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babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-97
"अंतिम चार पंक्तियाँ सटीक,हार्दिक बधाई आदरणीय दयाराम सरजी।"
Saturday
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-97
"ऊपर की पाँचों की पंक्तियाँ बहुत ही सटीक,बेहतरीन रचना के लिए हार्दिक बधाई,आदरणीय सतविंदर सरजी।"
Saturday
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-97
"बहुत ही सार्थक पंक्तियाँ,सरहद रक्षकों के कारण ही देशवासी चैन से दीवाली मनाते हैं.हार्दिक बधाई आदरणीय चौथमल सरजी।"
Saturday
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-97
"अंतिम पंक्तियाँ संदेश देती,बेहतरीन रचना,हार्दिक बधाई आदरणीय गंगाधर सरजी।"
Saturday
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-97
"अंतिम दो पंक्तियाँ सार्थक संदेश देती,बेहतरीन रचना के लिए हार्दिक बधाई ,आदरणीय सत्य नारायण सरजी।"
Saturday
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-97
"वास्तव में सही मायने में आज इसी तरह की दीवाली मनाने की बहुत ही जरूरत हैं.हार्दिक बधाई आदरणीय अखिलेश सरजी,बेहतरीन रचना के लिए."
Saturday
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-97
"अंतिम पंक्तियाँ संदेश व प्रेरणा देती।बेहतरीन रचना,हार्दिक बधाई आदरणीया नीलम दी."
Saturday
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-97
"सराहना एवं सुझाव के लिए आभार समर सरजी।"
Saturday
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-97
"आभार अखिलेश सरजी।"
Saturday
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"आभार शेख सरजी।"
Saturday
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-97
"आभार अहमद सरजी।"
Saturday
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"आभार छोटेलाल सरजी।"
Saturday
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-97
"आभार सत्यनारायण सरजी."
Saturday
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"आभार नीलम दी."
Saturday
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-97
"सदियां बदली, दीपक का स्वरूप बदलापर वही पुरातन प्रकाश, वहीं उजालालरजता, झुलसता, दीप्तिमान होकर संदेश देताकालिख से बुरे समय में लडते रहने का हौसला देतादीप्तिमान सरगम की दीपमाला, तान छेड, तम मिटा , अंधेरा मिटातीएक आस बांधती, संभावना अवरूद्ध न होज्योत…"
Nov 9
babitagupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-97
"बेहतरीन क्षणिकाओं में दूसरी क्षणिका मानवीयता पर कटाक्ष करती, हार्दिक बधाई आदरणीय सुकुल सरजी।"
Nov 9

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Gender
Female
City State
chhattisgarh
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Bilaspur
Profession
Retired teacher
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Simplicity

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Babitagupta's Blog

दोस्ती [तुकांत - अतुकांत कविता]

बचपन की यादों का अटूट बंधन 

बिना लेनदेन के चलने वाला 

खूबसूरत रिश्तों का अद्वितीय बंधन 

एक ढर्रे पर चलने वाली जिंदगी में 

नई-नई सोच से रूबरू करवाया 

अर्थहीन जीवन को अर्थ पूर्ण बनाया 

जीने का एक…

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Posted on August 27, 2018 at 8:00pm — 4 Comments

रिश्तों की डोर [लघुकथा]

दरवाजे की घंटी सुन,  दरवाजा मेड शीला ने  खोला तो अपरिचित समझ मुझे आवाज लगाने पर मैं देखने गई तो सामने सलिल भैया और शालिनी भाभी को  देख हतप्रद रह गई.मुझे इस तरह देख,भैया कहने लगे- 'भूल गई क्या ?मैं तुम्हारा भाई .......

मैं अपने को संभालते हुए ,उन्हें  इशारे से अंदर आने को कह,कहने लगी- 'अरे नहीं भैया,आपको अचानक इतने सालो बाद देखा ....बस और कुछ नहीं।'

भाभी मेरी मनोस्थिति  समझ भैया को डाटने वाले लहजे में कहा - 'अब ,उसे झिलाना छोडो'।और मुझे रसोई में ले जाकर खाना बनाने में हाथ बटाँने…

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Posted on August 26, 2018 at 9:42pm — 8 Comments

उम्मीदों की मशाल [लघु कथा ]

रामू की माँ तो अपने पति के शव पर पछाड़ खाकर गिरी जा रही थी.रामू कभी अपने छोटे भाई बहिन को संभाल रहा था ,तो कभी अपनी माँ को.अचानक पिता के चले जाने से उसके कंधों पर जिम्मेदारियों का बोझ आ पड़ा था.

पढ़ाई छोड़,घर में चूल्हा जलाने के वास्ते रामू काम की तलाश में सड़को की छान मारता।अंततःउसने घर-घर जाकर रद्दी बेचने का काम पकड़ लिया।रद्दी में मिलती किताबों को देख उसके अंदर का किताबी कीड़ा जाग उठा.किताबे बचाकर,बाकी रद्दी बेच देता।और रात में लालटेन में अपने पढ़ने की भूख को  तृप्त करता।

समय बीतता…

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Posted on August 1, 2018 at 7:00pm — 4 Comments

मैं और मेरे गुरु [कविता]

क्षण-प्रतिक्षण,जिंदगी सीखने का नाम  

सबक जरूरी नहीं,गुरु ही सिखाए

जिससे शिक्षा मिले वही गुरु कहलाये 

जीवंत पर्यन्त गुरुओं से रहता सरोकार 

हमेशा करना चाहिए जिनका आदर-सत्कार 

प्रथम पाठशाला की गुरु माँ बनी …

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Posted on July 27, 2018 at 1:00pm — 2 Comments

 
 
 

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"बहुत बहुत शुक्रिया जनाब डॉ छोटेलाल सिंह साहब। खुशी हुई आपसे मिलकर।"
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