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sanjiv verma 'salil'
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sanjiv verma 'salil''s Discussions

रोचक चर्चा : कौन परिंदा?, कौन परिंदी??... -विजय कौशल, संजीव 'सलिल'

Started this discussion. Last reply by mrs.kavita verma Oct 30, 2011. 2 Replies

रोचक चर्चा : कौन परिंदा?, कौन परिंदी??... -विजय कौशल, संजीव 'सलिल' *  * कौन परिंदा?, कौन परिंदी? मेरे मन में उठा सवाल.किससे पूछूं?, कौन बताये? सबने दिया प्रश्न यह टाल..मदद करी तस्वीर ने मेरी,बिन बूझे…Continue

Tags: humour, hasya.

आकलन:अन्ना आन्दोलन भारतीय लोकतंत्र की समस्या और समाधान: --- संजीव 'सलिल'

Started this discussion. Last reply by Saurabh Pandey Sep 25, 2011. 25 Replies

आकलन:अन्ना आन्दोलन  भारतीय लोकतंत्र की समस्या और समाधान: -- संजीव 'सलिल'*अब जब अन्ना का आन्दोलन थम गया है, उनके प्राणों पर से संकट टल गया है यह समय समस्या को सही-सही पहचानने और उसका निदान खोजने का…Continue

Tags: satta, jan, praja, tantra, lok

विमर्श: अयोध्या विवाद और रचनाकार

Started this discussion. Last reply by विवेक मिश्र Oct 1, 2010. 4 Replies

विमर्श:अयोध्या विवाद और रचनाकारसंजीव 'सलिल'*अवध को राजनीति ने सत्य का वध-स्थल बना दिया है. नेता, अफसर, न्यायालय, राम-भक्त और राम-विरोधी सभी सत्य का वध करने पर तुले हैं.हम, शब्द-ब्रम्ह के आराधक…Continue

Tags: ayodhya, dispute, sanjiv, 'salil'., mandir

 

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sanjiv verma 'salil' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"अरुण भाई उम्दा कोशिश... बधाई... उस्तादाना मशवरा मिल ही गया है... थोडा और तराश लें तो सोने में सुहागा हो जायेगा. "
Sunday
sanjiv verma 'salil' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"बेहतरीन ग़ज़ल... वाह.. वाह..."
Sunday
sanjiv verma 'salil' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"धर्मेन्द्र भाई बड़ी मुश्किल में डाल दिया आपने. किस शे'र की तारीफ करूँ किसे छोडूं... हर शे'र एक से बढ़कर एक...जितनी बार पढ़ता हूँ ... एक नया आनंद अत है. दिली बधाई."
Sunday
sanjiv verma 'salil' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"ज़ुल्मो सितम जो करते हें मजहब के नाम परऐसे किसी गिरोह के मददगार हम नहींआज के हालात पर बहुत मौजूं है यह शे'र. पूरी ग़ज़ल दिल को छूती है. बधाई."
Sunday
sanjiv verma 'salil' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"“सूरज” बग़ैर उसके भी जीकर दिखाएंगे,उससे कहो के इतने भी लाचार हम नहीं॥क्या बात है हुज़ूर... बहुत मुबारकबाद दमदार ग़ज़ल कहने के लिए. सूरज बगैर दुनिया में है कौन जी सका.नादाँ है वो जो कहे लाचार हम नहीं.."
Sunday
sanjiv verma 'salil' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"घुट-घुट के जी रहे करें प्रतिकार हम नहीं।अपने ही उन्नयन के भी आधार हम नहीं।क्या बात है... यह अंदाज़े-बयां खूबसूरत है."
Sunday
sanjiv verma 'salil' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"अविनाश जी इस अच्छी ग़ज़ल के लिए धन्यवाद. 'अविनाश ' कार के लिये,तू ढूंढ़ के तो ला,बिन ड्रायव्हर के चल पड़े सरकार हम नहीं. अच्छा व्यंग्य है."
Sunday
sanjiv verma 'salil' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"damdar koshish ke liye badhaee."
Sunday
sanjiv verma 'salil' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"यह हुआ उस्तादाना कलाम.. इतनी तारीफ की जाए कम है.मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं."
Sunday
sanjiv verma 'salil' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"अमृत की शक्ल में यहाँ क्या-क्या मिला के आज वो ज़हर बेचते हैं ख़रीदार हम नहीं आज के हालत पर अच्छा कमेन्ट"
Sunday
sanjiv verma 'salil' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"bahut khoob. कल कह दिया है हार के सूरज ने शब् से ये  लो अब तुम्हारी राह मे दीवार हम नहीं kaya baat hai..."
Sunday
sanjiv verma 'salil' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"दमदार शे'रों से सजी हुई ग़ज़ल के लिये बधाई."
Sunday
sanjiv verma 'salil' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"करते हैं उनसे प्यार का इनकार हम नहीं दिल कर रहा है दर्द का इज़हार हम नहीं बागी जी ! मैंने इस शे'र का अर्थ निम्न लिया... बाकी विद्वान जन ही बताएँगे. आशिक माशूका से प्यार होने की तस्दीक कर रहा है लेकिन आह भरने से माशूका नाराज़ न हो जाये कि उसका…"
Sunday
sanjiv verma 'salil' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"करते हैं उनसे प्यार का इनकार हम नहींदिल कर रहा है दर्द का इज़हार हम नहींग़ज़ल का आगाज़ ही मन को छू गया... बधाई."
Sunday
sanjiv verma 'salil' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"शानदार और जानदार ग़ज़ल से आगाज़ हुआ... बधाई...उम्‍मीद फ़ैसलों की न हमसे किया करें,खुद ही खुदा बने हुए दरबार हम नहीं।क्या बात है..."
Sunday
sanjiv verma 'salil' commented on sanjiv verma 'salil''s blog post मुक्तिका: दिल में दूरी... --संजीव 'सलिल'
"बागी जी, आशीष जी, महिमा जी, भ्रमर जी, प्रदीप जी, रेखा जी, हसरत जी, राजेश जी, योगी जी! आपकी गुणग्राहकता को नमन.."
Saturday

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मुक्तिका: दिल में दूरी... --संजीव 'सलिल'

Posted on May 22, 2012 at 10:00am 10 Comments

मुक्तिका:

दिल में दूरी...

संजीव 'सलिल'

*

दिल में दूरी हो मगर हाथ मिलाये रखना.

भूख सहकर भी 'सलिल' साख बचाये रखना..



जहाँ माटी ही न मजबूत मिले छोड़ उसे.

भूल कर भी न वहाँ नीव के पाये रखना..



गैर के डर से न अपनों को कभी बिसराना.

दर पे अपनों के न कभी मुँह को तू बाये रखना..



ज्योति होती है अमर तम ही मरा करता है.

जब भी अँधियारा घिरे आस बचाये रखना..



कोई प्यासा ले बुझा प्यास, मना मत करना.

जूझ पत्थर से सलिल धार बहाये…

Continue

दोहा सलिला: शब्दों से खिलवाड़- १ --संजीव 'सलिल'

Posted on May 1, 2012 at 7:35am 4 Comments

दोहा सलिला:
शब्दों से खिलवाड़- १
संजीव 'सलिल'
*
शब्दों से खिलवाड़ का, लाइलाज है रोग..
कहें 'स्टेशन' आ गया, आते-जाते लोग.
*
'पौधारोपण' कर कहें, 'वृक्षारोपण' आप.…
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दोहा सलिला: अंगरेजी में खाँसते... --संजीव 'सलिल'

Posted on April 23, 2012 at 7:10am 17 Comments

दोहा सलिला:

अंगरेजी में खाँसते...

संजीव 'सलिल'

*

अंगरेजी में खाँसते, समझें खुद को  श्रेष्ठ.

हिंदी की अवहेलना, समझ न पायें नेष्ठ..

*

टेबल याने सारणी, टेबल माने मेज.

बैड बुरा माने 'सलिल', या समझें हम सेज..

*

जिलाधीश लगता कठिन, सरल कलेक्टर शब्द.

भारतीय अंग्रेज की, सोच करे बेशब्द..

*

नोट लिखें या गिन रखें, कौन बताये मीत?

हिन्दी को मत भूलिए, गा अंगरेजी गीत..

*

जीते जी माँ ममी हैं, और पिता हैं डैड.

जिस भाषा में…

Continue

मुक्तिका

Posted on April 19, 2012 at 7:30am 5 Comments

मुक्तिका: संजीव 'सलिल'

*

लफ्ज़ लब से फूल की पँखुरी सदृश झरते रहे.

खलिश हरकर ज़िंदगी को बेहतर करते रहे..



चुना था उनको कि कुछ सेवा करेंगे देश की-

हाय री किस्मत! वतन को गधे मिल चरते रहे..



आँख से आँखें मिलाकर, आँख में कब आ बसे?

मूँद लीं आँखें सनम सपने हसीं भरते रहे..



ज़िंदगी जिससे मिली करते उसीकी बंदगी.

है हकीकत उसी पर हर श्वास हम मरते रहे..



कामयाबी जब मिली…

Continue

Comment Wall (29 comments)

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At 7:12pm on August 20, 2011, Ravi Kumar Giri (Guru Jee) said…

janamdin mubarak ho sir ji

At 12:50pm on August 20, 2011, Ganesh Jee "Bagi" said…

At 8:42am on April 19, 2011, nemichandpuniyachandan said…
Shree,Sanjiv varma salil saheb,Chaahe koyal need mein,nij ande de kaag|Shishu na madhur swar bolataa gaaye karkash raag|| vaah... vaah..vaah.sahab aapne to dil ke taron ko janjanakar rakha diya.aabhaar 
At 12:54pm on March 28, 2011, Sanjay Rajendraprasad Yadav said…

 

आदरणीय आचार्य जी,
प्रणाम


At 2:27pm on March 8, 2011, nemichandpuniyachandan said…
Shree,Sanjiv  Verma "Salil" Sahib Ji,Aap Dvaaraa Housalaa-Afzai Ke Liye Bahut Bahut Dhanyvaad.
At 1:25pm on December 13, 2010, Arun Kumar Pandey 'Abhinav' said…
आदरणीय सलिल जी अभिवादन ! आपके समालोचना और समीक्षा के शब्द मेरे लिए आशीर्वाद  स्वरुप हैं | मैं इनका पूरा ध्यान रखूंगा | आप यूं ही स्मरण दिलातें रहें  |
At 5:27pm on December 12, 2010, Lata R.Ojha said…

आदरणीय सलिल जी प्रणाम, 

मुझे आपने मित्रता के योग्य समझा,धन्यवाद :) 

At 4:51pm on November 10, 2010, आशीष यादव said…
आचार्य जी प्रणाम,
आपने मेरी जिज्ञाषा की तरफ ध्यान दिया और समाधान भी प्रस्तुत किया|
आप को कोटि धन्यवाद|
At 1:36am on November 3, 2010, Shanno Aggarwal said…
सलिल जी, सादर नमन !

आपका गीत '' आँसू और ओस '' बहुत भाया लेकिन वास्तव में भगवान किसी की आँखों में आँसू ना दें..तभी जिंदगी बेहतर है....

आपको सपरिवार दीपावली की ढेरों शुभकामनायें.
At 3:35pm on November 2, 2010, Arun Kumar Pandey 'Abhinav' said…
pichhala comment आदरणीय सलिल जी आशीष के लिए उन्हें फिर भेजता हूँ |
At 3:32pm on November 2, 2010, Arun Kumar Pandey 'Abhinav' said…
At 6:28am on November 2, 2010, आशीष यादव said…
आदरणीय सलिल जी, प्रणाम:
कुछ दिन पहले मैंने आपसे प्रियंका शब्द का अर्थ पूछा था| आपने बताया भी था, मै उस से संतुष्ट भी हूँ| मै आपके फिर कुछ जानना चाहता हूँ| आचार्य जी एक शब्द अनीता भी है जिसका अर्थ मै नहीं जान सका हूँ अब तक| मैंने हिंदी शब्द कोष भी खंगाले लेकिन निराशा ही हाथ लगी| कृपया बताने की कृपा करें|
At 4:36am on October 15, 2010, आशीष यादव said…
Salil ji sadar pranaam. Aapne mujhe priyanka shabd ka arth bataya jise maine kai shabdkosho me dhudne pe bhi nahi paya tha. Dhanyawad
At 4:00pm on October 14, 2010, आशीष यादव said…
सलिल जी प्रणाम| मैंने कई जगह से एक हिंदी के शब्द का अर्थ जानना चाहा लेकिन नहीं जान सका| यह शब्द अधिकतर संज्ञा के लिए प्रयोग होता|
वह शब्द है प्रियंका| कृपया आप मुझे इस शब्द का वास्तविक अर्थ बता दें|
At 12:01pm on September 11, 2010, Admin said…
आदरणीय आचार्य जी, रचना के साथ चित्र लगाना आसान है जिसे मैं नीचे लिख दूंगा, परन्तु मुझे एक बहुत ही बड़ी कमी लगती है इस प्रकार इमेज के रूप मे रचना बनाने मे,
१- सर्च इंजन आप के लिखे शब्दों के आधार पर सर्च करते है, आप की रचना अंतरजाल पर होते हुये भी वो सर्च इंजन के पकड़ मे नहीं आता, और रचना के लिये जितना श्रेय रचनाकार को मिलना चाहिये नहीं मिल पाता साथ ही आपकी रचना से बहुत लोग महरूम हो जाते हैं जो सर्च के माध्यम से पढ़ पाते |
२- यदि आप की रचना का कोई नक़ल कर लेता है और उसे किसी साईट पर टेस्ट के माध्यम से पोस्ट कर देता है तो सर्च इंजन उसको सर्च कर लेगा और आपकी रचना को नहीं, इस प्रकार साईट चलाने वाले को भी पता नहीं चलता कि रचना के मूल लेखक कौन है, मुमकिन है की नक़ल को असल और असल को नक़ल समझ लिया जाये |
३- जिस साईट पर आपकी इमेज वाली रचना छपती है उस साईट को भी सर्च इंजन वो सम्मान नहीं दे पाते जो उसे मिलना चाहिये था |

अब मैं बताता हूँ कि इमेज वाली रचना कैसे बनाई जाती है ----
यह आसान है Microsoft power point खोल ले, Insert Image मे जो फोटो चाहते हो अपने कंप्यूटर से इन्सर्ट कर ले , फिर इनसेर्ट text कर अपनी रचना को पेस्ट कर दे, जरूरत के हिसाब से डिजाईन कर ले फिर Save as से सेव करे, वहा जो बॉक्स खुलता है उसमे Other Formet को क्लिक करे और उसमे save as type में JPEG क्लिक कर दे , फिर Save क्लिक कर दे , हो गया आप का काम, फिर एक फोटो कि तरह जहा चाहे वहा चिपका दे |
At 10:57am on September 3, 2010, Admin said…
आदरणीय आचार्य जी,
प्रणाम
आपका एक ब्लॉग ( कृति-चर्चा : चित्रगुप्त मीमांसा : श्रृष्टि-श्रृष्टा की तलाश में सार्थक सृजन यात्रा चर्चाकार : आचार्य संजीव 'सलिल' ) प्राप्त हुआ है जो पुस्तक समीक्षा से सम्बंधित विषय पर है, कृपया उसे "पुस्तक समीक्षा" ग्रुप मे पोस्ट करने की कृपा करे, यदि पुस्तक की छाया चित्र उपलब्ध हो तो उसे भी उक्त समीक्षा मे डाला जा सकता है,
धन्यवाद,
ग्रुप का लिंक निम्न है :-http://www.openbooksonline.com/group/Pustak_samiksha
आपका
एडमिन
OBO
At 2:24pm on August 29, 2010, Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह said…
अरे वाह ... !! आपने तो पूरा कैमरा दर्शन ही लिख डाला ... :)
At 10:15pm on August 28, 2010, Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह said…
@ संजीव जी , काहे मरवा रहे हैं भाई ,, बड़ी मुश्किल से तो जिंदगी मिली है ... हा हा हा ... अब आप जो चाहें कैमरा तो वही बोलेगा न ... :)
At 11:06pm on August 20, 2010, Ganesh Jee "Bagi" said…

At 11:05pm on August 20, 2010, Admin said…
ऒपन बुक्स आनलाइन परिवार आपके जन्मदिन के अवसर पर आपके स्वस्थ, दिर्घ और सफल जीवन की कामना करता है, जन्म दिन की बहुत बहुत बधाई Aacharya जी,
 
 
 

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