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atul kushwah
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सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari commented on atul kushwah's blog post मुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर...
"वाह्ह्ह्हह वाह्ह्ह मजा आ गया इतनी उम्दा ग़ज़ल पढ़कर देर से पढने का खेद है दिल से बधाई लीजिये आद० अतुल जी ."
Dec 15, 2016

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on atul kushwah's blog post मुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर...
"आदरणीय अतुल भाई , वर्तमान पर बहुत अच्छी गज़ल कही है , बधाइयाँ स्वीकार करें । आदरणीय समर भाई जी की सलाह पर गौर कीजियेगा ।"
Nov 22, 2016
Tasdiq Ahmed Khan commented on atul kushwah's blog post मुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर...
"जनाब अतुल साहिब , अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं शेर 5 के सानी मिसरे में ऐबे -तनाफूर है ( हैरत -तेरी ) सही शब्द" दुकान / दुक्कान " है इस हिसाब से क़ाफ़िया " दूकानदारी " नहीं बल्कि " दुक्का नदारी " होगा देख…"
Nov 21, 2016
atul kushwah posted a blog post

मुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर...

एक करतब दूसरे करतब से भारी देखकरमुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर, जिनके चेहरे साफ दिखते हैं मगर दामन नहींशक उन्हें भी है तेरी ईमानदारी देखकर, उम्रभर जो भी कमाया मिल गया सब खाक मेंचढ गया फांसी के फंदे पर उधारी देखकर, मुल्क में हालात कैसे हैं पता चल जाएगादेखकर कश्मीर या कन्याकुमारी देखकर, सर्द मौसम है यहां तो धूप भी बिकने लगीहो रही हैरत तेरी दूकानदारी देखकर, इस तरह के नोट चूरन में निकलते थे कभीसब यही कहते दिखे कल दो हजारी देखकर, देखने सूरत गया था आइने के सामनेआईना रोने लगा हालत हमारी देखकर।। # —…See More
Nov 20, 2016
amod shrivastav (bindouri) commented on atul kushwah's blog post मुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर...
"क्या गजब ढाया है शब्दों से अतुल जी आप ने । हूँ मै हतप्रभ आपकी कारीगरी को देख कर ।।।। बधाई सादर नमन"
Nov 20, 2016
atul kushwah commented on atul kushwah's blog post मुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर...
"Aadarneeya Samar kabeer sir. Mai Nirdesh pure karta hu.ashish banaye rakhen. sadar-Atul"
Nov 20, 2016
atul kushwah commented on atul kushwah's blog post मुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर...
"Aadarneeya डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव sir. apka Ashish mila, accha laga. sadar-Atul"
Nov 20, 2016
atul kushwah commented on atul kushwah's blog post मुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर...
"Aadarneeya Mirza Hafiz Baig sahab..apka aabhar. dua aashish banaye rakhein. sadar-Atul"
Nov 20, 2016
atul kushwah commented on atul kushwah's blog post मुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर...
"Aadarneeya Dr Ashutosh Mishra sir..apka aabhar. shukriya. sadar-Atul"
Nov 20, 2016
atul kushwah commented on atul kushwah's blog post मुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर...
"Aadarneeya Dharmendra ji..apka tahedil se aabhar.shukriya sadar-Atul"
Nov 20, 2016
atul kushwah commented on atul kushwah's blog post मुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर...
"Aadarneeya Sheikh Shahzad Usmani sir, apka bahut bahut aabhar."
Nov 20, 2016
Sheikh Shahzad Usmani commented on atul kushwah's blog post मुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर...
"एक साथ तंज कसती/व्यंग्य/कटाक्ष करती सबक़ सिखाती बेहतरीन यथार्थ पूर्ण ग़ज़ल के लिए तहे दिल से बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय अतुल कुशवाह जी। मदारी को ज़्यादा व्यवस्थाओं की ज़रूरत नहीं होती- डमरू, बंदर और सम्मोहित भीड़ बस! फिर भले चक्का जाम हो जाये!!…"
Nov 20, 2016
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on atul kushwah's blog post मुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर...
"बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है आदरणीय अतुल जी, दाद कुबूल करें।"
Nov 19, 2016
Dr Ashutosh Mishra commented on atul kushwah's blog post मुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर...
"इस उम्दा ग़ज़ल पर हार्दिक बधाई आदरणीय ..वर्त्तमान सन्दर्भों को बखूबी चित्रित करती शानदार रचन "
Nov 19, 2016
Mirza Hafiz Baig commented on atul kushwah's blog post मुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर...
"उम्दा गज़ल । बहुत खूब!! अतुल भाई, मुबारकबाद कुबूल करें ।"
Nov 19, 2016
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव commented on atul kushwah's blog post मुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर...
"सामयिक गजल है अच्छी लगी , आख़िरी शेर उम्दा है . "
Nov 17, 2016

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Male
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kannauj up
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journalist
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journalist n poet

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मुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर...

एक करतब दूसरे करतब से भारी देखकर

मुल्क भी हैरान है ऐसा मदारी देखकर,

 

जिनके चेहरे साफ दिखते हैं मगर दामन नहीं

शक उन्हें भी है तेरी ईमानदारी देखकर,

 

उम्रभर जो भी कमाया मिल गया सब खाक में

चढ गया फांसी के फंदे पर उधारी देखकर,

 

मुल्क में हालात कैसे हैं पता चल जाएगा

देखकर कश्मीर या कन्याकुमारी देखकर,

 

सर्द मौसम है यहां तो धूप भी बिकने लगी

हो रही हैरत तेरी दूकानदारी देखकर,

 

इस…

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Posted on November 16, 2016 at 5:00pm — 16 Comments

गजल: दिल में ठहरा कोई ख्वाब सा रह गया..

दिल में ठहरा कोई ख्वाब सा रह गया

मैं उसे उम्रभर चाहता रह गया,

उसके जैसा कोई भी दिखा ही नहीं

जिसकी तसवीर मैं देखता रह गया,

शाम होते ही वो याद आने लगा

फिर उसे रातभर सोचता रह गया,

मुझसे मिलने वो आया बहुत दूर से

मैं शहर में उसे ढूंढता रह गया,

उसके बारे में अब याद कुछ भी नहीं

हां मगर याद उसका पता रह गया,

थी वो तकदीर शायद किसी और की

मैं दुआ में जिसे मांगता रह गया।।

.

# अतुल…

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Posted on September 2, 2016 at 6:00pm — 3 Comments

वो सर पर हाथ रखकर सौ बलाएं टाल देती है..

- गजल के चार मिसरे - 
घर से जब भी निकलूं मां हमेशा मेरे थैले में
मैं जो कुछ भूल जाता हूं वो चीजें डाल देती है,
न जाने कौन सी जादूगरी है मां के हाथों में
वो सर पर हाथ रखकर सौ बलाएं टाल देती है।।

-----------

 - मुक्तक - 

सुहानी शाम हो जब खूबसूरत, याद रहती है

हर—इक इंसान को अपनी जरूरत याद रहती है
मोहब्बत में कसम—वादे—वफा हम भूल सकते हैं,
मगर ताउम्र हमको एक सूरत याद रहती है।।

.
 मौलिक व अप्रकाशित (अतुल कुशवाह)

Posted on January 4, 2016 at 5:30pm — 2 Comments

वो मुझे देखकर मुस्कराती रही..

मैं उसे देखकर मुस्कराता रहा,

वो मुझे देखकर मुस्कराती रही।

उस कहानी का किरदार मैं ही तो था,

जो कहानी वो सबको सुनाती रही।।

मैं चला घर से मुझ पर गिरीं बिजलियां

बदलियां नफरतों की बरसने लगीं,

बुझ न जाए दिया इसलिए डर गया

देखकर आंधियां मुझको हंसने लगीं,

दुश्मनी जब अंधेरे निभाने लगे

रोशनी साथ मेरा निभाती रही,

मैं उसे देखकर मुस्कराता...

प्यास तुमको है तुम तो हो प्यासी नदी

एक सागर को क्या प्यास होगी भला,

हां अगर तुम…

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Posted on February 12, 2015 at 10:00pm — 14 Comments

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At 2:11am on July 31, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें.

At 9:40pm on January 29, 2015, sunita dohare said…

अतुल जी, नमस्कार आपका स्वागत है 

At 11:03pm on October 28, 2014, somesh kumar said…

sukriya,

At 8:09am on June 22, 2014, जितेन्द्र पस्टारिया said…

आपकी मित्रता का स्वागत है आदरणीय अतुल जी

सादर!

At 7:02pm on February 19, 2014, annapurna bajpai said…

हमारे ओबीओ परिवार मे एम मित्र मंडली मे स्वागत है आपका । 

 
 
 

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