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Rachna Bhatia
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Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीय मोहन बेगोवाल जी हौसला अफजाई के लिए आपका अत्यंत आभार ।"
Aug 24
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
" आदरणिया अंजलि गुप्ता जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया । जी  बताई गई कमियों को दूर करने का पूरा प्रयास रहेगा ।"
Aug 24
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीया राजेश कुमारी जी आपकी अत्यंत आभारी हूँ "
Aug 24
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"आदरणीय अत्यंत आभारी हूँ "
Aug 24
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"आदरणीय बेहद शुक्रिया "
Aug 24
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीय समर कबीर जी ग़ज़ल तक आने तथा अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए आपकी अत्यंत आभारी हूँ । जी क्या ऊला को हल्की हो गई खुशबू देखो इश्क़े फूलों की   कर सकते हैं "
Aug 24
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीय  एडिट करते हुए गलती हो गई है ।तीसरे में इश्क़ के फूलों     और गिरह में रश्क लिखना था। प्लीज़ इसे ध्यान दें । जल्दबाजी के लिए माफ़ी चाहूँगी ।"
Aug 24
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"    212 1222 212 1222 चटपटी छपें ख़बरें खूब अब रिसालों में झूठ भी दिखे है सच आ के इनकी चालों में   रिश्ते सारे मतलब के होते फिर अलग ऐसे  जैसे कोई हो पत्थर काली पीली दालों में  हल्की हो गई खुशबू देखो इश्क़ के फूलों…"
Aug 24
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीय नादिर ख़ान जी बहुत अच्छी प्रस्तुति ।बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 23
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीय, बहुत खूब मतला, और बहुत बढ़िया ग़ज़ल बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 23
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 100 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणिय बहुत अच्छे दिलछूने वाले दोहे। बधाई स्वीकार करें"
Aug 19
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"आदरणीय सत्यनारायण सिंह जी हौसला अफजाई के लिए आपका अत्यंत आभार ।"
Aug 18
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"आदरणीय विस्तार से समझाने के लिए बहुत धन्यवाद । जी दुबारा प्रयास करूंगी ।"
Aug 18
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"विधा  दोहे  बारिश में माँ भेजती, दे हाथ रेनकोट। पहन उसे चला रहे ,हम कागज़ की बोट।। बरसातों में खुल गई, सड़कों की सब पोल। यहाँ वहाँ पानी भरा,कीचड़ उगले होल।। बरसातें हीं खोलतीं,नेताओं की पोल। कसमें झूठी कह रहीं,वोटर अब तो बोल।। विरहण…"
Aug 18
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"वाववाआआहहह।लाजवाब।हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Aug 18
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"आदरणिय बहुत खूब रचना।हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Aug 18

Profile Information

Gender
Female
City State
Delhi
Native Place
Delhi
Profession
Teacher
About me
nothing special... just start my journey ....

Rachna Bhatia's Blog

ग़ज़ल

212 1212 1212 1212



सिर पे पांव रख हमारे,चढ़ रहे हो सीढ़ियाँ

फैंक दलदलों में यार,मांगते हो माफियाँ



जिंदगी में देख लीं,बहुत सी हमने आंधियाँ

खत्म हो चुके हैं अश्क,बंद सी हैं सिस्कियाँ



दास्ताने जिंदगी, सुना सके न हम कभी

दर खुदा के आ खड़े,ले चंद हम भी अर्जि़याँ



छा रही है तीरगी,न रोशनी दिखे कहीं

मौत है बुला रही,दे जिंदगी भी धमकियाँ



चापलूसी बोलती,न महनतों का मोल है

लग रही जगह जगह, इमान की ही बोलियाँ



साथ छोड़ चल… Continue

Posted on June 10, 2019 at 7:55pm — 5 Comments

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