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Harash Mahajan
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Harash Mahajan commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल-ग़ालिब की ज़मीन पर
"वाह आदरणीय नूर साहब वाह । दिली दाद , हर शेर खूब है सर ।  लाजवाब । सादर"
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Harash Mahajan commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"एक सुंदर पेशकश आदरणीय मणि जी । हरदिल बधाई स्वीकार करें ।"
May 13
Harash Mahajan commented on ram shiromani pathak's blog post ग़ज़ल(2122 1212 22)
"अच्छे अहसास हुए हैं आदरणीय पाठक जी । बाकी गुनुजनों की बात पर ध्यान देना आवश्यक है । सादर ।"
May 13
Harash Mahajan commented on Samar kabeer's blog post 'ग़ज़ल कहने जो बैठोगे तो नानी याद आएगी'
"लाज़वाब पेशकश आपकी आदरणीय समर कबीर जी । आपकी कलम पूरी निगरानी पर लगता है आजकल । दिली मुबारकबाद सर । सादर ।"
May 7
Naveen Mani Tripathi commented on Harash Mahajan's blog post हर कली को अजब शिकायत है,
"आ0 हर्ष महाजन साहब बहुत  सुंदर प्रस्तुति । बधाई ।"
May 6
Nilesh Shevgaonkar commented on Harash Mahajan's blog post हर कली को अजब शिकायत है,
"अच्छी ग़ज़ल कही है आदरणीय महाजन जीबधाई "
May 6
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Harash Mahajan's blog post हर कली को अजब शिकायत है,
"अच्छी ग़ज़ल कही है आदरणीय महाजन जी..सादर"
May 6
Harash Mahajan commented on Harash Mahajan's blog post हर कली को अजब शिकायत है,
"आपकी आमद और अनुमोदन के लिए हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी जी |"
May 6
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Harash Mahajan's blog post हर कली को अजब शिकायत है,
"आ. हर्ष जी, सुंदर गजल हुई है हार्दिक बधाई ।"
May 6
Harash Mahajan commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- ये क्या हो गया है भले आदमी को // दिनेश कुमार
"वाह आदरणीय दिनेश जी सच में आपके अहसास आ०समर जी औऱआ० नीलेश जी की इस्लाह के बाद कितने मुखर होकर उभरे हैं । बहुत खूब ग़ज़ल हुई है । 'बता नाम क्या दूँ मैं उस अजनबी को' ..कितना मर्म है इसमें । बधाई । सादर ।"
May 6
Harash Mahajan replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीय गणेश  बागीजी को जन्मदिन की बहुत बहुत शुभकामनाएँ ।"
May 4
Harash Mahajan commented on Harash Mahajan's blog post हर कली को अजब शिकायत है,
"आदरणीय श्याम नारायन वर्मा जी शुक्रिया |"
May 4
Shyam Narain Verma commented on Harash Mahajan's blog post हर कली को अजब शिकायत है,
"सुन्दर भावों से सजी इस गज़ल के लिए आपको बहुत बधाई। सादर,"
May 4
Harash Mahajan commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(कहूँगा बात मैं....)
"आदरणीय मनन जी बहुत ही सुंदर भावों से सजी है आपकी ये कृति |सुंदर सृज़न के बधाई |बाकी गुनिजन अपनी राय देंगे ...सादर |"
May 4
Harash Mahajan commented on babitagupta's blog post कहाँ खो गया??????[कविता]
"सुंदर भाव आदरणीय बबिता गुप्ता जी | " कच्ची उम्र थी,कच्चा रास्ता, पर पक्की दोस्ती थी,पक्के हम,"बहुत खूब !!सादर !"
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Harash Mahajan commented on Sushil Sarna's blog post नश्वरता .....
"अति सुंदर सृजन आदरणीय सुशील जी |सादर |"
May 4

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GhazleN padne our kahne ka shouk mujhe is our prerit karta raha hai....

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हर कली को अजब शिकायत है,

2122 1212 22
*************

हर कली को अजब शिकायत है,
इश्क़ करना भ्रमर  की आदत है ।

इश्क़ दरिया है उर समंदर भी,
जब तलक़ मुझमें तू सलामत है ।

गम से उभरा तो मैंने जाना ये,
गर है साया तेरा तो ज़न्नत है ।

किसको किसके लिए है हमदर्दी,
हर तरफ फैली बस अदावत है ।

जब धुआँ अपने घर से उट्ठे तो,
कर यकीं रिश्तों में सियासत है

************

मौलिक एवं अप्रकाशित

हर्ष महाजन

Posted on May 3, 2018 at 2:30pm — 12 Comments

उससे नज़रें मिलीं हादसा हो गया (तरही)

212 212 212 212

****************

उससे नज़रें मिलीं हादसा हो गया,

एक पल में यहाँ क्या से क्या हो गया ।

ख़त दिया था जो कासिद ने उसका मुझे,

"बिन अदालत लगे फ़ैसला हो गया" ।

दरमियाँ ही रहा दूर होकर भी गर,

जाने फिर क्यूँ वो मुझसे ख़फ़ा हो गया ।

गर निभाने की फ़ुर्सत नहीं थी उसे,

खुद ही कह देता वो बेवफ़ा हो गया।

दर्द सीने में ऱख राज़ उगला जो वो,

यूँ लगा मैं तो बे-आसरा हो गया…

Continue

Posted on April 27, 2018 at 7:00pm — 13 Comments

ऐ ज़माने अब चला ऐसी हवा (गैर मुरद्दफ़)

गैर मुरद्दफ़ ग़ज़ल

2122 2122 212

*****†

ऐ ज़माने अब चला ऐसी हवा ,

लौट कर आये महब्बत में वफ़ा ।

दूरियाँ मिटती नहीं अब क्या करें,

कोई मिलने का निकालो रास्ता ।

चिलचिलाती धूप में आना सनम,

गुदगुदाती है तुम्हारी ये अदा ।

ज़ख्म दिल के देखकर रोते हैं हम,

याद आये इश्क़ का वो सिलसिला ।

तज्रिबा इतना है सूरत देख कर,

ये बता देते हैं कितना है नशा ।

वो लकीरों में था मेरे हाथ की,

मैं ज़माने में…

Continue

Posted on April 14, 2018 at 11:00pm — 8 Comments

वो रंजिश में ताने दिए जा रहे हैं

122 122 122 122

******************

वो रंजिश में ताने दिए जा रहे हैं,

हैं अपने मगर मुझको तड़पा रहे हैं ।

.

सिफर हो चला हूँ मैं ख़्वाबों से खुद ही,

तभी गम के बादल बहुत छा रहे हैं ।

.

बसी दिल में उनकी वो तस्वीर ऐसी,

कि बनकर वो साये चले आ रहे हैं ।

.

सुना है कि मिलती दुआओं से मंज़िल,

नमाज़-ए-महब्बत पढ़े जा रहें हैं ।

.

मैं रोया हूँ इतना छुपा कर वो आँहें,

पुराने थे रिश्ते जो इतरा रहे हैं…

Continue

Posted on April 14, 2018 at 11:30am — 13 Comments

Comment Wall (7 comments)

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At 11:23pm on September 3, 2015, kanta roy said…

महीने का सक्रिय सदस्य बनने के लिये ढेरों बधाई आपको आदरणीय हर्ष महाजन जी ।

At 10:56am on August 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

हर्ष महाजन जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
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सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:26am on August 6, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

aapko mitrkeroop mepakarmujhesamman mila . saadar

At 5:29pm on July 28, 2015, Rahul Dangi said…
जी अवश्य
At 3:56pm on July 28, 2015, Rahul Dangi said…
बहुत बहुत स्वागत आदरणीय हर्ष महाजन जी
At 11:49am on August 15, 2012, Ranveer Pratap Singh said…

जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनायें...

At 12:17pm on July 20, 2012, Albela Khatri said…

आपका बहुत बहुत स्वागत है हर्ष महाजन जी, आप एक ऐसे परिवार में शामिल हो गये हैं जहाँ घर के सभी सदस्य सही काम करने के लिए कटिबद्ध है .प्रशंसा और लताड़ दोनों ही यहाँ सर्वमान्य हैं . आपको यहाँ आ कर अच्छा लगेगा, ऐसा मेरा विश्वास है सादर

 
 
 

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