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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'
  • Male
  • वाराणसी, उत्तर प्रदेश
  • India
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' posted a blog post

तरही गजल (मुहब्बत में अगर कोई कभी बीमार हो जाये)

बह्र 1222 1222 1222 1222कहीं जो खेत में कमबख्त खरपतवार हो जायेजमीं हो लाख उपजाऊ मग़र बेकार हो जायेज़रा सच से अगर जो रूबरू अखबार हो जायेजगे जनता वतन की और सज़ग सरकार हो जायेकोई घर मे अगर जयचंद सा गद्दार हो जायेइरादे हों भले मजबूत फिर भी हार हो जायेदवा भी बेअसर हो वैद्य भी लाचार हो जायेमुहब्बत में अगर कोई कभी बीमार हो जायेकरें सहयोग माँ के साथ जो सब घर के कामों मेंतो फिर उसके लिये भी एक दिन इतवार हो जायेकिसी के हाल पर हँसने से पहले सोच ले नादाँकहीं तू ख़ुद न इन हालात से दो चार हो जायेजमीं और…See More
May 26
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post तरही गजल (मुहब्बत में अगर कोई कभी बीमार हो जाये)
"आद0 आशुतोष जी सादर नमन, आपके हौसला अफजाई के लिए अतिशय आभार। आपका सुझाव उत्तम है"
May 26
Dr Ashutosh Mishra commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post तरही गजल (मुहब्बत में अगर कोई कभी बीमार हो जाये)
"आदरणीय सुरेन्द्र जी इस शानदार प्रस्तुति पर ढेर सारी बधाई स्वीकार करें सादर सही हो जरूरी नहीं पर मन में बिचार उठा तो लिख रहा हूँ कही जो खेत में,,क्या सही नहीं रहेगा"
May 25
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' posted a blog post

तरही गजल (मुहब्बत में अगर कोई कभी बीमार हो जाये)

बह्र 1222 1222 1222 1222कहीं जो खेत में कमबख्त खरपतवार हो जायेजमीं हो लाख उपजाऊ मग़र बेकार हो जायेज़रा सच से अगर जो रूबरू अखबार हो जायेजगे जनता वतन की और सज़ग सरकार हो जायेकोई घर मे अगर जयचंद सा गद्दार हो जायेइरादे हों भले मजबूत फिर भी हार हो जायेदवा भी बेअसर हो वैद्य भी लाचार हो जायेमुहब्बत में अगर कोई कभी बीमार हो जायेकरें सहयोग माँ के साथ जो सब घर के कामों मेंतो फिर उसके लिये भी एक दिन इतवार हो जायेकिसी के हाल पर हँसने से पहले सोच ले नादाँकहीं तू ख़ुद न इन हालात से दो चार हो जायेजमीं और…See More
May 24
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post तरही गजल (मुहब्बत में अगर कोई कभी बीमार हो जाये)
"आद0 बृजेश कुमार जी सादर अभिवादन, ग़ज़ल पर मेरे हौसले को बढ़ाती इस प्रतिक्रिया के लिए आभार।"
May 24
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post तरही गजल (मुहब्बत में अगर कोई कभी बीमार हो जाये)
"आद0 अनुराग वशिष्ट जी सादर अभिवादन, आपकी गहरायी से ग़ज़ल पर शिरकत और हौसला अफजाई के लिए कोटिश आभार। अभी गलती सुधार लेता हूँ। सादर"
May 24
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post तरही गजल (मुहब्बत में अगर कोई कभी बीमार हो जाये)
"वाह आदरणीय सुरेन्द्र जी वाह.. एक से बढ़कर एक शे'र लाजबाब ग़ज़ल हुई..सादर"
May 24
Anuraag Vashishth commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post तरही गजल (मुहब्बत में अगर कोई कभी बीमार हो जाये)
"आ. सुरेन्द्र नाथ जी, खुबसूरत ग़ज़ल हुई है, हार्दिक शुभकामनाये. मतले में 'उपजाऊ' की जगह गलती से 'उपजाऊँ' टाइप हो गया है.   सादर          "
May 24
Gajendra shrotriya commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post तरही गजल (मुहब्बत में अगर कोई कभी बीमार हो जाये)
"आभार सभी प्रबुद्धजनो का कुछ बिंदुओं पर मेरे अवधान को चेतन्य करने के लिए। मैं भी सीखने की प्रक्रिया में हूँ। आदरणीय सुरेन्द्रजी की प्रस्तुत गज़ल अच्छी लगी तो कुछ सुझाव दे दिए। किसी के खूबसूरत अशआर का कबाड़ा करना मेरा मकसद नही था। औपचारिक वाहवाह करना न…"
May 23
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post तरही गजल (मुहब्बत में अगर कोई कभी बीमार हो जाये)
"आद0 भाई नीलेश जी सादर अभिवादन, हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया"
May 23
Nilesh Shevgaonkar commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post तरही गजल (मुहब्बत में अगर कोई कभी बीमार हो जाये)
"आ. सुरेन्द्र नाथ सिंह साहब,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है ...बहुत बहुत   बधाई "
May 23
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post तरही गजल (मुहब्बत में अगर कोई कभी बीमार हो जाये)
"गजेंद्र जी अवाम शुद्द शब्द है न कि आवाम, सादर"
May 23
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post तरही गजल (मुहब्बत में अगर कोई कभी बीमार हो जाये)
"आद0 समर कबीर साहब सादर प्रणाम। आपके उचित मार्गदर्शन और इस्लाह की हम जैसे को हमेशा जरूरत होती है। आप यूँही स्नेह प्यार बनाये रखें। सादर"
May 23
Gajendra shrotriya commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post तरही गजल (मुहब्बत में अगर कोई कभी बीमार हो जाये)
"आदरणीय सुरेन्द्रजी कुछ सुझाव और प्रस्तुत है। हकीकत का नुमाइंदा अगर अखबार हो जाये जगे आवाम सारी होश में सरकार हो जाये दवा नाकाम चारागर बड़ा लाचार हो जाये मुहब्बत के असर से गर कोई बीमार हो जाये"
May 23
Samar kabeer commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post तरही गजल (मुहब्बत में अगर कोई कभी बीमार हो जाये)
"जनाब गजेंद्र जी आदाब,आपके सुझाये मिसरों पर ज़रा ग़ौर कीजिये:- 'हक़ीक़त कहने वाले देश के अख़बार हो जाये जगे आवाम सारी होश में सरकार हो जाये' इसमें 'देश के'शब्द में बहुवचन है,और रदीफ़ 'जाये'है, आपके मिसरे में रदीफ़…"
May 23
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post तरही गजल (मुहब्बत में अगर कोई कभी बीमार हो जाये)
"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन, आपके हौसला अफजाई के लिए कोटिश आभार"
May 23

Profile Information

Gender
Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
I am a simple leaving man, having hobby to write poems

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s Blog

तरही गजल (मुहब्बत में अगर कोई कभी बीमार हो जाये)

बह्र 1222 1222 1222 1222



कहीं जो खेत में कमबख्त खरपतवार हो जाये

जमीं हो लाख उपजाऊ मग़र बेकार हो जाये



ज़रा सच से अगर जो रूबरू अखबार हो जाये

जगे जनता वतन की और सज़ग सरकार हो जाये



कोई घर मे अगर जयचंद सा गद्दार हो जाये

इरादे हों भले मजबूत फिर भी हार हो जाये



दवा भी बेअसर हो वैद्य भी लाचार हो जाये

मुहब्बत में अगर कोई कभी बीमार हो जाये



करें सहयोग माँ के साथ जो सब घर के कामों में

तो फिर उसके लिये भी एक दिन इतवार हो… Continue

Posted on May 22, 2017 at 12:30pm — 21 Comments

तरही ग़ज़ल (कुछ नही है हाथ मे बस फ़लसफ़ा रोशन करें)

बह्र 2122 2122 2122 212



ज़िन्दगी की राह मुश्किल हौसला रोशन करें

हर गली हर रास्ते पर हम दिया रोशन करें ||



ऐ ख़ुदा बर्कत की ख़ातिर भेज दे महमाँ कोई

अपने दस्तर ख़्वान पर हम ये दुआ रोशन करें ||



हुस्न वाले भी निखर जायेंगे मोती की तरह

गर नुमाइश छोड़ कर शर्म-ओ-हया रोशन करें ||



दूसरों से पूछना क्या हर कमी दिख जाएगी

आप अपने दिल का बस ये आइना रोशन करें ||



हैं यहाँ तनहाइयाँ और वक़्त की मजबूरियाँ

कुछ नही है हाथ मे बस फ़लसफ़ा… Continue

Posted on May 12, 2017 at 12:00pm — 25 Comments

शाइरी भी यार अब हम क्या करें

बह्र 2122 2122 212



हर जगह नफरत का आलम, क्या करें

ज़ह्र होता ही नही कम क्या करें ||



मौत का सामान ख़ुद इंसाँ हुआ

और जुबाँ उसकी हुई बम क्या करें ||



जो सहारे भाग्य के बैठा रहे

ऐसे का फिर राम गौतम क्या करें ||



कुछ नही अपना यहाँ यह जानकर

*जाने वाले चीज का ग़म क्या करें*



वक़्त से कोई बड़ा जब है नही

सर किसी के सामने ख़म क्या करें ||



इस हुनर पर हावी हैं मजबूरियाँ

शाइरी भी यार अब हम क्या करें… Continue

Posted on April 18, 2017 at 4:30am — 11 Comments

निकलना एक दिन है इस मकाँ से

बह्र 1222 1222 122



करो उम्मीद मत यूँ आसमाँ से ||

बिना मिहनत न कुछ मिलता वहाँ से||



उठाते साथ थे छप्पर सभी जब

हटा विश्वास क्यूँ फिर दरमियाँ से ||



कफ़न सर से कहाँ वो बाँधते हैं

मुहब्बत है जिन्हें अपनी ही जाँ से ||



जहन्नम से नही कम होती दुनिया

कोई भी गर नही जाता जहाँ से ||



कमी क्या रह गई इस ज़िन्दगी में?

दुआएँ मिल गई गर बाप माँ से ||



निकल कर अश्क वो कहते हैं अक्सर

जिसे कोई न कह पाये जुबाँ से… Continue

Posted on March 29, 2017 at 4:03pm — 22 Comments

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At 7:39pm on November 20, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी ग़ज़ल "हाथ से सारे फिसल गए" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

 
 
 

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