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बृजेश कुमार 'ब्रज'
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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on राज़ नवादवी's blog post राज़ नवादवी: मेरी डायरी के पन्ने-७०
"बहुत बढ़िया आदरणीय राज जी..पारवारिक परिस्थितियों से उत्पन्न मानसिक उहापोह को बहुत शानदार ढंग से अभिव्यक्त किया है..सादर"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....धीरे धीरे रीत गया - बृजेश कुमार 'ब्रज'
"बहुत बहुत आभार आदरणीय नंदकिशोर जी..सादर"
yesterday
नन्दकिशोर दुबे commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....धीरे धीरे रीत गया - बृजेश कुमार 'ब्रज'
"बहुत ही मनहर रचना जी ।ब्रजेश भाई बधाई।"
Sunday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - दो पहर की धूप भी अच्छी लगी ( गिरिराज भंडारी )
"यादों की थीं खुश्बुयें फैलीं वहाँ तुम न थे फिर भी गली अच्छी लगी...बहुत खूबसूरत आदरणीय बहुत खूबसूरत"
Friday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on सतविन्द्र कुमार's blog post तरही गजल
"वाह वाह आदरणीय बड़ी अच्छी ग़ज़ल हुई..सादर"
Friday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....धीरे धीरे रीत गया - बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय गिरिराज जी सादर प्रणाम..आपकी टिप्पड़ी से शंकाओं के बदल छट गए हैं.."
Wednesday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....धीरे धीरे रीत गया - बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय महेंद्र जी हौसलाफजाई के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया..सच कहूँ तो मुझे मतला ही सबसे अच्छा लग रहा है।आपका इशारा और बेहतर को लेकर है या कोई लय को लेकर कोई कमी है?अगर कोई खूबसूरत सुझाव देंगे तो मुझे ख़ुशी होगी।सादर"
Wednesday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....धीरे धीरे रीत गया - बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आ. बृजेश भाई , मुस्काई लफ्ज़ मेरे खयाल से सही है ... कविता और गीत के अलावा  '' रेख्ता'' मे भी शेर मे यह उपयोग हुआ है .  मेरे खयाल से मुक्सुराई और मुस्काई दोनो मान्य हैं । लेकिन  अंतिम फैसला तो शायर खुद ही करता है"
Wednesday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....धीरे धीरे रीत गया - बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आ. बृजेश भाई , मुस्काई लफ्ज़ म्वेरे खया से सही है ... कविता और गीत के अलावा भी '' रेख्ता'' मे भी शेर मे यह उपयोग हुआ है .  मेरे खयाल से मुक्सुराई और मुस्काई दोनो मान्य हैं । लेकिन  अंतिम फैसला तो शायर खुद ही करता है ... ।"
Sep 20
Mahendra Kumar commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....धीरे धीरे रीत गया - बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आ. बृजेश जी अच्छी ग़ज़ल कही है आपने किन्तु मतले को एक बार और देखने की आवश्यकता है. मेरी तरफ़ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
Sep 20
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ठहर जाता तो अच्छा था- एक ग़ज़ल बसंत की
"क्या कहने आदरणीय..बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई..सादर"
Sep 19
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Afroz 'sahr''s blog post ग़ज़ल -ए- सहर
"बड़ी खूबसूरत ग़ज़ल हुई आदरणीय अफ़रोज़ जी.."
Sep 19
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...वही बारिश वही बूँदें वही सावन सुहाना है-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय श्रीवास्तव जी उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार..सादर"
Sep 18
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....धीरे धीरे रीत गया - बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय नीलेश जी आपकी उपस्थिति स्वागतयोग्य है..आम बोल चाल में हम इस शब्द का इस्तेमाल करते हैं..इसके अलावा मैंने कई बार पढ़ा भी है। सोहन लाल द्विवेदी जी की बाल कविता उठो लाल अब आँखें खोलो में नन्ही नन्ही किरणें आई, फूल खिले कलियाँ मुस्काई। सूर्यकान्त…"
Sep 18
MUKESH SRIVASTAVA commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...वही बारिश वही बूँदें वही सावन सुहाना है-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"वही बारिश वही बूँदें वही सावन सुहाना हैतेरी यादों का मौसम है लबों पे इक तराना है KYA BAT MITRA"
Sep 18
Nilesh Shevgaonkar commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....धीरे धीरे रीत गया - बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आ. बृजेश जी,अच्छी भावपूर्ण   ग़ज़ल हुई  है ...मुस्काई सही चयन  नहीं है ..मुस्कुराई होना चाहिये ..मुस्कान , मुस्कुराना , मुस्कुराहट को मुस्काना या   मुसकाहट    नहीं कहना    चाहिए .बधाई "
Sep 18

Profile Information

Gender
Male
City State
noida
Native Place
jhansi

बृजेश कुमार 'ब्रज''s Blog

ग़ज़ल....धीरे धीरे रीत गया - बृजेश कुमार 'ब्रज'

22 22 22 22 22 22 22 2

यादों के गलियारे होकर जब मैं आज अतीत गया

लाख सँभाला आँखों ने पर धीरे धीरे रीत गया



नाम पुकारा कुछ ने मेरा कुछ के अश्क़ छलक आये

कुछ तस्वीरें मुस्काईं तो गूँज कहीं संगीत गया



ख्वाब सुहाने कुछ बचपन के टूट गये कुछ रूठ गये

कैसे जी को समझाऊँ मैं क्या गुजरी क्या बीत गया



ऐसा क्या माँगा था उनसे ऐसी क्या मज़बूरी थी

बीच भँवर क्यों हाथ छुड़ाकर बेदर्दी मनमीत गया



खेल रचा क्या भावों का हाथों की चन्द लकीरों ने

हार गया… Continue

Posted on September 16, 2017 at 8:25pm — 28 Comments

गैर मुरद्दफ़ ग़ज़ल..मेरे दीदा ए नम में तू ही तू-बृजेश कुमार 'ब्रज'

गैर मुरद्दफ़ ग़ज़ल
2122 1212 22
तेरी आँखें ज़हान की खुशबू
मेरे दीदा ए नम में तू ही तू

गीत ग़ज़लों में तू नुमायाँ है
तेरा ही चर्चा नज़्म में हर सू

याद किसकी शुरुर है किसका
किसलिये आँखों से रवां आँसू

तेरी जुल्फों की खुशबुएँ लेकर
कोई झोंका सबा का जाये छू

धर्म मजहब से ये हुआ हासिल
जल रहे हैं बशर यहाँ धू धु

राज है 'ब्रज' तेरी उदासी में
बेसबब आज फिर बहे आँसू
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Posted on September 6, 2017 at 3:00pm — 2 Comments

ग़ज़ल....दुआयें साथ हैं माँ की वगरना मर गये होते-बृजेश कुमार 'ब्रज'

1222 1222 1222 1222

रगों को छेदते दुर्भाग्य के नश्तर गये होते

दुआयें साथ हैं माँ की वगरना मर गये होते



वजह बेदारियों की पूछ मत ये मीत हमसे तू

हमें भी नींद आ जाती अगरचे घर गये होते



नज़र के सामने जो है वही सच हो नहीं मुमकिन

हो ख्वाहिशमंद सच के तो पसे मंज़र गये होते



अगर होती फ़ज़ाओं में कहीं आमद ख़िज़ाओं की

हवायें गर्म होतीं और पत्ते झर गये होते



शिकायत भी नहीं रहती गमे फ़ुर्क़त भी होता कम

न होती आँख में शबनम अगर कहकर गये… Continue

Posted on August 28, 2017 at 11:00am — 18 Comments

ग़ज़ल...वही बारिश वही बूँदें वही सावन सुहाना है-बृजेश कुमार 'ब्रज'

१२२२   १२२२ ​   १२२२    १२२२​

वही बारिश वही बूँदें वही सावन सुहाना है

तेरी यादों का मौसम है लबों पे इक तराना है



तुझी को याद करता हूँ तेरा ही नाम लेता हूँ

यही इक काम है बाकी तुझे अपना बनाना है



कभी जाये न ये मौसम बहे नैंनो से यूँ सावन

दिखाऊँ किस तरह जज्बात​ राहों में जमाना है



रही बस याद बाकी है यही फरियाद बाकी है

सुनाऊँ क्या जमाने को खुदी को आजमाना है



मिलन होता न उल्फत में कटेगी जिन्दगी पल में

ये साँसें हैं बिखर जायें अमर… Continue

Posted on August 22, 2017 at 5:00pm — 22 Comments

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At 11:43pm on November 17, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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