For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कवि - राज बुन्दॆली
  • Male
  • मुम्बई (महा.)
  • India
Share

कवि - राज बुन्दॆली's Friends

  • Krish mishra 'jaan' gorakhpuri
  • डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव
  • Akash Verma
  • अशोक कत्याल   "अश्क"
  • केवल प्रसाद 'सत्यम'
  • Dr Ashutosh Mishra
  • Gorkhe Sailo
  • Sarita Bhatia
  • aman kumar
  • Neelkamal Vaishnaw
  • deepti sharma
  • rajesh kumari
  • aashukavi neeraj awasthi
  • Gyanendra Nath Tripathi
  • Tapan Dubey
 

कवि - राज बुन्दॆली's Page

Profile Information

Gender
Male
City State
mumbai (india)
Native Place
panna (m.p.)
Profession
कवि / चिकित्सक
About me
i am hindi poet

कवि - राज बुन्दॆली's Photos

  • Add Photos
  • View All

कवि - राज बुन्दॆली's Blog

गीत (लावणी व कुकुभ मिश्रित)

आधार छन्द : 16+14 लावणी व कुकुभ मिश्रित,,



कोयल कुहुकी मैना बोली,भौंरे गूँजे भोर हुई ।।

आँख चुराये चन्दा भागा,रैन बिचारी चोर हुई ।।

कोयल कुहुकी,,,,



पूरब में ज्यों लाली निकली,सजा आरती धरा खड़ी,

उत्तुंग हिमालय पर लगता,कंचन की हो रही झड़ी,

बर्फ लजाकर लगी पिघलने,हिमनद रस की पोर हुई ।।(1)

कोयल कुहकी मैना बोली,भौंरे,,,,



सात अश्व के रथ पर चढ़कर,आ गए दिवाकर द्वारे,

स्वागत में मुस्काई कलियाँ,भँवरों नें मन्त्र उचारे,

सूर्यमुखी को देख…

Continue

Posted on January 18, 2017 at 12:00am — 4 Comments

गीत,,,,,,

२१२२  २१२२  २१२२  २१२२

**************************



गुनगुनाकर देखिएगा आप भी यह गीत मेरा ।।

दोपहर की धूप में आभास होगा नव सवेरा ।।

गुनगुनाकर देखिएगा,,,,,,,



तप्त सूरज शीश पर जब अग्नि वर्षा कर रहा हो,

ऊष्णता के हृदविदारक तीर तरकस भर रहा हो,

तब प्रभाती गीत की तुम छाँव में करना बसेरा ।।(1)

दोपहर की धूप में,,,,,,,,,,,,,

गुनगुनाकर देखिएगा,,,,,,,



कोकिला के कण्ठ से माँ भारती का गान सुनना,

व्योम में प्रतिध्वनित होती सप्त सरगम…

Continue

Posted on January 13, 2017 at 7:30pm — 7 Comments

ग़ज़ल,,

वज़्न : 1222 1222 1222 1222

मिलेंगी कुर्सियाँ लेकिन सियासी फ़न ज़रूरी है ।।

जुटाना है अगर बहुमत लचीलापन ज़रूरी है ।।(1)



कई पतझड़ यहाँ आके गये अफ़सोस मत करिये,

बहारों के लिए हर साल में सावन ज़रूरी है ।।(2)



हवाओं नें कसम खा ली जले दीपक बुझाने की,

उजाला ग़र बचाना है खुला दामन ज़रूरी है ।।(3)



वफ़ा की बात करते हो मियाँ इस दौर में तुम भी,

जहाँ शतरंज की बाज़ी बिछी हो धन ज़रूरी है ।।(4)



अगर कोई कहे तुमसे बताओ प्यार के मानी,…

Continue

Posted on January 11, 2017 at 11:30pm — 12 Comments

ग़ज़ल,,,,

Posted on December 22, 2016 at 10:30pm — 8 Comments

Comment Wall (13 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 4:44pm on December 5, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय कवि - राज बुन्दॆली जी, आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 11:05am on April 6, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

आ० बुन्देली जी

आपकी मित्रता मेरे लिए गौरव का विषय  है . मेरा मोबा . नं  9795518586  है . सादर .

At 8:28pm on September 5, 2013, mrs manjari pandey said…

        

          आदरणीय राज बुन्देली जी  बहुत बहुत धन्यवाद . मेरा हौसला बढाने के लिये  शुक्रिया .

At 1:29pm on December 19, 2012, sanjiv verma 'salil' said…

फ़िर भी क्या उसकॊ नाज़ है,खुदा जानॆ

नाज क्या है? के स्थान पर किस पर है? अधिक सटीक होगा.

रचना विडम्बनाओं और विसंगतियों को उद्घाटित करती है.

At 3:28pm on February 7, 2012, Deepak Sharma Kuluvi said…

WAH JI WAH SUNDAR RACHNAYEN

At 10:23am on January 25, 2012, Admin said…

आदरणीय राज बुन्देली जी

पूर्व में आपके कमेंट्स बॉक्स पर ओ बी ओ नियमो का हवाला देते हुए पूर्व प्रकाशित रचनाओं को ओ बी ओ पर पोस्ट करने से मना किया गया था, किन्तु फिर भी लगातार पूर्व प्रकाशित रचनाएँ ओ बी ओ पर अनुमोदन हेतु आपके द्वारा पोस्ट किया जा रहा है |

ऐसा लग रहा है कि ओ बी ओ नियमों का पालन करने में आपकी रूचि नहीं है, आपसे पुनः नम्र निवेदन है कि ओ बी ओ नियमों का पालन करते हुए किसी भी वेब साईट / ब्लॉग स्पोट आदि पर पूर्व प्रकाशित रचनाओं को ओ बी ओ पर प्रकाशन हेतु न भेजे, यहाँ केवल अप्रकाशित रचनाएँ ही स्वीकार कि जाती है | कृपया सहयोग करे |

एडमिन

ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 6:26pm on January 12, 2012, Admin said…

प्रिय सदस्य

आपकी रचना अनुमोदन हेतु प्राप्त है, किन्तु यह रचना पूर्व प्रकाशित होने के कारण अनुमोदित नहीं किया जा सकता, ओपन बुक्स ऑनलाइन के नियमानुसार केवल अप्रकाशित रचनाओं का ही अनुमोदन किया जाता है, अधिक जानकारी हेतु नीचे दिए गए लिंक पर ओ बी ओ नियम देखे |

http://www.openbooksonline.com/page/5170231:Page:12658


आपका

एडमिन

ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:47am on February 6, 2011, PREETAM TIWARY(PREET) said…

आदरणीय कवि राजबुन्देली जी,

आपकी कविता को महीने का सर्वश्रेस्थ ब्लॉग चुने जाने पर बहुत बहुत बधाई.....आशा है आयेज भी आपकी रचनाएँ ऐसे ही पढ़ने को मिलती रहेंगी....

 

आपका

प्रीतम तिवारी(प्रीत)

 

At 11:35am on February 6, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय कवि राजबुन्देली जी,

प्रणाम !
आपकी कविता  को महीने का सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग (Best Blog of the Month) चुने जाने पर बधाई स्वीकार करे, उम्मीद है कि आगे भी आप कि रचनायें और अन्य रचनाओं पर आपकी बहुमूल्य टिप्पणियाँ पढ़ने को मिलती रहेगी,
आपका
गनेश जी "बागी"

At 11:15am on February 6, 2011, Admin said…

आदरणीय कवि राजबुन्देली जी ,

सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की कविता "श्रृँगार नहीं अंगार लिखूंगा" को महीने का सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग (Best Blog of the Month) के रूप मे सम्मानित किया गया है तथा ओपन बुक्स ऑनलाइन के मुख्य पृष्ठ पर आपके छाया चित्र के साथ स्थान दिया गया है,
इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे,धन्यवाद,
आपका
एडमिन
OBO

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (... तमाशा बना दिया)
"मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार। "
10 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (... तमाशा बना दिया)
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और ज़र्रा नवाज़ी का तह-ए-दिल से शुक्रिया।"
10 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . .
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, शानदार अंदाज़ में 'दोहा पंचक' के रूप में प्रस्तुत की गयी आपकी…"
10 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post केवल बहाना खोज के जलती हैं बस्तियाँ - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, सुंदर भावों से सुसज्जित अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश…"
15 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"//आ. अमीरुद्दीन साहब, अर्थ विपर्यय पुनः हो जाएगा, अब । , और, वही दोष भी क्योकि में अथवा अब दोनों…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post पाँच दोहे मेघों पर. . . . .
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, सादर प्रणाम - सृजन पर आपकी आत्मीय सराहना और सुन्दर सुझाव का दिल से आभार ।…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"//ज़माना यहाँ समय के लिए प्रयुक्त किया है। अतः को का प्रयोग उचित नहीं होगा। क्योंकि यहाँ पर कहन का…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"//चलिए, माना, फिर भी, जनाब, 22 ( फैलुन ) पर एक ही साकिन की छूट होगी, 112 तक ही विस्तार मान्य है।…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आदरणीय दयाराम मेठानी जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और उत्साहवर्धन हेतु सादर आभार ।"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"जनाब अमित कुमार अमित जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और ज़र्रा नवाज़ी का शुक्रिया।"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"//मैंने कुछ शेरों को ठीक करने का प्रयास किया है आपका मार्गदर्शन चाहूंगा। जानता है जो बखूबी तेरी…"
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-144
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' जी तरही मिसरे पर अति सुंदर गज़ल के लिए हार्दिक बधाई।"
yesterday

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service