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saroj sharma
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Female
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gurgaon
Native Place
gurgaon
Profession
poetry writer
About me
hamesha khush raho dusro ko bhi khush rakho...

Saroj sharma's Blog

तपता रेगिस्तान

तपती दोपहरी में पसीने से

भीगा हुवा ये तन

दूर एक रेगिस्तान में

पानी को तरस रहा है ये मन

है इसी आस में की बारिश तो होगी कभी

हमारे सुने से आँगन में



कोई फुलवारी तो खिलेगी कभी

तपती रेत पर कभी एक पानी की बूँद न

गिरी

रेगिस्तान में एक घर में जला रही है दोपहरी

रेत के टिलों में पेड़ की

छाव को

तरस रहा है ये मन

कभी तो बारिश होगी

कभी तो भिगेगा ये तन

तपता

रेगिस्तान है फिर भी प्यारा यहाँ का घर

बारिश न आए तो…

Continue

Posted on August 20, 2012 at 2:00pm — 6 Comments

Comment Wall (3 comments)

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At 5:26pm on November 14, 2012, Anil Tiwari said…

Very Nice

At 4:24pm on October 16, 2012, Deepak Sharma Kuluvi said…

sundar shabdon se piroyi rachna.............

deepak kuluvi

At 11:55am on September 21, 2012, प्रमेन्द्र डाबरे said…

सरोज जी , सादर प्रणाम आपको हमारी लाइनें अच्छी लगी, हम आपके आभारी है आपकी हौसला अफजाई से मुझे आगे लिखने की हिम्मत और प्रेरणा मिलेगी.

 
 
 

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