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कवि - राज बुन्दॆली
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  • मुम्बई (महा.)
  • India
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कवि - राज बुन्दॆली commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post आगॆ बढ़ कॆ बता,,,,
"राज कुमारी जी,,,,,,,,,,धन्यवाद,,,,,,,,जैसी आपकी इच्छा,,,,,,,,,भेज दूंगा,,,,,,,,,,,,,,आभार आपका,,,,,,,,,"
Apr 29
rajesh kumari commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post आगॆ बढ़ कॆ बता,,,,
"raj bundeli ji ise guftgu prakashan me jaroor bhejiye ye ghazal apni alag hi chhaap chhodti hai."
Apr 28
कवि - राज बुन्दॆली commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post इतनी रात गयॆ,,,,,,,,,,
"Arun Kumar Pandey 'Abhinav',,,,,,किन शब्दो मे आपका शुक्रिया अदा करूं शब्द ही कम पड़ गये है,,,,आभार ,,,,,,,,"
Apr 25
कवि - राज बुन्दॆली commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post इतनी रात गयॆ,,,,,,,,,,
"PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA,,,,प्रणाम आपको,,,,,,,,,,,,,,"
Apr 25
कवि - राज बुन्दॆली commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post आगॆ बढ़ कॆ बता,,,,
"परम आदरणीय,,,,, विद्वज जनो से करबद्ध अनुरोध है कि नीचे एक रचना है,, इतनी रात गयॆ,,, ------------------- इतनी रात गयॆ सपनॊं की नगरी मॆं, एकांकी आना ठीक नहीं ॥ आयॆ हॊ तॊ ठहरॊ रात गुज़रनॆ दॊ, अब वापस जाना ठीक नहीं ॥ इस रचना पर आपके विचार जानने को मिलेगे…"
Apr 25
कवि - राज बुन्दॆली commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post आगॆ बढ़ कॆ बता,,,,
"PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA जी प्रणाम,,,,,आभारी हूं आपका,,,,, छॊटॆ मुंह बड़ी बात,,,,,प्रथम से लेकर नौ तक ही कोशिश करिये,,,,, दसवॆ अंतिम का अनुकरण मत करिये,,,नहीं तो खाना नहीं मिलेगा घर पर,,,,होटल मे खाना पड़ॆगा,,,,धन्यवाद,,,,,,"
Apr 25
कवि - राज बुन्दॆली commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post आगॆ बढ़ कॆ बता,,,,
"परम आदरणीय,,सतीश मपतपुरी जी प्रणाम,,,,,,दर-असल यह रचना मुम्बई के एक प्लॆटफ़ार्म पर,,, मुम्बई से पटना जाने वाली ट्रेन की भीड़ को देखकर वहीं प्लॆटफ़ार्म पर ही लिखी गई,,, इसमे ज़िक्र ट्रेन से मतलब उस भीड़ के संदर्भ मे है,,,मेरे टूटॆ-फ़ूटॆ शब्दो को आपका…"
Apr 25
satish mapatpuri commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post आगॆ बढ़ कॆ बता,,,,
"हिम्मत है तॊ आगॆ बढ़ कॆ बता ॥ बिहार वाली ट्रॆन मॆं चढ़ कॆ बता पहले इस हास्य - रचना पर ख़ाकसार का सलाम कुबूल करें .......... बिहार की ट्रेन में अब बहार है हुजुर ....... इस मनोरंजक रचना के लिए एक बार फिर से बधाई  कवि जी "
Apr 25
PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post आगॆ बढ़ कॆ बता,,,,
"बात बात पॆ बिगड़ता है "राज",घर मॆं बीबी सॆ बिगड़ कॆ बता aadarniya raaj ji, pahle sadar abhivadan swikar kijye.  fir main aapko badhai deta hoon.  rahi baat upar diye gaye kam karne ko , prayas kar sakta hoon par aapkaa 10 nambari…"
Apr 24
कवि - राज बुन्दॆली commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post आगॆ बढ़ कॆ बता,,,,
"आप सभी को सत-सत-नमन,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,"
Apr 24
कवि - राज बुन्दॆली commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post आगॆ बढ़ कॆ बता,,,,
"अंबरीश भाई जी,,,,, यॆ आलसी ग़र बहर को पकड़ पाता ॥ तो दौड़कर ट्रॆन मॆं ही नहीं चढ़ जाता ॥"
Apr 24
कवि - राज बुन्दॆली commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post आगॆ बढ़ कॆ बता,,,,
"अंबरीश भाई,,,,,धन्यवाद,,,,,,,,,,"
Apr 24
कवि - राज बुन्दॆली commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post आगॆ बढ़ कॆ बता,,,,
"महिमा श्री,,,जी,,,,,,,,,,,,,आपका बहुत-बहुत आभार,,,,,,,,,,,,,,"
Apr 24
कवि - राज बुन्दॆली commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post आगॆ बढ़ कॆ बता,,,,
"छोटू सिंह जी,,,,,धन्यवाद,,,,,,,,"
Apr 24
CHOTU SINGH commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post आगॆ बढ़ कॆ बता,,,,
"वाह - वाह   जितनी भी तारीफ़ की जाए बहोत ही कम लगती है काफी अर्थपूर्ण और ललकार भड़ी रचना  आदरणीय राज जी आपको बधाई "
Apr 24
MAHIMA SHREE commented on कवि - राज बुन्दॆली's blog post आगॆ बढ़ कॆ बता,,,,
"कविवर राज बुंदेला जी , नमस्कार , आपकी गजल को पढ़ा , बड़ा आनंद आया.. :) सर जी अब आप बिहार वाली ट्रेन पे चढ़ के दिखा सकते हो ऐसी कोई मारा मारी नहीं है. :) (बशर्ते बस होली -दिवाली जैसा कोई त्यौहार ना हो ....क्योंकि उस वक्त हर बिहारी किसी भी तरह अपने…"
Apr 24

Profile Information

Gender
Male
City State
mumbai (india)
Native Place
panna (m.p.)
Profession
कवि / चिकित्सक
About me
i am hindi poet

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आगॆ बढ़ कॆ बता,,,,

Posted on April 23, 2012 at 1:30pm 31 Comments

आगॆ बढ़ कॆ बता,,,,

------------------------------------

 हिम्मत है तॊ आगॆ बढ़ कॆ बता ॥

बिहार वाली ट्रॆन मॆं चढ़ कॆ बता ॥१॥



बिना टिकट गांव चला जायॆगा,…

Continue

इतनी रात गयॆ,,,,,,,,,,

Posted on April 22, 2012 at 6:30pm 14 Comments

इतनी रात गयॆ,,,

-------------------

इतनी रात गयॆ सपनॊं की नगरी मॆं, एकांकी आना ठीक नहीं ॥

आयॆ हॊ तॊ ठहरॊ रात गुज़रनॆ दॊ, अब वापस जाना ठीक नहीं ॥



मिलना चाहा तुमसॆ पर,आस अधूरी रही…

Continue

दिल कितनॆ करीनॆ सॆ रखतॆ हैं,,,,,,,,

Posted on March 13, 2012 at 6:30pm 16 Comments

दिल कितनॆ करीनॆ सॆ रखतॆ हैं,,,

----------------------------------------------------------

 …

Continue

साहिल पॆ जिसनॆ मुझकॊ,,,,,,,

Posted on March 11, 2012 at 1:42am 15 Comments

साहिल पॆ जिसनॆ मुझकॊ,,,,,,,

---------------------------------

आँचल हया का सर सॆ सरकनॆ नहीं दिया ॥

चॆहरॆ पॆ दिल का ग़म भी झलकनॆ नहीं दिया ॥

 

तॆबर अना कॆ, उनकॆ, कभी ख़म नहीं हुयॆ,…

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Comment Wall (13 comments)

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At 3:28pm on February 7, 2012, DEEPAK SHARMA KULUVI said…

WAH JI WAH SUNDAR RACHNAYEN

At 11:23pm on February 3, 2012, neeraj said…

आप सभी का कोटि सा आभार ....आप की सराहना ही संजीवनी है मेरी दम तोडती रचनाओ के लिए आपका .........................नीरज 

At 9:56pm on February 2, 2012, neeraj said…

aapka swagat hai sir jee hardik dhanybad  ..............neeraj

At 11:47pm on January 31, 2012, neeraj said…

ज़िन्दगी कॆ रंग,,,,,,,,               बहती गंगा मॆं,,,,,            इशारॊं-इशारॊं सॆ                       नहीं आती,,,,,,,,  aadi aapki sabhi rachnaye sone par suhaga hai aap badhai k patr hai aapka apna hi..neeraj

At 11:44pm on January 31, 2012, neeraj said…

sarahana ki liye bahut bahut dhanyabad.................neeraj

At 10:23am on January 25, 2012, Admin said…

आदरणीय राज बुन्देली जी

पूर्व में आपके कमेंट्स बॉक्स पर ओ बी ओ नियमो का हवाला देते हुए पूर्व प्रकाशित रचनाओं को ओ बी ओ पर पोस्ट करने से मना किया गया था, किन्तु फिर भी लगातार पूर्व प्रकाशित रचनाएँ ओ बी ओ पर अनुमोदन हेतु आपके द्वारा पोस्ट किया जा रहा है |

ऐसा लग रहा है कि ओ बी ओ नियमों का पालन करने में आपकी रूचि नहीं है, आपसे पुनः नम्र निवेदन है कि ओ बी ओ नियमों का पालन करते हुए किसी भी वेब साईट / ब्लॉग स्पोट आदि पर पूर्व प्रकाशित रचनाओं को ओ बी ओ पर प्रकाशन हेतु न भेजे, यहाँ केवल अप्रकाशित रचनाएँ ही स्वीकार कि जाती है | कृपया सहयोग करे |

एडमिन

ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 6:26pm on January 12, 2012, Admin said…

प्रिय सदस्य

आपकी रचना अनुमोदन हेतु प्राप्त है, किन्तु यह रचना पूर्व प्रकाशित होने के कारण अनुमोदित नहीं किया जा सकता, ओपन बुक्स ऑनलाइन के नियमानुसार केवल अप्रकाशित रचनाओं का ही अनुमोदन किया जाता है, अधिक जानकारी हेतु नीचे दिए गए लिंक पर ओ बी ओ नियम देखे |

http://www.openbooksonline.com/page/5170231:Page:12658


आपका

एडमिन

ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:47am on February 6, 2011, PREETAM TIWARY(PREET) said…

आदरणीय कवि राजबुन्देली जी,

आपकी कविता को महीने का सर्वश्रेस्थ ब्लॉग चुने जाने पर बहुत बहुत बधाई.....आशा है आयेज भी आपकी रचनाएँ ऐसे ही पढ़ने को मिलती रहेंगी....

 

आपका

प्रीतम तिवारी(प्रीत)

 

At 11:35am on February 6, 2011, Ganesh Jee "Bagi" said…

आदरणीय कवि राजबुन्देली जी,

प्रणाम !
आपकी कविता  को महीने का सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग (Best Blog of the Month) चुने जाने पर बधाई स्वीकार करे, उम्मीद है कि आगे भी आप कि रचनायें और अन्य रचनाओं पर आपकी बहुमूल्य टिप्पणियाँ पढ़ने को मिलती रहेगी,
आपका
गनेश जी "बागी"

At 11:15am on February 6, 2011, Admin said…

आदरणीय कवि राजबुन्देली जी ,

सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की कविता "श्रृँगार नहीं अंगार लिखूंगा" को महीने का सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग (Best Blog of the Month) के रूप मे सम्मानित किया गया है तथा ओपन बुक्स ऑनलाइन के मुख्य पृष्ठ पर आपके छाया चित्र के साथ स्थान दिया गया है,
इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे,धन्यवाद,
आपका
एडमिन
OBO

 
 
 

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