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बृजेश कुमार 'ब्रज'
  • Male
  • noida
  • India
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर जी आपका हार्दिक अभिनंदन एवं आभार...बे-बज़्ह गूगल कीबोर्ड की गलती है...सुधार करता हूँ...सादर"
Nov 7
Samar kabeer commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"जनाब 'ब्रज' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें I   'बे-बज़्ह क्यों बढ़ा रहे पीड़ा तनाव भी'---' बे-बज़्ह'  को "बे-वज्ह" लिखें I  जनाब रवि भसीन जी से सहमत हूँ I "
Nov 5
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल

221 2121 1221 212 आँखों को रतजगे मिले हैं जल भराव भी उल्फ़त में दुख मिले तो मिले गहरे भाव भी कानों को आहटें सुने बर्षों गुज़र गये बुझने लगे हैं आँखों के जलते अलाव भी कुछ इसलिये खमोशियाँ ये रास आ गईं दुनिया न जान ले कहीं अंतस के घाव भी गर डूबना नसीब है तो फ़िक़्र क्यों करूँ दरिया में अब उतार दी है टूटी नाव भी वो साथ दे सका न बहुत देर तक मेरा इक तो हवा ख़िलाफ़ थी उसपे बहाव भी वो चाँद है,वो चाँद भला किसका हो सकाबे-बज़्ह क्यों बढ़ा रहे पीड़ा तनाव भी सुधबुध गवाँ के रात में उसको निहारना अच्छा नहीं है…See More
Nov 5
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Zaif's blog post ग़ज़ल - यूँ मुहब्बत हो गई है
"बढ़िया ग़ज़ल कही भाई जैफ...हार्दिक बधाई"
Nov 4
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय महेंद्र जी...आदरणीय रवि जी से असहमति का कोई कारण नहीं है...जल्द ही पोस्ट एडिट करूँगा।"
Nov 4
Mahendra Kumar commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"बढ़िया ग़ज़ल हुई है आदरणीय बृजेश जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। आदरणीय रवि जी से मैं भी सहमत हूँ।"
Nov 4
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"आपका बहुत बहुत शुक्रिया भाई जैफ..."
Nov 4
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"स्वागत संग आभार आदरणीय धामी जी..."
Nov 4
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अमीरुद्दीन जी हौसलाफजाई के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद..."
Nov 4
Zaif commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"आदरणीय ब्रज सर, क्या काफ़िये लिए है अपने, कमाल। हर शेर लाजवाब। दाद स्वीकार कीजिए। ज़िंदाबाद"
Nov 3
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"आ. भाई बृजेश जी, सादर अभिवादन। एक अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
Nov 3
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"आदरणीय बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, बहुत ख़ूब ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ, जनाब रवि भसीन जी के साथ बहुत अहम और सार्थक चर्चा हुई है। "
Nov 2
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"आपके शब्दों से अत्यंत प्रसन्नता का अनुभव हुआ आदरणीय भसीन जी...आपकी सलाह सर्वथा उचित है।"
Nov 2
रवि भसीन 'शाहिद' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"नहीं नहीं जनाब-ए-'आली, ऐसी बात नहीं है। बस इसी तरह इस्लाह करने वालों से और अपने शोध और अध्ययन से एक एक लफ़्ज़ का वज़्न पता चलता जाता है। किसी लफ़्ज़ के वज़्न या इस्तेमाल में शक हो तो rekhta dictionary से चैक कीजिये। आपकी शायरी में जो उर्दू और हिंदी…"
Nov 2
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"हाहाहा... बहुत मुश्किल है...उर्दू,अरबी,फ़ारसी शब्दों का इस्तेमाल हम जैसों के लिए...बेहतर होगा हम ज्यादातर हिंदी शब्दों का ही उपयोग करें।धन्यवाद आदरणीय भसीन साहब...आपका सुझाव अच्छा है।"
Nov 2
रवि भसीन 'शाहिद' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल
"आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' साहिब, सादर अभिवादन। जनाब 'ख़्वाह-मख़ाह' को 21121 के वज़्न पर लेना पड़ेगा।"
Nov 2

Profile Information

Gender
Male
City State
noida
Native Place
jhansi

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Blog

ग़ज़ल

221 2121 1221 212



आँखों को रतजगे मिले हैं जल भराव भी

उल्फ़त में दुख मिले तो मिले गहरे भाव भी



कानों को आहटें सुने बर्षों गुज़र गये

बुझने लगे हैं आँखों के जलते अलाव भी



कुछ इसलिये खमोशियाँ ये रास आ गईं

दुनिया न जान ले कहीं अंतस के घाव भी



गर डूबना नसीब है तो फ़िक़्र क्यों करूँ

दरिया में अब उतार दी है टूटी नाव भी



वो साथ दे सका न बहुत देर तक मेरा

इक तो हवा ख़िलाफ़ थी उसपे बहाव भी



वो चाँद है,वो चाँद भला किसका हो…

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Posted on November 1, 2022 at 6:30pm — 16 Comments

ग़ज़ल

121 22 121 22 121 22



हरिक  धड़क पे  तड़प  उठें बद-हवास आँखें

बिछड़ के  मुझसे कहाँ गईं  ग़म-शनास आँखें



कहाँ  गगन  में  छुपे  हुये  हो ओ चाँद जाकर

तमाम  शब  अब  किसे  निहारें  उदास आँखें



बिछड़ के तुझसे सिवाय इसके रहा नहीं कुछ

कि  एक  बिगड़ा हुआ  मुक़द्दर क़यास आँखें



यक़ीन  होता  नहीं  कि  कैसे  चला  गया  वो

दिखा  रही थीं  डगर  उसी की  उजास…

Continue

Posted on October 5, 2022 at 7:00pm — 10 Comments

ग़ज़ल

221       1221       1221       122



ख़्वाबों को ज़रा आँख के पानी से निकालो

इन बुलबुलों को अश्क-फ़िशानी से निकालो

ईमान  की  कश्ती  पे  मुहब्बत  की  मसर्रत

इस कश्ती  को तूफ़ां की रवानी से निकालो

इस  रास्ते  पे  वस्ल   की  उम्मीद   नहीं  है

तरकीब   कोई   राह   पुरानी   से  निकालो

ग़ज़लों को रखो नफ़रती शोलों  से बचाकर

अश'आर  सभी लफ़्ज़ गिरानी से  निकालो

इक रोज़ गुज़र जाऊँगा ज्यूँ वक़्त  गुज़रता

भावों में रखो…

Continue

Posted on September 12, 2022 at 2:30pm — 18 Comments

ग़ज़ल-अलग है

122     122     122     122

हक़ीक़त जुदा थी कहानी अलग है

सुनो ख़्वाब से ज़िंदगानी अलग  है



ये गरमी की बारिश सुकूँ है अगरचे

मग़र आँख से बहता पानी अलग है



है खानाबदोशों की ख़ामोश  बस्ती

यहाँ ज़िन्दगी का मआनी अलग  है



मियां  शायरी  को ज़रा  मांजियेगा

कहे ऊला कुछ और सानी अलग है



पढ़ें गौर से  जल्दबाजी  न …

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Posted on August 6, 2022 at 8:30am — 10 Comments

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At 6:59pm on October 24, 2017, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

स्वागत है आदरणीय ,  आपको मित्र के रूप में पाना मेरा सौभाग्य है .

At 11:43pm on November 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

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