For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Vivek Pandey Dwij
Share on Facebook MySpace
 

Vivek Pandey Dwij's Page

Latest Activity

Vivek Pandey Dwij replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"आदरणीय सतविंद्र राणा जी आपको बहुत बहुत धन्यवाद।"
Jun 13, 2020
Vivek Pandey Dwij replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"अतिसुन्दर रचना भाई सुरेंद्र नाथ सिंह जी"
Jun 13, 2020
Vivek Pandey Dwij replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"सादर आभार आदरणीय सतविंद्र राणा जी।"
Jun 13, 2020
Vivek Pandey Dwij replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-116
"तुकांत कविता। हम और हमारे लोग अरे! देखो किस राह चले जाते।नित करते पान गरल का सब, अभिमान अनल से झुलसाते।। सुंदर वसुधा की क्यारी में,क्या लगा रहे ये भूमि तले।जो पाप पनपता चहु दिश में, धू धू कर अपना देश जले।। अभिमान इन्हें किस बल का है, जब कल को नहीं…"
Jun 13, 2020
नाथ सोनांचली commented on Vivek Pandey Dwij's blog post नव वर्ष गीत
"आद0 विवेक जी सादर अभिवादन। नववर्ष पर अच्छी रचना की कोशिश की है आपने,, बधाई स्वीकार कीजिये।"
Jan 7, 2020
Vivek Pandey Dwij commented on Vivek Pandey Dwij's blog post नव वर्ष गीत
"बहुत बहुत धन्यवाद भाई विजय जी।"
Jan 7, 2020
vijay nikore commented on Vivek Pandey Dwij's blog post नव वर्ष गीत
"रचना अच्छी बनी है। बधाई, मित्र विवेक जी।"
Jan 7, 2020
Vivek Pandey Dwij commented on Vivek Pandey Dwij's blog post नव वर्ष गीत
"आo भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर’बहुत बहुत धन्यवाद "
Jan 3, 2020
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Vivek Pandey Dwij's blog post नव वर्ष गीत
"आ. भाई विवेक जी, सुन्दर गीत हुआ है । हार्दिक बधाई ।"
Jan 3, 2020
Vivek Pandey Dwij commented on Vivek Pandey Dwij's blog post नव वर्ष गीत
"धन्यवाद आशीष जी।"
Jan 2, 2020
आशीष यादव commented on Vivek Pandey Dwij's blog post नव वर्ष गीत
"बहुत अच्छी कृति। हार्दिक बधाई।"
Jan 2, 2020
Vivek Pandey Dwij posted a blog post

नव वर्ष गीत

हुआ है उजाला धरा पर नया अब। मिटा घन अँधेरा छटा ये धुआँ सब। नया साल आया नई आस लाया। करो काम दिल से न जो भी हुआ सब।।रहे जग हमेसा ख़ुशी की सफ़र पे। न काटें मिले अब किसी की डगर पे। करो प्यार सबसे की जीवन है प्यारा। न कीचड़ उछालो हमारे नगर पे।।गया दिन पुराना नया साल देखो। चमकते हुए देश का भला देखो। हिंसा के रथ पर कहाँ तक चलोगे। चला जो न माना ज़रा हाल देखो।।नया प्रात है ये इसे सब सवारें। ख़ुशी का समय है ख़ुशी से गुज़ारे। मिले जो उसे द्विज गले से लगा लो। नहीं बस लगाओ कि नव वर्ष नारे।।मौलिक व अप्रकाशित।See More
Jan 2, 2020
Vivek Pandey Dwij replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"द्वितीय प्रस्तुति (कवित्त छंद) दिल से भला है यहाँ जो भी इंसान आज,नर वो नहीं यह पे देवता के जैसे हैं।दूसरों के सुख में जिसे है सुख मिलता,आदमी जहाँ में बस शेष कुछ ऐसे हैं।चर व अचर यहाँ जो भी हमें दिखता है,रचा है विधाता ने ये स्वर्ग यहाँ कैसे हैं।दिल…"
Nov 10, 2019
Vivek Pandey Dwij replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"प्रथम प्रस्तुति (दोहा छंद) करता हूँ आराधना, दिल से प्रभु मैं आजज्ञान सिन्धु बस चाहिये, नहीं चाहिये ताज।। देख जगत व्यवहार को, दिल से निकले आहमानव दिल पत्थर हुआ, उपजे दिल में डाह।। हर जीवन है एक सा, इसको समझो यार'वसुधा एव कुटुम्ब' है,…"
Nov 10, 2019
Vivek Pandey Dwij replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-109
"आo सुरेंद्र सिंह कुशक्षत्रप जी इस सुंदर रचना के लिये बधाई स्वीकार करें।"
Nov 9, 2019
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Vivek Pandey Dwij's blog post मजदूर पर दोहे
"आ. विवेक जी, मज़दूर की समस्याओं पर अच्छे दोहे रचे हैं। हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Nov 8, 2019

Profile Information

Gender
Male
City State
Varanasi
Native Place
Varanasi
Profession
Teacher
About me
Writing is my hobby

Vivek Pandey Dwij's Blog

नव वर्ष गीत

हुआ है उजाला धरा पर नया अब। 

मिटा घन अँधेरा छटा ये धुआँ सब। 

नया साल आया नई आस लाया। 

करो काम दिल से न जो भी हुआ सब।।
रहे जग हमेसा ख़ुशी की सफ़र पे। 

न काटें मिले अब किसी की डगर पे। 

करो प्यार सबसे की जीवन है प्यारा। 

न कीचड़ उछालो हमारे नगर…
Continue

Posted on January 1, 2020 at 9:00pm — 7 Comments

मजदूर पर दोहे

कहने को मजदूर पर, नहीं आज मजबूर।

अपनी ताकत से सदा, करे दुखों को दूर।।

काम करे डटकर सदा, नहीं कभी आराम।

इसके श्रम से ही बने, महल अटारी धाम

जंगल या तालाब हो, रुके न फिर भी पाँव।

करता श्रम दिन-रात वो, देखे धूप न छाँव।।

कंकड़ पत्थर जोड़कर, देता उसको रूप।

निज तन चिंता छोड़कर, खाता दिन भर धूप।।

राह बनाता वो यहाँ, दुष्कर गिरि को काट।

अपने भुजबल से करे, सुंदर सरल ये बाट।।

मन निर्मल है तन कड़ा, लौह बना है…

Continue

Posted on November 3, 2019 at 4:11pm — 7 Comments

पर्यावरण पर कुंडलिया

यारो! किस ये राह पर, चला आज इंसान

वृक्ष हीन धरती किया, कहा इसे विज्ञान

कहा इसे विज्ञान, नहीं कुछ ज्ञान लगाया

सूखा बाढ़ अकाल, मूढ़ क्यूँ समझ न पाया

कह विवेक कविराय, नहीं खुद को यूँ मारो

निशदिन बढ़ता ताप, इसे अब समझो यारो।।1

 अभिलाषा प्रारम्भ है, मृगतृष्णा का यार

अंधी दौड़ विकास की, हुई जगत पे भार

हुई जगत पे भार, मस्त फिर भी है मानव

हर कोई है त्रस्त, विकास लगे अब दानव

कह विवेक कविराय, प्रकृति की समझो भाषा

पर्वत नदियाँ झील, नष्ट करती…

Continue

Posted on June 15, 2019 at 9:46am

'आम चुनाव और नेता'

आल्हा छंद (16, 15 अंत में गुरु लघु)

लोकतंत्र के महापर्व में, हुए सभी नेता तैयार

शब्द बाण से वार करें वे, छोड़ छाड़ के शिष्टाचार।।

युध्द भूमि सा लगता भारत, जहाँ मचा है हाहाकार

येन केन पाने को सत्ता, अपशब्दों की हो बौछार।।

खून करें वे लोकतंत्र का, जुमले हैं इनके हथियार

हित जनता का भूल गए वे, ऐसा इनका है आचार

हे जन मन तुम जाग उठो अब, व्यर्थ न जाये यह त्योहार

ऐसा कुछ इस बार करो तुम, राजनीति बदले आकार ।।

रंग बराबर बदलें ऐसे,…

Continue

Posted on April 13, 2019 at 8:27am — 6 Comments

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 5:26pm on May 17, 2025, Erica said…

I need to have a word privately,Could you please get back to me on ( mrs.ericaw1@gmail.com)Thanks.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आ. भाई सुशील जी , सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहा मुक्तक रचित हुए हैं। हार्दिक बधाई। "
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय अजय गुप्ताअजेय जी, रूपमाला छंद में निबद्ध आपकी रचना का स्वागत है। आपने आम पाठक के लिए विधान…"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी ।सृजन समृद्ध हुआ…"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । आपका संशय और सुझाव उत्तम है । इसके लिए…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आयोजन में आपकी दूसरी प्रस्तुति का स्वागत है। हर दोहा आरंभ-अंत की…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आपने दोहा मुक्तक के माध्यम से शीर्षक को क्या ही खूब निभाया है ! एक-एक…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता…See More
Sunday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"अंत या आरंभ  --------------- ऋषि-मुनि, दरवेश ज्ञानी, कह गए सब संतहो गया आरंभ जिसका, है अटल…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा पंचक  . . . आरम्भ/अंत अंत सदा  आरम्भ का, देता कष्ट  अनेक ।हरती यही विडम्बना ,…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा मुक्तक. . . . . आदि-अन्त के मध्य में, चलती जीवन रेख ।साँसों के अभिलेख को, देख सके तो देख…"
Saturday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सुशील जी। आप से मिली सराहना बह्त सुखदायक है। आपका हार्दिक आभार।"
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
Jan 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service