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विनय कुमार
  • Male
  • Varanasi , U P
  • India
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विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"बहुत बहुत शुक्रिया आ प्रतिभा पांडे जी"
Feb 29
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"रौशनी कायम है- लघुकथा एक हफ्ते गुजर चुके थे उस तोड़ फोड़ और मार काट के बाद, एक तंग सी गली के एक थोड़े जले मकान में बैठे दो पुराने दोस्त गंभीर लेकिन चिंतित मुद्रा में बैठे थे. "सत्तर साल तो हो ही गए हमारी दोस्ती को, लेकिन आज तक यह नौबत नहीं आयी थी…"
Feb 29
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"बहुधा ऐसा होता है जब खुद को पुरस्कार नहीं मिले तो आरोप लगा दिया जाता है.अच्छा कटाक्ष, बधाई इस रचना के लिए आ ओम प्रकाश जी"
Feb 29
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"पता नहीं कितनो को पता है कि इस जिंदगी के सफर में जाना कहाँ है. बहुत बढ़िया रचना प्रदत्त विषय पर, बहुत बहुत बधाई आ रवि भसीन 'शाहिद' जी"
Feb 29
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"बहुत बढ़िया रचना प्रदत्त विषय पर लेकिन अन्य गुणीजनों की बात पर गौर कीजिये. बहरहाल बधाई इस बढ़िया रचना के लिए आ कनक हरलालका जी"
Feb 29
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"बहुत भावपूर्ण रचना लिखी है आपने प्रदत्त विषय पर आ तेजवीर सिंह जी. बाकी गुणीजन कह ही चुके हैं, बहरहाल बधाई इस सुंदर रचना के लिए"
Feb 29
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"वाह, बहुत बेहतरीन और विषयानुकूल प्रेरणादायक रचना लिखी है आपने, मुझे बहुत अच्छी लगी. बहुत बहुत बधाई इस सटीक लघुकथा के लिए"
Feb 29
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"वाह, वाह, बहुत जबरदस्त और लोगों के मानसिकता पर चुटीला प्रहार करती हुई लघुकथा हुई है. बहुत बहुत बधाई इस प्रभावशाली रचना के लिए आ गणेश जी बागी जी"
Feb 28
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-59 (विषय: सफ़र)
"बहुत बढ़िया और प्रभावशाली लघुकथा हुई है प्रदत्त विषय पर और यह वर्तमान हालात को भी बखूबी बयां कर रही है. बहुत बहुत बधाई इस संवेदनशील रचना के लिए आ शेख शहज़ाद उस्मानी साहब"
Feb 28
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-58 (विषय: परिवर्तन)
"इस टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ तेज वीर सिंह जी"
Jan 30
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-58 (विषय: परिवर्तन)
"इस टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ कनक हरलालका जी"
Jan 30
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-58 (विषय: परिवर्तन)
"स्त्री के पुरुष पर आश्रित होने की बात कभी सही हुआ करती थी लेकिन आज परिस्थितियां बदल रही हैं. और स्त्री को पराश्रित हमारे पुरुष समाज ने ही किया, उसे न तो आगे बढ़ने दिया और न ही उसे अपने मर्जी से जीने दिया. बहरहाल लघुकथा बढ़िया है और प्रभावित भी करती…"
Jan 30
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-58 (विषय: परिवर्तन)
"प्रदत्त विषय पर बहुत बेहतरीन और सारगर्भित लघुकथा लिखी है आपने आ कनक हरलालका जी. बहुत बहुत बधाई इस सटीक रचना के लिए"
Jan 30
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-58 (विषय: परिवर्तन)
"सक्षम के आगे सब सर झुकाते हैं, बढ़िया रचना विषय पर. बहुत बहुत बधाई आ बबिता गुप्ता जी"
Jan 30
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-58 (विषय: परिवर्तन)
"इस टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी"
Jan 30
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-58 (विषय: परिवर्तन)
"आपकी प्रतिक्रिया लेखन के प्रति नविन उत्साह पैदा कर देती है. इस विस्तृत और प्रोत्साहित करती टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ योगराज प्रभाकर सर"
Jan 30

Profile Information

Gender
Male
City State
Johannesburg
Native Place
Varanasi
Profession
Banker
About me
पिछले कई सालों से लगातार पढ़ते रहने के बाद कुछ लिखने की प्रेरणा मिली तो लिखना प्रारम्भ किया |

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जिम्मेदारियाँ--लघुकथा

आज वह सोचकर आया था कि पापा से नई घडी और पैंट शर्ट के लिए कह ही देगा. अब तो स्कूल के बच्चे भी कभी कभी चिढ़ाने लगे थे. लेकिन घर की हालत देखकर उसकी कहने की इच्छा नहीं होती थी. जैसे ही वह पापा के कमरे में पहुंचा, पीछे पीछे उसका चचेरा भाई भी आ गया. अभी वह कुछ कहता तभी उसके चचेरे भाई ने अपनी फरमाईस रख दी "बड़े पापा, मेरी साइकिल बिलकुल खचड़ा हो गयी है, इस महीने नई दिला दीजिये".

पापा ने उसकी तरफ प्यार से देखते हुए कहा "ठीक है, इस बार बोनस मिलना है, जरूर खरीद दूंगा. लेकिन संभाल कर चलाना, गिरना…

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Posted on November 13, 2019 at 5:55pm — 3 Comments

उसका हक़- लघुकथा

जैसे ही छोटू के रोने की आवाज मालती के कानों में पड़ी, वह उठकर भागी. दूसरे कमरे के उसके बिस्तर पर लेटे छोटू की नींद खुल गयी थी, शायद उसने नैप्पी भी गीला कर दिया था.

"अले ले, जग गया मेरा राजा बेटा, भुक्खू लगी है क्या?, मालती ने उसे उठाकर प्यार करना शुरू किया और उसे लाड़ करती हुई ड्राइंग रूम में आ गयी.

ड्राइंग रूम में एक कोने में वह बैठा हुआ अखबार पढ़ रहा था, मालती और छोटू के मिले जुले स्वर से उसकी तन्द्रा भंग हुई. उसके चेहरे पर भी उनको देखकर मुस्कराहट आ गयी. वह उठकर छोटू को लेने ही जा रहा…

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Posted on October 7, 2019 at 6:42pm — 8 Comments

समीकरण- लघुकथा

अचानक उसे लगा कि पीछे से किसी ने नाम लेकर पुकारा, उसने साइकिल रोकी और पलट कर देखा. थोड़ा पीछे ही उसके परिचित वकील साहब खड़े थे और उसकी तरफ इशारा कर रहे थे. वह साइकिल धीरे धीरे चलाते हुए वकील साहब के पास पहुंचा और उनको नमस्ते किया.

"क्या बात है मैनेजर साहब, आज साइकिल चला रहे हैं. गाड़ी पंचर हो गयी है या खराब है", वकील साहब ने मुस्कुराते हुए पूछा.

उसे हंसी आ गयी, वह क्या साइकिल सिर्फ तभी चला सकता है जब उसकी गाड़ी खराब हो. फिर उसने हँसते हुए ही कहा "अरे नहीं वकील साहब, गाड़ी ठीक है. बस यूँ…

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Posted on September 26, 2019 at 5:49pm — 4 Comments

व्यस्तता- लघुकथा

"अब गांव चलें बहुत दिन बिता लिए यहाँ", शोभाराम ने जब पत्नी ललिता से कहा तो जैसे उनके मुंह की बात ही छीन ली.

लेकिन बेटे और बहू से क्या कहेंगे, गांव पर तो कोई रहता नहीं था,पट्टीदारों के अलावा. वैसे वहां पर अपने हिसाब से जीने की आज़ादी थी लेकिन यहाँ भी तो है ही, कोई बंधन नहीं है. उनके दिमाग में कई दिनों से यह सब घूम रहा था.

"अच्छा यह बताओ, आखिर क्या कह कर गांव जाओगे. बेटा तो यही कहकर शहर लाया था कि गांव में अकेले रहते हैं, कौन है जो आपका अकेलापन बाँटने के लिए", ललिता के सवाल पर लाजवाब हो…

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Posted on September 17, 2019 at 7:36pm — 6 Comments

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At 8:01pm on August 31, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीय विनय कुमार जी नमस्कार! बहुत बहुत धन्यवाद् आपने अपना अमूल्य समय निकाला और मेरी कोशिश को सराहा | आपने सही कहा की रचना अधूरी है और शीर्षकवीहीन भी | हड़बड़ी में गड़बड़ी हो गयी है इसीलिए मैं रचना का आखिरी शब्द ' थे' भूल गया और शीर्षक तो ज़ाहिर है पहले ही भूल गया हूँ! कोशिश करता हूँ सुधरने की
At 12:52pm on April 30, 2019, TEJ VEER SINGH said…

आदरणीय विनय कुमार जी को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम असीमित शुभ कामनांयें।

At 1:14am on July 16, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय विनय जी 

At 4:37am on April 30, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें 

 
 
 

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