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Rachna Bhatia
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Rachna Bhatia replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार।सर्, हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Nov 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-149
"आदरणीय सर्, आपने बहुत ख़ूब इस्लाह दी। ग़ज़ल पर इस्लाह देने के लिए बेहद शुक्रिय:।"
Nov 25
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-149
"आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। सर् सुधार करने की कोशिश की है  इज़हार उसने इश्क़ का कुछ यूँ किया था ज्यों  सय्याद ने किसी के लिए फैंका जाल हो 5 करती हूँ जाग जाग के यूँ मश्क़ रात भर  जैसे उसी से सुब्ह को मिलता उजाल हो 7 देते नहीं…"
Nov 25
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-149
"आदरणीय समर कबीर सर् नमस्कार।सर् इस्लाह देने के लिए बेहद शुक्रिय: ।सर् सुधार करके दिखाती हूँ। सादर।"
Nov 25
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-149
"आदरणीय ज़ैफ़ जी, बेहद शुक्रिय:"
Nov 25
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-149
"आदरणीय संजय शुक्ला जी, वाह वाह बेहतरीन ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें।"
Nov 25
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-149
"आदरणीय नाथ सोनांचली जी, बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई बधाई।"
Nov 25
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-149
"आदरणीय लक्ष्मण धामी "मुसाफिर" भाई, नमस्कार।सर् के द्वारा दी गई इस्लाह के अनुसार सुधार करने के बाद ग़ज़ल बहुत अच्छी हो जाएगी। बधाई।"
Nov 25
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-149
"आदरणीय समर कबीर सर् बेहतरीन इस्लाह दी।"
Nov 25
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-149
"आदरणीय अमीरुद्दीन "अमीर"जी, अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें।"
Nov 25
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-149
"आदरणीया ऋचा यादव जी,अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई।  मुझे भी गिरह बहुत अच्छी लगी।"
Nov 25
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-149
"मफ़ऊल फ़ाइलात मुफ़ाईल फ़ाइलुन 221 2121 1221 212 1 मेरा हुआ है हाल जो वो तेरा हाल हो मुझको नकारने का तुझे भी मलाल हो 2 मैंने तमाम उम्र बिताई यूँ उसके साथ  जैसे दिमाग़ में कोई उलझा सवाल हो 3 तुम शौक़ से फ़रेब-ए-मुहब्बत करो मगर  इतना बताते जाओ कि…"
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Rachna Bhatia commented on Zaif's blog post ग़ज़ल (रोटी)
"वाह वाह बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई बधाई।"
Nov 10
Rachna Bhatia replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-88 (विषय: 'संतान)
"आदरणीय तेजवीर सिंह जी मानवता से ओतप्रोत वहीं सटीक तंज़ कसती हुई बहुत अच्छी लघुकथा । हार्दिक बधाई।"
Jul 31
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"2122 1122 1122 22         1 पूछ बैठें हैं जो हमसे कि महब्बत क्या है  पहले वो हमको बता दें ये शरारत क्या है 2 वो झुका लेते हैं नज़रों को मिला कर नज़रे ग़र न है इश्क़ ये तो और महब्बत क्या है 3 दिल कभी इससे कभी उससे…"
Jun 25
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- दर्द हरने लगते हैं
"आदरणीय सुशील सरना जी हौसला बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Jun 24

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Female
City State
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Native Place
Delhi
Profession
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nothing special... just start my journey ....

Rachna Bhatia's Blog

ग़ज़ल- दर्द हरने लगते हैं

1212  1122  1212    22 /112

1

हम आह जब कभी महफ़िल में भरने लगते हैं

नज़र में भर के वो हर दर्द हरने लगते हैं

2

जुनून-ए-इश्क़ में अब क्या सुनाएँ हाल-ए-दिल

ख़याल आते ही उनका सँवरने…

Continue

Posted on June 21, 2022 at 8:21pm — 7 Comments

ग़ज़ल-गूँगा कर दिया

2122 2122 2122 212

1

 उसने मेरे ज़ख़्मों का ऐसे मुदावा कर दिया

सी के आहों का मुहाना उनको गूँगा कर दिया

2

जिसने मेरा कद बढ़ा कर सबसे ऊँचा कर दिया

 उसने सी कर लब मेरे किरदार बौना कर दिया

3

घर जलाकर अपना जिसके दर प कर दी रौशनी

उसने घबरा कर धुँएँ से शोर बरपा कर दिया

4

ख़त्म होते ही नहीं हैं ज़िन्दगी के मसअले

बैठते ही इक के दूजे ने तमाशा कर दिया

5

साथ देता ही नहीं है मेरे दिल का…

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Posted on May 31, 2022 at 7:30pm — 6 Comments

ग़ज़ल-अपना है कहाँ

2122 2122 2122 212

1

औरों के जैसा मुकद्दर यार अपना है कहाँ

अपने दिल का जोर उसके दिल प चलता है कहाँ

2

रात होती है कहाँ और दिन गुज़रता है कहाँ

मन मुआफ़िक़़ ज़िन्दगी में जीना मरना है कहाँ

3

एक दिन में कुछ नहीं पर एक दिन होगा ज़रूर

आदमी ये सब्र तब तक यार रखता है कहाँ'

4

आज तक कोई नहीं यह जान पाया दोस्तो

इस ज़माने को बनाने वाला रहता है कहाँ

 5

किस तरह भर लूँ उनींदी आँखों में ख़्वाबों के…

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Posted on May 6, 2022 at 10:30am — 8 Comments

ग़ज़ल -दिल लगाना छोड़ दें

2122 2122 2122 212

1

अश्क पीना छोड़ दें हम दिल लगाना छोड़ दें 

एक उनकी मुस्कुराहट पर ज़माना छोड़ दें

2

हर किसी के आप दिल में आना जाना छोड़ दें

इश़्क को सौदा समझ क़ीमत लगाना छोड़ दें

3

कह दें अपनी चूड़ियों से खनखनाना छोड़ दें 

दिल के रिसते ज़ख़्मों पर यूँ सरसराना छोड़ दें

4

लग गए हों ताले ख़ामोशी के जिनके होठों पर 

उनसे उम्मीदें सदाओं की लगाना छोड़ दें 

5

कब तलक फिरते रहेंगे आप ग़म के सहरा…

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Posted on April 5, 2022 at 9:00pm — 8 Comments

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"हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय. सादर"
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"हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय. जय-जय"
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