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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव
  • Male
  • Lucknow Uttar Pradesh
  • India
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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Discussions

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह जून 2019 – एक प्रतिवेदन डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

चढा असाढ, गगन घन गाजा । साजा बिरह दुंद दल बाजा ॥ धूम, साम, धीरे घन धाए । सेत धजा बग-पाँति देखाए ॥ खडग-बीजु चमकै चहुँ ओरा । बुंद-बान बरसहिं घन घोरा ॥                      -पद्मावत , मलिक मुहम्मद…Continue

Started 3 hours ago

यक्ष का संदेश (मेघदूत के काव्यानुवाद ) पर डा. नलिनरंजन सिंह का वक्तव्य    ::   प्रस्तुति -गोपाल नारायण श्रीवास्तव

दिनांक  23 जून 2019  ‘ डॉ.. गोपाल नारायण श्रीवास्ताव कृत यक्ष का संदेश (मेघदूत के काव्यानुवाद) का पाठ करते हुए  मुझे याद आया कि अपने विद्यार्थी जीवन में मैंने नागार्जुन की कविता ‘कालिदास सच-सच…Continue

Started Jul 1

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह मई 2019 – एक प्रतिवेदन                                      डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

बैशाख उतर रहा था, ज्येष्ठ की मुद्रा आक्रामक थी I मौसम के इस संधिकाल में जब ग्रीष्म ने अपनी जिह्वा फैलानी शुरू की, तब 19 मई 2019 को सायं 3 बजे ओपन बुक्स ऑन लाइन के साहित्यिक योद्धा 37, रोहतास…Continue

Started Jun 25

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह अप्रैल 2019 – एक प्रतिवेदन                                      डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

ओबीओ लखनऊ-चैप्टर की साहित्य संध्या माह अप्रैल 2019 का आगाज रविवार दिनांक 28अप्रैल 2019 को श्री भूपेन्द्र सिंह ’होश’ के सौजन्य से 37, रोहतास एन्क्लेव, निकट नील गिरि चौराहा, रवींद्र पल्ली (डॉ. शरदिंदु…Continue

Started May 22

 

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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह जून 2019 – एक प्रतिवेदन डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

चढा असाढ, गगन घन गाजा । साजा बिरह दुंद दल बाजा ॥ धूम, साम, धीरे घन धाए । सेत धजा बग-पाँति देखाए ॥ खडग-बीजु चमकै चहुँ ओरा । बुंद-बान बरसहिं घन घोरा ॥                      -पद्मावत , मलिक मुहम्मद जायसीमनुष्य की तरह प्रकृति में भी स्वभाव परिवर्तन हुआ है I आज जायसी की उक्ति सार्थक नहीं है I आषाढ़ माह की त्रयोदशी अर्थात 30 जून 2019 तक न मेघ-गर्जन हुआ न पानी बरसा और न बिजली चमकी I कुछ बादल आकाश में चहलकदमी करते रहे I बकौल ‘आहत लखनवी’ –न खुश हो इन्हें देखकर ऐ दरख़्तोंये बादल टहलने को निकले हैं घर…See More
3 hours ago
Samar kabeer commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post महक
"जनाब गोपाल नारायण जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
प्रदीप देवीशरण भट्ट commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post महक
"बहुत खुब"
Friday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a blog post

महक

फूल महकते हैंवे सिर्फ महकते नहींअपितु देते हैं एक संदेशकि अपने भीतरआप भी भर लेंइतनी महककि आपका अस्तित्व हीबन जाए परिमलऔर वह महकाये पूरे विश्व कोबिना किसी यात्रा या भ्रमण केऔर खुद दुनिया भर से लोगआयें तुम्हारे पासतुम्हारे सुवास से आकर्षित होकरतुम्हारे परिमल कीएक गंध पाने कोजैसा टूट पड़ते हैं  शलभकिसी दिए परबिना किये अपने प्राणों की परवाहपर तुम जलाना मतउन्हें  सिर्फ देनाअपनी महक क्योंकि महक  ही हैसही मायने मेंभक्ति और प्रेम का सार(मौलिक /अप्रकाशित )See More
Thursday
vijay nikore commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post संकट
"आपकी इस सुन्दर रचना से न जाने क्यूँ मुझको बहादुर शाह ज़फ़र जी की याद आई ... दो गज़ ज़मीं भी न मिली दफ़न के लिए ...।हार्दिक बधाई, भाई गोपाल नारायन जी , बहुत ही सुन्दर ।"
Jul 10
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post संकट
"आ० तिवारी जी  यह महज इत्तेफाक है की मेरी कविता में कुछ सीमा तक २१२२ का स्वतः निर्वाह हुआ पर मैंनेयह रचना बहर में नही की i यदि ऐसा  होता तो आपको चार पंक्तिया पूरे बहर में मिलती जैसे मेरी यह रचना है - युद्ध छल से ही किया लेकिन न रण के दांव…"
Jul 8
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post संकट
"आ० अजी तिवारी जी  यह महज इत्तेफाक है की मेरी कविता में कुछ सीमा तक २१२२ का स्वतः निर्वाह हुआ पर मैंनेयह रचना बहर में नही की i यदि ऐसा  होता तो आपको चार पंक्तिया पूरे बहर में मिलती जैसे मेरी यह रचना है - युद्ध छल से ही किया लेकिन न रण के…"
Jul 8
Ajay Tiwari commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post संकट
"आदरणीय गोपाल जी, महादेवी जी का गीत फ़ाइलातुन (2122) की आवृत्ति पर आधारित है (फ़ाइलातुन x 4). इस छंद (बह्रे रमल) का इस्तेमाल उन्होंने अपने एक और मशहूर गीत 'जाग तुझको दूर जाना' में भी किया है. आपकी कविता भी बहुत हद तक 'फ़ाइलातुन' की…"
Jul 8
Manan Kumar singh replied to डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's discussion हिंदी लेखन की शुद्धता के नियम                                         -   डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव in the group हिंदी की कक्षा
"स्वागत-योग्य।"
Jul 7
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव added a discussion to the group हिंदी की कक्षा
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हिंदी लेखन की शुद्धता के नियम                                         -   डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव

हिंदी लेखन में बड़े लोग भी शुद्ध-अशुद्ध के विचार में प्रायशः चूक जाते हैं i नये लेखकों के तो लेखन का निकष भी यही होना चाहिए की वे कितना शुद्ध या अशुद्ध लिख रहे है I कम्प्यूटर का मंगल फांट तो अशुद्धियों से भरा है और उसमे बार-बार संशोधन करने के बाद भी यह संभावना बनी रहती है कि अभी भी यह त्रुटिहीन नहीं है I पूर्ण शुद्ध लेखन का दावा करना तो विद्वानों के लिए भी मुश्किल है पर यह प्रयास अवश्य होना चाहिए कि हम सप्रयास शुद्ध लेखन कर रहे हैं I इसके लिए कुछ अध्ययन करना पड़े तो वह भी स्वीकार्य होना चाहिए I…See More
Jul 7
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post संकट
"आद0 गोपाल जी सादर अभिवादन। बेहतरीन रचना पर आपको बधाई देता हूँ"
Jul 7
Samar kabeer commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post संकट
"जनाब गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Jul 7
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post संकट
"आ० अजय तिवारी  जी चकित हूँ की १४,१४ मात्राओं में पिरोये महादेवी की गीति रचना से आपने इसकी तुलना कर डाली  i पहली बात तो यह की मैंने छंद रचना, की ही नहीं   i यह तो  सीधी-सीधी समकालीन अतुकांत  लघु कविता है I आपने जो…"
Jul 6
Ajay Tiwari commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post संकट
"आदरणीय गोपाल जी, आपकी इस कविता के छंद ने 'पंथ होने दो अपरिचित प्राण रहने दो अकेला' की याद दिलाई . 'किन्तु संकट है विकट ढूंढें नही मिलता मुझे  इस ठौर पानी एक चुल्लू साफ़ सिर्फ मरने के लिए' आखिरी पंक्ति छंद से बाहर है. वैसे…"
Jul 6
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Jul 6
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

यक्ष का संदेश (मेघदूत के काव्यानुवाद ) पर डा. नलिनरंजन सिंह का वक्तव्य    ::   प्रस्तुति -गोपाल नारायण श्रीवास्तव

दिनांक  23 जून 2019  ‘ डॉ.. गोपाल नारायण श्रीवास्ताव कृत यक्ष का संदेश (मेघदूत के काव्यानुवाद) का पाठ करते हुए  मुझे याद आया कि अपने विद्यार्थी जीवन में मैंने नागार्जुन की कविता ‘कालिदास सच-सच बतलाना’ पढ़ी थी I कविता के अंत में नागार्जुन कहते हैं -पर पीड़ा से पूर-पूर होथक-थककर और चूर-चूर होअमल-धवल गिरि के शिखरों परप्रियवर! तुम कब तक सोये थे?रोया यक्ष कि तुम रोये थे!कालिदास! सच-सच बतलाना!यह हम लोगों ने पढ़ा था, ‘कालिदास सच-सच बतलाना’ कविता में, जो नागार्जुन की कविता है I यह बार-बार मेघदूत जो है, ये…See More
Jul 1

Profile Information

Gender
Male
City State
LUCKNOW (UTTAR PRADESH)
Native Place
LUCKNOW
Profession
RETD. GOVT. SERVANT
About me
Ph.D. in Hindi Lit. AND ACTIVE IN CREATIVE HINDI LITERATURE

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महक

फूल महकते हैं

वे सिर्फ महकते नहीं

अपितु देते हैं एक संदेश

कि अपने भीतर

आप भी भर लें

इतनी महक

कि आपका अस्तित्व ही

बन जाए परिमल

और वह महकाये पूरे विश्व को

बिना किसी यात्रा या भ्रमण के

और खुद दुनिया भर से लोग

आयें तुम्हारे पास

तुम्हारे सुवास से आकर्षित होकर

तुम्हारे परिमल की

एक गंध पाने को

जैसा टूट पड़ते हैं  शलभ

किसी दिए पर

बिना किये अपने प्राणों की परवाह

पर तुम जलाना…

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Posted on July 17, 2019 at 8:00pm — 2 Comments

संकट

थक गया हूँ

चाहता हूँ

तनिक सा विश्राम ले लूँ

तोड़कर मैं अर्गला

नश्वर वपुष की

किन्तु संकट है विकट

ढूंढें नही मिलता मुझे 

इस ठौर पानी

एक चुल्लू साफ़

सिर्फ मरने के लिए

(मौलिक  अप्रकाशित) 

Posted on July 5, 2019 at 6:30pm — 7 Comments

प्रतीक्षा

एक लम्बी प्रतीक्षा के बाद

हुआ होगा मेरा जन्म

फिर एक दीर्घ प्रतीक्षा

और हुई होगी

मेरे बड़े होने की

और मेरे बड़े हो जाने पर

हो गया होगा उनकी 

सारी प्रतीक्षाओं का अंत

जिन्होंने मन्नतें माँगी होंगी

दुआयें की होंगी

उपवास रखे होंगे

मेरे आने की प्रतीक्षा में I  

(मौलिक /अप्रकाशित )

Posted on June 20, 2019 at 6:00pm — 8 Comments

उम्मीद का पेड़  (लघुकथा )

बूढ़े ने आँखें बंद किये-किये ही करवट ली I उसका ध्यान किचन से आती आवाज की ओर चला गया I

‘कैसा बना है ?’– बहू ने पूछा I

‘बहुत बढ़िया‘- बेटे ने कहा –‘थोड़ा चटनी और डालो I हाँ बस--बस I’

‘अच्छा लगा---? नमक ठीक पड़ा है न ?’

‘हाँ, बहुत मजेदार है I थोडा और कुरकुरा करो I’

‘जल जायेंगे ---‘

‘जलेंगे नहीं, बस थोड़ा लाल हो जाय I ‘- लडके ने उकसाया  I फिर जैसे उसे कुछ याद आया –‘पापा कहाँ हैं ?’

बूढ़े की आँखों में चमक आयी I कम से कम बेटे को तो उसकी फ़िक्र है I उसके…

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Posted on March 18, 2019 at 2:30pm — 7 Comments

Comment Wall (53 comments)

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At 7:06pm on October 30, 2017, Alok Rawat said…

आदरणीय डॉक्टर साहेब
आपके द्वारा रचित खंडकाव्य मेघदूत का कथानक पढ़ा .बड़ा साहसिक कदम उठाया है आपने .आपने मेरी जिज्ञासा बहुत बढ़ा दी है .पूरा मेघदूत पढ़ने के लिए मन लालायित हो उठा है . आशा करता हूँ की बहुत जल्दी आपका खंडकाव्य पढ़ने को मिलेगा .महाकवि कालिदास की रचना का हिंदी काव्यानुवाद कितना बड़ा कार्य है और इसके लिए कितनी हिम्मत चाहिए मैं समझ सकता हूँ .किन्तु आपने इस कार्य को पूर्ण करके सामान्य जनमानस को भी मेघदूत की जो सौगात भेंट की है उसके लिए हिंदी साहित्य सदैव आपका ऋणी रहेगा . आप ऐसे ही पुनीत कार्य करते रहें .हमारी शुभकामनाएं सदैव आपके साथ हैं .

At 9:17pm on June 27, 2016, Sulabh Agnihotri said…

स्वागत है आदरणीय !

At 7:02pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 12:44pm on September 23, 2015, gaurav bhargava said…

वह अगले साल आएगा - इस वाक्य में कौन सा कारक है?
1)  कर्म कारक
2) अपादान कारक
3) अधिकरण कारक
4) सम्बन्ध कारक

At 6:35pm on August 6, 2015, Harash Mahajan said…

आदरणीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी कृतज्ञ हूँ सर !!

At 8:06pm on August 1, 2015, Prashant Priyadarshi said…

आ. गोपाल नारायन सर, ये घटना मेरे सामने की है(मेरे परम मित्र के साथ घटी हुई) इसीलिए मैंने इस पर लिखने का प्रयास किया है. एक प्रयास थी इस संवेदनशील मुद्दे पर लिखने की, काफ़ी कमियाँ रह गई हैं. सुधरा हुआ रूप निकट भविष्य में पुनः आप सभी श्रेष्ठ एवं गुणीजनों के समक्ष प्रस्तुत करूँगा. कहानी पर समय देकर मार्गदर्शन के लिए आपको कोटिशः धन्यवाद. आपके द्वारा इंगित किए गए बिन्दुओं  पर काम करके यह कहानी पुनः पोस्ट करूँगा.

At 12:16am on July 19, 2015, kanta roy said…
नतमस्तक हुई मै पाकर यह सम्मान , आदर में श्री माननीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आपके साथ ही ओबीओ की भी करती हूँ गुणगान ।
At 9:23am on June 5, 2015, Manan Kumar singh said…

'

यही है कविता का मर्म

नियम नहीं, धर्म नहीं

बस केवल कर्म'.....आदरणीय गोपाल भाईजी, बहुत बढ़िया, कविता कर्म प्रधान हो यह लक्ष्य होना चाहिए, सादर। 

At 2:07pm on April 16, 2015, jaan' gorakhpuri said…

बहुत बहुत आभार! आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव सर! स्नेह बनाये रक्खे!

At 5:37pm on February 28, 2015, maharshi tripathi said…

आ. डॉ गोपाल नारायण जी ,,,कविता के इस मंच पर ,,अपना मित्र बनाकर  आपने  मुझे पुरस्कार  दिया ,,आपका हार्दिक आभार और आशा है ,यूँ ही हम छोटों को आशीष देते रहेंगे |

 
 
 

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"आपने मेरे कहे को अनुमोदित कर मेरा मान रखा, आदरणीय सत्यनारायण भाईजी।  वैसे, हिंदी भाषा में…"
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"समय समय पर आदरणीय आपसे एवं मंच से जुड़े सुधीजनों से अपनी प्रस्तुति पर मिले मार्गदर्शन हेतु मैं हृदय…"
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"आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी, उत्साहवर्धन के लिए सादर हार्दिक आभार, नमन सादर"
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Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 99 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्राची जी, इस बिंदू पर मैं भी कहना चाहता था, लेकिन आदरणीय सत्यनारायण जी की मराठी भाषी…"
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