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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
  • Male
  • वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • India
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s Page

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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post गीत -नवीन वर्ष में नवीन गीत रंग रास हो (पञ्चचामर छ्न्द)
"आद0 सौरभ पांडेय जी सादर प्रणाम रचना पर आपकी उपस्थिति मुझे नई ऊर्जा दे रही है। आपकी बातों को गहराई से आत्मसात कर रहा हूँ। कोशिश होगी कि आगे से आधुनिकता का पुट भी रखूँ। हृदयतल से आभार आपका"
Jan 9
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post गीत -नवीन वर्ष में नवीन गीत रंग रास हो (पञ्चचामर छ्न्द)
"आद0 तेजवीर सिंह जी सादर अभिवादन। पञ्चचामर छ्न्द पर आपकी उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार"
Jan 9

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post गीत -नवीन वर्ष में नवीन गीत रंग रास हो (पञ्चचामर छ्न्द)
"इस छंद का विन्यास भले ही क्लिष्ट हो इसकी गति अत्यंत प्रवाहमय होती है. छांदसिक रचना-कर्म के अलावे कवि वाचिक विन्यास में इस छंद में रचनाक्र्म करते हैं जिसका अभ्यास तुलनात्मक रूप से सरल है.  आदरणीय कुशक्षत्रप जी, आपने नववर्ष का आवाहन करते हुए एक…"
Jan 8
Rachna Bhatia commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल (तेरे खाने के लिए मुफ्त का माल अच्छा है)
"आदरणीय। बेहतरीन ग़ज़ल हुई वाह वाह वाह वाह।"
Jan 6
Ajay Kumar commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल (तेरे खाने के लिए मुफ्त का माल अच्छा है)
"बहुत ही लाजवाब ग़ज़ल कही आपने.... हम जवाबों से परखते हैं रज़ामन्दी को मुस्कुरा दे वो अगर समझो सवाल अच्छा है मजा आ गया भैया जी बधाई स्वीकार कीजिए"
Jan 6
TEJ VEER SINGH commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post गीत -नवीन वर्ष में नवीन गीत रंग रास हो (पञ्चचामर छ्न्द)
"हार्दिक बधाई आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी।बेहतरीन छंद।"
Jan 5
TEJ VEER SINGH commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल (तेरे खाने के लिए मुफ्त का माल अच्छा है)
"हार्दिक बधाई आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी।बेहतरीन गज़ल। अस्मतें रोज़ ही माँ बहनों की बिकती हैं मगरवो समझते हैं कि इस देश का हाल अच्छा है अच्छे  दिन कैसे कहूँ इनको  बताओ  यारोहाल बदला नहीं फिर कैसे मआल…"
Jan 5
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल (तेरे खाने के लिए मुफ्त का माल अच्छा है)
"आ. भाई सुरेन्द्रनाथ जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Jan 5
Samar kabeer commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल (तेरे खाने के लिए मुफ्त का माल अच्छा है)
"जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 5
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' posted a blog post

ग़ज़ल (तेरे खाने के लिए मुफ्त का माल अच्छा है)

अरकान- 2122  1122   1122   112/22तेरे  खाने  के  लिये  मुफ्त  का माल  अच्छा हैइसलिये  लगता  चुनावों का  वबाल  अच्छा हैये  अलग  बात  कि  सूरत  न  भली  हो  लेकिनकुछ न कुछ हर कोई करता ही कमाल अच्छा हैहम  जवाबों  से  परखते  हैं  रज़ामन्दी  कोमुस्कुरा दे वो अगर समझो सवाल अच्छा हैहद से बाहर तो हर  इक  चीज़  बुरी  लगती हैहद में रह कर जो किया जाए धमाल अच्छा हैअस्मतें रोज़ ही माँ बहनों की बिकती हैं मगरवो समझते हैं कि इस देश का हाल अच्छा हैअच्छे  दिन कैसे कहूँ इनको  बताओ  यारोहाल बदला नहीं फिर कैसे मआल…See More
Jan 5
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on TEJ VEER SINGH's blog post बलात्कार - लघुकथा –
"आद0 तेजवीर सिंह जी सादर अभिवादन मनोदशा का अच्छा वर्णन किया है आपने।लघुकथा पर बधाई स्वीकार कीजिये"
Jan 5
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post भूल मन पीड़ा विगत की गा रहा है - लक्ष्मण धामी'मुसाफिर' (गजल)
"आद0 लक्ष्मण धामी मुसाफ़िरजी सादर अभिवादन। बढिया गज़ल कही आपने। बधाई स्वीकार कीजिये।"
Jan 5
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post नन्हा गुलाब कह रहा है (कविता)
"आद0 कल्पना भट्ट जी सादर अभिवादन। बढ़िया भाव है रचना के। बधाई स्वीकार कीजिये"
Jan 5
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post गीत -नवीन वर्ष में नवीन गीत रंग रास हो (पञ्चचामर छ्न्द)
"आद0 अमीरुद्दीन अमीर जी सादर अभिवादन पञ्चचामर छ्न्द आधारित इस गीत पर आपकी उपस्थिति और सराहना का हृदयतल से आभार"
Jan 3
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post गीत -नवीन वर्ष में नवीन गीत रंग रास हो (पञ्चचामर छ्न्द)
"आद0 लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर जी सादर अभिवादन पञ्चचामर छ्न्द आधारित इस गीत पर आपकी उपस्थिति और सराहना का हृदयतल से आभार"
Jan 3
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post गीत -नवीन वर्ष में नवीन गीत रंग रास हो (पञ्चचामर छ्न्द)
"आद0 दण्डपाणि नाहक जी सादर अभिवादन। पञ्चचामर छ्न्द आधारित गीत पर आपकी उपस्थिति और सराहना का हृदयतल से आभार"
Jan 3

Profile Information

Gender
Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a simple leaving man, having hobby to write poems

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s Blog

ग़ज़ल (तेरे खाने के लिए मुफ्त का माल अच्छा है)

अरकान- 2122  1122   1122   112/22

तेरे  खाने  के  लिये  मुफ्त  का माल  अच्छा है

इसलिये  लगता  चुनावों का  वबाल  अच्छा है

ये  अलग  बात  कि  सूरत  न  भली  हो  लेकिन

कुछ न कुछ हर कोई करता ही कमाल अच्छा है

हम  जवाबों  से  परखते  हैं  रज़ामन्दी  को

मुस्कुरा दे वो अगर समझो सवाल अच्छा है

हद से बाहर तो हर  इक  चीज़  बुरी  लगती है

हद में रह कर जो किया जाए धमाल अच्छा है

अस्मतें रोज़ ही माँ बहनों की बिकती हैं…

Continue

Posted on January 5, 2021 at 12:57pm — 5 Comments

गीत -नवीन वर्ष में नवीन गीत रंग रास हो (पञ्चचामर छ्न्द)

विचार में प्रवाह हो स्वभाव में उजास हो

नवीन वर्ष  में  नवीन  गीत  रंग  रास  हो

प्रभात धूप हो खिली समीर मस्त हो बहे

अनन्त हर्ष को लिए सुवास भाव भी रहे

कपाट  बंद खोल के धरे नवीन ज्ञान को

समर्थ अर्थ में  रखे सदैव स्वाभिमान को

रहे  कहीं  न दीनता सदा  यही प्रयास हो

नवीन वर्ष में नवीन गीत रंग रास हो।।१

विकार काम क्रोध मोह लोभ क्षोभ त्याग दे

कुमार्ग  पे  चले नहीं  विनाश  का न राग दें

कहीं  दिखे  अधर्म  तो  अधर्म  देह  चीर दें

समाज …

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Posted on December 30, 2020 at 2:54pm — 11 Comments

आज़ादी के पुनीत पर्व पर वीर रस की कविता

आज पुनः जब मना रहे हम, वर्षगाँठ आज़ादी की

आओ थोड़ी चर्चा करलें, जनगण मन आबादी की

जिन पर कविता गीत लिखूँ तो, झर-झर आँसू आते हैं

रोम-रोम में सिहरन होती, भाव सभी मर जाते हैं।।1

ऐसे भी हैं यहाँ कई जो, घर को सर पर ढोते हैं

घोर अँधेरा फुटपाथों पर, बिना बिछौना सोते हैं

गर्मी में तन झुलसे उनका, सर्दी हाड़ कँपाती है

तब जश्ने आज़ादी अपनी, उनको ख़ूब चिढ़ाती है।।2

भूखा प्यासा उलझा बचपन, भटक रहा अँधियारों में

फूटी क़िस्मत खोज रहा वह, कूड़े के गलियारों…

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Posted on August 15, 2020 at 12:07pm — 8 Comments

गजल- कोख में आने से साँसों के ठहर जाने तक

बह्र- 2122   1122   1122  112/22

कोख में आने से साँसों के ठहर जाने तक

ज़िन्दगी में सकूँ मिलता नहीं मर जाने तक

मुफ़लिसी नेक दिली और ज़माने का दर्द

ये सभी सिर्फ़ सियासत में उतर जाने तक

शादी लड्डू ही नहीं एक बला है इसका

होता अहसास नहीं पंख कतर जाने तक

यार बरसात किसे अच्छी नहीं लगती मगर

खेत खलियान नदी ताल के भर जाने तक

हर तरफ़ शह्र में ख़ूँख़ार दरिन्दे घूमें

बेटियाँ ख़ौफ़ज़दा लौट के घर जाने…

Continue

Posted on August 4, 2020 at 6:11am — 10 Comments

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At 7:03pm on April 11, 2019, Vivek Pandey Dwij said…
आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी आभार आप को इस उत्साह वर्धन के लिए।
At 7:39pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी ग़ज़ल "हाथ से सारे फिसल गए" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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