For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तू प्यार है मेरा यार है मेरा, ये बात मैं सबसे क्यों बोलूँ,
जो राज दबाया है सीने में वो शहरा भर में क्यूँ खोलूँ
.
सब कहते हैं "मल्हार" तेरे गीतों में ये कशिश कहाँ से आती है
मैं दिल में रो कर,चेहेरे से हँस कर ये बात टालते जाता हूँ
.
अहसासों के कागज़ पर अब मैं ख़ुद को लिखता रहता हूँ
उम्र भर के यादों में, मैं बस तुझको ही ढूंढता रहता हूँ
.
अजीब दास्ताँ मेरे इश्क़ की, तुझे खोने से डरता हूँ
कैसे इजहार करूँ मैं बस, यही सोचता रहता हूँ
.
तू प्यार है मेरा यार है मेरा, यह बात मैं सबसे क्यों बोलूँ,
अगर इजाजत तू कर दे तो आयात इश्क़ की मैं पढ़ लूँ
.
तू प्यार है मेरा यार है मेरा, यह बात मैं सबसे क्यों बोलूँ,
जो राज दबाया है सीने में, वो शहरा भर में क्यूँ खोलूँ
.
तू प्यार है मेरा यार है मेरा, यह बात मैं सबसे क्यों बोलूँ,
यह बात मैं सबसे क्यों बोलूँ...........
.
 मौलिक/अप्रकाशित
 रोहित डोबरियाल "मल्हार"

Views: 188

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by SALIM RAZA REWA on October 6, 2017 at 9:45pm

जनाब रोहित जी आदाब,

सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें 

भाई बिधा जानना तो बहुत ही ज़रूरी है , बिना मंज़िल जाने सफ़र का क्या मतलब ,

Comment by रोहित डोबरियाल "मल्हार" on October 6, 2017 at 11:15am

आदरणीय samar kabeer जी  उत्साहवर्धन के धन्यवाद , एवं यह रचना किस छंद या विधा में है ये तो मैं भी नही जानता , में केवल जैसे सोचता हूँ लिख देता हूँ

Comment by रोहित डोबरियाल "मल्हार" on October 6, 2017 at 11:14am

आदरणीय samar kabeer जी  उत्साहवर्धन के धन्यवाद , एवं यह रचना किस छंद या विधा में है ये तो मैं भी नही जानता , में केवल जैसे सोचता हूँ लिख देता हूँ

Comment by Afroz 'sahr' on October 5, 2017 at 5:41pm
जनाब रोहित जी जनाब समर साहब ने इस विधा के बारे में पूछा है । बताने का कष्ट करें सादर,,,,,
Comment by Samar kabeer on October 5, 2017 at 5:35pm
जनाब रोहित जी आदाब,सुंदर प्रस्तुति हेतु बधाई स्वीकार करें ।
ये रचना किस विधा में है भाई ?

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब डॉ. नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'होंगी ही उससे…"
6 minutes ago
Hariom Shrivastava posted blog posts
19 minutes ago
vishva prakash mehra is now a member of Open Books Online
2 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
15 hours ago
मोहन बेगोवाल posted a blog post

ग़ज़ल

   चल छुपे जो तेरे थे राज़ नुमायाँ कर दें।दर्द अपने को पराये या के दरमाँ कर दें।जिंदगी उम्र बताई न…See More
18 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post ये कौन आया है महफ़िल में चाँदनी पहने------पंकज मिश्र
"आदरणीय बाऊजी बहुत बहुत आभार"
23 hours ago
Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" commented on Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s blog post ये कौन आया है महफ़िल में चाँदनी पहने------पंकज मिश्र
"आदरणीय बृजेश जी बहुत बहुत आभार"
23 hours ago
Samar kabeer commented on amod shrivastav (bindouri)'s blog post सुब्ह शाम की तरह अब ये रात भी गई ..
"जनाब आमोद बिंदौरी जी आदाब,इस प्रयास के लिए बधाई ।"
yesterday
Samar kabeer commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post पत्थरों पे हैं इल्ज़ाम झूठे सभी-गजल
"जनाब सतविन्द्र कुमार जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'रहबरी तीरगी की रहे…"
yesterday
SALIM RAZA REWA posted photos
yesterday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"आदरणीय आसिफ़ ज़ैदी साहब आदाब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें"
Saturday
dandpani nahak replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"आदरणीय सुर्खाब बशर जी हार्दिक बधाई स्वीकार करे उम्दा ग़ज़ल कही आपने"
Saturday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service