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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव
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  • Lucknow Uttar Pradesh
  • India
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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Discussions

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह जुलाई 2019 – एक प्रतिवेदन       :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

सावन का महीना I ग्रामीण अंचल में इन दिनों मल्हार गाया जाता है I कृष्ण पक्ष की एकादशी अर्थात 28 जुलाई 2019 के सायं 4 बजे ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या 37, रोहतास एन्क्लेव, फैजाबाद रोड (डॉ.…Continue

Started on Wednesday

मलिक मुहम्मद जायसी  के जीवन वृत्त पर लिखे गए ऐतिहासिक उपन्यास 'पंडितन केर पछलगा' के लोकार्पण पर संदीप कुमार सिंह की रिपोर्ट    प्रस्तुति- डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव

कैफी आज़मी एकेडमी., लखनऊ में  दिनांक 21-7-2019 दिन रविवार को सम्पन्न हुए समारोह में लोकार्पण के पश्चात लेखकीय वक्तव्य देते हुए डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव ने अपने उपन्यास की सृजन प्रक्रिया पर प्रकाश…Continue

Started Jul 23

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह जून 2019 – एक प्रतिवेदन डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

चढा असाढ, गगन घन गाजा । साजा बिरह दुंद दल बाजा ॥ धूम, साम, धीरे घन धाए । सेत धजा बग-पाँति देखाए ॥ खडग-बीजु चमकै चहुँ ओरा । बुंद-बान बरसहिं घन घोरा ॥                      -पद्मावत , मलिक मुहम्मद…Continue

Started Jul 22

यक्ष का संदेश (मेघदूत के काव्यानुवाद ) पर डा. नलिनरंजन सिंह का वक्तव्य    ::   प्रस्तुति -गोपाल नारायण श्रीवास्तव

दिनांक  23 जून 2019  ‘ डॉ.. गोपाल नारायण श्रीवास्ताव कृत यक्ष का संदेश (मेघदूत के काव्यानुवाद) का पाठ करते हुए  मुझे याद आया कि अपने विद्यार्थी जीवन में मैंने नागार्जुन की कविता ‘कालिदास सच-सच…Continue

Started Jul 1

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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post दशा (लघुकथा )
"आ० विनय जी , सादर आभार "
yesterday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted an event

ओबीओ, लखनऊ चैप्टर at डॉ. शरदिंदु मुकर्जी का आवास

August 25, 2019 from 3pm to 6pm
‘उड़ान’ और ‘भरी दुपहरी बंजर-बंजर’’ शीर्षक कवितों का रचनाकार सुश्री संध्या सिंह द्वारा पाठ और फिर परिचर्चा तथा  काव्य गोष्ठी See More
Friday
विनय कुमार commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post दशा (लघुकथा )
"वाह, न्यूनतम शब्दों में अधिकतम कहती रचना, बहुत बहुत बधाई आपको आ डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव साहब"
Friday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post दशा (लघुकथा )
"आ० समर कबीर साहब , धन्यवाद सर I "
Friday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post दशा (लघुकथा )
"अग्रज निकोर जी , आशर्वाद हेतु आभारी हूँ I  सादर I "
Friday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post दशा (लघुकथा )
"आओ तेजवीर सिंह साहब , अनुग्रहीत हुआ I "
Friday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post दशा (लघुकथा )
"आ० सुशील सरना जी , सादर आभार I "
Friday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post दशा (लघुकथा )
"आ० शेख  शहजाद उस्मानी साहब , बहुत बहुत शुक्रिया I "
Friday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post दशा (लघुकथा )
"आ० विजय सर, आभार "
Friday
Samar kabeer commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post दशा (लघुकथा )
"जनाब डॉ. गोपाल नारायण जी आदाब,बहुत उम्द: लघुकथा लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Friday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह जुलाई 2019 – एक प्रतिवेदन       :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

सावन का महीना I ग्रामीण अंचल में इन दिनों मल्हार गाया जाता है I कृष्ण पक्ष की एकादशी अर्थात 28 जुलाई 2019 के सायं 4 बजे ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या 37, रोहतास एन्क्लेव, फैजाबाद रोड (डॉ. शरदिंदु जी के आवास) पर ग़ज़ल के सुकुमार गायक आलोक रावत ‘आहत लखनवी’ के सौजन्य से आयोजित हुई I इस कार्यक्रम की अध्यक्षता गाजियाबाद से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. धनंजय सिंह ने की I संचालन की वल्गा मनोज शुक्ल ‘मनुज’ ने संभाली I    कार्यक्रम के प्रथम चरण में डॉ. शरदिंदु मुकर्जी ने अपनी दो रचनाओं का पाठ किया I…See More
Thursday
vijay nikore commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post दशा (लघुकथा )
" इतने कम शब्दों में  कमाल की लघुकथा लिखी है। हार्दिक बधाई, आदरणीय गोपाल नारायन जी।"
Wednesday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आ० दीदी , आपका बहुत बहुत बधाई इ आपसे हम गौरवान्वित हैं I   सादर  I "
Wednesday
TEJ VEER SINGH commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post दशा (लघुकथा )
"हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी।बेहतरीन कटाक्ष।"
Aug 10
Sushil Sarna commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post दशा (लघुकथा )
"वाह आदरणीय गोपाल जी बहुत ही कम शब्दों में सागर से गहरे अर्थ को आपने चित्रित किया है। विचारणीय प्रश्न है हम नदी को नाला करना चाहते हैं या उसे उसके मूल रूप में रहने देना चाहते हैं। आपके सृजन को दिल से सलाम।"
Aug 10
Sheikh Shahzad Usmani commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post दशा (लघुकथा )
"आदाब। गागर में सागर। वाक्यों के बाण। यथार्थ और मूल्यांकन। हार्दिक बधाई और आभार इस बेहतरीन विचारोत्तेजक सृजन के लिए आदरणीय डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव साहिब।"
Aug 10

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Male
City State
LUCKNOW (UTTAR PRADESH)
Native Place
LUCKNOW
Profession
RETD. GOVT. SERVANT
About me
Ph.D. in Hindi Lit. AND ACTIVE IN CREATIVE HINDI LITERATURE

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दशा (लघुकथा )

‘छी: कितने गंदे, कुत्सित और बदबूदार हो तुम I तुम्हें देखकर घिन आती है I’ नदी ने मुंह बनाते हुए नाले से कहा I

‘बुरा न मानना दीदी आजकल तुम्हारी दशा भी मुझसे अच्छी नहीं है I’ नाले ने मुस्कराते हए जवाब दिया I

(मौलिक ?अप्रकाशित )

Posted on August 9, 2019 at 10:30am — 14 Comments

उपेक्षा (लघुकथा )

 प्रयाग में गंगा से गले मिलकर यमुना ने कहा –” दीदी अब आगे तू ही जा I मेरी इच्छा  तुझसे भेंट करने की थी, वह पूरी हुयी I रही समुद्र में जाकर सायुज्य हो जाने की बात तो वह मोक्ष तुझे ही मुबारक हो I वह मुझे नहीं चाहिए I मैं अब इससे आगे नही जाऊँगी, न अकेले और न तेरे साथ I”

“मगर क्यों बहन ? तुम मेरे साथ क्यों नही चलोगी ? दुनिया मुक्ति के लिए कितने जतन करती है और तू है की मुख चुरा रही है ?”

“हां दीदी ?”

“पर क्यों ?”

“तू हमेशा ज्ञानियों के संग में रही है I…

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Posted on August 1, 2019 at 9:27pm — 14 Comments

महक

फूल महकते हैं

वे सिर्फ महकते नहीं

अपितु देते हैं एक संदेश

कि अपने भीतर

आप भी भर लें

इतनी महक

कि आपका अस्तित्व ही

बन जाए परिमल

और वह महकाये पूरे विश्व को

बिना किसी यात्रा या भ्रमण के

और खुद दुनिया भर से लोग

आयें तुम्हारे पास

तुम्हारे सुवास से आकर्षित होकर

तुम्हारे परिमल की

एक गंध पाने को

जैसा टूट पड़ते हैं  शलभ

किसी दिए पर

बिना किये अपने प्राणों की परवाह

पर तुम जलाना…

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Posted on July 17, 2019 at 8:00pm — 2 Comments

संकट

थक गया हूँ

चाहता हूँ

तनिक सा विश्राम ले लूँ

तोड़कर मैं अर्गला

नश्वर वपुष की

किन्तु संकट है विकट

ढूंढें नही मिलता मुझे 

इस ठौर पानी

एक चुल्लू साफ़

सिर्फ मरने के लिए

(मौलिक  अप्रकाशित) 

Posted on July 5, 2019 at 6:30pm — 7 Comments

Comment Wall (53 comments)

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At 7:06pm on October 30, 2017, Alok Rawat said…

आदरणीय डॉक्टर साहेब
आपके द्वारा रचित खंडकाव्य मेघदूत का कथानक पढ़ा .बड़ा साहसिक कदम उठाया है आपने .आपने मेरी जिज्ञासा बहुत बढ़ा दी है .पूरा मेघदूत पढ़ने के लिए मन लालायित हो उठा है . आशा करता हूँ की बहुत जल्दी आपका खंडकाव्य पढ़ने को मिलेगा .महाकवि कालिदास की रचना का हिंदी काव्यानुवाद कितना बड़ा कार्य है और इसके लिए कितनी हिम्मत चाहिए मैं समझ सकता हूँ .किन्तु आपने इस कार्य को पूर्ण करके सामान्य जनमानस को भी मेघदूत की जो सौगात भेंट की है उसके लिए हिंदी साहित्य सदैव आपका ऋणी रहेगा . आप ऐसे ही पुनीत कार्य करते रहें .हमारी शुभकामनाएं सदैव आपके साथ हैं .

At 9:17pm on June 27, 2016, Sulabh Agnihotri said…

स्वागत है आदरणीय !

At 7:02pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 12:44pm on September 23, 2015, gaurav bhargava said…

वह अगले साल आएगा - इस वाक्य में कौन सा कारक है?
1)  कर्म कारक
2) अपादान कारक
3) अधिकरण कारक
4) सम्बन्ध कारक

At 6:35pm on August 6, 2015, Harash Mahajan said…

आदरणीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी कृतज्ञ हूँ सर !!

At 8:06pm on August 1, 2015, Prashant Priyadarshi said…

आ. गोपाल नारायन सर, ये घटना मेरे सामने की है(मेरे परम मित्र के साथ घटी हुई) इसीलिए मैंने इस पर लिखने का प्रयास किया है. एक प्रयास थी इस संवेदनशील मुद्दे पर लिखने की, काफ़ी कमियाँ रह गई हैं. सुधरा हुआ रूप निकट भविष्य में पुनः आप सभी श्रेष्ठ एवं गुणीजनों के समक्ष प्रस्तुत करूँगा. कहानी पर समय देकर मार्गदर्शन के लिए आपको कोटिशः धन्यवाद. आपके द्वारा इंगित किए गए बिन्दुओं  पर काम करके यह कहानी पुनः पोस्ट करूँगा.

At 12:16am on July 19, 2015, kanta roy said…
नतमस्तक हुई मै पाकर यह सम्मान , आदर में श्री माननीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आपके साथ ही ओबीओ की भी करती हूँ गुणगान ।
At 9:23am on June 5, 2015, Manan Kumar singh said…

'

यही है कविता का मर्म

नियम नहीं, धर्म नहीं

बस केवल कर्म'.....आदरणीय गोपाल भाईजी, बहुत बढ़िया, कविता कर्म प्रधान हो यह लक्ष्य होना चाहिए, सादर। 

At 2:07pm on April 16, 2015, jaan' gorakhpuri said…

बहुत बहुत आभार! आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव सर! स्नेह बनाये रक्खे!

At 5:37pm on February 28, 2015, maharshi tripathi said…

आ. डॉ गोपाल नारायण जी ,,,कविता के इस मंच पर ,,अपना मित्र बनाकर  आपने  मुझे पुरस्कार  दिया ,,आपका हार्दिक आभार और आशा है ,यूँ ही हम छोटों को आशीष देते रहेंगे |

 
 
 

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"जय हो.. "
1 hour ago

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"आदरणीय अशोक भाई साहब, आपकी अपेक्षाओं पर अब खरा उतर पा रहा हूँ, इसी की हार्दिक प्रसन्नता…"
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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 100 in the group चित्र से काव्य तक
"जय-जय  इस मुखर अनुमोदन के लिए हार्दिक धन्यवाद, गनेस भाई  शुभातिशुभ"
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 100 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय बाग़ी जी सादर, प्रस्तुत दोहों को सुन्दर पाने के लिए आपका ह्रदय से आभार. सादर "
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 100 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया अनामिका सिंह जी सादर, प्रस्तुत दोहों को चित्र पर बेहतरीन पाने के लिए आपका बहुत-बहुत आभार.…"
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 100 in the group चित्र से काव्य तक
"जी ! उत्तम. सादर नमस्कार. आदरणीय बागी जी. सादर."
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Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 100 in the group चित्र से काव्य तक
" ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 100 का समय कल तक के लिए बढ़ा दिया गया है, अब…"
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Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 100 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, मैं तो बिलकुल सहमत हूँ. सौंवे आयोजन की अवधि तीन दिवस होगी मैं तो ऐसा…"
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Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 100 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय बागी जी रचना को मान देने के लिए आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय सादर नमन"
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"जी आदरणीय सौरभ भाई साहब, आयोजन को एक दिन के लिए बढ़ा देना उचित होगा. "
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Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 100 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय बागी जी सादर प्रस्तुति पर आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया हेतु आपका हृदय से आभार आदरणीय "
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"भाई सत्यनारायण जी, आपकी दूसरी प्रस्तुति भी अच्छी और चित्र के अनुरूप हुई है, बहुत बहुत बधाई आपको."
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