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संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी''s Friends

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संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी''s Page

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VISHAAL CHARCHCHIT liked संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी''s discussion ग़ज़ल में शब्दों का प्रयोग: मूल अथवा प्रचलित रूप में
Sunday
Roshni Dhir left a comment for संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी'
"धन्यवाद वाहिद जी ... आशा है की आप का मार्गदर्शन मिलता रहेगा ...आभार "
May 13
संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' commented on अरुन शर्मा 'अनन्त''s blog post ग़ज़ल : चोरी घोटाला और काली कमाई
"सुन्दर प्रयास अरुण जी! मतले के उला में प्रवाह कुछ बाधित प्रतीत हो रहा है! नज़रे सानी फ़रमा लें! सादर."
May 10
संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' commented on Roshni Dhir's blog post इम्तिहान
"सुन्दर प्रस्तुति! बधाई रौशनी जी!"
May 10
संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' commented on दिव्या's blog post माँ तुम मेरी सहेली हो
"सरल शब्दों में भावपूर्ण प्रस्तुति पर बधाई! प्रवाह पर ध्यान दें पद्य निखर कर सामने आएगा!"
May 10
संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' replied to वीनस केसरी's discussion विश्व भाषा समुदाय में वर्तमान भारतीय बोलचाल की भाषाएं in the group ग़ज़ल की बातें
"बजा फ़रमाया भाई..!! मैं भी प्रयासरत हूँ! देखिये क्या रंग हासिल होता है! शुभेच्छाएँ..! :-)))"
May 5
बृजेश नीरज left a comment for संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी'
"संदीप भाई आपका आभार!"
May 4
संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' replied to वीनस केसरी's discussion विश्व भाषा समुदाय में वर्तमान भारतीय बोलचाल की भाषाएं in the group ग़ज़ल की बातें
"बात वही है जो आपकी उर्दू शब्दों वाली पोस्ट पर छिड़ सकती थी.. किन्तु विषय विवादित है! अनेक वस्तुएँ भारत से बाहर अरब के माध्यम से हो कर ही गईं हैं! उदाहरणार्थ आधुनिक नम्बर सिस्टम! आपके अथक परिश्रम को देखते हुए मैं भी जब तक उचित सन्दर्भ नहीं ढूंढ लेता…"
May 4
संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' left a comment for बृजेश नीरज
"आदरणीय बृजेश जी मास का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें!"
May 4
संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' liked वीनस केसरी's discussion हिन्दी में अन्य भाषा के प्रचलित शब्दों का सही रख रखाव - वीनस केसरी
Apr 30
संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' replied to वीनस केसरी's discussion विश्व भाषा समुदाय में वर्तमान भारतीय बोलचाल की भाषाएं in the group ग़ज़ल की बातें
"अत्यंत ही महत्वपूर्ण एवं उपयोगी चार्ट! यह दर्शाता है कि आप भाषा के प्रति कितना अधिक समर्पण और निष्ठा रखते हैं और आपका यह व्यापक शोध भी अत्यंत ही प्रशंसनीय है! यह चार्ट देख कर मन में कुछ विचार आ रहे थे किन्तु अभी उन्हें प्रकट करने का उपयुक्त समय…"
Apr 30
संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' replied to वीनस केसरी's discussion हिन्दी में अन्य भाषा के प्रचलित शब्दों का सही रख रखाव - वीनस केसरी in the group ग़ज़ल की बातें
"भाई 'ईनत' तो आपकी होनी चाहिए कि इस मंच के माध्यम से आपने इतने महत्वपूर्ण विषय पर विषद चर्चा का प्रस्ताव रखा और सभी प्रबुद्धजन इसमें सहर्ष सम्मिलित भी हुए और अपने-अपने संवाद के माध्यम से इस चर्चा को और भी समृद्ध किया! फ़िलहाल मुझे लगता है कि…"
Apr 30
संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' replied to वीनस केसरी's discussion हिन्दी में अन्य भाषा के प्रचलित शब्दों का सही रख रखाव - वीनस केसरी in the group ग़ज़ल की बातें
"भाई वीनस जी, सादर नमस्कार. सर्वप्रथम तो आप कोटिशः बधाई के पात्र हैं जो आपने अत्यंत ही सार्थक एवं महत्वपूर्ण विषय पर यह चर्चा प्रारंभ की! समयाभाव होते हुए भी अपनी व्यक्तिगत, साहित्यिक एवं भाषाई अभिरुचि तथा आपके निवेदन ने मुझे विवश कर दिया कि आंशिक ही…"
Apr 30
संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' and Kewal Prasad are now friends
Apr 19
संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' commented on PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA's blog post नवरात्र ..लघु कथा
"तीक्ष्ण कटाक्ष! बधाई आदरणीय!"
Apr 18
संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' commented on Kewal Prasad's blog post ‘‘गजल‘‘
"बहुत ही अच्छा प्रयास आदरणीय केवल जी! निरंतर अभ्यासरत रहें निखार सुनिश्चित है! बधाई.."
Apr 18

Profile Information

Gender
Male
City State
Varanasi, Uttar Pradesh
Native Place
Deoria, Uttar Pradesh
Profession
Freelancer
About me
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संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी''s Blog

ग़ज़ल- "न पीपल की छाया, न पोखर दिखे!"

Posted on April 5, 2013 at 2:00am 14 Comments

बह्रे मुतक़ारिब मुसम्मन महज़ूफ़

122/122/122/12

***********************

न पीपल की छाया, न पोखर दिखे;

मेरे गाँव के खेत बंजर दिखे; (1)

हैं शुअरा जहाँ…

Continue

"दिमाग़ी सोच से हट कर मैं दिल से जब समझता हूँ"

Posted on February 5, 2013 at 3:30pm 17 Comments

बह्रे हज़ज़ मुसम्मन सालिम

१२२२-१२२२-१२२२-१२२२

दिमाग़ी सोच से हट कर मैं दिल से जब समझता हूँ;

ज़माने की हर इक शै में मैं केवल रब समझता हूँ; (१)

ख़ुशी बांटो सभी को और सबसे प्यार ही करना,

यही ईमान है मेरा यही मज़हब समझता हूँ; (२)

मरुस्थल है दुपहरी है न कोई छाँव मीलों तक,

ये दुनिया जिसको कहती है वो तश्नालब समझता हूँ; (३)

कभी गाली, कभी फटकार तेरी, सब सहा मैंने,

मिला है आज हंस कर तू, तेरा मतलब समझता हूँ; (४)

फ़ितूर इस को कहो चाहे सनक या…

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"ग़ज़ल- क्या होगा!"

Posted on November 14, 2012 at 2:30pm 23 Comments

****************************************

दवा ही बन गई है मर्ज़ इलाज क्या होगा;

उसे सुकून यक़ीनन बहुत मिला होगा; (१)

मैं नूरे-चश्म था जिसका कभी वो कहता है,

नज़र भी आये अगर तो बहुत बुरा होगा; (२)

हमारे बीच मसाइल हैं कुछ अभी बाक़ी,

ठनी है जी में यही, आज फ़ैसला होगा; (३)

जहाँ ख़ुलूस दिलों में है धड़कनों की तरह,

वहीं पे मंदिरों में जल रहा दिया होगा; (४)

तेरे गुनाह की पोशीदगी है दुनिया से,

मगर ख़ुदा की निगाहों से क्या छुपा होगा;…

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"ज़मीं"

Posted on September 3, 2012 at 3:00am 32 Comments

ये कहाँ खो गई इशरतों की ज़मीं;

मेरी मासूम सी ख़ाहिशों की ज़मीं; (१)



फिर कहानी सुनाओ वही मुझको माँ,

चाँद की रौशनी, बादलों की ज़मीं; (२)



वक़्त की मार ने सब भुला ही दिया,

आसमां ख़ाब का, हसरतों की ज़मीं; (३)



जुगनुओं-तितलियों को मैं ढूंढूं कहाँ,

शह्र ही खा गए जंगलों की ज़मीं; (४)



दौड़ती-भागती ज़िंदगी में कभी,

है मुयस्सर कहाँ, फ़ुर्सतों की ज़मीं; (५)



गेंहू-चावल उगाती थी पहले कभी,

बन गई आज ये असलहों…

Continue

Comment Wall (35 comments)

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At 6:54pm on May 13, 2013, Roshni Dhir said…

धन्यवाद वाहिद जी ... आशा है की आप का मार्गदर्शन मिलता रहेगा ...आभार 

At 10:48pm on May 4, 2013, बृजेश नीरज said…

संदीप भाई आपका आभार!

At 2:11pm on December 16, 2012, Laxman Prasad Ladiwala said…
जन्म दिन की हार्दिक शुभ कामनाए । प्रभु आपको देश,समाज,परिवार में अपना दायित्व
निभाते हुए और उंचाइयां प्रदान करने का साहस प्रदान करे । आपका और हमारा स्नेह बना रहे  
At 1:33pm on December 16, 2012, अरुन शर्मा 'अनन्त' said…

संदीप जी जन्मदिवस की ढेरों शुभकामनाएं.....

At 12:36pm on October 3, 2012, Admin said…

प्रिय सदस्य / सदस्या

आप का पत्राचार का पता एवं नाम (चेक / ड्राफ्ट निर्गत करने हेतु ) अभी तक अप्राप्त है, जिसके कारण प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार राशि नहीं भेजा जा सका है, कृपया शीघ्र उक्त विवरण admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराये जिससे अग्रेतर कार्रवाही कि जा सके | ध्यान रहे मेल उसी इ-मेल आई डी से भेजे जिस आई डी से आपने अपना ओ बी ओ प्रोफाइल बनाया है |
सादर 
एडमिन 
ओपन बुक्स ऑनलाइन डाट कॉम 
At 5:27pm on July 11, 2012, Vinay Kull said…

आपका स्वागत है !

At 8:04pm on July 9, 2012, Albela Khatri said…

आपका हार्दिक धन्यवाद आदरणीय संदीप द्विवेदी 'वाहिद' साहेब

At 11:59pm on July 5, 2012, SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR said…

प्रिय वाहिद भाई आप के व्यस्त लम्हे कुछ हम सब को खलते तो हैं ही ....शब्दों के अर्थ आप ने बताये अच्छा लगा ...आप की शुभकामनाओं और बधाई के लिए बहुत बहुत आभार अपना स्नेह बनाये रखें 

आभार 
भ्रमर 5 
भ्रमर का दर्द और दर्पण  
At 11:15am on May 6, 2012, RAJEEV KUMAR JHA said…

बहुत खूबसूरत गजल संदीप जी.सभी पंक्तियाँ काबिलेतारीफ़ हैं.

बात कानों में घुलती शहद की तरह,

रात ही रात में क्यूँ ज़हर हो गयी;

अब तलक तो खुदा को न सजदा किया,

ये दुआ मेरी कैसे असर हो गयी.

बहुत सुन्दर.

At 11:12am on May 6, 2012, RAJEEV KUMAR JHA said…

संदीप जी,महीने का सक्रिय सदस्य चुने जाने पर बधाई!

 
 
 

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