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Rachna Bhatia
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Rachna Bhatia replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"बेहद दुख:द समाचार। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें। ओम शांति।"
yesterday
Ravi Shukla commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- लाऊँ कहाँ से
"आदीणीया रचना भाटिया जी  अच्छी गजल कही आपने मुबारक  बाद पेश करता हूँ।  आदरणीय समर  साहब की बातों कास्ंज्ञान लीजियेगा"
Tuesday
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- लाऊँ कहाँ से
"आदरणीय समर कबीर सर्,सादर नमस्कार।सर हौसला बढ़ाने के लिए तथा ग़ज़ल पर इस्लाह करने के लिए आपकी बहुत आभारी हूँ। आदरणीय आपके द्वारा बताए सुझाव नोट कर लेती हूँ तथा अस्पष्ट शे'र ठीक करके फिर से दिखाती हूँ।सादर।"
Jan 9
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल- लाऊँ कहाँ से
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । 'न चल पाए क़दम इक भी वहाँ से' इस मिसरे को यूँ कहें:- 'क़दम हिल भी नहीं पाए वहाँ से' 'सँभलने के लिए कुछ वक़्त तो दो अभी उतरा ही है वो आसमाँ से' इस…"
Jan 8
Rachna Bhatia posted a blog post

ग़ज़ल- लाऊँ कहाँ से

1222/1222/1221महकता वो चमन लाऊँ कहाँ सेजुदा जिसका तसव्वुर हो ख़िज़ाँ से2कभी पूछा है तुमने कहकशाँ सेहुए गुम क्यों सितारे आसमाँ से3न जाने क्या मिलाया था नज़र मेंन चल पाए क़दम इक भी वहाँ से4सँभलने के लिए कुछ वक़्त तो दोअभी उतरा ही है वो आसमाँ से5किसी सूरत बहार आए गुलों पर उड़ी है इनकी रंगत ही ख़िज़ाँ से6हटा दे तीरगी जो मेरे दिल कीदिया वो लाऊँ मैं यारो कहाँ से7अज़ाब-ए-जीस्त रुसवाई ख़मोशीमिले 'निर्मल' को तुहफ़े मेह्रबाँ सेमौलिक व अप्रकाशितरचना निर्मलSee More
Jan 7
Rachna Bhatia commented on TEJ VEER SINGH's blog post बलात्कार - लघुकथा –
"आदरणीय तेजवीर सिंह जी, संवेदनशील बात कहती हुई सार्थक लघुकथा कही आपने। हार्दिक बधाई।"
Jan 6
Rachna Bhatia commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सब कुछ है अब यार सियासी- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी'मुसाफ़िर'जी, बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। आदरणीय, 'घर बिखरे पर हो जाने दो' मुझे बेहतर लग रहा है। सादर"
Jan 6
Rachna Bhatia commented on सालिक गणवीर's blog post उसे पहले कभी देखा नहीं था.....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय सालिक गणवीर जी बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई।बधाई स्वीकार करें।"
Jan 6
Rachna Bhatia commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल (तेरे खाने के लिए मुफ्त का माल अच्छा है)
"आदरणीय। बेहतरीन ग़ज़ल हुई वाह वाह वाह वाह।"
Jan 6
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"बढ़िया ग़ज़ल कही आदरणीया बधाई"
Dec 25, 2020
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी नमस्कार। भाई,हौसला बढ़ाने के लिए तहेदिल से शुक्रिय:।"
Dec 15, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"आ. रचना बहन , सादर अभिवादन । गजल का अच्छा प्रयास हुआ है । हार्दिक बधाई ।"
Dec 14, 2020
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय, अमीरुद्दीन 'अमीर' साहब ग़ज़ल तक आने तथा हौसला बढ़ाने के लिए आपकी आभारी हूँ। "
Dec 13, 2020
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर सर् ,ग़ज़ल तक आने तथा इस्लाह करने के लिए बहुत आभारी हूँ। आदरणीय , आपके द्वारा बताए गए सभी सुधार करने के बाद आपको ग़ज़ल फिर से दिखाती हूँ।  सादर। "
Dec 13, 2020
Samar kabeer commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें । 'अपनी हर लग़्ज़िश छिपा ली जाएगी हाँ क़सम झूठी भी खा ली जाएगी' मतले के सानी में 'हाँ' की जगह "इक" शब्द उचित होगा । 'दिल में नफ़रत का बसा कर…"
Dec 13, 2020
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ख़ूबसूरत अन्दाज़ के साथ उम्दा ग़ज़ल हुई है शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।"
Dec 12, 2020

Profile Information

Gender
Female
City State
Delhi
Native Place
Delhi
Profession
Teacher
About me
nothing special... just start my journey ....

Rachna Bhatia's Blog

ग़ज़ल- लाऊँ कहाँ से

1222/1222/122

1

महकता वो चमन लाऊँ कहाँ से

जुदा जिसका तसव्वुर हो ख़िज़ाँ से

2

कभी पूछा है तुमने कहकशाँ से

हुए गुम क्यों सितारे आसमाँ से

3

न जाने क्या मिलाया था नज़र में

न चल पाए क़दम इक भी वहाँ से

4

सँभलने के लिए कुछ वक़्त तो दो

अभी उतरा ही है वो आसमाँ से

5

किसी सूरत बहार आए गुलों पर 

उड़ी है इनकी रंगत ही ख़िज़ाँ से

6

हटा दे तीरगी जो मेरे दिल की

दिया वो लाऊँ…

Continue

Posted on January 6, 2021 at 7:08pm — 3 Comments

ग़ज़ल

2122 2122 212

.

1

अपनी हर लग़्ज़िश छिपा ली जाएगी

हाँ क़सम झूठी भी खा ली जाएगी

2

जिंदगी की शान-ओ-शौकत के लिए 

बात कुछ भी अब बना ली…

Continue

Posted on December 11, 2020 at 11:30am — 10 Comments

ग़ज़ल

2122-1212-22

1

 आदमी कब ख़ुदा से डरता है

अपनी हर बात से मुकरता है

2

जब सर-ए-शाम ग़म सँवरता है

आइना टूटकर बिखरता है

3

आज का काम आज ख़त्म करें

वक़्त किसके लिए ठहरता है

4

ताबिश-ए-ख़्वाब के लिए दिलबर

रंग मेरे लहू से भरता…

Continue

Posted on November 20, 2020 at 12:00pm — 4 Comments

ग़ज़ल

212 212 212 212

1

दोस्तों के बिना ज़िन्दगी दोस्तो

इक कहानी उदासी भरी दोस्तो

2

बीच में फ़ासले ला के दौलत के क्यों

आज़माने लगी दोस्ती दोस्तो

3

हाथ में हाथ डाले खड़ी दोस्ती

गर्दिश-ए-दौराँ से लड़ के भी दोस्तो

4

कारवाँ अज़्म का रोके रुकता नहीं

राह चाहे हो मुश्किल भरी दोस्तो

5

हार बैठे हैं दिल कू-ए-उल्फ़त में हम

अब न खेलेंगे बाजी नई दोस्तो

6

सुब्ह होते ही बेहिस जहाँ के सितम

ढूँढ लेंगे हमारी गली…

Continue

Posted on November 9, 2020 at 1:00pm — 7 Comments

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