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Ambarish Srivastava's Friends

  • डॉ. सूर्या बाली "सूरज"
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  • अश्विनी कुमार
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Ambarish Srivastava's Discussions

'हिन्दुस्तान' समाचारपत्र ने किया जनकवि आलोक सीतापुरी का सम्मान ....

Started this discussion. Last reply by satish mapatpuri May 8. 3 Replies

ओबीओ 'चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता' अंक-१३ में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए 'हिन्दुस्तान' समाचारपत्र ने सीतापुर के किसान मेले में आयोजित कवि-सम्मेलन में जनकवि आलोक सीतापुरी जी को अंगवस्त्र प्रदान…Continue

ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉटकॉम के स्थापना दिवस पर सीतापुर में हुए आयोजन की एक संक्षिप्त रपट :

Started this discussion. Last reply by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA Apr 8. 14 Replies

ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉटकॉम के स्थापना दिवस के महत्वपूर्ण अवसर पर ओ बी ओ के तत्वावधान में दिनांक ०१-अप्रैल २०१२ को दोपहर १२-०० बजे से ३-०० बजे के मध्य काव्य समारोह का आयोजन सीतापुर के स्थानीय महावीर…Continue

 

Ambarish Srivastava's Page

Latest Activity

Laxman Prasad Ladiwala replied to Ambarish Srivastava's discussion ‘चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता अंक -१४' का निर्णय in the group चित्र से काव्य तक
"स्नेहिल अरुण कुमार जी निगम, राजेंद्रजी स्वर्णकार, और दिनेशजी रविकर को  हार्दिक बधाई | मै यात्रा पर सहपरिवार होने के कारण इस दिनों रचने पढ़ पाने  के लाभ से वंचित रहा | देर से ही सही मेरी हर्फ्दिक बधाई स्वीकार करे | -लक्ष्मण प्रसाद…"
yesterday
Laxman Prasad Ladiwala liked Ambarish Srivastava's discussion ‘चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता अंक -१४' का निर्णय
yesterday
Ambarish Srivastava commented on SANDEEP KUMAR PATEL's blog post "|| शुद्धगा छंद ||"
"भाई संदीप जी आपने बहुत ही खूबसूरत मुक्तक कहे हैं | ये सभी एक मतला व एक शेर को मिला कर बने हैं! साथ साथ काफिया व रदीफ का निर्वहन सलीके से भी हुआ है जिसके लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें ! इसे विधाता या शुद्धगा छंद भी कहते हैं इसकी बंदिश इस प्रकार से…"
yesterday
Ambarish Srivastava replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २३ में सम्मिलित सभी ग़ज़लें
"नमस्कार आदरणीय बागी जी ! "
yesterday
Ambarish Srivastava replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव तरही मुशायरा" अंक २३ में सम्मिलित सभी ग़ज़लें
"वाह वाह वाह!!! आदरणीय प्रधान संपादक जी, इस त्वरित संकलन के लिए दिली मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं .....जय ओ बी ओ |"
yesterday
Ambarish Srivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"//हम जैसे बन सकोगे ?,बन कर के देखिये, हर कोई निभा सके वो किरदार हम नहीं.// आदरणीय बागडे साहब ! बहुत खूब सूरत गज़ल हही है आपने बधाई मित्र !"
yesterday
Ambarish Srivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"भाई आदित्य जी अच्छा प्रयास किया है आपने ! बधाई मित्र !"
yesterday
Ambarish Srivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"//कैसे करो वज़ू कि वो जलधार हम नहींगंगा करे गुहार, गुनहग़ार हम नहीं हक़ मांगने के फेर में बदनाम यों हुएलो, बोल भी न पा रहे खूँखार हम नहीं हम शख़्शियत पे दाग़ थे ऐसा न था, मग़र - ’लो अब तुम्हारी राह में दीवार हम नही’// आदरणीय भाई सौरभ जी! …"
yesterday
Ambarish Srivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"//परचम बुलंद करते हैं अमनो अमान के l दुनिया में जालिमों के तरफदार हम नहीं ll दुशवारियाँ न हों तो सफ़र का मज़ा ही क्या l आसान रास्तों के तलबगार हम नहीं ll सैले-गमे-हयात ने ताराज कर दिया l "लो अब तुम्हारी राह में दीवार हम नहीं ll" बन कर…"
yesterday
Ambarish Srivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"//उनके जो ग़म मिले उन्हें अपना बना लिया फिर भी वो कह रहे है कि ग़मख्वार हम नहीं// भाई नायाब जी ! बहुत अच्छी गज़ल कही है आपने ! बहुत बहुत मुबारक हो! बस यूं ही खैराबाद का नाम ऊँचा किये रहिये !"
yesterday
Ambarish Srivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"//मत देख हमको शक की निगाहों से ऐ सनम हर बार हमीं थे मगर इस बार हम नहीं// आदरणीय संचालक महोदय ! मतले से मकते तक हर एक शेर अपने आप में लाज़वाब है ! गिरह भी कमाल की है ! बहुत बहुत मुबारकबाद दोस्त !"
yesterday
Ambarish Srivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"//होंगे तुम्हारे हुस्न के मारे हुए बहुत..लेकिन तुम्हारे इश्क में बीमार हम नहीं// रिजवान साहब बहुत शानदार गज़ल कही है आपने ! गिरह का शेर भी बहुत खूबसूरत है ! हमारी ओर से बहुत-बहुत  मुबारकबाद !"
yesterday
Ambarish Srivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"//कैदी बना लिया है रक़ीबों ने शहर में लो अब तुम्हारी राह में दिवार हम नहीं// आदरणीय गुलशन साहब ! उर्दू अदब में 'खैराबाद' का नाम पहले से ही बुलंदी पर रहा हैं ! आपने इसे बरकरार रखा  है ......बहुत  बहुत मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं !"
yesterday
Ambarish Srivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"आदरणीय सौरभ जी इस में मेरी भी सहमति है ..... सादर"
yesterday
Ambarish Srivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"//चेहरा पढ़ें हुजूर यहॉं झूठ कुछ नहीं कापी, किताब, पत्रिका, अखबार हम नहीं।// वाह आदरणीय वाह! आपकी इस गज़ल ने तो मन मोह लिया ! क्या शानदार आगाज़ किया है आपने ! "
yesterday
Ambarish Srivastava replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"मेरे अज़ीज़ दोस्तों, सबसे पहले मुआफी चाहूँगा कि कारोबारी मसरूफियत के चलते इस दिलचस्प मुशायरे में अभी तक शिरकत नहीं कर पाया, जिसके एवज में बाअदब फौरी तौर पर कही गयी यह गज़ल बतौर जुर्माना पेश कर रहा हूँ |   हँसते हैं आँसुओं में अदाकार हम नहीं, आहों…"
yesterday

Profile Information

Gender
Male
City State
Sitapur
Native Place
Sitapur
Profession
Architectural Engineer,
About me
1 Architectural Engineer 2 Social Worker and Hindi Poet, Poet, President Sanskar Bhartee Sitapur, Article at Wikipedia. http://en.wikipedia.org/wiki/Ambarish_Srivastava, http://hi.wikipedia.org/wiki/अम्बरीष_श्रीवास्तव

एक परिचय :

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सक्रिय सदस्य तथा ३० जून १९६५ को जिला सीतापुर के ग्राम "सरैयां कायस्थान" में जन्मे  अम्बरीष श्रीवास्तव  एक प्रसिद्ध आर्कीटेक्चरल इंजीनियर हैं |

लखनवी तहजीब को अपने हृदय में समाहित किये हुए श्री अम्बरीष श्रीवास्तव जी नें पिंगलशास्त्र से नियंत्रित छंदों यथा दोहा, सोरठा, रोला, सवैया, कुण्डली  व कवित्त (घनाक्षरी) के क्षेत्र में गहन साधना तो की ही है साथ-साथ गज़ल के क्षेत्र में आपका खासा दखल भी है | आपकी रचनाओं का प्रकाशन विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में तथा अंतर्जाल की प्रतिष्ठित वेबसाइट्स पर नियमित रूप से होता रहता है | वर्ष २००७ में आप "इंदिरा गांधी प्रियदर्शिनी अवार्ड " से सम्मानित भी किये गए हैं |

प्रकाशित पुस्तक:  "जो सरहद पे जाये "

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Ambarish Srivastava's Blog

'गज़ल'

Posted on April 27, 2012 at 1:15pm 15 Comments



'गज़ल'

दुआओं से किसी की फल रहा हूँ

निगाहों में तुम्हारी खल रहा हूँ…

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'हनुमान जयन्ती पर विशेष'

Posted on April 6, 2012 at 1:13pm 14 Comments

“हनुमान जयन्ती पर विशेष”

'दोहे'

 …

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आरोग्य दोहावली

Posted on February 18, 2012 at 2:30pm 14 Comments

आरोग्य दोहावली 

दही मथें माखन मिले, केसर संग मिलाय.

होठों पर लेपित करें, रंग गुलाबी आय..

बहती…

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तुम्हें बधाई मित्र.

Posted on January 1, 2012 at 1:25am 15 Comments

बीता साल चला गया, देकर नन्हा चित्र.

अंग्रेजी नव वर्ष की, तुम्हें बधाई मित्र. 

तुम्हें बधाई मित्र, इसे अपनापन देना.

देकर स्नेह दुलार, इसे…

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At 3:55pm on May 4, 2012, Ganesh Jee "Bagi" said…

आदरणीय अम्बरीश भाई, आपके स्नेह का ऋणी हूँ, सुबह सुबह प्रथम शुभकामना वो bhi कुण्डलिया के रूप में दूरभाष पर सुन कर मन आनंदित हो गया, बहुत बहुत आभार आपका |

At 6:35pm on April 10, 2012, MANISHI SINGH said…

aadarniya ambrish ji, saadar abhivadan 

aapka bahumulya margdarshan chahiye.

dhanyavaad. 

At 8:39pm on April 8, 2012, Mukesh Kumar Saxena said…

भाई अम्बरीश जी मै आपकी प्रशंशा का हकदार वन पाया हूँ सोच कर ख़ुशी होती है और आपकी सराहना जो अपने पात्रता और फर्क की की है उसके लिल्ये धन्यवाद.

At 4:16pm on April 8, 2012, Sarita Sinha said…

ambarish ji namaskar, pratikriya dene ke liye dhanyvad...

At 12:52pm on April 7, 2012, MAHIMA SHREE said…
अम्बरीश सर,
मैं अपने मेरे ऑफिस में obo site prohibited hai.. मैं जैसे तैसे खोल कर कमेंट्स करती हूँ...reply button काम नहीं कर रहा है ..और मेरा कमेन्ट delete भी नहीं
हो रहा है... INBOX. भी काम नहीं कर रहा .. इस
लिए massage भी नहीं कर पा रही हूँ....मैं अभी शाम ७ बजे तक कुछ करने में अक्षम हूँ...इसलिए क्षमा चाहती हूँ.....अब मैं ७ बजे के बाद ही अपनी गलतियों को सुधार पायुंगी...
क्षमाप्रार्थी ...
महिमा श्री
At 5:39pm on April 6, 2012, MAHIMA SHREE said…
आदरणीय अम्बरीश जी, नमस्कार
आपका हार्दिक धन्यवाद... आभारी हूँ...
At 12:34pm on April 1, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

आदरणीय  , श्री अम्बरीश  जी.

सादर अभिवादन.
धन्यवाद.  स्नेह बनाये रखियेगा.
At 11:34am on March 19, 2012, अश्विनी कुमार said…

राकेश त्रिपाठी 'बस्तीवी' replied to Ambarish Srivastava's discussion ''चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता अंक -१२'' in the group चित्र से काव्य तक
माननीय मयंक जी, नमस्कार. वियर रस की नदिया बहा दी आपने. बधाई /////परम स्नेही बस्तीवी जी सादर अभिवादन भाई यह अद्भुत रस मेरे लिए नया है और इसे काव्य में समाहित करना भी एक कला है और इस रस को पहचानना भी अपने आप में अद्भुत है आप दोनों को बहुत बहुत बधाई :) वैसे शायद होली बीत गई बीत गई न :) सादर

At 12:34am on February 29, 2012, Monika Jain said…

Aaj ke daur me aadarsho ke saath jine ki pida ke dard ke saath watan ke prati aapki rachna me jo phikra nazar aati hai wo sarahniya hai.

Monika

At 1:56pm on February 1, 2012, Rajiv Gupta said…

नींद से जागा तो मेरी आँख में शबनम थी. 

ख़वाब में उसने मेरी आँखों को रुलाया होगा..
 
 
 

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