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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
  • Male
  • वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • India
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s Page

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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 78 in the group चित्र से काव्य तक
"आद0 सतविंदर भाई जी सादर अभिवादन। रचना पर बधाई। शिल्प क़ई जगह भंग है। देखियेगा सादर"
18 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 78 in the group चित्र से काव्य तक
"आद0 अखिलेश कृष्ण जी सादर अभिवादन, रचना पर आपकी उपस्थिति से गौरवान्वित हूँ। आभार आपका"
18 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 78 in the group चित्र से काव्य तक
"परम आद0 समर कबीर साहब सादर प्रणाम। वायरल फीवर की चपेट में आने से कुछ भी सोचना नहीं हो पा रहा है, पर कार्यक्रम में सहभागिता कुछ लिखने को प्रेरित की, तदनुरूप त्वरित प्रयास किया। आपका आशीष मिला, लेखन सार्थक हुआ। हृदय की गहराइयों से आपका आभार।"
20 hours ago
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"जनाब सतीश साहिब ,प्रदत्त चित्र पर सुन्दर सरसी छन्द हुए हैं ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें"
22 hours ago
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"आद0 गोपाल जी सादर अभिवादन।आभार आपका उत्साहवर्धन के लिए"
22 hours ago
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"आद0 तस्दीक अहमद खान साहिब, सादर अभिवादन। आभार आपका।"
22 hours ago
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"आद0 सौरभ जी सादर अभिवादन। आपकी प्रतिक्रिया पाकर रचनाकर्म सफल हुआ। आभार आपका"
23 hours ago
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"आद0 मोहम्मद आरिफ भाई जी सादर अभिवादन। दीपावली की अनन्त शुभकामनाएं। आभार आपका। उत्सव में भागीदारी से विरत नहीं होना चाहता था,अतेव त्वरित प्रयास में यहीं लिखा।"
yesterday
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"आद0 गोपाल जी सादर अभिवादन। भाई अखिलेश कृष्ण जी से सहमत। बहुत ही बढ़िया लिखा आपने। अनेकानेक बधाइयाँ।"
yesterday
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"आद0 गोपाल जी सादर अभिवादन। भाई अखिलेश कृष्ण जी से सहमत। बहुत ही बढ़िया लिखा आपने। अनेकानेक बधाइयाँ।"
yesterday
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"आद0 तस्दीक अहमद साहब सादर अभिवादन। आपका प्रयास बेहद सराहनीय है। दीप पर्व की शुभकामनाओं संग इस प्रस्तुति पर बधाई।"
yesterday
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"आद0 प्रतिभा पांडेय जी सादर अभिवादन, चित्र पर बेहतरीन छःन्द लिखा है आपने, बधाई इस प्रस्तुति पर।"
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 78 in the group चित्र से काव्य तक
"आद0 बासुदेव अग्रवाल'नमन'जी स्सादर अभिवादन,बहुत उम्दा कामरूप छन्द लिखे आपने प्रदत्त चित्र को परिभाषित करते हुए,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 78 in the group चित्र से काव्य तक
"आद0 छोटेलाल भैया जी चित्रानुरूप बेहतरीन सृजन किया है आपने, बधाई"
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 78 in the group चित्र से काव्य तक
"आद0 अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन, दीपावली की हार्दिक शुभकामनाओं संग चित्रानुरूप रचना पर हार्दिक बधाई।"
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 78 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी आदाब, बहुत ही सजीव और सार्थक चित्रण किया आपने । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
yesterday

Profile Information

Gender
Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a simple leaving man, having hobby to write poems

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s Blog

कुछ यादें बचपन की

बीत गया जो बचपन अपना, वह भी एक जमाना था

पल में हँसना पल में रोना, पल पल इक अफसाना था



बारिश में कागज की नैया, भैया रोज बनाते थे

बागों में तितली के पीछे, हमको वह दौड़ाते थे

रोने की थी वजह न कोई, हँसने के न बहाने थे

कमी नहीं थी किसी चीज की, सारे पास खजाने थे



चिन्ता फिक्र न कोई कल की, हर मौसम मस्ताना था

पल में हँसना पल में रोना, पल पल इक अफसाना था



जिधर निकलते थे हम यारों उधर दोस्त मिल जाते थे

गिल्ली डंडा और कबड्डी, फिर हम वहीं जमाते… Continue

Posted on October 9, 2017 at 1:00pm — 11 Comments

मैं हुआ बूढ़ा मगर अनुभव हुआ कुछ भी नहीं (तरही ग़ज़ल)

अरकान- फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन



हर तरफ शिक़वा गिला है औऱ क्या कुछ भी नहीं

रात दिन की दौड़ में आख़िर मिला कुछ भी नहीं ||



इक नियम बदलाव का यारों सनातन सत्य है,

कल मिला है आज से पर राब्ता कुछ भी नहीं



ज़ीस्त का सच देख गोया बन्द मुट्ठी खुल गयी,

साथ अपने अंत में वह ले गया कुछ भी नहीं



बचपना लिपटा रहा ता---उम्र मुझसे इस क़दर,

मैं हुआ बूढ़ा मगर अनुभव हुआ कुछ भी नहीं



दूर होगी मुफ़लिसी यह सोचना तू छोड़ दे,

ये सियासी ख़्वाब… Continue

Posted on October 2, 2017 at 5:04am — 21 Comments

सपना (हास्य व्यंग्य)

क्या दिन थे आनन्द भरे वे, हरपल रहता था उल्लास|

आगे जीवन ऊबड़ खाबड़, तनिक न था इसका आभास||

बीबी बच्चों के चक्कर में, स्वप्न हुए अब तो इतिहास|

आफत आन पड़ी है मुझपर, दोस्त उड़ाते हैं उपहास||



कभी उड़ा था नील गगन में, मैं भी अपने पंख पसार|

पंख लगाकर समय उड़ा वो, हुआ बिना पर मैं लाचार||

जीवन अपना शुष्क धरा सा, मस्ती का उजड़ा संसार|

ऐसा चिर पतझड़ आएगा, कभी नहीं था किया विचार||



जाने कौन घड़ी थी वो भी, जब शादी का किया ख़याल|

किस्मत ऐसी फूटी भइया,… Continue

Posted on September 26, 2017 at 7:30pm — 18 Comments

दबी हर बात जिंदा क्यूँ करें हम (ग़ज़ल)

बह्र -मुफाईलुन मुफाईलुन फ़ऊलुन



तुम्हारा राज़ इफ़शा क्यूँ करें हम|

दबी हर बात जिन्दा क्यूँ करें हम||



न हो जो भाग्य को यारों गवारा,

फिर उसकी ही तमन्ना क्यूँ करें हम||



जगाती दर्द हो जो बात दिल में,

उसी का रोज चर्चा क्यूँ करें हम||



लगा दे आग जो सारे जहाँ में ,

कोई भी ऐसी रचना क्यूँ करें हम||



जिसे करके रहे अफ़सोस मन में,

कोई भी काम ऐसा क्यूँ करें हम||



बहन माँ बेटियाँ तुहफ़ा ख़ुदा का,

उन्ही पे कोई हिंसा… Continue

Posted on September 18, 2017 at 8:00am — 27 Comments

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At 7:39pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी ग़ज़ल "हाथ से सारे फिसल गए" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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