For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी
  • 24, Male
  • बभनान-गोण्डा-उ.प्र
  • India
Share

विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's Friends

  • Rahila
  • Seema Singh
  • Ashish Painuly
  • गिरिराज भंडारी
  • Kedia Chhirag
  • ASHISH KUMAAR TRIVEDI
  • Kewal Prasad
  • डॉ नूतन डिमरी गैरोला
  • Savitri Rathore
  • बृजेश नीरज
  • वेदिका
  • आशीष नैथानी 'सलिल'
  • पीयूष द्विवेदी भारत
  • saroj sharma
  • seema agrawal

विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's Groups

विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's Discussions

हिन्दी छंद रचनाओं में अंग्रेजी के शब्दों के प्रयोग की समस्या
17 Replies

हम नौसिखुओं को हिन्दी की छंदोबद्ध रचनाओं में अंग्रेजी के कुछ शब्दों के प्रयोग में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।यथा मेरे द्वारा रचित एक दोहे की अर्द्धाली निम्नवत् है-//एफ. डी. आई से भला होगा देश…Continue

Started this discussion. Last reply by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी Apr 5, 2013.

RSS

Loading… Loading feed

 

विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's Page

Latest Activity

बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post कुछ मुक्तक (भाग-४)
"बड़े सुन्दर मुक्तक हुए त्रिपाठी जी..बधाई"
Jul 10
Samar kabeer commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post कुछ मुक्तक (भाग-४)
"जनाब विन्ध्येश्वरी जी,और बहना राजेश कुमारी जी आदाब,'अंदाज़'शब्द फ़ारसी भाषा का है, और 'ऋतुराज' शब्द या तो हिन्दी भाषा को होगा या संस्कृत भाषा का मैं नहीं जानता,और इनकी तुकान्तता किसी भी लिहाज़ से दुरुस्त नहीं हो सकती,ये बात समझने की…"
Jul 10
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post कुछ मुक्तक (भाग-४)
"आदरणीय गिरिराज सर आपका भूरिशः आभार"
Jul 10
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post कुछ मुक्तक (भाग-४)
"आदरणीया राजेश मैम! आपने रचना पर अपना बहुमूल्य समय और सुझाव दिया आपका आभार। सादर"
Jul 10
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post कुछ मुक्तक (भाग-४)
"आदरणीय लक्ष्मन सर! रचना पर आपने समय दिया,मैं हृदयतल से आभारी हूँ। सादर"
Jul 10
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post कुछ मुक्तक (भाग-5)
"आदरणीय समर कबीर सर! मुक्तक पर अपना बहुमूल्य समय देने के लिये आपका भूरिशः आभार। आपने विस्तृत रूप से दोषों की तरफ संकेत किया है। उसे दूर करने की कोशिश करता हूँ। सादर"
Jul 10
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post कुछ मुक्तक (भाग-5)
"आदरणीया प्राची दीदी! मुक्तक पर अपना बहुमूल्य समय देने के लिये आपका भूरिशः आभार। जो कुछ दोष रह गया है उसे दूर करने की कोशिश करता हूँ।"
Jul 10
Samar kabeer commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post कुछ मुक्तक (भाग-5)
"जनाब त्रिपाठी जी आदाब,मुक्तक लिखने का अच्छा प्रयास हुआ है,इसके लिए बधाई स्वीकार करें । पहले मुक्तक की दूसरी पंक्ति में 'नशा नस नस में महकाती',नशा महकाती प्रयोग सही नहीं लगता,'नशा नस नस में दौड़ाती होना चाहिये था । दूसरे मुक्तक में…"
Jul 7

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post कुछ मुक्तक (भाग-5)
"सभी मुक्तक बहुत सुन्दर हुए है प्रिय विन्ध्येश्वरी भाई  बहुत खूबसूरत सौम्य शृंगार का निर्वहन सबमें  बस अंतिम मुक्तक में काफिये फिर से देख लीजियेगा  मेरी दिली बधाई इन मुक्तकों पर "
Jul 7
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी posted a blog post

कुछ मुक्तक (भाग-5)

मात्रा विन्यास1222 1222 1222 1222लगे वो जल परी जैसी, अधर मधु हास बिखराती।वो तरुणी वारुणी जैसी, नशा नस नस में महकाती।लगे ज्यों दिव्य मूरत सी, रचा खुद ब्रह्म ने जिसको।हुई मदहोश महफिल पर, तुरत ही ताजगी आती।अलग है बात कुछ तुझमें, नहीं हर एक में मिलती।भरी तू दोपहर जैसी, सुहानी शाम भी लगती।निशा का मस्त आंचल तू, सुबह की ताजगी तुझमें।स्वयं शृंगार कर उपमा, तुझे है आरती करती।है कैसा हाल अब उनका, खबर कोई सुनाये तो।तड़प मन की मेरे जाकर, कोई उनको बताये तो।दरस की आस ले मन में, पड़ा मैं द्वार पर उनके।झलक बस…See More
Jul 5

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post कुछ मुक्तक (भाग-४)
"आ. विन्ध्येश्वरी भाई ... खूब सूरत मुक्तकों के लिये आपको हार्दिक बधाइयाँ ... आ. समर भाई जी की सलाह मुझे भी सही लगी ।"
Apr 5

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post कुछ मुक्तक (भाग-४)
"आद० विन्ध्येश्वरी प्रसाद जी बहुत ही सुंदर मुक्तक लिखें हैं बहुत बहुत बधाई लीजिये दूसरा मुक्तक पूर्णतः शिल्प पर कसा हुआ है बाकी तुकांतता के लिए विद्वद जन कह ही चुके हैं वैसे अंदाज और ऋतुराज की तुकांतता मेरे विचार से भी सही है "
Apr 5
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post कुछ मुक्तक (भाग-४)
" सुंदर और भापूर्ण मुक्तक रचे है \ मुक्तक में तुकांत के साथ ही समान्त का भी ध्यान रखा जाए तो और अच्छा माना जाता है हिसका निर्धारण प्रथम दो पंकितियों से होता है जो दुसरे मुक्तक में है |"
Apr 5
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post कुछ मुक्तक (भाग-४)
"आदरणीय सुरेंद्र सर आपका हार्दिक आभार"
Apr 4
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post कुछ मुक्तक (भाग-४)
"आदरणीय समर कबीर सर, सादर आभार। अंदाज और ऋतुराज के तुकांत में त्रुटि है लेकिन मैंने अंदाज़ को अंदाज लिखा है। अत: मुझ अल्पमति को ठीक लग रहा है। फिर भी गुरुजन इस पर अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया देंगे तो बात स्पष्ट हो सकेगी। इसके अलावा मैं तुकांत दोष समझ…"
Apr 4
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post कुछ मुक्तक (भाग-४)
"आदरणी मो. आरिफ सर, सादर आभार। मात्रा विन्यास न लिखने के लिये क्षमा प्रार्थी हूं। मात्रा विन्यास है- 1222 1222 1222 1222"
Apr 4

Profile Information

Gender
Male
City State
उत्तर प्रदेश
Native Place
बभनान
Profession
शोध छात्र ( जे. आर. एफ. - भूगोल , रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर मध्यप्रदेश, भारत)
About me
ईश्वर महान है। वह कभी गलत नहीं करता इसलिये उसके विधान में विश्वास करता हूं।

विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's Photos

Loading…
  • Add Photos
  • View All

विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's Blog

कुछ मुक्तक (भाग-5)

मात्रा विन्यास

1222 1222 1222 1222



लगे वो जल परी जैसी, अधर मधु हास बिखराती।

वो तरुणी वारुणी जैसी, नशा नस नस में महकाती।

लगे ज्यों दिव्य मूरत सी, रचा खुद ब्रह्म ने जिसको।

हुई मदहोश महफिल पर, तुरत ही ताजगी आती।



अलग है बात कुछ तुझमें, नहीं हर एक में मिलती।

भरी तू दोपहर जैसी, सुहानी शाम भी लगती।

निशा का मस्त आंचल तू, सुबह की ताजगी तुझमें।

स्वयं शृंगार कर उपमा, तुझे है आरती करती।



है कैसा हाल अब उनका, खबर कोई सुनाये तो।

तड़प मन… Continue

Posted on July 5, 2017 at 4:51pm — 4 Comments

कुछ मुक्तक (भाग-४)

सजी दुल्हन के जोड़े में, हंसी वो रूप की रानी।

सुनहरे रंग की बिंदिया, चमक माथे पे नूरानी।

हरी चूनर खिला चहरा, गुलाबी होंठ की लाली।

हजारों हुश्न देखे पर, नहीं उसका कोई सानी।



तुम्हारी सादगी देखी, तुम्हारा साज देखा है।

मगर हर रूप में जाना, जुदा अंदाज देखा है।

तुम्हारी सादगी चमके, कुमुदिनी फूल के जैसे।

तुम्हारे साज में हमने, सदा ऋतुराज देखा है।



खुली आंखें रहीं मेरी, अचानक देखकर उनको।

धरा पर ईश ने भेजा, रमा रति उर्वशी किसको।

अगर नख शिख… Continue

Posted on April 3, 2017 at 9:29am — 14 Comments

कुछ मुक्तक (भाग-३)

मात्रा विन्यास-

१२२२ १२२२ १२२२ १२२२



अभी भी याद आती हैं, सुहानी शाम की बातें।

बड़े ही चाव से करना, बिना वो काम की बातें।

कहा तुमने बहुत हमसे, सुना हमने बहुत लेकिन।

अधूरी आज भी चुभती, बिना अंजाम की बातें।



घने बरगद तले अपना, भरी वो दोपहर मिलना।

पसीने से सने चेहरे, दुपट्टे से हवा करना।

किया वादा तो पूरी पर, अधूरी आस थी अब भी।

जुदाई की घड़ी आयी, हथेली खीझ कर मलना।



चले चर्चा कोई जब भी, तेरा ही नाम आता है।

भुलाता हूं तुझे लेकिन,… Continue

Posted on March 31, 2017 at 2:26pm — 4 Comments

कुछ मुक्तक (भाग-२)

मुहब्बत खूबसूरत है, इसे बदनाम मत करना।

देना दिल तबीयत से, कभी अहसान मत करना।

खुदा की ये नियामत है, नहीं हर एक को मिलती।

ये नेमत हाथ लग जाये, कभी इंकार मत करना।



मुहब्बत खेल मत समझो, खुदा की ये इबादत है।

यही इंसान की फितरत, यही शमसीर कुदरत है।

मुहब्बत का परिंदा है यहां, हर शख्स हर जर्रा।

दिलों में क्यों भरा नफरत, जहां में क्यों अदावत है।



बुरा वो मान लें शायद, करूं इजहार यदि उनसे।

गिरा दें मुझको नजरों से, जता दूं प्यार यदि उनसे।

अगर वो… Continue

Posted on March 18, 2017 at 7:44pm — 3 Comments

Comment Wall (13 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 11:54am on August 20, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी जी, 

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 12:34pm on May 3, 2013, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

सादर धन्यवाद 

स्नेही विनय जी 

आपने अपने व्यस्त समय से मुझे मार्गदर्शन किया. काफी विस्त्रत जानकारी दी. निराशा थी. प्रोत्साहन मिला .स्नेह बनाये रखिये. 

At 7:35pm on April 14, 2013, Kedia Chhirag said…

प्रिय बन्धु,आपका आभार किन शब्दों में व्यक्त करूँ ...शब्द नहीं हैं...आपने मुझको इस साईट से परिचित करवाकर मेरे लिए ज्ञान का महासागर समक्ष कर दिया है ....अब यह पूरी तरह मेरे ऊपर निर्भर है की मैं इस महासागर की कितनी गहराइयों में उतरकर अपने लिए ज्ञान के मोती चुनूँ...मेरा पूरा प्रयास रहेगा की हमेशा आप सबके स्नेहाशीष से आपकी अपेक्षाओं को पूरा कर सकने में समर्थ हो पाऊं .......अत्यंत आभार ....ह्रदय से ........

At 3:15pm on April 10, 2013, manoj shukla said…
आभार भाईसाहब त्रिपाठी जी
At 5:47pm on March 7, 2013, mrs manjari pandey said…

आदरणीय विन्ध्येश्वरी प्रसाद जी

 कल बहुतों का कल ले लेता .

कल को छीन  विकल कर देता।

पूरी रचना अच्छी लगी।

 

At 11:54pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 5:44pm on August 20, 2012, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…
आदरणीय विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठीजी, आपके जन्म दिन पर हार्दिक शुभकामनाए गुरुवर
इश्वर करे आप नयी उंचाइयां छुए और परिवार समाज और देश के विकास में योगदान करे |
हमारा आपका सदव्यवहार बना रहे  |
At 9:04am on April 29, 2012, Sanjay Mishra 'Habib' said…

प्रिय भाई विन्ध्येश्वरी जी, आपकी सहृदय संवेदनाओं से बड़ा संबल मिला है...

सादर नमन।

At 8:10pm on April 19, 2012, राकेश त्रिपाठी 'बस्तीवी' said…

Bhai Tripathi ji, Hamari Mitra mandali me aapka khule dil se svagat hai.

At 12:51pm on April 1, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

आदरणीय , श्री त्रिपाठी  जी.

सादर अभिवादन.
मैं सीखने आया हूँ. मार्गदर्शन और स्नेह अपेक्षित है. 
धन्यवाद.  स्नेह बनाये रखियेगा.
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा--इशारा
"लघुकथा के मर्म को समझने और उस पर अपनी सटीक प्रतिक्रिया देने का बहुत-बहुत आभार ।"
2 minutes ago
Mohammed Arif commented on rajesh kumari's blog post हैं वफ़ा के निशान समझो ना (प्रेम को समर्पित एक ग़ज़ल "राज')
"आदरणीया राजेश कुमारी जी आदाब, बहुत ही उम्दा ग़ज़ल हुई है । शे'र दर शे'र दाद के साथ…"
4 minutes ago
pratibha pande commented on KALPANA BHATT's blog post बरखा ( सार छंद- १६,१२)
"बारिश की मस्ती को खूब पिरोया है आपने छंदों में .   हार्दिक बधाई   आदरणीया कल्पना जी "
1 hour ago
pratibha pande commented on Mamta 's blog post लघुकथा "मजबूरियाँ"
"बहुत अच्छी लघुकथा ... ममता का मर्म जिस तरह अंत में उभर कर आया  प्रभावित करता है ...हार्दिक…"
2 hours ago
pratibha pande commented on Manisha Saxena's blog post लघुकथा उलझन दाखिले की
"दाखिले की समस्या से जूझ  रहे अभिभावकों को केंद्र में रख कही गई सुन्दर कथा ...हार्दिक बधाई…"
2 hours ago
pratibha pande commented on Uma Vishwakarma's blog post अपाहिज़ कौन: लघुकथा
"गंभीर विषय को लेकर कथा  का ताना बाना बुना है आपने ..हार्दिक बधाई आपको आदरणीया..  शिल्प…"
2 hours ago
pratibha pande commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा--इशारा
"सरकारें बदलती रहती हैं पर आम आदमी के सरोकार वाली संस्थाएं पुलिस शिक्षा स्वास्थ्य ,सब वहीँ की वहीँ…"
2 hours ago
pratibha pande commented on MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI's blog post " फर्ज " ( लघु कथा )
"सकारात्मक सोच पर बुनी प्रभावशाली  कथा ..हार्दिक बधाई आपको आदरणीय "
2 hours ago
pratibha pande commented on MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI's blog post " उमस " ( लघु कथा )
"  एक कविता की तरह कही गई कहानी .. इंतज़ार मे.प्रेमी के दिल का हाल  बारिश में पैदा उमस जैसा…"
2 hours ago
Mohammed Arif commented on श्याम किशोर सिंह 'करीब''s blog post पर्यावरण / किशोर करीब
"आदरणीय श्याम किशोर जी आदाब, पर्यावरणीय चिंता को रेखांकित करती बेहतरीन कविता । अच्छा संदेश । हार्दिक…"
2 hours ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा--इशारा
"आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब,आपकी टिप्पणी पाकर अभिभूत हो गया । आपने सही कहा कि थोड़े शब्दों में बड़ी…"
3 hours ago
Manisha Saxena commented on Manisha Saxena's blog post लघुकथा उलझन दाखिले की
"आ. उमानी जी आपकी बताई गयी दोनों बातें ज़रूर ध्यान रखूंगी| आप गुणीजन के मार्गदर्शन में सीख रही हूँ…"
4 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service