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बसंत कुमार शर्मा
  • Male
  • जबलपुर, मध्यप्रदेश
  • India
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ताक रही गौरैया प्यासी - गीत
"आ. भाई बसंत जी, बेहतरीन गीत हुआ है । हार्दिक बधाई ।"
1 hour ago
Ajay Tiwari commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक गजल - पहल हो गई
"आदरणीय बसंत जी, खूबसूरत अशआर हुए हैं. हार्दिक बधाई."
2 hours ago
Ajay Tiwari commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ताक रही गौरैया प्यासी - गीत
"आदरणीय बसंत जी, एक और अच्छी गीत-प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई."
3 hours ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ताक रही गौरैया प्यासी - गीत
"आदरणीय बसन्त कुमार शर्मा जी इस मनमोहक सृजन के लिए बहुत बहुत बधाई"
5 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक गजल - पहल हो गई
"हार्दिक बधाई आदरणीय  बसंत कुमार शर्मा जी। बेहतरीन गज़ल। चंद मिसरे लबों पर लरजते रहे   धीरे-धीरे मुकम्मल गजल हो गई"
7 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक गजल - पहल हो गई
"शुभ प्रभात आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी , आपकी हौसला अफजाई का बेहद शुक्रिया "
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक गजल - पहल हो गई
"आ. भाई बसंत जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई।"
19 hours ago
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

एक गजल - पहल हो गई

आपकी ओर से जब पहल हो गईजिंदगी मेरी' कितनी सरल हो गई उस तरफ आँख से एक मोती गिराइस तरफ आँख मेरी सजल हो गई आपके रूठने का ये’ हासिल रहागुफ्तगू कम से’ कम, पल दो’ पल हो गई घर हमारे पड़े जब कदम आपके  झोंपड़ी अपनी’ जैसे महल हो गई   प्यार हमने किया कैसे’ इजहार हो  थी ये’ मुश्किल मगर आज हल हो गई अधखिली थी कली प्रेम की कल तलकदेखिये अब वो’ खिलकर कमल हो गई चंद मिसरे लबों पर लरजते रहे  धीरे-धीरे मुकम्मल गजल हो गई"मौलिक एवं अप्रकाशित"See More
22 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on योगराज प्रभाकर's blog post तरही ग़ज़ल-2 (आ० समर कबीर जी को समर्पित)
"आदरणीय योगराज प्रभार जी, सादर नमस्कार आपको, वाह लाजबाब ग़ज़ल आनंद आ गया "
yesterday
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ताक रही गौरैया प्यासी - गीत
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी को सादर नमस्कार. आपकी हौसलाफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया"
yesterday
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक गजल- पहल हो गई
"आदरणीय  Samar kabeer जी शुभ संध्या, आपकी इस्लाह का हमेशा ही मुझे बेसब्री से इन्तजार रहता है, वाह क्या बात है, बहुत सुंदर  अभी सुधार लेता हूँ, ये ऐब-ए-तनाफ़ुर अभी तक पकड में नहीं आया है, प्रयास अवश्य कर रहा हूँ  सादर…"
yesterday
Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक गजल- पहल हो गई
"आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी ...ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई...."
yesterday
Samar kabeer commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post एक गजल- पहल हो गई
"जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 'उस तरफ आँख से एक मोती ढला' इस मिसरे में 'ढ़ला' की जगह "गिरा" करना उचित होगा । 'बात तो कम से’ कम एक पल हो गई' इस मिसरे में…"
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ताक रही गौरैया प्यासी - गीत
"आद0 बसन्त कुमार शर्मा जी सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन और सरस रचना हुई है। बहुत बहुत बधाई आपको।"
yesterday
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल - ज़माने के लिए
"आदरणीय  बृजेश कुमार 'ब्रज' जी शुभ प्रभात, आपका दिल से शुक्रिया "
yesterday
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल - ज़माने के लिए
"आदरणीय रामबली गुप्ता जी शुभ प्रभातम, आपकी हौसलाफजाई का दिल से शुक्रिया "
yesterday

Profile Information

Gender
Male
City State
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
Native Place
धौलपुर
Profession
भारतीय रेल यातायात सेवा
About me
बोन्साई एवं कविता लेखन में रूचि

बसंत कुमार शर्मा's Blog

एक गजल - पहल हो गई

आपकी ओर से जब पहल हो गई

जिंदगी मेरी' कितनी सरल हो गई

 

उस तरफ आँख से एक मोती गिरा

इस तरफ आँख मेरी सजल हो गई

 

आपके रूठने का ये’ हासिल रहा

गुफ्तगू कम से’ कम, पल दो’ पल हो गई

 …

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Posted on September 17, 2018 at 7:30am — 7 Comments

ताक रही गौरैया प्यासी - गीत

गौरैया है कितनी प्यासी

 

झुलस रहा तन, व्याकुल है मन,  

छायी है चहुँ ओर उदासी.

रख दो एक सकोरा पानी,

ताक रही गौरैया प्यासी.

 

एक घौंसला था छोटा सा,

उड़ गया प्रगति की आँधी में.  …

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Posted on September 15, 2018 at 12:30pm — 9 Comments

ग़ज़ल - ज़माने के लिए

आप आये अब हमें दिल से लगाने के लिए

जब न आँखों में बचे आँसू बहाने के लिए

 

छाँव जब से कम हुई पीपल अकेला हो गया  

अब न जाता पास कोई सिर छुपाने के लिए

 

तितलियाँ उड़ती रहीं करते रहे गुंजन भ्रमर

पुष्प में मकरंद था जब तक…

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Posted on September 13, 2018 at 4:20pm — 12 Comments

गजल - है तो है

पतझड़ों के बीच भी यदि ऋतु सुहानी है तो है

घर हमारे महमहाती रात रानी है तो है

 

हो रहीं मशहूर परियों की कथाएँ आजकल

और उनमें एक अपनी भी कहानी है तो है  

 

बेवफा वो हो गया पर हम न भूले हैं उसे

यदि हमारे पास उसकी कुछ निशानी…

Continue

Posted on September 10, 2018 at 9:43am — 4 Comments

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At 2:23pm on September 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

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"आ. भाई अजय जी, सादर अभिवादन । आपकी उपस्थिति से मन आस्वस्थ हुआ। स्नेह के लिए आभार ।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ताक रही गौरैया प्यासी - गीत
"आ. भाई बसंत जी, बेहतरीन गीत हुआ है । हार्दिक बधाई ।"
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Ajay Tiwari commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post क्या मन है बीमार पड़ौसी - गजल - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
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