Started this discussion. Last reply by CA. SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' Jul 11, 2012. 22 Replies 1 Like
मेरी पुस्तक "प्रेम के पथ पर" का विमोचन…Continue
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CA. SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" - अंक ३१Posted on January 26, 2013 at 2:30pm 2 Comments 0 Likes
आओ मिल गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रगान का गान करें,
संकल्पित सपनों की आओ फिर से नयी उड़ान भरें.
नये जोश से ओत प्रोत हो हम गणतंत्र मनाते हैं,
लोकतंत्र में हो स्वतंत्र हम राष्ट्र गीत को गाते हैं..
किन्तु चाहता प्रश्न पूंछना लोकतंत्र रखवारों से,
सार्थकता क्या बची रहेगी इन ओजस्वी नारों से.
क्या तुमको भूंखे बच्चों की चीख सुनाई देती है,
क्या तुमको कोई अबला की पीर दिखाई देती है.
क्या तुमने बेबस माँओं की गोद उजड़ते देखा है.
कितनी मांगों…
ContinuePosted on January 12, 2013 at 9:30am 12 Comments 1 Like
घटना ऐसी घटित हो गयी सुनकर भारत रोया है,
वीर सपूतो को फिर से इस मात्रभूमि ने खोया है.
छल कर गया पड़ोसी उसने अपनी जात दिखा डाली,
सोते सिंहो पर हमला अपनी औकात दिखा डाली.
खून हमारा उबल उठा है पाक तेरी नादानी से,
दिल्ली कैसे सहन कर गयी सोंचू मै हैरानी से.
आज हमारी सहनशक्ति का बाँध तोड़ डाला तूने,
सोये सिंह जगाकर अपना भाग्य फोड़ डाला तूने.
अरे भेंड़िये कायरपन पर बार-बार धिक्कार तुझे,
हिन्दुस्तानी बच्चा-बच्चा देता है ललकार तुझे.
कूटनीति अपनाने वाले…
Posted on January 10, 2013 at 8:00pm 10 Comments 0 Likes
अफ़सोस है दुनिया में दीवाने कहाँ जायें.
शम्मा से भला बचकर परवाने कहाँ जायें.
यातना वंचना असह्य हो,
सहचरी वेदना बनी सदा.
निर्जन पथ निर्मम मीत मिला,
व्याकुल करती मदहोश अदा.
उलझन में पड़ा जीवन सुलझाने कहाँ जायें.
शम्मा से भला बचकर परवाने कहाँ जायें.
पल में विचलित कर देती हैं,
ये प्यार मुहब्बत की बातें.
नयनों मे कोष अश्रुओं का,
क्यूँ काटे नहीं कटती रातें.
राँझा की तरह बोलो मिट जाने कहाँ जायें..
शम्मा से भला बचकर परवाने कहाँ…
Posted on December 12, 2012 at 5:30pm 4 Comments 0 Likes
समरसता की पले भावना सबका हो यह नारा
यह मानव धर्म हमारा शुभ मानव धर्म हमारा..
जन-जन में फैले विश्व शांति आपस में भाईचारे
मंदिर बांटा मस्जिद बांटी अब बांटों ना गुरूद्वारे.
राम नाम भव तारेगा सदगुरू का एक इशारा..
यह मानव धर्म हमारा................
सुख दुःख आपस में बांटों बन व्योम,चन्द्र औ तारे
लहर दौड़ समता की जाये बचें कहर से सारे .
अमन शांति और विश्व एकता यह शुभ कर्म हमारा ..
यह मानव धर्म…
सूबे सिंह सुजान said… बहुत खूब ....आपकी वीर रस की कवितायें बेहद सराहनीय हैं

Thank u mridu ji
वीनस केसरी said… मृदु जी जन्म दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.
ARVIND KUMAR TIWARI said… आदरणीय शैलेन्द्र सिंह "मृदु" जी जन्म दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं. आपका ये चमत्कृत व्यक्तित्व हमेशा सूर्य की आभा लेकर साहित्य जगत में एक उदीयमान रूप लेकर निखरे.
इस मंगलकारी दिवस की आपको सहस्त्र बधाइयाँ

बहुत बहुत आभार शैलेन्द्र मृदु जी |
Mukesh Kumar Saxena said… धन्य बाद मृदु जी । दोस्त तो वहुत मुश्किल से मिलते है
MANISHI SINGH said… aadarniya mridu ji, sadar abhivadan
thanks.
Mukesh Kumar Saxena said… भाई शैलेंदर जी मै आपका आभारी हूँ जो आपने मेरी भावनाओ की फर्क और पात्रता के माध्यम से कद्र की ।
खुश हूँ उसकी ख़ुशी से कि खुश वो रहे
प्यारी सी प्रस्तुति.........प्रेम सी भरी हुई...बधाई
मृदु जी, नमस्कार ,
आभारी..हु,.....धन्यवाद्..उत्साह बढ़ने के लिए...
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