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बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
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बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s Friends

  • बृजेश कुमार 'ब्रज'

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बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"आदरणीय योगराज जी बहुत सुंदर ग़ज़ल हुई है। हर शेर लाजबाब। जहाँ जनता पड़ी हो हाशिये पेे, वो जनता की हुकूमत है? नहीं तो! हमारे दौर में पैसा बहुत है मगर पैसे में बरकत है? नही तो! बहुत खूब।"
2 hours ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-82
"ग़ज़ल बहर:- 1222 1222 122 रहें चुप क्या शराफ़त है? नहीं तो, जुबाँ खोलें शिकायत है? नहीं तो। करें हासिल किसी से हक़ झगड़ के, ये झगड़ा क्या अदावत है? नहीं तो। किये वादों से मुकरो बन के नादाँ, कोई ये भी सियासत है? नहीं तो। दिखाए आँख हाथी को जो चूहा, भला…"
6 hours ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"आ0 प्रतिभा पांडे जी आपका हृदय से आभार।"
Friday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"आ0 तस्दीक अहमद खान साहिब आपका हृदय से आभार।"
Friday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"आ0 समर कबीर साहिब आपसे रचना को सराहना मिली आपका हृदय से आभार। आ0 समर साहिब हिन्दी कविता के हिसाब से बिल्कुल सटीक तुकान्तता है। हिन्दी में तुकांतता के नियम गजल के काफिये जितने कठोर नहीं है।"
Friday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"आ0 अखिलेश जी आपसे रचना को अनुमोदन मिला लिखना सार्थक हुआ। पहली पंक्ति में इंसानों शब्द प्रयुक्त हुआ है इसलिए एक वचन उसने नहीं आ सकता। फिर उनने और उसने का एक मात्रा भार होने से अटकाव का प्रश्न ही नहीं होता। उनने में न दो बार आया है इसलिए आपको अटकाव…"
Friday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"आ0 तस्दीक अहमद खान साहिब कुण्डलियाँ और सार छंद दोनों ही रचनाएँ प्रदत्त चित्र को सार्थक करता सुंदर सृजन हुआ है। हृदय से बधाई।"
Friday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"आ0 प्रतिभा पांडे जी हास्य की पुट ली हुई सुंदर कुण्डलियाँ सृजन की हृदय से बधाई। वफ़ा हमारी शान , यही है धर्म हमारा I घण्टे और अजान, मुबारक उनको यारा II बहुत सुंदर भाव।"
Friday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"आ0 अखिलेश जी बहुत सुंदर प्रदत्त चित्र के अनुरूप सृजन। हृदय तल से बधाई प्रेषित है। मानव अति कामी क्रोधी पशु ,पक्षी के हत्यारे.! फिर भी प्रभु को सब जीवों में, मानव लगते प्यारे.!!"
Friday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 72 in the group चित्र से काव्य तक
"सार छंद हाय सखा क्या हालत कर दी, आदम के बच्चों ने। दीवारों में दिया क़ैद कर, तुझको उन लुच्चों ने।। हम कुत्तों ने इंसानों से, दिल से सदा वफ़ा की। पर उनने बदले में कर दी, सब हद पार जफा की।। मतलब के अंधे इन्सां ने, छोड़े कब अपने ही। ढोंग दिखावा कर…"
Friday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78
"वाहहहह आ0 प्रतिभा पांडे जी बहुत ही सुंदर गीत। कई ढकोसलों पर सीधा चोट करता हुआ। वो अजान दे बुला रहा है ये घंटों से टन टन करता I शोर शराबे में प्रभु छूटा आज दुखी है खुद दुख हरता I"
Apr 15
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78
"आ0 ब्रजेंद्र नाथ मिश्रा जी बहुत ही सुंदर प्रस्तुति। वंचितों के कई पहलूओं को छूती रचना को नमन।"
Apr 15
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78
"आ0 समर कबीर जी आपसे रचना को सराहना मिली और आपका अमूल्य प्रोत्साहन मिला लिखना सार्थक हुआ। हृदय से आपका आभार।"
Apr 15
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78
"आ0 ब्रजेंद्र नाथ मिश्रा जी आपसे रचना को सराहना मिली और आपका अमूल्य प्रोत्साहन मिला लिखना सार्थक हुआ। हृदय से आपका आभार।"
Apr 15
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78
"आ0 राजेश कुमारी जी आपसे रचना को सराहना मिली और आपका अमूल्य प्रोत्साहन मिला लिखना सार्थक हुआ। हृदय से आपका आभार।"
Apr 15
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-78
"आ0 प्रतिभा पांडे जी आपसे रचना को सराहना मिली और आपका अमूल्य प्रोत्साहन मिला लिखना सार्थक हुआ। हृदय से आपका आभार।"
Apr 15

Profile Information

Gender
Male
City State
Tinsukia
Native Place
Tinsukia
Profession
कवि
About me
परिचय -बासुदेव अग्रवाल 'नमन' नाम- बासुदेव अग्रवाल; शिक्षा - B. Com. जन्म दिन - 28 अगस्त, 1952; स्थान - सुजानगढ़ (राजस्थान) रुचि - हर विधा में कविता लिखना। मुक्त छंद, पारम्परिक छंद, हाइकु, मुक्तक इत्यादि। गीत ग़ज़ल में भी रुचि है। परिचय - वर्तमान में मैँ असम प्रदेश के तिनसुकिया नगर में हूँ। मैं नारायणी साहित्य अकादमी से जुड़ा हुवा हूँ। हमारी नियमित रूप से मासिक कवि गोष्ठी होती है जिनमें मैं नियमित रूप से भाग लेता हूँ। नारायणी के माध्यम से मैं देश के प्रतिष्ठित साहित्यिकारों से जुड़ा हुवा हूँ। whatsup के कई ग्रुप से जुड़ा हुवा हूँ जिससे साहित्यिक कृतियों एवम् विचारों का आदान प्रदान गणमान्य साहित्यकारों से होता रहता है। Blog - narayanitsk.blogspot.com बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s Blog

आओ सब मिल कर संकल्प करें

आओ सब मिल कर संकल्प करें।

चैत्र शुक्ल नवमी है आज, नूतन कुछ तो करें।

आओ सब मिल कर संकल्प करें॥



मर्यादा में रहना सीखें, सागर से बन कर हम सब।

मर्यादा में रहना सिखलाएं, तोड़े कोई इसको जब।

मर्यादा के स्वामी की, धारण तो यह सीख करें।

आओ सब मिल कर संकल्प करें॥



मात पिता गुरु और बड़ों की, सेवा का ही मन हो।

भIई मित्र और सब के, लिए समर्पित ये तन हो।

समदर्शी सा बन कर हम, सबसे व्यवहार करें।

आओ सब मिल कर संकल्प करें॥



उत्तम आदर्शों को हम,… Continue

Posted on April 5, 2017 at 11:49am — 3 Comments

ग़ज़ल(जीवन पथिक संसार में चलते चलो तुम सर्वदा)

बह्र-- 2212 2212 2212 2212



जीवन पथिक संसार में चलते चलो तुम सर्वदा,

राहों में आए कष्ट जो सहते चलो तुम सर्वदा।



अनजान सी राहें तेरी मंजिल कहीं दिखती नहीं,

काँटों भरी इस राह में हँसते चलो तुम सर्वदा।



बीते हुए से सीख लो आयेगा उस को थाम लो,

मुड़ के कभी देखो नहीं बढ़ते चलो तुम सर्वदा।



बहता निरंतर जो रहे गंगा सा निर्मल वो रहे,

जीवन में ठहरो मत कभी बहते चलो तुम सर्वदा।



मासूम कितने रो रहे अबला यहाँ नित लुट रही,

दुखियों के मन… Continue

Posted on April 3, 2017 at 7:24pm — 14 Comments

ग़ज़ल (इंसानियत)

ग़ज़ल (इंसानियत)



2212 2212 2212 2212



इंसान के खूँ की नहीं प्यासी कभी इंसानियत,

फिर भूल तुम जाते हो क्यों अक्सर यही इंसानियत।



जो जिंदगी तुम दे नहीं सकते उसे लेते हो क्यों,

पर खून बहता ही रहा रोती रही इंसानियत।



जब गोलियाँ बरसा जमीं को लाल खूँ से तुम करो,

संसार में आतंक को ना मानती इंसानियत।



हे जालिमों जब जुल्म तुम अबलों पे हरदम ही करो,

मजलूम की आहों में दम को तोड़ती इंसानियत।



थक जाओगे तुम जुल्म कर जिंदा रहेगी ये… Continue

Posted on March 21, 2017 at 12:33pm — 7 Comments

"होली" सायलीछंद

"होली" सायलीछंद



शिल्प- 1 2 3 2 1 शब्द



(1)

होली

का त्योहार

जीवन में लाया

रंगों की

बौछार।



(2)

होली

में जलते

अत्याचार, कपट, छल

निष्पाप भक्त

बचते।



(3)

होली

लाई रंग

हों सभी लाल

खेलें पलास

संग।



(4)

होली

देती छेद

ऊँच नीच के

मन से

भेद।



(5)

सत्रह

की होली

भाजपा की तूती

देश… Continue

Posted on March 12, 2017 at 1:22pm — 3 Comments

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At 7:13pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय
श्री बासुदेव अग्रवाल 'नमन' जी,

सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:42pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा व  लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

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1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

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