For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

खूंटे (लघुकथा) राहिला

"अरे चमनलाल...! आओ-आओ भैया!कितने वर्षों बाद , गांव का रास्ता कैसे भूल गए ? " खुशी से झूमते हुए उसने , उसको कसकर गले लगा लिया।
"बस भैया चले ही आ रहे हैं , अरे...! घर में सन्नाटा सा पसरा है, कोई है नहीं का?" उसने बाखर का सरसरी तौर पर मुआयना करते हुए कहा।

"है ना..., तुम्हारी भाभी हैं भीतर,
अरे सुनती हो! चमनवा आया है ,जरा बढ़िया सी चाय तो बना लाओ दुई कप।"

"और बहुएँ कहाँ हैं ?"

" बड़ी , आंगनबाड़ी में सुपरवाइजर हो गयी है , छोटी तो मास्टरनी थी ही। आती होंगीं समय तो हो गया है।"
तभी-
"चाय"
दरवाजे की ओट से चाय की ट्रे आगे बढ़ाते हुए , उसने एक मात्र शब्द से काम चलाया।
चाय का एक घूँट पीकर चमनलाल शिकायती अंदाज में बोले -
"अरे यार! अब की चाय में वो पहले वाली बात नहीं रही। ऐसा लग ही नहीं रहा जैसे अपने गाँव की कड़क , गाढ़ी चाय पी रहे हों ।"
" मोल का दूध है भाई ! तो पहले की सी बात कहाँ रहेगी । अब तुम्हारी भाभी की भी तबियत कुछ खास ठीक नहीं रहती । फिर बहुओं को भी समय कहाँ ? अब तो खूंटे तक उखड़ गये।"
"अरे..., मैं तो मज़ाक कर रहा था। चाय में भले ही वो पहली वाली बात ना हो , लेकिन तेरी मुहब्बत तो वही गाढ़ी वाली है..।, उसने चाय का कप रखते हुए , जोर से ठहाका मारा।
"लेकिन भई ! खुशी तो इस बात की है, कि खूंटे उखड़ गए ।"
घर की बहुओं को बाहर से आता देख, उसने मुस्कुरा कर कहा।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 846

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Neelam Upadhyaya on March 13, 2018 at 4:07pm

आदरणीय राहिला जी, महिलाओं की प्रगति को परिभाषित करती बहुत बढ़िया लघु कथा कि प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Harash Mahajan on March 12, 2018 at 11:34pm

वाह आदरणीय राहिला जी एक बहुत ही उम्दा और खूब संदेश देती आपकी ये लघु कथा दिल को खुश कर गयी । सच कहा उसने खूंटे उखड ही गये आजकल । बहुत सी दाद हाज़िर है । वसूल पाइयेगा ।

सादर!!

Comment by Mohammed Arif on March 12, 2018 at 10:57pm

आदरणीया राहिला जी आदाब,

                           मुझे जो वर्तनीगत अशुद्धियाँ नज़र आई जैसे:-खूंटे/खूँटे , आंगनवाड़ी/आँगनवाड़ी , अंदाज/अंदाज़ । सादर ।

Comment by Rahila on March 12, 2018 at 10:51pm

 आदरणीय आरिफ साहब बहुत शुक्रिया  रचना पर टिप्पणी करने के लिए। आपसे एक निवेदन है कि वे सारी वर्तिनी की अशुद्धियाँ  कहाँ-कहाँ हुईं बताने का कष्ट करें , ताकि आगे से ख्याल रख सकूँ। दूसरी बात , आपकी शिकायत पर अब क्या सफाई दूँ??? हाँ मैं मानती हूँ कि कामकाजी महिला होने के कारण घर- बाहर सम्हालते हुए समय नियोजन नहीं कर पा रही हूँ। दूसरी बड़ी वजह ये भी है कि ज्यादातर वक़्त बहुत वीक नेटवर्क में होती हूँ तो भी परेशानी होती है। खैर .., आगे से पूरी कोशिश करूँगी आप सब को शिकायत का मौका ना दूँ। सादर

Comment by Rahila on March 12, 2018 at 10:26pm

बहुत शुक्रिया आदरणीया नीता दीदी ! सादर आभार टिप्पणी के लिए।

Comment by Rahila on March 12, 2018 at 10:25pm

बहुत शुक्रिया आदरणीय उस्मानी जी ! सादर आभार टिप्पणी के लिए।

Comment by Rahila on March 12, 2018 at 10:25pm

बहुत शुक्रिया आदरणीय कबीर साहब ! सादर आभार टिप्पणी के लिए।

Comment by Rahila on March 12, 2018 at 10:24pm

बहुत शुक्रिया आदरणीय सलीम साहब ! सादर आभार टिप्पणी के लिए।

Comment by Rahila on March 12, 2018 at 10:24pm

बहुत शुक्रिया आदरणीय सोमेश जी! सादर आभार टिप्पणी के लिए।

Comment by Rahila on March 12, 2018 at 10:23pm

बहुत शुक्रिया आदरणीय सुरेन्द्र जी! सादर आभार टिप्पणी के लिए।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service