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Naveen Mani Tripathi
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  • Ajay Tiwari
 

Naveen Mani Tripathi's Page

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बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"एक और खूबसूरत ग़ज़ल आदरणीय..बहुतखूब"
6 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post चश्मा उतार करके वफाओं को देखिए
"खूब ग़ज़ल हुई आदरणीय त्रिपाठी जी.."
6 hours ago
Ram Awadh VIshwakarma commented on Naveen Mani Tripathi's blog post बात दिल मे ही ठहर जाती है
"आदर्णीय त्रिपाठी जी खूबसूरत ग़ज़ल कहने के लिये बधाई। शेर नं 3 और 4 के ऊला मिसरा के बह्र को शायद एक बार पुन: अवलोकन करने की जरूरत है।"
14 hours ago
Rakshita Singh commented on Naveen Mani Tripathi's blog post बात दिल मे ही ठहर जाती है
"आदरणीय नवीन जी नमस्कार, बहुत खूबसूरत गजल, बे अदब हो गयी है याद तेरी - बे सबब दिल में उतर जाती है। मुबारकबाद कुबूल फरमायें। "
16 hours ago
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

बात दिल मे ही ठहर जाती है

2122 1122 22छू के साहिल को लहर जाती है ।रेत नम अश्क़ से कर जाती है ।।सोचता हूँ कि बयाँ कर दूं कुछ ।बात दिल में ही ठहर जाती है ।।याद आने लगे हो जब से तुम ।बेखुदी हद से गुजर जाती है ।।कुछ तो खुशबू फिजां में लाएगी ।जो सबा आपके घर जाती है ।। कितनी ज़ालिम है तेरी पाबन्दी ।यह जुबाँ रोज क़तर जाती है ।।हुस्न को देख लिया है जब से ।तिश्नगी और सवर जाती है।।ढूढिये आप जरा शिद्दत से ।दिल तलक कोई डगर जाती है ।।कर गया जख्म की बातें कोई ।रूह सुनकर ही सिहर जाती है ।।जब भी फिरती हैं निगाहें उसकी ।कोई तकदीर सुधर जाती…See More
22 hours ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 शेख शहज़ाद साहब तहे दिल से शुक्रिया।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हर शे'अर में दो टूक/सटीक/पते की बात कहती बेहतरीन पेशकश के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब नवीन मणि त्रिपाठी साहिब।"
Friday
Mohammed Arif commented on Naveen Mani Tripathi's blog post चश्मा उतार करके वफाओं को देखिए
"कुछ फायदे के वास्ते दहशत पनप रही ।सत्ता में बैठे आप दलालों को देखिए ।। वाह! वाह!!  बहुत ख़ूब ! बहुत ख़ूब !! बहुत ही उम्दा शे'र । सत्ता में बैठे कुछ हरामी देशवासियों को चैन से जीने नहीं दे रहे हैं ।  उम्दा ग़ज़ल के लिए दिली मुबारकबाद क़ुबूल…"
Thursday
Naveen Mani Tripathi posted blog posts
Thursday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - आप दिल में समाने लगे
"सेवार्थ श्री योगराज प्रभाकर जी  आ0 आपकी बेवसाइट में कमी है । मैं हमेशा व्यवस्थित करके भेजता हूँ परंतु पोस्ट होते ही सारे स्पेश खत्म हो जाते हैं और रचना गद्य जैसी दिखने लगती है । कृपया टेक्निकल टीम का सहयोग आपेक्षित है । और किसी वेबसाइट पर ऐसा…"
Tuesday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post मेरा दर्द पता रहता है
"आ0 मो0 आरिफ साहब आभार "
Tuesday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post मेरा दर्द पता रहता है
"आ0 लक्ष्मण धामी साहब शुक्रिया ।"
Tuesday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post मेरा दर्द पता रहता है
"आ0 तस्दीक अहमद खान साहब शुक्रिया ।"
Tuesday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post शायद सनम की आँख से छलकी शराब है ।
"आ0 लक्ष्मण धामी साहब बहुत बहुत शुक्रिया "
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - आप दिल में समाने लगे
"हार्दिक बधाई ।"
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post मेरा दर्द पता रहता है
"आ. भाई नवीन जी , सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
Tuesday

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

बात दिल मे ही ठहर जाती है

2122 1122 22



छू के साहिल को लहर जाती है ।

रेत नम अश्क़ से कर जाती है ।।

सोचता हूँ कि बयाँ कर दूं कुछ ।

बात दिल में ही ठहर जाती है ।।

याद आने लगे हो जब से तुम ।

बेखुदी हद से गुजर जाती है ।।

कुछ तो खुशबू फिजां में लाएगी ।

जो सबा आपके घर जाती है ।।





कितनी ज़ालिम है तेरी पाबन्दी ।

यह जुबाँ रोज क़तर जाती है ।।

हुस्न को देख लिया है जब से ।

तिश्नगी और…

Continue

Posted on February 17, 2018 at 10:52pm — 2 Comments

ग़ज़ल

2211 2211 2211 22

यूँ जिंदगी के वास्ते कुछ कम नहीं है वो ।

किसने कहा है दर्द का मरहम नहीं है वो।।

सूरज जला दे शान से ऐसा भी नहीं है ।

फूलों पे बिखरती हुई शबनम नहीं है वो ।।

बेचेगा पकौड़ा जो पढ़ लिख के चमन में ।

हिन्दोस्तां के मान का परचम नहीं है वो ।।

बेखौफ ही लड़ता है गरीबी के सितम से ।

शायद किसी अखबार में कालम नहीं है वो ।।

मेहनत की कमाई में लगा खून पसीना ।

अब लूटिए…

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Posted on February 15, 2018 at 12:57am — 3 Comments

चश्मा उतार करके वफाओं को देखिए

221 2121 1221 212



पत्थर से चोट खाए निशानों को देखिए ।

बहती हुई ख़िलाफ़ हवाओं को देखिए ।।

आबाद हैं वो आज हवाला के माल पर ।

कश्मीर के गुलाम निज़ामों को देखिए ।।

टूटेगा ख्वाब आपका गज़वा ए हिन्द का ।

वक्ते क़ज़ा पे आप गुनाहों को देखिये ।।

गर देखने का शौक है अपने वतन को आज ।

शरहद पे ज़ह्र बोते इमामों को देखिए ।।

कुछ फायदे के वास्ते दहशत पनप रही ।

सत्ता में…

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Posted on February 14, 2018 at 11:28pm — 2 Comments

ग़ज़ल - आप दिल में समाने लगे

212 212 212



आप फिर याद आने लगे ।

क्या हुआ जो सताने लगे।।

दिल तो था आपके पास ही ।

आप क्यूँ आजमाने लगे ।।

क्या कमी थी मेरे हुस्न में ।

गैर पर दिल लुटाने लगे ।।

रफ्ता रफ्ता नजर से मेरी ।

आप दिल में समाने लगे ।।

क्या हुआ आपको आजकल…

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Posted on February 10, 2018 at 2:44pm — 3 Comments

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At 2:14am on May 8, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

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"एक और खूबसूरत ग़ज़ल आदरणीय..बहुतखूब"
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