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Rahila
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Mahendra Kumar commented on Rahila's blog post ***नामर्द*** राहिला (लघुकथा)
"उम्दा लघुकथा है आ. राहिला जी. शीर्षक चयन भी बेहतरीन है. इस बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Jan 15
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Rahila's blog post ***नामर्द*** राहिला (लघुकथा)
"आद0राहिला जी सादर अभिवादन।। बेहतरीन विषय को लेकर उम्दा लघुकथा कही आपने। बधाई इस प्रस्तुति पर"
Jan 15
Ajay Tiwari commented on Rahila's blog post ***नामर्द*** राहिला (लघुकथा)
"आदरणीया राहिला जी, कथा के लिए एक नया परिदृश्य तलाश कर उसे एक सामजिक व्यंग के सक्षम औजार में बदल देना बहुत अच्छा  लगा. (खूबसूरती ये है कि व्यंग में आक्रोश और करुणा दोनों अन्तर्निहित है )  कथा अगर लम्बी कहानी के फार्म में होती शायद परिवेश की…"
Jan 14
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Rahila's blog post ***नामर्द*** राहिला (लघुकथा)
"बड़ा ही रोचक और मार्मिक चित्रण किया है आदरणीया..सादर"
Jan 13
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Rahila's blog post ***नामर्द*** राहिला (लघुकथा)
"वाह जी वाह! राहिला जी बहुत बढ़िया विषय और औरतों का यह रूप तो गज़ब! नशामुक्ति आन्दोलन जहाँ भी चला है महिलाओं ने इसी तरह से पलटवार किया है| बढ़िया प्रस्तुतीकरण हुआ है| हार्दिक बधाई आपको|"
Jan 12
Samar kabeer commented on Rahila's blog post ***नामर्द*** राहिला (लघुकथा)
"मोहतरमा राहिला जी अच्छी लघुकथा है, बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 12
Nita Kasar commented on Rahila's blog post ***नामर्द*** राहिला (लघुकथा)
"अन्याय करना व सहना दोनों अपराध है।महिलायें जब अपने हक़ और सुरक्षा के लिये जागे तभी सवेरा सार्थक कथा के लिये बधाई आद० राहिला जी ।"
Jan 11
Rahila commented on Rahila's blog post ***नामर्द*** राहिला (लघुकथा)
"शुक्रिया आदरणीय सुरेन्द्र जी!रचना पर आपकी टिप्पणी पाकर हार्दिक प्रसन्नता हुई।सादर"
Jan 11
Rahila commented on Rahila's blog post ***नामर्द*** राहिला (लघुकथा)
"आदरणीय आरिफ़ साहब !ये गुलाबी गैंग नहीं है।मैनें रचना में खुल कर उनकी पहचान नहीं बताई ,लेकिन इशारों में उनकी पहचान बताई है। बाकी रचना आपको अच्छी लगी इसके लिए शुक्रिया।आदाब"
Jan 11
Rahila commented on Rahila's blog post ***नामर्द*** राहिला (लघुकथा)
"बहुत शुक्रिया आदरणीय तेजवीर सर जी!सादर"
Jan 11
surender insan commented on Rahila's blog post ***नामर्द*** राहिला (लघुकथा)
"बहुत बढ़िया शानदार अभिव्यक्ति । बेहतरीन प्रस्तुति । बधाई स्वीकार करे।"
Jan 11
Mohammed Arif commented on Rahila's blog post ***नामर्द*** राहिला (लघुकथा)
"आदरणीया राहिला जी आदाब,                          आज नारी पहले जैसी नारी नहीं रही । वह भली-भाँति अपने अधिकारों और कर्तव्यों के बारे मेन जानती है । वह अत्याचार के खिलाफ़ आवाज़ भी उठा रही…"
Jan 11
TEJ VEER SINGH commented on Rahila's blog post ***नामर्द*** राहिला (लघुकथा)
"हार्दिक बधाई आदरणीय राहिला आसिफ़ जी।वाह, बेहतरीन लघुकथा।एकदम नया विषय और उतना ही सुंदर प्रस्तुतीकरण।"
Jan 11
Rahila posted a blog post

***नामर्द*** राहिला (लघुकथा)

"लगता है एक तारीख है।" बस्ती में रोने -पीटने की आवाज सुनकर उसने मर्दानी आवाज में कहा।"अब महीने के लगभग दस दिन यही चीख पुकार मची रहेगी।"दूसरी, ढोलक कसते हुए बोली।"हाँ... सही कह रही हो...,मन तो करता है निकम्मों के हाथ पैर तोड़ दूँ।" "तूने तो मेरे दिल की बात कह दी।""बेचारी ये औरतें सारा-सारा दिन दूसरों के चूल्हें -चौके समेटती फिरती है।और अंत में ये ईनाम मिलता है।""क़िस्मत तो देखो इन जुआरियों ,शराबियों की, निकम्मो को कैसी सोने के अंडे देने वाली मुर्गियां हाथ लगी है।" कि तभी- "मत मारो ...,मेरी नहीं तो…See More
Jan 11
Rahila replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-33 (विषय: नीड़ की ओर)
"बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय ओम प्रकाश सर जी! सादर"
Dec 30, 2017
Rahila replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-33 (विषय: नीड़ की ओर)
"बहुत शुक्रिया आदरणीय तेजवीर सर जी!सादर आभार"
Dec 30, 2017

Profile Information

Gender
Female
City State
MP
Native Place
Shivpuri
Profession
Teacher

Rahila's Blog

***नामर्द*** राहिला (लघुकथा)

"लगता है एक तारीख है।" बस्ती में रोने -पीटने की आवाज सुनकर उसने मर्दानी आवाज में कहा।

"अब महीने के लगभग दस दिन यही चीख पुकार मची रहेगी।"दूसरी, ढोलक कसते हुए बोली।

"हाँ... सही कह रही हो...,मन तो करता है निकम्मों के हाथ पैर तोड़ दूँ।"

"तूने तो मेरे दिल की बात कह दी।"

"बेचारी ये औरतें सारा-सारा दिन दूसरों के चूल्हें -चौके समेटती फिरती है।और अंत में ये ईनाम मिलता है।"

"क़िस्मत तो देखो इन जुआरियों ,शराबियों की, निकम्मो को कैसी सोने के अंडे देने वाली मुर्गियां हाथ लगी…

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Posted on January 11, 2018 at 11:23am — 13 Comments

स्मार्ट (लघुकथा)राहिला

"हैलो.., गुड मॉर्निंग मैडम!"

"गुड मॉर्निंग, कौन बोल रहे हैं?"

"मैडम ! हम एस बी आई से बोल रहे हैं।

मैडम ! आपका एटीएम ब्लॉक होने वाला है, यदि आप चाहती हैं कि आपका एटीएम यथावत चालू रहे, तो आप अपने एटीएम का नम्बर वेरिफाई करवाएं।"

"ये आप क्या कह रहे हैं?"

"घबराइए नहीं मैडम ! यदि आप इस असुविधा से बचना चाहिती हैं तो अपना  एटीएम नम्बर बतलायें।"

"भाई साहब! नम्बर तो मैं बता दूं, लेकिन थोड़ी देर बाद कॉल कीजियेगा ।पहले जरा इनकी खबर ले लूं इनकी हिम्मत कैसे हुई मेरा…

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Posted on December 26, 2017 at 3:30pm — 11 Comments

कागज़ के घोड़े (लघुकथा)राहिला

कार्यालय में कई दिनों तक बिना सूचना के अनुपस्थित रहने के वाले सुरेश कुमार को कमिश्नर साहब ने निलंबित क्या किया।वह हर कर्मचारी के लिए चर्चा का विषय बन गये।सब उनकी दबंगई और ईमानदारी के कायल हुए बगैर ना रह सके। आखिर उन्होंने मंत्री जी के दामाद के खिलाफ जो कार्यवाही की थी। वहीं निलंबन की खबर पाते ही उसी शाम ,एक मिठाई का डिब्बा लेकर सुरेश कुमार , कमिश्नर साहब के सरकारी बंगले पर पहुँच गए।

"नमस्कार सर!"

"नमस्कार ,नमस्कार कहो कैसे आये।"

"बस सर! आपको धन्यवाद कहना था। और यह एक छोटी सी… Continue

Posted on November 29, 2017 at 11:49am — 7 Comments

परित्यागी (कविता)राहिला

ना हम तुम से कोई प्रश्न करें।।

न तुम हम से कोई सवाल करो ,

ना हम तुमसे कोई शिक़वा करें।।

ना तुम हम से कोई मलाल रखो।



तुम मन चाहा पथ चुन ही लो,

फिर मेरी राह ना आन धरो।।

तुम मन चाहा स्वप्न बुन ही लो,

फिर मेरे दर ना कान धरो।



जब अंध अहं सीमा लांघे,

जब मेरा वजूद ख़ाक करो ,

तब स्वयं स्वतंत्र कर मेरा मन

तुम मुझ पर अहसान करो।।



जाओ ,जहाँ तुम्हें छाँव मिले,

जाओ, वहाँ जहां दिल खिले,

जाओ,सत्य स्वीकार किया,

तुम अपना… Continue

Posted on November 19, 2017 at 6:39pm — 6 Comments

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At 10:07pm on April 19, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया राहिला जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी लघुकथा "कहर" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:33pm on March 29, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीया Rahila  जी,

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 7:33pm on November 11, 2015, Abid ali mansoori said…

आदरणीया राहिला जी हारदिक आभार आपका!

At 2:25am on October 2, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।
At 4:02am on October 1, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
मोस्ट वेलकम। कब ज्वाईन किया ? गोष्ठी 6 में कथा भी भेजी थी क्या ? प्रोफाइल में कैसे जाने , ये तो अधूरी जानकारी है अभी वहां, कैसे कन्फर्म करें, फोन पर कन्फर्म करने के बाद स्वीकार करेंगे रिक्वेस्ट, ओके
 
 
 

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