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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव
  • Male
  • Lucknow Uttar Pradesh
  • India
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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's Discussions

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह अगस्त 2019 – एक प्रतिवेदन   :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

 24 अगस्त 2019,भाद्रपद अष्टमी दिन शनिवार,बहुत से लोगों ने इस दिन कृष्ण जन्मोत्सव मनाया और उसी औत्स्विक माहौल में सायं 3 बजे ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या का साज 37, रोहतास एन्क्लेव, फैजाबाद रोड…Continue

Started 21 hours ago

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह जुलाई 2019 – एक प्रतिवेदन       :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

सावन का महीना I ग्रामीण अंचल में इन दिनों मल्हार गाया जाता है I कृष्ण पक्ष की एकादशी अर्थात 28 जुलाई 2019 के सायं 4 बजे ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या 37, रोहतास एन्क्लेव, फैजाबाद रोड (डॉ.…Continue

Started Aug 14

मलिक मुहम्मद जायसी  के जीवन वृत्त पर लिखे गए ऐतिहासिक उपन्यास 'पंडितन केर पछलगा' के लोकार्पण पर संदीप कुमार सिंह की रिपोर्ट    प्रस्तुति- डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव

कैफी आज़मी एकेडमी., लखनऊ में  दिनांक 21-7-2019 दिन रविवार को सम्पन्न हुए समारोह में लोकार्पण के पश्चात लेखकीय वक्तव्य देते हुए डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव ने अपने उपन्यास की सृजन प्रक्रिया पर प्रकाश…Continue

Started Jul 23

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह जून 2019 – एक प्रतिवेदन डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

चढा असाढ, गगन घन गाजा । साजा बिरह दुंद दल बाजा ॥ धूम, साम, धीरे घन धाए । सेत धजा बग-पाँति देखाए ॥ खडग-बीजु चमकै चहुँ ओरा । बुंद-बान बरसहिं घन घोरा ॥                      -पद्मावत , मलिक मुहम्मद…Continue

Started Jul 22

 

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डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह अगस्त 2019 – एक प्रतिवेदन   :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

 24 अगस्त 2019,भाद्रपद अष्टमी दिन शनिवार,बहुत से लोगों ने इस दिन कृष्ण जन्मोत्सव मनाया और उसी औत्स्विक माहौल में सायं 3 बजे ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या का साज 37, रोहतास एन्क्लेव, फैजाबाद रोड (डॉ. शरदिंदु जी के आवास) पर आदरणीया कुंती मुकर्जी के सौजन्य से नई ‘धज’ के साथ सजा I  कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध नव-गीतकर्त्री सुश्री सीमा अग्रवाल ने किया और संचालन मनोज कुमार शुक्ल ‘मनुज’ द्वारा संपन्न हुआ I    कार्यक्रम के प्रथम चरण में लोकप्रिय कवयित्री संध्या सिंह की दो कविताओं पर चर्चा हुई …See More
20 hours ago
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on विनय कुमार's blog post उजास- लघुकथा
"आओ विनय जी , बहुत  ही प्रेरक और सुन्दर लघु कथा i आपको बधाई I "
Friday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post उपाय(लघुकथा)
"आ० बागी जी , आप इस पोस्ट पर आये , मैं ह्रदय से अनुग्रहीत हुआ आपका सम्मति से मैं  बिलकुल सहमत हूँ I आगे भी ऐसे ही मार्गदर्शन की उम्मीद  करता हूँ  I आपका बहुत- बहुत आभार I "
Friday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted an event

ओ बी ओ लखनऊ चैप्टर at 37 , रोहतास एन्क्लेव

September 14, 2019 from 3pm to 5pm
साहित्य संध्या माह सितम्बर 2019 See More
Friday

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post उपाय(लघुकथा)
"लघुकथा में कल्पना का पुट काल और परिवेश के अनुसार दी जाती है, किन्तु यह यथार्थ की धरातल पर होने से लघुकथा की खूबसूरती बढ़ती है । यहाँ दो चीजें हैं, माँ द्वारा पूछा जाना और बेटी का जवाब। माँ द्वारा किया गया संवाद यह दिखाता है कि वह परिवार सामान्य…"
Thursday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a blog post

उपाय(लघुकथा)

‘क्या कहा कालेज की ओर से ट्रिप में जा रही हो I साथ में लडके भी होंगे ?’- माँ ने पूछा I‘हां होंगे, तो क्या ?  आजकल बहुतेरे उपाय हैं I आपकी नाक नहीं कटेगीI ‘ (मौलिक / अप्रकाशित )See More
Thursday
Samar kabeer commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post चाय
"जनाब डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आदाब,बहुत उम्द: और सशक्त लघुकथा के लिए बधाई स्वीकार करें ।"
Sep 7
JAWAHAR LAL SINGH commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post चाय
"बहुत ही कम शब्दों में आपने समाज का आइना प्रस्तुत कर दिया ... बहुत बहुत बधाई आदरणीय गोपाल नारायण साहब!"
Sep 5
vijay nikore commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post चाय
"आपकी लघु कथा ने हम सबको, समाज को, आईना दिखा दिया। युवा-व्यव्हार परवरिश पर निर्भर है, और बच्चों पर पड़ रहे बाहर के प्रभाव पर भी। बहुत ही सशक्त रचना। हार्दिक बधाई, आदरणीय डा० गोपाल नारायन जी।"
Sep 3
vijay nikore commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post चाय
"आपकी लघु कथा ने हम सबको, समाज को, आइना दिखा दिया। युवा-व्यव्हार परवरिश पर निर्भर है, और बच्चों पर पढ़ रहे बाहर के प्र्भाव पर भी। बहुत ही सशक्त रचना। हार्दिक बधाई, आदरणीय डा० गोपाल नारायन जी।"
Sep 3
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post चाय
"आ० तेजवीर जी , शुक्रिया , मेहरबानी I "
Aug 31
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post चाय
"आ० शेख उस्मानी साहब , बहुत बहुत धन्यवाद "
Aug 31
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post चाय
"आभार विजय सर I "
Aug 31
TEJ VEER SINGH commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post चाय
"हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी। सम सामयिक एवम वर्तमान में परिवार में बहुओं के आचरण से भरपूर प्रासंगिक लघुकथा।वैसे भी आजकल यह स्पष्ट हो चुका है कि यदि आप ड्राइवर सीट पर नहीं हैं तो जो कुछ चाहिये उसके लिये निवेदन कीजिये, आदेश…"
Aug 30
Sheikh Shahzad Usmani commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post चाय
"आदाब। घर-घर की कहानी। स्वार्थी हुई मेजबानी और मेहमानी। औपचारिकता व्यावसायिकता के युग की मेहरबानी।  हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी।"
Aug 30
Dr. Vijai Shanker commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post चाय
"क्या कहें ? यही एक जीवन-शैली बन गई है , कहीं कहीं। कई तरह की विवशताएँ छिपी हैं इनके पीछे। बधाई , आदरणीय गोपाल नारायण जी , सादर।"
Aug 30

Profile Information

Gender
Male
City State
LUCKNOW (UTTAR PRADESH)
Native Place
LUCKNOW
Profession
RETD. GOVT. SERVANT
About me
Ph.D. in Hindi Lit. AND ACTIVE IN CREATIVE HINDI LITERATURE

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उपाय(लघुकथा)

‘क्या कहा कालेज की ओर से ट्रिप में जा रही हो I साथ में लडके भी होंगे ?’- माँ ने पूछा I

‘हां होंगे, तो क्या ?  आजकल बहुतेरे उपाय हैं I आपकी नाक नहीं कटेगीI ‘

 (मौलिक / अप्रकाशित )

Posted on September 12, 2019 at 4:00pm — 2 Comments

चाय

‘अरे बहू ---‘
‘क्यों गला फाड़ रहे हैं , क्या है ?
‘अरे वो अपने शर्मा जी आये हैं , जरा चाय बना देना, बेटा I’
दस मिनट बाद बूढ़े ससुर ने फिर आवाज दी, ‘अरे बहू -----अभी तक चाय नही आयी ?’
अगले दस मिनट बाद ससुर ने फिर पुकारा .’अरे बहू---?’
शर्मा जी उठ खड़े हुए और हाथ जोड़ कर बोले ,’भाई साहब, चाय रहने दीजिये, मैं जरा जल्दी में हूँ I चाय फिर कभी –‘

(मौलिक/अप्रकाशित )

Posted on August 29, 2019 at 8:41pm — 9 Comments

प्रवृत्ति (लघुकथा )

‘दीदी, आप अपनी लहरों में नाचती हैं I कल-कल करती हैं I इतना आनंदित रहती हैं, कैसे ?’ -पोखर ने नदी से पूछा I

‘अपनी आगे बढ़ने की प्रवृत्ति के कारण’- नदी ने उछलकर कहा I

.

 (मौलिक/अप्रकाशित )

Posted on August 20, 2019 at 3:00pm — 4 Comments

दशा (लघुकथा )

‘छी: कितने गंदे, कुत्सित और बदबूदार हो तुम I तुम्हें देखकर घिन आती है I’ नदी ने मुंह बनाते हुए नाले से कहा I

‘बुरा न मानना दीदी आजकल तुम्हारी दशा भी मुझसे अच्छी नहीं है I’ नाले ने मुस्कराते हए जवाब दिया I

(मौलिक ?अप्रकाशित )

Posted on August 9, 2019 at 10:30am — 14 Comments

Comment Wall (53 comments)

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At 7:06pm on October 30, 2017, Alok Rawat said…

आदरणीय डॉक्टर साहेब
आपके द्वारा रचित खंडकाव्य मेघदूत का कथानक पढ़ा .बड़ा साहसिक कदम उठाया है आपने .आपने मेरी जिज्ञासा बहुत बढ़ा दी है .पूरा मेघदूत पढ़ने के लिए मन लालायित हो उठा है . आशा करता हूँ की बहुत जल्दी आपका खंडकाव्य पढ़ने को मिलेगा .महाकवि कालिदास की रचना का हिंदी काव्यानुवाद कितना बड़ा कार्य है और इसके लिए कितनी हिम्मत चाहिए मैं समझ सकता हूँ .किन्तु आपने इस कार्य को पूर्ण करके सामान्य जनमानस को भी मेघदूत की जो सौगात भेंट की है उसके लिए हिंदी साहित्य सदैव आपका ऋणी रहेगा . आप ऐसे ही पुनीत कार्य करते रहें .हमारी शुभकामनाएं सदैव आपके साथ हैं .

At 9:17pm on June 27, 2016, Sulabh Agnihotri said…

स्वागत है आदरणीय !

At 7:02pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 12:44pm on September 23, 2015, gaurav bhargava said…

वह अगले साल आएगा - इस वाक्य में कौन सा कारक है?
1)  कर्म कारक
2) अपादान कारक
3) अधिकरण कारक
4) सम्बन्ध कारक

At 6:35pm on August 6, 2015, Harash Mahajan said…

आदरणीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी कृतज्ञ हूँ सर !!

At 8:06pm on August 1, 2015, Prashant Priyadarshi said…

आ. गोपाल नारायन सर, ये घटना मेरे सामने की है(मेरे परम मित्र के साथ घटी हुई) इसीलिए मैंने इस पर लिखने का प्रयास किया है. एक प्रयास थी इस संवेदनशील मुद्दे पर लिखने की, काफ़ी कमियाँ रह गई हैं. सुधरा हुआ रूप निकट भविष्य में पुनः आप सभी श्रेष्ठ एवं गुणीजनों के समक्ष प्रस्तुत करूँगा. कहानी पर समय देकर मार्गदर्शन के लिए आपको कोटिशः धन्यवाद. आपके द्वारा इंगित किए गए बिन्दुओं  पर काम करके यह कहानी पुनः पोस्ट करूँगा.

At 12:16am on July 19, 2015, kanta roy said…
नतमस्तक हुई मै पाकर यह सम्मान , आदर में श्री माननीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आपके साथ ही ओबीओ की भी करती हूँ गुणगान ।
At 9:23am on June 5, 2015, Manan Kumar singh said…

'

यही है कविता का मर्म

नियम नहीं, धर्म नहीं

बस केवल कर्म'.....आदरणीय गोपाल भाईजी, बहुत बढ़िया, कविता कर्म प्रधान हो यह लक्ष्य होना चाहिए, सादर। 

At 2:07pm on April 16, 2015, jaan' gorakhpuri said…

बहुत बहुत आभार! आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव सर! स्नेह बनाये रक्खे!

At 5:37pm on February 28, 2015, maharshi tripathi said…

आ. डॉ गोपाल नारायण जी ,,,कविता के इस मंच पर ,,अपना मित्र बनाकर  आपने  मुझे पुरस्कार  दिया ,,आपका हार्दिक आभार और आशा है ,यूँ ही हम छोटों को आशीष देते रहेंगे |

 
 
 

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ये ज़ीस्त रोज़ सूरत-ए-गुलरेज़ हो जनाबराह-ए-गुनाह से सदा परहेज़ हो जनाब**मंज़िल कहाँ से आपके चूमें क़दम…See More
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"आदरणीय गणेश जी 'बागी' जी आदाब और बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ाने के लिए आपका शुक्रगुज़ार हूँ…"
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Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-107
"आदरणीय दण्डपाणि नाहक जी, अच्छी ग़ज़ल कही है, दाद कुबूल करें ।"
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