For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गनेश जी "बागी")

विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी
  • 21, Male
  • बभनान-गोण्डा-उ.प्र
  • India
Share Twitter

विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's Friends

  • गिरिराज भंडारी
  • Kedia Chhirag
  • ASHISH KUMAAR TRIVEDI
  • Kewal Prasad
  • डॉ नूतन डिमरी गैरोला
  • Savitri Rathore
  • बृजेश नीरज
  • वेदिका
  • आशीष नैथानी 'सलिल'
  • पीयूष द्विवेदी भारत
  • saroj sharma
  • seema agrawal
  • Rekha Joshi
  • डॉ. सूर्या बाली "सूरज"
  • kavita sinha gupta

विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's Groups

विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's Discussions

हिन्दी छंद रचनाओं में अंग्रेजी के शब्दों के प्रयोग की समस्या
17 Replies

हम नौसिखुओं को हिन्दी की छंदोबद्ध रचनाओं में अंग्रेजी के कुछ शब्दों के प्रयोग में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।यथा मेरे द्वारा रचित एक दोहे की अर्द्धाली निम्नवत् है-//एफ. डी. आई से भला होगा देश…Continue

Started this discussion. Last reply by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी Apr 5, 2013.

RSS

Loading… Loading feed

 

विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's Page

Latest Activity

dilbag virk and विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी are now friends
Oct 23
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी commented on Arun Sri's blog post बिल्ली सी कविताएँ --- अरुण श्री !
"आदरणीय अरुण भाई जी! सुंदर रचना। आपके काव्य बिम्ब और उनकी अपील हृदय को छू रहे हैं। यही किसी रचना और रचनाकार की सफलता है। बधाई भाई।"
Aug 3
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी commented on Shubhranshu Pandey's blog post गंगा के नाले (लघु कथा) // --शुभ्रांशु पाण्डॆय
"आदरणीय शुभ्रांशु भाई जी! अत्यंत मर्मस्पर्शी लघुकथा । निस्संदेह प्रायः बच्चे हम बड़ों से ही बुराई सीखते हैं।"
Aug 3
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 43
"सही कहा आपने। बेहतरीन दोहावली। बधाई आदरणीय।"
May 11
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 43
"भाई कृष्न सिंह जी! एक उम्दा प्रस्तुति। किंतु कहीं कहीं प्रवाह रूक रहा है।"
May 11
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 43
"आदरणीय रमेश जी! अति सुन्दर भाव प्रवण छंद किन्तु रचना कर्म के स्तर पर अभी इस रचना पर और श्रम की आवश्यकता है।"
May 11
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 43
"अति सुन्दर ओजस्वित गीत। रोम रोम रोमांचित हो उठा। सत्य है आज एक सिंह गर्जना की महती आवश्यकता है।"
May 11
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 43
"नहीं आदरणीय मेरा मंतव्य यह नहीं था कि सुभाष चंद्र बोस जी को यह सम्बोधन आपने दिया। बल्कि मैं यह कहना चाहता था कि हम जैसे लोग नेता जी का केवल एक अर्थ लेते आज के आधुनिक नेता लुटेरे हत्यारे घोटालेबाज। आपने नेता जी शब्द को इस अर्थ में नया आयाम दिया है कि…"
May 11
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 43
"आदरणीय सौरभ सर जी! सुंदर गीत। नेता जी शब्द को सही अर्थ यहीं प्राप्त हुआ है। आप द्वारा नया आयाम मिला है नेता शब्द को।"
May 10
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 43
"आदरणीय नादिर खान जी! एक बेहतरीन गजल बधाई"
May 10
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 43
"आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद! उत्तम कुंडलिया छंद। लेकिन रचनाकर्म के स्तर अभी और प्रयास की आवश्यकता है।"
May 10
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 43
"आदरणीय सुशील सरना जी! अच्छी अतुकांत रचना है। बधाई।"
May 10
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 43
"आरणीया कल्पना दीदी! अतिसुंदर गजल बधाई। आपने कई समकालीन मुद्दों को भी रेखांकित किया है। बधाई"
May 10
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 43
"सुन्दर रचना आदरणीय रक्ताले जी बधाई"
May 10
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 43
"आदरणीय सत्यनारायण जी! बहुत सुन्दर कुंडलिया छंद। नेता कैसा होना चाहिए बखूबी चित्रित किया है। बधाई"
May 10
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 43
"वाह आदरणीय अरुण जी! गजब गजब । शानदार वीर छंद बधाई"
May 10

Profile Information

Gender
Male
City State
उत्तर प्रदेश
Native Place
बभनान
Profession
सहायक प्रवक्ता-भूगोल {आचार्य नरेंद्र देव किसान स्नातकोत्तर महाविद्यालय बभनान-गोण्डा (उ.प्र. भारत)}
About me
ईश्वर महान है। वह कभी गलत नहीं करता इसलिये उसके विधान में विश्वास करो।

विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's Photos

Loading…
  • Add Photos
  • View All

विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's Blog

संसद की गरिमा घटी (कुंडलिया छंद)

चुन गुण्डे संसद गये, करते हैं उत्पात।

लोकतंत्र के माथ पर, यह कलंक की बात॥

यह कलंक की बात, लात घूँसा चलता है।

मिर्च पाउडर फेंक, नोंच माइक देता है॥

देना हमें जवाब, आज गुण्डों को सुन।

भेजें सज्जन लोग, देश हित में हम चुन॥



भारत के इतिहास में, है काला अध्याय।

संसद में फेंका गया, जूता चप्पल हाय॥

जूता चप्पल हाय, नहीं क्यों उनको मारे।

चुनकर नमक हराम, गये संसद जो सारे॥

करते हैं खिलवाड़, तनिक न आये लज्जत।

पापी पामर नीच, कलंकित करता… Continue

Posted on February 15, 2014 at 12:56pm — 7 Comments

दुख और जीवन (सवैया गीत)

इस जीवन में दुख ही दुख है, गृह त्याग चलें वन गौतम नाई।

फिर भी संग छूट नहीं दुख से, घर बैठ सुता सुत नारि रोवाई॥

मन सूख रहा जग आतप से, अब नैन वरीष गये हरियाई।

बहु भांति विचार किया हमने, पथ कंटक झेल रहो जग भाई॥



यदि तृप्त नहीं मन तो भटके, जब तोष हुआ दुख तो मिटता है।

पर तृप्त करें किस भांति इसे, यह तो बिन बात के भी हठता है॥

हठवान बड़ा मन मान नहीं, भगवान कहो तुम ही समझाई।

पद पंकज में जब ध्यान लगे, तब छोड़ रहा मन है हठताई॥



मन की हठता सुन है तब ही, जब… Continue

Posted on February 7, 2014 at 7:52pm — 13 Comments

गणतंत्र दिवस (कुंडलिया छंद)

गणतंत्र दिवस शुभकामना, प्रेषित है श्रीमान।
झंडा ऊँचा नित रहे, बढ़े देश का मान॥
बढ़े देश का मान, निरंतर उन्नत भारत।
हर जन हो खुशहाल, नहीं हो कोई आरत॥
आम व्यक्ति गणराज, किन्तु तंत्र में है विवश।
फिर कैसा गणतंत्र, और ये गणतंत्र दिवस॥

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on January 26, 2014 at 2:48pm — 8 Comments

चिंता के कुछ दोहे

नैतिकता के पतन से, फैला कंस प्रभाव॥
मात- पिता सम्मान नहि, नस नस में दुर्भाव॥

पश्चिम संस्कृति जी रहे, हम भूले निज मान।
कहते हम संतान कपि, जबकि हैं हनुमान॥

निज गौरव को भूलकर, बनते मार्डन लोग।
ये भी क्या मार्डन हुए, पाल रहे बस रोग॥

अपने घर में त्यक्त है, वैदिक ज्ञान महान।
महा मूढ़ मतिमंद हम, करते अन्य बखान॥

लौटें अपने मूल को, जो है सबका मूल।
पोषित होता विश्व है, सार बात मत भूल॥

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on January 22, 2014 at 12:30pm — 16 Comments

Comment Wall (12 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 12:34pm on May 3, 2013, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

सादर धन्यवाद 

स्नेही विनय जी 

आपने अपने व्यस्त समय से मुझे मार्गदर्शन किया. काफी विस्त्रत जानकारी दी. निराशा थी. प्रोत्साहन मिला .स्नेह बनाये रखिये. 

At 7:35pm on April 14, 2013, Kedia Chhirag said…

प्रिय बन्धु,आपका आभार किन शब्दों में व्यक्त करूँ ...शब्द नहीं हैं...आपने मुझको इस साईट से परिचित करवाकर मेरे लिए ज्ञान का महासागर समक्ष कर दिया है ....अब यह पूरी तरह मेरे ऊपर निर्भर है की मैं इस महासागर की कितनी गहराइयों में उतरकर अपने लिए ज्ञान के मोती चुनूँ...मेरा पूरा प्रयास रहेगा की हमेशा आप सबके स्नेहाशीष से आपकी अपेक्षाओं को पूरा कर सकने में समर्थ हो पाऊं .......अत्यंत आभार ....ह्रदय से ........

At 3:15pm on April 10, 2013, manoj shukla said…
आभार भाईसाहब त्रिपाठी जी
At 5:47pm on March 7, 2013, mrs manjari pandey said…

आदरणीय विन्ध्येश्वरी प्रसाद जी

 कल बहुतों का कल ले लेता .

कल को छीन  विकल कर देता।

पूरी रचना अच्छी लगी।

 

At 11:54pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 5:44pm on August 20, 2012, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…
आदरणीय विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठीजी, आपके जन्म दिन पर हार्दिक शुभकामनाए गुरुवर
इश्वर करे आप नयी उंचाइयां छुए और परिवार समाज और देश के विकास में योगदान करे |
हमारा आपका सदव्यवहार बना रहे  |
At 9:04am on April 29, 2012, Sanjay Mishra 'Habib' said…

प्रिय भाई विन्ध्येश्वरी जी, आपकी सहृदय संवेदनाओं से बड़ा संबल मिला है...

सादर नमन।

At 8:10pm on April 19, 2012, राकेश त्रिपाठी 'बस्तीवी' said…

Bhai Tripathi ji, Hamari Mitra mandali me aapka khule dil se svagat hai.

At 12:51pm on April 1, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

आदरणीय , श्री त्रिपाठी  जी.

सादर अभिवादन.
मैं सीखने आया हूँ. मार्गदर्शन और स्नेह अपेक्षित है. 
धन्यवाद.  स्नेह बनाये रखियेगा.
At 11:24am on March 28, 2012, MAHIMA SHREE said…
प्रिय विन्धेस्वरी भाई ,
आपको प्रतियोगिता में सफल होने के लिए बहुत-२ बधाइयाँ और ढेर सारी शुभकामनाये...
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-"OBO" मुफ्त विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

umesh katara posted blog posts
29 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh added a discussion to the group English Literature
Thumbnail

Eyes...the gateway (By Dr. Prachi Singh)

My Eyes-The gateway to cosmos…… Soul from inside the corporal vesselwondering at the gaze of vast…See More
34 minutes ago
Chhaya Shukla commented on Chhaya Shukla's blog post "जी उठा मन"
"आ.sushil sarana जी आत्मीय सराहना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ! सादर नमन"
56 minutes ago
anand murthy posted a blog post

पूजा का वो थाल लगी

साड़ी में जैसे फाल लगीडाली में जैसे डाल लगी मैं भी कुछ खिल जाउंगावो आके जब गाल लगी धीरे से पाती खोल…See More
1 hour ago
Sushil Sarna posted a blog post

क्षणिकाएँ...

क्षणिकाएँ...1.घन गरजे घनघोर तिमिर चहुँ ओर तृण-तृण से तन बहे करके सब कुछ शांत मेह हो गया…See More
1 hour ago
umesh katara commented on umesh katara's blog post जिक्र तेरा भी करूँ,पर कौनसे हक़ से
"शुक्रिया जितेन्द्र गीत साहब"
1 hour ago
umesh katara commented on umesh katara's blog post जिक्र तेरा भी करूँ,पर कौनसे हक़ से
"शुक्रिया गिरिराज भण्डारी जी"
1 hour ago
umesh katara commented on umesh katara's blog post उमेश कटारा-ग़ज़ल
"शुक्रिया Narendrasinh chauhan sahb"
1 hour ago
umesh katara commented on umesh katara's blog post उमेश कटारा-ग़ज़ल
"शुक्रिया निलेश नूर साहब"
1 hour ago
umesh katara commented on umesh katara's blog post उमेश कटारा-ग़ज़ल
"शुक्रिया गिरिराज भण्डारी जी"
1 hour ago
Sushil Sarna commented on Dr. Vijai Shanker's blog post जो प्रिय है -डा० विजय शंकर.
"झूठ और सत्य के दार्शनिक भावों को आपने बड़ी ख़ूबसूरती से इस रचना में चित्रित किया है।  पाठक रचना…"
1 hour ago
Sushil Sarna commented on गिरिराज भंडारी's blog post गज़ल -हर ग़ज़ल में आप ही तो हैं (गिरिराज भंडारी)
"मैं कितनी भी रखूँ दूरी हमेशा पास में हो आप मेरे दिल में बना है उस महल में आप ही तो हैं बहुत खूब…"
2 hours ago

© 2014   Created by Admin.

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service