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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
  • Male
  • वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • India
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Latest Activity

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ताक रही गौरैया प्यासी - गीत
"आद0 बसन्त कुमार शर्मा जी सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन और सरस रचना हुई है। बहुत बहुत बधाई आपको।"
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शैतानियत और कलम" (लघुकथा)
"आद0 शेख़ शहज़ाद उस्मानी साहब सादर अभिवादन। बढ़िया व्यंग्यात्मक शिक्षाप्रद लघुकथा पर आपको बधाई देता हूँ। सादर"
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on amita tiwari's blog post कुछ भी नहीं बोलती जानकी कभी
"आद0 अमिता तिवारी जी सादर अभिवादन।बढ़िया रचना लिखी है आपने,, पर पर एक बात कहूँगा, अतुकांत रचना में तुकांतता के सयास से बचना और यथासम्भव कम शब्दों में ज्यादा कहना,, को मापदंड रखना चाहिए। बहुत बहुत बधाई आपको।"
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post 'सेटिंग' या 'अवलम्बन' (लघुकथा)
"आद0 शेख शहज़ाद उस्मानी जी सादर अभिवादन। बढ़िया लघुकथा लिखी आपने। बधाई निवेदित है।सादर"
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आद0 रवि शुक्ल जी सादर प्रणाम। आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं। "
yesterday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Samar kabeer's blog post "हिन्दी दिवस पर विशेष" हिन्दी ग़ज़ल
"आद0 समर साहब सादर प्रणाम। हिंदी दिवस पर ओ बी ओ के पाठकों के लिए उपहार स्वरूप यह ग़ज़ल बेहतरीन। जो लिखता हूँ हिन्दी में ही लिखता हूँमेरी ख़ुशियों का घर आँगन हिन्दी है क्या बात, बहुत खूबसूरत.... भारत में कितनी हैं भाषाएँ लेकिनसारी भाषाओँ का यौवन हिन्दी…"
Saturday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-95
"आद0 रविकर जी सादर अभिवादन। विषयानुरूप बढ़िया कुण्डलिया सृजित किये आपने। बधाई स्वीकार कीजिये।"
Friday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-95
"आद0 प्रतिभा पांडेय जी सादर अभिवादन। बचपन को याद करती विषयानुरूप बेहतरीन रचना,, बधाई आपको निवेदित है।"
Friday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-95
"आद0 तस्दीक अहमद खान जी सादर अभिवादन। विषय को आधार बनाकर बढ़िया ग़ज़ल कही आपने। बेहतरीन अशआर। जिगर को दर्द, निगाहों को अश्क, दिल को ग़ममिलीं वफ़ा में ये सौगात वो भी क्या दिन थे l वो ज़िद ही करते रहे अपने घर को जाने कीमगर रुकी नहीं बरसात वो भी क्या दिन…"
Friday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-95
"आद0 टी आर सुकुल जी सादर अभिवादन। विषयान्तर्गत बेहतरीन रचना आदरणीय। जीवन दर्शन को समझते हुए बेहतरीन सृजन। बधाई स्वीकार कीजिये।"
Friday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-95
"आद0 मोहम्मद आरिफ जी सादर अभिवादन। वो भी क्या दिन थे विषय को सार्थक करती उम्दा रचना आपके माध्यम से पढ़ने को मिली। बहुत बहुत बधाई इस सृजन पर। सादर"
Friday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-95
"आद0 रविकर जी इस तरह की दो शब्दों की चलताऊ टिप्पणी ओ बी ओ की परंपरा नहीं रही है। कृपया प्रतिक्रिया देते समय चलताऊ शब्दो से बचें। सादर"
Friday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on TEJ VEER SINGH's blog post अंधा कानून  -  लघुकथा  –
"आद0 तेजवीर जी सादर अभिवादन। मैंने पूर्वाग्रह शब्द इसलिए प्रयोग किया क्योकि ऐसे तमाम कानून हैं जिसके दुरुपयोग की संभावनाएं हैं जबकि आपके लघुकथा में सीधे सीधे "एसटी एससी एक्ट" नाम आया। आप बिना इस नाम को लिए प्रतीकात्मक रूप से भी यह लिख सकते…"
Friday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Mohammed Arif's blog post कविता- हिन्दी है मेरी धड़कन
"आद0 मोहम्मद आरिफ जी सादर अभिवादन। हिंदी दिवस को समर्पित सार्थक रचना। बहुत बहुत बधाई इस प्रस्तुति पर। सादर"
Friday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Mirza Hafiz Baig's blog post सुबह का इंतज़ार (लघुकथा)
"आद0 मिर्ज़ा हाफ़िज़ सादर अभिवादन। बढ़िया लघुकथा लिखी आपने,बधाई स्वीकार कीजिये।"
Friday
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on TEJ VEER SINGH's blog post अंधा कानून  -  लघुकथा  –
"आद0 तेजवीर सिंह जी सादर अभिवादन। एक पूर्वाग्रह को आधार बनाकर आपने यह लघुकथा लिखी है जो अफसोस जनक है। कानून का इस तरह धमकी देकर अगर जॉब मिलती तो आज हर जगह उसी तबके के लोग होते। बहरहाल इस लघुकथा के लिए बधाई"
Friday

Profile Information

Gender
Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a simple leaving man, having hobby to write poems

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s Blog

राखी पर कुछ कुण्डलिया

कच्चे धागों से जुड़ा, रक्षाबंधन पर्व

बहना बाँधे डोर जब, भैया करता गर्व

भैया करता गर्व, नेग बहना को देकर

प्रण जीवन रक्षार्थ, वचन खुश बहना लेकर

रेशम बाँधे प्रीत, सनातन रिश्ते सच्चे

बाँटे खुशी अपार, भले हैं धागे कच्चे।1।

सावन में बदरा घिरे, बहने लगी बयार

प्यार बाँटने आ गया, राखी का त्योहार

राखी का त्योहार, सजीं चहुओर दुकानें

ट्रांजिस्टर पर खूब, बजें राखी के गाने

जात धर्म से दूर, भाव है कितना पावन

बँधे स्नेह की डोर, मास आये…

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Posted on August 26, 2018 at 1:00pm — 19 Comments

श्रमिकों के जीवन पर आधारित मेरे 21 दोहे

कहीं बनाते हैं सड़क, कहीं तोड़ते शैल

करते श्रम वे रात दिन, बन कोल्हू के बैल।1।

नाले देते गन्ध हैं, उसमें इनकी पैठ

हवा प्रवेश न कर सके, पर ये जाएँ बैठ।2।

काम असम्भव बोलना, सम्भव नहीं जनाब

पलक झपकते शैल को, दें मुट्ठी में दाब।3।

चना चबेना साथ ले, थोड़ा और पिसान

निकलें वे परदेश को, पाले कुछ अरमान।4।

सुबह निकलते काम पर, घर से कोसों दूर

भूमि शयन हो शाम को, होकर श्रम से चूर।5।

ईंट जोड़…

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Posted on May 7, 2018 at 5:30pm — 25 Comments

उसकी लाठी आवाज नहीं करती (लघुकथा)

"अरे रमेश ये कैसे हुआ? और बेटे की हालत कैसी है? मुझे तो जैसे ही खबर लगी,भागा-भागा चला आ रहा हूँ"  आई सी यू के बाहर खड़े रमेश से रतन ने पूछा।

रतन को देखते ही रमेश रो पड़ा। फिर अपने को संभालते हुए बोला-"क्या बताऊँ तुम्हें, मेरे घर के पास जो हाई वोल्टेज तार का खम्बा लगा हुआ था, वही कल अचानक गिर गया। और फिर ये…."

बोलते-बोलते वह फफक पड़ा।

रतन ढाँढस देते हुए बोला- "मित्र हिम्मत न हारो। सब कुछ ठीक हो जाएगा। .....डॉक्टर्स क्या कह रहे…

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Posted on March 27, 2018 at 7:44am — 16 Comments

सामाजिक विद्रूपताओं पर एक गीत (वीर रस)

देख दुर्दशा यार वतन की, गीत रुदन के गाता हूँ

कलम चलाकर कागज पर मैं, अंगारे बरसाता हूँ

कवि मंचीय नहीं मैं यारों, नहीं सुरों का ज्ञाता हूँ

पर जब दिल में उमड़े पीड़ा, रोक न उसको पाता हूँ

काव्य व्यंजना मै ना जानूँ, गवई अपनी भाषा है

सदा सत्य ही बात लिखूँ मैं, इतनी ही अभिलाषा है

आजादी जो हमे मिली है, वह इक जिम्मेदारी है

कलम सहारे उसे निभाऊं, ऐसी सोच हमारी है

काल प्रबल की घोर गर्जना, लो फिर मैं ठुकराता हूँ

देख…

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Posted on February 11, 2018 at 6:18am — 9 Comments

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At 7:39pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी ग़ज़ल "हाथ से सारे फिसल गए" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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"आदरणीय सुशील सरना जी उम्दा भाव के साथ बेहतरीन सृजन …"
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