थोड़ा   रसायन ही  सही
उसको आँखें तो भिगोना  आ गया।४।
*
पा गये जगभर की खुशियाँ लोग वो
एक दिल जिनको भी खोना आ गया।५।
*
कल तलक  औरों  सा  होने  में मिटे
आज खुद सा हमको होना आ गया।६।
*
तोड़ना फितरत है उस की फूल को
हम को माला  में  पिरोना  आ गया।७।

मौलिक/अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

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Comment by नाथ सोनांचली on March 19, 2021 at 3:36pm

आद0 लक्ष्मण धामी मुसाफ़िरजी सादर अभिवादन।

अच्छी ग़ज़ल खिह आपने।।चर्चा भी अच्छी लगी। बधाई स्वीकार कीजिये

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 19, 2021 at 12:32pm

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। गजल पर पुनः उपस्थिति के लिए आभार।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 19, 2021 at 12:16pm

आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।

Comment by Samar kabeer on March 19, 2021 at 11:45am

अब ठीक हैं ।

Comment by TEJ VEER SINGH on March 19, 2021 at 11:24am

हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी। बेहतरीन गज़ल।

कल तलक  औरों  सा  होने  में मिटे
आज खुद सा हमको होना आ गया।६।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 19, 2021 at 9:02am

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व मार्गदर्शन के लिए आभार । इंगित मिसरों में कुछ बदलाव किया है देखिएगा 

डालकर थोड़ा रसायन ही सही
उसको आँखें तो भिगोना आ गया।४।
*
पा गये जगभर की खुशियाँ लोग वो
एक दिल जिनको भी खोना आ गया।५।

Comment by Samar kabeer on March 15, 2021 at 7:24pm

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

गुणीजनों से सहमत ।

Comment by Rachna Bhatia on March 13, 2021 at 9:19am

आदरणीय लक्ष्मण धामी'मुसाफ़िर'भाई नमस्कार। भाई , कृष मिश्रा जी ने इशारा कर दिया है। सादर।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 12, 2021 at 1:19pm

आ. भाई क्रिस जी, अभिवादन ।गजल पर उपस्थिति व उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद । इंगित मिसरों को बेहतर करने का प्रयास करता हूँ । 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 12, 2021 at 1:17pm

आ. रचना बहन, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व स्नेह के लिए आभार । यदि शेर भी इंगित कर देतीं तो अच्छा रहता । सादर...

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