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Tasdiq Ahmed Khan
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Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दोस्तों की महरबानी हो गई )
"मुहतरम जनाब गिरिराज साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ----"
yesterday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दोस्तों की महरबानी हो गई )
"मुहतरम जनाब रवि साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ----"
yesterday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दोस्तों की महरबानी हो गई )
"आदरणीय तस्दीक भाई , बेहतरीन गज़ल कही है , सभी अशआर खूब कहे हैं ... हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें ।"
yesterday
Ravi Shukla commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दोस्तों की महरबानी हो गई )
"आदरणीय तस्‍दीक साहब बहुत अच्‍छी अौर असरदारगजल कहीं आपने बहुत बहुत मुबारक बाद आपको इस गजल के लिये । सादर"
Tuesday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (निगाहों से आँसू निकलते रहे )
"मुहतरम जनाब मोहित साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया , महरबानी ---"
Monday
Mohit mukt commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (निगाहों से आँसू निकलते रहे )
" आदरणीय  Tasdiq Ahmed Khan बहुत सुन्दर ग़ज़ल प्रस्तुत की है आपने हार्दिक बधाई"
Monday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (निगाहों से आँसू निकलते रहे )
"मुहतरम जनाब सत्विन्दर कुमार साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी --"
Monday
सतविन्द्र कुमार commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (निगाहों से आँसू निकलते रहे )
"आदरणीय तस्दीक अहमद खां जी,बेहतरीन अशआर हुए हैं,हार्दिक बधाई"
Sunday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Rahila's blog post फटी बिवाई(लघुकथा)राहिला
"मुह्तरमा राहिला साहिबा , आपकी लघु कथा अच्छा संदेश दे रही है , मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ --"
Sunday
Tasdiq Ahmed Khan commented on सतविन्द्र कुमार's blog post ज़ुबाँ पे सख्त पहरा हो रहा है(गजल)/सतविन्द्र कुमार राणा
"मुहतरम जनाब सत्विन्दर कुमार साहिब , अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ --"
Sunday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दोस्तों की महरबानी हो गई )
"मुहतरम जनाब आरिफ़ साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाइ का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी ---"
Sunday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Sushil Sarna's blog post यादें......
"मुहतरम जनाब सुशील सरना साहिब , यादों की अच्छी मंज़र काशी करती हुई सुंदर रचना के लिए मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ---"
Sunday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post दशा और दिशा [लघुकथा] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मुहतरम जनाब शेख शहज़ाद उस्मानी साहिब , समाज को आईना दिखती हुई सुंदर लघु कथा के लिए मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ---"
Sunday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post अनिश्चित भविष्य (कविता) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मुहतरम जनाब शेख शहज़ाद उस्मानी साहिब , अच्छा संदेश देती हुई सुंदर लघु कविता के लिए मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ---"
Sunday
Tasdiq Ahmed Khan commented on Sushil Sarna's blog post एक शब्द ....
"मुहतरम जनाब सुशील सरना साहिब , शब्द की बहुत सुंदर ब्याख्या की है आपने रचना में ,अच्छी प्रस्तुति मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ --"
Sunday
Mohammed Arif commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दोस्तों की महरबानी हो गई )
"आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी आदाब, बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल । शेर दर शेर दाद के साथ मुबारक़बाद क़ुबूल कीजिए ।"
Sunday

Profile Information

Gender
Male
City State
Ajmer
Native Place
qannauj
Profession
Govt. servant
About me
i have interest in writing urdu/hindi gazal &geet etc.

Tasdiq Ahmed Khan's Blog

ग़ज़ल (दोस्तों की महरबानी हो गई )

ग़ज़ल (दोस्तों की महरबानी हो गई )

----------------------------------------------

फ़ाईलातुन--फ़ाईलातुन --फाइलुन

यूँ न उनको बदगुमानी हो गई |

दोस्तों की महरबानी हो गई |

भूल बचपन के गये वादे सभी

उनको हासिल क्या जवानी हो गई |

नुकताची को क्या दिखाया आइना

उसकी फ़ितरत पानी पानी हो गई |

यूँ नहीं डूबा है मुफ़लिस फ़िक्र में

उसकी बेटी भी सियानी हो गई |

अजनबी के साथ क्या कोई गया

ख़त्म उलफत की कहानी…

Continue

Posted on March 18, 2017 at 8:48pm — 6 Comments

ग़ज़ल (निगाहों से आँसू निकलते रहे )

ग़ज़ल

-------

(फऊलन -फऊलन -फऊलन -फअल )

क़ियामत की वो चाल चलते रहे |

निगाहें मिलाकर बदलते रहे |

दिखा कर गया इक झलक क्या कोई

मुसलसल ही हम आँख मलते रहे |

यही तो है गम प्यार के नाम पर

हमें ज़िंदगी भर वो छलते रहे |

मिली हार उलफत के आगे उन्हें

जो ज़हरे तअस्सुब उगलते रहे |

तअस्सुब की आँधी है हैरां न यूँ

वफ़ा के दिए सारे जलते रहे |

असर होगा उनपर यही सोच कर

निगाहों से आँसू…

Continue

Posted on March 15, 2017 at 8:51pm — 18 Comments

ग़ज़ल (हसीनों में मुहब्बत ढूंढता है )

(मफ़ाईलुन-मफ़ाईलुन-फऊलॅन)

हसीनों में मुहब्बत ढूंढता है |

ज़मीं पर कोई जन्नत ढूंढता है |

दगा फ़ितरत हसीनों की है लेकिन

कोई इन में मुरव्वत ढूंढता है |

समुंदर से भी गहरी हैं वो आँखें

जहाँ तू अपनी चाहत ढूंढता है |

मिलेगा तुझको असली लुत्फ़ गम में

फरह में क्यूँ लताफत ढूंढता है |

हैं काग़ज़ के मगर हैं खूबसूरत

तू जिन फूलों में नकहत ढूंढता है |

सियासी लोग होते हैं…

Continue

Posted on March 4, 2017 at 9:00pm — 10 Comments

ग़ज़ल( किया है अपनों ने जब किनारा ) --------

ग़ज़ल

--------

(मफ़ाइलातुन--मफ़ाइलातुन)

किया है अपनों ने जब किनारा |

दिया है अग्यार ने सहारा |

करम हुआ दोस्तों का जब से

वफ़ा का गर्दिश में है सितारा |

अगर गिला है तो सिर्फ़ है यह

न दे सके साथ वो हमारा |

हुआ है दीदार जब से उनका

लगे न मंज़र कोई भी प्यारा |

हसीन रुख़ में ज़रूर कुछ है

जो देखे हो जाए वो तुम्हारा |

हो और मज़बूत अपनी यारी

कहाँ ज़माने को है गवारा…

Continue

Posted on February 4, 2017 at 9:42pm — 6 Comments

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At 3:51pm on February 17, 2016, Sushil Sarna said…

आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी,माह के सक्रिय सदस्य के रूप में ओ बी ओ द्वारा चयनित होने पर आपको हार्दिक बधाई। 

At 11:43pm on February 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

तस्दीक अहमद खान जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:11pm on October 22, 2015, Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' said…
आपका इस बज्म में तहेदिल से इस्तक़बाल है......|
At 6:28pm on October 20, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।
 
 
 

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