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बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
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बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s Friends

  • बृजेश कुमार 'ब्रज'

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बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on Mohammed Arif's blog post एक कविता जश्ने आज़ादी के नाम
"मोहम्मद आरिफ जी इस आज़ादी की अलख जगाती कविता की हृदय से बधाई। आओ शौर्य गीत गाएँ वीरों को अमर बनाएँ , सक्षम भारत वर्ष बनाएँ आज़ादी की अलख जगाएँ । बहुत खूब"
6 hours ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post आज़ादी का गीत
"आ0 मोहम्मद आरिफ जी आपने जश्ने आज़ादी के गीत में शिरकत की और बधाई से नवाजा आपका हृदय से आभार।"
6 hours ago
Mohammed Arif commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post कृष्णावतार
"आदरणीय वासुदेव अग्रवाल जी आदाब, बहुत ही बेहतरीन रचना । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब के सुझाव पर गौर करें ।"
22 hours ago
Mohammed Arif commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post आज़ादी का गीत
"आदरणीय वासुदेव अग्रवाल जी आदाब,जश्ने आज़ादी की गरिमा-गौरव और महत्व को रेखांकित करता बहुत ही प्यारा गीत । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । जश्ने आज़ादी की बधाई ।"
22 hours ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post आज़ादी का गीत
"आदरणीय समर साहिब आपका हृदय तल से आभार।"
23 hours ago
Samar kabeer commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post आज़ादी का गीत
"जनाब बासुदेव अग्रवाल'नमन'जी आदाब,यौम-ए-आज़ादी पर अच्छा गीत लिखा आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । पहले बन्द के अंत में मात्रा पूरी करने के लिये 'तारीख़' को "तारिख"लिखा है आपने ?"
yesterday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' posted a blog post

आज़ादी का गीत

"आज़ादी का गीत"(2212 122 अंतरा 22×4 // 22×3)(तर्ज़- दिल में तुझे बिठा के)भारत तु जग से न्यारा, सब से तु है दुलारा,मस्तक तुझे झुकाएँ, तेरे ही गीत गाएँ।।सन सैंतालिस मास अगस्त था, तारिख पन्द्रह प्यारी,आज़ादी जब हमें मिली थी, भोर अज़ब वो न्यारी।चारों तरफ खुशी थी, छायी हुई हँसी थी,ये पर्व हम मनाएँ, तेरे ही गीत गाएँ।।आज़ादी के नभ का यारों, मंजर था सतरंगा,उतर गया था जैक वो काला, लहराया था तिरंगा।भारत की जय थी गूँजी, अनमोल थी ये पूँजी,सपने नये सजाएँ, तेरे ही गीत गाएँ।।बहुत दिये बलिदान मिली तब, आज़ादी ये…See More
yesterday
Samar kabeer commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post कृष्णावतार
"पूर्व रचनाकारों का मुझे पता नहीं,लेकिन मात्रा बिठाने के लिये क्या सही शब्द को बिगाड़ कर अपनी सुविधानुसार करना उचित है ?"
yesterday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post कृष्णावतार
"आ0 समर कबीर साहिब आपका हृदय से आभार। मुझे बीजलियाँ का भी प्रयोग पुर्व के रचनाकारों द्वारा मिला है। वहाँ मात्रा के हिसाब से बीजलियाँ आवश्यक है क्योंकि 6 मात्रा चाहिए। सादर"
yesterday
Samar kabeer commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post कृष्णावतार
"जनाब बासुदेव अग्रवाल'नमन'जी आदाब,बहुत उम्दा रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । दूसरी पंक्ति में 'बीजलियाँ'कि "बिजलियाँ"?"
yesterday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"आ0 राजेश कुमारी जी आपकी सराहना का और अमूल्य सुझाव का हृदय तल से आभार।"
Saturday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"आ0 अखिलेश कृष्ण जी आपको यह दोहा ग़ज़ल का मेरा प्रथम प्रयास अच्छा लगा और आपसे रचना को सराहना मिली, मेरा लिखना सार्थक हुआ। आपका हृदय से आभार।"
Saturday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"आ0 लक्ष्मण धामी जी आपका हृदय से आभार।"
Saturday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"आ0 अशोक कुमार रक्ताले जी आपको यह दोहा ग़ज़ल का मेरा प्रथम प्रयास अच्छा लगा और आपसे रचना को सराहना मिली, मेरा लिखना सार्थक हुआ। आपका हृदय से आभार।"
Saturday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"आ0 प्रतिभा पांडे जी आपको यह दोहा ग़ज़ल का मेरा प्रथम प्रयास अच्छा लगा और आपसे रचना को सराहना मिली, मेरा लिखना सार्थक हुआ। आपका हृदय से आभार।"
Saturday
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-82
"आ0 शहज़ाद उस्मानी जी आपका हृदय से आभार।"
Saturday

Profile Information

Gender
Male
City State
Tinsukia
Native Place
Tinsukia
Profession
कवि
About me
परिचय -बासुदेव अग्रवाल 'नमन' नाम- बासुदेव अग्रवाल; शिक्षा - B. Com. जन्म दिन - 28 अगस्त, 1952; स्थान - सुजानगढ़ (राजस्थान) रुचि - हर विधा में कविता लिखना। मुक्त छंद, पारम्परिक छंद, हाइकु, मुक्तक इत्यादि। गीत ग़ज़ल में भी रुचि है। परिचय - वर्तमान में मैँ असम प्रदेश के तिनसुकिया नगर में हूँ। मैं नारायणी साहित्य अकादमी से जुड़ा हुवा हूँ। हमारी नियमित रूप से मासिक कवि गोष्ठी होती है जिनमें मैं नियमित रूप से भाग लेता हूँ। नारायणी के माध्यम से मैं देश के प्रतिष्ठित साहित्यिकारों से जुड़ा हुवा हूँ। whatsup के कई ग्रुप से जुड़ा हुवा हूँ जिससे साहित्यिक कृतियों एवम् विचारों का आदान प्रदान गणमान्य साहित्यकारों से होता रहता है। Blog - narayanitsk.blogspot.com बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s Blog

आज़ादी का गीत

"आज़ादी का गीत"

(2212 122 अंतरा 22×4 // 22×3)

(तर्ज़- दिल में तुझे बिठा के)



भारत तु जग से न्यारा, सब से तु है दुलारा,

मस्तक तुझे झुकाएँ, तेरे ही गीत गाएँ।।



सन सैंतालिस मास अगस्त था, तारिख पन्द्रह प्यारी,

आज़ादी जब हमें मिली थी, भोर अज़ब वो न्यारी।

चारों तरफ खुशी थी, छायी हुई हँसी थी,

ये पर्व हम मनाएँ, तेरे ही गीत गाएँ।।



आज़ादी के नभ का यारों, मंजर था सतरंगा,

उतर गया था जैक वो काला, लहराया था तिरंगा।

भारत की जय थी गूँजी, अनमोल… Continue

Posted on August 15, 2017 at 1:29pm — 4 Comments

कृष्णावतार

"कृष्णावतार"



रास छंद। 8,8,6 मात्रा पर यति। अंत 112 से आवश्यक और 2-2 पंक्ति तुकांत आवश्यक।)



हाथों में थी, मात पिता के, सांकलियाँ।

घोर घटा में, कड़क रही थी, बीजलियाँ

हाथ हाथ को, भी ना सूझे, तम गहरा।

दरवाजों पर, लटके ताले, था पहरा।।



यमुना मैया, भी ऐसे में, उफन पड़ी।

विपदाओं की, एक साथ में, घोर घड़ी।

मास भाद्रपद, कृष्ण पक्ष की, तिथि अठिया।

कारा-गृह में, जन्म लिया था, मझ रतिया।।



घोर परीक्षा, पहले लेते, साँवरिया।

जग को करते,… Continue

Posted on August 14, 2017 at 11:35am — 4 Comments

राखी

"राखी" (चौपइया छंद)



पर्वों में न्यारी, राखी प्यारी,

सावन बीतत आई।

करके तैयारी, बहन दुलारी,

घर आँगन महकाई।

पकवान पकाए, फूल सजाए,

भेंट अनेकों लाई।

वीरा जब आया, वो बँधवाया,

राखी थाल सजाई।।



मन मोद मनाए, बलि बलि जाए,

नव उमंग है छाई।

भाई मन भाए, गीत सुनाए,

खुशियों में बौराई।

डाले गलबैयाँ, लेत बलैयाँ,

छोटी बहन लडाई।

भाल पे बिंदिया, ओढ़ चुनरिया,

जीजी मंगल गाई।।



जब जीवन चहका, बचपन महका,

तुम थी तब… Continue

Posted on August 7, 2017 at 6:21pm — 6 Comments

ग़ज़ल (मधुर मास सावन लगा है)

ग़ज़ल (मधुर मास सावन लगा है)



बहर:- 122 122 122



मधुर मास सावन लगा है,

दिवस सोम लगते पड़ा है।



महादेव को सब रिझाएँ,

ये संयोग अद्भुत हुआ है।



तेरा रूप सबसे निराला,

गले सर्प माथे जटा है।



कुसुम बिल्व चन्दन चढ़ाएँ,

ये शुभ फल का अवसर बना है।



शिवाले में अभिषेक जल से,

करें भक्त मोहक छटा है।



करें कावड़ें तुझको अर्पित,

सभी पुण्य पाते महा है।



करो पूर्ण आशा मेरी शिव,

'नमन' हाथ जोड़े खड़ा… Continue

Posted on July 10, 2017 at 12:00pm — 10 Comments

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At 7:13pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय
श्री बासुदेव अग्रवाल 'नमन' जी,

सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 10:42pm on August 21, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा व  लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

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1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

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