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Hari Prakash Dubey
  • Male
  • Haridwar,Uttarakhand
  • India
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Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"aabhar aadarniya surender insan ji 1SADAR "
Mar 31
surender insan commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"आदरणीय आपकी रचना पढ़ी । बहुत उम्दा। अच्छा शीर्षक रखा आपने। कामयाब रचना। हर सिक्के के दो पहलू होते है अक्सर एक ही देखा जाता है। और जब दूसरा पहलू सामने आता है तो सच्चाई से मुह मोड़ा जाता है। आपकी रचना में व्यंग्य भी है और एक सार्थक संदेश भी । बहुत बहुत…"
Mar 29
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"आदरणीय Sheikh Shahzad Usmani साहब, आपने रचना का मर्म समझा और आपका समीक्षात्मक विवेचन लाजवाब है ! एक प्रश्न मन में आ रहा है कि क्या यह हरदम जरूरी है कि लघुकथा का अंत सकारात्मक ही होना चाहिए? क्या सहज भाव काफी नही है? क्या इस तरह हम इस विधा को नैतिक…"
Mar 29
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"आदरणीय Samar kabeer साहब, उत्साहवर्धन के लिए आपका बहुत धन्यवाद!  सादर अभिवादन।"
Mar 29
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"आदरणीया     KALPANA BHATT ('रौनक़') जी, इसे दुसरे व्यंगात्मक दृष्टिकोण से देखिये की एक गृहणी जिसे व्यापार की समझ नहीं है और वह समाधान देने की कोशिश कर रही है पर समस्याओं को सुनते ही उसे समझ ही नहीं आता की क्या करे तो वह पिंड…"
Mar 29
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"आदरणीय Mohammed Arif साहब शुक्रिया आपका, पूरी कोशिश करूंगा आपकी अपेक्षाओं पर खरा उतरने का! सादर!"
Mar 29
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी, यह समाधान लगता है आपको पसंद नहीं आया, निवेदन है एक बार आप इसे फिर से पढ़ें,इससे मुझे फिर से आपकी राय जानने का मौका मिलेगा , हार्दिक आभार आपका ! सादर।"
Mar 29
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
" आदरणीय VIRENDER VEER MEHTA Bhai साहब आपने कई बार समझाया था कि whatsapp पर कलाकारी मत करो,यह फिर से उसी गलती का खामियाजा है:-) क्या लघुकथा vayangaatmak नहीं हो सकती है, यह जिज्ञासा है ! रचना पर आपकी अमूल्य टिप्पणी के लिए आभार ! सादर!"
Mar 29
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"somesh kumar जी, आपकी बात शत प्रतिशत सही है,यह मजाक - मजाक में मैंने ही हिंगलिश में अपने कुछ फ्रेंड्स ग्रुप में ब्रॉडकास्ट कर दी थी पर शब्द इतने विस्तारित नहीं थे ,दरअसल लैपटॉप की हार्ड डिस्क क्रैश हो गई है और मैं उस समय नॉएडा में था ,सेल फोन…"
Mar 29
VIRENDER VEER MEHTA commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"भाई सोमेश कुमार जी से सहमत भाई हरी प्रकाश दुबे जी। रचना का मूल भाग वाहट्स एप्प पर कई नामों से नजर आ रहा है। वैसे भी कथा एक व्यंग से आगे नहीं बढ़ पाई है। और व्यंग्य कितना कारगर है ये तो कोई वरिष्ठ साहित्यकार ही बता सकता है। बरहाल प्रयास के लिये मेरी…"
Mar 28
somesh kumar commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"BHAI G IS RCHNA KA EK VERSION WHATSAPP PER 4 DIN PHLE PDHA THA.KYA VO RCHNA AAP NE HI CIRCULATE KI HAI YA YE RCHNA US SE PRBHAVIT HAI.RCHNA THIK THIK HAI SHAYD BEHTR BNAYA JA SKTA THA."
Mar 28
Sheikh Shahzad Usmani commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"अधिकतर पुरुषों और विवाहित/ शिक्षित युवाओं के साथ इसी तरह का तनाव रहता है,जिसका असर पूरे परिवार पर पड़ता व दिखाई देता है। अच्छा विषय लिया है आपने। रचना भी प्रवाहमय भावपूर्ण है। अंत भी एक कड़वा यथार्थ व सच है कुछ परिवारों के संदर्भ में। हार्दिक बधाई…"
Mar 28
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"लघुकथा क्या कहना चाह रही है समझ नहीं आई| सादर|"
Mar 28
Samar kabeer commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"जनाब हरिप्रकाश दुबे जी आदाब,प्रयासरत रहें,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
Mar 28
Mohammed Arif commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"आदरणीय हरि प्रकाश दुबे जी आदाब,                                    आप इस लघुकथा के माध्यम से आख़िर क्या कहना चाहते हैं । आपसे बहुत बेहतर की उम्मीद है । आशा है…"
Mar 28
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Hari Prakash Dubey's blog post समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे
"आद0 हरि प्रकाश दुबे जी सादर अभिवादन। ऊपर से जब लघुकथा पढ़ना प्रारम्भ किया तो मुझे इस लघुकथा में उत्सुकता बढ़ती गयी पर जिस तरह से पैग देकर समाधान का तरीका बताया गया, एक पाठक की बात करूं तो मुझे निराशा हुई। हो सकता है मैं गलत हूँ। सादर। बहरहाल आपकी…"
Mar 28

Profile Information

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Haridwar Uttarakhand
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Haridwar
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समाधान: लघुकथा :हरि प्रकाश दुबे

राहुल ने जैसे ही रात को घर में कदम रखा वैसे ही उसका सामना अपनी धर्मपत्नी ‘कविता’ से हो गया । उसे देखते ही वह बोली “देख रही हूं आजकल, तुम बहुत बदल गए हो, मुझसे आजकल ठीक से बात भी नहीं करते हो ।”

 

नहीं ऐसी कोई बात नहीं है, बस जरा काम का बोझ कुछ ज्यादा ही लग रहा है ।”

 

ये बहाना तो तुम कई दिनों से बना रहे हो, हाय राम ! कहीं तुम मुझसे कुछ छुपा तो नहीं रहे हो, “कौन है वो करमजली?”

 

यह सुनते ही राहुल का पारा चढ़ गया उसने झुंझुलाते हुए कहा “कविता,…

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Posted on March 27, 2018 at 8:23pm — 18 Comments

लाल सलाम: लघुकथा : हरि प्रकाश दुबे

घने जंगलों के बीच जगह जगह लाल झंडे लगे हुए थे. सैनिकों की जैसी वर्दी में कुछ लोग आदिवासियों को समझा रहे थे, “सुनो इस जंगल, जमीन और सारे संसाधनों पर सिर्फ तुम्हारा और तुम्हारा ही हक़ है, इन पूंजीपतियों के और इनकी रखैल सरकार के खिलाफ, हम तुम्हारे लिए ही लड़ रहें है, इनको तो हम नेस्तनाबूद कर देंगें !”

“पर कामरेड अब तो सरकार हम पर ध्यान दे रही है, सड़क पानी उद्योग की व्यवस्था भी कर रही है, क्यों न इस लड़ाई को छोड़ दिया जाए, वैसे भी सालों से कितना खून बह रहा…

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Posted on August 4, 2017 at 11:43pm — 3 Comments

फिर भी :कविता :हरि प्रकाश दुबे

कितनी  सहज हो तुम

कोई रिश्ता नही

मेरा ओर तुम्हारा

फिर भी

अनगिनत पढ़ी जा रही हो,मुझे

बिन कुछ कहे

बस मुस्कुरा कर

अनवरत सुनी जा रही हो ,मुझे

बस यही अहसास काफी है

संपूर्ण होने का,मेरे लिए !!

"मौलिक व अप्रकाशित"

© हरि प्रकाश दुबे

Posted on August 2, 2017 at 11:30pm — 2 Comments

रूंधी हुई आवाज़ : लघुकथा : हरि प्रकाश दुबे

 

“बेटा एक बात कहूं क्या?”

 

“हाँ बोल न माँ, पर अपनी बहू के बारे में नहीं।“   

 

माँ चुप हो गयी, फिर बोली “बेटा, अपने से जुड़े हुए लोगों का महत्व समझना चाहिये, हमे देखना चाहिये की वो हमसे कितना प्यार करते हैं, हमे भी उनको उतना ही स्नेह और महत्व देना चाहिये, कभी-कभी हम अपने से स्नेह करने वालों से, चाहे वो कोई भी क्यों न हों, इस तरह का व्यवहार करने लग जाते हैं, जैसे ‘घर की मुर्गी दाल बराबर’ ।“

बेटा हो सकता है वो आपको, आपके इस तरह के उपेक्षापूर्ण…

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Posted on August 1, 2017 at 9:02pm — 9 Comments

Comment Wall (12 comments)

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At 10:17pm on November 16, 2017, Manoj kumar shrivastava said…

क्षमा चाहता हूॅं आदरणीय मैं इस मंच पर सतत नहीं था।

At 7:01pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 10:39am on January 23, 2015, Dr. Vijai Shanker said…
स्वागत है आपका आदरणीय हरी प्रकाश दुबे जी. आपकी मित्रता एक सम्मान है मेरे लिए।
सादर।
At 4:56pm on January 9, 2015, Dr Ashutosh Mishra said…

आदरणीय हरिप्रकाश जी ..आपका मित्र होना मेरे लिए सुखद है ..आपकी रचना को माह की श्रेष्ठ  रचना का सम्मान मिला इस सफलता के लिए आपको ढेर सारी बधाई सादर 

At 7:52pm on January 7, 2015, harivallabh sharma said…

आदरणीय Hari Prakash Dubey साहब स्वागत आपका, एवं माह की श्रेष्ठ आपकी रचना हेतु चयनित होने पर हार्दिक बधाई स्वीकारें..सादर.

At 5:11pm on January 3, 2015, vikram singh saini said…

आपकी मित्रता का ह्रदय से स्वागत है आदरणीय हरि प्रकाश जी

At 9:55pm on December 29, 2014,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय  हरी प्रकाश दुबे  जी .... नमस्कार .... क्षमा चाहता हूँ लाइव चैट पर आपका मेसेज देख नहीं पाया तब मैं राहुल दांगी जी की ग़ज़ल पढ़ कर उस पर टीप लिख रहा था ... सादर 

At 11:51pm on December 15, 2014,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय  हरी प्रकाश दुबे  जी,
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी रचना " कविता : तुम्हारा घोंसला" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 5:34pm on November 20, 2014, Rita Gupta said…

धन्यवाद ,आभार आपका। 

At 5:57pm on November 10, 2014, vijay nikore said…

मित्रता का हाथ बढ़ाने के लिए आभार।

सादर,

विजय निकोर

 
 
 

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