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Rahila
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Nita Kasar commented on Rahila's blog post ठिकाना (लघुकथा)राहिला
"सारगर्भित संदेशप्रद कथा है,आज की ही नही अपने कल की व्यवस्था करना ज़रूरी है ।जिससे आने वाली पीढ़ी के लिये उदाहरण सामने हो ।बधाई आद० राहिला जी ।"
48 minutes ago
Rahila commented on Rahila's blog post ठिकाना (लघुकथा)राहिला
"शुक्रिया आ. दिदिया!"
4 hours ago
KALPANA BHATT commented on Rahila's blog post ठिकाना (लघुकथा)राहिला
"वाह यह निराली कोशिश पसंद आई आदरणीया राहिला जी | अच्छी तरकीब हुई यह तो पेड़ लगाने की | हार्दिक बधाई "
Tuesday
Rahila posted a blog post

ठिकाना (लघुकथा)राहिला

हुलिए से वह बूढ़ा कोई भिखारी जान पड़ रहा था। अलसुबह मंडी लगते ही हाथ में एक मैली कुचैली सी प्लास्टिक की बोरी लिये वह एक ठेले वाले के पास पहुँचा| आदतन फलवाले ने उसकी तरफ एक छोटा सा आम बढ़ा दिया।उम्मीद से परे बूढ़े ने सिर हिलाकर उसे लेने से इंकार कर दिया और एक तरफ छाँटकर रखे सड़े आमों की ओर इशारा किया। दुकानदार ने उसे हैरानी से देखा और इस बार एक बड़ा आम उसकी तरफ बढ़ाते हुए कहा "अरे बाबा! वे आम तो सड़े हुए हैं ,उन्हें खाओगे तो बीमार पड़ जाओगे।बूढ़े ने इस बार भी इंकार में सिर हिला दिया| अब एक गूंगे के…See More
Tuesday
Rahila commented on Rahila's blog post खामियाजा***(लघुकथा)राहिला
"आदरणीय रवि सर जी ! आपने रचना पर नजर डाली इसके लिए तहे दिल से आभार।सादर"
Monday
Rahila commented on Rahila's blog post खामियाजा***(लघुकथा)राहिला
"आदरणीय आरिफ सर जी!,आदरणीय कबीर साहब,आदरणीया कल्पना दीदी!,आदरणीय कुमार सर जी! आदरणीय दुबे सर जी!और आदरणीया बरखा दीदी! आप सब का बहुत आभार रचना को सराहने हेतु और विचार रखने के लिए।सादर"
Monday
KALPANA BHATT commented on Rahila's blog post ***बदलते सुर***(लघुकथा)राहिला
"रचनाकारों के दर्द को खूब लिखा है आपने आदरणीया राहिला जी | बढ़िया कथा हुई है बधाई स्वीकारें |"
Sunday
KALPANA BHATT commented on Rahila's blog post ***मेरा कसूर ***(कविता)राहिला
"बहुत सुंदर प्रस्तुति आदरणीया राहिला जी |हार्दिक बधाई |"
Sunday
Hari Prakash Dubey commented on Rahila's blog post खामियाजा***(लघुकथा)राहिला
"सच है ,कुछ बातों का खामियाजा भुगतना ही पड़ता है ,बधाई  आपको इस प्रस्तुति पर आ. Rahila जी ! "
Sunday
KALPANA BHATT commented on Rahila's blog post खामियाजा***(लघुकथा)राहिला
"अच्छी लघुकथा हुई है आदरणीय राहिला जी | हार्दिक बधाई "
Sunday
Ravi Prabhakar commented on Rahila's blog post खामियाजा***(लघुकथा)राहिला
"बढ़ीया प्रयास है आदरणीय राहिला जी । पर आपकी ये लघुकथा मैं 4 जुलाई को नया लेखन पर पढ़ चुका हूं। सादर"
Jul 13
Mahendra Kumar commented on Rahila's blog post खामियाजा***(लघुकथा)राहिला
"अच्छी लघुकथा है आ. राहिला जी. थोड़ा संपादन कर देंगी तो और कसावट आ जाएगी. मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Jul 12
Samar kabeer commented on Rahila's blog post खामियाजा***(लघुकथा)राहिला
"मोहतरमा राहिला जी आदाब,अच्छी लगी आपकी लघुकथा,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । एक निवेदन ये है कि कृपया मंच पर अपनी सक्रियता बनाये रखें,ये हमारी ज़िम्मेदारी है ।"
Jul 11
Mohammed Arif commented on Rahila's blog post खामियाजा***(लघुकथा)राहिला
"आदरणीया राहिला जी आदाब,औसत दर्जे की अच्छी कथा कहने का प्रयास । बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 11
Rahila posted a blog post

खामियाजा***(लघुकथा)राहिला

क्या मैं जान सकती हूँ सब कुछ फाइनल होने के बाद विवाह से इंकार करने की वजह क्या है?"आपसे पिछली मुलाक़ात!"उसने सपाट सा उत्तर दिया।"पिछली मुलाक़ात?"कहते हुए उसके माथे पर हैरानी से बल पड़ गए।" जहाँ तक मुझे याद है..., उस दिन तो ऐसी कोई बात नहीं हुई थी, जो आपके इंकार की वजह बने।""हुई थी!,उस दिन एक ऐसी बात हुई थी जिसकी वजह से मुझे ये फैसला लेना पड़ा।"" देखिए..!पहेलियां बुझाने से अच्छा ,आप साफ-साफ बताएं।"वह मुद्दे पर आ गयी।"ठीक है तो सुने!"उसने दोनों हाथ टेबल पर रखते हुए कहा।"उस दिन आपके साथ आपकी चचेरी…See More
Jul 11
Rahila commented on Rahila's blog post अपवाद(लघुकथा)राहिला
"आदरणीय सभी वरिष्ठ सुधीजनों को मेरा नमस्कार, आप सब को रचना ठीक लगी ।इसके लिए सादर आभार ।शुक्रिया"
Jul 11

Profile Information

Gender
Female
City State
MP
Native Place
Shivpuri
Profession
Teacher

Rahila's Blog

ठिकाना (लघुकथा)राहिला

हुलिए से वह बूढ़ा कोई भिखारी जान पड़ रहा था। अलसुबह मंडी लगते ही हाथ में एक मैली कुचैली सी प्लास्टिक की बोरी लिये वह एक ठेले वाले के पास पहुँचा| आदतन फलवाले ने उसकी तरफ एक छोटा सा आम बढ़ा दिया।

उम्मीद से परे बूढ़े ने सिर हिलाकर उसे लेने से इंकार कर दिया और एक तरफ छाँटकर रखे सड़े आमों की ओर इशारा किया। दुकानदार ने उसे हैरानी से देखा और इस बार एक बड़ा आम उसकी तरफ बढ़ाते हुए कहा "अरे बाबा! वे आम तो सड़े हुए हैं ,उन्हें खाओगे तो बीमार पड़ जाओगे।

बूढ़े ने इस बार भी इंकार में सिर हिला दिया| अब एक… Continue

Posted on July 17, 2017 at 7:59pm — 3 Comments

खामियाजा***(लघुकथा)राहिला

क्या मैं जान सकती हूँ सब कुछ फाइनल होने के बाद विवाह से इंकार करने की वजह क्या है?

"आपसे पिछली मुलाक़ात!"उसने सपाट सा उत्तर दिया।

"पिछली मुलाक़ात?"कहते हुए उसके माथे पर हैरानी से बल पड़ गए।

" जहाँ तक मुझे याद है..., उस दिन तो ऐसी कोई बात नहीं हुई थी, जो आपके इंकार की वजह बने।"

"हुई थी!,उस दिन एक ऐसी बात हुई थी जिसकी वजह से मुझे ये फैसला लेना पड़ा।"

" देखिए..!पहेलियां बुझाने से अच्छा ,आप साफ-साफ बताएं।"वह मुद्दे पर आ गयी।

"ठीक है तो सुने!"उसने दोनों हाथ टेबल पर रखते हुए… Continue

Posted on July 11, 2017 at 6:26am — 9 Comments

***असली कीमत***(लघुकथा)राहिला

उस जबरदस्त भूकंप के शांत होने पर शुभा ने खुद को अपनी नन्ही बिटिया के साथ जाने कितने ही नीचे मलवे में दबा पाया।भाग्य से छत का एक बड़ा सा हिस्सा कुछ ऐसे गिरा कि एक गार सी बन गयी।और चंद सांसे उधार मिल गयी ।दोनों सहमी सी ,आपस में सिमटी हुई मदद की उम्मीद में एक दूसरे का सहारा बनी हुई थीं।लेकिन जब काफी समय गुजर गया और किसी का हाथ मदद के लिए आता नहीं दिखाई पड़ा तो घोर निराशा ,डर और सामने बाहें फैलाये मौत को देख कर आंखों से बेबसी बरस पड़ी ।

"मम्मा!भूख लगी है।"नन्ही रिया ने उस का ध्यान… Continue

Posted on June 12, 2017 at 8:08pm — 7 Comments

अपवाद(लघुकथा)राहिला

पूरे गाँव से कुल पंद्रह लोग ऐसे गरीब थे जो कि उस सरकारी योजना के तहत प्रथम दृष्टिया लाभान्वित होने योग्य थे ।और अब तक सात नियम ,शर्तों में सभी खरे भी उतर गए थे।

"आठवां नियम ,अब जरा ध्यान से सुनना मैं कुछ सामान गिनवा रहा हूँ यदि ये सामान आपके घर में हो तो हाथ उठा दियो ।"सेकेट्री की आवाज पंचायत भवन में गूंजी। उसने जैसे ही कुछ समान गिनवाये ।

"अरे ओ महाराज !जो सामान तो शादी सम्मेेलन से मोड़ा खों मिलो,तो का हम अमीर हो गये वा से।"

"काका!सिरकारी नियम हैं इसमें हम का कर सकें।" इस नियम के… Continue

Posted on June 9, 2017 at 4:38am — 5 Comments

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At 10:07pm on April 19, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया राहिला जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी लघुकथा "कहर" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:33pm on March 29, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीया Rahila  जी,

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 7:33pm on November 11, 2015, Abid ali mansoori said…

आदरणीया राहिला जी हारदिक आभार आपका!

At 2:25am on October 2, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।
At 4:02am on October 1, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
मोस्ट वेलकम। कब ज्वाईन किया ? गोष्ठी 6 में कथा भी भेजी थी क्या ? प्रोफाइल में कैसे जाने , ये तो अधूरी जानकारी है अभी वहां, कैसे कन्फर्म करें, फोन पर कन्फर्म करने के बाद स्वीकार करेंगे रिक्वेस्ट, ओके
 
 
 

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