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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
  • Male
  • वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • India
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sushil Sarna's blog post बारिश पर चंद दोहे :
"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। अच्छे दोहे सृजित हुए हैं। बधाई स्वीकार कीजिये"
Jun 28
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on TEJ VEER SINGH's blog post पिता (लघुकथा)
"आद0 तेजवीर सिंह जी सादर अभिवादन। बहुत मार्मिक और यथार्थपूर्ण लघुकथा लिखी है आपने। बधाई स्वीकार कीजिये"
Jun 28
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sushil Sarna's blog post आँखों के सावन में ......
"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। हर बार की तरह एक भावपूर्ण रचना पर बधाई स्वीकार कीजिये। सादर"
Jun 28
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on PHOOL SINGH's blog post वीरांगना झलकारी देवी
"आद0 फूल सिंह जी सादर अभिवादन। अच्छी प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार कीजिये"
Jun 28
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post रोज़ देता हूँ बद-दुआ तुमको
"आद0 रूपम कुमार मीत जी सादर अभिवादन। आपकी ग़ज़ल के हवाले इतनी अच्छी चर्चा हुई। आदर0 समर साहब, आद0 रवि भसीन साहब का बहुत बहुत शुक्रिया। आपको बधाई"
Jun 28
pratibha pande commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post गीत- मैं पुरुष हूँ! मात्र इस हित, मत करो अपमान मेरा
"वाह ... बहुत प्रवाहमयी  और प्रभावशाली रचना पुरुष के पक्ष में। हार्दिक बधाई आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह जी"
Jun 22
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' posted a blog post

गीत- मैं पुरुष हूँ! मात्र इस हित, मत करो अपमान मेरा

भूल कर सब प्रेम करुणा त्याग तप बलिदान मेरा मैं पुरुष हूँ! मात्र इस हित, मत करो अपमान मेराराम सा आदर्श मानव औ' भरत सा भ्रात मैं हूँ दुश्मनों के वक्ष पर करता रहा आघात मैं हूँ मैं प्रतिज्ञा भीष्म की हूँ, मैं युधिष्ठिर धर्मकारी पार्थ का गांडीव मैं हूँ, मैं सुदर्शन चक्र-धारी शौर्य है श्रृंगार मेरा, रण-विजय ही गान मेरा मैं पुरुष हूँ! मात्र इस हित, मत करो अपमान मेरा।।भूमिका मेरी यहाँ बेटा, पिता, पति, भ्रात की है माप रखता जो हमेशा अनकही हर बात की है दीप हूँ मां-बाप का मैं, गर्व का आधार भी हूँ आँधियों…See More
Jun 18
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post ग़ज़ल (वही मंज़र है और मैं) - शाहिद फ़िरोज़पुरी
"आद0 रवि भसीन शाहिद जी सादर अभिवादन। आप लोग जीवन के हर फलसफे को जिस तरह अशआर के रूप में ढाल कर लाते हैं कि मन मुग्ध हो जाता है। बहुत बहुत बधाई इस ग़ज़ल पर। हर शैर अपने आप में मुकम्मल"
Jun 18
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post परिंदा तिफ़्ल हो उसके भी पर तो रहते हैं(११० )
"आद0 गिरधर सिंह गहलोत जी सादर अभिवादन। पहले तो उम्दा ग़ज़ल के लिए बधाई। बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही आपने। दूसरी बात आपकी ग़ज़ल के हवाले से जो सीखने को मिला वह भी हम जैसे के लिए बहुत लाभकारी है।"
Jun 18
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post गीत- मैं पुरुष हूँ! मात्र इस हित, मत करो अपमान मेरा
"आद0 आशीष यादव जी सादर अभिवादन। सच कहा आपने। और एक बात बता दूँ। जितनी बारीकी से आद0 समर साहब किसी रचना का अवलोकन करते हैं, वैसे बहुत ही कम जन होते हैं। इसीलिए जब तक उनकी प्रतिक्रिया नहीं आ जाती, तब तक सुकून नहीं मिलता। आभार आपका।"
Jun 18
आशीष यादव commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post गीत- मैं पुरुष हूँ! मात्र इस हित, मत करो अपमान मेरा
"बहुत अच्छी रचना लगी। कुछ व्याकरण सम्बन्धी त्रुटियाँ हैं जिन पर आदरणीय श्री समर कबीर साहब ने ध्यान दिला दिया है। इस मंच की यही ख़ासियत है कि सदैव सीखने को मिलता है, वह चाहे खुद की रचना हो या दूसरों की। इस सुंदर गीत पर आपको बधाई एवं श्री समर कबीर साहब…"
Jun 17
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post गीत- मैं पुरुष हूँ! मात्र इस हित, मत करो अपमान मेरा
"आद0 समर कबीर साहब सादर प्रणाम। आपकी उपस्थिति किसी रचना पर पुरस्कार से कम नहीं होती। आपकी इस्लाह पर ध्यान रखते हुए कुछ सुधार करता हूँ। बहुत बहुत आभार आपका"
Jun 16
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post गीत (सरसी छंद में )
"आद0 गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन वाह वाह वाह वाह,, बहुत बेहतरीन और उम्दा सृजन हुआ है आदरणीय। बधाई स्वीकार कीजिये"
Jun 16
Samar kabeer commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post गीत- मैं पुरुष हूँ! मात्र इस हित, मत करो अपमान मेरा
"जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,गीत का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । कुछ बातें आपको बताना चाहूँगा । 'मोल रखता जो हमेशा अनकही हर बात की है' इस पंक्ति में 'मोल' शब्द पुल्लिंग है,इस हिसाब से इस पर ग़ौर करें । 'लाडली…"
Jun 16
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post गीत (सरसी छंद में )
"आद0 गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी सादर अभिवादन वाह वाह वाह वाह,, बहुत बेहतरीन और उम्दा सृजन हुआ है आदरणीय। बधाई स्वीकार कीजिये"
Jun 16
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on आशीष यादव's blog post यह प्रणय निवेदित है तुमको
"आद0 आशीष यादव जी सादर अभिवादन बेहद खूबसूरत गीत सृजन हुआ है । इस सृजन पर बधाई स्वीकार कीजिये।"
Jun 16

Profile Information

Gender
Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a simple leaving man, having hobby to write poems

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s Blog

गीत- मैं पुरुष हूँ! मात्र इस हित, मत करो अपमान मेरा

भूल कर सब प्रेम करुणा त्याग तप बलिदान मेरा

मैं पुरुष हूँ! मात्र इस हित, मत करो अपमान मेरा

राम सा आदर्श मानव औ' भरत सा भ्रात मैं हूँ

दुश्मनों के वक्ष पर करता रहा आघात मैं हूँ

मैं प्रतिज्ञा भीष्म की हूँ, मैं युधिष्ठिर धर्मकारी

पार्थ का गांडीव मैं हूँ, मैं सुदर्शन चक्र-धारी

शौर्य है श्रृंगार मेरा, रण-विजय ही गान मेरा

मैं पुरुष हूँ! मात्र इस हित, मत करो अपमान मेरा।।

भूमिका मेरी यहाँ बेटा, पिता, पति, भ्रात की है

माप रखता जो हमेशा…

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Posted on June 15, 2020 at 11:30am — 13 Comments

गीत -आचरण आदर्श के गायब हुए, विपदा बड़ी है

क्रोध तम मद-लोभ ईर्ष्या में पड़ा संसार सारा

आचरण आदर्श के गायब हुए, विपदा बड़ी है।।

छोड़ अन्तस का शिवालय भ्रम मनुज लाने चला है

शोर के गहरे तमस में मौन को पाने चला है

पास उसके आत्म दर्पण है नहीं जो राह रोके

जी रहा है वह स्वयं की जिन्दगी में कण्ट बोके

सत्य है नेपथ्य में बस मूर्खता मन में अड़ी है

आचरण आदर्श के गायब हुए, विपदा बड़ी है।।

मस्त सब हैं छोड़कर सिद्धांत सारे सभ्यता के

मन अपाहिज वस्त्र चिथड़े किंतु साधक भव्यता के

जब पलट के…

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Posted on June 12, 2020 at 7:00pm — 4 Comments

ग़ज़ल- हर कोई अनजान सी परछाइयों में क़ैद है

जानकर औक़ात अपनी वो हदों में क़ैद है

हर परिंदा आज अपने घोंंसलों में क़ैद है।।

जीत लेगा मौत को भी आदमी यूँ एक दिन

इस तरह की सोच सबकी हसरतों में क़ैद है।।

क्रोध लालच दम्भ नफ़रत ज़ात मजहब को लिए

हर कोई अनजान सी परछाइयों में क़ैद है।।

कब कहाँ किस को दग़ा दें रहनुमा इस देश के

झूठ मक्कारी तो उनकी आदतों में क़ैद है।।

जिस शजर की छाँव में बारात सजती थी कभी

आज वो वीरान बनके रतजगों में क़ैद है।।

टूट कर ख़ामोश जो…

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Posted on June 5, 2020 at 3:00pm — 15 Comments

कह मुकरियाँ

आकर वह आँचल में सोये

प्रेम दिखाए नैन भिगोये

मेरा है वह आज्ञापालक

क्या सखि साजन? ना सखि बालक।।1

समझो उसको ज्ञान प्रदाता

जो चाहो वह ढूँढ़ के लाता

बहुत चलन में आज और कल

क्या सखि शिक्षक? ना सखि गूगल।।2

नई बहू पर डाले फन्दा

सास ननद को रखे सुनन्दा

हर पत्नी का वो सहजीवी

क्या सखि गहना? ना सखि टीवी।।3

आता है वह स्वेद बहाने

ओंठ छुवन से प्यास बढ़ाने

बरते तनिक नहीं वह नरमी

क्या सखि साजन? ना सखि…

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Posted on May 9, 2020 at 7:00am — 7 Comments

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At 7:03pm on April 11, 2019, Vivek Pandey Dwij said…
आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी आभार आप को इस उत्साह वर्धन के लिए।
At 7:39pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी ग़ज़ल "हाथ से सारे फिसल गए" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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