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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव
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  • Lucknow Uttar Pradesh
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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Discussions

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्यिक परिचर्चा माह जुलाई 2020:: एक प्रतिवेदन     ::   डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्यिक परिचर्चा माह जुलाई  2020 (दिनांक 26 जुलाई 2020, रविवार) का ऑन लाइन आयोजन हुआ I इसके प्रथम चरण में डॉ, शरदिंदु मुकर्जी के आलेख ‘गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर –एक सरव,…Continue

Started on Monday

गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर – एक सरव, विच्छिन्न चिंतन: डॉ. शरदिंदु मुकर्जी

(इस आलेख पर ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की गोष्ठी जुलाई 2020 में परिचर्चा हुयी)“जॉनोमॉनो मुग्धोकॉरो उच्चो ओभिलाष.  तोमार बोंधुर पॉथ ऑनोन्तो ऑपारओतिक्रोम कॉरा जाए जॉतो पान्थोशाला   तॉतो जैनो ऑग्रोशॉर होते इच्छा…Continue

Started Aug 2

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्यिक परिचर्चा माह जून 2020:: एक प्रतिवेदन   ::    संकलनकर्ता - डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

 दिनांक21.06.2020, रविवार को ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्यिक परिचर्चा माह जून   2020 का ऑन लाइन आयोजन हुआ I इसके प्रथम चरण में गज़लकार श्री भूपेन्द्र सिंह की निम्नांकित ग़ज़ल पर परिचर्चा हुयी Iयूँ तो कमी…Continue

Started Jul 21

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्य-संध्या माह जून 2020–एक प्रतिवेदन  :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की ऑनलाइन मासिक काव्य गोष्ठी 21 जून 2020 (रविवार) को हुई I सभी उत्साही सुधीजनों ने इसे एक अविस्मरणीय ’धज’ देकर गौरवान्वित किया I अध्यक्ष डॉ. कौशाम्बरी के निर्देशन में संचालक आलोक…Continue

Started Jul 14

 

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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्यिक परिचर्चा माह जुलाई 2020:: एक प्रतिवेदन     ::   डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्यिक परिचर्चा माह जुलाई  2020 (दिनांक 26 जुलाई 2020, रविवार) का ऑन लाइन आयोजन हुआ I इसके प्रथम चरण में डॉ, शरदिंदु मुकर्जी के आलेख ‘गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर –एक सरव, विच्छिन्न चिंतन’ पर साहित्यिक परिचर्चा हुयी, जिसमें ओबीओ लखनऊ-चैप्टर के लगभग सभी सदस्यों ने प्रतिभाग लिया I गुरुदेव को भारत ही नहीं सारा विश्व जानता है I उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उनका ज्ञान क्षेत्र असीमित और बहुमुखी था I धर्म, अध्यात्म, दर्शन, विज्ञान, ज्योतिष, संगीत, चित्रकारिता आदि गुण…See More
Monday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर – एक सरव, विच्छिन्न चिंतन      ::डॉ, शरदिंदु मुकर्जी

(इस आलेख पर ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की गोष्ठी जुलाई 2020 में परिचर्चा हुयी)“जॉनोमॉनो मुग्धोकॉरो उच्चो ओभिलाष.  तोमार बोंधुर पॉथ ऑनोन्तो ऑपारओतिक्रोम कॉरा जाए जॉतो पान्थोशाला   तॉतो जैनो ऑग्रोशॉर होते इच्छा हॉय”                                   (‘अभिलाष’ कविता से : रवींद्रनाथ ठाकुर)जनमन मुग्धकारी उच्च अभिलाष  कष्टकारी पथ है यह अनन्त अपारजैसे जैसे विश्रामालय करें अतिक्रम  और और जाने की इच्छा हो चरम                                          (भावानुवाद : डॉ शरदिंदु मुकर्जी )उपरोक्त ऐतिहासिक पंक्तियाँ भारत…See More
Aug 2
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्यिक परिचर्चा माह जून 2020:: एक प्रतिवेदन   ::    संकलनकर्ता - डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

 दिनांक21.06.2020, रविवार को ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्यिक परिचर्चा माह जून   2020 का ऑन लाइन आयोजन हुआ I इसके प्रथम चरण में गज़लकार श्री भूपेन्द्र सिंह की निम्नांकित ग़ज़ल पर परिचर्चा हुयी Iयूँ तो कमी न थी कोई इल्मो वक़ार में,फिर भी खड़े रहे उसी लम्बी क़तार में. II1IIजब जानते हैं चार दिनों की है ज़िन्दगी,नफ़रत में क्यों बिताएँ बिताएँगे प्यार में. II2IIटूटा जो सिलसिला-ए-शबे-हिज़्र पूछ मत,क्या-क्या उठे ख़याल दिलेबेक़रार में. II3IIअब अपनी ख़्वाहिशों पे तू क़ाबू तो रख बशर,             खुशियाँ रहेंगी ख़ुद ही…See More
Jul 21
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्य-संध्या माह जून 2020–एक प्रतिवेदन  :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की ऑनलाइन मासिक काव्य गोष्ठी 21 जून 2020 (रविवार) को हुई I सभी उत्साही सुधीजनों ने इसे एक अविस्मरणीय ’धज’ देकर गौरवान्वित किया I अध्यक्ष डॉ. कौशाम्बरी के निर्देशन में संचालक आलोक रावत ’आहत लखनवी’ ने अपनी भूमिका का समीचीन निर्वाह करते हुए डॉ. अशोक को सबसे पहले काव्य-पाठ के लिए बुलाया I डॉ. शर्मा आज अपनी कविता में भौतिक विज्ञान की Quantum theory लेकर आये I वैज्ञानिक प्लांक का यह सिद्धांत ऊर्जा के उत्सर्जन एवं अवशोषण और कणों की गति की बात करता है I डॉ. शर्मा ने इसमें एक सूत्र और…See More
Jul 14
Alok Rawat replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्य-संध्या माह मई 2020–एक प्रतिवेदन ::  डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव
"वाक़ई, ओबीओ लखनऊ चैप्टर की माह मई 2020 की मासिक गोष्ठी बहुत ही शानदार ढंग से सम्पन्न हुई | इस गोष्ठी में सभी रचनाकारों ने अपने बेहतरीन कलाम पेश किये थे और गोष्ठी अपने उरूज़ पर पहुंची थी | भले ही लखनऊ चैप्टर में कम लोग हों लेकिन ये 10 - 12 लोग अपनी…"
Jul 4
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post गीत (सरसी छंद में )
"आद0 गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन वाह वाह वाह वाह,, बहुत बेहतरीन और उम्दा सृजन हुआ है आदरणीय। बधाई स्वीकार कीजिये"
Jun 16
Samar kabeer commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post गीत (सरसी छंद में )
"जनाब डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छा गीत हुआ है,बधाई स्वीकार करें ।"
Jun 16
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post गीत (सरसी छंद में )
"आद0 गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन वाह वाह वाह वाह,, बहुत बेहतरीन और उम्दा सृजन हुआ है आदरणीय। बधाई स्वीकार कीजिये"
Jun 16
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a blog post

गीत (सरसी छंद में )

तू मेरी साँसों का परिमल,  मैं तेरा  उच्छ्वास I बन उपवन भौरे गुंजन सबदेते है अवसाद Iतृप्ति मुझे मिल जाती है यदिथोड़ा मिले प्रसाद Iअनुभव के पन्नों में बिखरा, रागायित इतिहास I जाने कहाँ तिरोहित हैं सबमान और सम्मान Iघुल जाता है तेरे सम्मुखपुरुषोचित अभिमान Iअग्नि-खंड यह बन जाता है, मुग्ध प्रणय का दास I उल्काओं को धूल बनानेकी है तुममें शक्ति Iवही शक्ति मेरे मानस में भरती है अनुरक्ति Iतुम मुझमें मैं तुम्हे समर्पित, बहका है उल्लास I आवेशित विद्युत् तरंग सीलहरों पर चलती Iमेरी नस-नस के प्रवाह मेंपारा सा…See More
Jun 15
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post गीत- मैं पुरुष हूँ! मात्र इस हित, मत करो अपमान मेरा
"वाह बड़ा ही स्फूर्ति भरा गीत  i सुरेन्द्र जी आपको बधाई I "
Jun 15
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्य-संध्या माह मई 2020–एक प्रतिवेदन ::  डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की ऑनलाइन काव्य गोष्ठी 24 मई 2020 (रविवार) को हुई I कवियों का उत्साह अनुभवगम्य रहा I अध्यक्ष आये भी नहीं  थे कि उत्साही प्रस्तोता सुगबुगाने लगे I कवयित्री नमिता सुंदर के आते ही अनुमति पाकर संचालक आलोक रावत ’आहत लखनवी’ ने अपनी कमान सभाल ली और सर्वप्रथम कवयित्री आभा खरे को काव्य-पाठ के लिए आमंत्रित किया I आभा जी ने चार क्षणिकाएँ सुनाकर वातावरण को आभायित कर दिया I एक से बढ़कर एक रचना I श्रेष्ठ से श्रेष्ठतर होती हुई  I प्रेम की  सकारात्मक अनुभूति लिए निम्न क्षणिकाएँ देखिये…See More
Jun 9

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion फर्क है ग़ज़ल  और छंद के मात्रिक विधान में     :: डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव in the group भारतीय छंद विधान
"आदरणीय गोपाल नारायण जी,  आपके कठोर, गहन तथा अनवरत अध्यवसाय के प्रति मन सदैव नत रहता है. इसका हम जैसे अभ्यासी अपनी क्षमतानुसार चर्चा भी करते रहते हैं. किन्तु, प्रस्तुत आलेख का उद्येश्य बिन्दुवत होते हुए भी मूलभूत तथ्यों की बिसात पर न होने के…"
Jun 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion फ़ारसी की बह्र बनाम हिन्दी के छंद                                    डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव in the group भारतीय छंद विधान
"आदरणीय गोपाल नारायणजी, इस आलेख की ओबीओ-पटल पर हुई प्रस्तुति के विरुद्ध मैं व्यक्तिगत तौर पर कड़ी आपत्ति दर्ज़ कराता हूँ.  बिना मूलभूत जानकारी को हृदयंगम किये, बिना विशिष्ट चर्चा के आवश्यक पहलुओं से ग़ुज़रे आलेख को उत्साहपूर्वक प्रस्तुत तो कर दिया…"
Jun 6
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

पूर्वराग के रंग कच्चे भी और पक्के भी: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

मानव के रूप में हम सभी ने अपने अंतस में शृंगार रस के संयोग और वियोग दोनों स्वरूपों का अनुभव अवश्य किया होगा I इस रस का स्थाई भाव ‘रति’ है I शृंगार रस की मूल भावना काम है, जो चार पुरुषार्थों में से एक माना जाता है I मैं एक बात स्पष्ट करना चाहूंगा कि काम भावना पर आधारित होते हए भी शृंगार रस न तो भदेश होता है और न अश्लील और यदि कोई कवि अश्लील शृंगार योजना करता है तो वह न केवल शृंगार की मर्यादा तोड़ता है अपितु वह शृंगार में वीभत्स की योजना करता है I साहित्यिक परिभाषा में इसे रसाभास कहते हैं I रसाभास…See More
Jun 3
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion आयास चाहती है दोहे की सिद्धि    :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव in the group भारतीय छंद विधान
"वाह वाह श्रीवास्तव जी | आपने बहुत सुन्दर व्याख्या की है खास तौर से तीसरे त्रिकल को बहुत सरलता से समझाया है | प्रायः दोहाकारों से यहाँ ही गलती होती है | आपको बधाई और धन्यवाद भी |  - शून्य आकांक्षी "
Jun 2
Shyam Narain Verma replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion आयास चाहती है दोहे की सिद्धि    :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव in the group भारतीय छंद विधान
"आदरणीय प्रणाम, बहुत ही सुंदर तरीके से अच्छी जानकारी प्रस्तुत करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद l सादर"
May 31

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LUCKNOW (UTTAR PRADESH)
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LUCKNOW
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गीत (सरसी छंद में )

तू मेरी साँसों का परिमल,  मैं तेरा  उच्छ्वास I

 

बन उपवन भौरे गुंजन सब

देते है अवसाद I

तृप्ति मुझे मिल जाती है यदि

थोड़ा मिले प्रसाद I

अनुभव के पन्नों में बिखरा, रागायित इतिहास I

 

जाने कहाँ तिरोहित हैं सब

मान और सम्मान I

घुल जाता है तेरे सम्मुख

पुरुषोचित अभिमान I

अग्नि-खंड यह बन जाता है, मुग्ध प्रणय का दास I

 

उल्काओं को धूल बनाने

की है तुममें शक्ति I

वही शक्ति…

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Posted on June 15, 2020 at 7:50pm — 3 Comments

टिड्डियाँ चीन नहीं जायेंगी

टिड्डियाँ   

चीन नहीं जायेंगी

वह आयेंगी 

तो सिर्फ भारत

क्योंकि वह जानती हैं

कि चीन में

बौद्ध धर्म आडंबर में है

और भारत में

आचरण है, संस्कार है

यहाँ अहिंसा  

परम धर्म है

यहाँ आजादी है  

अभिव्यक्ति की

भ्रमण की, निवास की

व्यवसाय की. समुदाय की

जो चीन में नहीं है

वे जानती हैं

चीन यदि जायेंगी

तो बच नहीं पाएंगी 

आहार पाने की कोशिश में

आहार बन…

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Posted on May 28, 2020 at 4:59pm — 4 Comments

मसीहा

अधूरा था

मेरा ज्ञान

सर्वभक्षी के बारे में

मै जानता था

केवल अग्नि है सर्व भक्षी



मगर

सब कुछ खाते थे वे

सांप, झींगुर,कीट –पतंग

यहाँ तक कि चमगादड़ भी

असली सर्वभक्षी तो ये थे

इन्हें पता था

प्रकृति लेती है बदला

पर उन्हें भरोसा था

कि वे बदल देंगे

अपने ज्ञान-विज्ञान से

विनाश की दशा और गति

पर जब हुआ

विनाश का तांडव्

फिर कोई न बचा पाया

और न कोइ…

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Posted on April 22, 2020 at 1:30pm — 2 Comments

दूरियां

जब नहीं था

समय

तब तुम घूमती थी

और मंडराती थी

हमारे इर्द-गिर्द

करती थी परिक्रमा

और मैं देता था झिडक  

 

अब मैं

हूँ घर पर मुसलसल

साथ तुम भी हो

व्यस्तता भी अब नहीं कोई   

कितु मेरे पास तुम आती नहीं

परिक्रमा तो दूर की है बात

ढंग से मुसक्याती नहीं    

 

 

नहीं होता

यकीं इस बदलाव पर  

नहीं आ सकतीं

किसी बहकावे में तुम

और फिर अफवाह की भी बात क्या…

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Posted on April 10, 2020 at 1:51pm — 2 Comments

Comment Wall (53 comments)

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At 7:06pm on October 30, 2017, Alok Rawat said…

आदरणीय डॉक्टर साहेब
आपके द्वारा रचित खंडकाव्य मेघदूत का कथानक पढ़ा .बड़ा साहसिक कदम उठाया है आपने .आपने मेरी जिज्ञासा बहुत बढ़ा दी है .पूरा मेघदूत पढ़ने के लिए मन लालायित हो उठा है . आशा करता हूँ की बहुत जल्दी आपका खंडकाव्य पढ़ने को मिलेगा .महाकवि कालिदास की रचना का हिंदी काव्यानुवाद कितना बड़ा कार्य है और इसके लिए कितनी हिम्मत चाहिए मैं समझ सकता हूँ .किन्तु आपने इस कार्य को पूर्ण करके सामान्य जनमानस को भी मेघदूत की जो सौगात भेंट की है उसके लिए हिंदी साहित्य सदैव आपका ऋणी रहेगा . आप ऐसे ही पुनीत कार्य करते रहें .हमारी शुभकामनाएं सदैव आपके साथ हैं .

At 9:17pm on June 27, 2016, Sulabh Agnihotri said…

स्वागत है आदरणीय !

At 7:02pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 12:44pm on September 23, 2015, gaurav bhargava said…

वह अगले साल आएगा - इस वाक्य में कौन सा कारक है?
1)  कर्म कारक
2) अपादान कारक
3) अधिकरण कारक
4) सम्बन्ध कारक

At 6:35pm on August 6, 2015, Harash Mahajan said…

आदरणीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी कृतज्ञ हूँ सर !!

At 8:06pm on August 1, 2015, Prashant Priyadarshi said…

आ. गोपाल नारायन सर, ये घटना मेरे सामने की है(मेरे परम मित्र के साथ घटी हुई) इसीलिए मैंने इस पर लिखने का प्रयास किया है. एक प्रयास थी इस संवेदनशील मुद्दे पर लिखने की, काफ़ी कमियाँ रह गई हैं. सुधरा हुआ रूप निकट भविष्य में पुनः आप सभी श्रेष्ठ एवं गुणीजनों के समक्ष प्रस्तुत करूँगा. कहानी पर समय देकर मार्गदर्शन के लिए आपको कोटिशः धन्यवाद. आपके द्वारा इंगित किए गए बिन्दुओं  पर काम करके यह कहानी पुनः पोस्ट करूँगा.

At 12:16am on July 19, 2015, kanta roy said…
नतमस्तक हुई मै पाकर यह सम्मान , आदर में श्री माननीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आपके साथ ही ओबीओ की भी करती हूँ गुणगान ।
At 9:23am on June 5, 2015, Manan Kumar singh said…

'

यही है कविता का मर्म

नियम नहीं, धर्म नहीं

बस केवल कर्म'.....आदरणीय गोपाल भाईजी, बहुत बढ़िया, कविता कर्म प्रधान हो यह लक्ष्य होना चाहिए, सादर। 

At 2:07pm on April 16, 2015, jaan' gorakhpuri said…

बहुत बहुत आभार! आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव सर! स्नेह बनाये रक्खे!

At 5:37pm on February 28, 2015, maharshi tripathi said…

आ. डॉ गोपाल नारायण जी ,,,कविता के इस मंच पर ,,अपना मित्र बनाकर  आपने  मुझे पुरस्कार  दिया ,,आपका हार्दिक आभार और आशा है ,यूँ ही हम छोटों को आशीष देते रहेंगे |

 
 
 

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