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  • अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी
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AMAN SINHA posted a blog post

किराए का मकान

दीवारें हैं छत हैंसंगमरमर का फर्श भीफिर भी ये मकान अपना घर नहीं लगताचुकाता हूँमैं इसका दाम, हर तारीख पहली कोलेकिन फिर भी यहाँ मुझको, वो अपनापन नहीं मिलतादीवारें साफ रखता हूँ, धीमी आवाज रखता हूँबच्चों के खिलौने सेज़रा नाराज रहता हूँकोई खट-खट ना हो जाएकोई खट-पट ना हो जाएज़रा सी बात पर कहींकोई गड़बड़ ना हो जाएयहाँ है सबकमरे, रसोई, झरोखे कई सारेमगर खुला वो अपना आँगन नहीं मिलतापड़ोसी है यहाँ भीपर सब गुमसुम से रहते हैंखुल के जो अपना ले वो दामन नहीं मिलता"मौलिक व अप्रकाशित" अमन सिन्हा  See More
3 hours ago
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ले चल अपने संग हमराही

ले चल अपने संग हमराही, उन भूली बिसरी राहों मेंजहां बिताते थे कुछ लम्हे हम एक दूजे की बाहों में चल चले उन गलियों में फिर थाम कर एक दूजे का हाथ क्या पता मिल जाए हमको फिर वो जुगनू की बारात जहां चाँद की मद्धिम बुँदे वादी से छन कर आती है और ताल की जल पर पड़ कर चांदी सी छितरा जाती है जहां डाल पर तोता मैना बातें मीठी करते हैं जहां चाँद को देख चकोरे, आंहें भरते रहते है वहीं झील में नांव चाले तो मांझी गान सुनाता है वहीं पेड़ पर बैठ पपीहा, अपनी व्यथा दोहराता है वहीं जहां पर नभ के तारे रोज़ हम से बतियाते…See More
Monday
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कब चाहा मैंने

कब चाहा मैंने के तुम मुझसे नैना चार करो कब चाहा मैंने के तुम मुझसे मुझसा प्यार करो कब चाहा मैंने के तुम मेरे जैसा इज़हार करो कब चाहा मैंने के तुम अपने प्रेम का इकरार करो कब चाहा मैंने के तुम मुझसे मिलने को तड़पो कब चाहा मैंने के तुम बादल जैसे मुझपर बरसो कब चाहा मैंने के तुम अपना सबकुछ मुझपर लूटा बैठो कब चाहा मैंने के तुम अपना चैन सुकून गवा बैठो कब चाहा मैंने के तुम चाहो मुझको दीवानों सा कब चाहा मैंने के तुम याद करो मुझे बहानों सा कब चाहा मैंने के तुम मुझसे मिलो बहाने से कब चाहा मैंने के तुम मुझे…See More
Jun 24
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यायावर

मैं बंजारा, मैं आवारा, फिरता दर दर पर ना बेचारा ना मन पर मेरा ज़ोर कोई, मैं अपने मन से हूँ हारा ठिठक नहीं कोई ठौर नहीं, आगे बढ़ने की होड नहींकोई मेरा रास्ता ताके, जीवन में ऐसी कोई और नहीं ना रिश्ता है ना नाता है, बस अपना खुद से वादा है जब तक जिंदा हूँ चलना है, बस यायावर ही रहना है जब सबने हांथ बाढ़ाया था, तब मैंने हीं ठुकराया था अपने पथ का चुनाव किया, मैंने सूख का परित्याग किया हाव भाव से फक्कर हूँ, घुल जाऊँ तो शक्कर हूँ स्वाद मेरा पहचान गया, जो मेरे मन को जान गया मैं अपनी धुन में रहता हूँ, बस…See More
Jun 21
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आह्वान

जागो मेरे वीर सपूतो, मैंने है आह्वान किया आज किसी कपटी नज़रों ने मेरा है अपमान किया किसी पापी के नापाक कदम, मेरी छाती पर ना पड़ने पाए आज सभी तुम प्रण ये कर लो, जो आया, कुछ, ना लौट के जाने पाये दिखला दो तुम दुश्मन को, तुम भारत के वीर सिपाही हो तुमको ना कोई रोक सका, जितनी भी गहरी खाई हो हिमालय से भी ऊंची है तेरे आत्मबल की चोटी तोड़ दो उनके अरमानो को, जिनकी नियत सदा है खोटी घुस कर मेरी सीमा में, जिसने तुमको ललकारा है उसको उसकी औकात दिखा, मैंने भी हुंकारा है जब तक थक कर वो लौट ना जाए तबतक तुझको लड़ना…See More
Jun 18
नाथ सोनांचली commented on AMAN SINHA's blog post क्यों परेशान होता है तू
"आद0 अमन सिन्हा जी सादर अभिवादन।बढ़िया लिखा है आपने। बधाई स्वीकार कीजिये"
Jun 15
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क्यों परेशान होता है तू

क्यों परेशान होता है तू , जिसे जाना है वो जाएगा हाथ जोड़ कर पैर पकड कर, तू उसको रोक ना पाएगा वो जाता है तो जाने दे, पर याद न उसकी जाने दे तू उसको ये अवसर ना दे, वो बाद मे तुझे बहाने दे  जिसको आँसू की क़दर नहीं, ना होने का तेरे असर नहीं उसे रोक के क्या तू पाएगा, तेरी खातिर जो बेसबर नहीं तू रोके तो रुक जाएगा, घड़ियाली आँसू बहाएगा अपनी हर नाकामी का फिर, जिम्मेदार तुझे बताएगा  तू उसके बीन ना जी पाएगा, वो गया तो तू मर जाएगा उसे भी ये एहसास तो होने दे, तुझे खोकर वो क्या पाएगा चलते-चलते जब थक जाएगा, खुद…See More
Jun 14
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Jun 11
AMAN SINHA commented on AMAN SINHA's blog post मानसिक रोग
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर साहब,  कई दिनों के बाद आपसे मिले तारिफ से फिर से लिखने का मन कर रहा है।  धन्यवाद्। "
Jun 6
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Jun 3
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on AMAN SINHA's blog post मानसिक रोग
"आ. भाई अमन जी, रचना का प्रयास अच्छा है। विषय भी अच्छा है। कुछ टंकण त्रुटियाँ रह गयी हैं देखिएगा। शेष हार्दिक बधाई।"
Jun 2
Dayaram Methani commented on AMAN SINHA's blog post क्या रंग है आँसू का
"आदरणीय अमन सिन्हा जी, आंसुओं पर सुंदर रचना के लिए हार्दिक बधाई।"
Jun 2
सूबे सिंह सुजान commented on AMAN SINHA's blog post क्या रंग है आँसू का
"बहुत सुंदर कविता"
May 27
AMAN SINHA commented on नाथ सोनांचली's blog post अर्धांगिनी को समर्पित (दुर्मिल सवैया पर आधारित)
"आदरणीय  नाथ सोनांचली जी,  बहुत मनमोहक रचना हेतु बधाई।"
May 26
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क्या रंग है आँसू का

क्या रंग है आँसू का कैसे कोई बतलाएगा?सुख का है या दु:ख का है ये कोई कैसे समझाएगा?कभी किसी के खो जाने से, कोई कभी मिल जाए तो कभी कोई जो दूर हो गया, कोई पास कभी आ जाए तो किस भाव में कितना बहता, कोई ध्यान नहीं रखताहर हाल में इसका एक ही रंग है, फर्क ना कोई कर सकता कभी दर्द में बह जाता है, हंसी में भी ये दूर नहीं हम इस पर काबू कर पाये, ये इतना भी कमजोर नहीं हरेक काल में एक जैसा है, चाहे धूप या छाया हो भूखे पेट कोई हो या फिर, कई दिनों पर खाया हो पैसे कोई लूट ले जाए, या ज्यादा पैसा घर आ जाए दुनिया कोई…See More
May 25
नाथ सोनांचली commented on AMAN SINHA's blog post पश्चाताप
"आद0 अम्न सिन्हा जी सादर अभिवादन बढ़िया सृजन है। बधाई स्वीकार कीजिये"
May 25

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किराए का मकान

दीवारें हैं छत हैं

संगमरमर का फर्श भी

फिर भी ये मकान अपना घर नहीं लगता

चुकाता हूँ

मैं इसका दाम, हर तारीख पहली…

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Posted on July 1, 2022 at 11:30am

ले चल अपने संग हमराही

ले चल अपने संग हमराही, उन भूली बिसरी राहों में

जहां बिताते थे कुछ लम्हे हम एक दूजे की बाहों में 

चल चले उन गलियों में फिर थाम कर एक दूजे का हाथ 

क्या पता मिल जाए हमको फिर वो जुगनू की बारात 

जहां चाँद की मद्धिम बुँदे वादी से छन कर आती…

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Posted on June 27, 2022 at 12:25pm

कब चाहा मैंने

कब चाहा मैंने के तुम मुझसे नैना चार करो 

कब चाहा मैंने के तुम मुझसे मुझसा प्यार करो 

कब चाहा मैंने के तुम मेरे जैसा इज़हार करो 

कब चाहा मैंने के तुम अपने प्रेम का इकरार करो 

कब चाहा मैंने के तुम मुझसे मिलने को तड़पो 

कब…

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Posted on June 24, 2022 at 10:59am

यायावर

मैं बंजारा, मैं आवारा, फिरता दर दर पर ना बेचारा 

ना मन पर मेरा ज़ोर कोई, मैं अपने मन से हूँ हारा 

ठिठक नहीं कोई ठौर नहीं, आगे बढ़ने की होड नहीं

कोई मेरा रास्ता ताके, जीवन में ऐसी कोई और नहीं 

ना रिश्ता है ना नाता है, बस अपना खुद से वादा…

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Posted on June 21, 2022 at 11:20am

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"आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व स्नेह के लिए आभार। अनबुझ का अर्थ यहाँ कभी न…"
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"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन।गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार। भूलवश अरकान गलत…"
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