For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

पियूष कुमार पंत
  • Male
  • हल्द्वानी, उत्तराखंड
  • India
Share

पियूष कुमार पंत's Friends

  • Chaatak
  • PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA
  • संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी'
 

पियूष कुमार पंत's Page

Profile Information

Gender
Male
City State
हल्द्वानी
Native Place
बागेश्वर
Profession
सरकारी कर्मचारी
About me
अभी कुछ है नहीं कहने लायक.......... कुछ हो जाए... तो फिर बतलाऊंगा.....

पियूष कुमार पंत's Blog

मैं शहर छोड़ आया उसका...

आज मैं शहर छोड़ आया उसका,

वो शहर जो हर पल मुझे,

बस याद उसकी दिलाता था,

वो शहर की जिसमें महकती थी,

बस उसी की खुशबू,

वो शहर जहां हर ओर उसके ही नगमे गूँजा करते थे,

वो वही शहर था जहां रहते थे,

बस चाहने वाले उसके,

आज भी बस शहर ही छूटा है उसका,

पर यादें अभी भी बाकी हैं किसी कोने में,

अपने इस नए शहर में भी बस,

उसकी ही परछाइयों कोई खोजता फिरता हूँ मैं,

बेशक शहर छोड़ दिया उसका मैंने,

पर इस नए शहर में भी मैं उसको ही खोजता हूँ,

बस शहर ही…

Continue

Posted on October 4, 2012 at 9:10pm — 4 Comments

बटवारा आसमान का......

आज डूबते हुए सूरज को एक बार फिर देखा,

लालिमा से भरा सूरज अलविदा कहता हुआ,

अब सूरज छुप जाएगा बस कुछ ही पलों में,

और आकाश में दिखने लगेगा चाँद वो सुंदर सा,



कभी कभी ये भ्रम भी होने लगता है,

की क्या चाँद और सूरज अलग अलग हैं,

या सूरज ही रूप रंग बदल लौट आता है,

और दो किरदार निभाता है अलग अलग तरह के,

जैसे फिल्मों में एक ही आदमी दो हो जाता है एक होते हुए भी,

आखिर क्यों नहीं ये दोनों एक साथ दिखते हैं,

ये सोचते सोचते ही नज़र खोजने लगी आकाश…

Continue

Posted on October 3, 2012 at 9:30pm — 2 Comments

कौन है वो बूढ़ी .....

आज चाँद दिखा आसमान में पूरा,

और वो बुढिया भी जो कात रही है,

सूत कई वर्षों से बैठी हुई तन्हा,

मैं हैरान हूँ, और परेशान भी,

क्या चाँद पर भी लोग हम जैसे ही रहते हैं,

क्या वहाँ भी बूढ़ों को यूं ही छोड़ दिया जाता है,

अकेला और तन्हा, विज्ञान कहता है कि,

कोई बुढ़िया नहीं रहती है चाँद पर,

पर मुझको तो मेरी माँ ने तो बचपन बताया था ,

सूत कातती उस बुढ़िया के बारे में,

वो चाँद मामा है हमारा हमने ये बचपन से सुना है,

तो…

Continue

Posted on October 2, 2012 at 9:00pm — 7 Comments

आँसू चाँद के....

कई दिन की बारिश के बाद,

आज बड़ी अच्छी सी धूप खिली थी,

नीला सा आसमान,

जो भरा था कई सफ़ेद बादलों से,

कई लोगों ने अपने कपड़े,

फैला दिये थे सुखाने को छ्तों पर,

जो कई दिन से नमी से सिले पड़े थे,

याद आ ही गई बचपन की वो बात बरबस,

की जब कहा करते थे की,

बारिश होती है जब ऊपर वाला कभी रोता है,

फिर जब धूप खिलती थी,

और आसमान भर जाता था सफ़ेद बादलों से,

तब कहा करते थे की,

ऊपर वाले ने भी सुखाने डाली…

Continue

Posted on September 27, 2012 at 10:47pm — 4 Comments

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Rakshita Singh commented on Naveen Mani Tripathi's blog post बात दिल मे ही ठहर जाती है
"आदरणीय नवीन जी नमस्कार, बहुत खूबसूरत गजल, बे अदब हो गयी है याद तेरी - बे सबब दिल में उतर जाती…"
5 minutes ago
Rakshita Singh commented on Neeraj Mishra "प्रेम"'s blog post अंजामे दिल/ग़ज़ल
"आदरणीय नीरज जी बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ...  मैं भला हूँ किस तरह तुझसे अलग, मुझमें जो कुछ भी है…"
57 minutes ago
Mohammed Arif posted a blog post

कविता --पारदर्शिता

कितनी पारदर्शिता हैइस सदी मेंकिसानों की बर्बाद फसल कातगड़ा मुआवज़ा देने कीसरकार खुलेआम घोषणा कर रही…See More
4 hours ago
Mohammed Arif commented on नन्दकिशोर दुबे's blog post गीतिका
"आदरणीय नंदकीशोर दुबे जी आदाब,                    …"
4 hours ago
Mohammed Arif commented on रामबली गुप्ता's blog post गीत-भावना में प्रेम का रस घोल प्यारे-रामबली गुप्ता
"आदरणीय राम बली गुप्ता जी आदाब,                  …"
4 hours ago
Neeraj Mishra "प्रेम" posted a blog post

अंजामे दिल/ग़ज़ल

महफिलों से एक दिन जाना ही है । आख़िरश अंजामे दिल तनहा ही है ।क्या हुआ जो आज मै तड़पा बहुत, मुद्दतों…See More
5 hours ago
vijay nikore posted a blog post

काल कोठरी

काल कोठरीनिस्तब्धताअँधेरे का फैलावदिशा से दिशा है काला आकाशरात है मानो अँधेरे कीएक बहुत बड़ी…See More
5 hours ago
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

बात दिल मे ही ठहर जाती है

2122 1122 22छू के साहिल को लहर जाती है ।रेत नम अश्क़ से कर जाती है ।।सोचता हूँ कि बयाँ कर दूं कुछ…See More
5 hours ago
Neeraj Mishra "प्रेम" commented on Neeraj Mishra "प्रेम"'s blog post इश्क कुछ इस तरह निबाह करो/ ग़ज़ल
"आदरणीय राम अवध जी बहुमूल्य जानकारी देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।"
10 hours ago
Neeraj Mishra "प्रेम" commented on Neeraj Mishra "प्रेम"'s blog post इश्क कुछ इस तरह निबाह करो/ ग़ज़ल
"बहुत बहुत हार्दिक आभार आदरणीय मोहम्मद आरिफ साहब"
10 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on नन्दकिशोर दुबे's blog post गीतिका
"बहुत सुंदर। हार्दिक बधाई आदरणीय नंदकिशोर दुबे जी।"
12 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 82 in the group चित्र से काव्य तक
"बहुत रोचक और सुंदर। हार्दिक बधाई आदरणीय  शरद सिंह ' विनोद' जी।"
12 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service