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बृजेश कुमार 'ब्रज'
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बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल...धूल की परतें-बृजेश कुमार 'ब्रज

1222 1222 1222 1222 गुलाबों से किताबों तक समाईं धूल की परतें जरा देखो तो अब माथे पे आईं धूल की परतें!!ये किस आगोश ने सारे शहर को घेर के रक्खा घना है कोहरा या फिर हैं छाईं धूल की परतें?गया इक वक़्त वो आया न तो सन्देश ही आया हमीं ने रिश्ते नातों पर चढ़ाईं धूल की परतेंगिला इस बात का उनसे करें भी तो करें कैसे गमे दिल ने मेरे लब पर सजाईं धूल की परतेंबड़ी मगरूरियत से छोडीं थीं वो गाँव की गलियाँ मगर 'ब्रज' को यही गम है कमाईं धूल की परतें (मौलिक एवं अप्रकाशित) बृजेश कुमार 'ब्रज'See More
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"वाह वाह आदरणीय खूबसूरत ग़ज़ल हुई."
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"बहुतखूब बहुतखूब आदरणीय त्रिपाठी जी.."
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"बड़ी ही खूबसूरती से आपने एक रोजमर्रा की मुसीबत की तरफ ध्यान खींचा है आदरणीया..बधाई"
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"अनुपम अहसासों का चित्रण किया आदरणीय...सादर"
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"ये है गागर में सागर भरने वाली बात..बहुत शानदार चित्रण किया है आदरणीय।"
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"बहुत बेहतरीन...ऐसी लघुकथा होनी चाहिए जो एक कसक सी छोड़ दे..और आपकी कथा इस कसौटी पर पूर्णतया कसी हुई है आदरणीय..सादर बधाई"
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"बड़ा ही रोचक और मार्मिक चित्रण किया है आदरणीया..सादर"
Jan 13

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Male
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jhansi

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Blog

ग़ज़ल...धूल की परतें-बृजेश कुमार 'ब्रज

1222 1222 1222 1222

गुलाबों से किताबों तक समाईं धूल की परतें

जरा देखो तो अब माथे पे आईं धूल की परतें!!

ये किस आगोश ने सारे शहर को घेर के रक्खा

घना है कोहरा या फिर हैं छाईं धूल की परतें?

गया इक वक़्त वो आया न तो सन्देश ही आया

हमीं ने रिश्ते नातों पर चढ़ाईं धूल की परतें

गिला इस बात का उनसे करें भी तो करें कैसे

गमे दिल ने मेरे लब पर सजाईं धूल की परतें

बड़ी मगरूरियत से छोडीं थीं वो गाँव की गलियाँ

मगर 'ब्रज' को यही गम है कमाईं धूल की…

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Posted on January 21, 2018 at 7:05pm

ग़ज़ल..रात भर-बृजेश कुमार 'ब्रज'

मुतदारिक सालिम मुसम्मन बहर

212 212 212 212

आँख आँसू बहाती रही रात भर

दर्द का गीत गाती रही रात भर

आसमां के तले भाव जलते रहे

बेबसी खिलखिलाती रही रात भर

बाम पे चाँदनी थरथराने लगी

हर ख़ुशी चोट खाती रही रात भर

रूह के ज़ख्म भी आह भरने लगे

आरजू छटपटाती रही रात भर

प्यार की राह में लड़खड़ाये कदम

आशकी कसमसाती रही रात भर

आह भरते हुये राह तकते रहे

राह भी मुँह चिढ़ाती रही रात भर …

Continue

Posted on January 6, 2018 at 5:30pm — 22 Comments

ग़ज़ल...तुम्हारी याद का मौसम--बृजेश कुमार 'ब्रज'

1222 1222 1222 1222

हमें जब आज़माता है तुम्हारी याद का मौसम

सुकूँ भी साथ लाता है तुम्हारी याद का मौसम

ग़मों ने कोशिशें तो लाख कीं पलकें भिंगोने की

लबों पर मुस्कुराता है तुम्हारी याद का मौसम

हमारे रूबरू ठहरो कभी पल भर तो समझाएं

हमें कितना सताता है तुम्हारी याद का मौसम

इसे मैं छोड़ आता हूँ कहीं सुनसान सहरा में

मगर फिर लौट आता है तुम्हारी याद का मौसम

वहाँ तुम हो तुम्हारी पुरकशिश कमसिन अदाएं हैं

यहाँ 'ब्रज'…

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Posted on December 18, 2017 at 11:00pm — 26 Comments

गीत... ओ बरसते मेघ प्यारे-बृजेश कुमार 'ब्रज'

मनोरम छंद SISS SISS पे आधारित गीत



ओ बरसते मेघ प्यारे



चल रही पुरवा सुहानी

प्रीत की कहती कहानी

नीर जो अम्बर से बरसे

आसुओं की है रवानी

बात ये उनको बता रे

ओ बरसते मेघ प्यारे



खुशनुमा कुछ पल चुरा लूँ

संग तेरे मैं भी गा लूँ

बीत जायेगा ये मौसम

आँख में तुझको समा लूँ

रुक जरा सा हे सखा रे

ओ बरसते मेघ प्यारे



राह तेरी तकते तकते

साल बीता है बिलखते

जो बसे थे उर नगर में

रह गये सपने सुलगते

मोर दादुर… Continue

Posted on November 14, 2017 at 6:30pm — 23 Comments

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At 6:59pm on October 24, 2017, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

स्वागत है आदरणीय ,  आपको मित्र के रूप में पाना मेरा सौभाग्य है .

At 11:43pm on November 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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