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Dr. Vijai Shanker
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Dr. Vijai Shanker commented on Mohammed Arif's blog post बारिश की क्षणिकाएँ
"बारिश की आत्मकथासाल भर लिखते रहते हैंपेड़-पौधे और हरियाली।बहुत खूब , बधाई, आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी, सादर।"
yesterday
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकायें — डॉo विजय शंकर
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी , साहित्य सेवा में , मेरे विचार से , यह निहित है कि हम अपने परिवेश के प्रति सजग रहें और उसे अपने लेखन में भी सम्मलित करें। रचना पर आपकी उपस्थिति एवं सुखद प्रतिक्रया के लिए आभार एवं हार्दिक धन्यवाद , सादर।"
Jun 26
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकायें — डॉo विजय शंकर
"आदरणीय सुरेंद्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप जी , रचना पर आपकी उपस्थिति एवं सुखद प्रतिक्रया के लिए आभार एवं हार्दिक धन्यवाद , सादर।"
Jun 26
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकायें — डॉo विजय शंकर
"आदरणीय सुशील सरना जी , रचना पर आपकी उपस्थिति एवं सुखद प्रतिक्रया के लिए आभार एवं हार्दिक धन्यवाद , सादर।"
Jun 26
Samar kabeer commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकायें — डॉo विजय शंकर
"आप मेरे पसन्दीदा लेखक रहे हैं,और आपकी कमी मुझे पटल पर बराबर महसूस होती रही,ये तो मैं समझ गया था कि आप यक़ीनन कहीं उलझे हुए हैं,लेकिन इतने परेशान हैं ये आपकी बातों से पता चला,आपकी परेशानियों को मैं महसूस तो कर सकता हूँ लेकिन अफ़सोस कि कोई मदद नहीं कर…"
Jun 26
Mahendra Kumar commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकायें — डॉo विजय शंकर
"हमेशा की तरह उम्दा क्षणिकाएँ हैं आदरणीय Dr. Vijay Shankar जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। अपनी टिप्पणी में आपने बिल्कुल सही बात कही है, आदमी आज वाक़ई चलता-फिरता कार्यालय बन गया है। ईश्वर से प्रार्थना है कि आप जल्द स्वस्थ हों। सादर। "
Jun 26
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकायें — डॉo विजय शंकर
"आदरणीय समर कबीर साहब, नमस्कार , आपका प्रश्न , "आजकल आपके दर्शन पटल पर कम हो गए हैं,बहुत दिम बाद आज आपकी प्रस्तुति देखने को मिली । " पढ़ कर अच्छा लगा। किसी ने खैरियत तो पूछी। उत्तर में बहुत कुछ लिखा जा सकता है , वह भी साहित्य ही होगा। पर…"
Jun 26
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकायें — डॉo विजय शंकर
"आदरणीय सुश्री उषा जी , आपकी उपस्थिति एवं भावपूर्ण प्रतिक्रया के लिए आभार एवं धन्यवाद , सादर।"
Jun 26
Dr. Vijai Shanker commented on vijay nikore's blog post काल कोठरी
"मन बचपन में , अबोधपन में , कितना निर्भीक निडर , साहसी होता है। जीवन के मध्यान में वही सशंकित मन , सुकून भरा स्थान ढूँढता है। अवसान में वही मन हरदम शंकालु सा रहता है , हर चीज़ व्यर्थ - निरर्थक सी लगने लगती है , और चैन कहीं मिलता नहीं। जीवन तेरी यही…"
Jun 26
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकायें — डॉo विजय शंकर
"आद0 डॉ विजय शंकर जी सादर अभिवादन। इंसानी फितरत पर बेहतरीन कलम चलाई आपने। बधाई हाजिर है।सादर"
Jun 25
Sushil Sarna commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकायें — डॉo विजय शंकर
"आदरणीय डॉ विजय शंकर जी हर मानवीय पहलू को उजागर करती इन बेहतरीन क्षणिकाओं की प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई सर।"
Jun 25
Samar kabeer commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकायें — डॉo विजय शंकर
"जनाब डॉ.विजय शंकर जी आदाब, आजकल आपके दर्शन पटल पर कम हो गए हैं,बहुत दिम बाद आज आपकी प्रस्तुति देखने को मिली । इंसानी फ़ितरत और उसकी परेशानियों को बहुत सलीक़े से क़लम बन्द किया है आपने,मैं इसे आपकी महारत मानता हूँ,बहुत उम्दा और प्रभावशाली क्षणिकाएँ हुई…"
Jun 25
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकायें — डॉo विजय शंकर
"आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी, बहुत सही प्रतिक्रया , आदमी अपना वजूद खो रहा है , एक आंकड़ा मात्र बन कर रह गया है , प्रगति और विकास दोनों ही उससे आगे निकल गए और वह पीछे अपना अस्तित्व खोज रहा है। आनेवाले समय में मशीने उसका होना न होना बराबर कर देगीं। दूसरी ओर…"
Jun 25
Usha commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकायें — डॉo विजय शंकर
"आदरणीय विजय शंकर सर। आज संवेदनाओं का एहसास मात्र स्वयं के लिए सिमट कर रह गया है । इंसानियत शुष्क होते जा रही है। वर्तमान स्तिथि का सजीव चित्रण प्रस्तुत करने के लिए बधाई स्वीकार करें।"
Jun 25
Mohammed Arif commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकायें — डॉo विजय शंकर
"आदरणीय विजय शंकर जी आदाब,                           व्यक्ति अपना वजूद खोता जा रहा है । बेबसी, लाचारी में जीने को अभिशप्त है । दीनहीन, चरित्रहीन और आवारा मानसिकता का शिकार है । तनाव और…"
Jun 23
Dr. Vijai Shanker commented on Sushil Sarna's blog post जाने के बाद ... लघु रचना
"बहुत सुन्दर प्रस्तुति , आदरणीय सुशील सरना जी , बधाई , सादर।"
Jun 23

Profile Information

Gender
Male
City State
UP
Native Place
Allahabad
Profession
Retired
About me
Educationist

.जिंदगी तुझे ही पढ़ लेते हैं ---डा० विजय शंकर

चलो किताबों को बंद कर देते हैंजिंदगी तुझे ही सीधे-सीधे पढ़ लेते हैं .किताबों में सबकुझ तेरे बारे में ही तो हैलो , तुझसे ही सीधे-सीधे बात कर लेते हैं.किताबें तो बहुत सी हैं , मिल भी जायेंगींउन को पढ़ लूँ तो क्या तू मिल जायेगी .मौत को कितने और कौन-कौन पढ़ते हैंपर उसका वादा है , सबको मिलती है .भरोसा नहीं , तू किसको मिले , कितनी मिलेतेरे लिये , तेरे चाहने वाले दिन रात लगे रहते हैं .अरे सब कुछ तो तेरे लिए ही है जिंदगी मेंतू है तो सब है , तू नहीं तो क्या है जिंदगी में .इसलिए चलो किताबों को बंद कर देते हैं .तू है , तुझसे सीधे-सीधे बात कर लेते हैं ...डा० विजय शंकर---------------( मौलिक और अप्रकाशित )

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At 5:38pm on January 1, 2017, Mohammed Arif said…
आदरणीय डॉ.विजय शंकर मेहताजी सकारात्मक सोच को उद्घरित करती रचना के लिए बधाई । नव वर्ष मंगलमय हो !
At 4:58pm on November 5, 2015, Abid ali mansoori said…

देर से ही सही.. हर्दिक आभार आपका आदरणीय विजय शंकर जी!

At 10:23pm on November 4, 2015, Abid ali mansoori said…

Haardik abhaar aapka!

At 3:46pm on July 1, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर,

आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें 

At 7:50pm on June 3, 2015, Tanuja Upreti said…
आभार आदरणीय
At 7:28pm on May 4, 2015, Seema Singh said…
आभार सर मार्गदर्शन के लिए
At 8:35am on April 17, 2015, Mohan Sethi 'इंतज़ार' said…

आदरणीय Dr. Vijai Shanker जी आप का हार्दिक आभार ....मंगलकामनाएँ...सादर  

At 6:57am on January 18, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, निवेदन स्वीकार करने के लिए आभार...

विद्यार्थी की मुक्त कंठ प्रशंसा आपका बड़प्पन और आपके हृदय की विशालता का प्रमाण है.

आपका  स्नेह और आशीर्वाद  सदैव मिलता रहे, इसके लिए सदैव प्रयास करता रहूँगा. नमन 

At 10:51pm on January 15, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर, आभार, धन्यवाद.... आप लोगो के स्नेह और आशीर्वाद से ही मंच पर सक्रिय हो पाता हूँ. आपका आभार हार्दिक धन्यवाद 

At 4:40pm on October 23, 2014, Sushil Sarna said…

आपको  सपरिवार ज्योति पर्व की हार्दिक एवं मंगलमय शुभकामनाएं...

Dr. Vijai Shanker's Blog

क्षणिकायें — डॉo विजय शंकर



बहुत कुछ , बहुत हास्यास्पद है ,

फिर भी किसी को हंसी आती नहीं।

बहुत कुछ , बहुत दुखदायी है , 

फिर भी आंसू किसी को आते नहीं।… 1.

बाज़ार भी अजीब जगह है

जहां आप शाहंशाह होकर भी

रोज बिक तो सकते हैं , पर एक

दिन को भी अपनी पूरी हुकूमत में ,

पूरा बाज़ार खरीद नहीं सकते ………. 2 .

बहुत शिकायतें हैं हवा से

कि बुझा देती हैं चिरागों को ,

चलो एक चिराग ही बिना

हवा के जला के दिखा दो। ……….. 3…

Continue

Posted on June 21, 2018 at 8:30pm — 13 Comments

कोई फरक नहीं पड़ता — डॉo विजय शंकर

क्या फरक पड़ता है ,
कुछ पढ़े-लिखे लोगों ने
आपको और आपकी
किसी भी बात को नहीं समझा।
आपको , आप जैसे लोगों ने तो
समझा और खूब समझा।
आपकी नैय्या उनसे और
उनकी नैय्या आपसे
पार लग ही रही है ,
आगे भी लग जाएगी ।

- मौलिक एवं अप्रकाशित
 

Posted on March 23, 2018 at 5:41am — 7 Comments

सब सही पर कुछ भी सही नहीं है - डॉo विजय शंकर

आप सही हैं,
वह भी सही है ,
हर एक सही है ,
फिर भी कुछ भी
सही नहीं है।
कुछ गिने चुने
लोग बहुत खुश हैं ,
यह भी सही नहीं है।
सच जो भी है ,
सब जानते हैं ,
बस मानते नहीं ,
यह भी सही नहीं है।
ऊँट सामने है ,
देखते नहीं,
हड़िया में ढूँढ़ते है ,
यह भी सही है।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on February 21, 2018 at 8:40am — 13 Comments

बंधन की डोरियां - डॉo विजय शंकर

कुछ डोरियां

कच्चे धागों की होती हैं ,

कुछ दृश्य होती हैं ,

कुछ अदृश्य होती हैं ,

कुछ , कुछ - कुछ

कसती , चुभती भी हैं ,

पर बांधे रहती हैं।

कुछ रेशम की डोरियां ,

कुछ साटन के फीते ,

रंगीले-चमकीले ,फिसलते ,

आकर्षित तो बहुत करते हैं ,

उदघाट्न के मौके जो देते हैं ,

पर काटे जाते हैं।

इस रेशम की डोरी

की लुभावनी दौड़ में ,

ज़रा सी चूक ,

बंधन की डोरियां

छूट गईं या टूट गईं ,

रेशम की डोरियां …

Continue

Posted on January 4, 2018 at 9:30am — 11 Comments

 
 
 

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