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बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
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बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s Friends

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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल(रहे गर्दिश में जो हरदम)
"आ. भाई बासुदेव जी, सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई ।"
Feb 11
Tasdiq Ahmed Khan commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल(रहे गर्दिश में जो हरदम)
"मुहतरम जनाब बासुदेव साहिब ,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है ,बहुत मुश्किल ज़मीन है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं।  शेर1 मिसरों में रब्त की कमी ,यूँ करसकते हैं "रहें जो गर्दिशों में ऐसे अनजानों पे क्या गुज़री । "बताएं किस तरह उन दफ़्न अरमानों पे क्या…"
Feb 10
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल(रहे गर्दिश में जो हरदम)
"आ0 सोमेश कुमारजी आपकी उत्साहवर्धन करती प्रतिक्रिया का हृदय से आभार "
Feb 9
somesh kumar commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल(रहे गर्दिश में जो हरदम)
"कमर झुकती गयी वो बोझ को फिर भी रहें थामे,न जाने आज की औलाद उन शानों पे क्या गुजरी।  बेहतरीन ,बधाई इस अच्छी और सच्ची गज़ल पर "
Feb 8
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल(रहे गर्दिश में जो हरदम)
"जनाब मोहम्मद आरिफ जी आपका हृदय से आभार।"
Feb 7
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल(रहे गर्दिश में जो हरदम)
"आदरणीया रक्षिता सिंह जी आपका बहुत बहुत आभार।"
Feb 7
narendrasinh chauhan commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल(रहे गर्दिश में जो हरदम)
"हार्दिक बधाई आदरणीय। लाज़वाब गज़ल।"
Feb 7
Mohammed Arif commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल(रहे गर्दिश में जो हरदम)
"आदरणीय वासुदेव जी आदाब,                            जनाब साहिर लुधियानवी साहब की ज़मी पर बहुत ही अच्छे अश'आरों से सुसज्जित ग़ज़ल । हर शे'र बढ़िया । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें…"
Feb 6
Rakshita Singh commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल(रहे गर्दिश में जो हरदम)
"आदरणीय नमन जी नमस्कार, बहुत ही खूबसूरत पंक्तियाँ.... "मुहब्बत की शमअ पर मर मिटे जल जल पतंगे जो, खबर किसको कि उन नाकाम परवानों पे क्या गुजरी" हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
Feb 6
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' posted a blog post

ग़ज़ल(रहे गर्दिश में जो हरदम)

जनाब साहिर लुधियानवी के मिसरे पर तरही ग़ज़ल।1222 1222 1222 1222रहे गर्दिश में जो हरदम, उन_अनजानों पे क्या गुजरी,किसे मालूम ऐसे दफ़्न अरमानों पे क्या गुजरी।कमर झुकती गयी वो बोझ को फिर भी रहें थामे,न जाने आज की औलाद उन शानों पे क्या गुजरी।अगर हो बात फ़ितरत की नहीं तुम जानवर से कम,*जब_इंसानों के दिल बदले तो इंसानों पे क्या गुजरी।*मुहब्बत की शमअ पर मर मिटे जल जल पतंगे जो,खबर किसको कि उन नाकाम परवानों पे क्या गुजरी।'नमन' इतनी बढ़ी क्यों बेरुखी लोगों में अपनों से,सभी को है यही अब फ़िक्र बेगानों पे क्या…See More
Feb 6
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91
"वाहहह आ0 राजेश कुमारी जी बहुत सुंदर ग़ज़ल हुई है। हृदय से बधाई प्रेषित है।"
Jan 27
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91
"आ0 आशीष श्रीवास्तव जी इस सुंदर ग़ज़ल की हृदय से बधाई।"
Jan 27
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91
"आ0 तस्दीक़ अहमद जी बहुत सुंदर ग़ज़ल हुई है। हृदय से बधाई प्रेषित है।"
Jan 27
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91
"आ0 आशीष श्रीवास्तव जी बहुत आभार।"
Jan 27
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91
"आ0 सुरेंद्र नाथ सिंह जी बहुत आभार।"
Jan 27
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-91
"आ0 राजेश कुमारी जी आपका हृदयतल से आभार। सुझाव के लिए बहुत धन्यवाद।"
Jan 27

Profile Information

Gender
Male
City State
Tinsukia
Native Place
Tinsukia
Profession
कवि
About me
परिचय -बासुदेव अग्रवाल 'नमन' नाम- बासुदेव अग्रवाल; शिक्षा - B. Com. जन्म दिन - 28 अगस्त, 1952; स्थान - सुजानगढ़ (राजस्थान) रुचि - हर विधा में कविता लिखना। मुक्त छंद, पारम्परिक छंद, हाइकु, मुक्तक इत्यादि। गीत ग़ज़ल में भी रुचि है। परिचय - वर्तमान में मैँ असम प्रदेश के तिनसुकिया नगर में हूँ। मैं नारायणी साहित्य अकादमी से जुड़ा हुवा हूँ। हमारी नियमित रूप से मासिक कवि गोष्ठी होती है जिनमें मैं नियमित रूप से भाग लेता हूँ। नारायणी के माध्यम से मैं देश के प्रतिष्ठित साहित्यिकारों से जुड़ा हुवा हूँ। whatsup के कई ग्रुप से जुड़ा हुवा हूँ जिससे साहित्यिक कृतियों एवम् विचारों का आदान प्रदान गणमान्य साहित्यकारों से होता रहता है। Blog - narayanitsk.blogspot.com बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s Blog

ग़ज़ल(रहे गर्दिश में जो हरदम)

जनाब साहिर लुधियानवी के मिसरे पर तरही ग़ज़ल।

1222 1222 1222 1222

रहे गर्दिश में जो हरदम, उन_अनजानों पे क्या गुजरी,

किसे मालूम ऐसे दफ़्न अरमानों पे क्या गुजरी।

कमर झुकती गयी वो बोझ को फिर भी रहें थामे,

न जाने आज की औलाद उन शानों पे क्या गुजरी।

अगर हो बात फ़ितरत की नहीं तुम जानवर से कम,

*जब_इंसानों के दिल बदले तो इंसानों पे क्या गुजरी।*

मुहब्बत की शमअ पर मर मिटे जल जल पतंगे जो,

खबर किसको कि उन नाकाम परवानों…

Continue

Posted on February 6, 2018 at 4:04pm — 9 Comments

लम्बे रदीफ़ की ग़ज़ल (कज़ा मेरी अगर जो हो)

गुणीजनों के सुझाव के हेतु।

काफ़िया=आ

रदीफ़= *मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर*

1222×4



खता मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर,

सजा मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर।



वतन के वास्ते जीना, वतन के वास्ते मरना,

वफ़ा मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर।



नशा ये देश-भक्ति का, रखे चौड़ी सदा छाती,

अना मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर।



रहे चोटी खुली मेरी, वतन में भूख है जब तक,

शिखा मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की… Continue

Posted on October 22, 2017 at 11:11am — 16 Comments

ग़ज़ल (दीपावली)

ग़ज़ल (दीपावली)
212×4

जगमगाते दियों से मही खिल उठी,
शह्र हो गाँव हो हर गली खिल उठी।

लायी खुशियाँ ये दीपावली झोली भर,
आज चेह्रों पे सब के हँसी खिल उठी।

आप देखो जिधर नव उमंगें उधर,
हर महल खिल उठा झोंपड़ी खिल उठी।

सुर्खियाँ सब के गालों पे ऐसी लगे,
कुमकुमे हँस दिये रोशनी खिल उठी।

ओ बी' ओ को बधाई 'नमन' पर्व की
मंच पर आज दीपावली खिल उठी।

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on October 19, 2017 at 9:42am — 8 Comments

ग़ज़ल

1222 1222 122

तिजारत हुक्मरानी हो गई है।
कहीं गुम शादमानी हो गई है।।

न अब गांधी न शास्त्री से हैं रहबर।
शहादत उनकी फ़ानी हो गई है।।

तेरा तो हुश्न ही दुश्मन है नारी।
कठिन इज्जत बचानी हो गई है।।

लगी जब बोलने बिटिया हमारी।
वो घर में सबकी नानी हो गई है।।

हमीं से चार लेकर एक दे कर।
'नमन' सरकार दानी हो गई है।।


मौलिक व अप्रकाशित

Posted on October 2, 2017 at 4:00pm — 8 Comments

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At 7:13pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय
श्री बासुदेव अग्रवाल 'नमन' जी,

सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:42pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

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कृपया ध्यान दे...

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