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Naveen Mani Tripathi
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  • Ajay Tiwari
 

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Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"आ0 गुरुदेव कबीर साहब सादर नमन  सर् यह ग़ज़्बा हिन्द शब्द पाकिस्तान का प्रचलित नारा है । यह आतंकवादियों की पाठ शाला का एक महत्वपूर्ण पाठ है जिसको वह जिहाद से जोड़कर रखते हैं । इस शब्द का मतलब हिन्दुस्तान पर कब्जा करने का ख़्वाब है । इसके दर्शन…"
yesterday
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"जनाब क़मर साहब अच्छी ग़ज़ल हुई दाद हाजिर है ।  ईमान और तरफ इन शब्दों पर गौर कीजियेगा ।  सादर"
yesterday
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"आ0 अच्छी ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई आपको ।"
yesterday
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"आ0 सुरेंद्र नाथ जी अच्छी ग़ज़ल हुई । दाद कबूल हो ।"
yesterday
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"2122 1122 1122  22 किस तरह तेरे हवाले वो दिलो जां कर दें । मन की  बस्ती  को भला कैसे  बियाबां  कर दें ।। तीरगी देखिए  मुद्दत से यहां कायम है । हो सके आप मेरे घर में चरागां कर दें ।। ये शहीदों की अमानत है बचाओ इसको ।…"
yesterday
Naveen Mani Tripathi replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"वाह सर लाजवाब ग़ज़ल हुई । तहेदिल से बहुत बहुत बधाई आपको ।"
yesterday
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

221, 2121, 1221, 212दैरो हरम से दूर वो अंजान ही तो है ।होंगी ही उससे गल्तियां इंसान ही तो है ।।हमको तबाह करके तुझे क्या मिलेगा अब ।आखिर हमारे पास क्या, ईमान ही तो है ।।खुलकर जम्हूरियत ने ये अखबार से कहा ।सारा फसाद आपका उन्वान ही तो है ।।खोने लगा है शह्र का अम्नो सुकून अब ।इंसां सियासतों से परेशान ही तो है ।।उसने तुम्हें हिजाब में रक्खा है रात दिन ।वह भी तुम्हारे हुस्न का दरबान ही तो है ।।देखा नहीं किसी ने कभी मौत की डगर ।कहते हैं लोग रास्ता वीरान ही तो है ।।इक दिन उसे है जाना इसी घर को छोड़ कर…See More
Friday
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

2122 1122 1122 22 जब  मुलाकात में सौ बार  बहाना आया ।। कैसे कह दूँ मैं तुझे प्यार निभाना आया ।।क़ातिले इश्क़ का इल्ज़ाम लगा जब तुम पर । पैरवी करने यहां सारा ज़माना आया ।।आज की शाम तेरी बज़्म में हंगामा है। मुद्दतों बाद जो मौसम ये सुहाना आया ।।रिन्द की तिश्नगी से रूबरू था तू साकी । और इल्जाम है तुझको न पिलाना आया ।।उसकी ख़ामोश मुहब्बत पे है चर्चा इतनी । राज  उल्फ़त  का उसे  कैसे छुपाना ।।गुफ्तगूं  होने  लगी  शह्र  के बाजारों में । मेरे लब पे जो तेरा एक तराना आया ।।इतना…See More
Tuesday
Sushil Sarna commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हिज्र में अश्क़ बह गए इतने ।अब तलक वो नदी तो खारी है ।। वाह बहुत सुंदर भावों की ग़ज़ल पेश की है सर आपने। दिल से बधाई स्वीकार करें।"
Tuesday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 लक्ष्मण धामी साहब हार्दिक आभाव"
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई नवीन जी, सादर हार्दिक बधाई ।"
Mar 15
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 कबीर सर सादर नमन और आभार।"
Mar 12
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब डॉ. नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'सब   बताता   है   नूर   चेहरे   का' इस मिसरे में तनाफ़ुर है,'सब' की जगह "ये" कर लें…"
Mar 12
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

2122 1212 22 दरमियाँ    हुस्न    पर्दा    दारी   है । कैसे    कह   दूँ  के   बेक़रारी   है ।।ऐ  कबूतर  जरा  सँभल   के  उड़ । देखता  अब   तुझे    शिकारी   है ।।कौन  कहता  बहुत  ख़फ़ा  हैं  वो । आना  जाना  तो  उनका   जारी है ।।सब   बताता   है   नूर   चेहरे   का । रात    उसने   कहाँ    गुजारी    है ।।कैसे  कर  लूं  यकीन  मैं  तुम  पर । साफ   नीयत   कहाँ   तुम्हारी  है ।।अब  तलक  होश  में  नहीं  हो तुम । आंख  में   इश्क़   की  खुमारी   है ।।उसकी  किस्मत  को   दाद  देता  हूँ । जुल्फ   जिसने  …See More
Mar 10
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आपने छोटी 'ह'(जिसे उर्दू में 'ह' ख़फ़ी कहते हैं) लिए हैं ,और 'सलाह' और 'निकाह' शब्द के अंत में बड़ी 'ह' लिया जाता है,इसलिए उर्दू में इसकी इजाज़त नहीं है ।"
Mar 8
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 कबीर सर क्षमा कीजियेगा आपके नाम के साथ आदर सूचक शब्द टाइप करने में छूट गया है । "
Mar 7

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

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ग़ज़ल

221, 2121, 1221, 212



दैरो हरम से दूर वो अंजान ही तो है ।

होंगी ही उससे गल्तियां इंसान ही तो है ।।

हमको तबाह करके तुझे क्या मिलेगा अब ।

आखिर हमारे पास क्या, ईमान ही तो है ।।

खुलकर जम्हूरियत ने ये अखबार से कहा ।

सारा फसाद आपका उन्वान ही तो है ।।

खोने लगा है शह्र का अम्नो सुकून अब ।

इंसां सियासतों से परेशान ही तो है ।।

उसने तुम्हें हिजाब में रक्खा है रात दिन ।

वह भी तुम्हारे हुस्न का दरबान ही तो है…

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Posted on March 22, 2019 at 4:39pm

ग़ज़ल

2122 1122 1122 22



जब  मुलाकात में सौ बार  बहाना आया ।।

कैसे कह दूँ मैं तुझे प्यार निभाना आया ।।

क़ातिले इश्क़ का इल्ज़ाम लगा जब तुम पर ।

पैरवी करने यहां सारा ज़माना आया ।।

आज की शाम तेरी बज़्म में हंगामा है।

मुद्दतों बाद जो मौसम ये सुहाना आया ।।…

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Posted on March 19, 2019 at 1:09am

ग़ज़ल

2122 1212 22

दरमियाँ    हुस्न    पर्दा    दारी   है ।

कैसे    कह   दूँ  के   बेक़रारी   है ।।

ऐ  कबूतर  जरा  सँभल   के  उड़ ।

देखता  अब   तुझे    शिकारी   है ।।

कौन  कहता  बहुत  ख़फ़ा  हैं  वो ।

आना  जाना  तो  उनका   जारी है ।।

सब   बताता   है   नूर   चेहरे   का ।

रात    उसने   कहाँ    गुजारी    है ।।

कैसे  कर  लूं …

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Posted on March 10, 2019 at 9:00am — 5 Comments

यह खबर इज़्तिराब की सी है

2122 1212 22



यह ख़बर इज़्तिराब की सी है ।

बात जब इंकलाब की सी है ।।

वह बगावत पे आज उतरेगा ।

उसकी आदत नवाब की सी है ।।

हम सफ़र ढूढना बहुत मुश्किल ।

सोच जब इंतखाब की सी है ।।

देखकर जिसको बेख़ुदी में हूँ ।

उसकी फ़ितरत शराब की सी है ।।

आ रहे रात में सनम शायद ।

रोशनी आफ़ताब की सी है ।।

रोज पढ़ता हूँ उसको शिद्द्त से ।

वो जो मेरी किताब की सी है…

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Posted on March 6, 2019 at 6:55pm

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At 6:32am on August 5, 2018, Kishorekant said…

लाजवाब रचना केलिये आपको बहुत बहुत बधाइयाँ आदरणीय नविनमणी त्रिपाठी जी  ,

At 2:14am on May 8, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें!

 
 
 

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rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"बहुत खूब आद० नवीन मणि जी अच्छी ग़ज़ल कही है बहुत बहुत मुबारकबाद कुबूलें "
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rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"अच्छी ग़ज़ल कही है मुनीश तनहा जी दिल से दाद प्रेषित है "
18 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"मोहतरम तस्दीक साहब आपका बहुत बहुत शुक्रिया नवाज़िश "
18 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"जनाब अनीस शेख़ जी बहुत बहुत शुक्रिया नवाज़िश "
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"आद० मुनीश तनहा जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया नवाज़िश "
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rajesh kumari replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-105
"आद० सुरेन्द्र नाथ भैया आपका दिल से बेहद शुक्रिया नवाज़िश"
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