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gumnaam pithoragarhi
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gumnaam pithoragarhi commented on gumnaam pithoragarhi's blog post ग़ज़ल
"शुक्रिया लक्ष्मण भाई जी ... .समर साहब आपके सुझाव का शुक्रिया .. .. अच्छा लगा बसंत जी आपको ग़ज़ल अच्छी लगी शुक्रिया..   "
Aug 2, 2018
gumnaam pithoragarhi commented on विनय कुमार's blog post याद तेरी - ग़ज़ल
"ग़ज़ल अच्छी लगी ..  बधाई  .. "
Aug 2, 2018
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on gumnaam pithoragarhi's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई गुमनाम जी, बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Aug 1, 2018
Samar kabeer commented on gumnaam pithoragarhi's blog post ग़ज़ल
"जनाब गुमनाम पिथोरागढ़ी जी आदाब, ओबीओ के तरही मिसरे पर बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । ज़ख्म मेरे जब कभी तुम पर बयाँ हो जाएंगे ' मतले के इस मिसरे में 'बयाँ' की जगह "अयाँ" क़ाफ़िया उचित होगा,देखियेगा ।"
Aug 1, 2018
बसंत कुमार शर्मा commented on gumnaam pithoragarhi's blog post ग़ज़ल
"बहुत सुंदर गजल हुई है आदरणीय , बहुत बहटा बधाई आपको"
Aug 1, 2018
gumnaam pithoragarhi commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक गजल - जानता हूँ चुनाव होना है
"वाह सरकार जी खूबसूरत ग़ज़ल कही है वाह.   ."
Jul 31, 2018
gumnaam pithoragarhi commented on gumnaam pithoragarhi's blog post 2122 2122 2122 212......... ग़ज़ल.......
"शुक्रिया नवीन जी शुक्रिया तेज वीर जी ... .. आपकी समलोचनाओ का स्वागत. ..  .. "
Jul 31, 2018
TEJ VEER SINGH commented on gumnaam pithoragarhi's blog post 2122 2122 2122 212......... ग़ज़ल.......
"हार्दिक बधाई आदरणीय गुमनाम जी।बेहतरीन गज़ल। खेलने दो आज इनको फ़िक्र सारी छोड़कर  ज़िन्दगी उलझा ही देगी जब जवाँ हो जायेंगे "
Jul 31, 2018
Naveen Mani Tripathi commented on gumnaam pithoragarhi's blog post 2122 2122 2122 212......... ग़ज़ल.......
"आ0    साहब बहुत सुंदर ग़ज़ल हुई । मझे हर शेर अच्छे लगे । बाकी गुण दोष ग़ज़ल के विद्वान् देझेंगे । मेरी ओर से हार्दिक बधाई । "
Jul 31, 2018
gumnaam pithoragarhi posted a blog post

ग़ज़ल

2122 2122 2122 212ज़ख्म मेरे जब कभी तुम पर बयाँ हो जाएंगे सामने के सब नज़ारे बेजुबाँ  हो जाएंगे हाथ में  पत्थर नहीं कुछ ख्वाब दो कुछ काम दो हाथ ये नापाक के  कठपुतलियाँ हो जाएंगे खेलने दो आज इनको फ़िक्र सारी छोड़कर ज़िन्दगी उलझा ही देगी जब जवाँ हो जायेंगे जब कभी अफवाह उठ्ठे तुम यकीं करना नहीं झूठ की इस आग में ही घर धुवां हो जायेंगे ये सफर तन्हा नहीं है साथ गम यादें तेरी गम तुम्हारे मिल गये अब कारवां हो जायेंगेहो गए कुछ शेर भी गर हर जुबाँ पर दर्ज तो नाम अपने इस जहां में जाविदाँ हो जायेंगे तीरगी को…See More
Jul 31, 2018
gumnaam pithoragarhi commented on surender insan's blog post "दर्द वो इस तरह छुपाता है"
"वाह बहुत खूबसूरत ग़ज़ल .................बधाई ....."
Jul 31, 2018
gumnaam pithoragarhi commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post गजल- जहाँ ईमान का पौधा नहीं है
"वाह अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई  .. .  .. "
Jul 31, 2018
gumnaam pithoragarhi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post आ जाती है मौत यहाँ अनजाने में
"शानदार ग़ज़ल के लिए बधाई.   ..  "
Jul 31, 2018
gumnaam pithoragarhi commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (क्या ख़ता कोई रशके क़मर हो गई)
"वाह खूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई. .. .. सबको खबर हो गई . .. .वाह "
Jul 31, 2018
gumnaam pithoragarhi commented on Sushil Sarna's blog post आज के दोहे....
"अच्छे दोहे हुए हैं. .. .बधाई ..  ."
Jul 31, 2018
gumnaam pithoragarhi commented on Kishorekant's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल अच्छी लगी बधाई. .. ..  पर दासतां  पर शंका है     ."
Jul 31, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
pithoragarh
Native Place
pithoragarh
Profession
teaching
About me
sahity ki dunia me jana pahachana naam hona chahta hoon............

gazal

धड़कता है गुनगुनाता है बतियाता है लेकिन

ख़त कि तरह मोबईल महकता नहीं है

--------------------------------------------------------------

मज़हब की किताबों के पैगाम बदल देते हैं

नानक और ईसा के नाम बदल देते हैं

फिर न होगी शिकायत किसी को ज़माने में

लाओ पैगम्बर से राम बदल देते हैं

----------------------------------------------------------------------------

ऐ वाइज़ तू क्यों फिकर में रहता है

सारा निज़ाम उसकी नज़र में रहता है

सिर्फ दैरो हरम नहीं ठिकाना उसका

हर जर्रे में वो हर बशर में रहता है

 

 

 

अप्रकाशित व मौलिक -------------------------------------

Comment Wall (5 comments)

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At 1:22pm on March 24, 2015, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय गुमनाम जी ..महेनी का सक्रीय सदस्य चुने जाने पर मेरी तरफ से भी हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर 

At 2:50pm on March 19, 2015, jaan' gorakhpuri said…

भाई गुमनाम जी 'महीने का सक्रिय सदस्य' के रूप में आप को देखकर अपार हर्ष हो रहा है! बहुत बहुत बधाईयां!!

At 8:22pm on March 15, 2015, maharshi tripathi said…

आ.गुमनाम पिथौरागढ़ी जी आपको विगत माह का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर हार्दिक बधाई |

At 12:40pm on March 15, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय
गुमनाम पिथौरागढ़ी जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:46pm on January 28, 2015, vijay said…
गुमनाम जी इस ग़ज़ल पर कोई काम हो तो बताएं
आपकी पिछली टिप्पणी से साहस मिला
धन्यवाद

Gumnaam pithoragarhi's Blog

ग़ज़ल

2122 2122 2122 212

ज़ख्म मेरे जब कभी तुम पर बयाँ हो जाएंगे 

सामने के सब नज़ारे बेजुबाँ  हो जाएंगे 

हाथ में  पत्थर नहीं कुछ ख्वाब दो कुछ काम दो 

हाथ ये नापाक के  कठपुतलियाँ हो जाएंगे 

खेलने दो आज इनको फ़िक्र सारी छोड़कर 

ज़िन्दगी उलझा ही देगी जब जवाँ हो जायेंगे 

जब कभी अफवाह उठ्ठे तुम यकीं करना नहीं 

झूठ की इस आग में ही घर धुवां हो जायेंगे 

ये सफर तन्हा नहीं है साथ गम यादें तेरी 

गम…

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Posted on July 31, 2018 at 5:00pm — 7 Comments

ग़ज़ल .....

22  22  22  22  

गाता जाए एक दिवाना

दुनिया यारो पागलखाना

परदेश बनाया घर लेकिन

घर मे कम है एक सयाना

इससे आगे सोच ना पाऊं

बीबी बच्चे और ठिकाना

केक खिलाया साल बढ़ाए

भूल गया पर उम्र घटाना

एक शिगूफा छोड़ेगा फिर

अबके राजा भौत सयाना

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on June 16, 2018 at 5:52pm — 10 Comments

ग़ज़ल ,,,,,,,,, गुमनाम पिथौरागढ़ी ,,,,,,,

२१२२  २१२२  २१२२  २१२

बेवफा ने जब जफ़ा के दस बहाने रख दिए

हमने भी तब जख्म अपने सब छुपा के रख दिए

भूख भी ये हार बैठी हौसले को देख कर

मुफलिसों ने आज फिर से देख रोजे रख दिए

फोन ने तो चीन डाला बचपना अब बच्चों का

टाक पर दादी के किस्से हमने सारे रख दिए

अब बुजुर्गों की कोई कीमत नहीं संसार में

आश्रमों के द्वार पर बूढ़े बिचारे रख दिए

जालिमों का जोर क्यों बढ़ने लगा है आज कल

यूँ भला सच की जुबां पर…

Continue

Posted on February 25, 2016 at 10:02pm — 3 Comments

एक रुकनी ग़ज़ल ... गुमनाम पिथौरागढ़ी

२१२२ 

ज़िन्दगी भर

मौत का डर 

प्यार तो है

ढाई आँखर

तोड़ पिंजरा

आजमा पर

ये सियासत

एक अजगर

होश जख्मी

हुस्न खंजर

गुमनाम पिथौरागढ़ी

Posted on January 4, 2016 at 7:30pm — 7 Comments

 
 
 

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"जी ! उत्तम. सादर नमस्कार. आदरणीय बागी जी. सादर."
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