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Harash Mahajan
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Harash Mahajan's Blog

हर कली को अजब शिकायत है,

2122 1212 22
*************

हर कली को अजब शिकायत है,
इश्क़ करना भ्रमर  की आदत है ।

इश्क़ दरिया है उर समंदर भी,
जब तलक़ मुझमें तू सलामत है ।

गम से उभरा तो मैंने जाना ये,
गर है साया तेरा तो ज़न्नत है ।

किसको किसके लिए है हमदर्दी,
हर तरफ फैली बस अदावत है ।

जब धुआँ अपने घर से उट्ठे तो,
कर यकीं रिश्तों में सियासत है

************

मौलिक एवं अप्रकाशित

हर्ष महाजन

Posted on May 3, 2018 at 2:30pm — 12 Comments

उससे नज़रें मिलीं हादसा हो गया (तरही)

212 212 212 212

****************

उससे नज़रें मिलीं हादसा हो गया,

एक पल में यहाँ क्या से क्या हो गया ।

ख़त दिया था जो कासिद ने उसका मुझे,

"बिन अदालत लगे फ़ैसला हो गया" ।

दरमियाँ ही रहा दूर होकर भी गर,

जाने फिर क्यूँ वो मुझसे ख़फ़ा हो गया ।

गर निभाने की फ़ुर्सत नहीं थी उसे,

खुद ही कह देता वो बेवफ़ा हो गया।

दर्द सीने में ऱख राज़ उगला जो वो,

यूँ लगा मैं तो बे-आसरा हो गया…

Continue

Posted on April 27, 2018 at 7:00pm — 13 Comments

ऐ ज़माने अब चला ऐसी हवा (गैर मुरद्दफ़)

गैर मुरद्दफ़ ग़ज़ल

2122 2122 212

*****†

ऐ ज़माने अब चला ऐसी हवा ,

लौट कर आये महब्बत में वफ़ा ।

दूरियाँ मिटती नहीं अब क्या करें,

कोई मिलने का निकालो रास्ता ।

चिलचिलाती धूप में आना सनम,

गुदगुदाती है तुम्हारी ये अदा ।

ज़ख्म दिल के देखकर रोते हैं हम,

याद आये इश्क़ का वो सिलसिला ।

तज्रिबा इतना है सूरत देख कर,

ये बता देते हैं कितना है नशा ।

वो लकीरों में था मेरे हाथ की,

मैं ज़माने में…

Continue

Posted on April 14, 2018 at 11:00pm — 8 Comments

वो रंजिश में ताने दिए जा रहे हैं

122 122 122 122

******************

वो रंजिश में ताने दिए जा रहे हैं,

हैं अपने मगर मुझको तड़पा रहे हैं ।

.

सिफर हो चला हूँ मैं ख़्वाबों से खुद ही,

तभी गम के बादल बहुत छा रहे हैं ।

.

बसी दिल में उनकी वो तस्वीर ऐसी,

कि बनकर वो साये चले आ रहे हैं ।

.

सुना है कि मिलती दुआओं से मंज़िल,

नमाज़-ए-महब्बत पढ़े जा रहें हैं ।

.

मैं रोया हूँ इतना छुपा कर वो आँहें,

पुराने थे रिश्ते जो इतरा रहे हैं…

Continue

Posted on April 14, 2018 at 11:30am — 13 Comments

Comment Wall (7 comments)

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At 11:23pm on September 3, 2015, kanta roy said…

महीने का सक्रिय सदस्य बनने के लिये ढेरों बधाई आपको आदरणीय हर्ष महाजन जी ।

At 10:56am on August 17, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

हर्ष महाजन जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:26am on August 6, 2015, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

aapko mitrkeroop mepakarmujhesamman mila . saadar

At 5:29pm on July 28, 2015, Rahul Dangi Panchal said…
जी अवश्य
At 3:56pm on July 28, 2015, Rahul Dangi Panchal said…
बहुत बहुत स्वागत आदरणीय हर्ष महाजन जी
At 11:49am on August 15, 2012, Ranveer Pratap Singh said…

जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनायें...

At 12:17pm on July 20, 2012, Albela Khatri said…

आपका बहुत बहुत स्वागत है हर्ष महाजन जी, आप एक ऐसे परिवार में शामिल हो गये हैं जहाँ घर के सभी सदस्य सही काम करने के लिए कटिबद्ध है .प्रशंसा और लताड़ दोनों ही यहाँ सर्वमान्य हैं . आपको यहाँ आ कर अच्छा लगेगा, ऐसा मेरा विश्वास है सादर

 
 
 

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