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Shashi Mehra
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Latest Activity

rajni chhabra and Shashi Mehra are now friends
May 1
Shashi Mehra posted a blog post

शुभ दीपावली

सदियों से हम, साल में इक दिन, घर-घर दीप जलाते हैं |इस दिन को कह कर दीवाली, खुशियाँ बहुत मनाते हैं ||दीप जलें, अंधियारा भागे, हो जाता उजियारा है |हर दिन ख़ुशी के दीप जलाएं, बनता फ़र्ज़ हमारा है ||  ऐसा कर दिखलाना होगा, हर दिन ही दीवाली हो |घर-घर रौशन हो, खुशियाँ हो, कोई रात न काली हो ||ख़ुशी मनाओ, खुशियाँ बांटो, अपना लक्ष्य बनाओ सब |हर दिन दीवाली बन जाए, ऐसा कर दिखलाओ सब ||सबको दिवाली, मंगलमय हो,सबके घर खुशियों की जय हो |जब भी दीप जलाना सारे, 'शशि' भूल ना जाना सारे ||सुबह माँगा यही रब्ब से, बना…See More
Oct 26, 2011
Shashi Mehra commented on Arun Kumar Pandey 'Abhinav''s blog post ग़ज़ल :- कुछ टूट रहा टूटती आवाज़ की तरह
" मैं अपने रंजो गम का सबब ढूंढ रहा था | तुमको मेरी मुद्रा लगी नमाज की तरह || achhi fikr hai. "
Oct 19, 2011
Shashi Mehra commented on Hilal Ahmad 'hilal''s blog post क्यों अदीब अब तक है खोये ज़ुल्फ़ और रुखसार में !!
"हमको  रहना  चाहिए  अब  सोह्बते  तलवार  में ! क्यों अदीब अब तक है खोये ज़ुल्फ़ और रुखसार  में !! bahut khub"
Oct 19, 2011
Shashi Mehra commented on Arun Kumar Pandey 'Abhinav''s blog post लघुकथा - बकाया !
"थैंक्स फॉर यौर को - आपरेशन सर | fine punch indeed."
Oct 19, 2011
Saurabh Pandey commented on Shashi Mehra's blog post चमचा
"शशि भाई, बहुत बढिया. इस हास्य रचना के लिये हार्दिक बधाई. रचना सीधी सादी भाषा में बात रखती है लेकिन इसकी तासीर बहुत ही गहरी है. मात दी है, चिराग के जिन को,दाँव,चमचे ने वो लगाया है || आँख वालों को, अक्ल का अँधा, आज चमचों ने ही बनाया है | इन पंक्तियों…"
Oct 15, 2011
vandana gupta commented on Shashi Mehra's blog post चमचा
"bahut khoob"
Oct 15, 2011
Shashi Mehra posted a blog post

चमचा

जब से चमचा चलन में आया है | कुछ नयापन, वतन में आया है ||बे-हयाई व बेईमानी को, होश्यारी में जब मिलाया है |तब कहीं जा के आज का इन्सां, खुद को चमचा कहाने पाया है ||खूब नुस्खा, यह हाथ आया है, हमने चमचों से दिल लगाया है |रंग लाई है, उल्फत-ए-चमचा ,हम पे अब,बरकतों का साया है ||जिसकी ख़्वाबों में न तवक्को थी, होश में, हाथ सब वो आया है |मात दी है, चिराग के जिन को,दाँव,चमचे ने वो लगाया है ||आँख वालों को, अक्ल का अँधा, आज चमचों ने ही बनाया है |मूर्खों की इजाद है चमचा, आज-कल जिसपे, हुस्न आया है||जब से…See More
Oct 14, 2011
वीनस केसरी commented on Shashi Mehra's blog post शोर-ए-दिल
"ठोकरों पे रख दिया, जिसने ज़हाँ | उसको दुनिया ने कहा, मन्सूर है ||वाह वा,,, बहुत खूब"
Sep 23, 2011
Shashi Mehra commented on siyasachdev's blog post ग़ज़ल
"अब जो बिखरे तो फिजाओं में सिमट जाएंगे  ओर ज़मीं वालों के एहसास से कट जाएंगे bahut hi umda. wah wah.  "
Sep 22, 2011
Shashi Mehra commented on siyasachdev's blog post जीने के बहाने आ गए
"बहुत अछि गजल लगी, दाद स्वीकारिये |"
Sep 22, 2011
Shashi Mehra posted a blog post

शोर-ए-दिल

हर किसी में, गर खुदा का नूर है |कोई मिलता खुश, कोई रन्जूर है ||अपने-अपने ह|ल में सब मस्त हैं |कोई अपनों में है, कोई दूर है ||जोर कुछ चलता नहीं, तकदीर पर |बे-वज़ह इन्सां हुआ, मगरूर है ||ठोकरों पे रख दिया, जिसने ज़हाँ |उसको दुनिया ने कहा, मन्सूर है ||ज़िन्दगी इनाम है, चाहे सजा |इसको जीने पे, शशि मजबूर है || See More
Sep 19, 2011
Ravi Kumar Giri (Guru Jee) commented on Shashi Mehra's blog post हिंदी प्रसार
" है लक्ष्य यह हमारा, हिंदी का हो पसारा | हिंदी के दीप से ही, सम्भव है उजियारा || हमें मात्रभाषा को ही, है बनाना राष्ट्र- भाषा | इससे ही बढ सकेगी, साक्षरता  की आशा | bahut sundar sir ji "
Sep 16, 2011
Arun Kumar Pandey 'Abhinav' commented on Shashi Mehra's blog post हिंदी प्रसार
"अच्छी सन्देश परक कविता बहुत बहुत बधाई शशी जी !!"
Sep 16, 2011
Ganesh Jee "Bagi" commented on Shashi Mehra's blog post हिंदी प्रसार
"वाह वाह, शशि मेहरा जी, बहुत ही खुबसूरत रचना प्रस्तुत किया है आपने, सच यही सोच हमें हर हिन्दुस्तानी में देखना है, बधाई स्वीकार करें |"
Sep 15, 2011
Ganesh Jee "Bagi" commented on Shashi Mehra's blog post हिंदी-दिवस
"शशि मेहरा जी , इस कविता में प्रयुक्त एक एक शब्दों को नकारा नहीं जा सकता, आप बिलकुल सत्य लिखे है, हिंदुस्तान में हिंदी आज तक अभी भी राष्ट्र भाषा की दर्जा पाने के लिए तरस रही है और अपने विद्वान नेता गण हिंदी दिवस मन रहे है व् भाषणों से हिंदी का भला कर…"
Sep 15, 2011

Profile Information

Gender
Male
City State
Firozepur
Native Place
Amritsar
Profession
Retd A.O. from Defence A/C Deptt, On 1-11-20011
About me
I am writing poetry since I was hardly of 17. Iwas inspired by the lyric writers for Films, who use to add emotions as per situations. I also wrote in my life under the titleShor-E-Dil, Now I m writing WALWALE.

Shashi Mehra's Blog

शुभ दीपावली

Posted on October 21, 2011 at 9:30am 0 Comments

सदियों से हम, साल में इक दिन, घर-घर दीप जलाते हैं |

इस दिन को कह कर दीवाली, खुशियाँ बहुत मनाते हैं ||



दीप जलें, अंधियारा भागे, हो जाता उजियारा है |

हर दिन ख़ुशी के दीप जलाएं, बनता फ़र्ज़ हमारा है ||…

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चमचा

Posted on October 14, 2011 at 10:01am 2 Comments



जब से चमचा चलन में आया है |
 कुछ नयापन, वतन में आया है ||
बे-हयाई व बेईमानी को, होश्यारी में जब मिलाया है |
तब कहीं जा के आज का इन्सां, खुद को चमचा कहाने पाया है ||
खूब नुस्खा, यह हाथ आया है, हमने चमचों से दिल लगाया है |
रंग लाई है, उल्फत-ए-चमचा ,हम पे अब,बरकतों का साया है ||
जिसकी…
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शोर-ए-दिल

Posted on September 19, 2011 at 6:30pm 1 Comment

हर किसी में, गर खुदा का नूर है |

कोई मिलता खुश, कोई रन्जूर है ||
अपने-अपने ह|ल में सब मस्त हैं |
कोई अपनों में है, कोई दूर है ||
जोर कुछ चलता नहीं, तकदीर पर |
बे-वज़ह इन्सां हुआ, मगरूर है ||
ठोकरों पे रख दिया, जिसने ज़हाँ |
उसको दुनिया ने कहा, मन्सूर है ||
ज़िन्दगी इनाम है, चाहे सजा |
इसको जीने पे, शशि मजबूर है ||

 

हिंदी-दिवस

Posted on September 15, 2011 at 9:30am 1 Comment

हिंदी-दिवस मनाना, है असल में बहाना |

इसके बज़ट से सत्ता, को ज़श्न है मनाना || 
सालों से आज-तक हम, ये दिन मना रहे हैं |
हर साल आंकड़ों को, ऊँचा दिखा रहे है ||
सच क्या है कौन जाने, है झूठ का ज़माना |
सब लीडरों के बच्चे, अंग्रेजी पढ़ रहे हैं…
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Comment Wall (8 comments)

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At 9:37pm on August 27, 2011, Azeez Belgaumi said…

thank you so much

At 2:32pm on August 18, 2011, Ravi Kumar Giri (Guru Jee) said…

janamdin mubarak ho

 

At 12:04am on August 18, 2011, Ganesh Jee "Bagi" said…

At 9:40am on August 9, 2011, Arun Kumar Pandey 'Abhinav' said…

आदरणीय श्री शशि जी आपके प्रेरणा भरे शब्दों ke लिए आभारी हूँ ! स्नेह बना रहे !!

At 10:26am on July 16, 2011, Admin said…

//जिन्हें, लोग कहते, किसान हैं //

शशि जी यह रचना गलत जगह पोस्ट हो गई है, दिए गए लिंक पर बने बॉक्स में पोस्ट करें .......(चित्र के ठीक नीचे बने बॉक्स में)

http://www.openbooksonline.com/group/pop/forum/topics/5170231:Topic:105164

At 10:35am on July 15, 2011, Admin said…

आदरणीय शशि जी, ओ बी ओ पर केवल अप्रकाशित रचना ही पोस्ट की जा सकती है आपकी रचना 

खौफ अब, हर ख़ुशी से आता है |
मेरा माझी, मुझे डराता है ||
पूर्व प्रकाशित है |
अधिक जानकारी के लिए ओ बी ओ नियमावली देखने हेतु यहाँ क्लिक करे |
At 2:11pm on July 6, 2011, PREETAM TIWARY(PREET) said…
At 11:58am on July 6, 2011, Admin said…
 
 
 

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