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Naveen Mani Tripathi
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Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल -आग हम अंदर लिए हैं

2122 2122 2122 2122वो किसी पाषाण युग के वास्ते अवसर लिए हैं ।देखिये कुछ लोग अपने हाथ मे पत्थर लिए हैं ।।है उन्हें दरकार लाशों की चुनावों में कहीं से ।अम्न के क़ातिल नए अंदाज में ख़ंजर लिए हैं ।।जो बड़े मासूम से दिखते ज़माने को यहां पर ।हां वही नेता सुरक्षा में कई रहबर लिए हैं ।।अब कहाँ इस दौर में जिंदा बची इंसानियत है ।सिर्फ मतलब के लिए नेता यहां खद्दर लिए हैं ।।वो सुबह देते नसीहत भ्रष्टता से दूर रहिये ।बेरहम होकर जो रिश्वत को यहां शब भर लिए हैं ।।ख्वाहिशें इनकी जुदा हैं खूब तानाशाहियां भी ।ये चमन…See More
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - कोई आँचल उड़ान चाहता है
"आ0 कबीर सर सादर नमन । आपका सुझाव ही तो मेरा पुरष्कार है । आपके सुझाव से तो मेरी ग़ज़ल और निखर के आती है । सादर नमन के साथ सादर नमन ।"
21 hours ago
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - कोई आँचल उड़ान चाहता है
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'चुभा देता है जो ख़ंजर ख़ुशी से' इस मिसरे में 'ख़ुशी'शब्द भर्ती का है, इसे बदलने का प्रयास करें,एक सुझाव है,अगर उचित…"
22 hours ago
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल - कोई आँचल उड़ान चाहता है

1222 1222 122तपन को आजमाना चाहता है ।समंदर सूख जाना चाहता है ।।तमन्ना वस्ल की लेकर फिजा में।कोई मुमकिन बहाना चाहता है ।।जमीं की तिश्नगी को देखकर अब ।यहाँ बादल ठिकाना चाहता है ।।तसव्वुर में तेरे मैंने लिखी थी।ग़ज़ल जो गुनगुनाना चाहता है ।।मेरी चाहत मिटा दे शौक से तू ।तुझे सारा ज़माना चाहता है ।।मेरी फ़ुरक़त पे है बेचैन सा वो ।मुझे जो भूल जाना चाहता है ।।चुभा देता है जो ख़ंजर खुशी से ।वही मरहम लगाना चाहता है ।।अदब से दूर जाता एक झोंका ।कोई आँचल उड़ाना चाहता है ।।दिखा देना हमारे ज़ख्म उसको ।वो हम पर…See More
yesterday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post बेसबब यूँ मुस्कुराना बस करो
"आ0 कबीर सर विशेष आभार के साथ नमन ।"
Nov 12
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post बेसबब यूँ मुस्कुराना बस करो
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । तीसरे शैए के सानी में ऐब-ए-तनाफ़ुर देखिये । आख़री शैर में शुतरगुर्बा दोष है,देखिये ।"
Nov 12
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post आप से क्या मुहब्बत हुई
"संख्या बढ़ाने के लिए शब्द है "इज़ाफ़ा""
Nov 12
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post आप से क्या मुहब्बत हुई
"'दुश्मनों की इज़ाफ़त हुई' आपने 'इज़ाफ़त'का ये अर्थ लिया है कि दुश्मनों की तादाद(संख्या)बढ़ गई, जबकि "इज़ाफ़त"का सही अर्थ है,निस्बत,लगाव,मेल,एक कलमे से दूसरे कलमे का लगाव जो फ़ारसी और अरबी अल्फ़ाज़ में मज़ाफ़ के नीचे…"
Nov 12
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post आप से क्या मुहब्बत हुई
"हार्दिक बधाई।"
Nov 12
Dr Ashutosh Mishra commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल: अंगारो से प्रीत निभाया करता हूँ
"आदरणीय नवीन जी हर शेर उम्दा है कमाल की इस प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई सादर "
Nov 11
Dr Ashutosh Mishra commented on Naveen Mani Tripathi's blog post आप से क्या मुहब्बत हुई
"आदरणीय नवीन मणि जी इस शानदार रचना पर हार्दिक बधाई सादर "
Nov 11
Naveen Mani Tripathi posted blog posts
Nov 11
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post आप से क्या मुहब्बत हुई
"आ0 कबीर सर इज़ाफ़त शब्द में मुझे अत काफिया नज़र आता है । काफ़िया कैसे गलत है कृपया शंका को दूर करने की कृपा कीजिये ।"
Nov 10
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post आप से क्या मुहब्बत हुई
"आ0 गुरुप्रीत सिंह साहब सप्रेम आभार"
Nov 10
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post आप से क्या मुहब्बत हुई
"आ0 मुहम्मद आरिफ साहब सादर आभार ।"
Nov 10
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post आप से क्या मुहब्बत हुई
"आ0 अफरोज शहर साहब सादर आभार ।"
Nov 10

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

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ग़ज़ल -आग हम अंदर लिए हैं

2122 2122 2122 2122

वो किसी पाषाण युग के वास्ते अवसर लिए हैं ।

देखिये कुछ लोग अपने हाथ मे पत्थर लिए हैं ।।



है उन्हें दरकार लाशों की चुनावों में कहीं से ।

अम्न के क़ातिल नए अंदाज में ख़ंजर लिए हैं ।।



जो बड़े मासूम से दिखते ज़माने को यहां पर ।

हां वही नेता सुरक्षा में कई रहबर लिए हैं ।।



अब कहाँ इस दौर में जिंदा बची इंसानियत है ।

सिर्फ मतलब के लिए नेता यहां खद्दर लिए हैं ।।



वो सुबह देते नसीहत भ्रष्टता से दूर रहिये ।

बेरहम होकर… Continue

Posted on November 23, 2017 at 12:07am

ग़ज़ल - कोई आँचल उड़ान चाहता है

1222 1222 122

तपन को आजमाना चाहता है ।

समंदर सूख जाना चाहता है ।।



तमन्ना वस्ल की लेकर फिजा में।

कोई मुमकिन बहाना चाहता है ।।



जमीं की तिश्नगी को देखकर अब ।

यहाँ बादल ठिकाना चाहता है ।।



तसव्वुर में तेरे मैंने लिखी थी।

ग़ज़ल जो गुनगुनाना चाहता है ।।



मेरी चाहत मिटा दे शौक से तू ।

तुझे सारा ज़माना चाहता है ।।



मेरी फ़ुरक़त पे है बेचैन सा वो ।

मुझे जो भूल जाना चाहता है ।।



चुभा देता है जो ख़ंजर खुशी से… Continue

Posted on November 21, 2017 at 11:00pm — 2 Comments

बेसबब यूँ मुस्कुराना बस करो

2122 2122 212

हो गई पूरी तमन्ना बस करो ।

बेसबब यूँ मुस्कुराना बस करो ।।



फिक्र किसको है यहां इंसान की ।

फिर कोई ताज़ा बहाना , बस करो ।।



होश में मिलते कहाँ मुद्दत से तुम।

इस तरह से दिल लगाना, बस करो ।।



बेवफा की हो चुकी खातिर बहुत ।।

राह में पलकें बिछाना, बस करो ।।



घर मे कंगाली का आलम देखिये ।

गैर पर सब कुछ लुटाना ,बस करो ।।



रंजिशों से कौन जीता इश्क़ में।हार कर अब तिलमिलाना, बस करो ।।





कर गई दीवानगी… Continue

Posted on November 10, 2017 at 5:11pm — 2 Comments

आप से क्या मुहब्बत हुई

आप से क्या मुहब्बत हुई ।

रात भी अब कयामत हुई ।।



जब भी आए तेरे दर पे हम ।।

दुश्मनों की इजाफ़त हुई ।।



हुस्न था आपका कुछ अलग ।

आप ही की हुकूमत हुई ।।



यूँ संवरते गए आप भी ।

हुस्न की जब इनायत हुई ।।



अब चले आइये बज्म में ।

आपकी अब जरूरत हुई ।।



जाइये रूठ कर मत कहीं ।

आपसे कब अदावत हुई ।।



है तकाजा यहां उम्र का ।

आईनों की हिदायत हुई ।।



कुछ अदाएं मचलने लगीं ।

आंख से जब हिमाकत हुई… Continue

Posted on November 10, 2017 at 12:26pm — 13 Comments

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मिथिलेश वामनकर
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