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बृजेश कुमार 'ब्रज'
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल-नूर की- ऐसा लगता है फ़क़त ख़ार सँभाले हुए हैं,
"मुझ को मिल जाये अगर तू, मैं लिपट कर रो लूँ, आँखें अब तक तेरा इन्कार सँभाले हुए हैं...वाह वाह आदरणीय बेहतरीन ग़ज़ल हुई..सादर"
16 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Anuraag Vashishth's blog post पंडित-मुल्ला खुद नहीं समझे, हमको क्या समझायेंगे - अनुराग
"वाह आदरणीय अनुराग जी..बहुत ही खूबसूरत मधुर ग़ज़ल हुई..सादर"
16 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post was featured

ग़ज़ल...जहर से भरी वादियों में हवा है

कश्मीर के हालातों को लेकर मन की उपज122 122 122 122दवा काम आये न लगती दुआ हैजहर से भरी वादियों में हवा हैयहाँ आदमी मुख़्तलिफ़ है खुदी सेन मुददा है कोई न ही माज़रा हैरुको मत लहू आखरी तक निचोड़ोअभी जिस्म में जान बाकी जरा हैकहीं उड़ न जाये वफ़ा का परिंदाअभी और मारो अभी अधमरा हैसरे राह घर है औ धरती बिछौनाभला मुफलिसों की जरुरत भी क्या है(मौलिक एवं अप्रकाशित)बृजेश कुमार 'ब्रज'See More
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...जहर से भरी वादियों में हवा है
"तहेदिल से शुक्रिया ज़नाब शिज्जु 'शकूर' जी"
yesterday

सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर" commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...जहर से भरी वादियों में हवा है
"सुधिजनों अपने विचार व्यक्त कर दिये हैं, मेरी तरफ से इस प्रयास के लिए बधाई लीजिए"
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Dr.Prachi Singh's blog post मैं अलमस्त फकीर ..... गीत / डॉ० प्राची
"अनुपम सरस गीत..बला की ताजगी समेटे हुए...बधाइयाँ"
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on rajesh kumari's blog post “किन्नर” (लघु कथा 'राज')
"एक कौतुहलपूर्ण बिषय पे कसे हुए कथानक की प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाइयाँ आदरणीया.."
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...जहर से भरी वादियों में हवा है
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी हौसलाफजाई के लिए आपका तहेदिल से शुक्रिया.."
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...जहर से भरी वादियों में हवा है
"आद0 बृजेश कुमार ब्रज जी सादर अभिवादन, समसामयिक मुद्दों पर अच्छी गजल, शेष गुणीजन कह ही चुके है।मेरी इस उम्दा सृजन पर बधाई निवेदित हैं।"
Tuesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post शृंगार रस के दोहे
"वाह आदरणीय सुन्दर सरस दोहे हुए..हार्दिक बधाई सादर"
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Dr Ashutosh Mishra's blog post खुद आंसू पीते हैं
"आदरणीय डा.साहब..एक कसक तो पैदा करती है आपकी कविता..सादर"
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - दुश्मनी घुट के मर न जाये कहीं - ( गिरिराज )
"बेहतरीन आदरणीय बहुत ही बेहतरीन..एक एक शेर लाजबाब.."
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...जहर से भरी वादियों में हवा है
"आदरणीय रवि शुक्ला जी आपकी सार्थक समीक्षा के लिए ह्रदय से अभिनन्दन वंदन करता हैं..आदरणीय बहुत गहराई से नहीं पढ़ा मैंने जहर का बज्न जैसे आम बोलचाल में लिखते बोलते हैं वैसा ही लिया है अब मैं थोड़ा असमंजस में हूँ..आप थोड़ा और स्पष्ट करेंगे तो मुझे आसानी…"
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...जहर से भरी वादियों में हवा है
"आदरणीय अनुराग जी सर्वप्रथम तो रचना पटल पे आपके अमूल्य समय के लिए ह्रदय से आभारी हूँ..आपके मनोहारी शब्दों से अतिप्रसन्ता का अनुभव हुआ..सुधार की गुंजाईश सदैव ही रहती है..दूसरे शेर में मेरे कहने का मतलब है..यहाँ आदमी को अपना पता नहीं है..अपने आप से ही…"
Monday
Ravi Shukla commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...जहर से भरी वादियों में हवा है
"आदरणीय ब्रजेश जी बढ़िया ग़ज़ल कही आप इ मुबारक बाद हाज़िर है । मतले में ज़ह्र का वजन 21 है (केवल जानकारी के लिए बता रहे हैं) चौथे शेर के सानी में अगर " ज़रा और मारो अभी अधमरा है "किया जाए तो कैसा रहे । विनम्र सुझाव मात्र है। आखिरी शेर में आपजो…"
Monday
Anuraag Vashishth commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...जहर से भरी वादियों में हवा है
"आ. बृजेश जी,  सामयिक विषय पर अच्छी ग़ज़ल है.बधाई हो. इसकी सबसे अच्छी बात ये लगी कि इसके शेर सामयिक होते हुए भी सिर्फ तात्कालिकता में कैद नहीं है. दूसरे शेर में थोड़ी-सी अस्पष्टता है. देख लीजियेगा. सादर."
Monday

Profile Information

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Male
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noida
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jhansi

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Blog

ग़ज़ल...जहर से भरी वादियों में हवा है

कश्मीर के हालातों को लेकर मन की उपज
122 122 122 122
दवा काम आये न लगती दुआ है
जहर से भरी वादियों में हवा है

यहाँ आदमी मुख़्तलिफ़ है खुदी से
न मुददा है कोई न ही माज़रा है

रुको मत लहू आखरी तक निचोड़ो
अभी जिस्म में जान बाकी जरा है

कहीं उड़ न जाये वफ़ा का परिंदा
अभी और मारो अभी अधमरा है

सरे राह घर है औ धरती बिछौना
भला मुफलिसों की जरुरत भी क्या है
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Posted on April 23, 2017 at 4:30pm — 17 Comments

ग़ज़ल...प्रीत का मौसम सुहाना आ गया

2122 2122 212
प्रीत का मौसम सुहाना आ गया
चोट खा के मुस्कुराना आ गया

चल रही पुरवा बसन्ती झूम के
टेसुओं को खिलखिलाना आ गया

खिल उठे मधुवन तुम्हारे नाम से
हर कली को गीत गाना आ गया

याद आई फिर तुम्हारी साँझ में
आँसुओं को गुनगुनाना आ गया

दीप ये किसने जलाये बाम पे
याद फिर गुजरा ज़माना आ गया

खिल उठी विस्तृत गगन में चाँदनी
रात को लोरी सुनाना आ गया
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Posted on April 14, 2017 at 5:17pm — 14 Comments

ग़ज़ल....रही माँ पूछती आँसू बहा कर

1222 1222 122


मिलेगा क्या तुम्हें परदेश जा कर
रही माँ पूछती आँसू बहा कर

तड़पता छोड़कर तन्हा शजर को
परिंदा उड़ गया पर फड़फड़ा कर

बहल जाये विकल मासूम बचपन
नजर भर देख ले माँ मुस्कुरा कर

है पल पल टूटती साँसों की माला
बिता लो चार पल ये हँस हँसा कर

न जाओ छोड़कर 'ब्रज' कुंज गलियाँ
दरख्तों ने कहा ये कसमसा कर

.
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Posted on March 27, 2017 at 11:00pm — 10 Comments

ग़ज़ल....अब कहाँ गुम हुये आसरे भीड़ में

212 212 212 212

अब कहाँ गुम हुये आसरे भीड़ में

चलते चलते कदम रुक गये भीड़ में



मुख़्तलिफ़ दर्द में हम पुकारा किये

घुट गयी आह थे कहकहे भीड़ में



बाँह को थामकर हमने रोका बहुत

तुम गये भीड़ में खो गये भीड़ में



है सभी का मुकददर परेशानियाँ

दे किसे कौन अब मशविरे भीड़ में



मुंतज़िर हैं बड़े दिल ए नाशाद के

अनकहे प्यार के फलसफे भीड़ में



दिल के ज़ज्बात 'ब्रज' रायगाँ मत करो

फिर रहे हैं कई मसखरे भीड़ में

(मौलिक एवं… Continue

Posted on March 19, 2017 at 7:30pm — 6 Comments

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At 11:43pm on November 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

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