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बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
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बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s Friends

  • बृजेश कुमार 'ब्रज'
  • Er. Ganesh Jee "Bagi"
 

बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s Page

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बासुदेव अग्रवाल 'नमन' posted a blog post

कनक मंजरी छंद "गोपी विरह"

कनक मंजरी छंद "गोपी विरह"तन-मन छीन किये अति पागल,हे मधुसूदन तू सुध ले।श्रवणन गूँज रही मुरली वह,जो हम ली सुन कूँज तले।।अब तक खो उस ही धुन में हम,ढूंढ रहीं ब्रज की गलियाँ।सब कुछ जानत हो तब दर्शन,देय खिला मुरझी कलियाँ।।द्रुम अरु कूँज लता सँग बातिन,में यह वे सब पूछ रही।नटखट श्याम सखा बिन जीवित,क्यों अब लौं, निगलै न मही।।विहग रहे उड़ छू कर अम्बर,गाय रँभाय रही सब हैं।हरित सभी ब्रज के तुम पादप,बंजर तो हम ही अब हैं।।मधुकर एक लखी तब गोपिन,बोल पड़ी फिर वे उससे।भ्रमर कहो किस कारण गूँजन,से बतियावत हो…See More
6 hours ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post अहीर छंद "प्रदूषण"
"आ0 सुशील सारना जी आपका बहुत बहुत आभार।"
Saturday
Sushil Sarna commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post अहीर छंद "प्रदूषण"
"आदरणीय वासुदेव जी अति सुंदर और प्रवाहमयी सृजन के लिए दिल से बधाई ।"
Thursday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post अहीर छंद "प्रदूषण"
"आ0 गोपाल नारायण जी आपका बहुत बहुत आभार।"
Thursday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post अहीर छंद "प्रदूषण"
"आ०, ग्यारह सम मात्रिक छंद जिसके प्रत्येक चरणात में १२१ अनिवार्य का कुशल निर्वाह  i इस छंद की एक धुन भी है ,जिसमे प्रवाह होता है जैसे  ओ मेरे मनमीत  दिल मेरा तू जीत  गा जीवन के गीत  मुझे मिले नवनीत "
Thursday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' posted a blog post

अहीर छंद "प्रदूषण"

अहीर छंद "प्रदूषण"बढ़ा प्रदूषण जोर। इसका कहीं न छोर।। संकट ये अति घोर। मचा चतुर्दिक शोर।।यह दावानल आग। हम सब पर यह दाग।। जाओ मानव जाग। छोड़ो भागमभाग।।मनुज दनुज सम होय। मर्यादा वह खोय।। स्वारथ का बन भृत्य। करे असुर सम कृत्य।।जंगल करत विनष्ट। सहे जीव-जग कष्ट।। प्राणी सकल कराह। भरते दारुण आह।।यंत्र-धूम्र विकराल। ज्यों यह विषधर व्याल।। जकड़ जगत निज दाढ़। विपदा करे प्रगाढ़।।दूषित वायु व नीर। जंतु समस्त अधीर।। संकट में अब प्राण। उनको कहीं न त्राण।।प्रकृति-संतुलन ध्वस्त। सकल विश्व अब त्रस्त।। अन्धाधुन्ध…See More
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ओ बी ओ मंच को समर्पित ग़ज़ल (1222*4)
"आदरणीय बासुदेव अग्रवाल जी, आपकी इस प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई. ओबीओ का नौवें वर्ष में प्रवेश करना आप जैसे साधकों का ही शुभ प्रतिफल है. इसकी हार्दिक बधाई  शुभातिशुभ"
Apr 3
Neelam Upadhyaya commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ओ बी ओ मंच को समर्पित ग़ज़ल (1222*4)
"आदरणीय बासुदेव अग्रवाल जी, ओ बी ओ की 9वी वर्षगांठ पर पेश सुंदर गज़ल के लिए आपको मुबारकबाद।"
Apr 3

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ओ बी ओ मंच को समर्पित ग़ज़ल (1222*4)
"आद० बासुदेव जी ओ बी ओ की 9वी वर्षगांठ पर इस सुंदर गज़ल के लिए आपको मुबारकबाद "
Apr 3
Tasdiq Ahmed Khan commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ओ बी ओ मंच को समर्पित ग़ज़ल (1222*4)
"मुहतरम जनाब बासुदेव साहिब, ओ बी ओ की 9वीं वर्ष गांठ पर सुंदर ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं l "
Apr 2
Samar kabeer commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ओ बी ओ मंच को समर्पित ग़ज़ल (1222*4)
"जनाब बासुदेव अग्रवाल 'नमन' जी आदाब,ओबीओ की सालगिरह पर ओबीओ को समर्पित ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'तुझे इस वर्ष नौवें की ओ बी ओ बधाई है' ये मिसरा बह्र में नहीं है,यूँ कर लें:- 'तुझे इस वर्ष नौवें की ऐ ओ बी ओ…"
Apr 2
Hariom Shrivastava commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ओ बी ओ मंच को समर्पित ग़ज़ल (1222*4)
"वाह,वाहहह,ओबीओ की नौवीं वर्षगाँठ पर लाजवाब ग़ज़ल। आपको व ओबीओ परिवार को बधाई।"
Apr 1
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on Samar kabeer's blog post ओ.बी.ओ.की 9 वी सालगिरह का तुहफ़ा
"वाह आ0 समर साहिब ओ बी ओ के नवम वार्षिक दिवस के उपलक्ष्य में सुंदर भेंट। तू रहे आबाद सालों साल तक, तू ही है सबकी अमानत ओ बी ओ। तू"
Apr 1
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' posted a blog post

ओ बी ओ मंच को समर्पित ग़ज़ल (1222*4)

तुझे इस वर्ष नौवें की ओ बी ओ बधाई है, हमारे दिल में चाहत बस तेरी ही रहती छाई है।मिला इक मंच तुझ जैसा हमें अभिमान है इसका, हमारी इस जहाँ में ओ बी ओ से ही बड़ाई है।सभी इक दूसरे से सीखते हैं और सिखाते हैं, हमारी एकता की ओ बी ओ ही बस इकाई है।सभी झूमें, सभी गायें यहाँ ओ बी ओ में मिल के, सभी हम भक्त तेरे हैं तू ही प्यारा कन्हाई है।लगा जो मर्ज लिखने का, दिखाते ओ बी ओ को ही, उसी के पास इसकी क्यों कि इकलौती दवाई है।तुझे शत शत 'नमन' मेरा बधाई फिर से ओ बी ओ, यहीं मेरी पढ़ाई है यहीं मेरी लिखाई है।मौलिक व…See More
Apr 1
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-101
"आ0 छोटे लाल सिंह जी सुंदर रचना हुई है। हृदय से बधाई।"
Mar 9
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-101
"जनाब शेख उस्मानी जी अनेक ज्वलन्त समस्याओं पर कटाक्ष करती प्रस्तुति का हार्दिक अभिनन्दन एवं बधाई।"
Mar 9

Profile Information

Gender
Male
City State
Tinsukia
Native Place
Tinsukia
Profession
कवि
About me
परिचय -बासुदेव अग्रवाल 'नमन' नाम- बासुदेव अग्रवाल; शिक्षा - B. Com. जन्म दिन - 28 अगस्त, 1952; स्थान - सुजानगढ़ (राजस्थान) रुचि - हर विधा में कविता लिखना। मुक्त छंद, पारम्परिक छंद, हाइकु, मुक्तक इत्यादि। गीत ग़ज़ल में भी रुचि है। परिचय - वर्तमान में मैँ असम प्रदेश के तिनसुकिया नगर में हूँ। मैं नारायणी साहित्य अकादमी से जुड़ा हुवा हूँ। हमारी नियमित रूप से मासिक कवि गोष्ठी होती है जिनमें मैं नियमित रूप से भाग लेता हूँ। नारायणी के माध्यम से मैं देश के प्रतिष्ठित साहित्यिकारों से जुड़ा हुवा हूँ। whatsup के कई ग्रुप से जुड़ा हुवा हूँ जिससे साहित्यिक कृतियों एवम् विचारों का आदान प्रदान गणमान्य साहित्यकारों से होता रहता है। Blog - narayanitsk.blogspot.com बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s Blog

कनक मंजरी छंद "गोपी विरह"

कनक मंजरी छंद "गोपी विरह"

तन-मन छीन किये अति पागल,

हे मधुसूदन तू सुध ले।

श्रवणन गूँज रही मुरली वह,

जो हम ली सुन कूँज तले।।

अब तक खो उस ही धुन में हम,

ढूंढ रहीं ब्रज की गलियाँ।

सब कुछ जानत हो तब दर्शन,

देय खिला मुरझी कलियाँ।।

द्रुम अरु कूँज लता सँग बातिन,

में यह वे सब पूछ रही।

नटखट श्याम सखा बिन जीवित,

क्यों अब लौं, निगलै न मही।।

विहग रहे उड़ छू कर अम्बर,

गाय रँभाय रही सब हैं।

हरित सभी ब्रज के तुम पादप,

बंजर…

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Posted on April 22, 2019 at 10:54am

अहीर छंद "प्रदूषण"

अहीर छंद "प्रदूषण"

बढ़ा प्रदूषण जोर।

इसका कहीं न छोर।।

संकट ये अति घोर।

मचा चतुर्दिक शोर।।

यह दावानल आग।

हम सब पर यह दाग।।

जाओ मानव जाग।

छोड़ो भागमभाग।।

मनुज दनुज सम होय।

मर्यादा वह खोय।।

स्वारथ का बन भृत्य।

करे असुर सम कृत्य।।

जंगल करत विनष्ट।

सहे जीव-जग कष्ट।।

प्राणी सकल…

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Posted on April 18, 2019 at 1:18pm — 4 Comments

ओ बी ओ मंच को समर्पित ग़ज़ल (1222*4)

तुझे इस वर्ष नौवें की ओ बी ओ बधाई है,

हमारे दिल में चाहत बस तेरी ही रहती छाई है।

मिला इक मंच तुझ जैसा हमें अभिमान है इसका,

हमारी इस जहाँ में ओ बी ओ से ही बड़ाई है।

सभी इक दूसरे से सीखते हैं और सिखाते हैं,

हमारी एकता की ओ बी ओ ही बस इकाई है।

सभी झूमें, सभी गायें यहाँ ओ बी ओ में मिल के,

सभी हम भक्त तेरे हैं तू ही प्यारा कन्हाई है।

लगा जो मर्ज लिखने का, दिखाते ओ बी ओ को ही,

उसी के पास इसकी क्यों कि इकलौती दवाई…

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Posted on April 1, 2019 at 12:00pm — 6 Comments

जागो भाग्य विधाताओ

(प्रति चरण 8+8+8+7 वर्णों की रचना)

देखा अजब तमाशा, छायी दिल में निराशा,

चार गीदड़ ले गये, मूँछ तेरी नोच के।

सोये हुए शेर तुम, भूतकाल में हो गुम,

पुरखों पे नाचते हो, नाक नीची सोच के।।

पूर्वजों ने घी था खाया, नाम तूने वो गमाया,

सूंघाने से हाथ अब, कोई नहीं फायदा।

ताव झूठे दिखलाते, गाल खूब हो बजाते,

मुँह से काम हाथ का, होने का ना कायदा।।

हाथ धरे बैठे रहो, आँख मीच सब सहो,

पानी पार सर से हो, मुँह तब फाड़ते।…

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Posted on February 16, 2019 at 5:00pm — 3 Comments

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At 7:13pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय
श्री बासुदेव अग्रवाल 'नमन' जी,

सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:42pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा व  लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

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