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babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"बहुत-बहुत आभार आपका आदरणीय सरजी। "
yesterday
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"जी,बहुत-बहुत धन्यवाद आपका आदरणीय सरजी। "
yesterday
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"शायद।आभार आपका ध्यानाकर्षण के लिए आदरणीय सरजी। "
yesterday
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"बिलकुल सर हुआ। बहुत-बहुत धन्यवाद, दिशा निर्देशित करने के लिए सरजी।"
Saturday
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"सीख और सबक सिखाती विषयांतर्गत सुन्दर रचना।बहुत-बहुत बधाई, दी।"
Saturday
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"बहुत-बहुत आभार, आदरणीया दी!"
Saturday
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-62 (विषय: मर्यादा)
"मर्यादा प्लेटफॉर्म पर रेलगाङी पर चढने की अफरा-तफरी मची हुई थी।यकायक भागती भीड़ किसी बच्चे के रोने की आवाज के ध्यानाकर्षण से उसी तरफ ठिठक गई।चिरनिद्रा में लेटी बेजान महिला पर पङी चादर को माँ का ऑचल समझ तीन साल का बच्चा खींचकर रो रहा था।शायद तपती…"
Friday
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-115
"बेहतरीन रचना! "
May 10
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-115
"बेहतरीन पंक्तियाँ! "
May 10
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-115
"बेहतरीन रचना। "
May 10
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-115
"बहुत ही मार्मिक रचना!"
May 10
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-115
"बेहतरीन रचना! "
May 10
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-115
"बेहतरीन पंक्तियाँ! "
May 10
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-115
"बहुत-बहुत धन्यवाद! सरजी। "
May 10
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-115
"बहुत-बहुत धन्यवाद! आदरणीय सरजी। "
May 10
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-115
"बहुत-बहुत धन्यवाद! आदरणीय सरजी। "
May 10

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At 11:36pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीया बबिता गुप्ता जी बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने का

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फूल

फूल-सी सुकोमल,सुकुमारी

कौन-सा फूल तेरी बगिया की

न्यारी-प्यारी माँ-बाबा की दुलारी

मुस्कराती ,बाबा फूले ना समाते

फूल-से झङते माँ होले-से कहती

पर दादी झिङकती-फूल कोई-सा होवे

पर सिर पर ना ,चरणों में चढाये जावे

उस समय कोमल मन को समझ ना आई

जब किसी के घर गुलदान की शोभा बनी

तब बात समझ आई

नकारा,छटपटाई,महकना चाहती थी

टूटकर अस्तित्वहीन नहीं होना था

पर असफल रही,दल-दल छितर-बितर गया

सोचती,मैं फूल तो हूँ

चंपा,चमेली,चांदनी,पारिजात नहीं

गुलाब…

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Posted on April 21, 2020 at 4:32pm

जीवन का कर्फ्यू

जीवन का कर्फ्यू

रोजमर्रा की तरह टहलते हुये रामलाल उद्यान में गोपाल से मिला तो उसके चेहरे की झाईयां से झलकती खुशी कुछ और ही बयां कर रही थी।इससे पहले मैं कुछ पूछता कि उसने कहा, 'यार,कल जैसा दिन गुजारे जमाना हो गया।'

'पर यार कल तो कर्फ्यू लगा था।न किसी से मिलना-जुलना हुआ।कितना बोरियत भरा दिन था?'

'तेरे लिए था।पर इसने मेरी जिन्दगी के कर्फ्यू को हटा दिया।'

'कुछ समझा नही?'प्रश्न भरी निगाह से रामलाल ने गोपाल की तरफ देखकर कहा।

गोपाल ने पास पङी बेंच पर उससे बैठने का इशारा…

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Posted on March 22, 2020 at 11:33pm — 2 Comments

परिचय [लघु कथा ]

परिचय

मेला प्रांगण में आयोजित बारहवाँ साहित्य सम्मेलन में देशभर के साहित्यकारों का जमावड़ा लगा हुआ था,जिसमें माननीय राज्यपाल के करकमलों से पुस्तक का विमोचन किया जाना था.

आगंतुकों में शहर के प्रतिष्ठित,मनोहर बाबू भी विशिष्ठजन की पंक्ति मंं विराजमान थे.शीघ्र ही मंच पर राज्यपाल की उपस्थित से सन्नाटा खिंच गया.औपचारिकताओं के पश्चात,जिस लेखक की किताब ‘मेरा परिचय’का अनुमोदन किया जाना था,उसे संबोधित कर मंच पर आने का आग्रह किया गया.तो सभी की उत्सुकता में एकटक निगाहें मंचासीन होने वाले के…

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Posted on March 4, 2019 at 10:45pm — 7 Comments

तपस्या [लघु कथा ]

तपस्या     

राशि  को एकटक सास-श्वसुर की फोटो देख,रोमिल के झकझोरने पर,सपने से जागी,कहने लगी,‘मेरी तपस्या पूरी हुई.’

'मुझे पाकर,अब कौन-सी तपस्या?'प्रश्नभरी निगाहों से,देखकर बोला.

झेप गई,,फिर संभलते हुए बोली,'हां,लेकिन मम्मी-पापा की बहू,दिल से अपनाने की तपस्या.' 

सुनकर,खुशी में,हाथ पकड़कर बोला,'पर,तुम्हें.... कैसे..........?'

चेहरे पर बनते-बिगड़ते भावों से,लगा,जैसे उसे स्वर्ग मिल गया,‘आज तड़के सुबह,फोन पर मम्मी ने पहली बार बात…

Continue

Posted on March 3, 2019 at 4:51pm — 8 Comments

 
 
 

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