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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on babitagupta's blog post शास्त्री जी
"आ. बबीता बहन सादर अभिवादन। कर्मठ सज्जन एवं श्रेष्ठ नेता शास्त्री जी पर बेहतरीन लिखा है । हार्दिक बधाई।"
Oct 10
TEJ VEER SINGH commented on babitagupta's blog post शास्त्री जी
"लाजवाब प्रस्तुति। बेहद मेहनती, सत्य वादी, देश भक्त, शांति प्रिय, सही मायने मैं भारत के सपूत।नाम के अनुरूप काम।"
Oct 7
Dr. Vijai Shanker commented on babitagupta's blog post शास्त्री जी
"आदरणीय बबीता गुप्ता जी , बहुत ही उत्तम एवं सराहनीय लेख , बधाई। श्री लाल बहादुर शास्त्री जी निसंदेह एक योग्य , कुशल एवं अपने दायित्यों के समर्पित , एक पूर्ण रूप से ईमानदार राजनेता एवं प्रधानमंत्री के पद तक पहुंचने वाले अपने इन्हीं गुणों के कारण जाने…"
Oct 6
babitagupta posted a blog post

शास्त्री जी

अगर राष्ट्रपिता के नाम से महात्मा गांधी को याद किया जाता है वही उजास की लकीर बिखेरने। वाले नैतिक मूल्यों को स्थापित करने में शास्त्री जी को याद किया जाता है। संपूर्ण भारतीयता का उदाहरण शास्त्री जी के विषय में राम मनोहर लोहिया जी ने कहा था कि भारतीयता को जो तीन कसौटियाँ भाषा भूसा और भवन बांधी थी, शास्त्री जी उसका स्पष्ट प्रतिबिंब हैं। सादगी प्रिय शास्त्री जी करूणामयी अग्रगामी सोच वाले ऐसे दार्शनिक प्रधानमंत्री थे जिनके संस्कार व नैतिकता व्यक्तिवाद और परिवारवाद से परे थी। अपने पद व प्रतिष्ठा से…See More
Oct 2
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-78 (विषय: 'विजय)
"बहुत-बहुत धन्यवाद, सर"
Sep 29
babitagupta replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-78 (विषय: 'विजय)
"मैं हारी नहीं हूँ.....मानवता को शर्मसार करते दुर्व्यवहार से बिन पानी की मछली की तरह तड़पती तीन महीने जीवन-मौत के संघर्ष मे न्याय की गुहार लगाती  सुकन्या ने दम तोड़ दिया। सुकन्या के मां-बाप को जांच-पड़ताल में बेशर्मी भरी बातें बर्दाश्त से बाहर…"
Sep 29

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on babitagupta's blog post विश्व पटल पर हिन्दी का परचम लहराया
"आदरणीया बबिता जी, आपके आलेख को एक बार में पढ़ गया. इस प्रयास के लिए बधाई.  लेकिन कुछ सुझाव आवश्यक है कि साझा करूँ.  सर्वप्रथम तो जिस विषय में आप लेख लिख रही हैं, उसका प्रस्तुतीकरण स्पष्ट तथा संप्रेषणीय हो. आप अपने आलेख को अभी देख कर उचित…"
Sep 23
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on babitagupta's blog post विश्व पटल पर हिन्दी का परचम लहराया
"मुहतरमा बबीता जी, हिन्दी दिवस के अवसर पर अच्छा लेख प्रस्तुत किया है आपने, बधाई स्वीकार करें।  सादर। "
Sep 14
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on babitagupta's blog post विश्व पटल पर हिन्दी का परचम लहराया
"आ. बबीता बहन, सादर अभिवादन। हिन्दी दिवस पर सारगर्भित आलेख हुआ है । हार्दिक बधाई।"
Sep 14
babitagupta posted a blog post

विश्व पटल पर हिन्दी का परचम लहराया

संप्रभू भाषा हिन्दी भारत की मिट्टी से उपजी है जो किसी की मोहताज नहीं है। इसकी अपनी प्राणवायु, प्राणशक्ति व उदारभाव होने के कारण ये शब्दसंपदा का अनूठा उपहार हैं। 130 करोड़ की आबादी वाले भारत देश में करीब 44% से ज्यादा लोगों द्वारा बोली जाने वाली राष्ट्र भाषा हिन्दी को दुनिया में बोलने वालों का प्रतिशत 18.5% हैं। दुनिया में सबसे अधिक बोली जाने वाली हिन्दी भाषा विश्व की पांच भाषाओं में से एक है।भूतपूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने 2006 में दस जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस की घोषणा की जाने के साथ…See More
Sep 14
Chetan Prakash commented on babitagupta's blog post वक्त से आगे चलने वाली....अमृता प्रीतम
"नमन आदरणीया,  अमृता प्रीतम के साहित्य और  काव्य  का सही चित्रण किया  है, आपने  ! किन्तु उनके जीवन वृत्त  पर  अमिट  छाप  छोड़ने  वाली प्रेरक घटनाओं को कदाचित  आप  छूती तो आलेख …"
Sep 10
Chetan Prakash commented on babitagupta's blog post गुरवै: नमों नमः
"नमस्कार, महोदया, प्रेरक आलेख है, गुरु की महत्व पर  ! लेकिन माननीया आलेख शोध परक विधा है, तथ्य सौ फीसदी सही होने चाहिए! विधवा-विवाह की सर्वप्रथम पैरवी करने वाले और स्त्री-शिक्षा हेतु आंदोलन का बिगुल फूंकने वाले बंगाल में स्वतंत्रता आंदोलन को धार…"
Sep 8
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गुरवै: नमों नमः

अनेकानेक देशो की संस्कृति में शिक्षकों क़े सम्मान में पूरी दुनिया झुकती हैं। भारतीय संस्कृति में जहाँ शिष्य अपने गुरु के पैर धोते हैं वही दक्षिण कोरिया में शिष्यों के पैर शिक्षक घुटने के बल बैठकर धोते हैं। शिक्षक ज़िंदगी की पाठशाला में सबक पढ़ाने- सिखाने और व्यवहारिक जीवन में उतारने वाले,हर अक्षर को शब्द मूल्यो में सार्थक कर कामयाबी की सीढ़ी पार कराते हैं। जीवन जीने की कला सिखाने वाला शिक्षक बच्चे को सामाजिक बनाने में अहम् भूमिका निर्वहन कर आने वाले समाज का निर्माण कर्ता हैं। हालांकि जीवन संघर्ष…See More
Sep 6
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वक्त से आगे चलने वाली....अमृता प्रीतम

पंजाबी साहित्य की प्रथम कवयित्री, निबंधकार, उपन्यासकार, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अमृता प्रीतम का जन्म 31 अगस्त, 1919 गुजरांवाला, पंजाब में हुआ था। अपनी रचनाओं में विभिन्न रूपो मे नारी चित्रण करने वाली अमृता प्रीतम के साहित्य संसार की नारी अपनी स्वतंत्रता के प्रति सजग रह्ती हैं। सामाजिक परंपराओं के जाल को काटकर अपना अस्तित्व गढ़ती हैं। हिंदी भाषा में सरलता, सौंदर्यता से अंतर्मन की भावनाओं को पहुंचाने में कामयाब रहीं। गद्य-पद में समान रूप से ख्याति प्राप्त बहुमुखी प्रतिभा की धनी अमृता प्रीतम…See More
Aug 31

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on babitagupta's blog post सुभद्रा कुमारी चौहान
"सुभद्रा कुमारी चौहान की जीवनी को लेकर सार्थक आलेख हेतु हार्दिक धन्यवाद, आदरणीया बबिता जी"
Aug 22
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Aug 16

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chhattisgarh
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Simplicity

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At 11:36pm on April 13, 2019, dandpani nahak said…
आदरणीया बबिता गुप्ता जी बहुत शुक्रिया हौसला बढ़ने का

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शास्त्री जी

अगर राष्ट्रपिता के नाम से महात्मा गांधी को याद किया जाता है वही उजास की लकीर बिखेरने। वाले नैतिक मूल्यों को स्थापित करने में शास्त्री जी को याद किया जाता है। संपूर्ण भारतीयता का उदाहरण शास्त्री जी के विषय में राम मनोहर लोहिया जी ने कहा था कि भारतीयता को जो तीन कसौटियाँ भाषा भूसा और भवन बांधी थी, शास्त्री जी उसका स्पष्ट प्रतिबिंब हैं। सादगी प्रिय शास्त्री जी करूणामयी अग्रगामी सोच वाले ऐसे दार्शनिक प्रधानमंत्री थे जिनके संस्कार व नैतिकता व्यक्तिवाद और परिवारवाद से परे थी। अपने पद व प्रतिष्ठा…

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Posted on October 2, 2021 at 3:28pm — 3 Comments

विश्व पटल पर हिन्दी का परचम लहराया

संप्रभू भाषा हिन्दी भारत की मिट्टी से उपजी है जो किसी की मोहताज नहीं है। इसकी अपनी प्राणवायु, प्राणशक्ति व उदारभाव होने के कारण ये शब्दसंपदा का अनूठा उपहार हैं। 130 करोड़ की आबादी वाले भारत देश में करीब 44% से ज्यादा लोगों द्वारा बोली जाने वाली राष्ट्र भाषा हिन्दी को दुनिया में बोलने वालों का प्रतिशत 18.5% हैं। दुनिया में सबसे अधिक बोली जाने वाली हिन्दी भाषा विश्व की पांच भाषाओं में से एक है।

भूतपूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने 2006 में दस जनवरी को विश्व हिन्दी…

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Posted on September 14, 2021 at 7:30am — 3 Comments

गुरवै: नमों नमः

अनेकानेक देशो की संस्कृति में शिक्षकों क़े सम्मान में पूरी दुनिया झुकती हैं। भारतीय संस्कृति में जहाँ शिष्य अपने गुरु के पैर धोते हैं वही दक्षिण कोरिया में शिष्यों के पैर शिक्षक घुटने के बल बैठकर धोते हैं। शिक्षक ज़िंदगी की पाठशाला में सबक पढ़ाने- सिखाने और व्यवहारिक जीवन में उतारने वाले,हर अक्षर को शब्द मूल्यो में सार्थक कर कामयाबी की सीढ़ी पार कराते…

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Posted on September 6, 2021 at 1:30pm — 1 Comment

वक्त से आगे चलने वाली....अमृता प्रीतम

पंजाबी साहित्य की प्रथम कवयित्री, निबंधकार, उपन्यासकार, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अमृता प्रीतम का जन्म 31 अगस्त, 1919 गुजरांवाला, पंजाब में हुआ था। अपनी रचनाओं में विभिन्न रूपो मे नारी चित्रण करने वाली अमृता प्रीतम के साहित्य संसार की नारी अपनी स्वतंत्रता के प्रति सजग रह्ती हैं। 

सामाजिक परंपराओं के जाल को काटकर अपना अस्तित्व गढ़ती हैं। हिंदी भाषा में सरलता, सौंदर्यता से अंतर्मन की भावनाओं को पहुंचाने में कामयाब रहीं। गद्य-पद में समान रूप से ख्याति प्राप्त बहुमुखी प्रतिभा की धनी…

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Posted on August 31, 2021 at 1:30pm — 1 Comment

 
 
 

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