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Anita Maurya
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"लाजवाब"
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Anita Maurya's blog post नज़्म - कहाँ जाऊँ के तेरी याद का
"वाह सुन्दर भावभरी रचना..बधाई"
Oct 18
Samar kabeer commented on Anita Maurya's blog post नज़्म - कहाँ जाऊँ के तेरी याद का
"मुहतरमा अनीता मौर्य जी आदाब,नज़्म का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । ' खुदाया अबके जब लिखा यही तहरीर लिख देना, उसे तुम मेरी हाथों में सजी तस्वीर लिख देना' पहली पंक्ति लय में नहीं ,दूसरी पंक्ति में 'तुम' की जगह…"
Oct 17
Munavvar Ali 'taj' commented on Anita Maurya's blog post नज़्म - कहाँ जाऊँ के तेरी याद का
"मुहतरमा अनीता जी  आदाब, आपकी  रचना अच्छी लगी,बधाई स्वीकार करें ,"
Oct 17
Anita Maurya posted a blog post

नज़्म - कहाँ जाऊँ के तेरी याद का

कहाँ जाऊँ के तेरी याद का झोंका नहीं आये, कि तेरे साथ का गुज़रा कोई लम्हा न तड़पाये,कभी कपड़ों में मिल जाते हैं तेरे रंग के जादू, मुझे महका के जाती हैं तेरे ही ब्राण्ड की ख़ुश्बू ,मेरे हाथों की मेहंदी में तेरा ही अक़्स उभरे है, मेरी साँसों में भी जानां तेरी ही साँस महके है,पसंदीदा तुम्हारा जब कोई खाना बनाती हूँ, तुम्हारे नाम की थाली अलग से मैं लगाती हूँ,मिला कर दर्द में आँसू तेरा चेहरा बनाती हूँ, मैं अक्सर चाँद तारों को तेरे क़िस्से सुनाती हूँ,खुदाया अबके जब लिखा यही तहरीर लिख देना, उसे तुम मेरी…See More
Oct 17
Anita Maurya commented on rajesh kumari's blog post शज़र जब सूख जाता है कोई पत्ता नहीं रहता (तरही ग़ज़ल 'राज')
"वाह, बहुत खूब..."
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Anita Maurya's blog post बोल देती है बेज़ुबानी भी
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Anita Maurya's blog post बोल देती है बेज़ुबानी भी
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Ram Awadh VIshwakarma commented on Anita Maurya's blog post बोल देती है बेज़ुबानी भी
"आ० अनीता जी  कहने के लिये बधाई।"
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Mohammed Arif commented on Anita Maurya's blog post बोल देती है बेज़ुबानी भी
"आदरणीया अनीता मौर्य जी आदाब,                        ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।"
Feb 16
Anita Maurya posted a blog post

बोल देती है बेज़ुबानी भी

2122 1212 22 बोल देती है बेज़ुबानी भी,ख़ामशी के कई म'आनी भी,वो मरासिम बढ़ा के छोड़ गया,दर्द होता है जाविदानी भीवक़्त - बेवक़्त ही निकल आयेहै अजब आँख का ये पानी भी,वो सबब है मेरी उदासी का,उससे है दोस्ती पुरानी भी,जन्म देकर क़ज़ा तलक लायी,ज़िन्दगी तेरी मेज़बानी भी,आज फिर क़ैस को ही मरना पड़ा,हो गयी ख़त्म ये कहानी भी। .. ...मौलिक व् अप्रकाशितSee More
Feb 16
Anita Maurya and anand murthy are now friends
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Anita Maurya commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - अच्छा हुआ जो पाँव से काँटा निकल गया।
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Anita Maurya commented on विनय कुमार's blog post यक़ीन क़ायम है—लघुकथा
"अच्छी लघुकथा..."
Feb 14

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Gender
Female
City State
Kanpur
Native Place
Ranchi
Profession
business
About me
too much emotional

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नज़्म - कहाँ जाऊँ के तेरी याद का

कहाँ जाऊँ के तेरी याद का झोंका नहीं आये,

कि तेरे साथ का गुज़रा कोई लम्हा न तड़पाये,

कभी कपड़ों में मिल जाते हैं तेरे रंग के जादू,

मुझे महका के जाती हैं तेरे ही ब्राण्ड की ख़ुश्बू ,

मेरे हाथों की मेहंदी में तेरा ही अक़्स उभरे है,

मेरी साँसों में भी जानां तेरी ही साँस महके है,

पसंदीदा तुम्हारा जब कोई खाना बनाती हूँ,

तुम्हारे नाम की थाली अलग से मैं लगाती हूँ,

मिला कर दर्द में आँसू तेरा चेहरा बनाती हूँ,

मैं…

Continue

Posted on October 17, 2018 at 9:00am — 4 Comments

बोल देती है बेज़ुबानी भी

2122 1212 22 

बोल देती है बेज़ुबानी भी,

ख़ामशी के कई म'आनी भी,

वो मरासिम बढ़ा के छोड़ गया,

दर्द होता है जाविदानी भी

वक़्त - बेवक़्त ही निकल आये

है अजब आँख का ये पानी भी,

वो सबब है मेरी उदासी का,

उससे है दोस्ती पुरानी भी,

जन्म देकर क़ज़ा तलक लायी,

ज़िन्दगी तेरी मेज़बानी भी,

आज फिर क़ैस को ही मरना पड़ा,

हो गयी ख़त्म ये कहानी भी। .. ...

मौलिक व् अप्रकाशित

Posted on February 16, 2018 at 4:00pm — 4 Comments

मुहब्बत के सफ़र

1222 1222 122

मुहब्बत के सफ़र की दास्ताँ है,

तू मेरी जान है मेरा जहाँ है,

मेरी मुस्कान होठों पर सजी और,

मेरा ग़म मेरी आँखों में निहां है,

शबे -ग़म हिज्र का तुझको सताये,

वो मेरी ज़िन्दगी में भी रवां है,

सफ़र में साथ मेरे तुम हो जानां,

मेरे कदमों के नीचे आसमां है,

लबों से कुछ नहीं कहता कभी वो,

बस उसके लम्स से सबकुछ अयाँ है..

मौलिक व् अप्रकाशित

Posted on February 10, 2018 at 6:41pm — 4 Comments

रंग

२१२२ १२१२ २२

फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ैलुन

******************************

रंग ख़ुशियों के कल बदलते ही,

ग़म ने थामा मुझे फिसलते ही,

मैं जो सूरज के ख़्वाब लिखती थी,

ढल गयी हूँ मैं शाम ढलते ही,

राह सच की बहुत ही मुश्किल है,

पाँव थकने लगे हैं चलते ही

वो मुहब्बत पे ख़ाक डाल गया

बुझ गया इक चराग़ जलते ही,

ख़्वाब नाज़ुक हैं काँच के जैसे,

टूट जाते हैं आँख मलते ही…

Continue

Posted on October 25, 2017 at 7:27pm — 10 Comments

Comment Wall (11 comments)

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At 4:46pm on February 22, 2013, नादिर ख़ान said…

अनीता जी जन्म दिन की ढेरों शुभकामनायें ...

At 10:55pm on June 26, 2012, Raj Kumar Rohilla said…

bahut achchi rachnayen hai.

At 3:09pm on February 22, 2011, nemichandpuniyachandan said…
 Hearty Felicitations On Your Birthday.
At 1:04pm on February 22, 2011, PREETAM TIWARY(PREET) said…
MANY MANY HAPPY RETURNS OF THE DAY ANITA DIDI........
At 10:22am on February 22, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 11:59am on December 19, 2010, madan kumar tiwary said…

आप सभी कवि बंधुओं को मेरी सलाह है की अपनी कविताओं का वीडियो , यू ट्यूब पर अपलोड करें । बहुत सारी कवितायें वाकई दिल को छु जाने वाली हैं।

At 11:30pm on November 19, 2010, Shriprakash shukla said…
आदरणीया अनिता जी,
एक सुन्दर ,सुललितम भावपूर्ण रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें
सादर
श्रीप्रकाश शुक्ल
At 9:11pm on October 31, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 12:38pm on October 29, 2010, Ratnesh Raman Pathak said…

At 8:37am on October 29, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…

 
 
 

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