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विनय कुमार
  • Male
  • Varanasi , U P
  • India
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Mirza Hafiz Baig commented on विनय कुमार's blog post परछाईयों का भय - लघुकथा
"विनय कुमार जी, सामयिक विषय उठाती लघुकथा हेतु बधाई।"
14 hours ago
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"बहुत शानदार ग़ज़ल हुई है आ राज नवादवी साहब, //मुझपे आइद है लब की पाबंदीसद्र सबका चुना गया है मुझे// यह शेर तो बहुत कमाल का हुआ है. शेर दर शेर मुबारकवाद कुबूल कीजिये"
yesterday
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"बहुत शानदार ग़ज़ल हुई है आ अजय गुप्ता साहब, //रोटियाँ खाई जब पसीने कीस्वाद नमकीन भा गया है मुझे// यह शेर तो कमाल का है. शेर दर शेर मुबारकवाद कुबूल कीजिये"
yesterday
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"वाह, बहुत शानदार ग़ज़ल हुई है आ दिनेश कुमार साहब, आखिरी शेर तो कमाल का है. शेर दर शेर मुबारकवाद कुबूल कीजिये"
yesterday
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"मुशायरे की शुरुआत इस शानदार ग़ज़ल से करने के लिए बहुत बहुत बधाई आ असफाक अहमद साहब, शेर दर शेर मुबारकवाद कुबूल कीजिये"
yesterday
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"वाह, वाह, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने आ नीलेश जी, शेर दर शेर मुबारकवाद फरमाएं. //ऐब मुझ में सभी उसी के हैं जिस के हाथों घड़ा गया है मुझे.// यह शेर बहुत कमाल का है "
yesterday
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100
"यूँ संभलना सिखा गया है मुझे सबके चेहरे दिखा गया है मुझे खार बिखरे  हैं  रास्तों पे मगर उनपे चलना बता  गया है मुझे कभी कहता है दोस्त और कभी बेरुखी  भी  जता  गया  है  मुझे लड़खड़ाते  हैं  कदम …"
yesterday
mirza javed baig commented on विनय कुमार's blog post परछाईयों का भय - लघुकथा
"जनाब विनयकुमार जी आदाब,  करंट टापिक पर शानदार लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें"
Thursday
Samar kabeer commented on विनय कुमार's blog post परछाईयों का भय - लघुकथा
"जनाब विनय कुमार जी आदाब,अच्छी लघुकथा हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Thursday
विनय कुमार posted a blog post

परछाईयों का भय - लघुकथा

पिछले कुछ घंटों से उदास दिख रहे अपने दोस्त को देखकर उससे रहा नहीं गया. "क्या हो गया राजमन, बहुत उदास लग रहे हो". राजमन ने एक नजर उसकी तरफ डाली और सोच में पड़ गया कि तेजू को बात बताएं कि नहीं. लेकिन तेजू तो उसकी हर बात, हर राज से वाकिफ़ था इसलिए उसे बताने में कोई हर्ज भी नहीं था. "यार, तुम तो देख ही रहे हो ये आजकल का ट्रेंड, जिसे देखो वही इस #मी टू# के बहाने लोगों के नाम उछाल रहा है. रिटायरमेंट के बाद अब कहीं कोई मेरे खिलाफ भी यह चैप्टर न खोल दे, यही सोचकर घबरा रहा हूँ". तेजू ने गहरी सांस ली…See More
Wednesday
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post इन्वेस्टमेंट-लघुकथा
"बहुत बहुत आभार आ लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी "
Oct 15
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on विनय कुमार's blog post इन्वेस्टमेंट-लघुकथा
"आ. भाई विनय कुमार जी,अच्छी लघुकथा लिखी। इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकारें ।"
Oct 14
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post इन्वेस्टमेंट-लघुकथा
"बहुत बहुत आभार आ सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी"
Oct 13
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on विनय कुमार's blog post इन्वेस्टमेंट-लघुकथा
"आद0 विनय जी सादर अभिवादन। मानवाधिकार की बातें पर बेहतरीन कटाक्ष करती और थानों की सच्चाई बयाँ करती इस बेहतरीन लघुकथा पर आपको हार्दिक बधाई।"
Oct 13
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post इन्वेस्टमेंट-लघुकथा
"बहुत बहुत आभार आ सतविंद्र कुमार राणा जी"
Oct 11
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post इन्वेस्टमेंट-लघुकथा
"बहुत बहुत आभार आ मुहतरम समर कबीर साहब"
Oct 11

Profile Information

Gender
Male
City State
Johannesburg
Native Place
Varanasi
Profession
Banker
About me
पिछले कई सालों से लगातार पढ़ते रहने के बाद कुछ लिखने की प्रेरणा मिली तो लिखना प्रारम्भ किया |

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परछाईयों का भय - लघुकथा

पिछले कुछ घंटों से उदास दिख रहे अपने दोस्त को देखकर उससे रहा नहीं गया. "क्या हो गया राजमन, बहुत उदास लग रहे हो".

राजमन ने एक नजर उसकी तरफ डाली और सोच में पड़ गया कि तेजू को बात बताएं कि नहीं. लेकिन तेजू तो उसकी हर बात, हर राज से वाकिफ़ था इसलिए उसे बताने में कोई हर्ज भी नहीं था.

"यार, तुम तो देख ही रहे हो ये आजकल का ट्रेंड, जिसे देखो वही इस #मी टू# के बहाने लोगों के नाम उछाल रहा है. रिटायरमेंट के बाद अब कहीं कोई मेरे खिलाफ भी यह चैप्टर न खोल दे, यही सोचकर घबरा रहा हूँ".

तेजू ने…

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Posted on October 17, 2018 at 5:00pm — 3 Comments

इन्वेस्टमेंट-लघुकथा

थाने के अंदर जाकर उसने एक किनारे अपनी बाइक खड़ी की और चारो तरफ का मुआयना करने लगा. काफी बड़ा अहाता था इस थाने का और एक तरफ संतरी बंदूक जमीन पर टिकाये उसी को देख रहा था. वह धीरे धीरे संतरी की तरफ बढ़ा तभी उसकी नज़र एक खम्भे से बंधे एक आदमी पर पड़ी. गंदे कपडे पहने उस पुरुष की पीठ उसकी तरफ थी और उसके पास दो पुलिस वाले खड़े थे.

इतने में इंस्पेक्टर बाहर आये और उसको देखते ही एक सिपाही को आवाज़ लगाया "अरे दो कुर्सी निकालो बाहर". उसने इंस्पेक्टर से हाथ मिलाया और दोनों कुर्सियों पर…

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Posted on October 10, 2018 at 6:02pm — 14 Comments

रिश्तों की चिता--लघुकथा

चिता पर चाचाजी का शरीर लकड़ियों से ढंका हुआ पड़ा था और उसको आग लगाने की तैयारी चल रही थी. चाचाजी उम्र पूरा करके गुजरे थे इसलिए घर में बहुत दुःख का माहौल नहीं था लेकिन उनकी सेहत के हिसाब से अभी कुछ और साल वह सामान्य तरीके से जी सकते थे. अभी भी सारा परिवार एक में था इसलिए पूरा घर वहां मौजूद था. चचेरे भाई ने चिता जलाने के लिए जलती फूस को हाथ में लिया और चिता के चारो तरफ चक्कर लगाने लगा.

कुछ ही पल में चिता ने आग पकड़ ली और वह एक किनारे से एकटक जलती चिता को देखता रहा. चाचाजी से पिछले कई सालों से…

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Posted on October 6, 2018 at 8:18pm — 14 Comments

अपराधबोध-लघुकथा

ट्रैफिक सिग्नल की बत्ती लाल हो गयी थी तो उसने ब्रेक लगाया और बाहर देखने लगा. जाने और आने वालों की दो दो लेन थी और हर आदमी ने अपनी गाड़ी थोड़े थोड़े फासले पर खड़ा कर रखी थी. जोहानसबर्ग की यह बात उसे बेहद पसंद थी कि अमूमन हर व्यक्ति कानून का पूरी तरह से पालन करता था और शायद ही कभी लाल बत्ती पर सड़क पार करता था. हॉर्न बजाना तो बेहद असभ्यता की बात मानी जाती थी और किसी की गलती को जताने के लिए ही लोग हॉर्न बजाते थे.

रोज की तरह ही वह अफ़्रीकी नवयुवक, जिसे वह शक्ल से पहचानता था, लेकिन कभी उसने उसका…

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Posted on October 4, 2018 at 4:50pm — 10 Comments

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At 1:14am on July 16, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय विनय जी 

At 4:37am on April 30, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें 

 
 
 

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