Started this discussion. Last reply by Arun Kumar Pandey 'Abhinav' Dec 13, 2011. 11 Replies 2 Likes
यह निर्विवादित सत्य है कि जिस प्रकार कोयले के हर टुकड़े मे हीरा नही होता उसी तरह हर बुद्धिजीवी मे कवि भी नही होता ? बहुत प्रयास के बाद हीरा मिलने पर जैसे कारीगर अपने कौशल से तराश कर ‘‘हीरा’’ बनाता है,…Continue
Started this discussion. Last reply by Pallav Pancholi Nov 22, 2011. 19 Replies 3 Likes
वास्तविक कवि और शायर हम किसे कहेंगे, उन्हे जो मंचों पर बार-बार दिखाई देते हैं या उन्हें जो मंचों पर दिखने के लिए संघर्ष करते रहते हैं, या उन्हें जिन्हे मंचों पर न आने देने के लिए प्रयास करते हैं…Continue
वीनस केसरी replied to Afsos Ghazipuri's discussion क्या कवि या शायर गढ़े जा सकते है ?
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Afsos Ghazipuri replied to Admin's discussion एक और घोषणा :- "महीने की सर्वश्रेष्ट रचना पुरस्कार"
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Ganesh Jee "Bagi" commented on Afsos Ghazipuri's blog post छत पे उगे जो चाँद निहारा न कीजिए
Saurabh Pandey commented on Afsos Ghazipuri's blog post आज भी बदक़िस्मती का वो ज़माना याद है...
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satish mapatpuri commented on Afsos Ghazipuri's blog post छत पे उगे जो चाँद निहारा न कीजिए
Saurabh Pandey commented on Afsos Ghazipuri's blog post छत पे उगे जो चाँद निहारा न कीजिए
वीनस केसरी commented on Afsos Ghazipuri's blog post छत पे उगे जो चाँद निहारा न कीजिए
Saurabh Pandey commented on Afsos Ghazipuri's blog post ग़ज़लAdded by Afsos Ghazipuri 0 Comments 0 Likes
Posted on November 26, 2011 at 8:08am 2 Comments 1 Like
आज भी बदक़िस्मती का वो ज़माना याद है ।
एक ज़वा बेटे का दरया डूब जाना याद है ।
क्या सुनाए कोई नग़मा क्या पढ़ें अब हम ग़ज़ल,
ग़म में डूबा ज़िन्दगी का बस फसाना याद है ।
जश्ने-होली खो गई दीवाली फीक़ी पड़ गई,
अब फ़क़त हर साल इनका आना-जाना याद है ।
सोचते थे अब तलक़ वो छुप गया होगा कहीं,
लौट कर आया नहीं उसका बहाना याद है ।
कर रहे थे बाग़बानी हम बड़े ही प्यार से,
आज भी…
Posted on November 25, 2011 at 9:14am 6 Comments 1 Like
छत पे उगे जो चाँद निहारा न कीजिए
सूरजमुखी का दिन में नज़ारा न कीजिए
महफ़ूज़ रह न पायेगी आँखों की रौशनी
दीदार हुस्ने-बर्क़ खुदारा न कीजिए
शरमा के मुँह न फेर ले आईना, इसलिये
ज़ुल्फ़ों को आइने में संवारा न कीजिए
ऐसा न हो कि ख़ुद को भुला दें हुज़ूर आप
इतना भी अब ख़याल हमारा न कीजिए
एहसा किसी पे कर के, किसी को तमाम रात
ताने ख़ोदा के वासते मारा न कीजिए
दिल जिस से चौक जाये किसी राहगीर का
अब उसका नाम ले…
Posted on November 9, 2011 at 12:30am 4 Comments 2 Likes
एक ग़ज़ल
आपका यूँ मुस्कुराना क्यों मुझे अच्छा लगा ?
एक होना, डूब जाना क्यों मुझे अच्छा लगा ?
जब अकेले हैं मिले, दीवानगी बढ़ती गई,
सिर हिलाना, भाग जाना क्यों मुझे अच्छा लगा ?
हाथ में मेरे, कलाई जब…
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UMASHANKER MISHRA commented on Albela Khatri's blog post धुंए का शौक लग गया तो ज़िन्दगी गई
Saurabh Pandey commented on arunendra mishra's blog post जीवन तुझसे एक वर माँगू
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Arun Srivastava commented on MAHIMA SHREE's blog post दो कवितायेँ किसान भाईयों के लिए
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| 2-ग़ज़ल तक्तीह प्रणाली पर एक चर्चा | 3-ग़ज़ल शब्दावली (उदाहरण सहित) -1, | 4-ग़ज़ल शब्दावली (उदाहरण सहित) -2 |
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