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बृजेश कुमार 'ब्रज'
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Jul 19
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Jul 17
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल....जो दिल को घेर कर बैठी उदासी क्यों नहीं जाती

1222 1222 1222 1222जो दिल को घेर कर बैठी उदासी क्यों नहीं जातीनदारद नींद आँखों से उबासी क्यों नहीं जातीचलीं जायेगीं बरसातें ये मौसम भी न ठहरेगाहमारे दिल की बैचैनी जरा सी क्यों नहीं जातीतुम्हारे साथ ही ये ज़िन्दगी तैयार जाने कोदिलों के दरमियाँ काबिज़ अना सी क्यों नहीं जातीसुना है उसके दर पे सब मुरादें पूरी होतीं हैंये व्याकुल रूह जन्मों से है प्यासी क्यों नहीं जातीग़मों में मुस्कुराना सीख 'ब्रज' लोगों ने समझायाबसी है जो ह्रदय में पीर खासी क्यों नहीं जातीखासी-ज्यादा(मौलिक एवं अप्रकाशित)बृजेश कुमार…See More
Jul 17
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Samar kabeer's blog post 'अदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे हो'
"आदरणीय बहुत ही शानदार ग़ज़ल कही है..मुझ जैसे नए लोगों को सीखने के लिए काफी कुछ है..विशेषकर उर्दू शब्दावली..सादर"
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (कोई आ गया दम निकलने से पहले ) --------------------------------------------------------
"बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही आदरणीय ...सादर"
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...गमे दिल अब मुझे आराम दे दो
"आपका हार्दिक अभिनन्दन एवं आभार आदरणीय महेंद्र जी..सादर"
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....जो दिल को घेर कर बैठी उदासी क्यों नहीं जाती
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कल्पना भट्ट जी..सादर"
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KALPANA BHATT commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....जो दिल को घेर कर बैठी उदासी क्यों नहीं जाती
"अच्छी ग़ज़ल हुई है आदरणीय बृजेश जी हार्दिक बधाई |"
Jul 16
Mahendra Kumar commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...गमे दिल अब मुझे आराम दे दो
"बढ़िया ग़ज़ल है आ. बृजेश जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Jul 12

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noida
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बृजेश कुमार 'ब्रज''s Blog

ग़ज़ल....जो दिल को घेर कर बैठी उदासी क्यों नहीं जाती

1222 1222 1222 1222

जो दिल को घेर कर बैठी उदासी क्यों नहीं जाती

नदारद नींद आँखों से उबासी क्यों नहीं जाती



चलीं जायेगीं बरसातें ये मौसम भी न ठहरेगा

हमारे दिल की बैचैनी जरा सी क्यों नहीं जाती



तुम्हारे साथ ही ये ज़िन्दगी तैयार जाने को

दिलों के दरमियाँ काबिज़ अना सी क्यों नहीं जाती



सुना है उसके दर पे सब मुरादें पूरी होतीं हैं

ये व्याकुल रूह जन्मों से है प्यासी क्यों नहीं जाती



ग़मों में मुस्कुराना सीख 'ब्रज' लोगों ने समझाया

बसी… Continue

Posted on July 10, 2017 at 5:00pm — 9 Comments

ग़ज़ल...गमे दिल अब मुझे आराम दे दो

1222 1222 122
मेरी बेचैनियों को नाम दे दो
बहुत टूटा हूँ अब अंजाम दे दो

उन्हें मैं याद कर के थक चुका हूँ
गमे दिल अब मुझे आराम दे दो

पुरानी बात है आहें, तड़पना
मुहब्बत को नये आयाम दे दो

कि जिसको सोचते ही मुस्कुरा दूँ
तसव्वुर के लिए वो शाम दे दो

कहाँ है मीत वो किस हाल में है
हवाओ कोई तो पैगाम दे दो
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Posted on July 5, 2017 at 8:48am — 16 Comments

ग़ज़ल...कौन भरे इस खालीपन को

22 22 22 22
याद करे वीरान चमन को
कौन भरे इस खालीपन को

मुझमें है ये कौन समाया
आँखों ने टोका दर्पन को

हाथ बढ़ाकर कौन सँभाले
सड़कों पे मरते बचपन को

हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई
खाने को तैयार वतन को

अबके सावन ऐसे बरसे
ले आये सुख चैन अमन को

प्रभु बसते दुखिया आहों में
हम बैठे संगीत भजन को

कितने अरमानों से सींचा
'ब्रज' ने अपने फक्खड़पन को
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Posted on June 27, 2017 at 11:54am — 11 Comments

ग़ज़ल...मगरूर है वो हमसफ़र

गैर मुरद्दफ़ ग़ज़ल..बहरे रजज़ मुरब्बा सालिम
मुस्तफ्इलुन मुस्तफ्इलुन
2212 2212
मगरूर है वो हमसफ़र
हैरान हूँ ये जानकर

अपनी जड़ों से टूटकर
क्यूँ आदमी है दर-ब-दर

जाना कहाँ थे आ गये
ये पूँछती है रहगुजर

सब आहटें खामोश हैं
चुपचाप सी है हर डगर

आसान है अब तोड़ना
बिखरे हुये हैं सब बशर

बेआबरू ऐ इश्क़ के
हम भी बड़े थे मोतबर
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Posted on June 11, 2017 at 5:59pm — 8 Comments

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At 11:43pm on November 17, 2015,
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मिथिलेश वामनकर
said…

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