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विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी
  • 23, Male
  • बभनान-गोण्डा-उ.प्र
  • India
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विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's Discussions

हिन्दी छंद रचनाओं में अंग्रेजी के शब्दों के प्रयोग की समस्या
17 Replies

हम नौसिखुओं को हिन्दी की छंदोबद्ध रचनाओं में अंग्रेजी के कुछ शब्दों के प्रयोग में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।यथा मेरे द्वारा रचित एक दोहे की अर्द्धाली निम्नवत् है-//एफ. डी. आई से भला होगा देश…Continue

Started this discussion. Last reply by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी Apr 5, 2013.

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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post सिन्धु सी नयनों वाली (रोला गीत) भाग-२
"जिसमें ढूढ़ा काव्य, नहीं वह काव्य हमारी।------------काव्य हमारी या काव्य हमारा ---- निरभ्र रूप आकाश में एक मात्रा अधिक हुयी है .  . आपकी रचना  अछ्ही है  तत्सम शब्दों का बेहतरीन उपयोग हुआ है .   सादर ."
yesterday
vijay nikore commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post सिन्धु सी नयनों वाली (रोला गीत) भाग-२
"आपकी रचना पढ़ कर आनन्द आया। भधाई।"
Friday
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post सिन्धु सी नयनों वाली (रोला गीत) भाग-२
"सुंदर सटीक और मनोहारी रोला छंद में गीत रचना के लिए हार्दिक बधाई श्री विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी जी | बहुत समय बाद आपकी रचना पढ़कर अच्छा लगा - जिसमें ढूढ़ा काव्य, नहीं वह काव्य हमारी।जहां काव्य मौजूद, पहुंच न दृष्टि हमारी।नहीं उभरते भाव, शब्द…"
Thursday
Samar kabeer commented on विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी's blog post सिन्धु सी नयनों वाली (रोला गीत) भाग-२
"जनाब विंधियेश्वरी प्रसाद त्रिपाठी जी आदाब,अच्छा लगा आपका रोला गीत,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Wednesday
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी posted blog posts
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विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-20 (विषय: तस्वीर का दूसरा रुख़)
"आदरणीया अपर्णा जी! लघुकथा कुछ लम्बीकथा हो गयी। तथ्य सुन्दर है पक कथ्य पर और काम होना चाहिये था। फिल्हाल सद्प्रयास के लिये बधाई।"
Tuesday
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-20 (विषय: तस्वीर का दूसरा रुख़)
"आदरणीया निधि जी! कुछ पल्ले नहीं पड़ रहा है।"
Tuesday
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-20 (विषय: तस्वीर का दूसरा रुख़)
"आदरणीया सीमा दी! एक भाई के भातृत्व का बखूबी चित्रण हुआ है। बधाई। कुछ कसावट की कमी अखर रही है।"
Tuesday
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-20 (विषय: तस्वीर का दूसरा रुख़)
"वाह आदरणीय विजय सर! कम शब्दों में लघुकथा बहुत कुछ कह रही है। अद्भुत अर्थ-लाघव। बधाई।"
Tuesday
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-20 (विषय: तस्वीर का दूसरा रुख़)
"आदरणीय टी. आर. शुक्ला जी! यद्यपि लघुकथा अच्छी बन पड़ी है, जिसके लिये आपको बधाई, तथापि मुझे लगता है कि यह सपाट बयानी की शिकार हो गयी है।"
Tuesday
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-20 (विषय: तस्वीर का दूसरा रुख़)
"आदरणीय मनन जी! अच्छा प्रयास है लघुकथा पर। देशभक्ति की चासनी भी अच्छी है। बधाई।"
Tuesday
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-20 (विषय: तस्वीर का दूसरा रुख़)
"आदरणीय तस्दीक सर! अच्छी लघुकथा बन पड़ी है। बधाई"
Tuesday
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-20 (विषय: तस्वीर का दूसरा रुख़)
"आदरणीया शशि जी! अति मार्मिक, हृदय विदारक। बधाई नहीं बस मौन............."
Tuesday
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-20 (विषय: तस्वीर का दूसरा रुख़)
"वाह वाह आदरणीय सुधीर जी! लघुकथा के माध्यम से अच्छा आदर्श उपस्थित किया है आपने। बधाई।"
Tuesday
विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-20 (विषय: तस्वीर का दूसरा रुख़)
"आदरणीया सीमा जी! इस लघुकथा में बहुत कुछ अव्यक्त सा रह गया है। रचना समझने के लिये तीन बार पढ़ना पड़ा।"
Tuesday

Profile Information

Gender
Male
City State
उत्तर प्रदेश
Native Place
बभनान
Profession
शोध छात्र ( जे. आर. एफ. - भूगोल , रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर मध्यप्रदेश, भारत)
About me
ईश्वर महान है। वह कभी गलत नहीं करता इसलिये उसके विधान में विश्वास करता हूं।

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सिन्धु सी नयनों वाली (रोला गीत) भाग-२

लिपट चंद्रिका चंद्र, करें वे प्रणय परस्पर।

निरखें उन्हें चकोर, भाग्य को कोसें सत्वर।।

हाय रूप सुकुमार, कंचु अरुणाभा वाली।

स्वर्ग परी समरूप, सिन्धु सी नयनों वाली॥



व्याकुल हुए चकोर, मेघ चंदा को ढक ले।

रसधर सुन्दर अधर, हृदय कहता है छू ले।।

सीमा अपनी जान, लगे सब रीता खाली।

स्वर्ग परी समरूप, सिन्धु सी नयनों वाली॥



रहे उनीदे नैन, सजग अब निरखे उनको।

देख देख हरषाय, तृप्त करते निज मन को।।

हुए अधूरे आप, नहीं वह मिलने वाली।

स्वर्ग परी…

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Posted on November 28, 2016 at 10:30pm — 4 Comments

संसद की गरिमा घटी (कुंडलिया छंद)

चुन गुण्डे संसद गये, करते हैं उत्पात।

लोकतंत्र के माथ पर, यह कलंक की बात॥

यह कलंक की बात, लात घूँसा चलता है।

मिर्च पाउडर फेंक, नोंच माइक देता है॥

देना हमें जवाब, आज गुण्डों को सुन।

भेजें सज्जन लोग, देश हित में हम चुन॥



भारत के इतिहास में, है काला अध्याय।

संसद में फेंका गया, जूता चप्पल हाय॥

जूता चप्पल हाय, नहीं क्यों उनको मारे।

चुनकर नमक हराम, गये संसद जो सारे॥

करते हैं खिलवाड़, तनिक न आये लज्जत।

पापी पामर नीच, कलंकित करता… Continue

Posted on February 15, 2014 at 12:56pm — 7 Comments

दुख और जीवन (सवैया गीत)

इस जीवन में दुख ही दुख है, गृह त्याग चलें वन गौतम नाई।

फिर भी संग छूट नहीं दुख से, घर बैठ सुता सुत नारि रोवाई॥

मन सूख रहा जग आतप से, अब नैन वरीष गये हरियाई।

बहु भांति विचार किया हमने, पथ कंटक झेल रहो जग भाई॥



यदि तृप्त नहीं मन तो भटके, जब तोष हुआ दुख तो मिटता है।

पर तृप्त करें किस भांति इसे, यह तो बिन बात के भी हठता है॥

हठवान बड़ा मन मान नहीं, भगवान कहो तुम ही समझाई।

पद पंकज में जब ध्यान लगे, तब छोड़ रहा मन है हठताई॥



मन की हठता सुन है तब ही, जब… Continue

Posted on February 7, 2014 at 7:52pm — 13 Comments

गणतंत्र दिवस (कुंडलिया छंद)

गणतंत्र दिवस शुभकामना, प्रेषित है श्रीमान।
झंडा ऊँचा नित रहे, बढ़े देश का मान॥
बढ़े देश का मान, निरंतर उन्नत भारत।
हर जन हो खुशहाल, नहीं हो कोई आरत॥
आम व्यक्ति गणराज, किन्तु तंत्र में है विवश।
फिर कैसा गणतंत्र, और ये गणतंत्र दिवस॥

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on January 26, 2014 at 2:48pm — 8 Comments

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At 11:54am on August 20, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी जी, 

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 12:34pm on May 3, 2013, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

सादर धन्यवाद 

स्नेही विनय जी 

आपने अपने व्यस्त समय से मुझे मार्गदर्शन किया. काफी विस्त्रत जानकारी दी. निराशा थी. प्रोत्साहन मिला .स्नेह बनाये रखिये. 

At 7:35pm on April 14, 2013, Kedia Chhirag said…

प्रिय बन्धु,आपका आभार किन शब्दों में व्यक्त करूँ ...शब्द नहीं हैं...आपने मुझको इस साईट से परिचित करवाकर मेरे लिए ज्ञान का महासागर समक्ष कर दिया है ....अब यह पूरी तरह मेरे ऊपर निर्भर है की मैं इस महासागर की कितनी गहराइयों में उतरकर अपने लिए ज्ञान के मोती चुनूँ...मेरा पूरा प्रयास रहेगा की हमेशा आप सबके स्नेहाशीष से आपकी अपेक्षाओं को पूरा कर सकने में समर्थ हो पाऊं .......अत्यंत आभार ....ह्रदय से ........

At 3:15pm on April 10, 2013, manoj shukla said…
आभार भाईसाहब त्रिपाठी जी
At 5:47pm on March 7, 2013, mrs manjari pandey said…

आदरणीय विन्ध्येश्वरी प्रसाद जी

 कल बहुतों का कल ले लेता .

कल को छीन  विकल कर देता।

पूरी रचना अच्छी लगी।

 

At 11:54pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 5:44pm on August 20, 2012, लक्ष्मण रामानुज लडीवाला said…
आदरणीय विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठीजी, आपके जन्म दिन पर हार्दिक शुभकामनाए गुरुवर
इश्वर करे आप नयी उंचाइयां छुए और परिवार समाज और देश के विकास में योगदान करे |
हमारा आपका सदव्यवहार बना रहे  |
At 9:04am on April 29, 2012, Sanjay Mishra 'Habib' said…

प्रिय भाई विन्ध्येश्वरी जी, आपकी सहृदय संवेदनाओं से बड़ा संबल मिला है...

सादर नमन।

At 8:10pm on April 19, 2012, राकेश त्रिपाठी 'बस्तीवी' said…

Bhai Tripathi ji, Hamari Mitra mandali me aapka khule dil se svagat hai.

At 12:51pm on April 1, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

आदरणीय , श्री त्रिपाठी  जी.

सादर अभिवादन.
मैं सीखने आया हूँ. मार्गदर्शन और स्नेह अपेक्षित है. 
धन्यवाद.  स्नेह बनाये रखियेगा.
 
 
 

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"आदरणीय वासुदेव अग्रवाल जी सादर नमन!यापको प्रयास पसन्द आया ,बहुत बहुत आत्भर पसन्दगी के लिए!"
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