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ASHVANI KUMAR SHARMA joined Admin's group
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ग़ज़ल की कक्षा

इस समूह मे ग़ज़ल की कक्षा आदरणीय श्री तिलक राज कपूर द्वारा आयोजित की जाएगी, जो सदस्य सीखने के इच्‍छुक है वो यह ग्रुप ज्वाइन कर लें |धन्यवाद |See More
Mar 4
ASHVANI KUMAR SHARMA commented on ASHVANI KUMAR SHARMA's blog post कस्बे में ठण्ड
"ए के राजपूत साहब अत्यंत आभार आप का "
Jan 24
ASHVANI KUMAR SHARMA commented on ASHVANI KUMAR SHARMA's blog post कस्बे में ठण्ड
"आभारी हूँ बागी साहब "
Jan 24
ASHVANI KUMAR SHARMA commented on ASHVANI KUMAR SHARMA's blog post कस्बे में ठण्ड
"सम्मान्य सौरभ पांडे साहब अत्यंत आभारी हूँ आप की विस्तृत सार गर्भित टिपण्णी के लिए ......क्षमा प्रार्थी हूँ देर से देखने के लिए "
Jan 24
ASHVANI KUMAR SHARMA commented on Arun Kumar Pandey 'Abhinav''s blog post ग़ज़ल :- हथेली पे कैक्टस उगाने से पहले
"bahut khoob gazal kahi hai janaab .......kshama chahta hun der se dekhne ke liye "
Jan 24
ASHVANI KUMAR SHARMA commented on Ganesh Jee "Bagi"'s blog post ग़ज़ल : कुछ कड़वा सा एहसास
"prabhavi gazal .....mubaraq  "
Jan 24
ASHVANI KUMAR SHARMA commented on Arun Srivastava's blog post एक मुट्ठी धूप
"bahut hi satik prashn uthati kavita .....sadhuvad "
Jan 24
Brij bhushan choubey commented on ASHVANI KUMAR SHARMA's blog post एक ग़ज़ल
"जब कभी भी आजमाया जायेगा   आदमी औकात पर आ जायेगाvah kaya bat ..... शख्सियत औ कद बड़ा जिस का मिला  वो यकीनन बुत बनाया जायेगा  ..lajvab ek sandar gajl "
Jan 24
ASHVANI KUMAR SHARMA commented on ASHVANI KUMAR SHARMA's blog post एक ग़ज़ल
"shukriya vinas keshari ji ,saurabh pandey sahab ,arun kumar pandey sahab "
Jan 24
AK Rajput commented on ASHVANI KUMAR SHARMA's blog post कस्बे में ठण्ड
"सूरज के विरुद्ध षड्यंत्र रच  आततायी कोहरे को  निमंत्रण किस ने दिया ... सर्दी के इस मोसम में आपकी कविता से काफी तपिस महसूर हुई . बहुत सुन्दर , बधाई  "
Jan 3
ASHVANI KUMAR SHARMA's blog post was featured

कस्बे में ठण्ड

सूरज के विरुद्धषड्यंत्र रच आततायी कोहरे को निमंत्रण किस ने दिया कोई नहीं जानता ठण्ड खाया क़स्बा पथरा गया है हरारत महसूस होती है ज्वर हो तो ही अलाव तापते लोग दिखाई नहीं देते बस खांसते,खंखारते हैं बंद कमरों में सक्षम आदेश बिना ही अनधिकृत कर्फ्यूजारी हो गया कस्बे में जमाव बिंदु से नीचे पहुंचेपारे ने नलों का पानी ही नहीं जमा दियाकस्बे की धमनियों का रक्त भी रजाई में दुबका क़स्बा उनींदा पड़ा रहेगा दिन भर मौसम को कोसताइस आलसी आत्म समर्पण को ललकारती कोई आवाज़ एक दिन गूंजेगी कस्बे में उस दिन…See More
Dec 30, 2011
Ganesh Jee "Bagi" commented on ASHVANI KUMAR SHARMA's blog post कस्बे में ठण्ड
"इस सर्दी में और भी सर्दी का एहसास कराती यह कविता, गहरे भाव को अपने आगोश में छुपाये हुए बहुत कुछ कह सकने में सामर्थवान है, बहुत बहुत बधाई अश्वनी कुमार शर्मा जी , बधाई स्वीकार करें |"
Dec 26, 2011
Saurabh Pandey commented on ASHVANI KUMAR SHARMA's blog post कस्बे में ठण्ड
"सूरज तुम कब आओगे  / इस कोहरे की चादर को  / फाड कर  / मैं उस दिन  / सूर्य नमस्कार के मन्त्र  / नहीं जपूंगा  / सीधा पी जाऊँगा तुम्हे  / आँखों से ही इन अद्भुत पंक्तियों के लिये अश्विनी कुमार शर्माजी आपको मेरा हार्दिक…"
Dec 26, 2011
ASHVANI KUMAR SHARMA posted a blog post

कस्बे में ठण्ड

सूरज के विरुद्धषड्यंत्र रच आततायी कोहरे को निमंत्रण किस ने दिया कोई नहीं जानता ठण्ड खाया क़स्बा पथरा गया है हरारत महसूस होती है ज्वर हो तो ही अलाव तापते लोग दिखाई नहीं देते बस खांसते,खंखारते हैं बंद कमरों में सक्षम आदेश बिना ही अनधिकृत कर्फ्यूजारी हो गया कस्बे में जमाव बिंदु से नीचे पहुंचेपारे ने नलों का पानी ही नहीं जमा दियाकस्बे की धमनियों का रक्त भी रजाई में दुबका क़स्बा उनींदा पड़ा रहेगा दिन भर मौसम को कोसताइस आलसी आत्म समर्पण को ललकारती कोई आवाज़ एक दिन गूंजेगी कस्बे में उस दिन…See More
Dec 26, 2011
वीनस केसरी commented on ASHVANI KUMAR SHARMA's blog post एक ग़ज़ल
"यदि मिसरा-सानी में अलोत ’उनको’ शब्द ’दीख’ जाय. जो कि वास्तव में है.और स्पष्ट करें"
Dec 11, 2011
Saurabh Pandey commented on ASHVANI KUMAR SHARMA's blog post एक ग़ज़ल
"अश्विनी कुमार जी,  इस ग़ज़ल पर बधाई कुबूल करें. वीनस जी, उक्त शे’र में वचन दोष नहीं है.  यदि मिसरा-सानी में अलोत ’उनको’ शब्द ’दीख’ जाय. जो कि वास्तव में है. धन्यवाद."
Dec 11, 2011

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Male
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JAIPUR RAJASTHAN
Native Place
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RAJASTHAN ADMINISTRATIVE SERVICE
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POET

ASHVANI KUMAR SHARMA's Blog

कस्बे में ठण्ड

Posted on December 26, 2011 at 8:46am 6 Comments

सूरज के विरुद्ध

षड्यंत्र रच 

आततायी कोहरे को 

निमंत्रण किस ने दिया 

कोई नहीं जानता 

ठण्ड खाया क़स्बा 

पथरा गया है 

हरारत महसूस होती है 

ज्वर हो तो ही 

अलाव तापते लोग 

दिखाई नहीं देते 

बस खांसते,खंखारते हैं 

बंद कमरों में 

सक्षम आदेश बिना ही 

अनधिकृत कर्फ्यू

जारी हो गया 

कस्बे में 

जमाव बिंदु से नीचे पहुंचे

पारे ने 

नलों का पानी…

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एक ग़ज़ल

Posted on December 8, 2011 at 11:00am 7 Comments

जब कभी भी आजमाया जायेगा  

आदमी औकात पर आ जायेगा

शख्सियत औ कद बड़ा जिस का मिला 

वो यकीनन बुत बनाया जायेगा 

क़ैद कर मेरी सहर की रोशनी 

भोर का तारा दिखाया जायेगा 

जिद पे गर बच्चा कोई आ ही गया 

चाँद थाली में सजाया जायेगा 

गर वो वादों पर यकीं करने लगे 

उस से रोज़ी पर न जाया जायेगा 

फ़र्ज़दारी का सिला जो दे चुके

कत्लगाहों में बसाया जायेगा

ये जहां तो इक मुसलसल मांग…

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मात मिली

Posted on May 23, 2011 at 11:30am 3 Comments

रस्ते रस्ते बात मिली 
नुक्कड़ नुक्कड़ घात मिली
 
चिंदी चिंदी दिन पाए है
 क़तरा क़तरा रात मिली
 
सिला करोड़ योनियों का है
ये मानुष की जात मिली
 
बादल लुका-छिपी करते थे 
कभी कभी बरसात मिली
 
चाहा एक समंदर पाना 
क़तरों की औकात मिली
 
जीवन को जीना चाहा पर 
सपनों की…
Continue

भोलू का बेटा

Posted on May 19, 2011 at 11:00pm 0 Comments

आसमां बिजलियों से जो डर जायेगा
फिर ये भोलू का बेटा किधर जायेगा
 
नींद में करवटें जुर्म  ऐलानिया 
जुर्म किस ने किया किस के सर जायेगा
 
जो बताया सलीके में क्या खामियां 
एक अहसान सर से उतर जायेगा
 
ज्ञान पच ना सका वो करे उलटियाँ
जैसे बू से ये गुलशन संवर जायेगा
 
गालियाँ, प्यालियाँ,कुछ बहस,साजिशें 
गर ये सब ना मिला वो…
Continue

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At 12:03am on August 18, 2011, Ganesh Jee "Bagi" said…

At 4:41pm on December 31, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…
At 4:04pm on December 31, 2010, Ganesh Jee "Bagi" said…
At 6:00pm on December 30, 2010, Admin said…
 
 
 

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