Posted on August 18, 2011 at 1:30pm 2 Comments 0 Likes
पास आ कातिल मेरे मुझमें जान आने दे,
जान ले लेना पर थोडा तो संभल जाने दे।
तूँ तसव्वुर में मेरे रहा है बरसों से,
खुद को नजरों से सीने में उतर जाने दे।
कुछ ठहर जा कि छुपा लूँ मैं दर्द सीने का,
या तेरे सीने से लिपट कर बिफर जाने दे।
तुझको…
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SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said… कुछ ठहर जा कि छुपा लूँ मैं दर्द सीने का,
या तेरे सीने से लिपट कर बिफर जाने दे।
प्रिय त्रिपाठी जी .. जान ले लेना पर थोडा तो संभल जाने दे ,,बहुत खूब ..प्रेम के कितने रंग ...जय श्री राधे
अरुण कान्त शुक्ला said… मित्र बनाने के लिए धन्यवाद ज्ञानेंद्र जी .
PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said… aadarniya tripathi ji, sadar abhivadan ke sath apka hardik swagat hai.
Ganesh Jee "Bagi" said…
PREETAM TIWARY(PREET) said…
Ganesh Jee "Bagi" said…
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