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बृजेश कुमार 'ब्रज'
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  • सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
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बृजेश कुमार 'ब्रज''s Page

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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' and बृजेश कुमार 'ब्रज' are now friends
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल....अब कहाँ गुम हुये आसरे भीड़ में

212 212 212 212अब कहाँ गुम हुये आसरे भीड़ मेंचलते चलते कदम रुक गये भीड़ मेंमुख़्तलिफ़ दर्द में हम पुकारा कियेघुट गयी आह थे कहकहे भीड़ मेंबाँह को थामकर हमने रोका बहुततुम गये भीड़ में खो गये भीड़ मेंहै सभी का मुकददर परेशानियाँदे किसे कौन अब मशविरे भीड़ मेंमुंतज़िर हैं बड़े दिल ए नाशाद केअनकहे प्यार के फलसफे भीड़ मेंदिल के ज़ज्बात 'ब्रज' रायगाँ मत करोफिर रहे हैं कई मसखरे भीड़ में(मौलिक एवं अप्रकाशित)बृजेश कुमार 'ब्रज'See More
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on सतविन्द्र कुमार's blog post तरही गजल
"वाह वाह बहुत ही खूबसूरत हर एक शेर बेहतरीन..हार्दिक बधाई"
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल -चुप कह के, क़ुरआन, बाइबिल गीता है - ( गिरिराज )
"बादल तो बरसा था सबके आँगन में उल्टा बर्तन रीता था, वो रीता है...वाह आदरणीय वाह हर एक शेर लाजबाब..सादर"
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Rahila's blog post ससुराल की पहली होली(हास्य कविता)राहिला
"हाहाहा वाह वाह आदरणीया बहुत ही शानदार चित्रण किया है.."
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....अब कहाँ गुम हुये आसरे भीड़ में
"उचित है अदरणीय गिरिराज जी..आपकी सलाह सर्वथा उचित है..अदरणीय शुक्ला जी की सलाह के बाद मैं कुछ बदलाव सोच ही रहा था.. आपका सुझाव बेहद खूबसूरत है..सादर प्रणाम"
Thursday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....अब कहाँ गुम हुये आसरे भीड़ में
"आदरनीय बृजेश भाई , अच्छी गज़ल कही है आपने , हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें । मेरा सोचना है कि .. अगर हम सहीं भी हों और कोई बेहतर सलाह आये तो भी स्वीकार कर लेना चाहिये .... चाहें तो उस मिसरे को ऐसे कह सकते हैं दे किसे कौन अब मशविरे भीड़ में"
Thursday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....अब कहाँ गुम हुये आसरे भीड़ में
"आदरणीय रवि शुक्ला जी रचना की सार्थक समीक्षा हेतु आपका हार्दिक आभार..जहाँ तक मेरी जानकारी है मशविरा मतलब सलाह है जो आपस में भी की जाती है और दूसरों को भी दी जाती है..इसलिए कौन किसको कहे मश्विरे भीड़ में.. मैं गलत भी हो सकता हूँ..सादर"
Wednesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....अब कहाँ गुम हुये आसरे भीड़ में
"आदरणीय आरिफ जी रचना पटल पे आपका हार्दिक स्वागत है..उर्दू शब्दों में थोड़ी समस्या है अभी..अशुद्धियों को दूर करने का प्रयास किया है..सादर"
Wednesday
Ravi Shukla commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....अब कहाँ गुम हुये आसरे भीड़ में
"आदरणीय ब्रजेश कुमार जी अच्‍छी गजल कही है आपने बधाई स्‍वीकार करें चौथे शेर में मशविरे के साथ आपने कहे लफ्ज का प्रयोग किया है । मश्‍विरा किया जाता है आपस मे शायद । अगर ये सही है तो शेर मे थोड़ी सी तराश की जरूरत हो सकती है । सादर"
Tuesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted blog posts
Tuesday
Mohammed Arif commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....अब कहाँ गुम हुये आसरे भीड़ में
"आदरणीय बृजेन्द्र कुमार जी आदाब, बहुत अच्छी ग़ज़ल । शेर दर शेर दाद के साथ मुबारक़बाद । कुछ वर्तनीगत अशुद्धियाँ है ।"
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on SudhenduOjha's blog post फुर्सत से कभी मेरी,ज़िंदगानी देख लेना (कविता/नज़्म)
"वाह आदरणीय बहुत ही सुन्दर"
Mar 19
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on SudhenduOjha's blog post फुर्सत से कभी मेरी,ज़िंदगानी देख लेना (कविता/नज़्म)
"वाह वाह आदरणीय बहुत ही स"
Mar 19
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on शिज्जु "शकूर"'s blog post पत्ता था, सब्ज़, टूटके खिड़की में आ गया
"वाह आदरणीय बेहतरीन गजल बधाई"
Mar 19
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on सतविन्द्र कुमार's blog post ज़ुबाँ पे सख्त पहरा हो रहा है(गजल)/सतविन्द्र कुमार राणा
"वाह वाह खूबसूरत बहुत खूबसूरत"
Mar 19

Profile Information

Gender
Male
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noida
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jhansi

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Blog

ग़ज़ल....अब कहाँ गुम हुये आसरे भीड़ में

212 212 212 212

अब कहाँ गुम हुये आसरे भीड़ में

चलते चलते कदम रुक गये भीड़ में



मुख़्तलिफ़ दर्द में हम पुकारा किये

घुट गयी आह थे कहकहे भीड़ में



बाँह को थामकर हमने रोका बहुत

तुम गये भीड़ में खो गये भीड़ में



है सभी का मुकददर परेशानियाँ

दे किसे कौन अब मशविरे भीड़ में



मुंतज़िर हैं बड़े दिल ए नाशाद के

अनकहे प्यार के फलसफे भीड़ में



दिल के ज़ज्बात 'ब्रज' रायगाँ मत करो

फिर रहे हैं कई मसखरे भीड़ में

(मौलिक एवं… Continue

Posted on March 19, 2017 at 7:30pm — 6 Comments

हिन्दी गीतिका...​साँसों का तरपन कर दूँ

22 22 22 22 22 22 22

रम जाओ अंतस में जीवन मधुरम चन्दन कर दूँ

जो तुम झाँको आँखों में आँखों को दरपन कर दूँ



तुम बिन जीवन मिथ्या है साँसों का आना जाना

बस जाओ मम साँसों में साँसों को अरपन कर दूँ



कल देखा था ख्वाबों में दुल्हन सी तुम मुस्काईं

पलकों में आ बस जाओ सपनों का तरपन कर दूँ



प्यासी धरती प्यासा अम्बर प्यासा है उर आँगन

छा जाओ बन के बदली मरुथल को मधुबन कर दूँ



​​पलकों में आकुल आँसू बहने को व्याकुल आँसू

बन साथी झरते आँसू पतझर… Continue

Posted on March 5, 2017 at 7:34pm — 8 Comments

ग़ज़ल...आँसू तभी छलक पड़े बेबस किसान के

221 2121 1221 212
.
ये बेरुखी ये ज़ुल्म सितम आसमान के
आँसू तभी छलक पड़े बेबस किसान के

दिल में छुपा लिये थे सभी गम जहान के
रुख पे नुमायाँ हो गए लम्हे थकान के

वीरां है मुददतों से मगर टूटता नहीं
ये हौंसले तो देखिये जर्जर मकान के

है मजहबी अलाव, सुलगते सभी बशर
बदहाल गाँव घर हुए भारत महान के

वो अनमनी सबा, हुआ रंजूर ये चमन
निकली लवों से आह किसी बेजुबान के
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Posted on February 26, 2017 at 9:00pm — 9 Comments

ग़ज़ल....मुहब्बत आह भरती है इबादत हार जाती है

1222 1222 1222 1222

सदा पत्थर से टकरा कर मेरी बेकार जाती है

मुहब्बत आह भरती है इबादत हार जाती है



हमारे दर्द के किस्से बराए आम हैं कब से

तुम्हारे आसरों तक भी कुई चीत्कार जाती है ?



अज़ब सी बहशतों में आजकल डूबा हुआ है दिल

सँभालूँ जो मैं दरवाजा दरक दीवार जाती है



जरा सा रोक लो ये गम जरा सीं राहतें दे दो

मुसलसल बेरुखी भी अब ह्रदय के पार जाती है



तुम्हें भी इल्म हो जायेगा तुम भी जान जाओगे

क्षितिज के पार सच्चे इश्क़ की झनकार जाती… Continue

Posted on February 14, 2017 at 5:30pm — 10 Comments

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At 11:43pm on November 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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