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Tasdiq Ahmed Khan
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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल ( निकल कर तो आओ कभी रोशनी में )
"आद0 तस्दीक अहमद साहिब, बहुत बेहतरीन ग़ज़ल कही आपने,बहुत बहुत बधाई इस ग़ज़ल पर।"
4 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...धूल की परतें-बृजेश कुमार 'ब्रज
"जनाब ब्रजेश कुमार साहिब , कुहरा और कुहर दोनो शब्द हिन्दी के हैं , कोहरा नाम का कोई शब्द डिक्सनरी में है ही नहीं ---देखिएगा"
11 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on amod srivastav (bindouri)'s blog post मुझे है भला क्या कमी जिंदगी से
"जनाब आमोद बिंदोरी साहिब , ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाए। मतले  का उला मिसरा यूँ करलें --मुझे कोई शिकवा नहीं ज़िन्दगी से  शेर2 , माशुकी कोई शब्द नहीं ,सही शब्द है माशूकी, उसे यूँ करसकते हैं । नहीं है शनासाई महफ़िल में…"
14 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on santosh khirwadkar's blog post तेरे नज़दीक ही हर वक़्त ....”संतोष”
"जनाब संतोष साहिब , सुन्दर ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं । शेर4 में मिसरों में रब्त क़ायम नहीं हो सका , उला मिसरा यूँ करसकते हैं  यह बता मुझको सनम दिल दिया तूने जब से ।"
15 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...धूल की परतें-बृजेश कुमार 'ब्रज
"जनाब ब्रजेश कुमार साहिब , सही शब्द कुहरा (22)  है ।"
15 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on SALIM RAZA REWA's blog post हमने हरिक उम्मीद का पुतला जला दिया- सलीम रज़ा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब , उम्दा ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें।  आखरी शेर में क़ाफ़िया लगा  की जगह लाग  टाइप हो गया है ,देखियेगा"
21 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post मकड़जाल (लघुकथा)
"मुहतर्मा कल्पना साहिबा ,आज कल के हालात पर सुन्दर लघुकथा हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं।"
21 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on TEJ VEER SINGH's blog post लघुकथा - गवाह –
"मुहतरम जनाब तेजवीर साहिब , समाज को आइना दिखाती सुन्दर लघुकथा हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं।"
21 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post अक़्ल पर ताले (लघुकथा)
"जनाब उस्मानी साहिब आदाब ,संदेश देती हुई सुन्दर लघुकथा हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं।"
22 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Mohammed Arif's blog post कविता- बसंत
"मुहतरम जनाब आरिफ़ साहिब ,बसंत ऋतु पर सुन्दर कविता हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं।"
22 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...धूल की परतें-बृजेश कुमार 'ब्रज
"जनाब ब्रजेश कुमार साहिब ,अच्छी ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं। शेर2  का सानी मिसरा बह्र में नहीं है ,उसे यूँ करलें --घना कुहरा है या  हर सू हैं  छा इं  धूल की परतें । शेर5 उला मिसरा ,मगरूरियत कोई शब्द नहीं है ,उसे इस तरह कर…"
23 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on rajesh kumari's blog post मखमल के गद्दों पे गिरगिट सोए हैं (नवगीत 'राज')
"मुहतर्मा राजेश कुमारी साहिबा , आज कल के हालात पर सुन्दर नवगीत हुआ है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें।"
23 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (शिकायत भला हम करें क्या किसी से )
"जनाब सलीम रज़ा साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।"
23 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल ( निकल कर तो आओ कभी रोशनी में )
"जनाब सलीम रज़ा साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।"
23 hours ago
SALIM RAZA REWA commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (शिकायत भला हम करें क्या किसी से )
"जनाब तस्दीक़ साहब, मतला से मक़ता तक ख़ूबसूरत शेर...... वाह क्या कहने मुबारक़बाद क़ुबूल करें."
yesterday
SALIM RAZA REWA commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल ( निकल कर तो आओ कभी रोशनी में )
"जनाब तस्दीक़ साहब, हर एक शेर ख़ूबसूरत वाह क्या कहने मुबारक़बाद क़ुबूल करें."
yesterday

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About me
i have interest in writing urdu/hindi gazal &geet etc.

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ग़ज़ल ( निकल कर तो आओ कभी रोशनी में )

ग़ज़ल ( निकल कर तो आओ कभी रोशनी में )

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(फऊलन-फऊलन-फऊलन-फऊलन)

चलाओ न तीरे नज़र तीरगी में |

निकल कर तो आओ कभी रोशनी में |

कमी दर्दे दिल में तो अब भी नहीं है

मज़ा आ रहा है तुम्हें दिल लगी में |

मेरी ही नहीं है यह सबकी ज़ुबा पर

लुटे क़ाफ़िले सब तेरी रहबरी में |

करूँ फ़ख़्र मैं क्यूँ न क़िस्मत पे अपनी

दिवाना हुआ हूँ तुम्हारी गली में |

यूँ…

Continue

Posted on January 18, 2018 at 9:59pm — 5 Comments

ग़ज़ल (शिकायत भला हम करें क्या किसी से )

ग़ज़ल (शिकायत भला हम करें क्या किसी से )

----------------------------------------------------------

(फऊलन- फऊलन-फऊलन-फऊलन)

चुने हैं ग़मे यार अपनी ख़ुशी से |

शिकायत भला हम करें क्या किसी से |

मिले सिर्फ़ धोके ही अपनों से हम को

वफ़ा अब करेंगे किसी अजनबी से |

खिज़ाओं ख़बरदार उनकी है आमद

सदा फूल खिलते हैं जिनकी हँसी से |

मिला कर नज़र से नज़र यह बताएँ

हुआ दिल ये बर्बाद किस की कमी से |

कभी दोस्तों…

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Posted on January 18, 2018 at 9:33pm — 6 Comments

ग़ज़ल( उठ न जाए क़ियामत नये साल में )

ग़ज़ल( उठ न जाए क़ियामत नये साल में )

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( फाइलुन--फाइलुन--फाइलुन--फाइलुन)

उन पे आई बुलूगत नये साल में |

उठ न जाए क़ियामत नये साल में |

भूल बैठे पुरानी अदावत को वो

देख कर मेरी मिन्नत नये साल में |

बाग़बाने चमन ज़ुल्म से बाज़ आ

वरना होगी बग़ावत नये साल में |

दिल में घर कर नहीं पाएँ शिकवे कभी

डालिए एसी आदत नये साल में |

राह तकता हूँ मुद्दत से…

Continue

Posted on December 31, 2017 at 10:10pm — 22 Comments

ग़ज़ल (यूँ नहीं मैं ने ज़माने से बग़ावत की है )

(फाइलातुन -फइलातुन -फइलातुन -फेलुन)

यूँ नहीं मैं ने ज़माने से बग़ावत की है |

मुझ से उस शोख़ ने बे लौस मुहब्बत की है |

दिल ने मजबूर बहुत कर दिया मुझको वर्ना

मैं ने कब मर्ज़ी से उस शोख़ की हसरत की है |

मुझ से उम्मीद वफ़ा की है उसी को यारो

उम्र भर जिसने मेरे साथ अदावत की है |

रहनुमाई के लिए मैं ने चुना था जिसको

हाए उसने भी मेरे साथ सियासत की है |

सोच लेना वो कोई ग़ैर नहीं अपने हैं

तुमने…

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Posted on December 27, 2017 at 2:00pm — 24 Comments

Comment Wall (6 comments)

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At 5:33pm on January 10, 2018, dandpani nahak said…
आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब आदाब
मैं बहुत आभारी हूँ कि आपने मेरी ग़ज़ल पढ़ी शुक्रिया
मुझमें अभी बहुत कमी है मैं जानता हूँ लेकिन आप जैसे गुणीजनों के सानिध्य में कुछ सीख पाउँगा ऐसी आशा करता हूँ आपका बहुत बहुत आभार और शुक्रिया
At 9:21pm on September 3, 2017, SALIM RAZA REWA said…
जनाब तस्दीक साहब अपना मोबाइल नंबर देने की मेहरबानी करें
At 3:51pm on February 17, 2016, Sushil Sarna said…

आदरणीय तस्दीक अहमद खान जी,माह के सक्रिय सदस्य के रूप में ओ बी ओ द्वारा चयनित होने पर आपको हार्दिक बधाई। 

At 11:43pm on February 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय

तस्दीक अहमद खान जी,
सादर अभिवादन,
यह बताते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है कि ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में विगत माह आपकी सक्रियता को देखते हुए OBO प्रबंधन ने आपको "महीने का सक्रिय सदस्य" (Active Member of the Month) घोषित किया है, बधाई स्वीकार करें | प्रशस्ति पत्र उपलब्ध कराने हेतु कृपया अपना पता एडमिन ओ बी ओ को उनके इ मेल admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध करा दें | ध्यान रहे मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई है |
हम सभी उम्मीद करते है कि आपका सहयोग इसी तरह से पूरे OBO परिवार को सदैव मिलता रहेगा |
सादर ।
आपका
गणेश जी "बागी"
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 9:11pm on October 22, 2015, Ganga Dhar Sharma 'Hindustan' said…
आपका इस बज्म में तहेदिल से इस्तक़बाल है......|
At 6:28pm on October 20, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार में आपका हार्दिक स्वागत है।
 
 
 

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सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल ( निकल कर तो आओ कभी रोशनी में )
"आद0 तस्दीक अहमद साहिब, बहुत बेहतरीन ग़ज़ल कही आपने,बहुत बहुत बधाई इस ग़ज़ल पर।"
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सतविन्द्र कुमार commented on SALIM RAZA REWA's blog post हमने हरिक उम्मीद का पुतला जला दिया- सलीम रज़ा
"वाहः वाहः बहुत खूब अशआर हुए हैं। सादर बधाई"
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SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post हमने हरिक उम्मीद का पुतला जला दिया- सलीम रज़ा
"शुक्रिया मोहित भाई."
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"बहुत बढ़िया सामयिक पेशकश। आपकी लेखनी का यह रूप देख कर बहुत ख़ुशी हासिल हुई। तहे दिल से बहुत-बहुत…"
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"आदरणीय सलीम जी उम्दा ग़ज़ल, बहुत बहुत मुबारकबाद "
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Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता- बसंत
"रचना पर प्रतिक्रिया देकर मान बढ़ाने का बहुत-बहुत आभार आदरणीया राजेश कुमारी जी ।"
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santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post तेरे नज़दीक ही हर वक़्त ....”संतोष”
"धन्यवाद एवं आभार आदरणीय विश्वकर्मा साहब!!"
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Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता- बसंत
"बहुत-बहुत आभार आदरणीत नरेंद्र सिंह जी ।"
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