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बृजेश कुमार 'ब्रज'
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- नेकियाँ तो आपकी सारी भुला दी जाएँगी / दिनेश कुमार
"वाह बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल आदरणीय..."
Sunday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post जलूँ  कैसे  तुम्हारे बिन - लक्ष्मण धामी"मुसाफिर" ( गजल )
"बहुत ही खूब ग़ज़ल कही है आदरणीय.."
Sunday
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

गीत...दीप कहाँ से लाऊँ

इस गीत के साथ ओबीओ परिवार के सभी मनीषियों को दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएंसारा जग उजियारा कर दे दीप कहाँ से लाऊँअंधकार ने फन फैलाया मैला हर इक मन है सूरज भी गुमसुम सा बैठा विस्मित नील गगन है मन को मनका मोती कर दे सीप कहाँ से लाऊँ सारा जग उजियारा कर दे दीप कहाँ से लाऊँगली गली में घूमे रावण हर घर में इक लंका प्यार मुहब्बत भाईचारा मिटने की आशंका कण कण राम बिराजें ऐसा द्वीप कहाँ से लाऊँ सारा जग उजियारा कर दे दीप कहाँ से लाऊँ (मौलिक एवं अप्रकाशित) बृजेश कुमार 'ब्रज'See More
Nov 9
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत...दीप कहाँ से लाऊँ
"बहुत बहुत आभार आदरणीय तेजवीर सिंह जी...सादर"
Nov 9
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on vijay nikore's blog post अंतर्द्वन्द्व
"क्या खूब भाव पिरोये हैं आदरणीय कविता में...बधाई"
Nov 9
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (ख़त्म कर के ही मुहब्बत का सफ़र जाऊंगा)
"वाह क्या खूब ग़ज़ल कही है आदरणीय..बधाई"
Nov 9
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post हमेशा तो नहीं होती बुरी तकरार की बातें(ग़ज़ल)
"वाह आदरणीय सतविंद्र जी उम्दा ग़ज़ल कही.."
Nov 9
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'मर्म-सौगातें : सोने का देश' [कुछ हाइकु: भाग-2]
"वाह जी वाह क्या कहने बहुत सुन्दर...बधाई आदरणीय"
Nov 9
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Neelam Upadhyaya's blog post कुछ हाइकु
"वाह सुन्दर हाइकु आदरणीया...बधाई"
Nov 9
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: एक अंजान शायर का कलाम- ६६
"बहुत ही खूब ग़ज़ल कही है आदरणीय बधाई...."
Nov 9
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'ईको-फ्रेंडली प्रकाश-मित्र' [कुछ हाइकु]
"वाह आदरणीय..बहुत ही सुन्दर सृजन बधाई"
Nov 9
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on TEJ VEER SINGH's blog post काल चक्र - लघुकथा -
"बड़ी ही खूबसूरत भावनात्मक लघुकथा के लिए बधाई आदरणीय..."
Nov 9
TEJ VEER SINGH commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत...दीप कहाँ से लाऊँ
"हार्दिक बधाई आदरणीय  बृजेश कुमार 'ब्रज'जी। बेहतरीन गीत।"
Nov 8
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत...दीप कहाँ से लाऊँ
"बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय डा. साहब..सादर"
Nov 8
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत...दीप कहाँ से लाऊँ
"आदरणीय शेख साहब आपके सुन्दर शब्दों से अति प्रसन्नता हुई..सादर आभार"
Nov 8
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post गीत...दीप कहाँ से लाऊँ
"आदरणीय समर जी रचना पटल पे आपका हार्दिक अभिनन्दन एवं आभार..."
Nov 8

Profile Information

Gender
Male
City State
noida
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jhansi

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Blog

गीत...दीप कहाँ से लाऊँ

इस गीत के साथ ओबीओ परिवार के सभी मनीषियों को दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं

सारा जग उजियारा कर दे

दीप कहाँ से लाऊँ

अंधकार ने फन फैलाया

मैला हर इक मन है

सूरज भी गुमसुम सा बैठा

विस्मित नील गगन है

मन को मनका मोती कर दे

सीप कहाँ से लाऊँ

सारा जग उजियारा कर दे

दीप कहाँ से लाऊँ

गली गली में घूमे रावण

हर घर में इक लंका

प्यार मुहब्बत भाईचारा

मिटने की आशंका

कण कण राम बिराजें ऐसा

द्वीप…

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Posted on November 6, 2018 at 11:00pm — 12 Comments

ग़ज़ल...ले ली मेरी जान सलीके से-बृजेश कुमार 'ब्रज'

वो बैठा दिल में आन सलीके से

फिर ले ली मेरी जान सलीके से

यूँ ही पहले थोड़ी सी बात हुई

बन बैठे फिर अरमान सलीके से

पल भर को पहलू में आओ चन्दा

इतना तो कर अहसान सलीके से

काफी है पलकों का उठना गिरना

तू नैन कटारी तान सलीके से

दिल की दुनिया लूट गईं दो आँखें

फिर होती हैं हैरान सलीके से

कोने की उस जर्जर अलमारी में

रख छोड़े कुछ अरमान सलीके से

जिनको थी लाज बचानी कलियों की

बन…

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Posted on October 25, 2018 at 5:00pm — 18 Comments

ग़ज़ल...लाज की मारी न रोये द्रोपदी

इस ग़ज़ल के साथ ओबीओ परिवार को नवरात्री की शुभकामनाएं.. जय माता की

फाइलातुन फाइलातुन फाइलातुन

हर कली में देवियों का वास हो

पत्थरों को दर्द का अहसास हो

फिर कोई अवतार आये भूमि पे

निश्चरों को मृत्यु का आभास हो

लाज की  मारी न रोये  द्रोपदी

अब नहीं वैदेही को वनवास हो

पीर की तासीर जाओगे समझ

लुट चुका कोई तुम्हारा खास हो

बात इतनी सी समझते क्यों नहीं

घात मिलती है जहाँ बिस्वास हो

(मौलिक एवं…

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Posted on October 11, 2018 at 12:30pm — 17 Comments

गीत-इसलिये हैं नैन घायल आँसुओं से तर-ब-तर-बृजेश कुमार 'ब्रज'

किसलिये हैं नैन घायल

आँसुओं से तर-ब-तर?

फिर किसी सुनसान कोने

चीख कोई जो उठी

रात की खामोशियों में

रातरानी रो उठी

दानवी अट्टाहसों में

आह तड़पी घुट गई

टूटती साँसें समेटे

लड़खड़ाती वो उठी

इस कदर बरपी क़यामत

बन गई मातम सहर

इसलिये हैं नैन घायल

आँसुओं से तर-ब-तर

है नहीं जग में ठिकाना

आँख जाए नीर का

मोल कोई दे सकेगा

वेदना का पीर का

जिस नज़र पे था भरोसा

घात भी उससे मिली

हाथ…

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Posted on October 4, 2018 at 6:00pm — 20 Comments

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At 6:59pm on October 24, 2017, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

स्वागत है आदरणीय ,  आपको मित्र के रूप में पाना मेरा सौभाग्य है .

At 11:43pm on November 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

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