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बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
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बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s Friends

  • बृजेश कुमार 'ब्रज'

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बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on Saurabh Pandey's blog post ग़ज़ल : भइ, आप हैं मालिक तो कहाँ आपसे तुलना
"वाहहह आ0 सौरभ जी ईद के पावन मौके पर क्या जानदार ग़ज़ल कही है। एक एक शेर लाजबाब। शेर दर शेर दाद हाजिर है।"
2 minutes ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-84
"वाहहहह आ0 राजेश कुमारी जी बहुत खूब। पढ़ के मजा आ गया। मेहमान वे हमारे थे जालिम बुखार से। ताजिंदगी मुझे वो रुला कर चले गये।"
yesterday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-84
"वाहहहह आ0 अमित जी अच्छी ग़ज़ल कही है। हृदय से बधाई।"
yesterday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-84
"आ0 लक्ष्मण धामी जी हृदय तल से आभार।"
yesterday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-84
"आ0 अमित जी हृदय से आभार।"
yesterday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-84
"आ0 गजेन्द्र जी आपने गहराई से ग़ज़ल में शिरकत की और सराही आपका हृदय से आभार।"
yesterday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-84
"आ0 राजेश कुमारी जी हृदय से आभार।"
yesterday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-84
"आ0 तस्दीक अहमद जी दाद और सुझाव का तहे दिल से शुक्रिया।"
yesterday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-84
"आ0 शिज्जु साहिब बहुत सुंदर ग़ज़ल हुई है। हर शेर लाजबाब। दाद कुबूल करें।"
Friday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-84
"वाहहहह आ0 तस्दीक अहमद साहिब इस खूबसूरत ग़ज़ल के लिए हृदय से बधाई और शेर दर शेर दाद कुबूल हो।"
Friday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-84
"आ0 गुरुप्रीत जी आपका हृदय से आभार।"
Friday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-84
"आ0 सौरभ पांडे जी आपसे ग़ज़ल को प्रशंसा और दाद मिली मेरा लिखना सार्थक हुआ। आपका हृदय तल से आभार।"
Friday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-84
"आ0 मोहम्मद आरिफ साहिब आपसे ग़ज़ल को दाद मिली आपका तहे दिल से शुक्रिया।"
Friday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-84
"ग़ज़ल (अपना सा क्यूँ न मुझको बना कर चले गये) बहर:- 221 2121 1221 212 नजरों के तीर दिल में चुभा कर चले गये, घायल को छोड़ आँख बचा कर चले गये। चुग्गा वे शोखियों का चुगा कर चले गये, सय्याद बनके पंछी फँसा कर चले गये। आना भी और जाना भी उनका था…"
Thursday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-80
"वाहहह आ0 तस्दीक अहमद खान साहिब कलम की महिमा में बहुत सुंदर ग़ज़ल। तहे दिल से मुबारकवाद।"
Jun 10
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-80
"आ0 कल्पना भट्ट जी बहुत सुंदर हाइकु हुए हैं। हृदय से बधाई।"
Jun 10

Profile Information

Gender
Male
City State
Tinsukia
Native Place
Tinsukia
Profession
कवि
About me
परिचय -बासुदेव अग्रवाल 'नमन' नाम- बासुदेव अग्रवाल; शिक्षा - B. Com. जन्म दिन - 28 अगस्त, 1952; स्थान - सुजानगढ़ (राजस्थान) रुचि - हर विधा में कविता लिखना। मुक्त छंद, पारम्परिक छंद, हाइकु, मुक्तक इत्यादि। गीत ग़ज़ल में भी रुचि है। परिचय - वर्तमान में मैँ असम प्रदेश के तिनसुकिया नगर में हूँ। मैं नारायणी साहित्य अकादमी से जुड़ा हुवा हूँ। हमारी नियमित रूप से मासिक कवि गोष्ठी होती है जिनमें मैं नियमित रूप से भाग लेता हूँ। नारायणी के माध्यम से मैं देश के प्रतिष्ठित साहित्यिकारों से जुड़ा हुवा हूँ। whatsup के कई ग्रुप से जुड़ा हुवा हूँ जिससे साहित्यिक कृतियों एवम् विचारों का आदान प्रदान गणमान्य साहित्यकारों से होता रहता है। Blog - narayanitsk.blogspot.com बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s Blog

आओ सब मिल कर संकल्प करें

आओ सब मिल कर संकल्प करें।

चैत्र शुक्ल नवमी है आज, नूतन कुछ तो करें।

आओ सब मिल कर संकल्प करें॥



मर्यादा में रहना सीखें, सागर से बन कर हम सब।

मर्यादा में रहना सिखलाएं, तोड़े कोई इसको जब।

मर्यादा के स्वामी की, धारण तो यह सीख करें।

आओ सब मिल कर संकल्प करें॥



मात पिता गुरु और बड़ों की, सेवा का ही मन हो।

भIई मित्र और सब के, लिए समर्पित ये तन हो।

समदर्शी सा बन कर हम, सबसे व्यवहार करें।

आओ सब मिल कर संकल्प करें॥



उत्तम आदर्शों को हम,… Continue

Posted on April 5, 2017 at 11:49am — 3 Comments

ग़ज़ल(जीवन पथिक संसार में चलते चलो तुम सर्वदा)

बह्र-- 2212 2212 2212 2212



जीवन पथिक संसार में चलते चलो तुम सर्वदा,

राहों में आए कष्ट जो सहते चलो तुम सर्वदा।



अनजान सी राहें तेरी मंजिल कहीं दिखती नहीं,

काँटों भरी इस राह में हँसते चलो तुम सर्वदा।



बीते हुए से सीख लो आयेगा उस को थाम लो,

मुड़ के कभी देखो नहीं बढ़ते चलो तुम सर्वदा।



बहता निरंतर जो रहे गंगा सा निर्मल वो रहे,

जीवन में ठहरो मत कभी बहते चलो तुम सर्वदा।



मासूम कितने रो रहे अबला यहाँ नित लुट रही,

दुखियों के मन… Continue

Posted on April 3, 2017 at 7:24pm — 14 Comments

ग़ज़ल (इंसानियत)

ग़ज़ल (इंसानियत)



2212 2212 2212 2212



इंसान के खूँ की नहीं प्यासी कभी इंसानियत,

फिर भूल तुम जाते हो क्यों अक्सर यही इंसानियत।



जो जिंदगी तुम दे नहीं सकते उसे लेते हो क्यों,

पर खून बहता ही रहा रोती रही इंसानियत।



जब गोलियाँ बरसा जमीं को लाल खूँ से तुम करो,

संसार में आतंक को ना मानती इंसानियत।



हे जालिमों जब जुल्म तुम अबलों पे हरदम ही करो,

मजलूम की आहों में दम को तोड़ती इंसानियत।



थक जाओगे तुम जुल्म कर जिंदा रहेगी ये… Continue

Posted on March 21, 2017 at 12:33pm — 7 Comments

"होली" सायलीछंद

"होली" सायलीछंद



शिल्प- 1 2 3 2 1 शब्द



(1)

होली

का त्योहार

जीवन में लाया

रंगों की

बौछार।



(2)

होली

में जलते

अत्याचार, कपट, छल

निष्पाप भक्त

बचते।



(3)

होली

लाई रंग

हों सभी लाल

खेलें पलास

संग।



(4)

होली

देती छेद

ऊँच नीच के

मन से

भेद।



(5)

सत्रह

की होली

भाजपा की तूती

देश… Continue

Posted on March 12, 2017 at 1:22pm — 3 Comments

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At 7:13pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय
श्री बासुदेव अग्रवाल 'नमन' जी,

सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:42pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

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"जनाब भाई विजय निकोर जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।"
4 hours ago
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post क़दम उठाने से पहले विचार करना था
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।"
4 hours ago
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post कागज़ की नाव :कहानी
" बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय  सुनील प्रसाद(शाहाबादी) जी ! सादर "
10 hours ago
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post कागज़ की नाव :कहानी
"आदरणीय  बृजेश कुमार 'ब्रज जी ,रचना पर आपके समर्थन के लिए आपका आभार ! सादर "
10 hours ago
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post कागज़ की नाव :कहानी
"आदरणीय  डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव सर ,आपकी सीख से काफी कुछ समझ आ गया है , पुनः…"
10 hours ago
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post कागज़ की नाव :कहानी
"आदरणीया  rajesh kumari जी ,हार्दिक आभार आपका ,आपकी बातों को संज्ञान में लेते हुए…"
10 hours ago
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post कागज़ की नाव :कहानी
"सहमत आदरणीय  Ravi Prabhakar सर ! सादर"
10 hours ago
surender insan commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- भले मैं कभी मुस्कुराया नहीं ( दिनेश कुमार )
"वाह वहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है जी। शेर दर शेर दिली दाद कबूल फरमाये जी।"
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Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Saurabh Pandey's blog post ग़ज़ल : भइ, आप हैं मालिक तो कहाँ आपसे तुलना
"पिस्तौल-तमंचे से ज़बर ईद मुबारक़ इन्सान पे मौला का असर, ईद मुबारक़.......मत्ला ही मारक क्षमता से…"
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