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विनय कुमार
  • Male
  • Varanasi , U P
  • India
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विनय कुमार replied to KALPANA BHATT ('रौनक़')'s discussion पुस्तक समीक्षा: सुर्ख़ लाल रंग (कहानी संग्रह) in the group पुस्तक समीक्षा
"बहुत बहुत धन्यवाद आ कल्पना भट्ट जी, जिस तरह से आपने इस पुस्तक की बृहद और सारगर्भित समीक्षा की है उसके लिए मैं आभारी हूँ"
Sep 18, 2023
विनय कुमार joined Admin's group
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पुस्तक समीक्षा

इस ग्रुप में पुस्तकों की समीक्षा लिखी जा सकती है |
Sep 18, 2023
Samar kabeer commented on विनय कुमार's blog post हमें क्या हो गया है-- छोटी सी कहानी
"जनाब विनय कुमार जी आदाब, अच्छी प्रस्तुति है, बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 15, 2022
विनय कुमार posted a blog post

हमें क्या हो गया है-- छोटी सी कहानी

उसके सब्र की इन्तेहाँ हो रही थी, लगभग दो घंटे बीत चुके थे उसे पार्क में आये हुए. घर में सुबह ही उसे पता चल गया था कि परी अपनी माँ के साथ आ रही है. छह महीने तो बीत ही चुके थे उसे परी को देखे लेकिन कोई रास्ता भी नहीं था उसके पास जिससे वह परी को एक नजर देख भी सके. पत्र लिखने की हिम्मत कहाँ से आती जबकि उसे खुद पता नहीं था कि परी उसके लिए क्या सोचती है. साथ पढ़ते थे दोनों और एक ही मोहल्ले में रहते थे, उस समय आने जाने के लिए बहुत हुआ तो एक साइकिल मिल जाती थी, वर्ना पैदल ही स्कूल जाना और आना. न तो कोई…See More
Feb 8, 2022
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-77
"बहुत बढ़िया लघुकथा, ऐसा विरोधाभास बहुधा देखने को मिलता है. बहुत बहुत बधाई आ अजेय जी"
Aug 31, 2021
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-77
"वाह, बहुत बेहतरीन और प्रभावशाली लघुकथा आ प्रतिभा पांडे जी, लड़कियां हर क्षेत्र में बेहतर कर सकती हैं बशर्ते उन्हें प्रोत्साहन मिले."
Aug 31, 2021
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-77
"इस टिप्पणी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आ लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी"
Aug 31, 2021
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-77
"इस सुंदर लघुकथा के लिए बहुत बहुत बधाई आ मोहन बेगोवाल जी"
Aug 31, 2021
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-77
"इस टिप्पणी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आ प्रतिभा पांडे जी"
Aug 31, 2021
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-77
"इस टिप्पणी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आ मोहन बेगोवाल जी"
Aug 31, 2021
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-77
"इस टिप्पणी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आ मनन कुमार सिंह जी"
Aug 31, 2021
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-77
"इस टिप्पणी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आ तेज वीर सिंह जी"
Aug 31, 2021
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-77
"कीमत- लघुकथा आज राजेश बहुत दुखी था, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर रजत उससे इतना रुखा व्यवहार क्यों करता है. उसे तो याद भी नहीं है कि कभी उसने उसके साथ किसी भी तरह का गलत व्यवहार किया हो, बल्कि वह हमेशा उसका समर्थन ही करता था अपने ऑफिस में. और आज…"
Aug 30, 2021
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-77
"बहुत भावपूर्ण और सुंदर लघुकथा लिखी है आपने आ मनन कुमार सिंह जी, महिलाएं जिंदगी भर चुपचाप बहुत बड़ी कीमत चुकाती हैं. बहुत बहुत बधाई इस शानदार रचना के लिए"
Aug 30, 2021
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-77
"वाह, बहुत भावपूर्ण और खूबसूरत लघुकथा लिखी है आपने आ तेजवीर सिंह जी, पूरा घटनाक्रम जैसे आँखों के सामने घूम गया. बहुत बहुत बधाई इस शानदार रचना के लिए"
Aug 30, 2021
विनय कुमार replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-74 (विषय: अनुभव)
"बहुत दिलचस्प और बढ़िया रचना प्रदत्त विषय पर. हर गांव खेड़े में एक ऐसे बुजुर्ग मिलते हैं जिनके पास अनुभव का खजाना होता है और वह सारे गांव को मार्गदर्शन देते हैं. लघुकथा के हिसाब से बहुत विस्तार पा गयी है आपकी रचना, इसे थोड़ा विस्तार देकर बढ़िया कहानी में…"
May 31, 2021

Profile Information

Gender
Male
City State
Johannesburg
Native Place
Varanasi
Profession
Banker
About me
पिछले कई सालों से लगातार पढ़ते रहने के बाद कुछ लिखने की प्रेरणा मिली तो लिखना प्रारम्भ किया |

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हमें क्या हो गया है-- छोटी सी कहानी

उसके सब्र की इन्तेहाँ हो रही थी, लगभग दो घंटे बीत चुके थे उसे पार्क में आये हुए. घर में सुबह ही उसे पता चल गया था कि परी अपनी माँ के साथ आ रही है. छह महीने तो बीत ही चुके थे उसे परी को देखे लेकिन कोई रास्ता भी नहीं था उसके पास जिससे वह परी को एक नजर देख भी सके. पत्र लिखने की हिम्मत कहाँ से आती जबकि उसे खुद पता नहीं था कि परी उसके लिए क्या सोचती है. 

साथ पढ़ते थे दोनों और एक ही मोहल्ले में रहते थे, उस समय आने जाने के लिए बहुत हुआ तो एक साइकिल मिल जाती थी, वर्ना पैदल ही स्कूल जाना और…

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Posted on February 8, 2022 at 4:42pm — 1 Comment

देना कब सीखेंगे हम-कविता

नदी जीवन देती है

नदी पालती है

नदी सींचती है

नदी बहना सिखाती है

नदी सहना सिखाती है

नदी बदलाव समझाती है

नदी ठहराव समझाती है

नदी हंसना सिखाती है

नदी अंत तक साथ देती है.



पहाड़, धरती, प्रकृति भी

हमें यही सब सिखाते हैं,

लेकिन हम क्या कर रहे हैं?

हम नदी को धीरे धीरे,

तिल तिल कर मार रहे हैं,

हम अपना सारा कचरा

बेदर्दी से इसमें उड़ेल रहे हैं,

हम प्रकृति को बर्बाद कर रहे हैं

हम धरती को बंजर बना रहे हैं

हम पहाड़ों को…

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Posted on May 12, 2021 at 3:59pm — 2 Comments

हम क्यों जीते हैं--कविता

हम सांस लेते हैं, हम जीते हैं

और एक दिन आखिरी सांस लेते हैं

इस आखिरी सांस के पहले

हमारे पास वक़्त होता है

अपनों के लिए कुछ करने का

समाज को कुछ लौटाने का

ऐसी वजह बनाने का

जिससे लोग याद रखें

आखिरी सांस लेने के बाद भी,

मगर अमूमन हम

बस अपने लिए ही जीते हैं

और अंत में मर जाते हैं

बिना किसी के लिए कुछ किये.

हम पेड़ पौधों से नहीं सीखते

हम तमाम जानवरों से भी नहीं सीखते

हम नहीं सीखते औरों के लिए जीना

हमारी दुनिया वास्तव में…

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Posted on May 11, 2021 at 6:10pm — 6 Comments

संवेदना--लघुकथा

उस उजाड़ से गांव में बस कुछ टूटीफूटी झोपड़ियां ही मौजूद थीं जो वहाँ के लोगों के आर्थिक दशा और सरकार के विकास के नारे की तल्ख सच्चाई बयान कर रही थीं. उसको थोड़ा अजीब लगा, उसने अपने स्टाफ की बात को गंभीरता से नहीं लिया था. दरअसल जब भी इस गांव के लोगों से वसूली की बात होती, स्टाफ मना कर देता कि वहाँ जाने से कोई फायदा नहीं होगा. "सर, वहाँ लोगों के पास अभी खाने को नहीं है, बैंक की किश्त कैसे चुकाएंगे", अक्सर उसे यही बात सुनने को मिलती थीं.

लेकिन उसे लगा कि शायद दूर होने और वहाँ पैदल जाने के…

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Posted on April 4, 2021 at 4:30pm — 6 Comments

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At 12:52pm on April 30, 2019, TEJ VEER SINGH said…

आदरणीय विनय कुमार जी को जन्म दिन की हार्दिक बधाई एवम असीमित शुभ कामनांयें।

At 1:14am on July 16, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय विनय जी 

At 4:37am on April 30, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें 

 
 
 

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' shared their blog post on Facebook
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धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
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