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Ashish Painuly
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pratibha pande left a comment for Ashish Painuly
" जन्म दिन की ढेरों शुभकामनाएँ "
Jul 18, 2016
Ram Sharma and Ashish Painuly are now friends
May 1, 2016
Ashish Painuly replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-69
"भंवर के बीच कश्ती थी,दिया किनारा उसने बेसहारा था मैं,दिया सहारा उसने पकङकर हाथ हर मिसरा लिखवाया मुझसे इस तरह गज़्ल को मेरी संवारा उसने मेरी नजर में जब खुद को उतारा उसने एक ही नजर में बदला नज़ारा उसने फ़ुर्सत में बैठकर आईने को कभी जो निहारा उसने चटका…"
Mar 26, 2016
Ashish Painuly commented on Ashish Painuly's blog post दीवार
"प्रतिक्रिया और प्रोत्साहन हेतु ह्रदय से आभार मोहित मिश्रा जी एवम् राजेश कुमारी जी।"
Mar 26, 2016

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on Ashish Painuly's blog post दीवार
"इक छोटी  गलती  नहीं  कहेंगे इसको.. सोची समझी गलती हुई है खुदगर्ज सियासती चालों पर अच्छी प्रस्तुति दी है आपने हार्दिक बधाई "
Mar 20, 2016
Ashish Painuly posted a blog post

दीवार

हमको खबर है कितने, हम बेखबर हो गए अपने ही घर से कितने बाशिंदे बेघर हो गए जब हम एक थे तो सारा शहर एक था जो राहें हुईं अलग हमारी तो सब कुछ बंट गया और अब तो आलम ये है कि ये सारा शहर दो खेमों में बंट चुका है आधे इधर हो गए आधे उधर हो गए अपने ही घर से कितने बाशिंदे बेघर हो गए-2 हर महफिल में सन्नाटा है हर शै सूनी हो गई है मंज़िल खोती जाती है राहें दूनी हो गई हैं सदमे में हर कोई यहॉँ सदमे में उधर भी हैं लफ़्ज़ शोला उगलते हैं आँखें खूनी हो गई हैं कि इक बहुत बड़े मुल्क के बीचों बीच एक बहुत ऊंची दीवार बन…See More
Mar 16, 2016
Ashish Painuly updated their profile
Mar 15, 2016
Ashish Painuly replied to Admin's discussion "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65
"बहुत बहुत शुक्रिया"
Mar 12, 2016
Ashish Painuly replied to Admin's discussion "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65
"प्रतिक्रिया हेतु ह्रदयतल सेआभार"
Mar 12, 2016
Ashish Painuly replied to Admin's discussion "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65
"बहुत बहुत आभार आदरणीया"
Mar 12, 2016
Ashish Painuly shared their blog post on Facebook
Mar 12, 2016
Ashish Painuly replied to Admin's discussion "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65
"वाह!शानदार रचनाएं पढने को मिल रही हैं।ह्रदय प्रफुल्लित हो रहा है।आदरणीय योगराज जी की सलाह पर करीब एक साल पहले ओबीओ से जुङा था।परंतु अनेक व्यस्तताओं के कारण कल पहली बारमंच पर अपनी रचना पोस्ट की।और अन्य सदस्यों की रचनाएं भी पढीं।सचमुच जैसा मैंने सोचा…"
Mar 11, 2016
Ashish Painuly and rajesh kumari are now friends
Mar 11, 2016
Ashish Painuly replied to Admin's discussion "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65
"आप सब गुणीजनों का प्रतिक्रिया हेतु बहुत बहुत आभार आदरणीय अखिलेश कृष्ण जी,प्रतिभा जी एवम् आदरणीय योगराज सर।"
Mar 11, 2016
Ashish Painuly posted a blog post

कितना टूटा कितना हारा

कितना टूटा कितना हाराज़िन्दगी ने कितना माराहर घङी मातम हैमायूसी का आलम हैचारों ओर निराशा हैअश्रुमिश्रित भाषा हैकलम भी मेरी सब है जानेदु:ख के मेरे क्या हैं मानेकि झूठे उद्गारों की ज़द में गर मेंखुशी कभी जो लिखना भी चाहूँझूठ नहीं यह सहती है'गम ही गम हैं' कहती है।नादां है यह ये न जाने जग मेंसच ही सदा न चलता हैसफेदपोशी का नक़ाब ओढेसफेद झूठ मचलता हैऐसे झूठे मोती पिरो केमाला बनाना चाहूँ मैंचाबी का जिसकी पता नहींऐसा ताला बनाना चाहूँ मैंआत्मा नहीं भी होगी तो क्याशरीर तो कृति में होगा हीअदृश्य आत्मा का…See More
Mar 11, 2016
Ashish Painuly replied to Admin's discussion "ओ.बी.ओ. लाइव महा उत्सव" अंक-65
"भानु ज्यों ज्यों चढता जाता बढती जाती है ग्रीष्म ऊष्मा बढती जाती है तपन-अगन और खिलती जाती धूप है। पहली बारिश में स्नान कर तो और खिला इस सुंदरी का रूप है मस्तक पर कोई तिलक हो जैसे फलक पर ऐसी दिखती धूप है कागज की कश्ती पानी में डगमगाती है जैसे बादलों…"
Mar 11, 2016

Profile Information

Gender
Male
City State
Dehradun
Native Place
Tehri,Uttarakhand
Profession
STUDENT
About me
Writer

Ashish Painuly's Blog

दीवार

हमको खबर है कितने, हम बेखबर हो गए

अपने ही घर से कितने बाशिंदे बेघर हो गए



जब हम एक थे तो सारा शहर एक था

जो राहें हुईं अलग हमारी तो सब कुछ बंट गया

और अब तो आलम ये है कि ये सारा शहर दो खेमों में बंट चुका है

आधे इधर हो गए आधे उधर हो गए

अपने ही घर से कितने बाशिंदे बेघर हो गए-2



हर महफिल में सन्नाटा है हर शै सूनी हो गई है

मंज़िल खोती जाती है राहें दूनी हो गई हैं

सदमे में हर कोई यहॉँ सदमे में उधर भी हैं

लफ़्ज़ शोला उगलते हैं आँखें खूनी हो गई…

Continue

Posted on March 15, 2016 at 6:30pm — 2 Comments

कितना टूटा कितना हारा

कितना टूटा कितना हारा

ज़िन्दगी ने कितना मारा



हर घङी मातम है

मायूसी का आलम है

चारों ओर निराशा है

अश्रुमिश्रित भाषा है

कलम भी मेरी सब है जाने

दु:ख के मेरे क्या हैं माने

कि झूठे उद्गारों की ज़द में गर में

खुशी कभी जो लिखना भी चाहूँ

झूठ नहीं यह सहती है

'गम ही गम हैं' कहती है।

नादां है यह ये न जाने जग में

सच ही सदा न चलता है

सफेदपोशी का नक़ाब ओढे

सफेद झूठ मचलता है

ऐसे झूठे मोती पिरो के

माला बनाना चाहूँ… Continue

Posted on March 10, 2016 at 6:36pm

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At 8:34am on July 18, 2016, pratibha pande said…

 जन्म दिन की ढेरों शुभकामनाएँ 

At 5:26am on April 23, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

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