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जितेन्द्र पस्टारिया
  • Male
  • Harda, Madhya Pradesh
  • India
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KALPANA BHATT commented on जितेन्द्र पस्टारिया's blog post यथार्थ ....(लघुकथा)
"हद में रहना जरुरी है , अच्छा सन्देश देती हुई इस कथा के लिए हार्दिक बधाई आपको आदरणीय |"
yesterday
KALPANA BHATT commented on जितेन्द्र पस्टारिया's blog post यथार्थ ....(लघुकथा)
"हद में रहना जरुरी है , अच्छा सन्देश देती हुई इस कथा के लिए हार्दिक बधाई आपको आदरणीय |"
yesterday
जितेन्द्र पस्टारिया commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सांसारिकता (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"अच्छी लघुकथा साझा हुई ,आदरणीय शेख साहब। बहुत बहुत बधाई आपको "
Dec 11, 2016
जितेन्द्र पस्टारिया commented on विनय कुमार's blog post तारीख- लघुकथा
"वर्तमान से एक अच्छा विषय उठाकर , साझा किया है आपने आदरणीय विनय जी। प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार कीजिये "
Dec 11, 2016
जितेन्द्र पस्टारिया commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post अदृश्य जीत (लघुकथा)
"बहुत बेहतर लघुकथा आदरणीय चंद्रेश जी। एक वास्तविक सच को बहुत ख़ूबसूरती से उकेरती लघुकथा"
Dec 11, 2016
जितेन्द्र पस्टारिया commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post दायित्व
"बहुत उम्दा विषय पर लिखी यह लघु कथा दिल को छू गई. आपकी लखनी को नमन आदरणीय चंद्रेश जी.. ."
Dec 6, 2016

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on जितेन्द्र पस्टारिया's blog post डस्ट-बिन....(लघुकथा)
"नहीं, आदरणीय गिरिराज भाई, आप बिल्कुल सही हैं. जितेन्द्रभाई के प्रस्तुतीकरण में स्पष्टतः संप्रेषणीयत में कमी है.  जितेन्द्र भाई बहुत दिनों के बाद आपको मंच पर देख कर आत्मीय प्रसन्नता हुई है.  विश्वास है, सब कुशल-मंगल है  प्रस्तुति पर…"
Sep 3, 2015
जितेन्द्र पस्टारिया commented on Sushil Sarna's blog post अंगूठी (लघु कथा ) ....
"बहुत ही अच्छे विषय पर ,सुंदर लघुकथा साझा की आदरणीय सरना साहब. रिश्तों में आतुरता या दूर तक बिन सोचे लिए फैसले ही इन समस्यायों का कारण है. वरना रिश्ते तो रिश्ते होते है ,जो कभी तोड़े से भी नहीं टूटते. प्रस्तुति पर बधाई आपको"
Sep 2, 2015
जितेन्द्र पस्टारिया commented on pratibha pande's blog post आश्वासन [लघुकथा]
"बहुत अच्छी र्लाघुकथा बन पड़ी आदरणीया प्रतिभा जी. कभी एसा समय आ ही जाता है कि कोई क्या आश्वासन दे ,समझ ही नही पाता. प्रस्तुति पर बधाई स्वीकारें"
Sep 2, 2015
जितेन्द्र पस्टारिया commented on TEJ VEER SINGH's blog post भयंकर भूल – (लघुकथा)
"वाह! आदरणीय तेजवीर जी. बहुत ही गहन सोच को उजागर की आपने ,लघुकथा के माध्यम से. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें"
Sep 2, 2015
जितेन्द्र पस्टारिया commented on Omprakash Kshatriya's blog post लघुकथा- अँधा
"अच्छी लघुकथा ,आदरणीय ओमप्रकाश जी. आज बस यही सब कुछ हो रहा है.हमारे समाज और संविधान में  स्वतंत्रता का भी दायरा बना हुआ है. जहाँ जिम्मेदारियों को संभालना ही पड़ता है. अब आगे जिसे जैसा लगे ,कर जाता है जिसे भोगना है तो बस भोगना है. प्रस्तुति पर…"
Sep 2, 2015
जितेन्द्र पस्टारिया commented on Tanuja Upreti's blog post धोखा (लघुकथा)
"सुंदर लघुकथा ,आदरणीया तनूजा जी. यह एक कटु सच्चाई है और इंसानी फितरत भी. प्रस्तुति पर आपको बहुत बहुत बधाई"
Sep 2, 2015

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on जितेन्द्र पस्टारिया's blog post डस्ट-बिन....(लघुकथा)
"आदरणीय जितेन्द्र भाई , पहली बार आपकी कथा पढ के ऐसा लगा कि आप जो कहना चाहते हैं , कह नही पाये हैं । वैसे मै भी गलत हो सकता हूँ , मुझे लघुकथा का ज्ञान नही है , फिर भी एक बार पुनः कथा पर सोच कर देखियेगा । कथा के विषय के लिये बधाई आपको ।"
Aug 27, 2015
Archana Tripathi commented on जितेन्द्र पस्टारिया's blog post डस्ट-बिन....(लघुकथा)
"आपकी यह रचना कुछ उलझी हुई लग रही हैं ।क्षमा कीजियेगा जीतेन्द्र पस्टारीया जी ।कृपया स्पष्ट करने की कृपा कीजिये ।"
Aug 25, 2015
जितेन्द्र पस्टारिया posted a blog post

डस्ट-बिन....(लघुकथा)

“अरे बिटिया यह क्या..? पूरे कमरे में  पैकिंग वाले कागजों का कचरा फैला रखा है..”“मम्मी!! वो क्या है कि मुझे एक-दो दिन हो गये , मेरा टाईम आये.  आप कहती थी, न. कि ऐसे समय में पति की बहुत जरुरत होती है, हर नवविवाहिता को. तो मैं उनके पास जाने की तैयारी कर रही थी.."“हाँ..बिटिया ! आदमी को तो रोज औरत चाहिए, और औरत का बस यही टाईम मजबूर करता है . बस! तू एक बार उसे, संयुक्त परिवार से निकाल ले. क्यूंकि मैं अपनी तरह तुझे भी, खुश देखना चाहती हूँ. तू अभी जा, फिर मैं बुला लूंगी किसी भी बहाने से.."“हाँ!!…See More
Aug 25, 2015
जितेन्द्र पस्टारिया commented on VIRENDER VEER MEHTA's blog post दर्द (लघुकथा)
"बहुत सुंदर लघुकथा ,आदरणीय वीरेंदर जी. कथा के मूल भाव को बहुत ही सुन्दरता से स्पष्ट किया है आपने. प्रस्तुति पर बहुत बहुत बधाई आपको"
Aug 25, 2015

Profile Information

Gender
Male
City State
हरदा (नर्मदांचल ) मध्यप्रदेश
Native Place
हरदा (नर्मदांचल ) मध्यप्रदेश
Profession
कृषि
About me
वास्तविक व् सरल इंसान हूँ, कभी सोचा नही था की कुछ लिख भी पाऊंगा. पिछले एक वर्ष से ओ बी ओ परिवार से जुड़ा हुआ हूँ यहाँ धीरे -धीरे पढ़ कर कुछ लिखना सीखा हूँ, अपने काम के बाद अपना अधिकतर समय ओ बी ओ पर ही देता हूँ. यहाँ सभी सदस्यों के मार्गदर्शन व् स्नेह का आभारी हूँ.

जितेन्द्र पस्टारिया's Blog

डस्ट-बिन....(लघुकथा)

“अरे बिटिया यह क्या..? पूरे कमरे में  पैकिंग वाले कागजों का कचरा फैला रखा है..”

“मम्मी!! वो क्या है कि मुझे एक-दो दिन हो गये , मेरा टाईम आये.  आप कहती थी, न. कि ऐसे समय में पति की बहुत जरुरत होती है, हर नवविवाहिता को. तो मैं उनके पास जाने की तैयारी कर रही थी.."

“हाँ..बिटिया ! आदमी को तो रोज औरत चाहिए, और औरत का बस यही टाईम मजबूर करता है . बस! तू एक बार उसे, संयुक्त परिवार से निकाल ले. क्यूंकि मैं अपनी तरह तुझे भी, खुश देखना चाहती हूँ. तू अभी जा, फिर मैं बुला लूंगी किसी…

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Posted on August 25, 2015 at 3:30am — 3 Comments

सीख....(लघुकथा)

“सुन बेटा!! बारिश तो ठीक हुई और खेतों में नमी पर्याप्त है, बस बीज को सही नमी और शुष्कता के बीच में ही बोना, अंकुरण का प्रतिशत अच्छा रहेगा. ज्यादा गहरी नमी में मत उतार देना, वरना सड जायगा..” रमेश ने अपने बेटे को खेत में बोनी करने से पहले समझाते हुए कहा

“ जी पिताजी.. मैं आपकी बात समझ गया, सब संभाल लूँगा. आप घर जा रहे हो, अगर हो सके तो छोटू के खाते में कुछ पैसे जमा कर आना. कल उसका फोन आया था. वहां शहर में गर्मी बहुत है पंखे से काम नहीं चलता, तो कूलर का कह रहा था..”  बेटे ने काम…

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Posted on July 13, 2015 at 11:02am — 5 Comments

विधि....(लघुकथा)

"सुनो! आजकल न्यूज चैनल पर अदालती कार्यवाही की खबर सुनकर, यूँ लगता है कि क़ानून तेज और सबसे ऊपर है"

"हाँ! बिलकुल सही कह रही हो. यार!  रिमोर्ट कहाँ है..? थोड़ा वाल्यूम कम करना, वकील साहब का फोन आ रहा है "

"नमस्ते वकील साहब! कहाँ तक पहुंचा मामला..? अगली तारीख कब है..? "

"उन लोगों ने कहीं से कुछ साक्ष्य प्रस्तुत किये है हम कमजोर पड़ सकते हैं. और अगली तारीख इसी माह है..?

"इसी माह्ह्ह.. वकील साहब! इतनी गर्मी पड़ रही है. मेरा परिवार के साथ सैर-सपाटे पर जाने का प्लान है. आप…

Continue

Posted on June 7, 2015 at 3:30am — 19 Comments

फ्लेक्सिबिलिटी....(लघुकथा)

“ओय! रितु.. अब बता कैसी लग रही हूँ...?” सोनिया ने पूरा ट्रडिशनल श्रृंगार करके, अपनी फ्रेंड से पूछा

“अरे! सोनिया. तू तो बिलकुल अबला लग रही है यार. भारतीय नारी..हा हा हा हा”

“हाँ! यार..अबला ही तो दिखना होगा. ऐसा मेरे वकील का कहना है, ताकि कल कोर्ट में जज सहानुभूति के तौर पर जल्दी से मेंटेनेंस बना देगा तो  मुझे अपने हसबेंड के घिसे-पिटे विचारों और बूढ़े सास-ससुर की खांसी-खुजली से छुटकारा मिल जाएगा.”

"उफ्फ!! बड़ी दूर की सोच होती है यार, वकीलों की.. अब चल ये पकड़ तेरे जींस-टॉप,…

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Posted on May 18, 2015 at 9:30am — 26 Comments

Comment Wall (32 comments)

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At 3:40pm on December 22, 2014, vijay nikore said…

शुभकामनाओं के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय जितेन्द्र जी।

At 1:08pm on December 8, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

जीतू भाई

आपकी दुर्घटना के बारे में जानकार दुःख हुआ i  ईश्वर आपको शीघ्र ही स्वस्थ करे  i हम सब आपकी प्रतीक्षा इस मंच पर कर रहे हैं i सादर i

At 5:57pm on November 7, 2014, Hari Prakash Dubey said…
आपकी आत्मीय प्रतिक्रिया एवं प्रोत्साहन के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीय जितेन्द्र पस्टारिया जी
At 4:41pm on October 23, 2014, Sushil Sarna said…

आपको  सपरिवार ज्योति पर्व की हार्दिक एवं मंगलमय शुभकामनाएं...

At 8:44pm on July 12, 2014, Santlal Karun said…

आदरणीय जितेन्द्र जी,

"दस्तख़त" -- अच्छी लघु कथा, संदेशपरक; साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

At 4:01pm on June 30, 2014, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

जीतू जी

आपके मित्र बनाने से मेरे गौरव में बृद्धि हुयी है i  सादर i

At 8:20am on June 22, 2014, Dr. Vijai Shanker said…
स्वागत है जितेंद्र जी , सस्नेह. ।
At 11:07am on January 17, 2014, Abhinav Arun said…

शुक्रिया आदरणीय श्री जितेन्द्र जी !!

At 9:07pm on December 5, 2013, डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव said…

गीत जी

आपका बहुत बहुत आभार i

सादर  i

At 11:46am on November 23, 2013, Vindu Babu said…

आदरणीय जितेन्द्र जी मैं आपकी मित्रता का हार्दिक स्वागत करती हूँ।

सादर

 
 
 

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