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Naveen Mani Tripathi
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  • Ajay Tiwari
 

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Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब राज़ नावादवी साहब बहुत बहुत शुक्रियः।"
20 hours ago
राज़ नवादवी commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी साहिब, आदाब, सुन्दर ग़ज़ल की प्रस्तुति पे बधाई स्वीकार करें. सादर "
20 hours ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 कबीर सर सादर नमन के साथ बहुत बहुत आभार ।"
Friday
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । ' कोई ले गया मेरा चाँद है मेरे आसमाँ से उतार कर' इस मिसरे को यूं कर लें :- 'कोई ले गया मेरे चाँद को मेरे आसमाँ से उतार कर'"
Friday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 ज़नाब तेजवीर सिंह जी तहेदिल से बहुत बहुत शुक्रिया।"
Friday
TEJ VEER SINGH commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"हार्दिक बधाई आदरणीय नवीन मणि जी।बेहतरीन गज़ल। नये किस्म का है ये शह्र भी नए आशिकों का ये दौर है ।कहीं लग न जाये नज़र तुम्हें न चलो यूँ जुल्फें सँवार कर।।"
Friday
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

11212 11212. 11212. 11212हुई तीरगी की सियासतें उसे बारहा यूँ निहार कर ।कोई ले गया मेरा चाँद है मेरे आसमाँ से उतार कर ।।अभी क्या करेगा तू जान के मेरी ख्वाहिशों का ये फ़लसफा । जरा तिश्नगी की खबर भी कर कोई शाम एक गुज़ार कर ।।मेरी हर वफ़ा के जवाब में है सिला मिला मुझे हिज्र का । ये हयात गुज़री तड़प तड़प गये दर्द तुम जो उभार कर ।।ये शबाब है तेरे हुस्न का या नज़र का मेरे फितूर है ।खुले मैकदे तो बुला रहे तेरे तिश्ना लब को पुकार कर ।।हैं विरासतों में तमाम गम मेरे सब्र का न ले इम्तिहाँ ।जरा मुस्कुरा के तू पास…See More
Thursday
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post कोई ले गया मेरा चाँद है मेरे आसमाँ से उतार कर
"सम्भवतः ग़ज़ल पढ़ने लायक नही थी । इसलिए गुरुदेव ने ध्यान नही दिया ग़ज़ल इस पटल से वापस ले रहा हूँ ।"
Nov 4
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post हम देखते ही रह गए दिल का मकाँ जलता हुआ
"आदरणीय त्रिपाठी बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है..बधाई..मैं कल से आपका एक गीत गुनगुना रहा हूँ.."पल दो पल के मीत वेदना क्या समझेंगे" बहुत ही संवेदन भावों से परिपूर्ण गीत है।"
Oct 31
Naveen Mani Tripathi posted blog posts
Oct 30
राज़ नवादवी commented on Naveen Mani Tripathi's blog post हम देखते ही रह गए दिल का मकाँ जलता हुआ
"आदरणीय नवीन मणि त्रिपाठी जी, आदाब, अभी ग़ज़ल पोस्ट नहीं की है. करने पे बताऊंगा. एफबी का लिंक भेजने का शुक्रिया, रिक्वेस्ट भेज दी है, कृपया देख लें. सादर. "
Oct 30
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post हम देखते ही रह गए दिल का मकाँ जलता हुआ
"आ. भाई नवीन जी, अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
Oct 30
Naveen Mani Tripathi commented on TEJ VEER SINGH's blog post निर्जला व्रत -लघुकथा -
"आ0 तेजवीर सिंह साहब अत्यंत सुंदर कथा हेतु आपको बधाई ।"
Oct 30
Naveen Mani Tripathi commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल- बलराम धाकड़ (वो मेरे साथ था, मेरा शिकार होने तक)
"आ0 बलराम धाकड़ जी अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई ।"
Oct 30
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post हम देखते ही रह गए दिल का मकाँ जलता हुआ
"आ0 राज नावादवी साहब आपकी ग़ज़ल खोजा पर मिली नहीं । सम्भवतः अभी आपने पोस्ट नहीं की है ।  कृपया आप यहां भी भेज सकते हैं  https://www.facebook.com/naveen.tripathi.161"
Oct 30
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post हम देखते ही रह गए दिल का मकाँ जलता हुआ
"आ0 विवेक राज साहब हार्दिक आभार ।"
Oct 30

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

ग़ज़ल

11212 11212. 11212. 11212

हुई तीरगी की सियासतें उसे बारहा यूँ निहार कर ।

कोई ले गया मेरा चाँद है मेरे आसमाँ से उतार कर ।।

अभी क्या करेगा तू जान के मेरी ख्वाहिशों का ये फ़लसफा ।

जरा तिश्नगी की खबर भी कर कोई शाम एक गुज़ार कर ।।

मेरी हर वफ़ा के जवाब में है सिला मिला मुझे हिज्र का ।

ये हयात गुज़री तड़प तड़प गये दर्द तुम जो उभार कर ।।

ये शबाब है तेरे हुस्न का या नज़र का मेरे फितूर है ।

खुले मैकदे तो बुला रहे तेरे तिश्ना लब को पुकार कर…

Continue

Posted on November 15, 2018 at 12:17pm — 6 Comments

कोई ले गया मेरा चाँद है मेरे आसमाँ से उतार कर

11212 11212. 11212. 11212

हुई तीरगी की सियासतें उसे बारहा यूँ निहार कर ।

कोई ले गया मेरा चाँद है मेरे आसमाँ से उतार कर ।।

अभी क्या करेगा तू जान के मेरी ख्वाहिशों का ये फ़लसफा । जरा तिश्नगी की खबर भी कर कोई शाम एक गुज़ार कर ।।

मेरी हर वफ़ा के जवाब में है सिला मिला मुझे हिज्र का । ये हयात गुज़री तड़प तड़प गये दर्द तुम जो उभार कर ।।

ये शबाब है तेरे हुस्न का या नज़र का मेरे फितूर है ।

खुले मैकदे तो बुला रहे तेरे तिश्ना लब…

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Posted on October 30, 2018 at 12:30pm — 1 Comment

हम देखते ही रह गए दिल का मकाँ जलता हुआ

2212 2212 2212 2212

आसां कहाँ यह इश्क था मत पूछिए क्या क्या हुआ ।

हम देखते ही रह गए दिल का मकाँ  जलता हुआ ।।

हैरान है पूरा नगर कुछ तो है तेरी भी ख़ता ।

आखिर मुहब्बत पर तेरी क्यों आजकल पहरा हुआ ।।

पूरी कसक तो रह गयी इस तिश्नगी के दौर में ।

लौटा तेरी महफ़िल से वो फिर हाथ को मलता हुआ ।।

दरिया से…

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Posted on October 27, 2018 at 6:00pm — 18 Comments

ग़ज़ल



1222 1222 1222 1222



महल टूटा जो ख्वाबों का तो फिर बिखरा नज़र आया ।

गुलिस्ताँ जिसको समझा था वही सहरा नजर आया ।।1

बहुत सहमा है तब से मुल्क फिर खामोश है मंजर।

उतरते ही मुखौटा जब तेरा चेहरा नजर आया ।।2

अजब क़ानून है इनका मिली है छूट रहजन को ।

मगर ईमानदारों पर बड़ा पहरा नज़र आया ।।3

सियासत छीन लेती होनहारों के निवालों को ।

हमारा दर्द कब उनको यहाँ गहरा नजर आया ।।4

वो भूँखा चीखता हक माँगता मरता रहा लेकिन…

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Posted on October 25, 2018 at 10:01pm — 13 Comments

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At 6:32am on August 5, 2018, Kishorekant said…

लाजवाब रचना केलिये आपको बहुत बहुत बधाइयाँ आदरणीय नविनमणी त्रिपाठी जी  ,

At 2:14am on May 8, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें!

 
 
 

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