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Rachna Bhatia
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Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"//इनमें कोई न समझदार ख़ुदा खैर करे' क्या यह कर सकते हैं// इस मिसरे को यूँ कर सकती हैं:- 'और हैं दोनों ही मक्कार ख़ुदा ख़ैर करे'"
21 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर सर ग़ज़ल तक आने तथा अपना क़ीमती वक़्त देने के लिए बहुत बहुत आभारी हूँ। सर, आपकी इस्लाह से ग़ज़ल "ग़ज़ल"बन गई। बहुत बहुत धन्यवाद। आदरणीय,आपके लिए कोई शब्द नया नहीं है यक़ीनन मैंने सही शब्द का चुनाव नहीं किया । मैं यहाँ…"
23 hours ago
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें । 'शांत लहरों में भी कश़्ती को सहारा न मिलाडूबी मँझधार में पतवार ख़ुदा ख़ैर करे' इस शैर का भाव स्पष्ट नहीं है,ऊला यूँ कर सकती हैं:- ' किस तरह सामना तूफ़ाँ से करेंगे…"
yesterday
Rachna Bhatia posted a blog post

ग़ज़ल

2122 1122 1122 221गर्म अफ़वाहों का बाज़ार ख़ुदा ख़ैर करेबिक रहा झूठ का अख़बार ख़ुदा ख़ैर करे2चार सिक्कों की ख़नक जेब में क्या होने लगीहो गए हम भी तलबगार ख़ुदा ख़ैर करे3शांत लहरों में भी कश़्ती को सहारा न मिलाडूबी मँझधार में पतवार ख़ुदा ख़ैर करे4इश़्क था या कि अज़ीयत ओ फ़ज़ीहत का सफरहै अलम दिल का पुर आज़ार ख़ुदा ख़ैर करेबाँध रक्खा है किनारों ने संमदर ऐसेरुक गई लहरों की रफ़्तार ख़ुदा ख़ैर करे5हो न मायूस बुरा दौर चला जाएगावक़्त रहता नहीं इकसार ख़ुदा ख़ैर करे6दोनों उलझें हैं रिवायत की लगी गाँठों…See More
yesterday
Rachna Bhatia commented on Samar kabeer's blog post "ओबीओ की सालगिरह का तुहफ़ा"
"आदरणीय समर कबीर सर, लाजवाब ग़ज़ल,हर शे'र ओ बी ओ की शान बढ़ाता हुआ । हार्दिक बधाई। ओ बी ओ के प्रति आपका प्यार देखते ही बनता है । वर्ष गांठ पर इससे अच्छा तोहफ़ा नहीं हो सकता । आपको ओबीओ की सालगिरह की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। ओ"
yesterday
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरणीय तस्दीक़ अहमद ख़ान जी बेहतरीन ग़ज़ल हुई लाजवाब मतला। बधाई स्वीकार करें।"
Mar 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरणीय सूबे सिंह सुजान जी अच्छी ग़ज़ल हुई, बधाई । दूसरा शे'र अच्छा लगा।"
Mar 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरणीय दण्डपाणि'नाहक़' जी बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई। तीसरा शे'र बहुत पसंद आया।बधाई।"
Mar 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरणीय अश्फ़ाक अली जी ग़ज़ल तक आने के लिए तथा राय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। जी, कुछ शब्द रह गए थे "यारो" सानी में"तो""
Mar 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरणीय ख़ान हसनैन आक़िब साहेब, हौसला अफज़ाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया।"
Mar 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरणीया अंजलि गुप्ता जी, बहुत बहुत धन्यवाद।"
Mar 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरणीयाअंजलि गुप्ता 'सिफ़र जी मेरा संदेश पहुंचाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
Mar 28
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरणीय अनीस अरमान जी, बहुत ख़ूब ग़ज़ल कही । बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 27
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"आदरणीय बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई बधाई स्वीकार करें । पर बर की बंदिश हो गई है सादर"
Mar 27
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-117
"2122 1122 1122 22                   1 जीस्त का यूँ ही नहीं कवर बनता है आजकल झूठ से ही एक बशर बनता है                     2 उलझनें रोज़ नये अक्स में लिपटी आतीं रोज़ अख़बार इन्हीं से ख़बर बनता…"
Mar 27
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"आदरणीय रवि भसीन जी, लाजवाब ग़ज़ल, शानदार मतला हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Feb 21

Profile Information

Gender
Female
City State
Delhi
Native Place
Delhi
Profession
Teacher
About me
nothing special... just start my journey ....

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ग़ज़ल

2122 1122 1122 22

1

गर्म अफ़वाहों का बाज़ार ख़ुदा ख़ैर करे

बिक रहा झूठ का अख़बार ख़ुदा ख़ैर करे

2

चार सिक्कों की ख़नक जेब में क्या होने लगी

हो गए हम भी तलबगार ख़ुदा ख़ैर करे

3

शांत लहरों में भी कश़्ती को सहारा न मिला

डूबी मँझधार में पतवार ख़ुदा ख़ैर करे

4

इश़्क था या कि अज़ीयत ओ फ़ज़ीहत का सफर

है अलम दिल का पुर आज़ार ख़ुदा ख़ैर करे



बाँध रक्खा है किनारों ने संमदर ऐसे

रुक गई लहरों की रफ़्तार ख़ुदा ख़ैर… Continue

Posted on April 2, 2020 at 1:31pm — 3 Comments

ग़ज़ल

212 1212 1212 1212



सिर पे पांव रख हमारे,चढ़ रहे हो सीढ़ियाँ

फैंक दलदलों में यार,मांगते हो माफियाँ



जिंदगी में देख लीं,बहुत सी हमने आंधियाँ

खत्म हो चुके हैं अश्क,बंद सी हैं सिस्कियाँ



दास्ताने जिंदगी, सुना सके न हम कभी

दर खुदा के आ खड़े,ले चंद हम भी अर्जि़याँ



छा रही है तीरगी,न रोशनी दिखे कहीं

मौत है बुला रही,दे जिंदगी भी धमकियाँ



चापलूसी बोलती,न महनतों का मोल है

लग रही जगह जगह, इमान की ही बोलियाँ



साथ छोड़ चल… Continue

Posted on June 10, 2019 at 7:55pm — 5 Comments

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