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विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी
  • 23, Male
  • बभनान-गोण्डा-उ.प्र
  • India
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विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's Discussions

हिन्दी छंद रचनाओं में अंग्रेजी के शब्दों के प्रयोग की समस्या
17 Replies

हम नौसिखुओं को हिन्दी की छंदोबद्ध रचनाओं में अंग्रेजी के कुछ शब्दों के प्रयोग में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।यथा मेरे द्वारा रचित एक दोहे की अर्द्धाली निम्नवत् है-//एफ. डी. आई से भला होगा देश…Continue

Started this discussion. Last reply by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी Apr 5, 2013.

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गिरिराज भंडारी commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post कुछ मुक्तक (भाग-२)
"आदरनीय विन्ध्येश्वरी भाई , सभी मुक्तक बेहतरीन रचे हैं , हार्दिक बधाई आपको"
Mar 21
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Mar 20
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Mar 20
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post कुछ मुक्तक (भाग-२)
"आदरणीय मो. आरिफ सर! सादर नमन, अवश्य सर, प्रेम ही सब कुछ है। रचना कघ सराहना के लिये आपका बहुत-बहुत आभार।"
Mar 19
Mohammed Arif commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post कुछ मुक्तक (भाग-२)
"आदरणीय विन्ध्येश्वरी जी आदाब,कितने प्यार ख़ूबसूरत प्यार के रंग में मुक्तक। प्यार ज़िंदगी है, प्यार तिश्नगी है, बंदगी है, प्यार कोई महाजनी हिसाब-क़िताब नहीं है , प्यार वही सच्चा है जिसमें दायित्व हो , जिसमें ज़िम्मेदारी हो,अहसासों की बगिया हरदम महकती…"
Mar 18
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 71 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय मिथिलेश सर! अद्भुत.............. शब्द, भाव, शिल्प, अर्थ-गौरव, पांडित्य, मनस-गाम्भीर्य, दर्शन, सामयिकता आदि सब कुछ मानदंडवत है। रचना और रचयिता दोनों को नमन।"
Mar 18
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Mar 18
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी posted a blog post

कुछ मुक्तक (भाग-२)

मुहब्बत खूबसूरत है, इसे बदनाम मत करना।देना दिल तबीयत से, कभी अहसान मत करना।खुदा की ये नियामत है, नहीं हर एक को मिलती।ये नेमत हाथ लग जाये, कभी इंकार मत करना।मुहब्बत खेल मत समझो, खुदा की ये इबादत है।यही इंसान की फितरत, यही शमसीर कुदरत है।मुहब्बत का परिंदा है यहां, हर शख्स हर जर्रा।दिलों में क्यों भरा नफरत, जहां में क्यों अदावत है।बुरा वो मान लें शायद, करूं इजहार यदि उनसे।गिरा दें मुझको नजरों से, जता दूं प्यार यदि उनसे।अगर वो साथ चलते तो, जहन्नुम भी हंसी होता।खुदा भी मिल गया मुझको, मिले अभिसार यदि…See More
Mar 18
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post सिन्धु सी नयनों वाली (रोला गीत) भाग-२
"आदरणीय लक्ष्मन सर, सादर नमन. हाँ सर कैरियर सम्बन्धी अनिश्चितता और लक्ष्य की प्रतिबद्धता को लेकर काफी व्यस्तता के कारण इस सम्मानित और प्रिय मंच पर आना नही हो पा रहा था. अतः प्रतिभागिता कम ही हो पा रही थी. मैं स्वयं भी आप सब सुधी गुनी जनो के रचना…"
Feb 26
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post सिन्धु सी नयनों वाली (रोला गीत) भाग-२
"आदरणीय गोपाल सर! सादर नमन. रचना की सराहना के लिए आपका आभार. वस्तुतः यह कविता नायिका को संबोधित है. अतः मैंने काव्य हमारी लिखा है. हाँ मात्रा की अधिकता को देखता हूँ कैसे कम कर सकते हैं. सादर"
Feb 26
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Feb 26
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post ताले-चाबी वाले (लघुकथा) / शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"क्या बात सर! गजब . //पास ही बैठा एक मुरझाये से चेहरे वाला यात्री बोला- "पेट पर ताले ही नहीं लगाते साहब.... लोग तो हमारी इज़्ज़त-आबरू वाले ताले 'तोड़ते' भी हैं, न उमर देखते और न ही धरम! चाबी नई हो, पुरानी हो, या भले ही जंग लगी हुई हो,…"
Feb 26
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी commented on Ganga Dhar Sharma 'Hindustan''s blog post ग़ज़ल..गले में झूलते बाँहों के नर्म हार की बात।
"बहुत खूब सुन्दर ग़ज़ल बधाई"
Feb 26
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी commented on रामबली गुप्ता's blog post दीपक सा उजियार करोगे-रामबली गुप्ता
" सुन्दर भाव अभिव्यक्ति. बधाई स्वीकार करें."
Feb 26
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post सिन्धु सी नयनों वाली (रोला गीत) भाग-२
"आदरणीय विजय निकोर सर आपका हार्दि‍क आभार"
Feb 24

Profile Information

Gender
Male
City State
उत्तर प्रदेश
Native Place
बभनान
Profession
शोध छात्र ( जे. आर. एफ. - भूगोल , रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर मध्यप्रदेश, भारत)
About me
ईश्वर महान है। वह कभी गलत नहीं करता इसलिये उसके विधान में विश्वास करता हूं।

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कुछ मुक्तक (भाग-२)

मुहब्बत खूबसूरत है, इसे बदनाम मत करना।

देना दिल तबीयत से, कभी अहसान मत करना।

खुदा की ये नियामत है, नहीं हर एक को मिलती।

ये नेमत हाथ लग जाये, कभी इंकार मत करना।



मुहब्बत खेल मत समझो, खुदा की ये इबादत है।

यही इंसान की फितरत, यही शमसीर कुदरत है।

मुहब्बत का परिंदा है यहां, हर शख्स हर जर्रा।

दिलों में क्यों भरा नफरत, जहां में क्यों अदावत है।



बुरा वो मान लें शायद, करूं इजहार यदि उनसे।

गिरा दें मुझको नजरों से, जता दूं प्यार यदि उनसे।

अगर वो… Continue

Posted on March 18, 2017 at 7:44pm — 3 Comments

कुछ मुक्तक

हमारे पीछे तुम आयीं, तुम्हारे पीछे हम भागे।

न बोलूं मैं तेरे आगे, न बोलो तुम मेरे आगे।

जुबां खामोश है लेकिन, निगाहें बोल देती हैं।

हम भी रात भर रोये, तुम भी रात भर जागे।



हम भी मुस्कुराते हैं, तुम भी मुस्कुराते हो।

सबसे हम बताते हैं, सबसे तुम बताते हो।

लगा ये रोग कैसा है, हमारे दिल को ऐ जाना।

तुमसे हम छुपाते हैं, हमसे तुम छुपाते हो।



तुम्हारी भावनाओं को, समझता हूं मगर चुप हूं।

सदा खामोश लब की मैं, सुनता हूं मगर चुप हूं।

इशारों ही… Continue

Posted on February 22, 2017 at 11:29am — 2 Comments

माता - पिता ( रोला गीत )

पिता धरा की शक्ति, धारणा के वाहक हैं।

माता धरा समान, सृष्टि की संचालक हैं।

दिया आपने जन्म, न उतरे ऋण की थाती।

मात- पिता गुणगान, आज ये जिह्वा गाती।

पिता धरातल ठोस, और मां ममता धारा।

पिता स्वयं वट वृक्ष, छांव मां ने पैसारा।

हम सब फल रसदार, मिष्‍ठता उनसे आती।

मात- पिता गुणगान, आज ये जिह्वा गाती।…

Continue

Posted on February 11, 2017 at 3:08pm — 8 Comments

सिन्धु सी नयनों वाली (रोला गीत) भाग-२

लिपट चंद्रिका चंद्र, करें वे प्रणय परस्पर।

निरखें उन्हें चकोर, भाग्य को कोसें सत्वर।।

हाय रूप सुकुमार, कंचु अरुणाभा वाली।

स्वर्ग परी समरूप, सिन्धु सी नयनों वाली॥



व्याकुल हुए चकोर, मेघ चंदा को ढक ले।

रसधर सुन्दर अधर, हृदय कहता है छू ले।।

सीमा अपनी जान, लगे सब रीता खाली।

स्वर्ग परी समरूप, सिन्धु सी नयनों वाली॥



रहे उनीदे नैन, सजग अब निरखे उनको।

देख देख हरषाय, तृप्त करते निज मन को।।

हुए अधूरे आप, नहीं वह मिलने वाली।

स्वर्ग परी…

Continue

Posted on November 28, 2016 at 10:30pm — 8 Comments

Comment Wall (13 comments)

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At 11:54am on August 20, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी जी, 

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 12:34pm on May 3, 2013, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

सादर धन्यवाद 

स्नेही विनय जी 

आपने अपने व्यस्त समय से मुझे मार्गदर्शन किया. काफी विस्त्रत जानकारी दी. निराशा थी. प्रोत्साहन मिला .स्नेह बनाये रखिये. 

At 7:35pm on April 14, 2013, Kedia Chhirag said…

प्रिय बन्धु,आपका आभार किन शब्दों में व्यक्त करूँ ...शब्द नहीं हैं...आपने मुझको इस साईट से परिचित करवाकर मेरे लिए ज्ञान का महासागर समक्ष कर दिया है ....अब यह पूरी तरह मेरे ऊपर निर्भर है की मैं इस महासागर की कितनी गहराइयों में उतरकर अपने लिए ज्ञान के मोती चुनूँ...मेरा पूरा प्रयास रहेगा की हमेशा आप सबके स्नेहाशीष से आपकी अपेक्षाओं को पूरा कर सकने में समर्थ हो पाऊं .......अत्यंत आभार ....ह्रदय से ........

At 3:15pm on April 10, 2013, manoj shukla said…
आभार भाईसाहब त्रिपाठी जी
At 5:47pm on March 7, 2013, mrs manjari pandey said…

आदरणीय विन्ध्येश्वरी प्रसाद जी

 कल बहुतों का कल ले लेता .

कल को छीन  विकल कर देता।

पूरी रचना अच्छी लगी।

 

At 11:54pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 5:44pm on August 20, 2012, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…
आदरणीय विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठीजी, आपके जन्म दिन पर हार्दिक शुभकामनाए गुरुवर
इश्वर करे आप नयी उंचाइयां छुए और परिवार समाज और देश के विकास में योगदान करे |
हमारा आपका सदव्यवहार बना रहे  |
At 9:04am on April 29, 2012, Sanjay Mishra 'Habib' said…

प्रिय भाई विन्ध्येश्वरी जी, आपकी सहृदय संवेदनाओं से बड़ा संबल मिला है...

सादर नमन।

At 8:10pm on April 19, 2012, राकेश त्रिपाठी 'बस्तीवी' said…

Bhai Tripathi ji, Hamari Mitra mandali me aapka khule dil se svagat hai.

At 12:51pm on April 1, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

आदरणीय , श्री त्रिपाठी  जी.

सादर अभिवादन.
मैं सीखने आया हूँ. मार्गदर्शन और स्नेह अपेक्षित है. 
धन्यवाद.  स्नेह बनाये रखियेगा.
 
 
 

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