For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Naveen Mani Tripathi
Share

Naveen Mani Tripathi's Friends

  • Ajay Tiwari
 

Naveen Mani Tripathi's Page

Latest Activity

Mahendra Kumar commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"बढ़िया ग़ज़ल हुई है आदरणीय नवीन जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए.  1. //दिया था जो वसीयत में तुम्हें वो ।     अभी तक वह खज़ाना चल रहा है ।।// इस शेर के ऊला में "वो" और सानी में "वह" आपस में टकराने के कारण खटक रहे…"
13 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी।लाज़वाब गज़ल। शराफत बिक रही बाज़ार में अब ।शरीफों का बयाना चल रहा है ।।"
18 hours ago
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

1222 1222 122अभी तक आना जाना चल रहा है ।कोई रिश्ता पुराना चल रहा है ।।सुना है शह्र की चर्चा में आगे ।तुम्हारा ही फ़साना चल रहा है ।।इधर दिल पर लगी है चोट गहरी ।उधर तो मुस्कुराना चल रहा है ।।कहीं तरसी जमीं है आब के बिन ।कहीं मौसम सुहाना चल रहा है ।।तुझे बख्सा खुदा ने हुस्न इतना ।तेरे पीछे ज़माना चल रहा है ।।दिया था जो वसीयत में तुम्हें वो ।अभी तक वह खज़ाना चल रहा है ।।तुम्हारे मैकदे में देखता हूँ ।बहुत पीना पिलाना चल रहा है ।।ग़ज़ल को गुनगुनाने की थी हसरत ।तस्व्वुर में तराना चल रहा है ।।यूँ उसकी…See More
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल: फिर नए सपने दिखाना चुप रहो
"आ0 महेंद्र कुमार साहब तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रिया "
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल: फिर नए सपने दिखाना चुप रहो
"आ0 रवि शुक्ला सर सहमत हूँ आपकी बात से । बन्दूक के स्थान पर हथियार शब्द कैसा रहेगा ।"
yesterday
Mahendra Kumar commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल: फिर नए सपने दिखाना चुप रहो
"आदरणीय नवीन मणि जी ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर."
yesterday
Ravi Shukla commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल: फिर नए सपने दिखाना चुप रहो
"आदरणीय नवीन मणि जी गजल का प्रयास अच्छा हुआ है समर साहब ने इशारा कर दिया है सातवें शेर में दे दी नादान को बंदूक जब वाक्य विन्यास के अनुसार ऐसा होना चाहिए दे दिया बंदूक कुछ असहज लग रहा है "
Monday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल: फिर नए सपने दिखाना चुप रहो
"आ0 तेजवीर सिंह साहब हार्दिक आभार।"
Jan 11
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल: फिर नए सपने दिखाना चुप रहो
"आ0 सुशील शरण साहब हार्दिक आभार। "
Jan 11
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल: फिर नए सपने दिखाना चुप रहो
"आ0 गुरुदेव कबीर सर सादर नमन । आपकी इस्लाह से पूर्णतया सहमत हूँ । बिल्कुल सच कहा आपने रदीफ़ के साथ बिल्कुल इंसाफ नहीं कर सका मैं । आगे इस पर विशेष ध्यान रखूंगा । हार्दिक आभार के साथ नमन।"
Jan 11
PHOOL SINGH commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
""नवीन भाई" अतिसुन्दर रचना बधाई स्वीकारें"
Jan 10
TEJ VEER SINGH commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल: फिर नए सपने दिखाना चुप रहो
"हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी। बहुत सुंदर गज़ल।"
Jan 9
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल: फिर नए सपने दिखाना चुप रहो
"जनाब डॉ. नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,मतला और दूसरा शैर छोड़कर किसी शैर में भी रदीफ़ से इंसाफ़ नहीं हो सका,इस पर विचार करें ।"
Jan 9
Sushil Sarna commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल: फिर नए सपने दिखाना चुप रहो
"मांगते हो मेहनताना चुप रहो ।।वाह आदरणीय नवीन जी। .... एक यथार्थ को आपने बहुत ख़ूबसूरती से ग़ज़ल में उतारा है। ... दिल मुबारकबाद कबूल फरमाएं सर"
Jan 8
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल: फिर नए सपने दिखाना चुप रहो

2122 2122 212आज उनका है ज़माना चुप रहो ।गर लुटे सारा खज़ाना चुप रहो ।।क्या दिया है पांच वर्षों में मुझे ।मांगते हो मेहनताना चुप रहो ।।रोटियों के चंद टुकड़े डालकर ।मेरी गैरत आजमाना चुप रहो ।।मंदिरों मस्ज़िद से उनका वास्ता ।हरकतें हैं वहिसियाना चुप रहों ।।लुट गया जुमलों पे सारा मुल्क जब ।फिर नये सपने दिखाना चुप रहो ।।दांव तो अच्छे चले थे जीत के ।हार पर अब तिलमिलाना चुप रहो ।।दे दिया नादान को बन्दूक जब ।बन गया खुद ही निशाना चुप रहो ।।हम तुम्हारी पढ़ चुके फ़ितरत मियाँ ।अब मुझे अपना बनाना चुप रहो ।।हक़…See More
Jan 8
Md. anis sheikh commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"वाह बहुत खूब नवीन मणि त्रिपाठी जी बहुत अच्छी ग़ज़ल है हर शेर इक मिठास लिए हुए है "
Jan 7

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

ग़ज़ल

1222 1222 122

अभी तक आना जाना चल रहा है ।

कोई रिश्ता पुराना चल रहा है ।।

सुना है शह्र की चर्चा में आगे ।

तुम्हारा ही फ़साना चल रहा है ।।

इधर दिल पर लगी है चोट गहरी ।

उधर तो मुस्कुराना चल रहा है ।।

कहीं तरसी जमीं है आब के बिन ।

कहीं मौसम सुहाना चल रहा है ।।

तुझे बख्सा खुदा ने हुस्न इतना ।

तेरे पीछे ज़माना चल रहा है ।।

दिया था जो वसीयत में तुम्हें वो ।

अभी तक वह खज़ाना चल रहा है…

Continue

Posted on January 16, 2019 at 11:37pm — 2 Comments

ग़ज़ल: फिर नए सपने दिखाना चुप रहो

2122 2122 212

आज उनका है ज़माना चुप रहो ।

गर लुटे सारा खज़ाना चुप रहो ।।

क्या दिया है पांच वर्षों में मुझे ।

मांगते हो मेहनताना चुप रहो ।।

रोटियों के चंद टुकड़े डालकर ।

मेरी गैरत आजमाना चुप रहो ।।

मंदिरों मस्ज़िद से उनका वास्ता ।

हरकतें हैं वहिसियाना चुप रहों ।।

लुट गया जुमलों पे सारा मुल्क जब ।

फिर नये सपने दिखाना चुप रहो ।।

दांव तो अच्छे चले थे जीत के ।

हार पर अब…

Continue

Posted on January 8, 2019 at 12:30pm — 10 Comments

हुस्न कोई नूरानी है



22 22 22 2



शायद    वह    दीवानी   है ।

लड़की   जो  अनजानी  है ।।

दिलवर से मिलना है क्या ।

चाल   बड़ी   मस्तानी  है ।।

इश्क़  हुआ है क्या  उसको ।

आँखों    में   तो   पानी  है ।।

खोए    खोए    रहते    हो ।

यह   भी   इक  नादानी  है ।।…

Continue

Posted on January 6, 2019 at 11:55am — 3 Comments

ग़ज़ल

1222 1222 1222 1222

तरन्नुम बन ज़ुबाँ से जब कभी निकली ग़ज़ल कोई ।

सुनाता ही रहा मुझको मुहब्बत की ग़ज़ल कोई ।।

बहुत चर्चे में है वो आजकल मफ़हूम को लेकर ।

जवां होने लगी फिर से पुरानी सी ग़ज़ल कोई ।।

कभी यूँ मुस्कुरा देना कभी ग़मगीन हो जाना ।

वो छुप छुप कर तुम्हारी जब कभी पढ़ती…

Continue

Posted on January 6, 2019 at 11:21am — 3 Comments

Comment Wall (2 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 6:32am on August 5, 2018, Kishorekant said…

लाजवाब रचना केलिये आपको बहुत बहुत बधाइयाँ आदरणीय नविनमणी त्रिपाठी जी  ,

At 2:14am on May 8, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें!

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

मेरे घर अब उजाला बन के मुझमे कौन रहता है

बह्र 1222-1222-1222-1222बता हर सिम्त तेरा बनके मुझमें कौन रहता है।।तुझे लेकर अकेला बनके मुझमे कौन…See More
5 minutes ago
Samar kabeer posted a blog post

'वतन को आग लगाने की चाल किसकी है'

मफ़ाइलुन फ़इलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन1212     1122     1212      22ग़ज़लउठा है ज़ह्न में सबके सवाल,किसकी हैतू…See More
5 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुचिसंदीप अग्रवालl's blog post हास्य कुंडलिया
"आद0 सुचिसंदीप अग्रवाल सादर अभिवादन। बढिया कुण्डलिया लिखी आपने,, हास्य भी गजब का ओत प्रोत हुआ। अंतिम…"
17 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : अशआर मेरे जिनको सुनाने के लिए हैं
"आद0 महेंद्र जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने। शैर दर शैर दाद के साथ बधाई स्वीकार कीजिये"
22 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दिल ने जिसे बना लिया गुलफाम दोस्तो)
"आद0 तस्दीक अहमद खान जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने। दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।"
23 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post दुर्मिल सवैया
"आद0 फूल सिंह जी सादर अभिवादन। रचना पसंद करने के लिए कोटिश आभार"
26 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : कैसे बनता है कोई शख़्स तमाशा देखो
"आ. भाई महेंद्र जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
34 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post जागो उठो हे लाल तुम (मधुमालती छंद)
"आद0 महेंद्र जी सादर अभिवादन। प्रतिक्रिया से नवाजने के लिए आभारी हूँ।"
5 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दिल ने जिसे बना लिया गुलफाम दोस्तो)
"जनाब महेंद्र कुमार साहिब , ग़ज़ल पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया…"
12 hours ago
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : कैसे बनता है कोई शख़्स तमाशा देखो
"हृदय से आभारी हूँ आदरणीय तेज वीर सिंह जी. बहुत-बहुत शुक्रिया. सादर."
12 hours ago
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : अशआर मेरे जिनको सुनाने के लिए हैं
"लिखना सार्थक रहा आदरणीय अजय जी. बहुत-बहुत शुक्रिया. हार्दिक आभार. सादर."
12 hours ago
Mahendra Kumar commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : अशआर मेरे जिनको सुनाने के लिए हैं
"बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय तेज वीर सिंह जी. हृदय से आभारी हूँ. सादर."
12 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service