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विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's Page

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डॉ. नमन दत्त and विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी are now friends
8 hours ago
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"आदरणीय डॉ. साहब सभी शेर सवा शेर हैं।कथ्य,शिल्प,भाव सभी निहायत ही सम्प्रेष्य हैं।इस शेर पर विशेष बधाई- '''सींचा था जिस चमन को बहुत अपने खून से। अब उस चमन के फूल के हकदार हम नहीं॥''' क्या ग्लोबल बात कहा आपने सर।"
Monday
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"माजी को याद करना मुनासिब सही मगर। झांसी से जो उठी थी वो दीवार हम नहीं॥ वाह कमाल का शेर है अविनाश सर दिली मुबारकबाद।"
Monday
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"आदरणीय अविनाश सर जी बहुत ही उम्दा कहन है।सादर बधाई। पर एक जगह कुछ शंका है-ये '''कहीं और नहीं''' में कहीं कुछ दोष तो नहीं है।मैं बहुत ज्यादा कंफर्म नहीं हूं,उर्दू गजल में पंक्ति के अंत में ऐसा होने से शायद साम्य ध्वनि…"
Monday
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"आदित्य सर आपकी होशियारी में कोई कमी तो है ही नहीं।रही बात गद्दारी की,आपने कोई गद्दारी नहीं किया है क्योंकि गजल के साथ आपने पूरा न्याय किया है।अच्छी गजल के लिए बधाई।"
Monday
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"टंकण दोष है गुरुदेव मैं अब भी 'नहीं समझ रहा हूं।' ये देशज शब्द किस क्षेत्र से सम्बंधित है।बताने की कृपा करें। सादर।"
Monday
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"गुरुदेव! सुक्लान? पहली बार सुन रहा हूं ये शब्द और वो भी समझ से परे।मतलब अर्थ नहीं समझ पा रही हूं।"
Monday
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"गुरुदेव प्रणाम! सभी शेर उम्दा हैं।इस कहन पर दिली मुबारकबाद। ''दुश्वारियां खुमार सी तारी मजाज पे। हर वक्त है मलाल कि बाजार हम नहीं॥'' इस शेर का अर्थ मैं कुछ समझ नहीं पाया। ''मासूमियत दुलार व चाहत नकार कर। जो बेटियों पे…"
Monday
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"सुभान अल्लाह इसीको तो कमाल कहते हैं। शेर दर शेर गजब ढाया है आपने।"
Monday
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"सूरज को दिया कोई दिखाते नहीं? गुल में खुशुबू कभी भी लगाते नहीं? आप तो खुद गुलो आफताब हैं, वाह कहने से हम खुद को रोक पाते नहीं।"
Monday
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"मजबूरी और खुद्दारी दोनों एक साथ मन को मोह गये साहब।कमाल की गजल है।बधाई"
Monday
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"सुन्दर अर्थापन किया आदरणीय गुरुदेव जी ने और वह भी काकु वक्रोक्ति अंलकार युक्त अर्थ। सादर"
Monday
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"''हमने वतन के वास्ते अपना लहू दिया। उनकी नजर में फिर भी वफादार हम नहीं।'' बिल्कुल सच्चा शेर है। दिल से निकला हुआ लगता है। पूरी गजल के लिए दिली मुबारकबाद कुबूल करें अशफाक सर।"
Monday
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - २३
"कमाल है गुरुदेव कमाल है।गजब के शेर हैं।दिली दाद कुबूल करें।"
Sunday
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Ambarish Srivastava's discussion चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता अंक-१४ में सम्मिलित सभी रचनाएँ एक साथ... in the group चित्र से काव्य तक
"एक जगह सब छंद पढ़े मन मोर हुलाश बहुत अधिकै। सखि भाव रसीले हैं शिल्प सधे सब छंद रहे सब से बढ़िकै॥ किसको हम अतिशय वाह कहें खुद को ही लाज लगे कहिकै। रस सिंधु बहे रस भूमि में आ बस लेव मजा इसमें बुड़िकै॥"
May 23
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी posted a blog post

ईश्वर और बिजूका

क्या ईश्वर एक बिजूका है।जिसकी सत्ता भ्रम या धोखा है॥वेद शास्त्र ग्रंथ कहता है।बिना किये वो सब करता है॥१॥ईश्वर हाथ नहीं दिखता है।कान नहीं फिर भी सुनता है॥पैर नहीं फिर भी चलता है।सब कहते वो बिलामकां है॥२॥फिर यह कहते हर घटवासी।समझ न आये उल्टाबांसी॥यदि वो ही हर घटवासी है।माया मथुरा क्यों काशी है॥३॥गलत सही वो सब लखता है।इसलिये हमें डर रहता है॥कहीं तनिक खतां न हो जाये।वो हमसे खफा न हो जाये॥३॥मोदक का जब भोग लगाते।पर ईश्वर तनिक न खा पाते॥कहते भावों का भूखा है।भाव नहीं तो बस खोखा है॥४॥क्या ऐसे ही नहीं…See More
May 22

Profile Information

Gender
Male
City State
उत्तर प्रदेश
Native Place
बभनान
Profession
अध्यापक
About me
मैं मनुष्य हूं।मुझे मनुष्य होने पर गर्व है।

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विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's Blog

॥ पानी ॥

Posted on May 4, 2012 at 8:47pm 33 Comments

(प्रस्तुत रचना रोला छन्द में आबद्ध है।रोला के प्रत्येक चरण में11-13 पर यति(विराम) के साथ 24-24 मात्रायें होती हैं।चरणान्त में लघु गुरु की विशेष बाध्यता नहीं है।)



रहिमन आये याद,हमें तुम्हारा पानी।

घटा जलस्तर किन्तु,बढ़ा आंखों में पानी॥



मोती चूना और,मनुज सभी गये सूखे।

प्यासी सारी भूमि ,त्राहि-त्राहि जन चीखे॥



पिघल रहा हिमवान,जलधि तल ऊपर आया।

क्षरण परत ओजोन,काल की काली छाया॥



ऑक्सीजन में कमी,वायु में कार्बन भारी।

मलवे से है पटी,प्रदूषित… Continue

क्यों

Posted on April 26, 2012 at 7:00am 21 Comments

गंग नहाये जात हैं,दूर करै तन पाप।

जौ उनका पापी कहौं,क्योंकर हो संताप॥



माँ पत्नी भगिनी चहौं,ममता सेवा प्यार।

बेटी जनकर दुखी क्यों,हो जाते सरकार॥



आशा मन अच्छा करैं,लोग बाग बर्ताव।

क्यों रखते कुछ एक से,निज मन में दुर्भाव॥



अनुशासन जन में रहे,बना देश कानून।

क्यों होता है तब यहां,रोज कत्ल कानून॥



अंधे से नहि पूछते,बुरे भले की बात।

अंधा तो कानून भी,शरण चले क्यों जात॥



ललचाइ अंखियां लखै,तिरिया बेटी आन।

जौ कोई इनकै… Continue

विकास कहां रुकेगा

Posted on April 12, 2012 at 8:00pm 13 Comments

(प्रस्तुत रचना 'सार' छन्द पर आधारित है।इसके अनुसार छन्द के प्रत्येक चरण में 28 मात्रायें होती हैं,16वीं तथा 12वीं मात्रा पर यति होती है।चरणान्त में दो गुरु अवश्य होने चाहिए।)



जीवन का आधार कहां है,आफत सिर पर भारी।

अपने में ही लिप्त घूमती,पागल दुनिया सारी॥

समय नहीं है पास किसी के,जीवन भागा दौड़ी।

प्यार-व्यार का रिश्ता झूठा,नफरत दरिया चौड़ी॥

कहां बची है वही मनुजता,मानव कहां पुराना।

और अधिक विकसित है दुनिया,मार्डन हुआ जमाना॥

वृद्धों का सम्मान कहां है,छूकर चरन… Continue

यह भी अपना देश है

Posted on April 10, 2012 at 9:30pm 12 Comments

(प्रस्तुत पंक्तियों को उल्लाला छंद में लिखने का प्रयास किया गया है,इसके प्रत्येक चरण में 13-13मात्रायें होती हैं।लघु-गुरू का कोई विशेष नियम नहीं होता,किन्तु 11वीं मात्रा लघु होनी चाहिए)



भूखी आंतों के लिए,

सेंसेक्स बस बवाल है।

तीसमार खां कह रहे,

मार्केट में उछाल है॥



जेब नहीं कौड़ी फुटी,

जनता सब बेहाल है।

भारत विकसित हो रहा,

वाह!बढ़िया कमाल है॥



कर्ज बोझ सिर पे लदा,

कृषक हुआ बदहाल है।

हम विकसित हो जायगें,

यह कोरा भौकाल…

Continue

Comment Wall (6 comments)

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At 9:04am on April 29, 2012, Sanjay Mishra 'Habib' said…

प्रिय भाई विन्ध्येश्वरी जी, आपकी सहृदय संवेदनाओं से बड़ा संबल मिला है...

सादर नमन।

At 8:10pm on April 19, 2012, राकेश त्रिपाठी 'बस्तीवी' said…

Bhai Tripathi ji, Hamari Mitra mandali me aapka khule dil se svagat hai.

At 12:51pm on April 1, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

आदरणीय , श्री त्रिपाठी  जी.

सादर अभिवादन.
मैं सीखने आया हूँ. मार्गदर्शन और स्नेह अपेक्षित है. 
धन्यवाद.  स्नेह बनाये रखियेगा.
At 11:24am on March 28, 2012, MAHIMA SHREE said…
प्रिय विन्धेस्वरी भाई ,
आपको प्रतियोगिता में सफल होने के लिए बहुत-२ बधाइयाँ और ढेर सारी शुभकामनाये...
At 9:14pm on March 18, 2012, JAWAHAR LAL SINGH said…

बहुत  ही  सुन्दर  मोतियाँ  आपने  सीप  से  एकत्रित  की  है! बहुत  ही  सुन्दर!  कम  शब्द,  अर्थ  अधिक, मार्मिक, आत्मिक.

At 7:54pm on February 15, 2012, Admin said…

 
 
 

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