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Naveen Mani Tripathi
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  • Ajay Tiwari
 

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Ram Awadh VIshwakarma commented on Naveen Mani Tripathi's blog post लेकिन कज़ा के बाद से मक़तल उदास है
"आदर्णीय बहुत खूबसूरत.ग़ज़ल आपने कही है । हार्दिक बधाई।"
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post लेकिन कज़ा के बाद से मक़तल उदास है
"सुंदर गजल हुयी है हार्दिक बधाई।"
Monday
Shyam Narain Verma commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ख़ास ये कैसी गुज़ारी जिंदगी
"लाजवाब रचना है बहुत बहुत बधाई आपको"
Monday
Naveen Mani Tripathi posted blog posts
Monday
KALPANA BHATT ('रौनक़') commented on Naveen Mani Tripathi's blog post याद आऊं तो निशानी देखना
"सुंदर ग़ज़ल हुई है आदरणीय  नवीन मणि त्रिपाठी जी| हार्दिक बधाई|"
Sunday
narendrasinh chauhan commented on Naveen Mani Tripathi's blog post याद आऊं तो निशानी देखना
"सुन्दर रचना"
Sunday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Naveen Mani Tripathi's blog post याद आऊं तो निशानी देखना
"प्यारी सी बह्र पर बहुत प्यारी सी ग़ज़ल के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब नवीन मणि त्रिपाठी साहिब।"
Sunday
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

याद आऊं तो निशानी देखना

2122 2122 212छेड़ कर उसकी कहानी देखना ।फिर तबाही आंसुओं की देखना ।।यूँ ग़ज़ल लिक्खी बहुत उनके लिए ।लिख रहा हूँ अब रुबाई देखना ।।अब नुमाइश बन्द कर दो हुस्न की ।हैं कई शातिर शिकारी देखना ।।हिज्र ने हंसकर कहा मुझसे यही ।वस्ल की तुम बेकरारी देखना ।।वह बहक जाएगा इतना मान लो ।एक दिन फिर जग हँसाई देखना ।।तिश्नगी झुक कर बुझा देती है वो ।बा अदब होती सुराही देखना ।।मांगता हूँ इश्क़ की पहली नज़र ।तुम भी अपनी मिह्रबानी देखना ।।छोड़ आया दिल तुम्हारी बज़्म में ।याद आऊं तो निशानी देखना ।।हुस्न पर ठहरी अना कहने लगी…See More
Sunday
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

लेकिन कज़ा के बाद से मक़तल उदास है

221 2121 1221 212आया सँवर के चाँद चमन में उजास है ।बारिश ख़ुशी की हो गयी भीगा लिबास है ।।कसिए न आप तंज यहां सच के नाम पर ।लहजा बता रहा है कि दिल में खटास है ।।मिलता नशे में चूर वो कंगाल आदमी ।शायद खुदा ही जाम से भरता गिलास है ।।उल्फत में हो गए हैं फ़ना मत कहें हुजूर ।जिन्दा अभी तो आपका होशो हवास है ।पीकर तमाम रिन्द मिले तिश्नगी के साथ ।साकी तेरी शराब में कुछ बात ख़ास है ।हुस्नो अदा के ताज पे चर्चा बहुत रही ।अक्सर तेरे रसूक पे लगता कयास है ।।खुशबू सी आ रही है मेरे इस दयार में ।महबूब मेरा आज कहीं आस…See More
May 18
Dr Ashutosh Mishra commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय नवीन जी बढ़िया ग़ज़ल हुयी है . इस रचना के लिए हार्दिक बधाई सादर "
May 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"बहुत खूब..."
May 17
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

221 2121 1221 212सब कुछ है मेरे पास मगर बेजुबान हूँ ।क़ानून तेरे जुल्म का मैं इक निशान हूँ ।।क्यूँ माँगते समानता का हक़ यहां जनाब ।भारत की राजनीति का मैं संविधान हूँ ।।उनसे थी कुछ उमीद मुख़ालिफ़ वही मिले ।जिनके लिए मैं वोट का ताजा रुझान हूँ ।।कुनबे में आ चुका है यहाँ भुखमरी का दौर ।क़ानून की निगाह में ऊंचा मकान हूँ ।।गुंजाइशें बढ़ीं हैं जमीं पर गिरेंगे आप ।जबसे कहा है आपने मैं आसमान हूँ ।।सदियों से गन्ध लोग मिटाते रहे मेरी ।जिनको खबर है देश का मैं ज़ाफरान हूँ ।।हालात पे न तंज अभी कीजिये हुजूर ।मैं…See More
May 16
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल कहते हैं क्यों लोग सताने आया हूँ
"आ. भाई नवीन जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
May 14
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । तीसरे शैर में उर्दू के हिसाब से देखें तो क़ाफ़िया दोष है । चौथे शैर में भी 'होश-ओ-हवास' बहुवचन है, इसलिये रदीफ़ 'है' की बजाय "हैं" हो रही…"
May 13
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"जनाव नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है,बधाई स्वीकार करें । 5वें और छटे शैर में शुतरगुर्बा का दोष है,देखें । 17 मई से ओबीओ से एक महीने का अवकाश ले रहा हूँ,रमज़ान का पवित्र महीना शुरू हो रहा है ।"
May 13
Harash Mahajan commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"एक सुंदर पेशकश आदरणीय मणि जी । हरदिल बधाई स्वीकार करें ।"
May 13

Profile Information

Gender
Male
City State
Kanpur , Uttar Pradesh
Native Place
Basti
Profession
Govt. Service
About me
I am a poet and trained astrologer. Write geet and ghazal.

Naveen Mani Tripathi's Blog

ख़ास ये कैसी गुज़ारी जिंदगी



2122 2122 212

आँख   मुद्दत   से  चुराती   जिंदगी ।

लग  रही थोड़ी  ख़फ़ा सी जिंदगी ।।

तोड़ती  अक्सर  हमारी  ख्वाहिशें ।

हो  गयी  कितनी सियासी जिंदगी ।।

सिर्फ मतलब पर किया सज़दा उसे ।

जी   रहे   हम  बेनमाज़ी  जिंदगी ।।

रोटियों के फेर में कुछ इस तरह ।

मुद्दतों तक तिलमिलाई जिंदगी ।।

हम जमीं  पर  पैर पड़ते  रो  पड़े ।

दे…

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Posted on May 20, 2018 at 8:28pm — 1 Comment

याद आऊं तो निशानी देखना

2122 2122 212

छेड़ कर उसकी कहानी देखना ।

फिर तबाही आंसुओं की देखना ।।

यूँ ग़ज़ल लिक्खी बहुत उनके लिए ।

लिख रहा हूँ अब रुबाई देखना ।।

अब नुमाइश बन्द कर दो हुस्न की ।

हैं कई शातिर शिकारी देखना ।।

हिज्र ने हंसकर कहा मुझसे यही ।

वस्ल की तुम बेकरारी देखना ।।

वह बहक जाएगा इतना मान लो ।

एक दिन फिर जग हँसाई देखना ।।

तिश्नगी झुक कर बुझा देती है वो ।

बा…

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Posted on May 19, 2018 at 10:30pm — 3 Comments

लेकिन कज़ा के बाद से मक़तल उदास है

221 2121 1221 212



आया सँवर के चाँद चमन में उजास है ।

बारिश ख़ुशी की हो गयी भीगा लिबास है ।।

कसिए न आप तंज यहां सच के नाम पर ।

लहजा बता रहा है कि दिल में खटास है ।।

मिलता नशे में चूर वो कंगाल आदमी ।

शायद खुदा ही जाम से भरता गिलास है ।।

उल्फत में हो गए हैं फ़ना मत कहें हुजूर ।

जिन्दा अभी तो आपका होशो हवास है ।

पीकर तमाम रिन्द मिले तिश्नगी के साथ ।

साकी तेरी शराब में कुछ बात…

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Posted on May 17, 2018 at 11:24pm — 2 Comments

ग़ज़ल

221 2121 1221 212



सब कुछ है मेरे पास मगर बेजुबान हूँ ।

क़ानून तेरे जुल्म का मैं इक निशान हूँ ।।

क्यूँ माँगते समानता का हक़ यहां जनाब ।

भारत की राजनीति का मैं संविधान हूँ ।।

उनसे थी कुछ उमीद मुख़ालिफ़ वही मिले ।

जिनके लिए मैं वोट का ताजा रुझान हूँ ।।

कुनबे में आ चुका है यहाँ भुखमरी का दौर ।

क़ानून की निगाह में ऊंचा मकान हूँ ।।

गुंजाइशें बढ़ीं हैं जमीं पर गिरेंगे आप ।

जबसे कहा…

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Posted on May 16, 2018 at 5:49pm — 2 Comments

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At 2:14am on May 8, 2015,
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