Posted on December 28, 2011 at 8:30am 3 Comments 2 Likes
कल रात कहीं कुछ रीत गया.
लम्हे टूटे, मैं बीत गया.
साँसें क्या हैं..? इक व्यर्थ गति,…
Posted on September 25, 2011 at 8:17am 0 Comments 0 Likes
# साँई स्तवन #
जनम सफल कर ले, भवसागर तर ले,
छुट जायेंगे सारे फंदे, साँई चरण धर ले....
१. कौन सहारा देगा तुझको सोच ज़रा,
तुझे कहाँ ले जाएगा अभिमान तेरा,
अंत समय क्या तेरे साथ चलेगा जग ?…
Posted on September 12, 2011 at 7:30am 2 Comments 1 Like
बाक़ी रहा न मैं, न ग़मे-रोज़गार मेरे.
अब सिर्फ़ तू ही तू है परवरदिगार मेरे.
यारब हैं सर पे आने को कौन सी बलायें,
क्यूँ आज मेरी क़िस्मत है साज़गार मेरे.
बरसेगी और तुझपे ? उनके करम की बदली,…
ContinuePosted on July 15, 2011 at 10:00pm 0 Comments 0 Likes
[ विशेष - ओ.बी.ओ. के साहित्य मर्मज्ञ सुधि पाठकों के समक्ष अपनी यह रचना रख रहा हूँ. इसमें मैंने जीवन और आयु के विशेष सन्दर्भ इस मंतव्य के साथ प्रयोग किये हैं कि जीवन सदैव कम होता जाता है जबकि आयु सदैव बढ़ती ही जाती है...इसी भावना को ध्यान में रखकर रचना का अवलोकन करें...मुझे उम्मीद है कि ये विशिष्ट सन्दर्भ प्रयोग आप सभी को पसंद आएगा...]
कब यह पीर मिटेगी मन की.…
Continueआवश्यक सूचना:-
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