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विन्ध्येश्वरी त्रिपाठी विनय
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विन्ध्येश्वरी त्रिपाठी विनय's Discussions

हिन्दी छंद रचनाओं में अंग्रेजी के शब्दों के प्रयोग की समस्या

Started this discussion. Last reply by विन्ध्येश्वरी त्रिपाठी विनय Apr 5. 17 Replies

हम नौसिखुओं को हिन्दी की छंदोबद्ध रचनाओं में अंग्रेजी के कुछ शब्दों के प्रयोग में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।यथा मेरे द्वारा रचित एक दोहे की अर्द्धाली निम्नवत् है-//एफ. डी. आई से भला होगा देश…Continue

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विन्ध्येश्वरी त्रिपाठी विनय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा-उत्सव" अंक - 31
"आदरणीय राक्ताले सर जी! दोनों ही कुंडलिया बहुत ही सुन्दर हैं। बधाई। //हर प्राणी मुँह बाय, मनुज पर मदिरा पीता ||// इस पंक्ति का भाव क्या यह है- "प्रत्येक जीव के पास मुँह है लेकिन केवल मनुष्य ही मदिरा पीता है।" इसमें //बाय// शब्द मुझे…"
May 10

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विन्ध्येश्वरी त्रिपाठी विनय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा-उत्सव" अंक - 31
"सुन्दर वीर छंद रच डाला, पुलकित हृदय हमारा आज। सिद्ध हस्त होते छंदो पर, मेहनत ही है इसका राज॥ आंखों देखी कहा आपने, हाला होती बहुत खराब। जाने कितने परिवारों को, लेकर डूबी बुरी शराब॥"
May 10

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विन्ध्येश्वरी त्रिपाठी विनय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा-उत्सव" अंक - 31
"आदरणीय गुरुदेव! सुन्दर क्षणिकायें बधाई।"
May 10

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विन्ध्येश्वरी त्रिपाठी विनय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा-उत्सव" अंक - 31
"आदरणीया कुंती जी! यह रचना इस आयोजन की कुछेक अच्छी प्रस्तुतियों में से एक होगी। बहुत ही बिम्बात्मक,श्लिष्ट और सकारात्मक रचना है बहुत बहुत बधाई। शिल्प के अभिनव प्रयोग ने मंत्रमुग्ध कर दिया है।"
May 10

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विन्ध्येश्वरी त्रिपाठी विनय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा-उत्सव" अंक - 31
"आदरणीय आपने मेरी तुच्छी सी शंका पर समय दिया, आभारी हूँ। मैंने परिधि में होने न होने पर शंका नहीं किया है, मैं अपने तईं अपनी कमजोरी प्रकट कर रहा हूँ। सीमा दीदी तथा प्राची दीदी के आलेख को पढ़ा था तो वहीं से मन में जिज्ञासा उठी। और आपने भले ही पहला…"
May 10

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विन्ध्येश्वरी त्रिपाठी विनय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा-उत्सव" अंक - 31
"वाह! आदरणीय अलबेला जी वाह! मुक्त कंठ प्रशंसा करता हूँ इस घनाक्षरी की। बधाई। आनन्दातिरेक हृदय गदगद है।"
May 10

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विन्ध्येश्वरी त्रिपाठी विनय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा-उत्सव" अंक - 31
"सुन्दर रचना आदरणीय बागी जी! बधाई स्वीकार करें। एक शंका है- नवगीत में नव बिम्बों का प्रयोग किया जाता है, इसमें मैं नव बिम्बों को ढूढ़ नहीं पा रहा हूँ। कृपया स्पष्ट करने की कृपा करें। क्या नवगीत यह प्रयोग आवश्यक ही है?"
May 10

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विन्ध्येश्वरी त्रिपाठी विनय replied to Admin's discussion "ओबीओ विचार गोष्ठी सह कवि-सम्मलेन एवं मुशायरा" एक प्रस्ताव
"जी गुरुदेव! 1-क्या और भी किसी को लाया जा सकता है? 2-यदि हो सके तो इस सूचना को मुख्य पोस्ट के साथ ही संलग्न कर दिया जाये?"
May 6

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विन्ध्येश्वरी त्रिपाठी विनय replied to Admin's discussion रचनाओं को सम्मानित करने की एक अनूठी पहल @ महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना ( Best Creation of the Month )
"आदरणीया कल्पना रमानी जी! माह की सर्वश्रैष्ठ रचना पुरस्कार के लिये आपको हार्दिक बधाई।"
May 6

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विन्ध्येश्वरी त्रिपाठी विनय left a comment for Er. Ganesh Jee "Bagi"
"आदरणीय बागी जी! आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभाकामनायें, ईश्वर आपको चिरायु करें। हमारे मध्य पूर्ववत् मधुर सम्बंध बना रहे। सादर"
May 4
PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA left a comment for विन्ध्येश्वरी त्रिपाठी विनय
"सादर धन्यवाद  स्नेही विनय जी  आपने अपने व्यस्त समय से मुझे मार्गदर्शन किया. काफी विस्त्रत जानकारी दी. निराशा थी. प्रोत्साहन मिला .स्नेह बनाये रखिये. "
May 3

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विन्ध्येश्वरी त्रिपाठी विनय replied to वीनस केसरी's discussion हिन्दी में अन्य भाषा के प्रचलित शब्दों का सही रख रखाव - वीनस केसरी in the group ग़ज़ल की बातें
"यद्यपि आदरणीय हम लेख से इतर चर्चा करने लगे, यदि आप चाहे तो हम लेख पर चलते हैं।"
May 2

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विन्ध्येश्वरी त्रिपाठी विनय replied to वीनस केसरी's discussion हिन्दी में अन्य भाषा के प्रचलित शब्दों का सही रख रखाव - वीनस केसरी in the group ग़ज़ल की बातें
"//अरबी में भी संस्कृत के शब्दों का मिलना कोई आश्चर्यजनक बात नहीं। इस सन्दर्भ में भी आप कुछ साक्ष्य प्रस्तुत कर सकें तो मैं उस पर अपना विचार प्रस्तुत करने के योग्य हो सकूंगा अन्यथा मेरी जानकारी में संस्कृत का ऐसा कोई शब्द नहीं है जो अरबी मूल भाषा के…"
May 2

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विन्ध्येश्वरी त्रिपाठी विनय replied to वीनस केसरी's discussion हिन्दी में अन्य भाषा के प्रचलित शब्दों का सही रख रखाव - वीनस केसरी in the group ग़ज़ल की बातें
"आदरणीय वीनस जी! चर्चा में पुन: थोड़ी देर बाद आने के लिये क्षमा-प्रार्थी हूँ। //आर्यों के ईरान जाने के बाद वहाँ फारसी का स्वरूप स्पष्ट हुआ और आर्यों के भारत आगमन के १५०० वर्ष बाद १५०० ई पू के आसपास भारत में संस्कृत का स्वरूप स्पष्ट हुआ और १००० ई. में…"
May 2

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विन्ध्येश्वरी त्रिपाठी विनय replied to Admin's discussion एक घोषणा:-महीने का सक्रिय सदस्य (Active Member of the Month)
"आदरणीय ब्रिजेश जी! माह का सबसे अधिक सक्रिय सदस्य चुने जाने पर आपको हार्दिक बधाई"
May 2

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विन्ध्येश्वरी त्रिपाठी विनय replied to Rana Pratap Singh's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा-अंक 34" में प्रस्तुत सभी गज़लें, चिन्हित मिसरों के साथ ...
"हे मेरे प्रभु! यह क्या लाल ही लाल? मुशायरे में मुझे यह आशा थी कि हो सकता है एकाध मिसरा बबह्र हो, तो उसी टिमटिमाते दिये के तले मैं अपने शेष मिसरों को दुरुस्त कर लूँगा, लेकिन परसों यह रक्ताभा देखकर मेरी हिम्मत पस्त हो गयी है।क्योंकि उसी दि से मैं…"
May 2

Profile Information

Gender
Male
City State
उत्तर प्रदेश
Native Place
बभनान
Profession
सहायक प्रवक्ता-भूगोल {आचार्य नरेंद्र देव किसान स्नातकोत्तर महाविद्यालय बभनान-गोण्डा (उ.प्र. भारत)}
About me
मैं मनुष्य हूं।मुझे मनुष्य होने पर गर्व है।

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विन्ध्येश्वरी त्रिपाठी विनय's Blog

आखिर हम क्या हो गये ( कविता )

Posted on April 20, 2013 at 8:08pm 11 Comments

बचपन में हम कागज की नाव बनाया करते थे

पानी में उसे तैराया करते थे

कागज के हेलिकाप्टर उड़ाया करते थे

रेत के घर बनाया करते थे

निर्जीव गुड्डे- गुड्डियों की शादी रचाया करते थे

तितलियाँ प्यारी लगतीं थीं

वस्तुएं जिज्ञासा पैदा

करतीं थीं

बचपन का उमंग था

हौंसलों में दम था

यह आशंका नहीं थी

कि कागज की नाव डूबती है या नहीं

हेलिकाप्टर उड़ता है या नहीं

रेत का घर टिकता है या नहीं

तितलियाँ सहचर होती हैं या नहीं

ज्यों ज्यों हम बड़े… Continue

रफ्तार (चार मुक्तक)

Posted on April 13, 2013 at 9:03pm 9 Comments

उजाला चाहते हैं वज्म में खुद जलना होगा,

सफर तय करना है तो गिर कर सम्भलना होगा।

इतनी आसानी से मंजिल नहीं मिलती यारों,

जिन्दगी की रफ्तार को कुछ बदलना होगा॥



मंहगाई की रफ्तार यूँ बढ़ती जा रही है,

इसी के इर्द- गिर्द दुनिया सिमटती जा रही है।

तिस पर ये बेरोजगारी घोटाले और लूट,

ये जिन्दगी इक दलदल में बदलती जा रही है॥



सुना है उसने एक नई कार खरीद ली,

समझता है जिन्दगी में रफ्तार खरीद ली।

पर क्या पता उस नादान अहमक को,

अपने पाले में मुसीबत… Continue

मालिक सबका एक है (दोहा छंद)

Posted on April 12, 2013 at 1:04pm 18 Comments

मालिक सबका एक है, खुदा गॉड भगवान।

धर्म पंथ में बांटकर, भटक गया इंसान॥



निराकार साकार ही, दोनों ईश्वर रूप।

देह और छाया सदृश, संग-संग हैं धूप॥



सूरज तारे चांद सब, सगुण ईश के रूप।

नियति नियम निर्गुण कहें, अद्भुत भव्य अनूप॥



ईश प्राप्ति निज खोज है, खोज सके तो खोज।

मोह निशा से घिर मनुज, बाहर भटके रोज॥



आत्मरूप में जाग नर, भटक नहीं अन्यत्र।

तुझ में ईश्वर ईश तू, तू ही तू सर्वत्र॥



धूम- अग्नि दिन- रात से, सुख से दुख… Continue

कारगिल युद्ध पर उसे गर्व है? (घनाक्षरी)

Posted on March 31, 2013 at 4:47pm 12 Comments

कारगिल हार के जो, हार पे ही गर्व करे,
हार जूतियों का उस नीच को पिन्हाइये।
एक से न काम चले, जूता एक और मिले,
भाई एक जोड़ी मेरा, पूरा करवाइये॥
पाक पाप धूर्तबाज, कल बल छल बाज,
कपटी से शांति बात, भूल मन जाइये।
अफजल कसाब ज्यों, मनुजता के शत्रु को,
फांसी पर चढ़ाओ या, तोप से उड़ाइये॥

Comment Wall (12 comments)

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At 12:34pm on May 3, 2013, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

सादर धन्यवाद 

स्नेही विनय जी 

आपने अपने व्यस्त समय से मुझे मार्गदर्शन किया. काफी विस्त्रत जानकारी दी. निराशा थी. प्रोत्साहन मिला .स्नेह बनाये रखिये. 

At 7:35pm on April 14, 2013, Kedia Chhirag said…

प्रिय बन्धु,आपका आभार किन शब्दों में व्यक्त करूँ ...शब्द नहीं हैं...आपने मुझको इस साईट से परिचित करवाकर मेरे लिए ज्ञान का महासागर समक्ष कर दिया है ....अब यह पूरी तरह मेरे ऊपर निर्भर है की मैं इस महासागर की कितनी गहराइयों में उतरकर अपने लिए ज्ञान के मोती चुनूँ...मेरा पूरा प्रयास रहेगा की हमेशा आप सबके स्नेहाशीष से आपकी अपेक्षाओं को पूरा कर सकने में समर्थ हो पाऊं .......अत्यंत आभार ....ह्रदय से ........

At 3:15pm on April 10, 2013, manoj shukla said…
आभार भाईसाहब त्रिपाठी जी
At 5:47pm on March 7, 2013, mrs manjari pandey said…

आदरणीय विन्ध्येश्वरी प्रसाद जी

 कल बहुतों का कल ले लेता .

कल को छीन  विकल कर देता।

पूरी रचना अच्छी लगी।

 

At 11:54pm on February 22, 2013, बृजेश नीरज said…

आपने मुझे मित्रता योग्य समझा इसके लिए आपका आभार!

At 5:44pm on August 20, 2012, Laxman Prasad Ladiwala said…
आदरणीय विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठीजी, आपके जन्म दिन पर हार्दिक शुभकामनाए गुरुवर
इश्वर करे आप नयी उंचाइयां छुए और परिवार समाज और देश के विकास में योगदान करे |
हमारा आपका सदव्यवहार बना रहे  |
At 9:04am on April 29, 2012,
सदस्य कार्यकारिणी
Sanjay Mishra 'Habib'
said…

प्रिय भाई विन्ध्येश्वरी जी, आपकी सहृदय संवेदनाओं से बड़ा संबल मिला है...

सादर नमन।

At 8:10pm on April 19, 2012, राकेश त्रिपाठी 'बस्तीवी' said…

Bhai Tripathi ji, Hamari Mitra mandali me aapka khule dil se svagat hai.

At 12:51pm on April 1, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

आदरणीय , श्री त्रिपाठी  जी.

सादर अभिवादन.
मैं सीखने आया हूँ. मार्गदर्शन और स्नेह अपेक्षित है. 
धन्यवाद.  स्नेह बनाये रखियेगा.
At 11:24am on March 28, 2012, MAHIMA SHREE said…
प्रिय विन्धेस्वरी भाई ,
आपको प्रतियोगिता में सफल होने के लिए बहुत-२ बधाइयाँ और ढेर सारी शुभकामनाये...
 
 
 

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