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रोहित डोबरियाल "मल्हार"
  • Male
  • uttarakhand, dehradun
  • India
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रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s Friends

  • बसंत कुमार शर्मा

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"बहुत ख़ूब"
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रोहित डोबरियाल "मल्हार" commented on Neeraj Neer's blog post पास रहते लोग से हम दूर कितने हो गए
"खूबसूरत बहुत ही खूबसूरत"
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"बहुत खूबसूरत"
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रोहित डोबरियाल "मल्हार" commented on Naveen Mani Tripathi's blog post तुझे याद हो के न याद हो
"बहुत ही खूबसूरत .....हार्दिक बधाई"
Apr 16
रोहित डोबरियाल "मल्हार" commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"खूबसूरत ..... छलके जो दर्द मेरी जुबाँ से कभी कभार ।गम को मेरे तो आपने अखबार कर दिया ।।"
Apr 12
रोहित डोबरियाल "मल्हार" commented on vijay nikore's blog post जज़्बात
"बहुत खूब malharsमल्हार"
Apr 12
Samar kabeer replied to रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s discussion एडमिन के लिए in the group सुझाव एवं शिकायत
"रोहित जी,मुझे तो ओबीओ से ही फ़ुर्सत नहीं मिलती,आप अगर मेरी कुछ मदद चाहते हैं तो आपको ओबीओ पर ही आना होगा ।"
Apr 5
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s discussion एडमिन के लिए in the group सुझाव एवं शिकायत
"सर सोशल मीडिया पर शेयर करना और कीवर्ड दोनों अलग हैं ...गूगल पर आप सर्च  करते हैं जैसे gazal shayri या shayri यह एक कीवर्ड होता है जिसके किसी भी रचना को अधिक से अधिक लोगों तक पहुचाया जा सकता है..आप इस बारे में अपने वेब डेवलपर्स से चर्चा कर सकते…"
Apr 5
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s discussion एडमिन के लिए in the group सुझाव एवं शिकायत
"जी समर जी मैं भी समय समय पर अपनी उपस्थिति देता रहता हूँ....  "
Apr 5
Samar kabeer replied to रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s discussion एडमिन के लिए in the group सुझाव एवं शिकायत
"भाई रोहित जी मंच के सभी सदस्य जब भी समय मिलता है मंच पर आ जाते हैं,आप अपनी सक्रियता के बारे में क्या कहते हैं?"
Apr 5

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s discussion एडमिन के लिए in the group सुझाव एवं शिकायत
"भाई रोहित जी, ज़रा गौर से देखें ओबीओ पर प्रकाशित किसी भी रचना को शेयर करने की सुविधा मौजूद है. आप अपनी रचना को सोशल मीडिया पर आसानी से शेयर कर सकते हैं. कम लोगों का मंच पर सक्रिय होना वाक़ई एक चिंता का विषय है.  "
Apr 5
रोहित डोबरियाल "मल्हार" added a discussion to the group सुझाव एवं शिकायत
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रोहित डोबरियाल "मल्हार" joined Admin's group
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रोहित डोबरियाल "मल्हार" commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की -जलने लगे जो ख्व़ाब सब नैन धुआँ धुआँ रहे
"जलने लगे जो ख्व़ाब सब नैन धुआँ धुआँ रहे दिल से तेरे निकल के हम जानें कहाँ कहाँ रहे. वाह वाह् ...बहुत खूब मल्हार"
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बसंत कुमार शर्मा and रोहित डोबरियाल "मल्हार" are now friends
Mar 21

Profile Information

Gender
Male
City State
Dehradun
Native Place
Kargi
Profession
sitarist
About me
Musician sitarist

रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s Blog

दिया तले अंधेरा

रोशनी ही रोशनी है चारों तरफ तो क्या हुआ

दिया तले तो फिर भी अंधेरा ही हुआ,

खबर नहीं उनको मेरे इश्क़ की तो क्या हुआ

पर इश्क़ तो मुझे उनसे सच्चा ही हुआ,

है हर धड़कन पर उन्हीं का कब्जा तो क्या हुआ

अब दिल भी तो उन्हीं का ही हुआ,

उनको मेरी ग़ज़ल पसंद नहीं तो क्या हुआ

पर उनका हर लफ़्ज तो ग़ज़ल ही हुआ,

मुहब्बत में मिले जख़्म "मल्हार" तो क्या हुआ

उसकी यादें भी तो मरहम ही हुआ,

हम उन्हें हमसफ़र ना बना पाये तो क्या हुआ

उनकी यादों के साथ ये सफ़र ही तो… Continue

Posted on March 5, 2018 at 10:16pm — 2 Comments

तू प्यार है मेरा

तू प्यार है मेरा यार है मेरा, ये बात मैं सबसे क्यों बोलूँ,
जो राज दबाया है सीने में वो शहरा भर में क्यूँ खोलूँ
.
सब कहते हैं "मल्हार" तेरे गीतों में ये कशिश कहाँ से आती है
मैं दिल में रो कर,चेहेरे से हँस कर ये बात टालते जाता हूँ
.
अहसासों के कागज़ पर अब मैं ख़ुद को लिखता रहता हूँ
उम्र भर के यादों में, मैं बस तुझको ही ढूंढता रहता हूँ
.
अजीब दास्ताँ मेरे इश्क़ की, तुझे खोने से डरता…
Continue

Posted on October 5, 2017 at 1:30pm — 5 Comments

एक ख्वाहिश

एक ख्वाहिश पूरी कर दे तू इबादत के बगैर

वो आ कर गले लगा ले मेरी इजाजत के बगैर

ऐ खुदा हुस्न और दौलत तो तेरी कुदरत है

मैं मानूँ अगर वो अपना ले मुझे इनके बगैर

बोल कर इज़हार क्यों करूँ अपने इश्क़ का

मैं मानूँ अगर वो जान जाये इशारे किए बगैर

यूँ तो आदत नही किसी को देखूं मुड़ कर

पर दिल करता है देखूं तुझे पलकें गिरे बगैर

शौक लगा उसी दिन मुहब्बत का मुझे यारों

दिल खो गया था जिस दिन खोये बगैर

कोई उम्मीद,दिलासा दे दे मुलाकात…

Continue

Posted on October 1, 2017 at 10:26pm — 4 Comments

ये कैसे हो गया

ये क्यूँ और कैसे हो गया

हद में रहकर भी बेहद हो गया 

  

था कभी जो नज़रों और ख्वाबों में,

ना जाने अब क्यूँ ओझल हो गया

चाहूँ मैं उसको जितना ज्यादा 

वो दूर क्यूँ मुझसे उतना हो गया

ये क्यूँ और कैसे हो गया

हद में रहकर भी बेहद हो गया

सोचा भूल जाऊँ अब उसे मैं 

पर वो क्यूँ मेरी रूह में बस गया

लौट-लौट कर आती हैं यादें तेरी

क्यूँ हर लम्हा मेरा तेरे नाम हो गया

पाना क्यूँ…

Continue

Posted on September 25, 2017 at 10:06pm — 7 Comments

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