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mrs manjari pandey
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  • Varanasi,{ U.P.}
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mrs manjari pandey commented on Rahul Dangi's blog post गजल-ये नहीं शायरी के पन्नें है!
"आदरणीय राहुल जी हार्दिक बधाई स्वीकार करें अच्छी ग़ज़ल के लिए । "
Mar 11, 2015
mrs manjari pandey commented on मिथिलेश वामनकर's blog post ग़ज़ल - ये बम क्या करें..... (मिथिलेश वामनकर)
"जिंदगी में नहीं कोई गम क्या करें दिख रही बस खुशी मुहतरम क्या करें आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी ऐसी ही ख़ुशी बनी रहे । अच्छी बात है । बहुत बहुत बधाई । "
Mar 11, 2015
mrs manjari pandey commented on गिरिराज भंडारी's blog post मिटा दूँ या मिट जाऊँ -- अतुकांत ( गिरिराज भण्डारी )
"आदरणीय गिरिराज जी रोज़मर्रा के अहसासों को बखूबी बयान किया आपने । हार्दिक बधाई । "
Mar 11, 2015
mrs manjari pandey commented on jaan' gorakhpuri's blog post जला न दे...''जान'' गोरखपुरी
"बस कर ये सितम के,अब सजा न दे हय! लम्बी उम्र की तू दुआ न दे।  बहुत सुन्दर असरदार रचना के लिए बधाई  आदरणीय । "
Mar 11, 2015
mrs manjari pandey replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओ बी ओ लाइव महा-उत्सव" (होली स्पेशल) अंक-53
"आदरणीय कृष्णा मिश्र जी बहुत बहुत बधाई सुन्दर रचना के लिए  । छन्न  पकैया  छन्न  पकैया   कहते ही एक अद्भुत माधुर्य का आभास होता है । "
Mar 7, 2015
mrs manjari pandey replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओ बी ओ लाइव महा-उत्सव" (होली स्पेशल) अंक-53
"फागुनी गीत रंग गई रंग गई री सखी , मै तो फाग के रंग में रंग गई । १ - रंग ना गुलाल मै तो शरम से लाल हुई पिया घर आए मै आप गुलाल हुई । छेड़ो ना छेड़ो ना हे मोहे छेड़ो ना छेड़ो ना छेड़ो सखी मै अपने पिया रंग रंग गई । रंग गई। ………। २…"
Mar 5, 2015
mrs manjari pandey replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओ बी ओ लाइव महा-उत्सव" (होली स्पेशल) अंक-53
"होली पर विशेष फागुनी गीत B. सखी री फागुन आया - हाय मोरे घर पाहुन आया - हाय आओ सब मिल मंगल गान करें सब दूर चलो हम मलाल करें । गेंदा गुलाब है चहके - हाय गम - गम बगिया महके - हाय अमराई में अमवा बउर है गए महुवा सब फूलन लाग गए । अबीर गुलाल उड़ाओ -…"
Mar 5, 2015
narendrasinh chauhan commented on mrs manjari pandey's blog post गीत
"बहुत ही सुन्दर रचना"
Mar 5, 2015
Hari Prakash Dubey commented on mrs manjari pandey's blog post गीत
"बहुत ही सुन्दर रचना आदरणीया मंजरीजी... गाँव की पगडण्डी वो छूटी , पानी पनघट छूट गया खेतवारी बँसवारी छूटी, बचपन कोई लूट गया भर अँकवारी रोई दुआरी ,नइहर मोरा छूट गया ।..... बहुत बहुत बधाई ! सादर "
Jan 29, 2015
Rahul Dangi commented on mrs manjari pandey's blog post गीत
"बहुत मीठा सुन्दर गीत वाह!"
Jan 25, 2015
Ram Ashery commented on mrs manjari pandey's blog post गीत
"आपके गीत मेरे मन को छू  गया , बचपन की याद आज ताजी हो गई  कोई साथी किसी मोड पर मिल गया  गाँव गली छोड़ मैं शहर में बस गया माँ बाप भाई बहन सबकी यादें रह गई क्या करें मजबूर हैं बस अकेला रह गया   आपको बहुत बहुत बधाई स्वीकार हो "
Jan 24, 2015
mrs manjari pandey's blog post was featured

गीत

जो टूटा सो टूट गया रूठा सो रूठ गया । साथ चले जिस पथ पर थे आखिर तो वो भी छूट गया । गाँव की पगडण्डी वो छूटी , पानी पनघट छूट गया खेतवारी बँसवारी छूटी, बचपन कोई लूट गया भर अँकवारी रोई दुआरी ,नइहर मोरा छूट गया । जो....अँचरा अम्मा का जो छूटा ,घर आँगन सब छूट गया छिप - छिप बाबा का रोना भइया वो बिसुरता छूट गया तीस उठी है करेजे में ज्यूँ पत्थर कोई कूँट गया । जो…।पाही पलानी मौन हुए मड़ई से छप्पर रूठ गया सोन चिरईया फुर्र हो गयी कोकिल का स्वर रूठ गया साँझ से जैसे दियना रूठे बचपन मुझसे छूट गया ।…See More
Jan 17, 2015

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on mrs manjari pandey's blog post गीत
"पारम्परिक गीतों में जिस गहराई से बिछोह का दर्द उमड़ा आता है वह विस्मित करता है. आदरणीया मंजरीजी, आपके प्रस्तुत गीत ने ग्रामीण अंचल की मधुरता को साझा किया है, जहाँ भले लोगों की छोटी-छोटी इच्छाओं की तृप्ति से रस पाती भोली-भाली दुनिया बसा करती थी.…"
Dec 20, 2014
somesh kumar commented on mrs manjari pandey's blog post गीत
"देसज शब्दों के साथ ,छुटने की इस पीड़ा को बड़ी सुन्दरता से शब्द दिए हैं आप ने ,बधाई !"
Dec 19, 2014
mrs manjari pandey commented on mrs manjari pandey's blog post गीत
"आदरणीय अजय शर्मा जी सारगर्भित टिप्पणी के लिए आभारी हूँ ।"
Dec 19, 2014
mrs manjari pandey left a comment for मिथिलेश वामनकर
"आदरणीय मिथिलेश जी उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत साधुवाद"
Dec 19, 2014

Profile Information

Gender
Female
City State
Varanasi. { U.P.}
Native Place
Varanasi.
Profession
Teaching
About me
I am Sanskrit Teacher in Kendriya Vidyalaya. Now a days I am osted i Varanasi.

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गीत

जो टूटा सो टूट गया

रूठा सो रूठ गया ।

साथ चले जिस पथ पर थे

आखिर तो वो भी छूट गया ।



गाँव की पगडण्डी वो छूटी , पानी पनघट छूट गया

खेतवारी बँसवारी छूटी, बचपन कोई लूट गया

भर अँकवारी रोई दुआरी ,नइहर मोरा छूट गया ।

जो....



अँचरा अम्मा का जो छूटा ,घर आँगन सब छूट गया

छिप - छिप बाबा का रोना भइया वो बिसुरता छूट गया

तीस उठी है करेजे में ज्यूँ पत्थर कोई कूँट गया ।

जो…।



पाही पलानी मौन हुए मड़ई से छप्पर रूठ गया

सोन चिरईया…

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Posted on December 17, 2014 at 9:30pm — 9 Comments

यात्रा संस्मरण, मेलबोर्न

मेलबोर्न, औस्ट्रेलिया यात्रा का एक सुखद संस्मरण बाँटना चाहूँगी । जैसे मै भीगी आपको भी यादों की बारिश में भिगोना चाहूँगी . बड़ी -बड़ी मिलों , कारखानों वाले क्षेत्रों को पार करते हुए , नेशनल पार्क में संरक्षित ,सड़कों के किनारे लगाई गई फेंसिंग के समीप तक आ गए कंगारुओं के झुण्ड का विहंगम अवलोकन करते हुए हम प्राचीन गाँव सोरेन्टो आ गए। . इतिहास को गर्भ में रखे हुए ऑस्ट्रेलियाई सभ्यता व् संस्कृति का भरपूर जायज़ा यहां लिया जा सकता है। यहाँ का समुद्री तट भी उतना ही रम्य.



सागर के सीने पे…

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Posted on July 15, 2014 at 2:30pm — 3 Comments

गज़ल

है हंसी रात बस चले आओ 

बहके जज़्बात बस चले आओ !

        

उसने वादा किया वफ़ा देंगे

दे रहा घात बस चले आओ !

ज़िन्दगी हो गई है आवारा

क्या सवालात बस चले आओ !

ठन्डे पानी मे भी बदन जलता

क्या ये बरसात बस चले आओ !

"म“ञ्जरी" अब सहा नही जाता 

अरज़े हालात बस चले आओ !

अप्रकाशित एवम मौलिक रचना  !

Posted on September 3, 2013 at 8:30pm — 16 Comments

होली गीत

                          होली गीत  

 

  अर र र र  देखो सखी  तो पूरी लाल हुई

  रंग ना  गुलाल मै  तो शर्म से लाल हुई।

  पीर ना  दहन मोरे तन मन में आग लगी -2

   चाम  ना वसन जले मै तो जल लाल हुई।

   रंग ना-------------

  ले के रस रंग चली देवरों की टोली - 2

  घेर घेर घेर मई तो जय कन्हैया लाल हुई।

   रंग ना -------------

   आज तो बाबा भी करे हैं ठिठोली - 2

   लाज की चुनर ओढ़ मै हँस हँस निहाल हुई।

   रंग ना…

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Posted on March 17, 2013 at 11:07pm — 9 Comments

Comment Wall (9 comments)

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At 10:43pm on June 15, 2014, Santlal Karun said…

आदरणीया मंजरी मैडम, 

आज मैनें आप को ओबीओ पर देखा और पढ़ा भी | अच्छी रचनाओं के लिए हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! इसी तरह अपनी रचनाओं से अधिकाधिक सक्रिय  रहें | आप के मार्ग-दर्शन पर मैं ओबीओ में आया था, पर समयाभाव के कारण अधिक सक्रिय न हो सका | 

At 9:54am on September 6, 2013, Abhinav Arun said…

सदा स्वागत है स्वर साहित्य कोकिला आदरणीय मंजरी जी आपकी काव्य मंजरियों की सुवास चतुर्दिक गूंजे यही कामना है हम सबको बनारस को आप पर गर्व है बहुत बधाई और शुभकामनायें !!

At 8:21pm on September 5, 2013, बृजेश नीरज said…

आदरणीया आपका स्वागत है!

At 7:43pm on March 11, 2013,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

सादर धन्यवाद आदरणीया मंजरीजी.. .

At 11:19pm on March 6, 2013, vijay nikore said…

आदरणीया मन्जरी जी:

 

शुभकामनाओं और बधाई के लिए

आपका हार्दिक धन्यवाद।

 

सादर और सस्नेह,

विजय निकोर

At 1:33pm on February 12, 2013, Abhinav Arun said…

आप द्वारा पोस्ट की गयी तस्वीरें हमें भी ऑस्ट्रेलिया की सैर करा रही हैं बहुत बहुत शुभकामनाएं !!

At 7:42pm on December 22, 2012, Abhinav Arun said…
आस्ट्रलिया मे रहते हुए भी काव्य साधना जारी रखना प्रशंसनीय है ,हार्दिक आभार आपकी सराहना मिली .आप लौटें तो आयोजन प्रयोजन हो :-)
At 11:36am on December 6, 2012,
सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey
said…

मंजरीजी, आपको पुनः इस मंच पर सक्रिय देख कर प्रसन्नता हो रही है. विश्वास है, आप स्वस्थ और सकुशल होंगीं. आपके गीत मेरे मन-मस्तिष्क में अभी तक गूँज रहे हैं. देखिये पुनः वाराणसी में गोष्ठी कब हो पाती है. भाई अरुण अभिनवजी को हार्दिक धन्यवाद कि इस मंच पर आपकी उपस्थिति बनी है.

सादर

At 6:54pm on December 1, 2012,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
 
 
 

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